किन्नर शीमेल सेक्स कहानी में बस के सफ़र में मुझे एक हिजड़ा मिला. उससे मेरी बात हुई. उसके स्तन बड़े थे पर लंड छोटा था. उसने मुझे बस में चूम लिया.
मेरा नाम प्रीति खान है. नाम तो मेरा प्रैटी खान है लेकिन सब मुझे प्रीति ही बुलाते हैं तो मैंने भी अपना नाम प्रीति ही रख लिया है.
मेरी पिछली कहानी
स्कूल के टीचर चुद गयी शादी के बाद
को आपने बहुत सारा प्यार दिया और बहुत लोगों की मेल आईं.
इसके लिए मैं दिल से धन्यवाद देती हूँ.
मैं आज आपके पास पुनः अपनी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ.
ये किन्नर शीमेल सेक्स कहानी थोड़ी हटके है.
लेकिन सच में जब मैं इस बारे में सोचती हूँ, मेरी चूत में खलबली मच जाती है.
उस वक्त की बात है, जब मेरी नई-नई शादी हुई थी.
शादी के कुछ ही दिनों बाद मैं ससुराल से मायके जाने की सोच रही थी.
मुझे मम्मी की बहुत याद आ रही थी.
मैंने अब्दुल से कहा भी, लेकिन हमारा ड्राइवर छुट्टी पर था.
मजबूरी में मुझे घर जाने के लिए सरकारी बस का सहारा लेना पड़ा.
अब्दुल ने मुझे बस स्टॉप पर छोड़ दिया और वह अपने काम के सिलसिले में वहां से निकल गया.
मैं बस की राह देखते-देखते करीब दो घंटे खड़ी रही, फिर भी बस नहीं आई.
ठंड में बस स्टॉप पर इधर-उधर टहल रही थी.
आपको पता ही है कि बस स्टॉप पर कितनी भीड़ होती है, हर तरह के लोग, हर तरह की नजरें … सब कुछ समझ में आ जाता है.
हालांकि अलग अलग मर्दों से चुदना मेरी फितरत में शामिल है, तो मुझे यह सब अच्छा लगता है.
कुछ देर बाद मेरी बस आ गई लेकिन लेट होने की वजह से बस के लिए भयंकर भीड़ जमा हो चुकी थी.
लोग धक्का-मुक्की कर रहे थे.
मैं भीड़ में लोगों को धकेलती हुई और खुद धक्का खाती हुई किसी तरह अन्दर घुसी.
बस पूरी तरह फुल थी.
आगे बढ़ते हुए आखिरी रो में एक खाली विंडो सीट दिखी, मैं तुरंत जाकर बैठ गई.
बस बैठते ही मेरे बगल में एक किन्नर आकर बैठ गई.
करीब 15 मिनट बाद बस चालू हुई.
सुबह के लगभग 11 बज रहे होंगे.
मेरे घर का सफर कार से 9 घंटे का था, लेकिन बस से तो 12 घंटे लग ही जाते हैं.
सफर शुरू होते ही बाहर की ठंडी हवा मस्ती करने लगी.
तभी कंडक्टर टिकट के लिए आया, तो उससे फारिग होकर मैं खिड़की से बाहर का नजारा देखने लगी थी.
करीब 2 घंटे बाद बस खाने के लिए रुकी.
होटल कुछ खास नहीं था, फिर भी मैंने वेज खाना खा लिया.
सब वापस बस में आकर अपनी-अपनी सीटों पर बैठ गए.
गाड़ी अपनी रफ्तार से चलने लगी.
लेकिन आधे घंटे बाद अचानक बस में कुछ गड़बड़ हो गई और एक जगह रुक गई.
कंडक्टर और ड्राइवर मिलकर बस चेक करने लगे.
तब तक शाम होने लगी थी.
मुझे चिंता होने लगी कि मैं यदि टाइम पर घर नहीं पहुंच पाऊंगी तो सबको बड़ी चिंता होगी.
मेरी ये चिंता की लकीर मेरे बगल वाली किन्नर ने पकड़ ली.
