ट्रेन में मिली आंटी को रगड़कर चोदा

Views: 3 Category: First Time Sex By RaatKiBaat Published: September 04, 2026 📖 14 min read
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हॉट Xxx आंटी चुदाई कहानी में ट्रेन में एक आंटी मेरे साथ बैठी तो मैं उनसे बातें करने लगा. वे मस्त माल थी. मैंने उन्हें छूना शुरू किया तो वे कुछ नहीं बोली.

दोस्तो, मेरा नाम करन है.
मैं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से हूँ.

मेरी ये हॉट Xxx आंटी चुदाई कहानी कुछ साल पुरानी है.
मुझे घूमने का बड़ा शौक है और वह भी रेल से … तो मैं अक्सर रेल से ही आया-जाया करता था.

उन दिनों मैं दिल्ली में शाहदरा में रहता था और काम के सिलसिले में पहाड़ों में या राजस्थान आता-जाता रहता था.

एक बार मैं ऑफिस के काम से किसी क्लाइंट से मिलने देहरादून जा रहा था तो मैं जनरल डिब्बे में बैठा था.

तभी गाज़ियाबाद से एक आंटी ट्रेन में चढ़ीं और आकर मेरे ठीक बगल में बैठ गईं.

मैंने कनखियों से आंटी को नजर भर कर देखा.
क्या मस्त माल थीं यार … बड़े बड़े चूचे और बड़ी गांड, बलखाती कमर … एकदम सही और सटीक आइटम लग रही थीं.

उनका चेहरा भी काफी सुंदर था.
उन्होंने हरे रंग का सूट पहन रखा था, यह सूट एकदम टाइट था.
उसमें से उनके जिस्म का हर कटाव एकदम साफ समझ आ रहा था.

आंटी के चूचों से मेरा ध्यान ही नहीं हट रहा था.
उनके सूट का गला काफी खुला हुआ और गहरा था जिसमें से उनकी चूचियां बाहर आने को मचल रही थीं.

मुझ जैसे हवसी को उनके दूध देखकर मेरी ठरक जाग गई.

मैं बैठा रहा और अपने फोन में कुछ कुछ करता रहा लेकिन मेरी नजरें आंटी को आंखों से चोदने में व्यस्त थीं.
नवम्बर का मौसम था, तो हल्की सर्दियों की शुरुआत हो गई थी.
शाम का समय हो गया था तो मौसम में निरंतर ठंडक बढ़ने लगी थी.

धीरे धीरे हमारी बात होना शुरू हो गई.
आंटी अकेली थीं और बातूनी स्वभाव की थीं, तो वे जल्दी ही मुझसे काफी घुलमिल गई थीं.

आंटी का नाम सुमन था.

मैं एकदम रेडी था कि जैसे ही आंटी मुझसे सैट हुईं, तो मैं उनकी चूत चोदे बिना नहीं मानूँगा.
हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे.

मैं क्या करता हूँ.
वे क्या करती हैं.

बच्चे कितने हैं, पति का क्या सीन है? आदि इत्यादि.
आंटी ने बताया कि वे गाजियाबाद में रहती हैं और उनके पति जॉब के चक्कर में मुम्बई में शिफ्ट हो गए हैं. वे वहां किसी कम्पनी में मैनेजर है और आंटी यहां अकेली रहती हैं. उनके बच्चे नहीं हैं.

बस ये सुनकर मेरे शैतानी लंड और दिमाग की घण्टी बज गई.
मैंने मन में कहा कि अब तो आंटी की प्यासी चुत को छोड़ना ठीक नहीं है. ये अगर अकेली रहती हैं तो पक्का मुझसे चुदवा लेंगी.

बातों ही बातों में मैंने उनकी उम्र पूछी तो उन्होंने 46 साल उम्र बताई.
उनकी उम्र इतनी दिख नहीं रही थी, वे एकदम टंच माल और 38-40 के आसपास की आइटम लग रही थीं.
उनका मस्त सामान उन्हें एकदम कड़क आइटम बना रहा था.

कुछ देर बाद वे बोलीं- क्या मैं खिड़की की तरफ आ जाऊं? मुझे उधर बैठना पसन्द है.
मैंने कहा- ठीक है, पर मैं अपनी खिड़की छोड़ूँ, तो मेरी पसन्द का क्या होगा?

इस बात पर वे चुप हो गईं.
मैंने उन्हें खिड़की के पास बिठा दिया.

वे बाहर हाथ निकाल कर हवा का मजा लेने लगीं.
मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर के पीछे रख दिया और बैठ गया.

