देसी गर्ल चुदाई कहानी में मैं नौकरानी को चोद रहा था कि उसकी जवान बेटी ने देख लिया. वो मेरा लंड देख कर अपनी बुर खुजलाने लगी.
मेरी पिछली कहानी
पड़ोसन की सहेली की चूत वीर्य से भरी
में आपने पढ़ा कि शैली और गुलाबो दोनों मेरे लंड की मार से थककर चूर हो चुकी थीं।
दोनों की बुर मेरे वीर्य से भरी हुई थी और कमरे में सेक्स की तेज महक फैली हुई थी।
गुलाबो की पायल और चूड़ियों की खन-खन अभी भी गूंज रही थी।
मैं बिस्तर पर लेटा था, मेरा काला मोटा लंड अभी भी आधा खड़ा था।
अब आगे देसी गर्ल चुदाई कहानी:
तभी दरवाजे की ओर मेरी नजर गई।
वहाँ खड़ी थी गुलाबो की 19 साल की जवान बेटी – रानी।
उसकी उम्र बस 19 साल थी, लेकिन उसका शरीर देखकर किसी भी मर्द का लंड फटाफट खड़ा हो जाए।
कच्चे आम जैसे उभरते उरोज, पतली कमर, गोरी मखमली जांघें और लंबे घने बाल।
उसकी आँखें मेरे लंड पर टिकी हुई थीं।
उसके गाल लाल हो रहे थे, होंठ कांप रहे थे।
उसने एक हाथ अपनी सलवार के ऊपर रख रखा था जैसे अपनी बुर को दबा रही हो।
मैंने उसे सख्ती से आँखों से मना किया।
वह थोड़ा सा मुस्कुराई, लेकिन अपनी जगह से हिली नहीं।
गुलाबो ने पीछे मुड़कर देखा तो चौंक गई।
“रानी! तू यहाँ क्या कर रही है बेटी?” गुलाबो घबराकर बोली।
रानी शर्माते हुए अंदर आ गई और दरवाजा बंद कर दिया।
उसकी आवाज कांप रही थी, “मम्मी… मैं सब देख रही थी। दीदी (शैली) और आप… दोनों को… इतना मजा आ रहा था। मुझे भी… चाहिए।”
शैली हँस पड़ी, “अरे वाह! माँ-बेटी दोनों ही प्यासी निकलीं। कामेंद्र भैया, अब इस छोटी सी रानी को भी तो संभाल लो।”
मैंने रानी को पास बुलाया।
वह धीरे-धीरे मेरे पास आई।
उसके उरोज ऊपर-नीचे हो रहे थे।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपने पास बिठाया।
उसकी हथेली गर्म थी।
“रानी, तुम अभी बहुत छोटी हो,” मैंने कहा.
लेकिन मेरा लंड उसके सामने देखकर फिर से पूरा खड़ा हो चुका था।
“नहीं अंकल… मैं 19 साल की हो गई हूँ। कॉलेज जाती हूँ। मेरी सहेलियाँ तो सबके साथ करती हैं। मैंने आज तक किसी लड़के को छुआ भी नहीं। लेकिन आज आपका लंड देखकर… मेरी चूत गीली हो गई है।” वह शर्म से नीचे देखते हुए बोली।
गुलाबो ने अपनी बेटी के बालों पर हाथ फेरा, “जा बेटी, आज तेरा भी जुगाड़ हो गया। कामेंद्र बहुत अच्छा है। तुझे भी असली मर्द का मजा देगा।”
रानी ने हिम्मत करके मेरे लंड को देखा और धीरे से हाथ बढ़ाया।
उसकी नाजुक उँगलियाँ मेरे मोटे काले लंड पर पड़ीं।
लंड जोर से उछला।
वह चौंक गई लेकिन फिर मुस्कुराई।
“इतना मोटा… और गर्म…” वह फुसफुसाई।
मैंने उसे अपने ऊपर खींचा और उसके होंठों पर किस किया।
पहले तो वह घबरा गई, लेकिन फिर उसने भी जवाब दिया।
हमारी जीभें एक-दूसरे से खेलने लगीं।
मैंने उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए।
एक-एक करके उसके उरोज बाहर आए – गुलाबी रंग के, निप्पल अभी छोटे-छोटे लेकिन सख्त हो चुके थे।
मैंने एक चूची को मुंह में ले लिया और चूसने लगा।
रानी सिसकारने लगी, “आह… अंकल… कितना अच्छा लग रहा है…”
शैली और गुलाबो दोनों बगल में बैठकर देख रही थीं।
गुलाबो अपनी बेटी के दूसरे चूचे को सहलाने लगी।
मैंने रानी की सलवार का नाड़ा खोल दिया।
उसकी पैंटी पहले से ही गीली थी।
मैंने पैंटी उतारी तो उसकी बुर दिखी – बिल्कुल साफ, हल्के बालों वाली, गुलाबी और तंग।
“बहुत सुंदर चूत है तेरी!” मैंने कहा और अपनी जीभ उसकी बुर पर फेर दी।
“आह्ह्ह…!” रानी जोर से चीख पड़ी।
उसकी जांघें कांप गईं।
मैंने अपनी जीभ अंदर डालकर चाटना शुरू किया।
उसका पानी निकलने लगा।
स्वाद मीठा और ताजा था।
वह मेरे सिर को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी, “अंकल… और चाटिए… मुझे बहुत मजा आ रहा है… मैं पहली बार… आह!”
