हरम सेक्स कहानी में एक बादशाह किसी रियासत पर हमला करके वहां की महारानी को उठा लाया, रात भर अपने कमरे में उसे चोदा, फिर उसे तैयार करके हरम में ले गया.
नमस्कार मित्रो, बिना किसी भूमिका के पिछली सेक्स कहानी से आगे बढ़ते हैं.
कहानी के पहले भाग
बादशाह के हरम में महारानी
में अभी तक आप पढ़ चुके थे कि महाराणी प्रियंवदा एक तुर्क बादशाह की कैद में थीं और उससे सारी रात चुदी थीं.
सुबह बादशाह ने महाराणी प्रियंवदा को तैयार होकर अपने दरबार में आने का आदेश दिया था तो महाराणी प्रियंवदा तैयार होकर दरबार में आ गई.
अब आगे हरम सेक्स कहानी:
बादशाह महमूद शाह अपने दरबार में अपने सिंहासन पर बैठा था.
उसके मंत्री, सेनापति और प्रबंधक अपनी अपनी जगह पर बैठे थे.
यह वही लकड़ी का महल था, जो बादशाह के लिए अलग से बनवाया गया था.
यह महल भी बेहद आलीशान था हालांकि यह हमेशा के लिए नहीं बनाया गया था.
जब जब तुर्क सेना किसी प्रदेश पर हमला करती थी तो सैनिकों के अलावा और भी दूसरे लोग सेना के साथ होते थे.
वे दूसरे लोग कई किस्म के काम करते थे.
उनमें वे लोग भी होते थे जो हमेशा जब जब शिविर लगाया जाता तो बादशाह के लिए अस्थायी महल बनाते थे.
यह बादशाह का रंगीलापन ही था जो उसको ऐसे महल की जरूरत पड़ती थी क्योंकि गुलाम बना ली गई औरतों को वह जल्द से जल्द भोगना चाहता था.
वह न जाने कितनी ही औरतों का भेदन चोदन कर चुका था.
उन औरतों से पैदा हुए नाजायज बच्चे भी पता नहीं कितनी बड़ी तादाद में थे.
इन अस्थायी महलों में ही आगे की रणनीति बनाई जाती थी.
पर आज बात कुछ और थी.
बादशाह के पास में ही एक मौलवी खड़ा था, जिसने सफेद लिबास ओढ़ रखा था.
महमूद शाह अपने शाही वस्त्र धारण किए हुए था.
तभी वे दासियां महाराणी प्रियंवदा को एक तुर्क महिला के शाही वस्त्रों में सजाकर दरबार में ले आईं और महाराणी को बादशाह के पास में रखी एक कुर्सी पर बैठा दिया.
महाराणी ने उस गुलाबी चुन्नी से अपना चेहरा ढका हुआ था.
उसे इतने गैर मर्दों के सामने इस तरह से सजावटी गुड़िया बन कर बैठने में शर्म सी आ रही थी, पर वह खुद को संयमित की हुई थी.
मौलवी अपनी जगह पर खड़ा था.
उसने जोर से आवाज दी और कुछ ऐसा कहा कि दरबार में बैठे हर इंसान को एक झटका लगा.
उसने ऐलान करते हुए कहा कि आलमपनाह ने अपने निकाह का फैसला किया है और रणकपुर की महाराणी प्रियंवदा बादशाह की बेगम बनने के लिए नज़र की जाती हैं. क्या तुर्क सल्तनत के बादशाह को यह निकाह कबूल है?
इतना सब सुनते ही दरबार में कानाफूसी होने लगी.
बादशाह ने तीन बार बड़ी बुलंद आवाज में ‘कबूल है, कबूल है, कबूल है.’ बोल दिया और इतना सुनते ही वापस सन्नाटा छा गया.
मौलवी ने फिर आवाज दी- क्या यह निकाह महाराणी को कबूल है?
महाराणी प्रियंवदा को जो कुछ मौलवी ने कहा था, वह भाषा तो उसे ज्यादा कुछ समझ नहीं आई थी, पर वह इतना जरूर समझ गई थी कि बादशाह उसके साथ शादी करना चाहता है.
वह हैरान होकर एक लंबी सोच में पड़ गई.
वह सोच रही थी कि वह अपनी किस्मत पर रोए कि उसका अपहरण करके एक दूसरे मर्द ने उसका चोदन किया या फिर वह अपनी किस्मत पर इतराए कि अब वह बादशाह उससे शादी कर रहा है.
