वासना ना समझे उम्र के बंधन- 2

Views: 222 Category: First Time Sex By replyman12 Published: April 15, 2026 📖 12 min read
Share
Text size:

फर्स्ट सेक्स विद यंग बॉय का मजा लड़की ने 36 साल की उम्र में लिया. इससे पहले तक वह लंड की कमी से अपनी चूत को उंगली से ही मजा देती रही.

दोस्तो, मैं मानस एक बार पुनः आप सभी सुधि पाठकों की सेवा में हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
चूत को थी लंड की अभिलाषा
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि किस तरह से एक थोड़ी बड़ी उम्र की महिला मनीषा ने अपनी बिल्डिंग के नीचे सताए जाने वाले बालू नाम के लड़के को पीटने से बचाया और उसे अपने फ्लैट में ले आई.
फिर उसके साथ मनीषा ने सेक्स का मजा लेना शुरू कर दिया.

अब आगे फर्स्ट सेक्स विद यंग बॉय का मजा:

मनीषा ने जब बालू से सेक्स की पहल की तो बालू को भी जोश चढ़ गया.
उसे अपने मित्र-दोस्तों से संभोग का पूरा ज्ञान मिल चुका था. कभी-कभार उसने आप-पड़ोस की चुदाई भी छुप-छुपकर देखी थी.
कभी-कभी वह भी कामातुर होकर अपना लंड हिलाकर शांति कर लेता.

मनीषा के मादक काम-पिपासु तन की गर्मी से वह भी उत्तेजित होने लगा.
कच्छे में उसका लिंग फूलने लगा.

तभी मनीषा ने आवेश में आकर अपनी चोली खोली और बालू के सामने अपने नंगे स्तन खुले किए.

मनीषा के यौवन का खजाना देख उसने झट से उन कबूतरों को अपने पंजों में कैद कर लिया.
बालू पूरे अंतर्भाव से स्तनाग्र चूसने लगा, दांतों से काट-काटकर वह अपने प्यार की निशानी उन पर उभारने लगा.

स्तनों पर कसते पंजों और चूसने से मनीषा की वासना की आग पूरी तरह भड़क उठी.

उन्माद में आकर मनीषा बोली- आअहह … उफ्फ … बालू ऊऊऊ काटो इनको मेरे पतिदेव आह जोर जोर से चूसो प्लीज़ … कितने बरस निकल गए आपकी प्रतीक्षा में जान!

उस याचना को प्रसाद देते हुए वह बोला- वाह मेरी जान … क्या खूब फड़फड़ा रहे हैं तेरे कबूतर … घुंडियां तो देख, कैसी कठोर हो गई हैं … आज तो सारा दूध निचोड़ लूँगा!

सोफे के किनारे बैठकर मनीषा ने बालू का सिर अपनी गोदी में ले लिया.
स्तन उसके मुँह में देकर वह एक बच्चे की तरह उसे अपना दूध पिलाने लगी.
अपनी उम्र से आधी उम्र के लड़के के सामने मनीषा आधी नंगी बैठी थी.

‘ह्म्म्म … आह्ह्ह … ओह्ह्ह … मां … आह!’ मादक सीत्कारों से भरी आवाजें निकालती हुई दूसरे हाथ से मनीषा योनि मर्दन करने लगी.
चुत में से बहते काम-रस से उसकी मांसल जांघें भी चिपचिपी हो चुकी थीं.

नर के लिंग की चाह में उसका हाथ बालू के कच्छे पर घूमने लगा.
बालू के कठोर लिंग के स्पर्श से वह सिहर गई.

बिना विलंब उसने बालू का कच्छा नीचे सरकाया.
छह इंच लंबे और दो इंच मोटे लिंग का प्रचंड रूप देख मनीषा उसे जोर-जोर से हिलाने लगी.

पहली बार मनीषा ने किसी पुरुष के लिंग को हाथ में लिया था और वही अवस्था बालू की भी थी.
कोमल हाथों के प्रथम स्पर्श से वह जोर-जोर से स्तनाग्रों को काटने लगा.

