शादी में मिली भाभी और उनकी बेटी को चोदा- 1

Views: 3 Category: Jawan Ladki By rajakbinod721 Published: August 28, 2026 📖 14 min read
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हॉट वर्जिन X स्टोरी में मैं मौसी की बेटी की शादी में गया तो वहां उसकी एक सहेली मेरे पीछे पड़ गयी. मस्त माल थी तो मैं भी क्यों पीछे रहता.

मैं अनिकेत (नाम बदला हुआ) कोलकाता से हूँ. उम्र 38 साल है और मैं शादीशुदा हूँ.

ये मेरी पहली हॉट वर्जिन X स्टोरी है जो मैं आप लोगों के सामने रख रहा हूँ.

आज से 4 साल पहले मैं अपनी मौसी की बेटी की शादी में बिहार गया था.
वह 2017 का मार्च का महीना था.
कुछ दिन पहले ही होली खत्म हुई थी.

मैं वहां पहुंचा तो सबसे मिल कर काफी अच्छा लगा.
काफी लोग थे वहां.
बहन की सारी सहेलियां भी थीं.

उसकी सहेलियों में एक लड़की थी जो 18 साल की ही रही होगी, काफी लंबी थी … वह मुझे घूर रही थी.
वह देखने में बहुत हॉट माल थी … जस्ट लाइक किम शर्मा.
सच में बहुत नशीली थी.

मैं अपने लिए तय कमरे के अन्दर आ गया और उधर लेट कर रेस्ट करने लगा था.
वह लड़की आई और मुझे देखकर वापस चली गई.

उस समय गर्मी काफी ज्यादा हो गई थी.
घर पर जगह कम होने के कारण खाने की जगह और बारातियों के लिए घर से थोड़ी ही दूर एक खुली जगह थी.
यह उनकी निजी जमीन थी और उसके करीब उनका एक बड़ा सा मकान भी था.

वे लोग काफी पैसे वाले थे.
आयोजन वहीं होने वाला था.

कैटरिंग वालों की सारी रिस्पॉन्सिबिलिटी मेरे ऊपर थी.

वहां एक आदमी जो मेरी मदद कर रहा था उनका नाम दीपक जी था.
वे करीब 45-47 के आसपास होंगे.
उनसे मेरी अच्छी पहचान हो गई.
वे शादी वाली जगह के पास बने एक मकान में रहते थे.

वे मेरी काम की लगन देखकर खुश थे … और मैं उनके अच्छे स्वभाव से.

शादी के एक दिन पहले सब कुछ ठीक-ठाक अरेंज हो गया.
उस वक्त दोपहर के 2 बजे थे.

भैया ने कहा- चलो अनिकेत, भूख लगी है, खाना खाने चलते हैं.

मैं भी काफी थका सा महसूस कर रहा था.

उतने में मेरे मौसा जी आए और वहां की व्यवस्था देखकर मुझे बोले- बाबू, सब ठीक से हो गया तो खाना खा लो!
मैंने कहा- जी!

फिर दीपक भैया जी मौसा जी से बोले- अरे सुनो, ये अनिकेत दो दिनों से काफी मेहनत कर रहा है. इसके लिए कुछ अरेंज करो रात को … समझ रहे हो न!
वे ड्रिंक्स के लिए में बोल रहे थे.

मौसा जी बोले- नालायक! तू मेरा दोस्त है और ये मेरे भाई का बड़ा बेटा है … समझे? तमीज से बात करो यार!

अब मुझे भी समझ में आ गया कि दीपक जी मौसा जी के दोस्त हैं.

मौसा जी बोले- चल तू भी घर पर खाने!
दीपक जी बोले- नहीं, घर पर सब वेट कर रहे हैं. तुम जाओ, शाम को आता हूँ.

बातों ही बातों में पता चला कि वह घर और सारी जमीन उनकी ही है.

घर आया तो मौसी मेरा वेट कर रही थीं.
सारे भाई-बहन भी थे.
बहुत सारी औरतें भी थीं.
सबसे मेरा परिचय हुआ.

वहां एक भाभी जी थीं, जो काफी आकर्षक दिख रही थीं.
उनकी खूबसूरती का कारण उनकी हाइट और उनका कटावदार जिस्म था.
भाभी की कमर पतली थी और उसके नीचे बड़ी सी गांड होने के साथ-साथ एकदम गोल गोल चूतड़ थे जो बाहर को निकले हुए थे.

