गर्लफ्रेंड माउथ फक स्टोरी में मेरी सेटिंग ने दिल्ली जाना था. मैंने भी अपना दिल्ली का प्लान बनाकर हम दोनों की बुकिंग AC फर्स्ट क्लास के कूपे में करवा ली.
नमस्कार दोस्तो, मैं आयुष बिंदल फिर से आपके सामने अपनी नई सेक्स कहानी लेकर उपस्थित हूँ.
आप लोगों ने मेरी पिछली कहानी
ननद भाभी की एक साथ चुदाई
को जो प्यार दिया, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.
अब आज की कहानी पर आते हैं.
ये गर्लफ्रेंड माउथ फक स्टोरी मेरी और मानसी की है.
पिछली बार के मिलन के बाद मानसी और मेरी लगभग रोज़ बात होती थी और अपनी अपनी जिंदगी के बारे में नॉर्मल बात हुआ करती थी.
हम दोनों आगे मिलने के बारे में सोचा करते थे.
हमें मिले हुए लगभग तीन महीने हो चुके थे.
एक दिन बैंक जल्दी पहुंच कर लगभग नौ बजे ही मानसी ने फोन किया और कहा कि उसकी कज़िन (चाचा की लड़की) की शादी दो महीने बाद दिल्ली में है. उस वक्त अंजलि (मानसी) की बेटी के एग्जाम का वक़्त रहेगा तो शायद दीपेश और अंजलि उसके साथ उस वक़्त ना जा पाएं. वे शादी के एक दिन पहले ही जाएंगे.
ये सुनकर हम दोनों बहुत खुश तो हुए थे, पर हम मिलेंगे कैसे … ये समझ नहीं आ रहा था.
इसी उधेड़बुन में दो दिन निकल गए.
फिर अचानक से मुझे कुछ ख्याल आया और मैंने फटाफट रेलवे की कुछ जानकारी निकाली.
जानकारी मिलते ही मेरे दिमाग की बत्ती जल उठी और मैंने मानसी को फोन मिलाया.
मैंने उससे पूछा कि वह दिल्ली किस साधन से जा रही है?
वह बोली- अभी कुछ पक्का नहीं है, पर शायद ट्रेन से ही जाऊंगी.
यह सुनते ही मैंने उससे कहा- एक ट्रेन ऐसी है, जो हम दोनों के शहर से होते हुए दिल्ली जाती है, पर थोड़ी धीमे चलती है. जहां फास्ट ट्रेन 20 से 22 घंटे में दिल्ली पहुंच जाती है, वहीं ये ट्रेन 32 घंटे लगाती है.
वह बोली- हां तो?
मैंने उससे कहा- मुझे भी कुछ दिनों बाद दिल्ली जाना है, तो मैं अपनी मीटिंग की तारीख आगे बढ़ा कर तुम्हारे साथ की जाने की तय कर लेता हूँ. हम दोनों एक साथ उसी ट्रेन से फर्स्ट एसी के कूप में चलेंगे.
मानसी ने मेरा इरादा समझते हुए कहा- हां यार, आइडिया तो अच्छा है, पर एक साथ एक ही ट्रेन से जाएंगे तो दोनों के घर वाले शक़ तो नहीं करेंगे?
मैंने कहा- मैं अपना जाना दिल्ली ना बता कर कोई दूसरी जगह बता दूँगा.
ये आइडिया हम दोनों को जम गया.
फिर मैंने फटाफट अपनी और मानसी की टिकट उस ट्रेन में करवा ली.
ये ट्रेन मेरे शहर से तीस किलोमीटर पहले से ही बन कर चलती है. फिर मेरा शहर आता है उसके बाद मानसी का शहर आता है.
मैंने हम दोनों की टिकट बुक करके उसे कंप्यूटर की मदद से छेद-छाड़ करके अपना नाम हटा दिया ताकि अगर दीपेश उसकी टिकेट देखे तो कोई शक़ ना हो.
अब हम दोनों ही उस दिन का इंतजार करने लगे जब फिर से हम दो जिस्म एक जान हो जाएंगे.
यात्रा के 5 दिन पहले मैंने अपने घर में बताया कि मीटिंग के लिए मुझे भोपाल जाना है और 4 दिन के बाद वापस आ जाऊंगा.
वैसे भी में अपनी कंपनी के काम से बाहर जाता रहता था इसीलिए किसी को कोई शक़ नहीं हुआ.
जिस ट्रेन में हम जाने वाले थे, वह शाम को 5 बजे मेरे शहर आती थी और जहां से बन कर चलती थी, वहां से 4 बजे निकलती थी.