हालांकि वह उस वक्त दुनिया का सबसे बड़ा सुल्तान था.
जब महाराणी काफी देर तक कुछ नहीं बोली, तो दरबार में फिर कानाफूसी की आवाजें आने लगीं.
तब उस दासी तरन्नुम ने जल्दी से अपनी कोहनी से महाराणी की कोहनी को टकराते हुए कहा- महाराणी, क्या सोच रही हैं? जल्दी तीन बार बोल दीजिए कबूल है, कबूल है, कबूल है!
महाराणी यह समझ गई थी कि इस ‘कबूल है …’ का क्या मतलब है.
वह असमंजस में एक बार बादशाह के चेहरे की ओर देखने लगी.
बादशाह कुछ अजीब नजर से उसको देख रहा था.
बादशाह की आंखें जो हमेशा न जाने क्यों रवून की तरह लाल रहती थीं, एकटक महाराणी को देख रही थीं और न जाने उसको क्या हुआ और महाराणी ने झट से तीन बार मौलवी के हर बार पूछने पर तीन बार ‘कबूल है, कबूल है, कबूल है.’ बोल दिया.
उसके पास और कोई चारा भी नहीं था.
इतना सब होते ही सभी दरबारी अपनी … अपनी जगहों से खड़े हो गए और वे सब आलमपनाह का नाम लेते हुए एक आवाज में कुछ बोलने लगे जो महाराणी को समझ नहीं आया.
पर उन लोगों का चेहरा देख कर कोई भी कह सकता था कि वे सभी किसी न किसी बात पर खुश हैं.
बादशाह ने हाथ उठा कर सब को बैठने का इशारा किया और मौलवी को देखा.
फिर मौलवी ने कहना शुरू किया- ऊपर वाले की गवाही में तुर्क सल्तनत के बादशाह मोहम्मद महमूद रायज शाह का निकाह महाराणी प्रियंवदा से तामील हो गया है. पर महाराणी प्रियंवदा को इस्लाम कबूल करवा कर एक तुर्क सल्तनत के बादशाह की बेगम बनने के लायक बनाया जाएगा. आज से महाराणी प्रियंवदा मलिका रजानी-उल-मरियम के नाम से जानी जाएगी.
इतना कहकर मौलवी अपनी जगह पर बैठ गया और बादशाह अपनी जगह से उठ कर दरबार को खत्म करके अपने सिंहासन के पीछे बने दरवाजे से बाहर चला गया.
दासियां तुर्क साम्राज्य की मलिका को भी उस रास्ते से बाहर ले गईं.
सभी लोग धीरे धीरे दरबार से बाहर जाने लगे.
सब लोग अपने अपने शिविर की ओर चल पड़े, जहां पर गुलाम बना कर रखी गई हिंदुस्तानी औरतें अपने अगले चोदन समारोह का इंतजार कर रही थीं कि आज रात वे किस सैनिक के साथ नंगी सोएगी.
अब यह निश्चित हो चुका था कि तुर्क सल्तनत का अगला बादशाह एक हिंदुस्तानी महाराणी के पेट से पैदा होगा.
महाराणी प्रियंवदा ने तो कभी सोचा भी नहीं होगा कि इस उम्र में उसका दूसरा विवाह होगा.
तुर्क लोग जो अभी अभी दरबार से बाहर निकले थे, सोच रहे थे कि इस राजसी औरत में कुछ तो नश। है और उसने बादशाह को इतना मोहित कर दिया जो इससे निकाह करने का मन बना बैठा, वह भी सिर्फ एक रात साथ में गुजार कर!
तुर्क सल्तनत की मलिका रजानी-उल-मरियम जो कुछ दिन पहले तक महाराणी प्रियंवदा हुआ करती थी, उस कमरे में जहां वह बादशाह महमूद शाह के साथ मजे कर चुकी थी, खिड़की के पास खड़ी उस महल से थोड़ी दूर बहती नदी को एकटक देखे जा रही थीं.
आज तुर्क दरबार में उसका निकाह हुआ था.
वह अब अपने वर्तमान में खड़ी होकर अपने भूतकाल और अपने आने वाले भविष्य के बारे में सोच रही थी.
एक महाराणी से मलिका का सफर ज्यादा लंबा नहीं था पर उसकी जिंदगी में बहुत बदलाव हो चुका था.