तभी बालू सांड की तरह गुर्राते हुए बोला- आआहह … मैडम जीई और जोर से हिलाओ मैं झड़ने वाला हूँनं…नंनं!

मादा के स्पर्श से नर अपना लिंग नियंत्रित न कर सका.
जैसे ही उसका वीर्य बाहर फूटने लगा, मनीषा ने लिंग को अपने स्तनों पर लगा लिया.
निरंतर उड़ती वीर्य की वर्षा से मनीषा के दोनों स्तन चिपचिपे हो गए.

बालू के वीर्य की गर्मी से मनीषा की योनि भी झड़ने लगी.
काम-सुख से प्रफुल्लित दोनों एक-दूसरे के आलिंगन में वैसे ही कुछ देर लेटे रहे.

काम-संतुष्टि से मनीषा निद्राधीन हुई.
एक हल्की नींद से ही उसके शरीर और मन में प्रसन्नता भर गई.
बालू के रूप में मिले अपने जीवन में मिले आसरे की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी.

तभी उसका ध्यान बालू पर गया.
गरीबी के कारण मैला तन और कपड़े देख उसे बालू पर तरस आया.

उसे जगाए बिना ही उसने बालू के सारे कपड़े निकाल दिए.

फिर बाथरूम के बड़े से बाथटब में गर्म पानी भरकर उसने बालू को ले जाकर उसमें बैठा दिया.

खुद को वस्त्रहीन देख कर बालू बोला- लगता है आज दिन भर नंगा ही रखोगी मुझे?

थोड़े नाटकीय गुस्से से मनीषा बोली- ज़्यादा होशियार मत बनो, देखो खुद को कितने मैले हो … आज तो अपने हाथ से नहलाऊंगी … फिर बनोगे मेरे चिकने पतिदेव!

मनीषा की चोली तो कब की निकल चुकी थी.
बची साड़ी और साये को निकाल कर उसने अपने ही योनिरस से भीगी कच्छी भी उतार दी.

मनीषा का नंगा मादक शरीर देख बालू अवाक् रह गया.

बालू को अपने नंगे शरीर को निहारता देख उसने बालू को अपने सीने से लगाकर पूछा- कभी छोड़कर तो नहीं जाओगे ना मुझे बालू? मैंने तो अब तुम्हें ही अपना सब कुछ मान लिया है!

मनीषा की भावुकता समझते हुए वह बोला- आज तक इतना प्यार किसी ने नहीं किया मैडम जी … अपनी मां की सौगंध मनीषा, मर जाऊंगा पर आपको कभी धोखा नहीं दूँगा!

ऐसा चमचमाता बाथरूम बालू ने तो क्या, उसकी पिछली सात पुश्तों ने कभी ऐसा बाथरूम नहीं देखा होगा.

मनीषा पानी में लेटी, हाथ पकड़ कर उसने बालू को ऊपर ले लिया और गर्म पानी से वह बालू को नहलाने लगी, वैसे-वैसे बालू का शरीर चमकने लगा.

दो नंगे शरीर आपस में रगड़ने लगे.
बालू की नंगी छाती पर मनीषा का हाथ घूमने लगा.
मनीषा के स्तनाग्रों की कठोरता बालू अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था.

पानी में खेलते हुए बालू ने अचानक चतुराई से पानी का फव्वारा छोड़ती नली अपने हाथ में ली और अपनी नंगी बीवी को नहलाने लगा.
मनीषा के नंगे स्तन पानी की गर्माहट से और बालू के कठोर हाथों की मालिश से फूलने लगे.

कामातुर होकर मनीषा फिर से सीत्कारने लगी. उसके स्तनाग्रों में गुदगुदी होने लगी.
बालू ने दोनों कबूतरों को पंजों में कैद किया और जोर-जोर से मरोड़ने लगा.

मनीषा की ‘आअहह … उफ्फ्फ … बालूऊऊ…’ से बाथरूम गूँज उठा.

पीछे से बालू के लिंग की कठोरता मनीषा को अपने नितंब और पीठ पर महसूस हो रही थी.
बालू के लिंग की बढ़ती कठोरता देख मनीषा ने उसे जांघों पर बिठाया और उसका लंड सहलाना शुरू कर दिया.