अब अंधेरा सा होने लगा था.
हमारे डिब्बे में लाइट भी न के बराबर जल रही थी, तो आस-पास का बहुत कम दिख रहा था.

बस यही मेरा मौका था.
मैंने आंटी को चैक करने के नजरिए से अपने हाथ को उनकी कमर पर फेरना शुरू किया.

उन्होंने कुछ नहीं कहा.
मेरी हिम्मत और हवस बढ़ने लगी, लंड भी टाइट होने लगा.

मैंने आंटी की गांड पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

अब भी उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं थी.
वे तो अपने हाथ को बाहर निकाल कर ऐसे मजे ले रही थीं, जैसे कुछ हो ही न रहा हो.

अब मैं और आगे बढ़ा.
मैंने उनकी गांड के नीचे अपना हाथ सरकाया और धीरे से कुर्ते के अन्दर से हाथ डाल कर उधर रख दिया, जहां औरत की सलवार शुरू होती है.
मैं वहां से हाथ अन्दर करने लगा.

अचानक उन्हें न जाने क्या हुआ.
वे एकदम से बोलीं- अरे यार क्या दिक्कत कर रहा है ये?

और ऐसा कहकर वे ऊपर को उठ कर बैठ गईं.
आप लोग यकीन नहीं करोगे, आंटी के ये करते ही मेरा पूरा हाथ उनकी गांड पर आ गया था और कमाल की बात यह थी कि मेरी हथेली आंटी की पैंटी के अन्दर चली गई थी.

बस अब तो मेरा मामला और संगीन हो गया था व मुझे मजा भी आ रहा था.
उनके नर्म नर्म चूतड़ मेरी हथेली पर आगे पीछे होने लगे थे तो समझ में आ गया था कि आंटी गांड घिस रही हैं.
मैं भी उनकी गांड को दबाने लगा और एक चूतड़ को मसलने लगा.

वे थोड़ा जल्दी जल्दी आगे पीछे को होने लगीं और मेरा हाथ लगातार उनकी मक्खन सी गांड पर चल रहा था.
मैं समझ गया कि ये आंटी तो चुदास से पूरी भरी हुई हैं और पक्का चुद जाएंगी.

मैंने उसके कान में कहा- अपना नम्बर दो न!
आंटी बोलीं- क्यों?

मैंने कहा- आपसे बात करके अच्छा लगा है. मैं अप डाउन करता रहता हूँ. अगली बार फिर मिलना हो जाएगा और आपको पहले से ही विंडो सीट तैयार मिलेगी!
ये सुनकर आंटी हंस पड़ीं और बोलीं- लिखो!

मैंने अपने दूसरे हाथ से मोबाईल उन्हें दे दिया कि इसमें डायल कर दो!
उन्होंने नम्बर दे दिया.

मैंने पूछा- गाजियाबाद में कहां रहती हो?
उन्होंने बताया- वैशाली में फ्लैट है.

मैं बोला- क्या मैं फ्लैट पर कभी आ सकता हूँ … मिलने?
उन्होंने कहा- बिल्कुल, जब उधर आओ मेरे पास जरूर आना!

बस अब मेरे लौड़े की खुराक तैयार थी, सिर्फ चूत का उद्घाटन करना बाकी था.

उस दिन ऐसे ही बात और छेड़खानी के साथ सफर खत्म हुआ.
आंटी रुड़की उतर गईं और मैं देहरादून निकल गया.

नम्बर मिल ही गया था, तो अब हमारी रोज बातें होने लगीं.

मैं तीसरे चौथे दिन ही सेक्स पर बात करने लगा था, तो पता लगा कि आंटी की अंकल से ज़्यादा बनती नहीं है और वे सेक्स में सन्तुष्ट नहीं हैं.

मैंने पूछा- आंटी, आपको सेक्स में क्या क्या करना पसंद है?
उन्होंने पूछा- पहले ये बताओ कि क्या तुम्हारी कोई लवर या जीएफ है?
मैंने साफ मना कर दिया.

अब आंटी और मेरी बातें सेक्स पर बढ़ने लगीं.
मैं उन्हें किस वगैरह के हॉट फोटो भेजने लगा.

हम दोनों की फोन पर भी सेक्स की बातें होने लगीं, वे बात करती करती ही एकदम गर्म हो जाती थीं और चुदाई की बातें करने लगती थीं.
मैं भी प्यासा था तो एक दिन मैंने कहा कि वीडियो कॉल पर कुछ बात करें?

