हॉट गर्लफ्रेंड Xx स्टोरी में मेरी दोस्त बहुत प्यारी है. उसके साथ कभी सेक्स की सोची नहीं थी पर एक दिन हालात ऐसे बने कि हम में एक दूसरे को पाने की तलब लग गयी.
दोस्तो, मैं लाला बाबू अभी फिर से आप सबके सामने अपनी सैटिंग स्वाति की चुदाई की कहानी वाला रसीला भाग लेकर हाजिर हुआ हूँ.
पुराने पाठक तो मुझे जानते ही होंगे, नए लोगों को बता दूँ कि मैं बिहार के छोटे से जिले के छोटे से गांव का रहने वाला हूँ.
अधिक जानकारी के लिए मेरे नाम से सर्च करके मेरी बाकी कहानियां पढ़ें.
तो दोस्तो, देर न करते हुए हॉट गर्लफ्रेंड Xx स्टोरी पर आते हैं.
मैंने आपको पहले ही
मेरी प्रेमिका और मेरी अधूरी मोहब्बत
में अपनी छोटी हाइट वाली क्यूट सी गर्लफ्रेंड स्वाति के बारे में बताया था.
अभी तक मैंने उसे सिर्फ किस किया था.
फिर एक दिन मौका मिला तो कार के अन्दर उसे नंगी करके उसकी चूत का स्वाद ले लिया था.
लेकिन हम दोनों में चुदाई अभी तक नहीं हुई थी.
अब आज मैं उसकी कुंवारी चुत की चुदाई की कहानी लिख रहा हूँ.
जिस दिन से मैंने उसके साथ कार में फोरप्ले का मजा लिया था, उस दिन मैं और स्वाति रात को कॉल पर और भी गर्मागर्म बातें करने लगे थे.
जो लड़की एक किस की बात में शर्माने लगती थी, वह अब खुलकर चुम्मा-चाटी, लंड-बुर की बातें करने लगी थी.
अब इंतज़ार था बस उस मौके का, जब मैं उसकी छोटी सी कसी हुई कुंवारी बुर में लंड पेलकर उसकी बुर का उद्घाटन करूँ.
वह मौका हमें जल्द ही मिलने वाला था क्योंकि उसकी बहन की शादी नजदीक थी और इसी बहाने वह शहर आ जा सकती थी.
मुझे आज भी वह दिन याद है.
दिन भर ‘हाय हैलो’ जैसी सामान्य बातों के बाद जब रात को ग्यारह बजे उसका कॉल आया तो हमारी बातें होने लगीं.
स्वाति- कैसे हो जनाब?
मैं- ठीक नहीं हूँ यार, एक तो तुम्हारी याद मेरी जान लेने पर तुली है, दूसरे आज शाम से बुखार जैसा फील हो रहा है.
स्वाति उदास स्वर में कहने लगी- ओह्ह्ह … बेबी को बुखार कैसे हो गया? मैंने तो कल का सोचा था कि तुम्हारे साथ टाउन जाऊंगी क्योंकि थोड़ी शॉपिंग करनी है.
मैं- अरे कोई बात नहीं, मैं चलूँगा. इतना ज्यादा बुखार नहीं है. रात तक खुमारी उतर जाएगी.
स्वाति- चलो देखती हूँ. वैसे कोई ज़रूरी नहीं है कि तबियत ठीक ना हो तो चलो ही. ज्यादा देर का काम नहीं है, एक-दो चीजें ही लेनी हैं.
मैं- तुम्हारे पास एक मिनट भी रहने का मौका मैं नहीं छोड़ सकता जान!
स्वाति- जानती हूँ मैं … आई लव यू टू जान … अब सो जाओ, आराम करो. तबियत ठीक लगे तो कल 10 बजे तक आना, टाउन चलेंगे … ओके बाय!
फिर हम सो गए.
अगले दिन मेरी तबीयत में कुछ खास सुधार नहीं हुआ लेकिन और बिगड़ी भी नहीं थी.
मैं अपनी जान से मिलने के लिए बुखार को भूलकर समय से पहुंच गया.
मेरे मन में अभी तक आज के दिन सेक्स करने जैसा कोई विचार नहीं आया था.
मैंने स्वाति को कॉल किया और उससे पूछा कि वह कहां है.
फिर उसकी बताई जगह पर चला गया.
वहां पहुंच कर मैंने दोबारा से कॉल किया तो उसने बताया कि वह पार्लर में है.
चूँकि शादी 3 दिन बाद थी इसलिए वह दुल्हन सजाने के लिए पार्लर वाली से बात करने आई थी.
साथ ही खुद का वैक्स, आईब्रो आदि बनवाने लगी थी.
करीब 15 मिनट बाद उसका मैसेज आया कि वह आ रही है.
