हॉट वर्जिन Xxx स्टोरी में मेरी मौसी की बेटी की कमसिन सहेली सुबह सवेरे मुझे अपनी सहेली के घर ले गयी. वहां उसने कैसे मेरे लंड का मजा लिया?
दोस्तो, मैं अनिकेत आपको अपनी सेक्स कहानी में एक ऐसी चुदक्कड़ मां बेटी की चुदाई को लिख रहा हूँ जिसे पढ़ कर आपको मजा आ जाएगा.
कहानी के पहले भाग
मौसेरी बहन की सहेली की वासना
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि शादी में मिली एक सेक्सी भाभी छत पर बने बाथरूम में किसी अन्य लेडी के साथ लेस्बियन सेक्स का मजा ले रही थीं.
मैं बाहर खड़ा उनकी कामुक आवाजों को सुन रहा था.
अब आगे हॉट वर्जिन Xxx स्टोरी:
कुछ देर बाद शायद दूसरी वाली महिला बाहर की तरफ जाने लगी थी, तो उन भाभी की आवाज आई.
वे शायद उसका हाथ पकड़ कर बोलीं- साली रुक न … जाती कहां है … बैठ नीचे और डाल अपनी उंगली मेरी चूत में … नहीं तो चूस इसे जी भरकर.
मैं तो बाथरूम में वेंटीलेटर वाली विंडो से झांक कर उनकी इस हालत को देखकर काफी शॉक्ड था.
उन भाभी की बॉडी काफी अट्रैक्टिव थी लेकिन उनका स्वभाव इस तरह का होगा, यह मैंने सोचा नहीं था.
मैं जिस तरह से अन्दर झांक रहा था, उससे नीचे बैठी भाभी को नंगी तो नहीं देख पा रहा था, पर मैं उनका फेस देख पा रहा था.
वे जोर-जोर से बोल रही थीं- साले को मैं जाने नहीं दूँगी … जब से मिली हूँ, उससे चुदवाने को तरस गई मैं!
नीचे वाली भाभी बोली- किसको देखा है?
वे बोलीं- तू उंगली डाल साली! पानी निकाल मेरा.
फिर 2 मिनट के बाद वे शांत हो गईं.
दूसरी भाभी नीचे से उठी और पूछा- कौन है वह जिसके लिए पागल हो रही है? जिसके लिए इतना सारा रस निकाला!
भाभी बोलीं- है, बाद में बताऊंगी.
फिर वे दोनों फ्रेश होकर चली गईं.
मेरी तो हालत खराब हो रही थी.
कुछ 5 मिनट बाद मौसी जी की आवाज आई- बेटा अनिकेत, खाना खा लो … आ जाओ!
मैं नीचे जाकर सबके साथ खाने लगा.
कल की तैयारी के बारे में बात हो रही थी.
उतने में वे कातिल मोहतरमा आईं.
वे भाभी जी, मौसी जी से बोलीं- कल आती हूँ दीदी!
मौसी जी बोलीं- खाना खाकर ही जाओ आज! मैं एक नहीं सुनूँगी तुम्हारी.
फिर वे इधर-उधर देखने लगीं.
मौसी बोलीं- क्या हुआ?
अचानक से वे बोलीं- कुछ नहीं.
मैं अन्दर से सिर्फ उनकी आवाज ही सुन रहा था. जल्दी से खाना खाने के बाद मैं उन्हें देखने अपने रूम से निकला.
मैंने देखा कि अभी भी उनके कपड़े कुछ गीले थे.
मैं उस वक्त ठीक उनके पीछे था.
अचानक मौसी जी बोलीं- बेटा अनिकेत, अब सो जाओ. कल बहुत काम है!
वे जल्दी से पीछे मुड़ीं और मुझे देखकर बोली- हां जी, कल बहुत काम है … आप रेस्ट कर लीजिए.
यह कह कर उन्होंने एक स्माइल दे दी.