मैं उस दिन अपने घर से सुबह दस बजे नाश्ता करके और अपना सामान आदि लेकर बस के द्वारा उस जगह पहुंच गया जहां से ट्रेन बन कर चलती थी.
तकरीबन 12 बजे में स्टेशन पहुंच गया. वहां ट्रेन यार्ड में थी और उस वक्त उसकी वॉशिंग चल रही थी.
मैंने अपना सामान स्टेशन के लॉकर में रखा और ट्रेन के अपने कोच की तरफ बढ़ चला.
वहां पहुंच कर मैंने सफाई कर्मचारी से कहा कि मेरे कूपे की अच्छे से सफाई कर दो.
वह बोला- साहब आप चिंता मत करो हम सब काम अच्छे से ही करते हैं.
मैंने उसे 500 रुपये दिए और कहा कि मैं जानता हूँ कि आप लोग अच्छा काम करते हो, पर इस बार थोड़ा ज़्यादा अच्छे से कर देना. मैं अपनी बीवी के साथ जा रहा हूँ इस कूपे से तो जरा मेरे मुताबिक व्यवस्था कर दो.
वह 500 का नोट देख कर बहुत खुश हो गया और बोला- अब आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए, मैं इस कूपे को ऐसा चमका दूँगा कि बिल्कुल नया जैसा लगेगा.
मैं उसे थोड़ी बहुत और हिदायत देकर वहां से बाज़ार चला गया.
बाजार से मैंने कुछ खाने पीने की चीज़ ली. चार पांच अलग अलग फ्लेवर के कंडोम, कुछ फूल और एक अच्छा से गुलदस्ता ले लिया.
फिर आराम से खा पीकर 3 बजे अपना सामान लेकर ट्रेन के कूपे में पहुंचा तो देखा वाकयी उस सफाई कर्मचारी ने बहुत ही अच्छे तरीके से कूपे की सफाई की थी.
पूरा कूपे होटल के कमरे की तरह साफ सुथरा था और गुलाब की सुगंध भी आ रही थी.
फिर मैंने सामान सीट ने नीचे जमाया और अपने साथ लाई हुई सभी चीजों को से कूपे को सजाने लगा.
पहले मैंने कुछ दिल आकर के गुब्बारे फुलाए, फिर अपने साथ लाए हुए एक गद्दे और चादर को नीचे फर्श पर बिछाया और लाए हुए फूलों को अच्छे से सीट और नीचे गद्दे पर बिछा दिया.
इतने में ट्रेन भी चल पड़ी और मैं दरवाजे को लॉक करके टीटी के पास जाकर अपनी टिकेट चेक करवा ली ताकि बाद में वह आकर हमें डिस्टर्ब ना करे.
मैं कूपे में आ गया और ऊपर की सीट पर जाकर लेट गया. मैं फोन से मानसी से बात करने लगा.
उसने बताया कि वह स्टेशन अकेली ही आएगी और अंजलि को उसके सास ससुर संभाल लेंगे.
मैंने उस वक़्त उससे ज़्यादा बात नहीं की क्योंकि वह अपनी तैयारी में लगी होगी और घर में सास ससुर भी थे.
मैं थोड़ी देर के लिए ऊपर की सीट पर ही सो गया.
करीब 5-45 पर मानसी का कॉल आया.
वह बोली- मैं स्टेशन आ गई हूँ और अकेली ही आई हूँ. दीपेश को बैंक में काम था तो वह नहीं आया है.
ये सुनकर मैं और खुश हो गया.
मैंने उसे बताया कि लगभग दस मिनट बाद ट्रेन उसके स्टेशन पहुंच जाएगी.
हम दोनों इधर उधर की बात करने लगे.
जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आने लगी तो हमने कॉल काट दिया और मैं दरवाजे पर खड़ा हो गया.
मुझे दूर से मेरी जान दिखाई दी, उसने सफेद नीले रंग का सलवार सूट पहना हुआ था, बाल खुले हुए थे.
आज भी वह पहले की ही तरह हुस्न परी लग रही थी.
क्योंकि वह शादी में जा आयी थी इसलिए उसके पास दो बड़े सूटकेस थे.
मैंने गेट से ही उसे हाथ दिखा कर हैलो बोला.
उसने भी मुझे देख मुस्कुरा कर हाथ हिलाया.
ट्रेन धीरे धीरे प्लॅटफॉर्म पर रुक गई, मानसी जहां खड़ी थी, बिल्कुल वहीं पर ट्रेन के कूपे का दरवाजा भी आया.