मैं उसी पार्लर के नीचे बाइक लेकर खड़ा था.
जब वह नीचे आई तो मैं उसे देखता ही रह गया क्या गजब की हसीन लग रही थी. ऐसा लग रहा था मानो किसी छोटी सी गुड़िया को सजाया गया हो. उसके दूध देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया और लंड में हलचल होने लगी.
स्वाति करीब आकर बोली- ओ हैलो? क्या हुआ बच्चू? पहली बार देख रहे हो क्या? अब चलो भी.
उसने अपनी गांड बाइक पर टिकाई और उचक कर बैठती हुई बोली.
मैंने तुरंत बाइक आगे बढ़ाते हुए कहा- यार, कोई इतनी सुंदर कैसे हो सकती है, दिल कर रहा है अभी चाट जाऊं तुम्हें और तुम्हारी …
स्वाति बोली- धत्त बदमाश. जब देखो गंदी बातें करते हो. ये सब छोड़ो … सुनो, अभी मैं शाम के 4 बजे तक यहां रुक सकती हूँ. तुम बताओ इतने टाइम तक तुम मुझे कहां ले कर जा सकते हो?
मैं बोला- तुमने तो अचानक से प्लान कर लिया आने का … पहले बताई होती तो इस मौके को हमारे मिलन का दिन बना देता. कोई बढ़िया सा रूम बुक कर लेता!
स्वाति ने पूछा- क्यों? रूम में क्या करना है?
मैं बोला- ये तो रूम में जा कर ही पता लग सकता था. आज लगभग 5 घंटे थे, इतने में तो तुम्हें आज मैं कितना प्यार कर लेता?
स्वाति बोली- ओह तो ये बात है, तो चलो चलते हैं. रूम का क्या है, वह तो तुम अब भी ढूँढ सकते हो.
मैंने बाइक रोड के किनारे रोकी, फोन में ओयो ऐप डाउनलोड किया और तुरंत ही एक बढ़िया सा कपल फ्रेंडली रूम बुक कर लिया.
फिर करीब 5 मिनट बाद हम होटल के रिसेप्शन पर थे.
कागजी खानापूर्ति के बाद अब हम रूम में थे.
मैंने रूम बंद किया, लाइट ऑफ की और अच्छे से रूम का मुआयना किया.
फिर मैंने स्वाति को बांहों में भर लिया और उसे चूमने की कोशिश करने लगा.
लेकिन स्वाति ने मुझे रोकते हुए कहा- सुनो सुनो … इतनी भी क्या जल्दी है? पहले तुम थोड़ी देर को बाहर जाओ और दस मिनट बाद आना … और बिना कोई सवाल किए जाओ!
मैं कुछ बोलता, उसके पहले उसने मेरे होंठ पर एक छोटा सा चुम्मा ले लिया और मुझे रूम के बाहर कर दिया.
मैंने सोचा चलो, तब तक आज तो सेक्स होगा ही, तो क्यों न इसके लिए तैयारी कर ली जाए.
यही सब सोच कर मैं फटाक से होटल के बाहर आया और मेडिकल शॉप पर आ गया.
वहां से सेक्स की एक गोली और कंडोम का पैकेट लिया.
फिर थोड़े चिप्स, कुरकुरे के पैकेट्स लिए और स्वाति की पसंदीदा डेयरी मिल्क सिल्क ले ली.
पानी की बोतल ली, एक पेस्ट्री ली और करीब 15 मिनट में वापस रूम के दरवाजे पर खड़ा था.
मैंने दरवाजा खटखटाया.
दरवाजा खुला लेकिन मैं कुछ देख नहीं पाया क्योंकि स्वाति ने चादर से मेरा चेहरा ढक दिया और बोली- बस ऐसे ही रहो, चादर मत हटाना.
मेरे अन्दर आते ही उसने दरवाजा बंद किया और मुझे बेड पर बिठाया.
स्वाति बोली- अपनी आंखें बंद करो, कोई चीटिंग नहीं करना!
मैंने आंखें बंद कर लीं.
फिर उसने चादर हटाई और मेरी आंख पर एक कपड़ा बांध दिया.
मैं बोला- जान ये क्या कर रही हो? मैं तुम्हें देखने के लिए मरा जा रहा हूँ और तुम हो कि मेरे साथ ये पता नहीं कौन सा खेल खेल रही हो?
स्वाति बोली- थोड़ा इंतज़ार का मजा लीजिए.
ऐसा बोलकर वह हंसने लगी.
करीब 5 मिनट बाद स्वाति ने मुझे आंख से पट्टी हटाने का आदेश दिया
मैंने पट्टी खोली.