कुछ ही मिनटों में रानी का पहला ऑर्गेज्म आ गया।
उसका पूरा शरीर तन गया, बुर से पानी की धार निकली और मेरे मुंह में भर गई।
वह हाँफते हुए लेट गई।
अब मैंने उसे पूरी तरह नंगी कर दिया।
उसकी गोरी त्वचा, पतली कमर और मोटी जांघें देखकर मेरा लंड फटने को तैयार था।
“अंकल… धीरे से डालना… पहली बार है.” रानी ने शर्माते हुए कहा।
मैंने उसके पैर फैलाए, मेरा लंड उसकी बुर के द्वार पर रखा।
सिरा घुसाते ही वह कराह उठी, “उफ्फ… बड़ा है… धीरे…”
मैंने धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया।
उसकी तंग बुर मेरे मोटे लंड को जकड़ रही थी।
आधा लंड अंदर गया तो वह रोने लगी लेकिन गुलाबो ने उसे चूमकर शांत किया, “बस बेटी… थोड़ा और… मजा आएगा।”
एक जोरदार झटके के साथ पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया।
रानी जोर से चिल्लाई, “आआह्ह्ह… फट गई… अंकल!”
मैं रुका रहा, उसके चूचों को चूसता रहा।
धीरे-धीरे उसकी दर्द की आवाजें मजा की सिसकारियों में बदल गईं।
“अब… हिलाइए अंकल…”
मैंने धीमे-धीमे धक्के मारने शुरू किए।
हर धक्के के साथ उसके छोटे चूचे उछल रहे थे।
शैली ने रानी के होंठ चूसने शुरू कर दिए और गुलाबो उसके निप्पल चूस रही थी।
तीनों औरतें मेरे साथ थीं।
मैंने गति बढ़ाई।
कमरे में फिर चट-चट, थप-थप की आवाजें गूंजने लगीं।
रानी की चूत अब पूरी तरह खुल चुकी थी, “हां अंकल… और जोर से… चोदिए मुझे… मैं आपकी रानी हूँ… आपकी दासी… आह!”
मैंने उसे कुतिया की मुद्रा में किया, उसकी कमर पकड़कर पीछे से जोर-जोर से ठोकने लगा।
उसके गोरे नितंब लाल हो गए थे।
हर थप्पड़ के साथ वह चिल्ला रही थी।
कुछ देर बाद मैंने उसे फिर से missionary में लिटाया और उसकी टांगें अपने कंधों पर रख दी।
इस मुद्रा में लंड और भी गहराई तक जा रहा था।
“अंकल… मेरे अंदर… भर दीजिए… मैं आपकी हो गई… बच्चा भी दे दूंगी अगर चाहो…”
उसकी ये बात सुनकर मेरा जोश सातवें आसमान पर पहुँच गया।
मैं तेजी से धक्के मारने लगा।
देसी गर्ल चुदाई करके रानी की आँखें उलट गईं।
उसकी बुर मेरे लंड को जोर-जोर से दबाने लगी।
“मैं आ गई… आह्ह्ह… निकल रहा है…!” रानी चीखी और झड़ गई।
मैं भी कुछ ही देर बाद अपने लंड को उसके गर्भाशय तक धकेलकर जोर-जोर से वीर्य छोड़ने लगा।
गर्म-गर्म मोटी धारें उसकी चूत में भर गईं।
इतना वीर्य था कि बुर से बाहर निकलकर उसके नितंबों पर बहने लगा।
हम दोनों थककर लेट गए।
रानी मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी।
गुलाबो और शैली दोनों मुस्कुरा रही थीं।
लेकिन रानी अभी संतुष्ट नहीं हुई थी।
“अंकल… एक बार और… मैं फिर से तैयार हूँ.” उसने मेरे लंड को हाथ में लेकर कहा।
मैंने मुस्कुराते हुए उसे गोद में बिठाया।
अब वह ऊपर-नीचे होकर खुद ही चुदने लगी।
उसके चूचे मेरे मुंह के सामने उछल रहे थे।
मैं चूसता जा रहा था।
वह तेज-तेज हिल रही थी।
उसकी चूड़ियाँ खनक रही थीं।
“हां… अंकल… गहराई तक… फाड़ दो मेरी चूत को… आज मैं पूरी तरह औरत बन गई हूँ.”
दूसरी राउंड में हम दोनों बहुत देर तक चुदाई करते रहे।
मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े भी चोदा।
फिर शावर के नीचे नहाते हुए उसकी चूत में फिर से वीर्य भरा।
रात भर हम चारों ने अलग-अलग तरीकों से सेक्स किया।
रानी को मैंने कई पोजीशन में चोदा – spooning, doggy, cowgirl, standing, 69।
हर बार वह और पागल होती गई।
सुबह होने तक रानी की बुर मेरे वीर्य से पूरी तरह भरी हुई थी।
उसके चूचों पर मेरे दांतों के निशान थे।
वह मेरी बाहों में लेटी मुस्कुरा रही थी।
“अंकल… अब रोज आना। मैं आपकी दूसरी पत्नी बन गई हूँ। गुलाबो मम्मी और शैली दीदी के साथ मिलकर आपको खुश रखेंगे।”
गुलाबो ने अपनी बेटी को चूमकर कहा, “हाँ बेटी, अब हम तीनों तेरी माँ-बहन बनकर कामेंद्र की सेवा करेंगे।”
इस तरह रानी की पहली चुदाई पूरी हुई।
लेकिन यह शुरुआत थी।
आगे आने वाले दिनों में रानी और भी शौकीन हो गई।
कभी वह अकेले मेरे कमरे में आकर चुदवाती, कभी तीनों मिलकर।
उसकी जवान चूत मेरे लंड की दीवानी बन गई।
मेरी देसी गर्ल चुदाई कहानी कैसी लगी आपको?
pk95295@gmail.com