उन्होंने कहा- हां वीडियो चैट करो!
मैंने वीडियो कॉल की तो वे एक मैक्सी में बैठी थीं.
अन्दर से नंगी थीं, जो बाद में पता लगा.

मैं भी अपने कमरे में बनियान और कच्छे में लेटा था.
बात करते करते मैं सेक्स की बात करने लगा, वे गर्म होने लगीं.

मैंने कहा- आंटी, आपको लंड चूसना पसन्द है क्या?
वे बोलीं- तुझे बताया तो था कि मुझे बहुत पसंद है. मेरा पति मुझे चूसने ही नहीं देता वरना तो मैं पूरा केला खा जाऊं!

मैं बोला- आंटी आप गर्म लग रही हो, अगर हो तो मैं कुछ दिखाऊं?
वे बोलीं- क्या दिखाना है?

तब मैं बोला- आप बताओ, आप गर्म हो क्या अभी?
आंटी बोलीं- बहुत गर्म हुई पड़ी हूँ, नीचे से पूरी गीली हूँ.

मैंने पूछ लिया- तो मेरा लौड़ा देखोगी?
मैं उन्हें अपने लंड की फोटो पहले सेक्स चैट में भेज चुका था और आज लाइव दिखाकर गर्म करना था बस.

आंटी बोलीं- हां दिखाओ न अपना लंड!
मैं एकदम नंगा हो गया.

मेरा खड़ा हुआ लंड देखकर आंटी के मुँह में पानी आ गया.
मैंने कहा- आंटी, आप भी नंगी हो जाओ, आज साथ में मजा करते हैं!

मेरी बात सुनते ही जैसे आंटी इंतजार में थीं, उन्होंने झट से मैक्सी उतार कर फेंक दी.
वे नीचे से एकदम नंगी थीं और उनके बड़े चूचे, बड़ी गांड देख कर मैं पगला गया.

एकदम गोरी माल औरत देख कर लौड़े ने हुंकार भरना शुरू कर दी.
मैंने कहा- अब क्या सोच रही हो सुमन डार्लिंग!

मैंने आंटी का नाम लेकर कहा, तो वे खुश हो गईं.

वे बोलीं- चलो कुछ करते हैं.
मैंने कहा- हां आज साथ में जन्नत की सैर करेंगे, आप अपनी टांगें खोल कर उंगली करना शुरू करो!

वे समझ गईं कि क्या करना है.

हम दोनों ने पूरी मस्ती से हस्तमैथुन किया और रात 2 बजे तक हम दोनों बात करते करते 3 बार अपने अपने हाथ से झड़े.

अब वे बोलीं- मैं थक गई हूँ.
मैंने कहा- सोने से पहले बस ये बताओ सुमन डार्लिंग कि मैं तुझे कब चोदने आऊं?

वे बोलीं- जब तेरा जी हो, आ जाना!
मैं बोला- मैं कल ही आ रहा हूँ और 3 से 4 दिन तुम्हारे पास ही रहूंगा क्योंकि मेरी छुट्टी हो रही हैं.

सुमन आंटी बोलीं- अरे वाह, तब तो मजा आ जाएगा. तू कल सुबह ही आ जा … जितना जल्दी हो सके बस आ जा!

आंटी लौड़े के लिए मचली हुई पड़ी थीं. मैं भी उनकी चुदाई के लिए बेकरार था.
सारी रात मुझे नींद नहीं आई.

सुबह 4 बजे मैं सोया.

फिर 8 बजे उठा और फटाफट रेडी होकर 9 बजे तक निकल लिया.

मैं ठीक 10:30 तक उनके फ्लैट पर आ गया था.
उस दौरान फोन पर हमारी बात लगातार हो रही थी.

मैं उनके फ्लैट में अन्दर चला गया.

वे मेरे लिए पानी और ठंडा लेकर आईं.
मैंने पानी पिया और अपना बैग साइड में रख दिया.

मैं तो रात से ही भरा पड़ा था.
मैंने जाकर गेट बंद किया और आंटी से कहा- क्या मैं बिना कपड़ों के बैठ जाऊं, गर्मी लग रही है!

सुमन बोलीं- एसी चालू तो है?
मैं बोला- मुझे ऐसे ही रहना पसंद है बिना कपड़ों के!

सुमन आंटी ने मुस्कुरा कर कहा- ठीक है जैसे मन हो कर लो.
बस उनका यह कहना था कि मैं एकदम नंगा हो गया.
मेरा पूरा लौड़ा खड़ा था.

