यंग एंड मेच्योर सेक्स की कहानी में 21 साल के लड़के को गर्म करके 36 साल की कुंवारी लड़की पहली बार चुद गयी. दोनों ने एक दूसरे को पति पत्नी मान कर सेक्स का मजा लिया.
दोस्तो, मैं मानस पाटिल आपको एक अधेड़ स्त्री की चुदास से भरी चुत की चुदाई की कहानी सुना रहा था.
कहानी के दूसरे भाग
मेच्योर लेडी की पहली चुदाई
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मनीषा और बालू ने चुदाई करके एक दूसरे को तृप्त कर दिया था.
अब आगे यंग एंड मेच्योर सेक्स की कहानी:
कुछ देर बाद स्नान करके वे दोनों प्रफुल्लित हो गए.
तौलिए से बालू का गीला शरीर सुखाते उसकी नजर बालू के लंड पर गई.
शर्माती हुई वह बोली- क्यों जी … अब तक प्यास मिटी नहीं आपकी? ये तो फिर से खड़ा हो गया?
बिना लज्जा के बालू बोला- अब इतनी सुंदर बीवी मिली है … तो इसका एक बार में शांत होना थोड़ा कठिन है जी!
स्मितहास्य से वह बोली- अच्छा जी? पर मुझे तो भूख लगी है अब … देखो प्यार-प्यार में रात के नौ बज गए!
बेडरूम में आकर मनीषा ने पारदर्शी नाइटी पहनी.
पारदर्शी नाइटी से कामुक गदराया शरीर देख बालू स्तब्ध हो गया.
बालू की लार टपकते देख वह लज्जित हुई, साथ ही अपने औरत होने पर गर्व हुआ.
मनीषा के शरीर की भीनी गंध बालू को रोमांचित कर रही थी.
बालू को देखकर वह बोली- कैसा लगा मेरा नया गाउन? अच्छी तो दिख रही हूँ ना?
मनीषा की गांड पर हाथ घुमाकर वह बोला- तुम तो कामदेवी हो प्रिये, देखो ये क्या हाल हुआ पड़ा है मेरा!
चूत की प्यास बुझाकर अब वह पेट में लगी आग बुझाने रसोईघर पहुंची.
झटपट बनने वाली मैगी बनाकर उसने दो गिलास में मद्य भरा.
मद्य के सेवन से वह अपनी और बालू की कामेच्छा बढ़ाना चाहती थी.
नए-नवेले शादी-शुदा जोड़े की तरह वह एक-दूसरे को निवाला खिला रहे थे.
पारदर्शी नाइटी से जांघें, स्तन और स्तनाग्र साफ दिखाई दे रहे थे.
नाइटी की डोर नीचे गिरने से भारी दुधारू स्तन बाहर आने के लिए उत्सुक हो जाते.
अचानक मनीषा ने बालू को खींचकर अपनी मांसल गदराई जांघों पर बिठा लिया.
होंठों को चूसते हुए उसने अपना झूठा निवाला बालू के मुँह में भरा.
नूडल्स का एक छोर अपने मुँह से खींचती हुई वह बालू का झूठा निवाला खाने लगी.
एक-दूसरे को झूठा निवाला खिलाते-खिलाते दोनों की लार भी एक-दूसरे के मुँह में घुलने लगी.
मनीषा से चिपकते हुए बालू उसके स्तन फिर से निचोड़ने लगा.
उसका तन्नाया लंड मनीषा के पेट पर ठोकर मारने लगा.
अंग से अंग मिले, वासना उफान चढ़ने लगी.
जीवन के पहले संभोग से घायल योनि फिर रिसने लगी.
योनि में पीड़ा से डरकर उसने बालू को दूर किया और उठकर थाली धोने लगी.
बालू उस मादक शरीर की तरफ खिंचता चला गया और उसे पीछे से मनीषा की नंगी पीठ चूमने लगा.
बड़े-बड़े पपीते जैसे स्तन मसलते हुए वह मनीषा को गर्म करना चाहता था.