अभी वे एक साधारण संस्कारी नारी की तरह बात कर रही थीं … जबकि कुछ देर पहले तो जैसे सनी लियोनी बन गई थीं.
‘चुत चाट मेरी!’ मेरे कानों में उनका डायलॉग गूंज रहा था.
मैं छत की तरफ जाने लगा तो मेरी छोटी बहन बोल पड़ी- अभी फिर से स्मोक करने जा रहे हो?
मैंने कहा- यार छोटी, कहां क्या बोलना है … सीख तो ले बेटा!
मैं स्मोक करते-करते उसके बारे में सोच ही रहा था कि किसी की ऊपर आने की आवाज आई.
इस बार छोटी और वे भाभी जी ऊपर आ गईं.
मैं खाली बदन, हाथ में टी-शर्ट लिए कोने में खड़ा था.
गर्मी भी बहुत थी.
छोटी आई और बोली- भैया, आप कहां सोएंगे आज?
मैंने कहा- क्यों? मौसा जी के कमरे में!
वह बोली- नहीं, वहां कुछ मेहमान सोए हैं.
दूर खड़ी वे भाभी मेरे पास आईं.
मैंने छोटी से कहा- देखते हैं, कहां सोना है.
छोटी बोली- मैं आंटी के साथ उनके घर जा रही हूँ, आप चलोगे उनके घर पर?
अब मैं समझ गया कि ये ऊपर क्यों आई.
मैंने कहा- नहीं, तुम जाओ.
छोटी बोली- ओके!
‘आंटी, हम दोनों चलें?’
वे बोलीं- हां चलो, तुम मम्मी को बोल दो.
छोटी नीचे चली गई.
लेकिन वे वहीं खड़ी-खड़ी गुस्से से मुझे देख रही थीं.
मेरे पास आईं और मेरे बदन में अपना हाथ फेरती हुई बोलीं- तुम्हारा सीना और ये बड़े-बड़े डोले … सच में मैं पागल हो जाऊंगी. बोल रही हूँ, तुम मेरा इम्तिहान मत लो!
मैं उनकी आंखों में देख रहा था जो लाल हो रही थीं.
मैं नीचे की तरफ देखने के लिए आगे बढ़ा कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा.
वे मेरे पीछे-पीछे आती हुई बोलीं- क्या तुमको अच्छी चीजों की पहचान नहीं है?
मैंने उन्हें इग्नोर करते हुए नीचे देखा. उधर कोई नहीं था, रास्ता क्लियर था!
मैं पीछे मुड़ा.
वे मेरी तरफ आ रही थीं.
मैं अचानक से उसके पास गया और उनके गले में अपना हाथ डाल कर उन्हें झटके से घुमाया. फिर उनको उल्टा करके पेट के बल दीवार से सटाया और 4-5 थप्पड़ उनकी गांड पर जोर-जोर से मारते हुए मैंने उनके कान में कहा- तू खुद को समझती होगी रंडी … मगर तूने गलती कर दी … तेरी चूत का भोसड़ा न बना दिया तो बोलियो!
वह मेरी इतनी खुली भाषा सुनकर हंस दी.
फिर मैंने उन्हें वापस अपनी ओर घुमाया और अपने हाथों से उनका गला दबा कर उनके दोनों होंठों को अपने मुँह में घुसा कर खूब जोर से चूसा.
उनकी आंखें बाहर आ रही थीं.
फिर मैंने उन्हें अपने से दूर धकेला और मैं दूर जाकर कोने में खड़ा हो गया.
वे दौड़कर मुझसे लिपट गईं.
उतने में छोटी के आने की आवाज आई- भैया … भैया!
मैं उन्हें दूर करते हुए अलग हो गया और नीचे जाने लगा.
छोटी बोली- आंटी, आपकी आंखें लाल क्यों हैं?
वे कुछ नहीं बोलीं.
मैं नीचे चला गया.
छोटी मेरे पास आई और ‘बाय’ बोलकर चली गई.
उस वक्त रात के करीब 10:30 बज गए थे.