आंटी मैक्सी में रसोई में कुछ कर रही थीं, मैं समझ गया कि ये नीचे से नंगी है.
बस मौका आ गया है कि इन्हें रगड़ दूं.

आंटी रसोई में थीं. मेरा लंड खड़ा था.
मैं पीछे से जाकर चिपक गया और गर्दन पर किस करने लगा.

आंटी हंस कर बोलीं- बड़ा बेशर्म है नंगा ही आकर चिपक रहा है!
मैं बोला- सुमन डार्लिंग, जिस दिन से रेल में तुझे देखा है न … तेरे नाम की कई बार मुठ मारी है. आज मैं तेरे मुँह में मुठ मारूँगा!

ये कहकर मैं पीछे से ही उनके चूचे दबाने लगा.

आंटी कसमसाने लगीं.
मैंने गैस बंद कर दी और उन्हें चूमने लगा.

सुमन आंटी की मैक्सी को भी मैंने जल्दी से उतार दिया.
मेरी सोच सही थी; वे नीचे से नंगी थीं.

मैं आंटी के चूचों पर टूट पड़ा, चूसने लगा दबाने लगा.

हम दोनों बाहर हॉल में आ गए.
उधर दीवान पड़ा था.

मैं उन्हें उस सिंगल बेड वाले दीवान पर ले गया और चित लिटाकर किस करने लगा.
उस वक्त हम दोनों एकदम नंगे चिपके पड़े थे जैसे सांपों का जोड़ा मचल रहा हो.

हम दोनों एक दूसरे को प्यासे प्रेमियों की तरह चूम चूस रहे थे.
हम दोनों होंठों में होंठ चिपका कर एक दूसरे के मुँह में थूक छोड़ते हुए मस्ती कर रहे थे.

जीभ से जीभ लड़ा कर गर्म हो रहे थे.

हम दोनों में करीब 20 मिनट तक यही सब चला.

अब मैंने उनके चूचे दबाए और चूसे.
वे एकदम से फट पड़ीं और अपने हाथ से अपने दूध को पकड़ कर मेरे मुँह में देने लगीं.

मैं बारी बारी से आंटी के दोनों दूध चूसता रहा और इसी दरमियान आंटी की चूत को भी रगड़ता रहा.
आंटी की पूरी गीली थी.

आप यूं समझें कि करीब आधा घंटा से ज्यादा देर तक तो मैं सिर्फ आंटी के बूब्स ही चूसता रहा.
वे पागले होने लगीं और उनकी मदभरी कराहों से हॉल में आवाजें गूंजने लगी थीं.

इतनी देर तक चुसाई से आंटी एक बार झड़ चुकी थीं.
अब मैं उनकी छाती से नाभि और नाभि से चूत पर चूसता हुआ आया, फिर उनकी टांगें चाटने लगा.

मैं ऐसे चाट चूस रहा था जैसे कुत्ता हड्डी चाटता है.
आंटी की तलवे, जांघ, पैर की उंगलियां सब चाट चाट कर मैंने गीली कर दीं.

फिर मैंने आंटी को उल्टी लिटाया और पैर चूसते चूसते ऊपर आ गया. अब मैं उनकी गांड चूमने लगा.
थोड़ी देर तक गांड चूमने चाटने के बाद मैं उनकी कमर पर आ गया और पूरी कमर थूक थूक कर चाट मारी.

वे झड़ कर मदमस्त हुई पड़ी थीं और मुझे मेरी मर्जी का करने दे रही थीं.

मैं धीरे धीरे उनकी बगल पर टूट पड़ा और चाटने लगा.
मैंने उनकी दोनों बगलें भी खूब चाटीं.

वापस नीचे आकर मैं आंटी की गांड खोलकर छेद में अन्दर जीभ डाल कर घुमाने लगा.
अब वे वासना से भर गईं और वापस मचलने लगीं.

उन्हें गर्म होता देखकर मैं फिर से उन्हें चित लिटा कर उनकी चुत पर आ गया और उनकी एकदम साफ चिकनी चूत का रस पान करने लगा.

वे मेरे सर को अपनी चुत पर दबाती रहीं.
मैं आंटी की चूत को बर्गर की तरह मुँह में दबाकर खा रहा था.

कुछ ही देर में वे गालियां देने लगीं- आह हरामजादे कुत्ते बहन के लौड़े चोद दे मुझे … कितना चूसेगा!
मैं लगा रहा.

वे फिर से झड़ गईं और बेसुध सी पड़ी रहीं.
अब मेरा मन भर गया था और चुदाई का मूड बन गया था.