कमरे में अंधेरा था, खिड़कियों पर पर्दे लगे हुए थे, लाइट्स ऑफ थीं.
एसी के कारण कमरे का तापमान एकदम ठंडा हो गया था और हवा में भीनी-भीनी सी चॉकलेट और गुलाब की मिली-जुली मादक गंध फैली हुई थी.
मैं अभी इस उत्तेजक माहौल को पूरी तरह महसूस भी नहीं कर पाया था कि अचानक मेरी नजर बेड पर चली गई जहां एक हसीना खुद को पूरी तरह चादर में लपेटी हुई बैठी थी.
मैं आगे बढ़ा और बेड पर आ गया.
वहां एक मोमबत्ती और माचिस रखी थी.
मैंने कैंडल जलाई और उसी की रोशनी में उस हसीना के ऊपर से चादर हटा दी.
उफ्फ़ क्या नज़ारा था …
वह लड़की, जिसे गलती से हाथ छू जाना भी पसंद नहीं था, वोही लड़की अब बेहद पारदर्शी ब्रा और पैंटी में अपने नाजुक अंगों को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी.
उसकी नीची निगाहें और तेज़ सांसें उसके दिल की हालत बयान कर रही थीं.
ऐसा लग रहा था जैसे उस शांत कमरे में सिर्फ़ उसके दिल की धड़कनें ही गूँज रही हों.
मैं तो अपनी जान-ए-मन को देखता ही रह गया.
मैं उसके पास गया और उसके चेहरे को ऊपर उठाया.
उसने आंखें बंद कर रखी थीं.
मैंने उसके दोनों आंखों को चूम लिया.
वह जैसे इसी चुंबन का इंतज़ार कर रही थी.
मेरे चुंबन भर की देर थी कि वह ऐसे टूट पड़ी मानो डाल कट गई हो … वह सीधी मेरी बांहों में आ गिरी.
मैंने उसके माथे पर किस किया, आंखों पर किस किया, फिर उसे अपनी बांहों में भरकर उसके गले को चाटने लगा.
एक तो मुझे बुखार था, जिसकी वजह से मेरा बदन पहले से ही गर्म था, ऊपर से ये सुलगता हुआ माल और इसकी जलती हुई जवानी का टच ऐसा लग रहा था मानो मैं झुलस न जाऊं.
मैंने बुखार को इग्नोर किया और वैक्सिंग से चिकनी हुई अपनी कच्ची माल को चाटना शुरू कर दिया.
स्वाति के गले को चाटते हुए मैंने उसकी पीठ को चूमना-चाटना शुरू किया.
इधर स्वाति की सांसें उखड़ने लगीं.
उसकी लड़खड़ाती जुबान से ‘उफ़्फ़ आह्ह्ह’ जैसी आवाज़ें निकल रही थीं जो मुझे और भी उत्तेजित कर रही थीं.
मैंने तुरंत पीछे से स्वाति की कमर को चाटना शुरू किया.
स्वाति ने मेरे बाल पकड़े, खींचकर मुझे आगे खींचा और मेरे होंठों पर टूट पड़ी.
इतने खतरनाक हमले की तो मैंने सोचा भी नहीं था.
वह मेरे होंठों को ऐसे चूसने लगी मानो खा ही जाएगी.
अचानक से उसने मेरे होंठ को अपने दांतों में दबा लिया.
मेरी चीख निकल गई मेरे होंठ से खून निकलने लगा.
वह कुछ सेकंड मुझे बस देखती रही, फिर अपनी जीभ से मेरा खून चाट लिया.
अब वह और भी तेज़ी से मेरे होंठों को पीने लगी थी.
मैं भी इस मस्ती में खुद को पूरी तरह उसे सौंप चुका था.
मेरी जीभ स्वाति के मुँह में थी, जिसे वह ऐसे चूस रही थी मानो कोई लॉलीपॉप हो.
यह काम हम दोनों बारी-बारी से करने लगे.
मैं इतनी गर्मी झेल नहीं पा रहा था.
बुखार और हवस की गर्मी से मैं पसीने में तर-बतर हो गया था.
तभी स्वाति बोली- जान, बुखार है ना तुम्हें … क्यों आए फिर?
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- अपनी रानी के लिए बुखार क्या, मैं चिता से उठकर भी आ जाऊं!
मेरे इतना बोलते ही उसकी आंखें नम हो गईं और वह अब और अधिक उत्तेजना में डूबने लगी.
स्वाति ने मेरी शर्ट उतार दी और मुझे धक्का देकर बेड पर लिटा दिया, फिर मेरे सीने पर चाटने लगी.
ऐसा लग रहा था जैसे उसके अन्दर कोई पोर्न एक्ट्रेस घुस गई हो.
