Wo Choda Din - 2
ओपन रिलेशनशिप स्टोरी में मेरे पति की गैरमौजूदगी में मुझे सेक्स की जरूरत महसूस हुई तो मैंने अपने पति से कहा. उन्होंने किसी भी मर्द को घर बुलाकर चुदाई कर लेने की राय दी.
कहानी का पिछला भाग:
पति पत्नी और वो की वासना
अब आगे ओपन रिलेशनशिप स्टोरी:
रात को मुझे नींद बहुत अच्छी आई।
मुझे राजीव की कमी एक बार भी महसूस नहीं हुई।
सुबह मेरी आंख अपने समय पर खुली।
मैं नहा धोकर तैयार हुई और अपनी एक्टिवा उठाकर ऑफिस के लिए निकल गई.
मेरे ऑफिस में काम इतना होता है कि सारा दिन कैसे बीत जाता है, पता ही नहीं चलता।
शाम को 6:00 बजे जब मैं ऑफिस से घर के लिए निकली तो देखा कि बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी।
मैंने अपनी एक्टिवा को ऑफिस के अंदर ही लगाया और गौरव को गाड़ी लेकर मेरे ऑफिस के पास आने को कहा.
गौरव मेरे बेटे चेतन का बचपन का मित्र है।
जब से मेरा बेटा नोएडा इंजीनियरिंग कॉलेज में गया है। तब से गौरव ही मेरे घर के छोटे-बड़े कामों में मेरा हाथ बंटाता है।
गौरव यहां अपने पिताजी के साथ उनकी दुकान पर बैठता है।
उसका घर भी मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है।
वो अपने बड़ों की तरह हमारा सम्मान भी करता है।
तो छोटे-छोटे कामों के लिए मैं अक्सर गौरव को ही बुलाती हूं।
मेरी एक कॉल पर ही गौरव तुरंत अपनी गाड़ी उठा कर सामने आ गया।
मैं ऑफिस से निकलकर सीधे गौरव की गाड़ी में बैठी और घर आ गई।
गौरव मुझे छोड़कर अपने घर चला गया।
घर आकर मैंने सबसे पहले अपने कपड़े बदले और अपने नित्य कर्म तेजी से निपटाने लगी।
दिन तो धीरे-धीरे बीत गया, पर जैसे ही रात के 8:00 बजने लगे, मुझे राजीव की जरूरत महसूस होने लगी।
आखिर पिछले 20 साल से हम दोनों एक दूसरे के साथ थे।
एक दूसरे के बिना रहना थोड़ा तो मुश्किल था ही।
मैंने राजीव को एक कॉल की।
उन्होने कॉल काट दी और मुझे व्हाट्सएप पर मैसेज किया- बिजी हूं. 2 घंटे बाद मिलते हैं।
डिनर करके अंतर्वासना की कहानी पढ़ते पढ़ते मैंने रात को 10 बजे तक इंतजार किया।
10 बजते ही मैंने फिर राजीव को व्हाट्सएप पर मैसेज किया, तब राजीव का कॉल आया।
हम दोनों ने एक दूसरे से बात की और अपनी अपनी दिनचर्या बताई।
राजीव ने मुझसे पूछा, “रात को नींद कैसी आई?”
तो जवाब में मैंने कहा, “मुझे तो अच्छी नींद आई। आप अपना बताइए?”