मैं जल्दी से नीचे उतरा और तुरंत ही मानसी को अपनी बांहों में भर लिया.
मानसी ने भी मेरा पूरा साथ देकर मुझे अपनी छाती से दबा लिया.
क्योंकि ट्रेन का यहां दस मिनट का स्टॉप था और फर्स्ट एसी के कूपे के बाहर भीड़ नहीं होती है इसलिए हमें अलग होने की जल्दी नहीं थी.
पर ट्रेन के अन्दर भी जाना था इसलिए हम पांच मिनट बाद अलग हुए और मैं उसका सामान लेकर पहले ऊपर चढ़ा.
फिर हाथ देकर मानसी को भी ऊपर खींच लिया.
मैंने इधर उधर देखा, जहां कोई नहीं था … तो वापस मानसी को अपनी तरफ खींच कर उसके होंठों को चूम लिया.
पहले तो मानसी हड़बड़ा गई, पर तुरंत ही उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया.
हम दोनों एक दूसरे में खोए हुए ही थे कि इतने में ट्रेन चल पड़ी.
तभी एक अंजान लड़की जो लगभग 20-22 साल की थी, अपने कूपे से निकल कर बाथरूम की तरफ जाते समय हमें ही देख कर मुस्कुराने लगी.
हम दोनों भी उसे देख कर मुस्कुराने लगे.
बाद में पता चला कि वह हमारे बगल वाले कूपे में ही सफ़र कर रही थी.
खैर … अब मैंने मानसी को दरवाजे से थोड़ा अलग किया और बोला कि तुम यहीं रूको, मैं आता हूँ.
उसने सवाल किया तो मैंने उसे शांत रहने को बोला.
मैंने उसके दोनों सूटकेसों को अन्दर ले जाकर नीचे अच्छे से जमा दिया और अपना रूमाल निकाल कर उसे लंबे रूप में फोल्ड किया ताकि मानसी की आंखों पर पट्टी बांध सकूँ.
फिर मैंने बाहर आकर मानसी की आंखों में पट्टी बांधी और उसके हाथ पकड़ कर धीरे धीरे कूपे के दरवाजे तक ले आया.
वहां मैंने ध्यान दिया तो वही लड़की अपने कूपे के बाहर खड़ी होकर हमें देख कर फिर से मुस्कुरा रही थी.
उसने इशारे से मुझे वीडियो बनाने के लिए पूछा, पर मैंने उसे इशारे से ही मना कर दिया.
फिर मैंने मानसी को वहीं खड़ा किया और कूपे का दरवाजा खोल कर गुलदस्ता को पकड़ अपने घुटने पर बैठ गया.
अब मैंने मानसी को अपनी पट्टी हटा कर आंखें खोलने को कहा.
जब उसने आंखें खोलीं, तो उसके सामने मैं बैठा हुआ था.
मेरे हाथ में गुलदस्ता था और पूरा कूपे फूल और गुब्बारों से सज़ा हुआ था.
उसकी आंखों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैंने ट्रेन को इतने अच्छे से सजाया था.
वह आगे बढ़ी और मेरे हाथ से गुलदस्ता लेकर वह भी नीचे घुटने का सहारा लेकर बैठ गई.
उसने मुझे अपने गले लगा लिया.
उसकी आंखों से हल्के हल्के आंसू बह रहे थे.
उसके सुबकने की आवाज़ सुनकर मैंने उसका गुलाबी चेहरा अपने हाथों में भर लिया और कहा कि इसमें रोने की क्या बात है … तुम इतने दिन बाद मिल रही हो कुछ खास तो होना ही चाहिए था!
ये सुनकर उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई.
मैंने आगे बढ़ कर उसके गुलाबी गालों को चूम लिया जहां आंसू बह रहे थे … उधर जीभ से चाट भी लिया.
मानसी ने भी आगे बढ़ कर मेरे लबों को चूमना चाहा … पर मैंने उसके होंठों पर उंगली रख कर उसे रोक दिया.
मैंने कहा- अभी नहीं, थोड़ा इंतज़ार करो!
ये कह कर मैंने उसे खड़ी कर दिया.
उसने पूरा कूपे अच्छे से देखा और मुस्कुराकर कहा कि सीट छोटी है तो गद्दा भी लगा लिया?
मैंने कहा- क्या करूं जान, तुमसे मिलना जो था. मैं नहीं चाहता था कि हमारे मिलन में कोई भी परेशानी आए!
