सेक्स बाबा कहानी में एक दिन मैं बस में चढ़ी तो एक साधू वेश वाले प्रौढ़ आदमी के साथ सीट मिली. हमारे पास बैठे कपल आपस में छेड़ाछाड़ी कर रहे थे, मैं गर्म हो रही थी.
नमस्कार दोस्तो, मैं आपके सामने पुनः अपनी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ.
आप सब लोग तो मुझे प्रीति के नाम से जानते ही हैं.
मेरी पिछली सेक्स कहानी
एक रात किन्नर के साथ चुद गई
में आपने पढ़ा था कि मैं अपने मायके जाने के लिए ससुराल से निकली थी तो रास्ते में मुझे एक किन्नर मिल गई थी, जो मुझे गर्म करके अपने घर ले गई.
मैं उसके घर में उसकी सरदार और बाकी की किन्नरों से सेक्स का मजा लेने लगी थी.
उस रात मेरे साथ क्या क्या हुआ था, वह सब आप पढ़ चुके हैं, इसलिए उसे छोड़िए और आगे क्या हुआ. इस सेक्स बाबा कहानी में उसका मजा लीजिए.
जैसा कि आपने पढ़ा था कि मैंने उन किन्नरों के लंड चूसे और उन सभी को ढीला कर दिया था.
लेकिन उसके बाद मैं कुछ ज्यादा ही गर्मा गई थी.
मुझे बड़े बड़े लौड़ों से देर देर तक चुदने की आदत है तो किन्नरों ने मेरी चुत में एक तरह से आग लगा कर मुझे छोड़ दिया था.
उनसे अलग होने के बाद मैंने अपनी चुत में उंगली करके अपनी कामवासना शांत करने की कोशिश की.
पर मर्द के लंड से चुदने में और किन्नर की लुल्लियों से चुदने में काफी फर्क होता है.
इसी लिए उंगली करने से भी मेरी काम वासना अब तक शांत नहीं हुई थी.
उस वक्त मेरे पास कोई उपाय ही नहीं था … वे सारे किन्नर थे और उनकी चुदाई की क्षमता सीमित थी.
खैर .. मैं उधर से अतृप्त होकर अपने मायके जाने के लिए निकल गई.
नजदीकी बस स्टैंड पर पहुंच कर मैं अपने शहर जाने वाली बस ढूँढ रही थी.
मैंने नारंगी कलर का ड्रेस पहना हुआ था, जिसमें लोग मुझे पलट पलट कर देख रहे थे.
मुझे भी इस तरह से लोगों की ठरक को जगाने में काफी मजा आता है.
लेकिन उस वक्त मुझे किसी मर्द की ठरक जगाने से ज्यादा अपने मायके तक जाने वाली बस का इंतजार था.
वहां कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कौन सी बस मेरे मायके जाने वाले रास्ते पर जाने वाली है.
तभी मुझे एक बस के आस पास काफी भीड़ दिखाई दी.
वहां बहुत सारे लोग गाड़ी के बारे में पूछताछ कर रहे थे.
मैंने नजदीक जाकर पता किया तो पता चला कि मेरे मायके वाले शहर तक जाने वाली बस यही है … और यह बस जाने के लिए लगभग रेडी हो चुकी थी.
मैं भागती हुई बस में चढ़ गई.
बस पूरी तरह भर चुकी थी.
मैं जल्दी जल्दी भागती हुई सीट देखती जा रही थी और आगे बढ़ती जा रही थी.
मैं आखिरी सीट तक आ पहुंची.
वहां खिड़की वाली सीट के पास सिर्फ़ एक सीट खाली दिख रही थी.
खिड़की की सीट पर एक स्वामी जी बैठे हुए थे.
उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी, पूरी सफेद … माथे पर बड़ा सा तिलक लगा हुआ था.
उनकी उम्र करीब 60 वर्ष के ऊपर की लग रही थी.
मैंने उनसे रिक्वेस्ट की- स्वामी जी, मुझे खिड़की वाली सीट मिल सकती है क्या?