मैं सोने के लिए मौसा जी के कमरे में गया.
अगल दिन शादी का दिन था इसलिए सभी लोग जल्दी-जल्दी सो गए.
मेरे बगल में मौसा जी और 4-5 लोग सो रहे थे.
तभी मेरे फोन पर एक घंटी बजी.
मैंने देखा तो कोई अनजान नंबर था, रिसीव किया तो पता चला श्वेता है.
वह बोली- आप कल मॉर्निंग में रेडी होकर ऑटो स्टैंड के पास आ जाना … ठीक 7:00 बजे.
मैंने पूछा- क्यों?
वह बोली- प्लीज, आप आ जाना सुबह में.
इतना कह कर उसने फोन रख दिया.
मैं वैसे ही श्वेता और उस भाभी के बारे में सोच ही रहा था कि कब नींद आ गई, पता नहीं.
मॉर्निंग में मौसा जी 5:30 में उठे.
मैं भी उठा तो वे बोले- बेटा अभी सो जाओ कुछ देर और क्योंकि आज वैसे भी काफी काम है.
वे निकल गए.
मैं भी उठा और छत पर करीब एक घंटा एक्सरसाइज की और अपनी सारी अकड़न निकाल दी.
फिर फ्रेश होकर बाहर आया तो बहन ने चाय दी.
चाय पीकर बाहर निकला.
उस वक्त मैंने एक टाइट फिटिंग टी-शर्ट पहनी हुई थी.
ऑटो स्टैंड के पहले ही श्वेता पीछे से आवाज लगाई.
मैंने देखा तो वह स्कूटी पर थी.
उसने ब्लैक टी-शर्ट और ब्लैक टाइट जींस पहनी हुई थी.
उसकी चूचियां तो जैसे सेब की तरह टाइट और फुटबॉल की तरह गांड बाहर आ रही थी!
वह बोली- आप पीछे बैठो.
ऑटो स्टैंड के आस-पास के सारे लोग हम दोनों को ही देख रहे थे.
मैंने कहा- तुम मेरे पीछे बैठो.
वह मेरे पीछे बैठ गई.
हम दोनों चल पड़े.
मैंने पूछा- कहां?
वह बोली- सरप्राइज है.
इतना कह कर वह चिपक कर बैठ गई.
कोई 5 किलोमीटर ड्राइविंग के बाद एक गली में जाने को बोली और कुछ दूरी पर एक 2 मंजिला मकान के पास रुकने को बोली.
श्वेता ने फोन किया, दरवाजा खुला.
श्वेता बोली- ये मेरी फ्रेंड रेशमी है.
वह थोड़ी हेल्दी थी, श्वेता की उम्र के आस-पास.
वह नाइट ड्रेस में थी. उसके बाल गीले थे, शायद नहा कर ही निकली थी.
हम दोनों अन्दर आ गए.
वह मुझे देखती और नजरें झुका लेती. फिर देखती और फिर नजरें झुका लेती.
वह बोली- श्वेता तुम ऊपर जाओ, मैं चाय लेकर आती हूँ.
श्वेता आगे-आगे और मैं पीछे से ऊपर की ओर चल पड़ा.
मैंने पूछा- यहां क्यों आए हैं और घर वाले अगर आ गए तो क्या बोलोगी?
वह हंसी और मुझे किस करने लगी.
मैंने उसे रोका और फिर से पूछा.
वह बोली- उसके मम्मी-पापा रात को ही किसी रिसेप्शन में गए थे और वे लोग आज शाम को आएंगे.
मैं सारा मामला समझ गया था कि इसने आज सुबह से ही मूड बनाया हुआ है.
श्वेता नीचे गई.
दो मिनट के बाद दोनों चाय के साथ आईं.
रेशमी के हाथ में चाय और श्वेता के हाथ में वॉटर बॉटल के साथ सिगरेट भी थी.
हमने मिलकर चाय पी.
श्वेता ने मुझे सिगरेट दी और पास में आकर चिपक कर बैठ गई.