उसने बहुत प्यार और मधुरता से मुझसे बात शुरू की.
देखते-देखते हम दोनों में खूब बातें होने लगीं.
वह पुणे तक जाने वाली थी, उसका नाम संजना था.
मैंने उसके जीवन के बारे में पूछा और हम दोनों बातें करने लगीं.
तभी कंडक्टर और ड्राइवर ने जुगाड़ करके बस चालू कर दी.
गाड़ी फिर से रफ्तार पकड़ने लगी.
मैं और संजना अब जमकर बातें करने लगे.
हम दोनों के बीच हंसी-मजाक चलने लगा.
वह बातचीत करते-करते मेरी जांघों पर हाथ रख देती थी.
कभी-कभी वह मेरे हाथों को पकड़ लेती थी.
उसके बोलने में जादू था.
हमारी बातें धीरे-धीरे सेक्स की ओर बढ़ने लगीं.
जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ता गया, हमारी बातें कम होती गईं और हम एक-दूसरे के हाथ पकड़ कर मस्ती से खिलवाड़ करने लगीं.
तभी अचानक उसने मेरे गले पर किस कर दी.
मैंने उसे गुस्से से देखा, तो उसने मेरे होंठों को चूम लिया.
रास्ते में उसने मुझसे कहा- तुम तो बस मेरा साथ दो, वरना मैं हंगामा कर सकती हूँ. मेरी तो कोई इज्जत है नहीं, पर तुम्हारी इज्जत जा सकती है.
मैं घबरा गई और संजना को देखने लगी कि अब इसका क्या इलाज किया जाए.
वह हंस दी और बोली- मैं तो मजाक में ऐसा कह रही थी. तुमको अच्छा लगे, तो ही मेरे साथ मजे लो वर्ना कोई बात नहीं है.
मैं अब संयत हो गई और उसके साथ मजे लेने लगी और कहीं न कहीं मेरी तरह तरह के लंड से चुदने की खुजली ने मुझे संजना के साथ सेक्स करने को प्रोत्साहित भी किया.
मैं उसके साथ लग गई और उसका साथ देने लगी.
अंधेरा होने की वजह से किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था.
शुरुआत में मुझे नींद आने लगी थी, लेकिन जैसे-जैसे संजना मुझे किस करती गई, मैं भी उसे और ज़ोर से साथ देने लगी.
उसने साड़ी पहन रखी थी.
किस छोड़ते हुए उसने मुझे अपने स्तन चूसने के लिए कहा और ब्लाउज़ से स्तन बाहर निकाल दिए.
उसके स्तन देसी औरत के थे, भरे-भरे.
मैं उनका रसपान करने लगी और वह मेरे स्तनों को दबाने लगी.
मुझे भी मस्ती चढ़ने लगी.
पुणे पहुंचते-पहुंचते करीब 12 बज गए.
ड्राइवर ने कहा- गाड़ी आज इससे आगे नहीं जा सकती है.
हमें बस से उतरना पड़ा.
तभी संजना ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे उसके साथ चलने को कहा.
मैंने उससे अपनी परेशानी बताई.
उसने मुझे 10-15 मिनट बाहर इंतज़ार करवाया, एक गली में ले गई, किसी घर के सामने रुकवाया.
वह अन्दर गई, दस मिनट बाद बाहर आई और बोली- अन्दर चलो!
मैं बहुत घबरा रही थी.
लेकिन उसके व्यवहार से हां कह दी और हम घर के अन्दर चले गए.
वहां एक फोन रखा था, संजना ने मुझे फोन करने की इजाज़त दे दी.
मैंने अब्दुल को फोन किया और सारी कहानी सुना दी … बस किन्नर वाली बात छुपा ली.
मैंने झूठ बोलकर कहा कि मैं एक फैमिली के पास रुकी हूँ.
जैसे ही बात खत्म हुई, मैंने गौर किया कि संजना के साथ घर में और भी कई किन्नर थे.
संजना ने कहा- डरो मत, ये हमारी कोठी है और हम यहीं रहते हैं.
वहां 7-8 किन्नर थे.