उन्होंने मुस्कुरा कर मेरे बैठने के लिए जगह बना दी.
वे मुझे देख कर अपनी लुंगी को सहलाने लगे.
मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.
फिर मैंने उनसे सट कर निकलते हुए सीट पर अपनी तशरीफ़ टिकाई.
सीट पर बैठते ही उन्हें ‘नमस्ते’ कहकर प्रणाम किया ‘बाबा जी प्रणाम!’
‘जीती रहो बिटिया!’
उन्होंने बिटिया कहा तो मुझे लगा कि बाबा अच्छा है.
बस उसने अपने बदन पर राख लपेटी हुई थी, जिस वजह से जरा अजीब सा लग रहा था.
बाबा जी से नजर हटा कर मैंने आगे देखा तो पता चला कि मेरे आगे की सीट पर एक लड़का-लड़की बैठे थे.
हमारे आगे दूसरी बाजू में भी एक लड़का-लड़की बैठे हुए थे.
कुछ पल ही हुए थे कि बस ने हॉर्न दिया और चल पड़ी.
देखते ही देखते बस पुणे छोड़कर हाईवे पर आ गई.
बस कंडक्टर टिकट काटकर चला गया.
जैसे ही कंडक्टर गया, मेरे आगे वाली सीट पर लड़की, लड़के को किस करने लगी.
मेरी नजर उनके चुंबन पर टिक गई और मैं वापस सेक्स की आग में जलने लगी.
वे दोनों बहुत उत्तेजित थे.
लड़का भी उसे जोर-जोर से किस कर रहा था.
उसी वक्त बाबा ने हरी-ॐ कहा तो मेरी नजरें उनकी तरफ चला गया.
बाबा हँसते हुए अपनी दाड़ी पर हाथ फेर रही थे.
मैं समझ गई कि ये भी उन दोनों के चुंबन देखने का मजा ले रहे हैं.
मेरी नजरें बाबा से मिलीं तो उनकी मुस्कुराहट ने मुझे भी मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया.
बाबा- सब ऊपर वाले की माया है!
मैंने कुछ नहीं कहा, बस चुप रही.
तभी मैंने आगे दूसरी तरफ वाली रो में नजर डाली तो उस सीट पर बैठे लड़के ने लड़की के स्तन दबाने शुरू कर दिए थे.
लड़की भी मस्ती से उसके सर को अपने मम्मों पर दबाने की कोशिश कर रही थी.
मेरी चुत में आग लगी हुई थी, तो मैं बेबस सी बाहर की तरफ़ देख रही थी और ठंडी हवा को महसूस करके खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी.
अचानक आहिस्ता-आहिस्ता मुझे अपने पैरों पर स्वामी जी का पैर टच होता महसूस हुआ.
मैंने अपना पैर बाजू में सरका लिया, पर वे अपना पैर मेरी तरफ़ और बढ़ाने लगे.
जब मैंने उन्हें देखा, तो उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.
मैंने उनका हाथ पकड़ लिया.
उन्होंने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया.
मुझे लंड मिल गया था मगर बाबा की उम्र साठ साल की थी तो किन्नरों के ढीले लंड याद आ गए.
बाबा ने मुझे कामुक करना शुरू कर दिया था तो मैंने भी समय बिताने के लिए बाबा को छूट दे दी थी.
हमारी चुपके-चुपके लड़ाई चल रही थी, बिना एक शब्द बोले.
बाबा की आंखों में अजीब-सा नशा छाया हुआ था.
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया.
मैं उनसे हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी पर वे मेरी ताकत से कहीं ज्यादा ताकतवर थे.
आखिर मैंने कोशिश छोड़ दी और हार मान ली.
उन्होंने मेरी एक टांग पकड़ कर जोर से दबाई और इशारा किया.
मैंने उन्हें इजाजत दे दी.
मैंने अपना हाथ उनके लंड पर दबाना शुरू कर दिया.
लंड ने फन उठाना शुरू कर दिया था तो मैं हैरान होने लगी थी.
