ठोकुरधाम की कुंवारी चुत कुंवारे लंड की सुहागरात- 2

Views: 7 Category: First Time Sex By jodhpurguy69 Published: June 12, 2026

Thokurdham ki kunwari chut kunware lund ki suhagraat - 2

विर्ज़िनिटी सेक्स कहानी में बाघा और बावरी पोपटलाल के फ्लैट में अपनी पहली चुदाई करने आये थे. उन्होंने पोपटलाल का सारा सामान जो वो अपनी होने वाली बीवी के लिए लाया था, इस्तेमाल कर लिया.

दोस्तो, बाघा और बावरी के अछूते प्रेम का प्रथम मिलन किस तरह से हुआ, उसी को इस सेक्स कहानी में आगे लिख रहा हूँ.

कहानी के पिछले भाग
बाघा और बावरी की सुहागरात की तैयारी
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि वे दोनों एक दूसरे के साथ बड़ी तन्मयता से जुड़े हुए प्रेमालाप में मस्त थे.

अब आगे विर्ज़िनिटी सेक्स कहानी:

धीरे धीरे बावरी के गहने और कपड़े जो दो जिस्मों के मिलन में आड़े आ रहे थे, वे सब एक एक करके हटने लगे.
हर क्षण बावरी की सांसें तेज हो रही थीं.

हर सांस के साथ बावरी के वक्ष-स्थल पर जमे उसके दोनों विशाल पर्वत ऊपर नीचे हो रहे थे … और बाघा उस घाटी में खोता जा रहा था.

जैसे ही बावरी के उन खूबसूरत मम्मों पर से पल्लू हटा, बावरी ने तुरंत अपने हाथों से उनको ढक लिया.
बाघा उनकी एक झलक को भी तरस गया.

कई बार कोशिश के बाद भी बावरी के हाथ नहीं हटे तो बाघा बावरी के पीछे आ गया और पीठ की तरफ से बावरी से चिपक गया.
बावरी की जुल्फों को मुँह से ही हटा कर गर्दन पर किस करने लगा.

उसका लिंग पैंट के अन्दर से ही बावरी के नितंबों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहा था जिसे बावरी भी महसूस कर पा रही थी.
बाघा के हाथ बावरी के हाथों के ऊपर से ही उसके मम्मे दबाने लगे.

धीरे धीरे एक हाथ बावरी के पेट, नाभि को छेड़ता हुआ सीधा योनि-स्थान पर पहुंच गया.
कमर के नीचे अभी भी साड़ी होने के कारण हाथ और चुत के बीच में अब भी पर्दा था पर अपने प्रेमी का हाथ लगते ही बावरी कसमसा उठी.

एक मीठी सी कुहूक के साथ बावरी के हाथ अपने मम्मों को छोड़ कर बाघा को रोकने हेतु नीचे की ओर बढ़ने लगे.
ठीक उसी समय बाघा ने दूसरे हाथ से बावरी के उन रस भरे मम्मों को पकड़ लिया जो अभी अभी बावरी के हाथों से अनावृत हुए थे.

एक विजयी मुस्कान बाघा के होंठों पर आ गई मानो उसने बावरी की जवानी का पहला पड़ाव पार कर लिया हो और अब उस जवानी के खजाने की चाबी बाघा के हाथों में आ गई हो.

थोड़ी देर उन चाबियों (निप्पल) से खेलने के बाद बाघा ने बावरी को अपनी तरफ घुमाया ताकि वह बावरी के जिस्म के इस हसीन हिस्से का दीदार कर सके.
पर बावरी ने घूमते ही बाघा के सीने में अपना सर रख लिया और उसने अपने आप को इस कदर समेट लिया कि बाघा को कुछ देखने को नहीं मिला.

बावरी की घनी काली जुल्फें इस तरह से उसके जिस्म को छुपा रही थीं मानो किसी खजाने की रक्षा में सर्प की टोली बैठी हो … जिनको हटाए बिना बाघा यौवन के छलकते हुए उन अमृत कलशों तक नहीं पहुंच सकता.