कोठी की मुखिया बाहर आई.
मुखिया किन्नर 45 साल की लग रही थीं और सारे किन्नर उनकी बड़ी इज्जत कर रहे थे.
उन्होंने बहुत प्यार से मेरा स्वागत किया और मुझे अपने कमरे में ले गईं.
कमरा बहुत अच्छे से सजा हुआ था, बड़ा बिस्तर, टीवी, म्यूज़िक सिस्टम, छोटा फ्रिज. अटैच्ड टॉयलेट भी था.
उन्होंने अपना नाम दीपिका बताया.
वे मुझे बाथरूम दिखाने ले गईं.
बाथरूम भी बहुत सुंदर था, वहां टब बाथ भी था.
मैं नहाकर बाहर आई, अभी भी वही ड्रेस पहने थी.
तब दीपिका जी ने मुझे नाइट सूट दे दिया.
हम दोनों इधर-उधर की बातें करने लगीं.
मैंने उन्हें अपने बारे में बता दिया, वे भी अपनी बातें बताने लगीं.
उनका नाम पहले दीप था.
वे स्कूल में टॉपर थीं.
फिर जब वे 18 साल की हुईं, तब उनके स्तन महिलाओं की तरह बढ़ने लगे.
उनकी आवाज़ पहले से ही लड़की जैसी थी.
इस तरह से दीपिका जी ने मुझे अपनी पूरी कहानी सुना दी.
तभी संजना ने दरवाज़ा खटखटा कर दीपिका जी को आवाज़ लगाई.
दीपिका जी ने उसे अन्दर आने के लिए कह दिया.
खाना तैयार था.
हम तीनों बाहर आए.
वहां चिकन करी, रायता, राइस और चपाती बनाई गई थी.
चार बोतलें दारू भी रखी हुई थीं. सब लोग बैठ गईं.
दीपिका जी के आने के बाद सबसे पहले दीपिका के सामने खाना परोसा गया.
वहां दो बड़े प्लेट थे.
उसमें सबका खाना डाला गया.
दीपिका जी ने सबके ग्लास में दारू भर दी.
उन्होंने मुझसे भी पूछा.
मैंने मना कर दिया.
मेरे लिए और दीपिका जी के लिए एक ही प्लेट में खाना परोसा गया.
अब उन्होंने पीना शुरू कर दिया.
दारू पीती हुई वे सब खाना भी खा रही थीं.
दीपिका जी ने पूरा ग्लास एक ही झटके में खत्म कर दिया.
फिर उन्होंने अपने हाथ से मुझे खाना खिलाना शुरू किया.
मैंने मना किया, तो सभी मेरी तरफ़ क्रोधित होकर देखने लगीं.
दीपिका जी ने बहुत प्यार से कहा- यहां मुझे कोई मना नहीं करता.
मैंने उनकी बात मान ली और उनके हाथ से खाना खाने लगी.
दीपिका जी मुझे अपने हाथों से खाना खिलाती रहीं.
मैंने गौर किया कि सब लोग दारू के ग्लास एक ही झटके में खत्म कर रहे थे … जैसे हम पानी पीते हैं, वैसे वे दारू पी रही थीं.
सबने कम से कम 5-6 ग्लास पी लिए.
दीपिका मुझे भी खिला रही थीं और खुद भी खा रही थीं.
करीब आधे घंटे में सबका खाना खत्म हो गया.
फिर दीपिका जी मुझे अपने कमरे में ले गईं.
कमरे में जाते ही उन्होंने मेरे सामने ही अपना नाइट गाउन उतार दिया. उन्हें ज़रा भी शर्म नहीं आ रही थी.
वे बस मुझे देख रही थीं.
मुझे समझ आ गया कि यह किन्नर मुझसे सेक्स करने की ख्वाहिश में है.
उनका शरीर काफी हट्टा-कट्टा था, पेट बाहर निकला हुआ था.
बेड पर आकर उन्होंने मुझे भी बेड के पास बुला लिया.
दीपिका ने कहा- मैं हमेशा ऐसे ही सोती हूँ!