रेशमी हम दोनों को देख रही थी.
फिर वह उठी और जाने लगी.
वह जाती हुई बोली- मैं मार्केट से आती हूँ.
इतना कह कर वह कमर हिलाते हुए निकल गई!
श्वेता ने नीचे जाकर दरवाजा बंद किया और मेरे पास आई.
वह बोली- कल जो भी हुआ, आज भी वही होगा.
‘ओके.’ मैंने कहा.
उसने जींस खोली और मुझे लेकर बेड पर आ गई.
उसने मेरी टी-शर्ट उतारी, फिर पैंट खोली और लंड को निकालती हुई बोली- आपका लंड मोटा भी है और लंबा भी.
मैंने कहा- छोटा लंड किसका देख चुकी थी … और पहले ये बताओ कि तुम वर्जिन हो पता है, लेकिन किसी के साथ तो कुछ जरूर किया होगा … जिस तरह से तुम किस करती हो और तुम्हारी सेक्स की इतनी जानकारी … ऐटीट्यूड … और हवस वगैरह!
श्वेता मेरे लंड को हाथ में लिए मसल रही थी.
वह बोली- सच कहूँ आप बुरा मत मानना. मैंने कई बार रात को मम्मी और पापा की चुदाई देखी है … और पोर्न मूवी देखकर भी यह सब सीखा है!
मैंने कहा- पापा का लंड भी ऐसा ही होगा?
वह बोली- नहीं.
मैंने पूछा- कौन ज्यादा सेक्सी है … मम्मी या पापा?
वह बोली- मम्मी!
‘लंड चूसती हैं मम्मी … पापा का?
श्वेता- हां, पूरा मुँह में ले लेती हैं और बहुत ही वाइल्ड बिहेवियर रहता है मम्मी का!
मैं श्वेता की बात सुनकर बहुत गर्म हो गया
मैंने कहा- तुमको किस तरह का सेक्स पसंद है?
वह बोली- पता नहीं, पर मैं आपके लिए सब कुछ करना चाहती हूँ.
मैं समझ गया कि ये भी लंड चूसना चाहती है.
मैंने उसे उठाया और कहा- तुम खड़ी रहो! आज तेरी माँ भी चुदेगी!
वह हंस दी- हां, उनको भी चोद देना!
मैंने उसकी इस बात को हंसी में लिया और उसे गले में किस करने लगा, फिर गले को चाटा. गाल में किस किया, फिर चाटा.
इस तरह से मैंने उसकी गर्दन और होंठों पर थोड़ी देर तक किस किया.
साथ ही अपने हाथों से मैं उसके चूतड़ों को भी मसल रहा था.
फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को उतारा और ब्रा भी निकाल दिया.
अब उसके कसी हुई चूचियां मेरे सामने एकदम खड़ी थीं. मैंने उनको सहलाया.
उसके निप्पलों को स्लोली-स्लोली होंठों से चूसा … चाटा.
वह मस्ती से सिसकार रही थी.
फिर मैंने उसके हाथ ऊपर करके उसके अंडरआर्म्स को किस किया, स्लोली-स्लोली चाटा तो वह मदहोश हो गई.
वह बस ‘हम्म… हम्म’ कर रही थी और मुझे बार-बार कसकर पकड़ रही थी.
मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा, जो पहले से ही गीली थी … और कुछ ज्यादा ही नमकीन रस था उसका.
दस मिनट तक उसे सिर्फ चूसा और चाटा.
अब वह खुद बोली- मैं आपका लंड चूसना चाहती हूँ!
मैंने कहा- हां जरूर, रुको थोड़ा.
मैं फिर से उसके कसे हुए गोल-गोल चूतड़ों को मसलने और चूमने लगा, साथ ही चूत को रगड़ने लगा.
ये जो भी मैं कर रहा था, बहुत ही स्लोली-स्लोली कर रहा था, जिससे वह मुझे झेलने के लिए तैयार हो सके.