बालू का युवा लहू उसके लिंग की ओर बढ़ने लगा. तने लिंग की नसें भी फूल चुकी थीं.
मनीषा के स्तनों पर अपना सिर दबाते हुए बालू आंखें बंद करके अपने लिंग पर कोमल हाथों का स्पर्श अनुभव करने लगा.

वासना में डूबकर बालू गुर्राया- आअहह … मैडम जीईईई और ज़ोर से रगड़ो लौड़ा … मेरी जान क्या जादू है तुम्हारे हाथों में मनीषा जी … और ज़ोर से हिलाआओ आह!

बालू का मुँह खोलकर मनीषा उसके मुँह में थूक भरने लगी और वही थूक चाटने लगी.
साबुन के बने झाग से मनीषा को सहलाने में मदद मिलने लगी.

मुट्ठी में लंड फिसलने लगा.
वह मज़े से गुर्राने लगा.

अचानक घूमकर उसने मनीषा को गले लगाया.
बाल सहलाते हुए मनीषा की आंखें, गर्दन, गाल, कान को चूमने लगा. मानो वह मनीषा पर अपना अधिकार जता रहा हो.
चुंबनों की वर्षा से मनीषा की आग अब ज्वाला बन चुकी थी.

होंठों से शुरुआत करके अब वह स्तन, पेट, नाभि को चूमकर मनीषा को उन्मत्त करने लगा.

मनीषा बाथटब में ऐसे खड़ी हुई तो उसकी योनि बालू के सामने आ गई.
बालों से ढकी योनि की मोहकता पर बालू मर-मिट गया.

बड़ी नाज़ुकता से उसने योनि को सहलाया.
पहली बार मर्दाना स्पर्श से मनीषा थरथरा उठी.

मनीषा का गुप्त खजाना मंत्रमुग्ध होकर देखते हुए वह उसकी जांघें सहलाने लगा.
बालू के स्पर्श से योनि का छेद जैसे अपने आप खुलने लगा.

योनि की भगनासा को छेड़ते हुए उसकी उंगलियां चूत को सहलाने लगीं.
बालू को योनि चाटने का इशारा कर अपनी उंगलियों से योनि की पंखुड़ियां फैला दीं तो बालू को उस गुफा का द्वार दिखाया.

बालू ने झट से उस गुफा के द्वार पर अपनी जीभ रखकर एक कुत्ते की तरह चाटना शुरू कर दिया.
खुरदरी जीभ के स्पर्श से मनीषा की सीत्कार फिर से गूँज उठी.

जीवन के पहले मुखमैथुन का आनन्द भोग रही थी.
मनीषा की मांसल गदराई जांघों को मसलते हुए बालू योनिरस चाटने लगा.

बालू का सिर योनि में धकेलती हुई वह सिसकी- आआहह … पतिदेवव औरर्र जोर से काटोओ आह मर गईईई बालू ऊऊऊ चाटो मेरी भोसड़ीईई … पी लो मेरा रस जान … और जोर से चबा दो मेरा दाना बालू!

कामुक पुस्तकों से सीखे कुछ अश्लील शब्द उसके मुँह से बाहर आने लगे.
भोसड़ी, दाना, चूत जैसे शब्द सुनकर बालू का जोश भी बढ़ता गया.

बालू के बाल पकड़ कर वह ज़ोर-ज़ोर से योनि उसके मुँह पर रगड़ने लगी.
इतने बरसों से जमा अपना यौवनरस निकालने के लिए वह तैयार हो चुकी थी.

आखिर वह पल आ गया.
नदी पर बना बांध फूटकर जैसे हाहाकार मचाता है, ठीक वैसे ही मनीषा का बांध फूटा.
बालू का मुँह, छाती, पेट मनीषा के यौवनरस से भीग चुके थे.
प्यासा बालू वह नमकीन रस गटागट पीने लगा.

मनीषा की सांसें चढ़ गई थीं.
पूरी संतुष्टि होने तक उसने बालू का सिर योनि पर दबाकर रखा.