पर वे चेहरे मोहरे से काफी सिंपल थीं मतलब उन्होंने इतनी सुंदर होने के बावजूद न तो कोई भड़कीले कपड़े पहने थे और न ही कोई खास मेकअप किया हुआ था.
शायद इसी वजह से उनका आकर्षण मुझे अपनी तरफ खींच रहा था.

पहली नजर में देखने के बाद मैंने अपनी निगाहें अलग कर लीं, पर अगले ही पल मुझे न जाने क्या हुआ कि मैंने एक बार फिर से उनकी ओर देखा.
इस बार वे भी मुझे ही देख रही थीं.

मैं झट से अपनी नजरें झुकाकर अन्दर की तरफ चल दिया.
उतने में वे भाभी मौसी जी से बोलीं- दीदी, कौन है ये?

मौसी जी बोलीं- मेरी बहन का बड़ा बेटा है … कोलकाता से!

घर के अन्दर जाते-जाते वे बड़ी गौर से मुझे देख रही थीं और मैंने भी हिम्मत करके उन्हें देखा.
वे भी हमें ही देख रही थीं.

मैं बाथरूम में जाने वाला था कि मेरी बहन ने तौलिया लाकर दिया, जिसकी शादी होनी है.

वे बोलीं- भैया, आप अगर भाभी और बच्चे को लाते तो कितना अच्छा होता!
मैंने कहा- आपको तो पता ही है कि आजकल एग्जाम का समय चल रहा है … अब क्या करूँ, बोलो.

वे कुछ नहीं बोलीं, बस ‘हूँ’ कह कर रह गईं.

फिर कुछ देर बाद मैं बाथरूम में जाने के लिए टी-शर्ट खोल रहा था कि बाहर से आवाज आई- दीदी, मैं भी आती हूँ शाम को. खाने को सब वेट कर रहे होंगे.
यही कहती हुई वे कमरे में अन्दर आ गईं.

उस वक्त मैं सिर्फ तौलिया बांधे खड़ा था.

उन्होंने मेरी ओर देखा और मुस्कुराकर मेरी बहन की तरफ देखती हुई बोलीं- तुम्हारे भाई की बॉडी तो बड़ी अच्छी है … नजर न लगे!

मैं जब तक कुछ कहता, वे अपनी बात बोलकर बाहर निकल गईं.

मैंने फ्रेश होकर खाना खाया और आराम करने अपने बिस्तर पर आ गया.

मैं आराम करते हुए उसी भाभी को याद कर रहा था कि अचानक मेरे रूम में वह सुबह वाली लड़की आ गई.
उसने मुझे देखकर पूछा- जी, वह मैं आपकी सिस्टर को ढूँढ रही थी.

मैं कुछ नहीं बोला.

फिर वह कमरे से बाहर जाते-जाते बोली- एक बात बोलूँ?
मैंने कहा- बोलो.

वह- जी, आप मुझे फ्रेंडशिप करोगे?
मैं हंसा और बोला- हां, क्यों नहीं.

वह- जी, थैंक्स!
मैं- वेलकम … एक बात मैं भी बोलूँ?
वह- हां जी, कहिए!

मैं- तुमको पता था ना कि मैं यहां पर हूँ? सच बताना, कुछ बोलना था तो बोलो!
वह- जी, आप मुझे अच्छे लगे इसलिए …

मैं- कोई बॉयफ्रेंड?
वह- कोई नहीं, पर कॉलेज में सारे मुझे फ्रेंडशिप करना चाहते हैं.
मैं- क्यों नहीं, तुम हो ही सेक्सी … मतलब सुंदर!
वह हंस पड़ी और पास आकर कान में बोली- थैंक्स्!

मैं उसकी गर्म सांस को महसूस करके सिहर उठा.
वह एक स्माइल देकर चली गई.

फिर मैं सो गया और सीधा शाम को 6 बजे उठा.
मैं रेडी होकर शादी वाली जगह पर चल पड़ा.

घर से बाहर आते ही मैंने एक सिगरेट जलाई और अपनी मस्ती में धुआं उड़ाने लगा.

उधर सब मुझे ही देख रहे थे, शायद मेरी बॉडी फिगर के कारण कई भाभी कुछ ज्यादा ही ध्यान से घूर रही थीं.

अभी आधे रास्ते में ही था कि वे भाभी जी मिलीं.
मैंने उनसे सिगरेट छुपाई और नजरें झुका ली.

मैं रास्ते के एक तरफ था और वे उस तरफ थीं मगर नजरें तो मिल ही गईं.