राजीव ने हंसते हुए कहा, “यार! रात को सोने का मन ही नहीं था, पर फ्लाइट की थकान और आज के काम की वजह से नींद लेनी जरूरी थी। इसलिए हम लोग सो गए थे।”
मैंने राजीव से अपना दर्द बिना किसी झिझक के बयां किया।
मैंने कहा, “तुम तो वहां गुलछर्रे उड़ा रहे हो, पर यार, मेरे लिए बड़ी समस्या है। मुझे तुम्हारे बिना रहने की आदत नहीं है। दिन तो किसी तरह कट गया पर जैसे-जैसे रात आई, मुझे फिर से तुम्हारी कमी महसूस होने लगी।”
राजीव ने कहा, “कोई बात नहीं डार्लिंग, बस 13 दिन और! फिर भी अगर ऐसी समस्या है तो तू भी अपने लिए कोई इंतजाम कर ले जिसको मन हो बुला ले।”
मैंने कहा, “अरे यार! सबको मालूम है तुम यहां नहीं हो। अगर ऐसे में कोई भी पुरुष घर में आएगा तो आसपास वालों को शक पैदा होगा। वो ठीक नहीं है। इसीलिए ऐसे किसी अनजान को बुलाना ठीक नहीं। तुम तो दूसरे शहर में हो इसीलिए वहां क्या कर रहे हो किसी को पता नहीं है, पर यहां अपने शहर में बहुत सोच समझकर चलना पड़ता है।“
“हम्म” राजीव ने जवाब दिया।
कुछ सेकंड सोचकर राजीव ने कहा, “एक तरीका है।”
मैंने पूछा, “क्या?”
तो राजीव ने कहा, “जोमैटो से खाने के लिए कुछ ऑर्डर करो. कभी-कभी जोमैटो पर बहुत अच्छे लड़के आते हैं। अगर कोई तुम्हारी पसंद का लड़का मिल जाए तो उसको अंदर खींच लेना, कोई शक भी नहीं करेगा और तुम्हारा काम भी हो जाएगा।“
मुझे राजीव का ये आइडिया अच्छा लगा।
इससे मेरे बदन की कामाग्नि भी शांत हो जाएगी और बाहर किसी को पता कि नहीं चलेगा।
मैंने तुरंत अपने लिए जोमैटो से कुछ सामान ऑर्डर किया।
सिर्फ 10 मिनट में ही मेरे पास जोमैटो की डिलीवरी बॉय का कॉल आ गया.
मैंने खिड़की खोलकर देखा सामने एक लगभग 35 वर्षीय व्यक्ति खड़ा था जो देखने में काफी आकर्षक था।
मैं बहुत खुश हो गई।
मुझे लगा कि ईश्वर ने मेरी सुन ली।
मैंने उस व्यक्ति को अपने गेट पर आने को कहा और बहुत तेजी से कपड़े चेंज करके एक सेक्सी सी नाइटी पहनकर अपने दरवाजे पर पहुंची।
वो व्यक्ति मेरे दरवाजे पर आ चुका था।
मैंने जैसे ही दरवाजा खोला, वो भी मुझे अवाक से देखता रह गया।
शायद उसने मेरे इस कातिल स्वरूप की उम्मीद नहीं की थी।
मेरी टांगों के बीच के हिस्से में उसको देखकर हल्की-हल्की हलचल होने लगी.
और सबसे बड़ा फायदा ये हुआ कि अभी मैं उससे डिलीवरी ले ही रही थी कि तभी बाहर फिर से बारिश शुरू हो गई.
अरे भई! ये तो मेरी लॉटरी लग गई।
मैंने उसको कहा, “बाहर बारिश तेज हो गई है तुम अंदर आकर 10 मिनट आराम कर लो, बारिश रुक जाए तो चले जाना।
वो बोला, “नहीं मैडम, मैं यही ठीक हूँ।”
वो शायद मेरे घर में आने से हिचक रहा था.
मैंने जानबूझकर उसका हाथ पकड़ा और उसको अंदर खींचने की कोशिश की.
पर शायद मेरी इस हरकत से वो डर गया उसने एकदम झटककर मुझे अपना हाथ छुड़ाया और लगभग भागता हुआ बोला, “नहीं मैडम! मुझे जरूरत नहीं है।”
मुझे उस आदमी से इस तरह की हरकत की उम्मीद नहीं थी।
मैं तो समझ ही नहीं पाई कि क्या करूं?
और वह भागता हुआ मेरे सामने ही अपनी मोटरसाइकिल पर बैठकर चला गया।
मेरे अरमानों पर तो जैसे पानी फिर गया।
मैं अंदर से खीझ गई।
मुझे अपने प्रति इस तरह के बर्ताव की उम्मीद नहीं थी.