पर अंतत वही हुआ … जो होना था.
बाघा बावरी को गोद में उठा कर बिस्तर पर ले आया.

दोनों की आंखें एक दूसरे में अपने लिए असीम प्रेम की अनुभूति कर रही थीं.
बाघा धीरे धीरे बावरी को किस करने लगा और उन सर्प लटों को साइड में करते हुए बावरी के छुपे हुए खजाने को देखने लगा.

उसके एकदम कसे हुए स्तन, कहीं से कोई भी ढीलापन नहीं. नर्म इतने मानो रुई हों, पर उतने ही उठे हुए … दूध जैसे गोरे, आकार मानो सांचे में ढला हुआ स्वर्ण कंदुक, उस पर गुलाबी रंग की 2 छोटी छोटी बौंड़ियां ऐसी लग रही थीं मानो दूध में गुलाब की कलियां अति उत्तेजना के कारण ऊपर उठ कर आसमान छू लेना चाहती हों.

स्तनों में कहीं से कोई झुकाव नहीं, बिल्कुल गोल कलश के आकार के अपने प्रेमी के हाथों से कुचलने को आतुर … नीचे सपाट पेट और उस पर गहरी नाभि …
कुल मिला कर बाघा एकटक उस खूबसूरत नज़ारे को देख रहा था.

ये नजारा इतना मादक और मदहोश करने वाला था कि बाघा बुत बना हुआ था.
जबकि अभी भी बावरी कटिप्रदेश के नीचे साड़ी में ही थी.

बावरी की इस मेनका वाली स्थिति में तो विश्वामित्र का भी मन डोल जाए, तो बाघा क्या चीज था!
वह धीरे धीरे अपने हाथों से उन स्तनों को छूकर देखने लगा कि कहीं वह किसी स्वप्न में तो नहीं है.

हाथों से दूध के स्पर्श के बाद बाघा के होंठों में कंपन हुआ तो मानो वह बौरा गया और बावरी के ऊपर ऐसे टूट पड़ा कि न जाने कितने जन्मों का भूखा हो!

बाघा उसके दोनों गुलाबी निप्पलों को चूस चूस कर लाल कर देने की हद तक लगा रहा.
इतना ही नहीं, निप्पलों के आस-पास वाले गोरे हिस्से पर भी अब लाल निशान उभरने लगे थे.

बावरी तो दोनों आंखें बंद करके सिर्फ कसमसा रही थी.
वह जिस मदहोशी में थी, उसमें बोलने को बावरी के पास शब्द नहीं थे.

उसके कंठ से सिर्फ मदभरी सिसकारियां निकल रही थीं … जो उस माहौल को और मदमस्त बना रही थीं.

बावरी अब बाघा की शर्ट खोलने लगी थी. वह शर्ट को खोल कम रही थी … फाड़ ज्यादा रही थी.
इस प्रेम यज्ञ में सबसे पहली बलि शर्ट के बटनों की ही लगी.

बावरी लगातार बाघा को अपने सीने से चिपकाने में जोर लगा रही थी.
वह बाघा के सर को पकड़ कर अपनी चूचियों पर ले आई और बाघा के मुँह में निप्पल डालने की कोशिश करने लगी.

मम्मों का रसपान करते हुए बाघा अब नीचे की ओर बढ़ने लगा था.
वह बावरी की नाभि में जीभ डालने लगा, तो बावरी की कमर थिरकने लगी.
बाघा इस तरह से जीभ चला रहा था जैसे कोई मशीन नाभि को ड्रिल कर रही हो.

बावरी तो बाघा की जीभ की कला देख कर ही पागल हो गई.
वह सोच रही थी कि जब उसकी योनि पर इसी स्पीड से बाघा जीभ चलाएगा तो क्या होगा!

बावरी इसी मदहोशी में बार बार अपना शरीर इस तरह से ऐंठती कि उसकी गर्दन और नितंब ही बिस्तर पर होते, बाकी कमर और स्तन मानो ऊपर हवा में उठ कर छत को छू लेना चाहते हों.
एक ऐसी लहर सी उठ रही थी बावरी के जिस्म में … जैसे सागर में ज्वार उठा हो.