यह एक विकराल किस्म का मोटा लंड था.
बाबा ने मेरा फोन बाजू में रख लिया और मेरी कमर में हाथ डाल कर मेरी वन पीस ड्रेस के गले की तरफ से अन्दर सरका दिया.
बाबा का सख्त हाथ मेरे मम्मों पर आया तो मैं मस्त होने लगी और मैंने आंखें बंद कर लीं.
अब स्वामी जी मेरे स्तनों को जोर-जोर से दबा रहे थे.
मैं मम्मों की मसलाई का आनन्द ले रही थी.
तभी बाबा ने अपनी पोटली में से एक सप्राइट की ठंडी एक लीटर वाली बोतल निकाली और ढक्कन खोल कर मेरे मुँह में लगा दी.
बाबा ने देसी दारू को सप्राइट में मिलाया हुआ था तो मुझे तेज गंध आई.
मुझे तेज न.शे वाली दारू पीने से कोई परहेज नहीं है, तो मैंने गट गट करके तीन घूंट गटक लिए.
एकदम से तेज कड़वाहट मुँह में भर गई थी तो बाबा ने एक हाजमोला की गोली मेरे मुँह में दे दी.
मुझे अच्छा लगने लगा और मैं बाबा को देख कर मुस्कुरा दी.
बाबा ने एक ही सांस में काफी मात्रा में दारू गटक ली थी और बोतल में ठोड़ी सी ही दारू बची थी.
मैंने भी बाकी की दारू गटक ली और बाबा की दी हुई हाजमोला की गोली को मुँह में दबा लिया.
बाबा ने बोतल वापस अन्दर रख ली.
अब उन्होंने मेरे होंठों को दांतों में पकड़ कर दबाया.
फिर उन्होंने एक हाथ से मेरे गले को पकड़ कर खुद की ओर खींच लिया और मुझे किस करने लगे.
उनके मुँह से शराब की तेज़ बू आने लगी थी, जो मुझे मदहोश कर रही थी.
मुझ पर भी दारू का असर होने लगा था.
अब उन्होंने मेरा मुँह पकड़ कर जबरदस्ती जीभ अन्दर डाल दी.
मैं फिर से हार गई … और अब मैं भी उनका साथ देने लगी.
अब उन्होंने मेरे नीचे से अन्दर हाथ डाला और मेरी ब्रा को नीचे खींच दिया.
मैंने भी ब्रा का हुक खोल दिया तो ब्रा मेरे मम्मों से अलग हो गई.
बाबा अब मेरे पैरों के ऊपर लेट गए और मेरी ड्रेस को ऊपर करके मेरे स्तनों को चूसने लगे.
मैंने आंखें बंद करके उनके चेहरे को अपने स्तनों पर और दबाया.
तभी ड्राइवर ने बस को धीमा करके एक छोटे से ढाबे पर रोक दिया.
मैंने तुरंत स्वामी जी को अपने बदन से अलग कर दिया.
वे मुझे देखने लगे, उनके चेहरे पर मासूमियत थी.
कंडक्टर ने ऐलान किया- इधर आधा घंटा रुकेंगे, जिनको खाना आदि खाना हो वे यहीं खा लें. इसके बाद बस नहीं रुकेगी.
यह कह कर वह नीचे उतर गया.
सारे यात्री नीचे उतर गए.
अब बस में सिर्फ़ हम दोनों ही थे.
स्वामी जी फिर से मुझे किस करने लगे.
उन्होंने अपना लंड पूरी तरह बाहर निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया.
मैं उनके मूसल लंड को कस कर पकड़ रही थी.
वे मेरे दोनों स्तनों को हाथों में लेकर जोर-जोर से दबा रहे थे.
हमारे पास ज्यादा समय नहीं था.
स्वामी जी ने जल्दी से मेरी पैंटी खींच कर उतारी और मेरे पैर मोड़ दिए.
उन्होंने लंड को लुंगी से बाहर निकाला.
मैंने अपने दूध पर हाथ रखा.