पर उसे रोकते हुए मनीषा ने थाली धोने का इशारा किया.
थाली को धोकर वह फिर से बालू से चिपक गई.
गर्दन पर चूमने से वह बहकने लगी.
उसे रोकती हुई वह बोली- उफ्फ्फ … कितने उतावले हो रहे हो? मैं कहां भाग थोड़ी रही हूँ? आपकी ही तो हूँ अब!
मनीषा के गाल चूमकर वह बोला- तुम चाहोगी तब भी जाने नहीं दूँगा, पति हूँ अब तुम्हारा … और प्यार करना मेरा अधिकार.
बालू के उस अधिकार जताने की बात से भावुक होकर उसने अपने छोटे कद वाले पति को गोद में उठा लिया.
मनीषा के गले में हाथों की पकड़ बना कर वह मुस्कुराया तो मनीषा भी हंसते हुए उसके होंठों को चूमने लगी.
बड़े नखरैल अंदाज में वह बोली- क्या हुआ जी? ऐसे क्या देख रहे हो? थोड़ा आराम भी करने दो अब … सारा प्यार आज ही लुटाओगे?
मनीषा का नाराजगी वाला सुर देख वह बोला- क्या हुआ मैडम जी? नाराज हो अपने पति से? मैं भी क्या करूँ जी … आप हो ही इतनी प्यारी कैसे रोक पाऊंगा … प्यार जो करता हूँ आपसे!
उसे समझाती हुई मनीषा बोली- नहीं-नहीं जी … मैं क्यों नाराज होऊंगी? पर आज पहली बार मैंने संभोग किया है जी … फुद्दी में पीड़ा हो रही है. थोड़ा डर भी लग रहा है.
मनीषा के आदरपूर्ण शब्दों से हैरान होकर वह बोला- वैसे मुझे ‘आप, आपका’ ऐसे क्यों बोल रही हो? मैं तो छोटा हूँ उम्र में … उलटा मुझे तुम्हें ‘आप’ कहकर बुलाना चाहिए!
मनीषा स्मितहास्य से बोली- अरे नहीं-नहीं जी … आप पति हो मेरे और पति तो परमेश्वर होता है, पर हां … सबके सामने तो आप मुझे ‘मैडमजी’ कहना और मैं तुम्हें ‘सुनिए जी’ कहकर पुकारूँगी. ठीक है?
बालू बोला- वह तो ठीक है … पर क्या आपको मेरा नाम पसंद आया? मुझे तो जरा भी पसंद नहीं ये नाम!
मनीषा ने कुछ सोचकर कहा- हम्म्म … ठीक है, क्या मैं सुझाव दूँ? एक नाम है मेरे मन में.
प्रफुल्लित होकर वह बोला- नेकी और पूछ-पूछ? जल्दी बताओ!
मनीषा बोली- ठीक है … फिर आज से आपका नाम मनीष … मैं आपकी मनीषा और आप मेरे मनीष … पसंद आया नया नाम?
भावविभोर होकर वह बोला- अरे वाह क्या सुंदर जोड़ी बना दी आपने … पर एक विनती है जी … इस खड़े लंड के बारे में भी कुछ सोचिए ना!
तना हुआ लंड तौलिए के ऊपर से बाहर आने को तड़प रहा था.
मनीषा ने तुरंत तौलिया खींचकर उसे नंगा कर दिया.
छह इंच का काला लंड छत की ओर देखते हुए मनीषा की सुंदरता को अभिवादन कर रहा था.
अपने पति के पुरुषत्व से उभरे लिंग को देखकर मनीषा खुश हुई और उसे अपने कोमल हाथों में ले लिया.
लिंग को सहलाती हुई वह बोली- आज तो आपका सारा रस पी जाऊंगी बस आज योनि को बख्श दो … अब भी थोड़ी सूजन है मनीष जी!
बालू आश्चर्य से बोला- तो आपका क्या होगा? मुझे भी तो अवसर दो आपकी सेवा का!