वे मुझे देखकर मुस्कुराईं और बोलीं- एक मिनट सुनिएगा.
मैंने तुरंत सिगरेट फेंकी और उनकी तरफ गया.

वे बोलीं- क्यों … क्या हुआ … आपने सिगरेट क्यों फेंकी?
मैंने कहा- कुछ नहीं, ऐसे ही … जी, आप बोलो …

फिर वे बोलीं- कुछ नहीं, ऐसे ही आपको सामने से देखना था.
मैं तो जैसे भूत बन गया था कि अजीब मामला है.

मैंने जबरन कहा- थैंक्स!
वह बोली- थैंक्स क्यों?

मैंने कुछ नहीं कहा और आगे चल दिया.

शादी वाली जगह पर पहुंच कर जो काम पड़ा था वह सब निपटाया.
फिर दीपक भैया आए तो हम लोग बैठकर बातें करने लगे.

मैंने कहा- सॉरी, आप तो मौसा जी के दोस्त हैं और मैं आपको भैया कहकर पुकारता हूँ … सॉरी.
उन्होंने कहा- सॉरी क्यों? तुम भैया बोलो, अच्छा लगता है.

तभी दीपक भैया के लिए अन्दर से आवाज आई- पापा … पापा!

मैंने पीछे मुड़कर देखा कि ये तो वही लड़की थी, मेरी सिस्टर की फ्रेंड.

भैया बोले- अनिकेत, ये मेरी बेटी श्वेता है.
मैं उसे देख कर मुस्कुरा दिया.

फिर भैया उससे बोले- बेटा, ये अनिकेत अंकल हैं.
वह बोली- मैं मिल चुकी हूँ इनसे, फ्रेंड के घर पर.

वह लगातार मुझे घूरे जा रही थी.
अब मैंने जानबूझ कर उसे इग्नोर किया.

दीपक जी बोले- बेटा, चाय बना ला!
वह ‘जी पापा’ कह कर अन्दर चली गई.

फिर दीपक भैया से मिलने 2 लोग और आए.
मैं साइड में चला गया.

दो मिनट के बाद भैया बोले- अनिकेत, तुम रुको थोड़ा. मैं पास के घर से अभी आता हूँ. उधर एक अंकल हैं … वे थोड़ा बीमार हैं, मैं उनसे मिलकर आता हूँ. तुम अन्दर जाकर चाय पी लेना और श्वेता को मेरे जाने के बारे में बता देना.
मैंने कहा- जी.

जब श्वेता आई तो मैंने बता दिया.
वह बोली- ठीक है, आप आ जाओ अन्दर … साथ में चाय पीते हैं.

मैं जाकर आंगन में बैठा तो वह बोली- जी, छत पर चलते हैं.
मैं उसके पीछे गया.

वह लैगिंग्स और कुर्ती पहनी थी.
मैं उसकी पतली कमर को देख रहा था.
स्लिम बॉडी थी.

छत से बाहर का नजारा मनमोहक था.

हम दोनों साथ में चाय पी रहे थे.
वह बोली- जी, एक बात बोलनी थी.

मैं तो सोच ही रहा था बात करने का.

वह बोली- मैं आपको एक किस करना चाहती हूँ, प्लीज मना मत करना!
मैंने सीधे कहा- अगर कोई आ गया तो?

वह चाय वहीं रखकर मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर वाले रूम में ले गई और बोली- पापा को आने में देर लगेगी. मैंने अन्दर से ही सुन लिया था कि वे कहां गए हैं, मुझे पता है.

मैंने बोला- कहां?
वह बोली- जी, ड्रिंक करने … वे दो आदमी के साथ गए हैं ना!

उसने मुझे चेयर पर बैठाया और दोनों पैर फैलाकर मेरी गोद में बैठ गई. अपने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ कर मुझे किस करने लगी.

उसका ये रूप देखकर मैंने उसे रोका और बोला- एक शर्त है.
वह बोली- क्या शर्त … जो भी हो, पर प्लीज मुझे अपने मन की करने से मना मत करना!

मैंने कहा- मैं तुम्हें हाथ नहीं लगाऊंगा, पर तुम मेरे पूरी गर्दन में किस करोगी और वह भी जीभ लगाकर.

वह हंस कर बोली- आप मेरे लिए ही आए हो, ऐसा लग रहा है!

मैंने अपने दोनों हाथ पीछे सोफे पर फैला दिए.
वह चालू हो गई. उसने मेरे लिप्स और गर्दन पर 5 मिनट तक लगातार किस किया.