आंखें खोलकर स्मितहास्य करती हुई उसने बालू को देखा और उसका सिर अपने सीने पर दबाकर भावुक हो गई.
बालू का माथा चूमती हुई वह बोली- पता नहीं आपका धन्यवाद कैसे करूँ … इतने बरसों से प्यासी को आज आपने तृप्त कर दिया पतिदेव!

भावुकता से बालू ने कहा- अरे मैडमजी, धन्यवाद तो मुझे करना चाहिए, एक तो आपने उस हरामी दूबे से मेरी जान बचाई और अब इस गरीब पर अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया!

आंखों में नमी लेकर वह बोली- ऐसे न कहो राजा जी … आपसे मिले प्यार के बदले में एक क्या, ऐसे हजारों दूबे का खू.न कर दूँगी … मैं प्यार करने लगी हूँ आपसे!

मनीषा के होंठ चूमकर वह बोला- मैं भी बहुत प्यार करता हूँ आपसे मैडमजी. कितनी दयालु और प्यारी हैं आप … एक बात पूछूँ आपसे?
आश्चर्य से बोली- पूछो मेरे बलमा जी!

थोड़ा घबराते हुए वह बोला- क्या विवाह कर लूँ मैं आपसे? सच में बना लोगी मुझे अपना पति?

बालू के प्रस्ताव से मनीषा आनन्द के मारे रोने लगी.
आज तक मिले सारे पुरुष उसके यौवन को लूटना चाह रहे थे, पर बालू के पुरुषत्व ने उसे जीत लिया.
वह अकेला था जो उसकी आबरू लूटने नहीं, बल्कि उसे संरक्षित करने आया था.

थोड़ा-सा हंसती हुई वह बोली- और समाज? उनका क्या? क्या कहेंगे सब … एक 36 साल की बीवी और 21 उम्र वाला?

बालू ज़िद्दी सुर में बोला- दुनिया गई भाड़ में मनीषा जी … और दिया क्या है इस व्यर्थ समाज ने हमें? मैं कुछ नहीं जानता … मैं विवाह करूँगा तो सिर्फ आपसे जो होगा देख लूँगा!

प्रफुल्लित होकर उसने बालू को अपनी तरफ खींचा और बोली- अच्छा जी? फिर तो आपको पता ही होगा एक पति अपनी पत्नी के साथ क्या-क्या करता है?

मनीषा का इशारा समझकर बालू उस पर चढ़ गया और उसके होंठों को चूसने लगा.
बालू का टनटनाया लंड मनीषा सहलाने लगी तो बालू ने भी अपनी उंगली से मनीषा की योनि की फांक को सहलाया.

दोनों संभोग के लिए तड़पने लगे.
फर्स्ट सेक्स विद यंग बॉय का मजा लेने के लिए मनीषा ने अपनी जांघों को फैलाया और बालू का लंड योनि के द्वार पर दबाया.

जीवन में पहली बार एक नर का लिंग उसकी नंगी योनि पर दस्तक दे रहा था.

बालू की आंखों में देखकर वह बोली- चलिए पतिदेव … लूट लो अपनी बीवी का यौवन, आज तक आपके लिए ही बचा कर रखा था … अब कर दो मेरा जीवन सार्थक!

मनीषा की बात खत्म होने से पहले ही बालू ने वार किया.
योनिरस से चिकनी चूत में आधा लंड घुसने से शीलभंग हुआ.

योनिभेद की पीड़ा से चीखती मनीषा को देख वह रुक गया और अंगूठे से भगनासा बिंदु सहलाने लगा.

पीड़ा से उबरती योनि को अपने आधे लंड से चोदने लगा, योनिपटल पर सुपाड़ा घिसने लगा.
उस अकल्पनीय सुख से योनि रस बहाने लगी.
छेद खुलने से लंड के लिए रास्ता बन गया.

अपनी गति बढ़ाते हुए बालू ने स्तनाग्रों को चूसना शुरू किया, अमानुषी तरीके से चूसने से स्तन लाल-पीले होने लगे.
स्तनाग्रों को दांतों की पकड़ में लेकर खींचते हुए उन्हें पता ही नहीं चला कि कब लंड योनितल में प्रवेश कर गया.