बालू के होंठ चूमकर वह बोली- वाह्ह मेरे साजन कितना प्रेम करोगे? ठीक है … आप भी मेरी मुनिया को अच्छे से चाट-चूस कर मसल-मसल कर पिलपिला कर दो … अब खुश?
इतना कहकर मनीषा ने नाइटी की डोरियां नीचे कीं और उन्मत्त स्तन बालू के सामने पेश किए.
वासना में डूबा बालू उन कबूतरों पर टूट पड़ा, स्तनाग्रों को चूसने लगा.
बालू ने पहले ही उन कबूतरों की दुर्गति कर दी थी … काट-काट कर चूसने से स्तन लाल-पीले हो चुके थे.
पंजों के निशान उन गोरी चमड़ी पर उभरने लगे. निचोड़-निचोड़ कर बालू ने स्तनों को लहू-लुहान कर दिया था.
कामातुर मनीषा ने बालू का सिर अपने स्तनों पर दबाया और एक हाथ से उसका लंड जोर-जोर से सहलाने लगी.
एक-दूसरे को बांहों में कसते हुए उनकी वासना की उफान से तपते शरीर गुत्थम-गुत्था होने लगे.
बिस्तर की चादर पर पड़ती सिलवटें और कमरे में गूँजती सिसकियों से वातावरण तपने लगा.
कामवासना में लीन मनीषा गुर्राई- आअहह मेरे बालम चुस ऊऊओ जोर-जोर से … काटो ओओओ … निचोड़ लो मेरा दूध बालू … और जोर से पी लो अपनी रंडी बीवी के आम काटो जोर से … ल.हू-लुहान कर दो इन हरामज़ादों को मनीष!
मनीषा के हिलाने से उसका लौड़ा गर्म होने लगा.
बालू कामातुर होकर चीत्कारने लगा. मनीषा का गला, होंठ, कान काट-काट कर चूसने लगा.
मनीषा की जीभ अपने मुँह में लेकर उसकी थूक को कुल्फी की मलाई की तरह चूसने लगा.
स्तनों का अमानुष तरीके से भींचते हुए वह जैसे ही स्तनाग्रों को मरोड़ने लगा, वैसे-वैसे मनीषा और पिघलने लगी.
अपने से आधी उम्र के पति का लंड मसल-मसल कर मनीषा की कामोत्तेजकता इतनी बढ़ गई कि उसकी चूत फड़फड़ाने लगी.
दोनों भी हुंकार भरने लगे … ये हुंकारें थीं वासना की, कामसुख-प्रणय-संभोग से ओत-प्रोत भरी!
मनीषा को बिस्तर पर लिटाकर बालू उस पर चढ़ गया.
उसका लंड मनीषा की नाभि पर रगड़ने लगा.
लंड की उष्णता से मनीषा गर्म होकर बालू के होंठ काटने लगी.
जोर-जोर से मुठ मारने से लंड से पानी रिसने लगा था.
लंड का सुपाड़ा नाभि पर था.
बालू कमर आगे-पीछे करते हुए नाभि का छेद रगड़ने लगा.
मनीषा को तो उस नाभि चोदन से भी मज़ा आने लगा.
लंड से निकलती बूंदें उसकी वासना के डोह में डुबोने लगीं.
बालू का लिंगमुंड अपने पेट में दबाकर रखे वह भी अपनी नाभि चुदवाने लगी.
मनीषा जितनी सरल थी, उससे कहीं ज़्यादा वह एक कामुक औरत थी. उसका शरीर तो चलता-फिरता वासना का डोह था.
झड़ने के बाद अपने ही योनिरस को अपने शरीर पर मलना उसका पसंदीदा खेल था.
घर में नंगा घूमना तो उसके लिए सामान्य बात थी … कई बार तो वह अपने मूत्र को भी पी चुकी थी.