बाघा जितना नीचे आता जाता, ये ज्वार और ज्यादा ही उठ जाता!

थोड़ा नीचे जाने पर अब बाघा के सामने बावरी की साड़ी थी.

बावरी को लग रहा था कि अब बाघा उसकी साड़ी खोलेगा … शायद मुँह से खोलने का प्रयास करे, पर बाघा साड़ी से ढका हुआ कमर के नीचे का हिस्सा यानि जांघ आदि छोड़ कर बावरी की आशा के विपरीत सीधा पांव के तलुओं के पास चला गया.
वह बावरी के तलवे चाटने लगा, फिर उसके पांव की उंगलियां, अंगूठा आदि चूसने लगा.

वह शायद बावरी को उसके अंगूठे को चूसकर जैसे बता रहा था कि थोड़ी देर बाद उसे इसी तरह लंड चूसना है.
बाघा अपनी बावरी के पंजों से ऊपर होता गया और उसकी टांगों में लिपटी साड़ी को सरकाते हुए जांघों तक पहुंच गया.

इस सफर में कई बार बाघा ने अपने दंत चिह्न छोड़े जो उसकी कामुक कारस्तानी की गवाही दे रहे थे.

बाघा जितना ऊपर की तरफ बढ़ता, बावरी अपने पांव को उतना ही सिकोड़ने की कोशिश करती.

पर पता नहीं कैसे, सिकुड़ने की जगह वह खुद पांव को और खोल देती जो बाघा की लिए एक निमंत्रण होता.
बाघा को लगता कि स्वर्ग का दरवाजा बस थोड़ी दूर और है.

उधर बावरी का शरीर अब उसके काबू में नहीं रहा.
उसकी केले के तने जैसे चिकनी और गोरी गोरी जांघों की चर्बी को बाघा अपने होंठों से दबा दबा कर ऐसे खा रहा था मानो वह चिकन का लेग पीस खाने की कोशिश कर रहा हो.

अब तक तो साड़ी ने भी बावरी का साथ छोड़ दिया था, बेचारी कब तक उस कौमार्य की रक्षा करती.

बावरी अब सिर्फ एक पैंटी में थी.
बाघा बावरी की टांगों के जोड़ के पास जाकर उसकी पैंटी के ऊपर से ही यौन रस की सुगंध ले रहा था.

दुनिया के सारे इत्र, सारे परफ्यूम एक अक्षत यौवना के योनि रस से आने वाली खुशबू के आगे फेल होते हैं.
कोई भी नशा इस रस की बराबरी नहीं कर सकता.

बाघा पैंटी के ऊपर से ही योनि को चाटने लगा.

बावरी को लगा कि बाघा अब उसकी पैंटी उतारेगा और डायरेक्ट चुत चाटेगा … पर आशा के विपरीत बाघा अपनी पैंट उतार कर बावरी के ऊपर चढ़ गया और एक बार फिर से बावरी के रस से भरे होंठों को चूमने लगा.
उस वक्त वे दोनों सिर्फ पैंटी और अंडरवियर में थे और दोनों ही फिर से एक दूसरे के होंठों का रस पान करने में लगे थे.

बावरी की योनि और बाघा का लिंग भी एक दूसरे से रगड़ खाने लगे.
कोई उन दोनों के कौमार्य को बचाए हुए था तो पैंटी और अंडरवियर की परत.

बाघा अभी भी जल्दी में नहीं था.
उसने बावरी को किस करते हुए अपना एक हाथ पैंटी के अन्दर डाल दिया.

बावरी के लिए यह पहली बार था कि जब एक मर्दाना स्पर्श उसकी चुत पर हुआ था.

बाघा ने महसूस किया कि बावरी की चुत बहुत टाइट है और छेद में उंगली भी नहीं जा रही … तो वह खुश भी हुआ और तनिक परेशान भी!