मैंने उसे उकसाते हुए कहा- थोड़ा वाइल्ड तरीके से करो न!
वह माहिर लौंडिया थी तो बोली- मैं अपने तरीके से करूंगी, तो आप बुरा मत मानना!
मैंने कहा- ओके करो!

फिर उसने अपने मुँह से मेरे मुँह पर थूका और चाटने लगी … मेरे मुँह में जीभ डालकर मेरी जीभ को चूसने लगी.

मैं सिर्फ बैठे-बैठे मजे ले रहा था और वह मेरा मजा ऐसे ले रही थी, जैसे मैं उसका मनपसंद खिलौना हूँ.

कोई 5 मिनट के बाद वह बोली- मुझे ऐसे ही पसंद है ये सब … थैंक्स!

मैंने उसे उठाया और बोला- अब मैं कुछ करूँ?
वह बोली- आपकी मर्जी, जैसे भी करो!

मैंने कहा- पर तुम हिलना मत!
वह बोली- ओके.

मैंने उसे उठाया और दीवार की तरफ उसका मुँह कर दिया. उसकी कुर्ती ऊपर को उठाई और लैगिंग्स को नीचे खींच दिया.

वह बोली- हम्म … यह सब रात को करते हैं न … सही मौका देखकर!
मैंने कहा- घबराओ मत … लंड नहीं डालूंगा. तू ले भी नहीं सकेगी ऐसे!

वह बोली- हां पता है … सील पैक हूँ न … तो अभी क्या करोगे आप?

मैंने कहा- देखती जाओ, बस हिलना मत.

मैंने उसके नर्म-नर्म चूतड़ों पर अपना एक हाथ फेरा और दूसरा हाथ उसकी गर्दन पर रख दिया.
फिर उसके कान के पास जाकर बोला- मजा आया ना किस करके!

उसने हां में सिर हिला के जवाब दिया.

तभी अचानक से मैंने उसके चूतड़ पर थप्पड़ मारा.
उसने हल्की सी सिसकारी मारी.

फिर मैंने दूसरे चूतड़ पर थप्पड़ मारा.

मैंने उसके कान में बोला- मजा आया?
वह बोली- हां!

मैं अब दे थप्पड़ दे थप्पड़ उसके चूतड़ों पर बरसाते हुए तबला सा बजाने लगा.
इसी के साथ मैंने उसके दोनों कानों को बारी बारी से अपने मुँह में भरकर खूब चाटा.

वह मदहोश हो रही थी- प्लीज धीरे-धीरे करो न … अच्छा लग रहा है!

मैंने कहा- गांड उठाकर रखना.
वह मान गई.

मैंने नीचे बैठकर उसकी गांड में जीभ की नोक को लगाया, तो वह सिहर उठी.

उसने गांड की दबा ली. मैंने जीभ को उधर ही रखा, तो उसने वापस से गांड खोल ली.
वह सिसिया कर बोली- आह कमाल हो आप!
इस बार उसने अपनी गांड को लुपलुप करते हुए खोल बंद करना जारी रखा.
मैंने भी पूरी तन्मयता से उसकी गांड को 2 मिनट तक चूसा.
वह अपनी चुत से लगातार बही जा रही थी.

फिर मैंने उसकी चूत को भी चूसा.

अब वह लगभग कांप रही थी.
मैंने उसे सामने किया और उसके होंठों को किस किया.

वह भी मुझे भी किस करने लगी.

इस सब में 30 मिनट हो गए थे.
मैंने कहा- चलो, अब बस करो … कोई आ न जाए.

वह मुझे छोड़ना ही नहीं चाहती थी.
मैंने समझाया तो मन भारी करके उसने मुझे धकेल दिया.
वह बोली- जाओ आप … आप बिल्कुल अच्छे नहीं हो!

उसने कपड़े ठीक किये और बोली- आप बाहर बैठो … मैं अभी आई.

मैं बाहर जाकर पंडाल में बैठ गया.
कोई 2 मिनट बाद भैया आ गए.
सच में वे थोड़ी ड्रिंक करके आए थे.

हम दोनों मिल कर बातें करने लगे.

वे बोले- मुझे जरा पानी पीना है.
उन्होंने श्वेता को आवाज लगाई.

मैंने कहा- मैं लाकर देता हूँ.

मैं श्वेता को आवाज लगाते हुए अन्दर गया.
मुझे पता चला कि वह बाथरूम में है. शायद अपनी चुत उंगली कर रही थी.
मैंने कहा- तुम्हारे पापा को पानी चाहिए.