बिस्तर से खड़ी होकर उसने अपनी नाइटी निकाल फेंकी. पूरी नंगी होकर वह बालू के पास लेट गई तो बालू फिर से उसके शरीर को भूखे भेड़िये की तरह नोचने लगा.
मनीषा की नंगी देह पर अपने हाथ घुमाते हुए दूसरे हाथ से वह मनीषा की नंगी योनि सहलाने लगा.
वासना की आग में गिड़गिड़ाती हुई मनीषा बोली- आह पतिदेव, काट डालो मेरे मादरचोद चूचुकों को … बहुत परेशान किया है मुझे … उखाड़ दो मेरे स्तन रंडी बना लो मुझे … रंडी बना लो मुझे आह!
बालू का हाथ योनि पर दबाती हुई वह अपनी कमर हिलाने लगी, रस टपकाती फुद्दी बालू के हाथ और उंगलियों पर घिसने लगी.
इसी आवेश में उन दोनों को पता नहीं चला कि कब बालू की तीन उंगलियां अन्दर तक वार करने लगीं.
निरंतर वह रहे बालू के कामुक घावों से वह बैचेन होकर बड़बड़ाने लगी.
मदमस्त भैंस बनकर वह गुर्राई- चोदोओओ मुझे मनीष … रांड हूँ मैं आपकी … भोसड़ा बना दो मेरी चूत … आआहहह और जोर से मनीष … और जोर से रगड़ो मेरी फुद्दी मर गई इइइ मेरे राजाआआ!
जोर-जोर से चीखती हुई मनीषा ने अपना योनिरस त्याग दिया.
अतुलनीय स्वर्गसुख में मिलती उत्तेजना से उसका मूत्र भी भलभला कर निकल गया.
मूत्र मिश्रित योनिरस का एक बड़ा-सा धब्बा चद्दर पर फैल गया … जो उस कामयुद्ध की निशानी था.
थरथराता शरीर लेकर वह बालू की बांहों में काफी देर तक सोती रही.
जब बालू का विचार उसके मन में आया तो वह उठकर बैठी.
कड़क लौड़े को देख मनीषा उसके जांघों में आ गई.
अपने मुँह के थूक से गीला करती हुई उसने बिना किसी विलंब के बालू का लंड अपने मुँह में भर लिया.
बिकाऊ बाजारू रंडी जैसे वह बालू का लंड चूसने लगी.
अंडकोष मुट्ठी से मसलने लगी.
उसकी जीभ लिंगमुंड से लेकर अंडकोष तक घूमने लगी.
लिंग का एक-एक भाग उसने चाट-चाटकर गीला किया.
मनीषा के चूसने से बालू उत्तेजित होकर अपनी कमर उठाने लगा.
बालू की ठोकरों से लंड मनीषा के गले तक घुसने लगा.
बिजली की गड़गड़ाहट में भी बालू की सिसकारियां सुनाई दे रही थीं.
कभी जीभ से, कभी होंठों से और कभी अपने स्तनों के बीच लेकर मनीषा लंड की मालिश करने लगी.
मनीषा के बाल सहलाते हुए बालू खुले सांड की तरह हुंकारते हुए बोला- आअहह मनीषा सच में रंडी है तू … साली ईईई उखाड़ ले मेरा लौड़ा बहनचोदद चूस मेरे आंड … मेरी रंडी बीवी … चबा ले लौड़ा मेरी रानी!
बालू के मुँह से गालियों के साथ ‘रानी’ शब्द सुनकर मनीषा अत्यानंदित हुई.
वीर्यरस से भरे फूल चुके मनीषा उन दोनों काले जामुनों को भी एक साथ मुँह में भरती और खींच-खींचकर चूसने लगी.
बालू के आगे झुकने से उसकी मदमस्त मादक गांड और चूत सामने लगे दर्पण में बालू देखने लगा.
गोरी-चिट्टी गांड का खुलने-बंद होने वाला छेद देख बालू का वीर्य उबलने लगा.
पर तभी रंग में भंग डालने के लिए किसी ने दरवाजा खटखटाया और उस आवाज से मनीषा डर गई.