यह बदलाव उसके लिए क्या मायने रखता था, वह बस यही सोच रही थी.
शायद यह बदलाव एक दुखद घटना थी कि उसको बहुत प्यार करने वाले महाराजा करण सिंह अब उसके पास नहीं थे या फिर यह एक सुखद घटना थी … जो उसको बादशाह महमूद शाह का साथ मिला था.
हां, कल तक शायद यह बदलाव उनके लिए खुशी भरा नहीं था क्योंकि उसको लगा था कि उसको अब सारी जिंदगी इस तुर्क बादशाह की रखैल बन कर रहना पड़ेगा.
पर आज सब कुछ बदल चुका था.
वह अब बादशाह की रखैल नहीं बल्कि उसकी बेगम थी.
वह खुद ही अपने आप से सवाल किए जा रही थी और खुद ही जवाब दिए जा रही थी.
उसको अपने बच्चों, अपने राज्य और अपने पति की याद आ रही थी.
उसको पता था कि वह अब कभी भी उसका चेहरा नहीं देख पाएगी.
क्या वह अब अपनी यादों के साथ चिपके हुए अपना आने वाला कल एक उदास औरत की तरह बिताए या फिर वह सब कुछ भुला कर एक नई शुरुआत करे?
‘नहीं, मैं अपनी जिंदगी एक विधवा औरत की तरह नहीं बिता सकती, आखिर मेरे अपने भी कुछ जज्बात हैं. मैं अपने पति और बच्चों की याद में सारी जिंदगी रो रो कर नहीं बिता सकती. वैसे भी एक हिंदुस्तानी औरत का यह फर्ज है कि वह अपना सब कुछ भुला कर अपने पति की खुशी का ख्याल रखे और मेरे पति महाराजा करण सिंह नहीं बल्कि बादशाह हैं और अब मैं उनकी पत्नी हूँ. मेरा फर्ज है उनको खुश रखना!’
वह अपने आपको एक नए कल के लिए तैयार कर रही थी.
नीला आसमान बड़ी हैरत से खिड़की पर खड़ी इस औरत को देख रहा था.
वह हैरान था कि किस तरह यह औरत अपनी खुशी के लिए उन परंपराओं का सहारा ले रही है, जो औरत को अपनी हद में रहने को मजबूर करते हैं.
आसमान इस औरत के चरित्र को हैरानी से देखता हुआ मुस्कुराता हुआ प्रतीत हो रहा था.
पता नहीं क्या बात थी, शायद वह इस औरत के रूप में उस आदमजात को देख रहा था जो पहले अपनी सहूलियत के लिए परंपराओं का निर्माण करता है और जरूरत पड़ने पर उन परंपराओं और मर्यादाओं में अपने स्वार्थ के लिए बदलाव कर देता है.
आसमान की आत्मा इस मतलबी दुनिया को देख दुखी थी शायद … वह अपने जज्बात रोक नहीं पाया, वह रो पड़ा.
उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े और बड़े जोरों से बारिश होने लगी.
खिड़की पर खड़ी वह मलिका बारिश के खुशनुमा मौसम में यह नहीं देख सकती थी कि दूसरों को सुख देने वाला आसमान क्यों दुखी था और क्यों रो रहा था!
वैसे भी जिस औरत के लिए जिस्मानी खुशी ही सब कुछ हो, वह इतने गहरे अर्थ नहीं समझ सकती.
महाराणी अपने आपसे बोल पड़ी- शायद ऊपर वाला भी मेरे इस फैसले से खुश है, जो बारिश करवा कर मेरी खुशी को और बढ़ा रहा है!
यह सोचते ही वह बड़ी जोर से खिलखिला कर हंस पड़ी और अचानक बारिश और जोरों से होने लगी.
बारिश उसको भगवान का आशीर्वाद लग रही थी.
पर अचानक बारिश तेज होने का कारण धरती पर रहने वाला इंसान नहीं समझ सकता था.
मलिका खिड़की पर खड़ी खुशनुमा मौसम का मजा ले रही थी.
वह अब फैसला ले चुकी थी कि अब तुर्क सल्तनत ही उनका सब कुछ थी.
वह बड़ी आसानी से अपने पिछले कल को भुला चुकी थी.
इतने में ही बादशाह उस कमरे में आया.