फिर मैंने खड़े होकर कूपे का दरवाजा बंद कर दिया और मानसी से बोला कि नीचे अच्छे से साफ सफाई करवा कर गद्दा बिछाया है. हम दोनों अपने फुटवेयर उतार कर साइड में रख देते हैं ताकि नीचे गद्दा गंदा ना हो जाए.
उसने कहा- तुम यहीं रूको, मैं पहले वॉशरूम से होकर आती हूँ.
उसने अपने सूटकेस से एक पैकेट निकाला और बोली- मैं दस मिनट में आती हूँ.
वह बाहर चली गई.
उसके वापस आने तक मैंने उसके सूटकेस और बाकी सामान को अच्छे से सही जगह पर जमा दिया. कुछ मिनट बाद मानसी जब वापस आई, तो उसने बाथरोब पहना हुआ था!
मैंने पूछा- ये क्यों?
वह बोली- सब्र करो, सब पता चल जाएगा.
उसने आगे बढ़ कर खिड़की का परदा लगा दिया.
हालांकि अन्दर कूपे की लाइट चालू थी, तो लाइट का कोई इशू नहीं था.
फिर उसने अपने मोबाइल से एक से मर्डर-2 का ‘आ ज़रा …’ गाना चालू किया और बड़ी अदा से झूमती हुई अपनी कमर हिला कर थिरकने लगी.
मैं भी उसका साथ देने लगा.
हमारे हाथ एक दूसरे के बदन के ऊपर फिसल रहे थे.
मैंने कहा- क्या बात है जानेमन, मेरे सर्प्राइज़ के जबाव में तुम्हारा सर्प्राइज़ भी काफ़ी अच्छा है.
उसने मेरे होंठों को चूम कर कहा- अभी तो बहुत कुछ बाकी है. अगले डेढ़ दिन में हम दोनों जन्नत की सैर करेंगे.
ये कह कर हम दोनों के होंठ आपस में लड़ गए. इतने दिनों बाद मिलने का जोश और कुछ गाने की वजह से हम दोनों वासना में वहशी होने लगे. एक दूसरे को चबाने सा लगे.
मानसी ने पहल करते हुए मेरी टी-शर्ट उतार दी और अब उसके हाथ मेरे पैंट में उलझ कर उसे उतारने की कोशिश करने लगे.
मैंने भी उसका साथ देते हुए अपने कपड़े उतारने में उसकी मदद की.
अगले कुछ पल बाद मैं सिर्फ़ चड्डी में था.
यह देख कर मानसी फट से नीचे घुटनों के बल बैठ गई.
पहले उसने चड्डी के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाया और फिर मेरी आंखों में झांकते हुए मेरी चड्डी को नीचे सरकाने लगी.
मेरा लंड जो पहले ही सलामी दे रहा था, चड्डी की गिरफ्त से छूटते ही एक झटके से बाहर निकला और मानसी के चेहरे से टकरा गया.
मानसी ने पहले मेरे लंड को अपनी नाक लंड से सटा कर उसे अच्छे से सूँघा.
फिर लौड़े को सहलाती हुई बोली- क्या बात है … एकदम चिकना बना रखा है इसे!
मैंने कहा- जानेमन, तुम्हारे लिए ही किए हैं ये सारे जतन … ले लो मजा!
वह आराम से दोनों हाथों में लंड को भरकर मसलने लगी और मैं जन्नत की सैर करने लगा.
कुछ ही पल बाद मानसी ने लंड पर अपनी जीभ फिराई और आंड से लेकर सामने टोपे तक चाट लिया, फिर गप्प से उसे अपने मुँह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
इस मस्ती में हम दोनों की ही आंखें उत्तेजना में बंद हो चुकी थीं.
कुछ देर बाद मैंने मानसी का सिर पकड़ा और उसके मुँह को चुत का छेद समझ कर उसकी चुदाई करने लगा.
गर्लफ्रेंड माउथ फक करते हुए मेरा लंड उसके गले तक जा रहा था.
अब मानसी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी तो कुछ पल बाद उसने लंड को मुँह से निकाल दिया.
मेरा लंड मानसी के थूक और लार से पूरा गीला होकर चमक रहा था.
मानसी ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगी थी.
मैंने उसे खड़ी कर दिया और उसके बदन से खेलने लगा.
जब मैंने उसके बाथरोब को खोला तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.
दोस्तो, आपको मेरी गर्लफ्रेंड माउथ फक स्टोरी में मजा आ रहा होगा.
प्लीज अपने मेल व कमेंट्स लिखने में कंजूसी न करें.
nehash01012003@gmail.com