थोड़ी देर बावरी को किस और उसके एक मम्मे को चूसते हुए वह चुत में उंगली करने लगा.
बावरी को हल्का और मीठा दर्द हुआ और वह बाघ का साथ देने लगी.

उंगली से चुत को रगड़ने के बाद बाघा ने वही उंगली पहले अपने मुँह में दी, फिर दुबारा से चुत में उंगली डाल कर बावरी के मुँह में दे दी.

बाघा भी पहली बार चुत का स्वाद ले रहा था और बावरी ने भी पहली बार अपनी ही चुत को टेस्ट किया था.
दोनों उंगली को मस्ती से चूस रहे थे.

पाठको, मैं समझ सकता हूँ कि आप भी बाघा और बावरी की तरह अपनी उत्तेजना के चरम पर हैं.

बाघा धीरे धीरे फिर से नीचे की और जाने लगा, इस बार भी बाघा एक्स्प्रेस के स्टेशन वही थे गर्दन, स्तन, पेट, नाभि होते हुए … पर इस बार वह जल्दी अपने गंतव्य तक पहुंच गया.

उसने पैंटी की इलास्टिक को मुँह से पकड़ कर पैंटी को नीचे खींच दिया.
सहयोग देने के लिए बावरी ने भी अपनी कमर उठा दी और बाघा की मदद करने लगी.

कुछ ही पलों में दुनिया का सबसे कीमती खजाना बाघा की आंखों के सामने खुलने को था.

पर इस बार बावरी भी उसे तड़फाना चाहती थी.
जैसा बाघा ने उसके साथ किया, वैसे ही वह भी बाघा को तरसाना चाहती थी.

जैसे ही चुत से पैंटी अलग हुई, बावरी पलट गई और पेट के बल हो गई.

बाघा के लिए ये अप्रत्याशित था.
पर अभी भी जो नजारा था वह भी कम नहीं था.

एक नवयौवना गौर वर्ण स्त्री का पिछवाड़ा उसके सामने था.
उसका शरीर एकदम सुडौल और अपने आप में पूर्ण सौन्दर्य की प्रतिमा … एकदम बेदाग, सुनहरे काले बाल, शरीर पर मात्र कुछ गहने … इसके अतिरिक कुछ भी नहीं था.
लेश मात्र का भी वस्त्र नहीं था, सिर और सिर्फ ईश्वर की अनुपम कृति आज बाघा के सामने पेट के बल लेटी हुई थी.

सुरमई गर्दन, पतली कमर, सुडौल गुंदाज़ नितंब … आह … नि:संदेह आज बाघा को मौत भी आ जाती तो भी उसे कोई गम नहीं होने वाला था.

बाघा बावरी के नर्म नर्म नितंबों को मसलने लगा, चूमने लगा और वह बीच बीच में काट भी रहा था, जिसके निशान बावरी के जिस्म पर कम से कम एक हफ्ता तो रहने वाले थे.

बावरी से भी अब रहा नहीं गया और वह वापस पलट गई.
इस बार भी नजारा इतना शानदार था कि किसी की भी नजर न हटे. चाहे वह मर्द हो या औरत … एक भरपूर जवान स्त्री की कुंवारी चुत की छटा देखने लायक होती है.

लाल रंग की रेशमी चादर (जो पोपटलाल ने अपनी सुहागरात की लिए बहुत मेहनत से पसंद की थी) उसके ऊपर एक अप्सरा निर्वस्त्र पड़ी थी.
दीपकों की पीली रोशनी में पिघले हुए सोने के समान चमक लिए हुई, उस अप्सरा के काले रेशमी बाल अलग ही दमक बिखेर रहे थे.

बावरी की कमर पर बंधा मोतियों का कमरबंद अलग ही चमक छोड़ रहा था.

बाघा को भी नहीं पता चल सका कि वह क्या कर रहा है. अनायास ही बावरी के हर हिस्से को चूमने लगा और आखिर अपने गंतव्य तक पहुंच गया.

एकदम साफ योनि, जिससे बावरी ने शायद आज ही साफ किया था … उस पर बाल का नामो निशान नहीं था … जैसे कभी थे ही नहीं.