अन्दर से बोली- आप बात मत करो मुझसे … आप जाओ!
मैंने पानी की एक बोतल जो सामने पड़ी थी, उसे उठाई और बाहर आ गया.

मैंने बोतल भैया को पकड़ा दी.
वे उसे गटगट करके खत्म करते हुए बोले- और एक बोतल लाना प्लीज. वह मेरे फ्रेंड आने वाले हैं न तो उनको भी लगेगा.

मैंने कहा- जी, श्वेता शायद बाथरूम में है … और वहां एक ही बोतल थी.

वे बोले- कोई बात नहीं. अपना ही घर समझो. ऊपर वाले रूम में फ्रिज है, उधर जाओ और निकाल लेना.

मैंने अन्दर जाकर देखा, वह अब भी बाथरूम में थी. मैंने नॉक किया तो बोली- जी, एक मिनट रुकिए, आई.

मैंने कहा- प्लीज दरवाजा खोलो!
वह फिर बोली- बस एक मिनट.
मैंने कहा- नहीं, अभी खोलो!

उसने दरवाजा खोल दिया. उस वक्त उसने सिर्फ कुर्ती पहनी हुई थी और लैगिंग्स झूल रही थी.

मैंने उसका हाथ पकड़ा, बाहर खींचा. उसकी लैगिंग्स को हाथ से पकड़ कर उसे अपने साथ बाहर खींच लिया.
वह किसी कटी हुई डाली की तरह झूलती हुई बाहर आ गई.

मैंने बिना समय गंवाए उसे चेयर पर बैठाया और दोनों पैर अलग करके चूत चाटना चालू कर दिया.

वह ‘सीईईई…’ करके आवाज करने लगी और बोली- प्लीज जोर-जोर से चाटो आह प्लीज.

मैंने अचानक से अपनी दो उंगलियां उसकी बुर में अन्दर डाल दीं तो वह छटपटा गई.

मैं दनादन अन्दर-बाहर करने लगा.
वह पैर से चूत दबाने लगी.

एक मिनट के बाद वह अकड़ती हुई झड़ गई और कांपने लगी.

फिर शांत होकर मुझसे लिपट गई.
मुझे चूमती हुई वह ‘लव यू … लव यू!’ बोल रही थी.

मैंने उस हॉट वर्जिन X लड़की को वासना से देखा और पानी की बोतल लेकर बाहर आया तो देखा भैया नहीं थे.

मैं वहीं बैठकर अपना मोबाइल चलाने लगा.

फिर रात 9 बजे करीब मैं वहां से निकला.

घर आया तो देखा औरतों का गीत-संगीत चल रहा है.

मैं छत पर जाने के लिए मुड़ा कि मौसी बोलीं- बेटा, खाना खा लो.
मैंने कहा- बाद में!
मैं छत पर गया … वहां मेरे कुछ भाई-बहन थे.
मैं एक कोने में जाकर स्मोक करने लगा.

नीचे की तरफ सामने किसी का बाथरूम था.

वहां से आवाज आ रही थी, ‘प्लीज … प्लीज … ह्म्म्म … आह और प्लीज!’

मैंने देखा कि वही भाभी किसी और औरत के साथ मजे कर रही थी.
वह भी बाथरूम में लेस्बियन सेक्स में!
मैं तो दंग रह गया कि ये तो जरूरत से ज्यादा ही खतरनाक आइटम निकली.

फिर किसी महिला की आवाज आई- आह हो गया, चलो अब!
पर उन भाभी की आवाज आई- अभी नहीं! अभी और चूसो मेरी चूत को प्लीज.

मैंने अपनी हाइट का फायदा उठाया और बाथरूम में वेंटीलेटर वाली विंडो से झांक कर देखा, उन दोनों का सिर्फ फेस ही नजर आ रहा था.
मैं एक चेयर लेकर वहीं बैठ गया.
वहां काफी अंधेरा भी था.

मैंने एक और सिगरेट जलाई और बैठ गया.

दोस्तो, यह मां बेटी की चुदाई वाली सेक्स कहानी का पहला भाग आपको पसंद आया होगा.
हालांकि इस भाग में आपको चुदाई पढ़ने को नहीं मिली लेकिन मुझे विश्वास है कि इस हॉट वर्जिन X स्टोरी के अगले भागों को पढ़ कर आप अपने लंड चुत से जरूर खेल खेलेंगे.

आपके मेल मेरा प्रोत्साहन करेंगे, प्लीज जरूर लिखें.
rajakbinod721@gmail.com

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