भाई, मैं एक ही चीज जानता हूँ … एक्सरसाइज हो या चुदाई, जब तक बॉडी जवाब ना दे, लगे रहो!
अब मैं बिंदास होकर बैठ गया और कहा- लो चूसो लंड को!
वह तुरंत नीचे बैठी और लंड को सूँघने लगी, उसे चाटने लगी, फिर मुँह में लेने लगी.
वह पूरा लंड अपने मुँह में लेना चाहती थी, लेकिन आधे से ज्यादा ले नहीं पा रही थी.
मैंने कहा- मैं मुँह में झड़ गया तो?
वह बोली- मैंने पहली बार लंड चूसा है, कोशिश करूँगी आपका रस पीने का.
‘हम्म …’
‘आप पीछे हो जाओ, मैं आपका पीछे वाला छेद भी टेस्ट करूँगी!’
मैं बड़ा खुश हुआ.
वह अपनी जीभ से हल्के से मेरी गांड के होल में लगा कर एकदम से हट गई.
मैं ऐसे ही खड़ा रहा. उसने फिर से एक बार लगाया और हट गई.
मैंने कहा- छोड़ो, लंड को ही चूसो.
वह बोली- नहीं, आप रुको. पहली बार है, मैं आज आपके साथ सब करना चाहती हूँ.
मैं- तब एक काम करो. मेरे होल के पास थूक कर फिर से जीभ लगाओ, फिर थूको और जीभ लगाओ.
उसने वैसा ही किया.
थोड़ी देर के बाद वह बिंदास होकर मेरी गांड को चूसने लगी.
मुझे अच्छा लगा.
मैंने अपने अन्दर के जानवर को अभी भी छुपाकर रखा था.
फिर वह झुककर मेरे लंड को भी चूमने लगी … और बोली- आपके रस को भी पीना चाहती हूँ.
मैं सीधा होकर बेड पर बैठ गया और वह मस्ती से लंड चूसने लगी.
मैंने पूछा- लंड लोगी चूत में?
उसने हां कहा.
मैं जानता था कि भले ही वह 18 की होगी, लेकिन मेरे 8 इंच के लंड को झेल नहीं सकेगी.
मैंने कहा- नहीं, तुम्हें दर्द होगा. मैं अपने फायदे के लिए ऐसा नहीं करूँगा. बाद बाकी तुम जो कर लो या करवा लो.
वह बोली- मेरी चूत में आग लगी है!
मैंने कहा- तुमको अभी पता नहीं है इस दर्द के बारे में … ठीक है, तुम एक काम करो. तुम मेरे ऊपर बैठो, देखते हैं.
वह तुरंत मेरे ऊपर आई. मेरे लंड को हाथ में लेकर चूत पर लगाया और बैठने लगी.
मेरा टोपा चुत के मुँह में अन्दर गया ही था कि वह उठ गई.
उसने फिर से कोशिश की. इस करीब 3 इंच लंड अन्दर चला गया होगा.
मैंने कहा- अब इतना ही अन्दर-बाहर करो.
पर वह अब खुद को ऊपर नहीं उठा सक रही थी.
मैंने तुरंत उसे हटाया और उसे बेड पर लिटा कर चूत में दो उंगलियां डालकर अन्दर-बाहर करने लगा.
वह छटपटाने लगी.
मैंने अपने एक हाथ से उसके गले को भी दबाकर रखा था.
फिर उसके एक पैर को अपने कंधे पर रखा, अपने लंड को हाथ में लेकर चूत पर पटकने लगा.
वह डर कर दोनों पैर सटाने लगी.
मैंने उसके गाल पर 2-3 थप्पड़ लगाए और कहा- मादरचोद रंडी साली … अब ले इस लंड को!
मैंने टोपा को चुत के अन्दर करके उसके गले को दबाते हुए आधा लंड अन्दर पेल दिया.
वह- प्लीज प्लीज … नहीं नहीं … दर्द हो रहा है… आआह!
मैं फिर से लंड बाहर निकाला और अन्दर डाला, वह भी आधा ही.