मैं खड़ा हुआ और मैंने उन्हें पानी लाकर दिया.
वे पानी पीकर लंड देखने लगीं, तो मैं उनके मुँह पर लौड़ा फेरने लगा.

वे लंड की गर्मी का मजा लेने लगीं.
मैंने लंड उनके हाथ में दे दिया, तो वे उसे चाटने लगीं और कुतिया के जैसे नीचे से ऊपर तक जीभ फेरतीं … फिर वापस ऊपर से नीचे जीभ लाकर आण्ड चूसने लगतीं.

मेरा लंड एकदम टाइट हो गया था.
हालांकि मेरा लंड नॉर्मल साइज का ही है, पर मेरा स्टेमिना अच्छा है.

सुमन आंटी मेरे लंड की चमड़ी पीछे करके टोपा चाटने चूसने में लगी थीं.
मैं एकदम पागल सा होने लगा था.

तभी उन्होंने पूरा लंड मुँह में ले लिया और उस पर जीभ घुमा घुमा कर चूसने लगीं.

मैंने उनका सर पकड़ा और बिना रुके धक्के लगाने शुरू कर दिए, साथ ही मैं गालियां भी देने लगा.
‘आह हां कुतिया चूस मेरा लौड़ा मादरचोद रंडी चूस … और पी मेरा माल!’

आंटी गाली सुनकर और जोश में आ गईं और जोर जोर से मेरा लंड चूसने लगीं.

मैं आंटी के सर को लंड पर पूरा दबा कर धक्के मार रहा था.
फिर जैसे ही मेरा वीर्य निकलने वाला था, तब मैं और तेज हो गया.

मैंने सारा रस उनके मुँह में निकाल दिया और वे पूरी क्रीम खा गईं.
उन्होंने लौड़े को चाट चाट कर साफ कर दिया.

फिर हम दोनों चिपक कर लेट गए.

कुछ देर बाद मैं उठ कर गया और फ्रिज से कोल्डड्रिंक व किचन से चिप्स निकाल लाया.
मैंने एक कोल्डड्रिंक की टिन उन्हें भी दे दी और साथ में चिप्स खाए.

कुछ देर बाद मैं फिर से गर्म हो गया और वे भी लंड पकड़ने लगी थीं.
मैं खड़ा हुआ, लंड तो पहले से ही खड़ा था.

तब भी मैंने फिर से लंड आंटी के मुँह में डाल दिया.
वे समझ गईं और मेरी गांड पकड़ कर अन्दर तक लंड हलक में लेकर चूसने लगीं.

जैसे ही लंड चिकना हुआ, मैंने आंटी की टांगें खोलीं और उनकी चूत पर लंड रगड़ने लगा.
उनका इशारा मिलते ही मैंने एक धक्का मारा. पूरा लंड अन्दर घुसता चला गया.

हॉट Xxx आंटी की चूत खुली हुई थी.
अब वे मजे से चुदने लगीं.

मैं धक्के मार रहा था और गाली दे-देकर उनके मुँह पर चाटें भी दे रहा.

चुदाई का पूरा माहौल गर्म था और ‘आह उ उ आउ आउ’ की आवाज से हॉल में मस्ती भर रही थी.
मेरे धक्के लगते रहे.

वे झड़ने लगीं, पर मैं न झड़ा.
मैंने उन्हें अपने ऊपर बिठा लिया और चोदने लगा.

करीब 30 मिनट तक मैं नहीं झड़ा तो वे मुझे झड़ने के लिए कहने लगीं.

फिर जब मुझे लगा कि अब मेरा निकलेगा.
मैंने जोर जोर से उन्हें बजाना शुरू कर दिया और तेज तेज चोदते चोदते मैं उनके अन्दर झड़ गया.

फिर हम कुछ देर लिपट कर सो गए.
जब उठे तो दोपहर का खाना पीना बनाया खाया और फिर से मैंने उन्हें दबोच लिया.

दोनों पूरे फ्लैट में नंगे ही घूमते रहे थे.

उस रात में भी मैंने उन्हें 3 बार चोदा और 2 बार लंड का रस पिलाया.
ऐसे ही 4 दिन तक मैंने उन्हें दिन रात बजाया.

दो साल तक हमारा रिश्ता बना रह और मुझे चोदने का सुख मिलता रहा.
फिर वे वहां से पति के पास चली गईं.

दोस्तो, यह मेरी सच्ची हॉट Xxx आंटी चुदाई कहानी थी.
यदि आपको पसंद आई हो तो प्लीज मुझे मेल करें.
karankaran02626@gmail.com

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