शराब के कारण उनकी बोलचाल ठीक से नहीं हो रही थी.
मैं उसके बगल में जाकर सो गई.
जैसे ही मैं उसके पास लेटी, वे मेरी तरफ़ मुड़ीं, मेरे बाल सहलाने लगीं और मुझे किस करने लगीं.
उनके मुँह से शराब की तेज़ बू आ रही थी.
पर मुझे मजा आने लगा था.
मैं उनका साथ देने लगी.
मेरी और उनकी जीभ एक-दूसरे से टकरा रही थी.
उन्होंने मेरा नाइट गाउन उतार दिया, ब्रा खोल दी.
अब मेरे स्तन आज़ाद थे.
मेरे बड़े स्तनों को वे बड़े प्यार से दबा रही थीं.
फिर दीपिका जी मेरे एक निप्पल को भी चूसने लगीं.
वे मेरा पूरा स्तन मुँह में ले रही थीं.
मैंने भी अब उनकी ब्रा उतार दी.
उनके स्तन भी बड़े बड़े थे … कम से कम 36 इंच के तो होंगे ही.
वे थोड़ा ऊपर आईं और उन्होंने अपने स्तन मेरे मुँह के सामने ला दिए.
मैंने उनका एक स्तन मुँह में ले लिया.
उनके स्तन बड़े थे, पर निप्पल लड़कों जैसे ही थे.
मैं निप्पल को ज़ोर-ज़ोर से चूस रही थी और दूसरा स्तन दबा रही थी.
उन्होंने अपनी नाइट पैंट उतार दी.
फिर मेरी पैंटी भी उतार दी.
अब उन्होंने मेरी झांट के बालों के बीच घिरी मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया और उंगली अन्दर-बाहर करने लगीं.
मेरी चूत पानी छोड़ने लगी.
मैंने उनका मुँह अपनी चूत पर दबाया और कमर ऊपर-नीचे करने लगी.
मैं झड़ गई तो उन्होंने रस चाट लिया.
अब वे मेरे बगल में लेट गईं.
उनका पेट थोड़ा निकला हुआ था.
उनका लंड ज़्यादा बड़ा नहीं था, बस 4 इंच का था.
उन्होंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया.
मैं उनके ऊपर चढ़ गई.
उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर सैट किया, तो मैं उनके लंड पर बैठ गई.
उनका लंड मेरी चूत में अन्दर चला गया और मैं ऊपर-नीचे करती हुई चुदने लगी.
कुछ देर बाद उन्होंने मुझे पकड़ कर नीचे लिटा दिया, मेरे पैर हवा में उठाए और मेरी चूत में लंड डाल दिया.
वे ज़ोर-ज़ोर से लौड़े को अन्दर-बाहर करने लगीं.
कभी तेज़, कभी धीरे … लंड पूरी तरह अन्दर-बाहर हो रहा था.
दो मिनट बाद वे वापस बेड पर लेट गईं और मुझे अपने ऊपर बिठा लिया.
मैं उनके लंड पर उछल रही थी और उनके बड़े बड़े स्तनों को दबा रही थी.
मुझे एक किन्नर के लंड से चुदने में बहुत मज़ा आ रहा था.
उनके स्तनों को दबाते वक्त वे ‘आह्ह … ओह्ह … ’ जैसी आवाज़ें निकाल रही थीं और मैं भी जोर-जोर से चीख रही थी.
मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि वे मुझे चोद रही हैं या मैं उन्हें चोद रही हूँ.
वे मेरी गांड पकड़ कर मुझे ऊपर-नीचे करने लगीं.
करीब 5 मिनट में उन्होंने कंडोम के अन्दर वीर्य निकाल दिया.
फिर उन्होंने मुझे गले से लगाया और किस करने लगीं.
अब उन्होंने मुझे पीठ के बल लिटा दिया.
उनका लंड मेरी चूत से बाहर आ गया.
वे मेरी चूत को चाटने लगीं क्योंकि मैं अभी संतुष्ट नहीं हुई थी.
उन्होंने उंगली मेरी चूत में डाली और अन्दर-बाहर करने लगीं.