वह- प्लीज रहने दो … छोड़ो ना प्लीज … छोड़ो … आआहह … उम्म्म.
वह तो हिल भी नहीं सकती थी.
लंड एक बार बाहर किया, फिर अन्दर किया.
अब वह रोने लगी.
मैंने उसे छोड़ दिया और बेड पर बैठ गया.
लेकिन वह वैसे ही पेट पकड़ कर सोई थी.
उसको बोला- साली रंडी, मन तो कर रहा है पूरा लंड डालकर तेरी माँ चोद दूँ साली … अब उठो और चूसो जल्दी … रस निकाल मेरा … भोसड़ी की रांड!
वह उठी और उसने मेरे लंड में लगा अपनी चुत के रस को पौंछा और चूसने लगी.
मैं- ह्ह्हम्म् … आआह … मादरचोद चूस साली इस लंड को … इसी लंड से तेरी माँ चोदूँगा!
मैं खड़े होकर उसके फेस को पकड़ कर अपने लंड हिलाने लगा- आआ … आआह … रंडी साली … मादरचोद … आआह्ह!
मैंने लंड को जोर-जोर से हिलाते हुए पूरा रस उसके फेस और मुँह पर डाल दिया.
अब मुझे लगा कि मानो वह उल्टी कर देगी.
मैंने उसे उठाया, पीछे से गांड पर थप्पड़ मारने लगा, उसके गले को दबाते हुए बोला- इस लंड से तू ना सही, तेरी माँ को जरूर चोदूँगा … मादरचोद … साली रंडी की बच्ची … भोसड़ी वाली!
वह मुझसे लिपटकर रोने लगी.
मैंने थोड़ा शांत होते हुए उसे गले से लगाया … और बोला- चलो फ्रेश हो जाओ.
हॉट वर्जिन Xxx करने के बाद फ्रेश होकर हम दोनों नीचे आए.
रेशमी अपने कमरे से निकली.
श्वेता ने उसे बाय बोला और मैंने भी उसे थैंक्स बोला और निकल गए.
श्वेता बोली- आपकी जगह कोई और होता तो वो मुझसे कभी भी नहीं छोड़ता … चोदकर ही मानता.
मैं- हम्म …
‘सच में आई लव यू … आई लव यू!’
मैं- ठीक है, लेकिन उधार रहा ये सब.
वह- जी पता है, मैं पहली बार चुदाई हुई हूँ आपसे … पर मैं आपको सैटिस्फाई नहीं कर सकी, सॉरी.
रेशमी जो विंडो से हमारी सब बातें सुन रही थी और जलन वाले भाव से श्वेता को देख रही थी.
मैंने श्वेता से कहा- तुम स्कूटी गली से निकालो … मैं बाथरूम जाकर आता हूँ.
रेशमी दरवाजे के पास ही थी.
मैंने दरवाजा खोला और कहा- तुम गुस्सा क्यों हो बेटा?
उसने कुछ नहीं बोला … सर झुकाकर खड़ी रही … मैंने दरवाजा बंद किया, अपने दोनों हाथों से उसके सर को पकड़ कर उसे एक डीप किस किया.
वह मेरी कमर को पकड़ कर खड़ी रही.
फिर उसकी गर्दन को किस किया … और जाने लगा तो उसने मुझसे पकड़ कर हग किया.
मैंने उसे सहला कर बाय बोला और निकल पड़ा.
अब तक 8:45 का समय हो चुका था.
मैं ऑटो स्टैंड के पास उतर गया … और पैदल ही पंडाल तक आ गया.
स्कूटी वहीं अन्दर लगी थी.
दीपक भैया वहीं थे.
मुझे देखकर बोले- अरे भाई कहां रह जाते हो, आ जाओ चाय पीते हैं चलो अन्दर घर में आ जाओ.
आगे की सेक्स कहानी अगले भाग में लिखूँगा.
ये मेरी हॉट वर्जिन Xxx स्टोरी आप सभी को अच्छी लगी होगी.
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