योनि के बीच में एक लंबा सी लकीरनुमा चीरा भर था.
बाघा आज इसी लकीर का फकीर बनना चाहता था.

जब दोनों हाथों से बाघा ने योनि के द्वार को खोला तो अन्दर मानो स्वर्ग का द्वार खुल गया हो … एकदम रक्तिम लाल वर्ण, जो कामरस के कारण चमक रहा था.
बावरी की पैंटी तो उस रस से पूरी गीली हो गई थी.

उसके रस की कुछ बूंदें अभी भी योनि द्वार पर पहरा दे रही थीं.
बाघा ने तुरंत ही उन बूंदों को अमृत समझ कर चाट लिया.

जैसे ही बाघा की जीभ ने बावरी की योनि द्वार को पार कर उसके भगनासा को छुआ, तो बावरी जल बिन मछली जैसे तड़पने लगी.

इतनी देर से उसके मुँह से सिर्फ मदभरी सिसकारियां निकल रही थीं, अब जाकर बावरी के मुँह से शब्द निकलने शुरू हुए.

बावरी- बाघा जी, आज तो आपने अपनी बावरी को बावरी कर दिया … जिंदगी में इतना मजा कभी नहीं आया … आप मेरे पति हो, आज मेरा तन मन धन सब कुछ आपका हुआ, चूसो इस निगोड़ी चुत को, आपको याद करके कितनी ही बार उंगली की है इसमें, पर आज आपने मुझे जो आनन्द दिया है … वह उंगली से नहीं मिलता.

बावरी ने उत्तेजना में बाघा के बाल पकड़ कर अपनी जांघों से दबाते हुए उसका सर अपनी चुत से सटा लिया और भरभरा कर झड़ गई.
बाघा ने भी देर न की, उसने चुत का पूरा पानी चाट चाट कर साफ कर दिया.

बावरी कुछ पलों के लिए शांत हो गई, फिर उठ कर बाघा को किस करने लगी.
बाघा के होंठों के आस-पास लगे अपने ही कामरस को पीने लगी.

बाघा के लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही मसलने लगी.
उसका लंड अब अपने असली आकार में आने लगा था.

बावरी भी अंडरवियर के ऊपर से ही बाघा का लंड चूसने में लग गई.

कुछ पल बाद जैसे ही बावरी ने बाघा की अंडरवियर उतारी, तो एक काल लंबा नाग जैसा लंड उछल कर बावरी को सलामी देने लगा.
वैसे तो लंड औसत साइज़ का ही था, पर बावरी ने पहली बार लंड देखा था.

उसने बिना देरी के उसको मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
बाघा तो मानो स्वर्ग में विचरण करने लगा था.

हालांकि बावरी पहली बार लंड ले रही थी और कई बार दांत लग जाते … पर इससे बाघा को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.

बाघा के लिए भी ये पहली बार था.
जल्द ही वह बावरी के मुँह में झड़ गया.

हालांकि बावरी लंड को मुँह से निकालना चाहती थी पर बाघा की पकड़ इतनी मजबूत थी कि उसको सारा माल निगलना पड़ा.

फिर बावरी ने लंड भी को नहीं छोड़ा, वह उससे कभी अपने मम्मों के पास मसलवाती, कभी चूमती और कभी चूसने लगती.
इससे जल्दी ही बाघा का लंड फिर से आकार लेने लगा.

अब वक्त था अंतिम पड़ाव का.
वे दोनों ही कुंवारे थे और दोनों का पहली बार वाला मामला था … पर आजकल इंटरनेट की कृपा से सबको सब कुछ पता रहता है कि क्या करना है!

जल्द ही वे दोनों 69 की पोजीशन में आ गए ताकि चुत और लंड दोनों गीले हो जाएं.

बावरी- बागेश्वर जी अब मत तड़पाओ, चोद दो मुझे, आज मैं आपमें समा जाना चाहती हूँ!
बाघा- बावरी जी, मैं भी कब से आपके नाम की मुठ मारता था, सोचता था शादी के बाद सब कुछ करेंगे, पर किस्मत में आज ही लिखा था. आज से बाघा और उसके लंड का पानी आपका हुआ!