मुझे तो लगा था कि वो मेरे इशारे से ही अंदर चला आएगा और फिर खुलकर मेरे बदन से खेलेगा।
मेरे साथ जो हुआ वह उम्मीद से परे था।
मैंने फिर दुखी होकर राजीव को व्हाट्सएप पर कॉल किया और उनको सारी घटना बताई।
मेरी बात सुनकर राजीव हंसने लगे और बोले, अरे डार्लिंग! वो शायद तुझे देखकर डर गया। उसे लगा कहीं तू उसका बलात्कार न कर ले। इसीलिए भाग गया. पर कोई बात नहीं, एक दिन रुक मैं कुछ और सोचता हूं।”
मैंने पूछा, “पर आज की रात कैसे बिताऊँ? तुम्हें पता है मुझे तो रोज खुराक चाहिए।”
राजीव ने कहा, “कोई बात नहीं, आधा घंटा रुक, बुला रहा हूं शालिनी को! फिर कल की तरह वीडियो कॉल ही करते हैं।”
मैंने खिसिया कर कहा, “तुम्हारा मतलब है मैं आज भी सिर्फ बैगन से काम चलाऊँ? शर्म तो नहीं आ रही होगी बोलते हुए?”
मेरी झुंझलाहट देखकर राजीव हंसते हुए बोले, “अच्छा बाबा, कल तुम्हारे लिए पक्का कोई इंतजाम कर दूंगा. बस आज का मौका दे दो।”
मैंने कॉल कट की और नहाने चली गई।
रात को करीब 11:30 बजे राजीव की कॉल आई.
पर मैंने गुस्से मे कॉल उठाया ही नहीं और सो गई।
अगली सुबह मैं फिर से फ्रेश उठी.
पर कुछ भी काम करने का मन नहीं था; ऑफिस जाने का भी मन नहीं था.
मैंने कॉल करके अपने मैनेजर रोहन को घर ही बुला लिया, अपनी एक्टिवा लाने को कहा।
कुछ ही देर में मेरी एक्टिवा लेकर रोहन मेरे घर ही आ गया.
मैंने रोहन को दिन भर के लिए काम समझाया।
एक्टिवा अपने घर पर ही रख ली, रोहन को वापस भेज दिया।
अब मुझे किसी भी परिस्थिति में अपने लिए किसी एक ऐसे पुरुष का इंतजाम करना था जो अगले कुछ दिन मेरी कामवासना मिटा सके।
पर ये भी ध्यान रखना था कि सामाजिक रूप से मेरी प्रतिष्ठा को कोई हानि ना हो।
मैं चारों तरफ दिमाग दौड़ाने लगी और जितने भी लोग मेरी नजर में थे सबके बारे में सोचने लगी।
तभी मेरे घर की घंटी बजी.
मैंने खिड़की से झांककर देखा तो बाहर मुख्य द्वार पर दूध वाला खड़ा था।
यूं तो देखने में मेरा दूध वाला भी ठीक-ठाक ही था पर उसके साथ यह सब करने की मेरी हिम्मत नहीं थी.
फिर भी जब मैं दूध का बर्तन लेकर उससे दूध लेने गई तो अनायास ही मेरी नजर उसके पजामे के आगे के उस भाग पर चली गई.
पर वहां तो कुछ भी नजर नहीं आ रहा था, सब कुछ ढीला था।
मैंने अपने दिल पर काबू किया और दूध लेकर अंदर आ गई, सोचने लगी कि क्या किया जाए?
पहले तो मन हुआ कि खा पीकर सीधे ऑफिस चली जाती हूं. कम से कम किसी तरह मेरा टाइम तो गुजर जाएगा.