‘स्वामी जी पहले आप टोपी पहन लीजिए मैं लंड तो ले लेती हूँ, लेकिन कंडोम लगाकर ही चुदाई करवाती हूँ!’
उन्होंने अपनी झोली से कंडोम निकाला और लंड पर लगाने लगे.
मैंने उन्हें देखा तो उन्होंने कंडोम मेरे हाथ में पकड़ा दिया.
मैं सीट पर बैठ गई, स्वामी जी खड़े हो गए.
उनका लंड मेरे मुँह के सामने था.
मैंने लंड पर कंडोम चढ़ा दिया.
उन्होंने मेरे चेहरे को हाथों में पकड़ा और लंड मुँह में डाल दिया.
मैंने कंडोम पहले ही लगा दिया था.
अब मैंने बाबा जी के लौड़े को ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू किया.
यह कंडोम सरकारी अस्पताल वाला था, तो कोई स्वाद नहीं था.
उन्होंने पूरा लंड मेरे मुँह में घुसा दिया.
उनके लंड के बाजू के घने बाल मेरे होंठों को छू रहे थे.
स्वामी जी ने मुझे सर के बल लिटा दिया.
मेरे पैर उठाकर लंड को चूत पर सैट किया और मेरे ऊपर गिर पड़े.
झटके से गिरने से उनका लंड पूरी तरह से मेरी गीली चूत में घुस गया.
मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई ‘आह्ह्ह.’
वे मुझे जोर-जोर से चोद रहे थे.
मैं उन्हें हल्के में ले रही थी.
उनकी स्पीड कम ही नहीं हुई.
बाबा सेक्स करते हुए बस एक ही रफ्तार में लंड अन्दर-बाहर कर रहे थे.
कुछ मिनट बाद उन्होंने लंड बाहर निकाला और मुझे खड़ी कर दिया.
मैं दोनों सीटों के बीच खड़ी हो गई.
उन्होंने मेरे बाल पकड़े और जोर से लंड अन्दर पेल दिया.
वे मेरी चूत को वापस जोर-जोर से पेलने लगे.
इस बार मेरे मुँह से चीखें निकल रही थीं ‘आह … ओह्ह … चोदो मुझे!’
मुझे बस चुदाई का आनन्द आ रहा था.
उन्होंने स्पीड और बढ़ा दी.
बाबा का सेक्स स्टैमिना गजब का था.
फिर मुझे वापस सीट पर लिटाया और चूत में लंड पेल कर चोदने लगे.
बस दो ही मिनट में उन्होंने पूरा पानी कंडोम में छोड़ दिया और मेरे ऊपर ढह गए.
फिर उन्होंने मुझे किस किया.
उनका लंड अभी भी मेरी चूत में था.
बाहर निकाला तो कंडोम में बहुत गाढ़ा वीर्य भरा था.
मैंने खुद को ठीक किया.
उन्होंने भी लुंगी ठीक की और बाहर से खाना ले आए.
करीब दस मिनट बाद सब यात्री वापस आने लगे.
हमने अपने-अपने आसन संभाल लिए और बस चल पड़ी.
हमारे बाजू वाला कपल फिर से चालू हो गया था.
उन दोनों ने अपना काम फिर से शुरू कर दिया था.
इधर बाबा न.शे और थकान के चलते सो गए थे.
दो घंटे बाद बस मेरे शहर पहुंच गई.
वहां से मैं टेम्पो लेकर अपने गांव पहुंची और घर में घुस गई.
मैंने अपने पति देव को खुशी-खुशी सलामत पहुंचने का फोन कर दिया.
उस रात मैं उस बाबा के साथ हुई अपनी चुदाई को याद करती हुई अपनी चुत में उंगली करने लगी.
दोस्तो, अगली बार फिर कोई नहीं चुदाई की कहानी लिखूँगी.
आप मुझे अपने मेल जरूर करें कि यह सेक्स बाबा कहानी आपको कैसी लगी?
धन्यवाद.
preetimisal111@gmail.com