हड़बड़ाती हुई उसने अपनी नाइटी पहनी और दरवाजे की तरफ बढ़ने लगी.
मनीषा को दूर जाते देख बड़ी व्याकुलता से बालू बोला- नहीं मैडम जी, मत जाओ … देखो कैसे तड़प रहा हूँ उबलते वीर्य की पीड़ा से मेरे गोटे भी फूल गए हैं मनीषा जी!
पति की आर्त साद सुनकर मनीषा पिघल गई.
बालू के प्यार ने उसका तन-मन जीत लिया था, किसी भी हाल में वह बालू को दुखी नहीं देख सकती थी.
बालू की विवशता समझ कर वह फिर से उसके पास गई और उसका सिर अपनी छाती पर दबा लिया.
बालू के लंड को सहलाती हुई वह बोली- नहीं मेरे मालिक … अब तो कहीं नहीं जाऊंगी आपको छोड़कर … चाहे मौत ही क्यों न आ जाए … आ जाओ मेरी गोद में मेरे पतिदेव!
बालू को अपनी गोद में बैठाकर वह फिर से उसका लंड जोर-जोर से हिलाने लगी.
नाइटी में फूले चूचे भी बाहर आ गए.
बालू के लिंग का सुपाड़ा गीला होकर चमक रहा था जिसे मनीषा ने अपने स्तनाग्रों पर रगड़ना शुरू कर दिया.
बालू के गाल, गला जीभ से चाट-चाटकर उसने बालू के गोटे भी मसलना शुरू कर दिए.
बालू की उत्तेजना बढ़ाने के लिए वह बोली- कितना मोहक लंड है मेरे पतिदेव आपका … इसे देखकर तो फिर से मेरी भोसड़ी गर्माने लगी है आह … निकालो न अपना गाढ़ा वीर्य अपनी बीवी पर डाल कर नहला दो … भिगो दो मुझे आपके प्रेमरस से … पिला दो ये अमृत अपनी रंडी को मालिक!
बालू जोर-जोर से गुर्राने लगा था.
उसके अंडकोष में उबलता वीर्य बाहर आने के लिए हड़कंप मचाने लगा था.
जैसे उबला हुआ दूध पतीले से बाहर आने को आतुर होता है, ठीक वैसे ही बालू अपना वीर्य त्यागने को मचल रहा था.
मनीषा का गला चाटकर चूसते हुए उसने अपना शरीर मनीषा के शरीर पर चिपका कर उसे आलिंगन में ले लिया.
मनीषा की मेहनत रंग लाई और बालू की चीख निकल पड़ी- आआ अहह … मादरचोद अह मेरा लौड़ाआ आह मनीषाआ आह मेरी रांड आह!
एक के बाद एक निरंतर वीर्य की पिचकारियां उड़ने लगीं.
वीर्य की पिचकारियां मनीषा के स्तनों पर जा गिरीं.
गर्म-गर्म वीर्य की रंगोली से मनीषा के दोनों स्तन सफेद रंग से रंग कर चिपचिपे हो गए.
बड़े गर्व से उसने बालू के वीर्य को अपनी छाती पर उड़ने दिया.
पति की संतुष्टि से बढ़कर उसे और क्या चाहिए था.
कई घंटों से चल रही कामक्रीड़ा से बालू थक चुका था.
आखिरकार उसका लंड भी मलूल होकर मनीषा के हाथों में विश्राम करने लगा.
पति के वीर्य को अपनी उंगलियों की सहायता से मनीषा चाटने लगी और एक-एक बूंद खा गई.
थके हुए अपने निढाल पति को वैसे ही अपनी छाती पर लिया और उसी प्रेम व मंत्रमुग्धता से दोनों निद्राधीन हो गए.
मनीषा को ध्यान ही न रहा कि दरवाजे पर किसने दस्तक दी थी.
दोस्तो, इस यंग एंड मेच्योर सेक्स की कहानी पर आपके विचारों का स्वागत है.
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