मैंने उनके बाल पकड़ कर उनका मुँह अपनी चूत पर और ज़ोर से दबाया.
वे करीब 10 मिनट तक मेरी चूत चाटती रहीं.
फिर मैंने उन्हें अपने नीचे लिटाया और उनके मुँह के ऊपर बैठ गई.
उन्होंने मेरे नितंबों को ज़ोर से पकड़ा और मेरी चूत को चाटने लगीं.
मैंने अपने दोनों हाथों से उनके बाल पकड़े और चूत को जोर-जोर से उनके मुँह पर रगड़ने लगी.
मेरे मुँह से जोर-जोर से चीखें निकलने लगीं.
अंत में मैं झड़ गई और अपना प्यार भरा पानी उनके मुँह पर छोड़ दिया.
उन्होंने सब पी लिया.
थोड़ी देर बातें करते-करते हम सो गईं.
सुबह करीब 9 बजे मैं उठी.
मैंने तुरंत पति को फोन किया, थोड़ी बात की और फोन रख दिया.
दीपिका दीदी पहले से जाग रही थीं.
उन्होंने मुझसे फ्रेश होने को कहा.
तभी वहां दूसरी किन्नर आ गई और मुझे चाय के साथ नाश्ता दे गई.
मैं उन सब किन्नरों को सेक्स गिफ्ट देने के बारे में सोचने लगी.
मैंने दीपिका दीदी को अपनी गिफ्ट देने की सोच के बारे में बता दिया.
उन्होंने भी खुशी-खुशी हां कह दिया.
दीपिका ने सभी किन्नरों को हॉल में बुला लिया.
दीदी ने सबको एक सर्कल में खड़े होने के लिए कहा.
जब सब लोग आ गईं, तो मैं उनके बीच में गई.
दीपिका दीदी ने गाना लगा दिया.
मैं सबसे पहले संजना के पास गई और उसे सबके सामने किस करने लगी.
वह भी मुझे जोर-जोर से किस करने लगी.
एक मिनट तक किस करने के बाद मैं नीचे बैठ गई.
मैंने संजना की सलवार का नाड़ा खोला और उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.
उसका लंड 3 इंच के आसपास ही रहा होगा.
संजना को ज़्यादा देर नहीं लगी … वह तुरंत मेरे मुँह में पानी छोड़ गई.
फिर मैं अगले किन्नर के पास गई और उसे किस करने लगी.
उसके बाद मैंने अपना दूध उसके मुँह में डाल दिया. उसे बहुत मज़ा आया … उसने भी मुझे अपना टुन्नू सा लंड चुसवाया.
ऐसे ही मैंने वहां मौजूद 8 किन्नरों को एक-एक करके किस किया और उनके लंड चूसकर सबका पानी निकाल दिया.
सबके लंड तीन से चार इंच के बीच में थे.
उनमें से सिर्फ़ एक किन्नर शीमेल सेक्स में 2 मिनट तक टिकी रही, बाकी सबका पानी 1 मिनट के अन्दर ही निकल गया था.
आखिरी में मैं दीपिका जी के पास गई.
उन्हें किस किया और फिर सबके सामने उनका लंड अपनी चूत में ले लिया.
दीपिका जी ने पूरी जोश से मेरी चुदाई की और वे मुझे पूरे 5 मिनट तक चोदती रहीं.
अंत में उन्होंने कंडोम के अन्दर ही पानी छोड़ दिया.
मैंने टाइम देखा तो आधे घंटे में मैंने 9 किन्नरों के साथ किसिंग की थी और और उन सभी के लंड चूस चूस कर उनका पानी निकाल दिया था.
फिर मैं दीपिका जी के कमरे में गई, नहाया, ड्रेस पहनी और सबको अलविदा कहकर अपने आगे के सफर के लिए निकल पड़ी.
मेरे जीवन में तरह तरह के लंड से चुदने के अनुभवों में यह एक खास अनुभव रहा था.
आपको मेरी यह किन्नर शीमेल सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
preetimisal111@gmail.com