लिंगमुंड बच्चेदानी को छूते ही मनीषा कराहती हुई बोली- आअ हहह … पतिदेव…व लूट लो मुझे … काट दो मेरी भोसड़ी को साजन जीईईई … चोदो मुझे … चढ़ जाओ … चिथड़े कर दो मेरी चूत के … रंडी बना लो मुझे बालूऊऊ!

संभोगक्रीड़ा से मनीषा रोमांचित हो गई, कठोर लंड के वार झेलते हुए उसके नितंब ऊपर उठने लगे.
मनीषा के मुँह से ‘रंडी’ शब्द सुनकर बालू उस पर टूट पड़ा, पूरी ताकत से वह मनीषा की योनि भोगने लगा.

संभोग में सीत्कारते हुए वह बोला- आअहह मनीषा, क्या मस्त चूत है तेरी साली … उफ्फ् पकड़ ले मेरा लौड़ा अपनी भोसड़ी में आह मेरी रंडी कैसा लगा तुझे पति का लंड? आज तो चोद-चोदकर भोसड़ा बना दूँगा तेरी फुद्दी का!

मनीषा को ऐसे ही दमदार मर्द की तलाश थी जो उसे रंडी बनाकर चोदे, शरीर नोच-नोचकर उसकी इज्ज.त लूटे.
योनिरस और बाथटब के पानी की सहायता से बिना किसी रुकावट योनि को भेदने लगा.

‘आअहह … उफ्फ्फ … बालूऊ … चोदो.’ जैसी सिसकारियों से वातावरण और गर्माने लगा.

थोड़ा पीछे लेटकर उसने बालू को अपनी गुदाज जांघों पर बिठाया.
धक्कों के प्रभाव से बाथटब का पानी भी बाहर गिरने लगा, पर इसकी चिंता न बालू को थी न मनीषा को.
अपनी नई-नवेली दुल्हन को वशीभूत कर बालू हुंकार भरता हुआ चुदाई करने लगा.

मनीषा के पपीते जैसे स्तनों को बालू के हाथ बंदी बनाने में असमर्थ थे, उंगलियों की पकड़ में लेकर वह स्तनाग्रों को निचोड़ने लगा.

बाहर चल रही बारिश भी अब रुक चुकी थी … अब प्रतीक्षा थी वीर्य की बारिश की.

दोहरे आघातों से मनीषा घायल होकर चिल्लाई- आआहह … मम्म्मीई ईई मैं मर गई…’

मनीषा के झड़ने की गर्मी से बालू बुदबुदाया- मैं आ रहा हूँनन…णण … मनीषआआ!

बालू के वीर्य ने मनीषा की कोख भर दी.
योनिरस और वीर्य संमिश्रित हो गए.
वासना की आंधी थमने के बाद भी वे दोनों एक-दूसरे से चिपके रहे.

दोस्तो, इसके अगले भाग में मैं आपको मनीषा और बालू के प्यार की इस फर्स्ट सेक्स विद यंग बॉय कहानी को आगे लिखूँगा.
आप अपने मेल व कमेंट्स जरूर भेजें.
धन्यवाद.
replyman12@gmail.com

You May Also Like

Meri Jawani Ki Galtiyan
Views: 400 Category: First Time Sex Author: simransadhi Published: August 20, 2025

मैंने तौलिया फेंक कर टाँगें फैलाये उसके लंड से चुदने ख्वाहिश लिए अपनी बाहें फैला दी। विजय झपट कर मेरे ऊपर गिरा और जोर जो…

ट्रेन में मिली आंटी को रगड़कर चोदा
Views: 48 Category: First Time Sex Author: karankaran02626 Published: September 04, 2026

हॉट Xxx आंटी चुदाई कहानी में ट्रेन में एक आंटी मेरे साथ बैठी तो मैं उनसे बातें करने लगा. वे मस्त माल थी. मैंने उन्हें छूना…

Comments