इतना कह कर बाघा ने बावरी की चुत पर लंड सैट किया, पर बहुत टाइट होने के कारण फिसल गया.

दो तीन बार कोशिश करने पर लंड का सुपारा बावरी की चुत में फंस पाया.
हल्का सा दर्द हुआ बावरी को, पर वह सह गई.

बावरी की चुत बहुत तंग थी.
कुछ पलों बाद बाघा ने एक जोर का शॉट मार दिया.

चुत इतनी तंग थी कि बावरी के साथ साथ बाघा की भी चीख निकल गई.
बावरी की सील टूटी और बाघा का लंड छिल गया.

बावरी- आह आह ई ई हाय हाय गलती में मिस्टेक हो गई … जो चुदवाने चली आई. आह मर गई मैं … बाहर निकालो इसको … बहुत दर्द हो रहा है!
बाघा- बस बावरी जी, दर्द तो मुझे भी हो रहा है, मेरा लंड भी मानो छिल गया है … आह आपकी चुत बहुत टाइट है. सिर्फ एक मिनट सह लो, फिर पूरी जिंदगी मजे ही मजे आने हैं!

कुछ वक्त बाद बाघा धीरे धीरे फिर से लंड को अन्दर बाहर करने लगा और बावरी भी अब मजे लेने लगी.

बावरी- बागेश्वरजी, आज से हम दोनों पति पत्नी हुए … रोज रात को दुकान से आकर ऐसे ही मुझे चोदना. आज मुझे अपने स्त्री होने का पूर्ण आभास हो गया है. आपने मुझे कली से फूल बना दिया है. आई लव यू!

बाघा बावरी की बातों से बेखबर दनादन लंड पेलने में लगा हुआ था.
वे दोनों अपने जीवन के पहले संसर्ग का सुख ले रहे थे.

कुछ देर बाद बाघा बोला- बावरी जी मेरा निकलने वाला है, आ आह्ह …
बावरी- अन्दर ही निकाल दो, आज मैं उस सुख को भी महसूस करना चाहती हूँ. अपना बीज मेरे अन्दर डाल दो, अब तो मैं आपकी पत्नी हूँ, मेरा हक है इस पर!

बाघा और बावरी एक साथ झड़ गए और कमरे में सन्नाटा पसर गया.

सिर्फ बाघा और बावरी की तेज चलती सांसों की आवाज आ रही थी.
वे दोनों एक दूसरे के आलिंगन में सो गए थे.

यहां एपिसोड खत्म हुआ.

एपिसोड के अंत में तारक मेहता ने कहा- दोस्तो, उम्मीद है कि इस सेक्स कहानी ने आपके अन्दर भी वासना भर दी होगी. आखिरकार बाघा और बावरी एक हो ही गए. मुंबई को कुछ देर छोड़ कर अब गोवा चलते हैं.

आगे किसी कहानी में देखेंगे कि टप्पू सेना की मस्तियां गोवा में क्या गुल खिला रही हैं.
उसमें सेक्स का तड़का जानने के लिए पढ़ते रहिए, हिलाते रहिए.

विर्ज़िनिटी सेक्स कहानी पर आप मुझे मेल कर सकते हैं.
मेरी मेल आईडी है
jodhpurguy69@gmail.com

You May Also Like

मेरी कुंवारी बुर की पहली चुदाई कैसे हुई- 3
Views: 196 Category: First Time Sex Author: suhani.kumari.cutie Published: February 28, 2026

लड़की की पहली चुदाई कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे बॉयफ्रेंड के नाकाम रहने पर उसके चचा ने मेरी कुंवारी बुर को चोद कर मुझे मे…

Badalte Rishte -1
Views: 299 Category: First Time Sex Author: ranimadhubala07 Published: August 20, 2025

अगले ही क्षण उसने पति के तेल में डूबे हथियार को अपनी सुलगती हुई भट्टी में रख लिया और पति से जोर से धक्के मारने को कहा। तेल…

Comments