उसने मेरी नाभि में जीभ डालकर कुरेदना शुरू कर दिया.
मेरी तो हालत खराब होने लगी.
जींस में दबा मेरा लंड ऐसा टाइट हो गया था कि मानो अगर उसे बाहर न निकाला गया तो वह जींस फाड़ देगा.
मैंने अपना हाथ जींस खोलने को नीचे किया लेकिन स्वाति ने मेरा हाथ पकड़ लिया और ऊपर मेरे सर की तरफ कर दिया.
फिर उसने खुद मेरी जींस का बटन खोला और ज़िप भी खोल दी.
मैंने कमर ऊपर उठाई तो उसने फटाक से जींस उतार कर बेड के नीचे फेंक दी.
अब मेरा लंड अंडरवियर के अन्दर था.
स्वाति ने लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही किस किया और हल्के से दांत से काट दिया.
मैं सिहर उठा.
वह उठी और मेरे लंड पर बैठ गई.
एक तो साला फुल टाइट लंड, वह भी अंडरवियर में कैद … ऊपर से उसके गुदाज चूतड़ों का दबाव … अहा क्या अनुभव था.
फिर स्वाति मेरे कंधे और गले पर चाटने लगी. उफ्फ़ मैं ये चीज शब्दों में समझा पाने लायक नहीं हूँ.
फिर उसने मेरे हाथों को मेरे सिर के नीचे कर दिए और मेरी चिकनी कांख को चाटने लगी.
उसकी नर्म मुलायाम जीभ की गुदगुदी और उत्तेजना के मारे मेरी सिसकारियां निकलने लगीं.
ऊपर से उसकी गांड का दबाव मेरे लंड को फटने की हालत में ले आ चुका था.
अब स्वाति ने अपनी ब्रा खोल दी.
मैं तो देखता ही रह गया.
वह अपनी मोटी-मोटी रसभरी चूचियों को मेरे सीने पर रगड़ने लगी.
मैं उसका ये आक्रमण झेल नहीं सकता था और अगर मैं अब भी कुछ न करता तो मेरे लंड ने माल फेंकने में देर नहीं की होती.
इसलिए मैंने स्वाति को पकड़ा, पलट कर उसे नीचे किया और खुद उसके ऊपर आ गया.
अब मैं उसके बालों को ऊपर करके उसके कान को मुँह में लेकर हल्के से चूसने लगा.
फिर अपनी गर्म जीभ से उसके कान के भीतर कुरेदने लगा.
स्वाति उत्तेजना से पागल हुई जा रही थी.
वहीं से जीभ को उसकी गर्दन पर फिराते हुए मैंने हल्के-हल्के से उसकी गर्दन को चाटना शुरू कर दिया.
वह लड़की मस्ती में झूम रही थी, उसका पूरा बदन कांपने लगा था.
मैंने स्वाति की चिकनी, आज ही वैक्स कराई हुई कांख को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया.
वह काँख चाटे जाने से इतनी मस्त हो चुकी थी कि उसने मेरे कंधे में दांत गड़ा दिए.
अब मैंने उसे सीधी लिटा दिया और उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा.
मुझे मेरे सीने पर उसकी चूत की गर्मी महसूस हो रही थी. कुछ पल चाटने के बाद मैं कुछ ऊपर की ओर बढ़ा और स्वाति की गुदाज मांसल चूची को मुँह में भरकर पीने लगा.
साथ ही मैं अपने एक हाथ से उसकी दूसरी चूची को मसलने लगा.
चूची मुँह से पीते ही वह अपने आपे से बाहर हो गई.
उसने उत्तेजित स्वर में कहा- आह पी लो मेरे बेबी. तुम्हारे लिए ही तो मैंने अपनी इस रसभरी चूची को संभाल कर रखा था आह आज इन दोनों को निचोड़ कर पी लो. जान जब से कार में तुम इसके साथ खेले हो, ये मुझे बहुत तंग करती है. अब मेरी चूचियां मुझे अपने सीने पर भारी लगती हैं. अब इन्हें तुम ही संभालो!
ऐसे ही बोलती हुई वह मेरे सर को अपनी चूची पर दबाने लगी.
मैं पूरी मस्ती से बारी-बारी से उसकी दोनों चूचियों को 15 मिनट तक पीता रहा.
दोस्तो, मेरी मुहब्बत स्वाति आज मुझसे चुदने के मूड में दिख रही थी.
उसकी चुदाई किस तरह से हुई और बुर फटने पर उसकी क्या हालत हुई, वह सब आपको इस सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूँगा.
आपको मेरी इस हॉट गर्लफ्रेंड Xx स्टोरी पर क्या कहना है, प्लीज मुझे अपने मेल से जरूर बताएं.
lalamalik1993@gmail.com