उसने अपनी बेगम को खिड़की पर खड़ा देखा.
वह मुस्कुराता हुआ मलिका के पीछे गया और पीछे से कस के मलिका को अपनी बांहों में जकड़ लिया.
अपने शौहर का अहसास पाकर मलिका मचल उठी और थोड़ी सी हंस पड़ी.
उसने पीछे घूम कर देखा तो थोड़ा हैरान हो गई.
उसका शौहर अपनी कमर से ऊपर बिल्कुल नंगा था, उसकी छाती पर घने लंबे घुँघराले बाल थे.
वह थोड़ी शर्मा गई और बादशाह से मुस्कुराती हुई बोली- आपने मुझसे शादी कर के मेरे ऊपर बहुत बड़ा अहसान किया है!
उसकी इस बात पर बादशाह भी मुस्कुरा उठा और बोला- मलिका रजानी-उल-मरियम, तुम्हारे अन्दर एक बात है, जो मुझे अब तुम्हें सिर्फ एक सुंदर औरत से ज्यादा भी कुछ समझने को मजबूर करती है. वैसे भी हम वादा करते हैं कि तुम्हारा हर पल अब इतना शानदार होगा कि तुम अपनी जिंदगी में आने वाली खुशियों को समेटती समेटती थक जाओगी. वह हसीन पल आज रात से ही शुरू होंगे.
इतना बोल कर बादशाह अपनी बेगम का हाथ पकड़ कर कमरे से बाहर जाने लगा.
मलिका मचलती हुई बोल पड़ी- कहां लेकर जा रहे हैं मुझे?
बादशाह- बस तुम तो हमारे साथ चलो और अपने मलिका होने का लुत्फ उठाओ.
मलिका खुशी से बादशाह के पीछे पीछे चल पड़ी.
बादशाह उसको लेकर जहां लेकर जा रहा था, निश्चित ही वह उसके आने वाले जीवन की ख्वाबगाह होने वाली है.
अब जो महाराणी देखने वाली थी, वह उसके पैरों तले जमीन खिसकाने वाला था.
बादशाह अपनी बेगम को लेकर उस बड़े से हॉल में ले जा रहा था.
वह हॉल उसका हरम था.
जैसे ही मलिका बादशाह के हरम में दाखिल हुई, उनकी आंखें फटी की फटी रह गई.
नजारा ही कुछ ऐसा था.
पूरे हॉल में दर्जनों मर्द और औरत नंगे थे और हवस का नंगा खेल अपने पूरे जोश में चल रहा था.
पूरे हॉल में काफी बड़ी तादाद में पलंग लगे हुए थे.
किसी पलंग पर दो नंगे मर्द एक औरत के साथ मजा लूट रहे थे तो दूसरे पलंग पर एक ही मर्द चार लड़कियों के साथ रंग रेलियां मना रहा था.
कहीं पर किसी खिड़की पर एक मर्द एक लड़की को खड़ा कर के पीछे से अपना लंड उसकी चुत में डाले हुए आनन्द लूट रहा था.
कुछ मर्द और औरतें जमीन पर ही बिछे गद्दों पर चुदाई के मजे लूट रहे थे.
एक गद्दे पर एक लड़की एक लड़के के लंड पर बैठी थी और उछल कूद कर रही थी.
पूरे हॉल में जोर जोर से सिसकारियों और मदमस्त आहों की आवाजें गूँज रही थीं.
मलिका अब यह हरम सेक्स बड़े ध्यान से देख रही थी.
यह सब उसके लिए एक नया अनुभव था.
एक जवान लड़की जमीन पर बैठ कर एक मर्द का लंड अपने मुँह में लेकर गन्ने की तरह जोर-जोर से चूस रही थी.
वह मर्द अपने हाथों से उस लड़की का सिर पकड़ कर अपने लंड पर धकेल रहा था.
पूरे हॉल में कम से कम सौ लोग तो होंगे ही, जो बड़े जोर शोर से अपने काम में लगे हुए थे.
सबसे अलग बात मलिका को पता चली कि यहां पर सिर्फ मर्द और औरत ही नहीं बल्कि औरतें और औरतें और मर्द और मर्द आपस में भी मजे ले रहे थे और कुछ नए तरह के रिश्ते कायम कर रहे थे.
दोस्तो, हरम सेक्स कहानी में आपको कितना मजा आ रहा है, प्लीज जरूर बताएं.