फिर दिल ने कहा कि ऑफिस में तो काम में मन नहीं लगेगा उससे अच्छा है के घर पर ही रख कर कोई पोर्न देख ली जाए।
मेरे दिमाग में दूसरा निर्णय स्वीकार किया और मैंने घर पर ही रुकने का फैसला किया।
लैपटॉप उठाकर मैं अलग-अलग साइट पर अच्छी सी पोर्न तलाशने लगी।
तभी बाहर सब्जी वाले की आवाज सुनाई दी।
न चाहते हुए भी मेरी नजर खिड़की की तरह उठ गई।
सब्जी वाले को बहुत गौर से देखा, मन हां या ना की उलझन में ही उलझा था।
फिर भी सोचा कि क्या सब्जी लूं और दरवाजे पर जाकर सब्जी वाले को बुलाया।
मैंने कुछ गाजर, खीरे और बाकी कुछ सब्जियाँ ली।
अनायास ही सब्जी वाले की पैन्ट के आगे के उस भाग पर नजर चली गई।
वहां भी कोई हरकत नहीं थी।
मुझे लगा क्या मेरा यौवन अब किसी काम का नहीं रहा।
किसी का भी मुझ में कोई इंटरेस्ट नजर नहीं आ रहा था।
मैं बहुत परेशान महसूस करने लगी।
दिमाग में वही सब चल रहा था, बहुत ढूंढने पर मुझे मेरी पसंद की कुछ पोर्न मिल गई।
मैंने अपना ध्यान उधर लगाया और लैपटॉप चला कर उसके सामने नंगी होकर बैठ गई।
पोर्न देखते देखते ही मैं अपने बदन के साथ खेल रही थी.
कुछ देर बाद ही मुझे थकान महसूस होने लगी और मैं इस अवस्था में अपने बिस्तर पर सो गई.
मेरी नींद भी काफी लंबी थी.
शाम को करीब 4:00 बजे मेरी आंख खुली. मैंने जैसे ही घड़ी देखी तो मैं झटके से बिस्तर छोड़ कर उठी।
कपड़े उठाने और नहाने चली गई.
मैंने सोचा कि बाजार के ही कुछ काम निपटाए जाएं. कम से काम मेरा ध्यान दूसरी तरफ बंटेगा।
मैंने तुरंत गौरव को फोन किया और अपने साथ बाजार चलने के लिए कहा.
उसने जवाब दिया, “आंटी अभी तो दुकान पर बहुत ग्राहक हैं, अगर आप चाहो तो 7 के आसपास चल सकते हैं।”
“ठीक है।” बोलकर मैंने फोन काट दिया।
अपना फालतू टाइम पास करने के लिए मैंने अपनी पुरानी मित्र और अपने सभी कुकर्मों की साथी कविता को फोन मिलाया, उसको अपने घर आने को बोला।
10 मिनट में कविता मेरे घर पहुंच गई।
मैं कविता से गप्पें मारने लगी।
उसको अपनी परेशानी से भी अवगत करवाया।
कविता बोली, “यार शशि पुरुष की जरूरत तो बहुत दिनों से मुझे भी महसूस हो रही है। पर साला विश्वास का आदमी मिलता नहीं. और अनजान से बहुत डर लगता है। तुझे पता है कि मेरे हस्बैंड तो अब कुछ करते नहीं।”
मुझे तो लगा था कि मैं कविता से अपनी परेशानी शेयर करूंगी तो शायद कुछ समाधान मिल जाए.
पर वो तो मुझे पहले ही यही परेशानी खुद लिए बैठी है; मुझे क्या समाधान देगी।
मैं भी चुप हो गई.
किसी तरह टाइम पास हो गया.
6:30 बजे मैंने कविता को बताया कि मुझे बाजार जाना है।
कविता ने कहा, “मुझे भी अब घर जाना है।”
कविता अपने घर के लिए निकल गई और मैंने बिल्कुल ढंग से भारतीय नारी की तरह अच्छे कपड़े पहने और बाजार जाने के लिए तैयार हो गई.
क्योंकि बाजार मुझे गौरव के साथ जाना था और गौरव मेरे बेटे का दोस्त है तो उसके सामने में कोई ऐसी हरकत नहीं करना चाहती थी कि उसकी नजर में मेरा खराब इंप्रेशन हो।
ठीक 7 बजे गौरव ने मेरे घर की घंटी बजाई.
गौरव अपनी बाइक पर आया था।
मैं बाइक पर बैठ गई और बाजार के लिए निकल गई.
करीब एक घंटा बाजार में खरीदारी करने के बाद गौरव ने मुझे घर छोड़ दिया और नमस्ते करके अपने घर के लिए चला गया।
यह कहानी लम्बी चलेगी.
ओपन रिलेशनशिप स्टोरी पर आपकी राय मेल और कमेंट्स में वांछित है.
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