हॉट आंटी सेक्स कहानी में पड़ोस वाली आंटी के मोटे चूतड़ और चूचे मेरा लंड खड़ा कर देते थे. एक बार मैं उन्हें शॉपिंग के लिए बाजार ले गया. ब्रेक लगने पर उनके चूचे मेरी पीठ में गड़ रहे थे.
मेरा नाम राज है और मैं पुणे से बिलॉन्ग करता हूँ.
मेरी उम्र 24 साल है और मेरी हाइट 5 फीट 8 इंच है.
मैं दिखने में अच्छा और स्मार्ट ब्वॉय हूँ.
मेरे लंड का साइज़ काफी अच्छा है.
यह साढ़े छह इंच लंबा और गोलाई में 3.8 इंच है.
ये हॉट आंटी सेक्स कहानी मेरी और मेरी सेक्सी सविता आंटी की है.
आंटी हमारे परिवार से बहुत क्लोज हैं.
उनकी उम्र 42 साल की होगी पर वे एक परी जैसी लगती हैं.
आंटी सच में बहुत ही ज्यादा गोरी हैं और उनके बूब्स बहुत बड़े व टाइट हैं.
उनकी गांड तो बहुत ही ज्यादा बाहर को निकली हुई और काफी चौड़ी है.
वे पूरी माल आंटी हैं और उनका फिगर 38-32-40 का है.
आंटी के पति गवर्नमेंट जॉब करते हैं.
वे बाहर रहते हैं और हफ्ते में एक बार घर आते हैं.
उन दोनों के 2 बच्चे हैं, जो फिलहाल हॉस्टल में रह कर पढ़ रहे हैं.
आंटी घर में अकेली ही रहती हैं और उनकी मेरी मम्मी से बहुत बनती है.
एक दिन की बात है, मैं सविता आंटी के घर बाहर खड़ा था क्योंकि उन्होंने कहा था कि उन्हें मार्केट जाना है और मैं उनके साथ चलूँ.
इसके लिए उन्होंने मेरी मां से भी कहा था कि उन्हें राज के साथ बाजार जाना है तो उसे उनके घर भेज दें.
मैं मां के कहने पर आंटी के पास आ गया था.
जब मैं उनके घर पहुंचा और मैंने आवाज लगाई.
तो आंटी ने मुझसे एक मिनट रुकने के लिए कहा.
मैं उनके घर के बाहर बाइक पर बैठ कर इंतजार करने लगा.
आंटी जब घर से बाहर निकलीं, तो मेरे लौड़े ने हिचकोला खाया.
आंटी गजब माल लग रही थीं.
उन्होंने एक टाइट सलवार सूट पहना हुआ था.
इस सूट में उनके बूब्स और गांड एकदम कसे हुए दिख रहे थे.
मेरा लंड भनभना कर खड़ा हो गया था और पैंट में ही फटने को रेडी हो गया था.
मैं आंटी के बूब्स देखे जा रहा था और अपने लौड़े को पैंट में एडजस्ट करने लगा था.
यह उन्होंने नोटिस कर लिया.
वे मेरी तरफ देख कर बोलीं- चलें?
मैंने ओके कहा और उन्हें अपनी बाइक पर बैठाकर मार्केट ले गया.
रास्ते में कभी मैं ब्रेक लगाता, तो उनके बूब्स मेरी पीठ से रगड़ कर मुझे मीठा अहसास दिलाते और मेरे लौड़े की सख्ती बरकरार रहती.
इस तरह से सारे रास्ते मेरे लंड को चैन नहीं मिला और आंटी के दूध मेरी पीठ से टच होते रहे.
फिर आंटी ने शॉपिंग की और हम घर वापस आ गए.
घर आते समय मैंने आंटी से कहा- आप स्कूटी चलाना क्यों नहीं सीख लेती हो?
आंटी ने कहा- मुझे डर लगता है. अकेली चलाऊंगी और कहीं गिर गई तो कौन संभालेगा?
मैंने कहा- चलो, मैं सिखा देता हूँ आपको!
वे मान गईं.
उनके घर का लॉन काफी बड़ा है; एक छोटा मैदान जैसा ही है.
उनके घर पर एक एक्स्ट्रा स्कूटी पड़ी थी, मैंने उसको बाहर निकाला और उसे स्टार्ट करके चलाया तो वह एकदम परफेक्ट चल रही थी.
मैंने आंटी से कहा- आओ आंटी आपको सिखाता हूँ!
वे स्कूटी पर आगे बैठ गईं.
मैं उनके पीछे बैठ गया.
उनके बदन की खुशबू से मेरा लंड वापस अकड़ने लगा.
मैं परेशान था कि इस लंड को कैसे समझाया जाए कि अभी चुत सैट नहीं हुई है.
फिर मैंने लंड पर ध्यान देना बंद किया और उनसे कहा- चलो, अब आप स्कूटी स्टार्ट करो!
आंटी ने मुझसे पूछा और कैसे स्टार्ट की जाती, उसे समझ कर स्कूटी चलाई.
स्कूटी की रेस लेते ही वह आगे बढ़ने लगी.
मैं आंटी के साथ साथ स्कूटी को पकड़े हुए था ताकि वे ज्यादा स्पीड न दे दें.
कुछ ही पल बाद जब मैंने स्कूटी के हैंडल से अपने हाथ हटाए और आंटी से कहा कि अब आप स्लो स्लो चलाओ!
आंटी ने कहा- मुझे डर लग रहा है राज!
मैंने कहा- अरे डरना क्यों है … चलो, मैं वापस आपको पीछे से पकड़ लेता हूँ.
मैंने इस बार अपने आप को आंटी से कुछ ज्यादा ही चिपकाया और पीछे से हैंडल को पकड़ कर स्कूटी चलाने लगा.
कुछ पल बाद मैंने ब्रेक लगा दिया तो आंटी का सिर आगे को जाने लगा.
मैंने एकदम उनको से संभाला और उनके एक दूध को दबा दिया.
दूध दबने से आंटी के मुँह से हल्की सी चीख निकली- अह आह!
मैंने झट से दूध छोड दिया.
आंटी बोलीं- सही में तुमने न पकड़ा होता तो मैं गिर ही जाती.
मैं चुप रहा.
आंटी ने फिर से कहा- इस बार तू मुझे पीछे से सही से पकड़ लेना. मैं चला रही हूँ!
मैंने हम्म कह कर हामी दे दी.
आंटी फिर से स्कूटी चलाने के लिए रेडी हो गईं और इस बार वे रेस देने लगीं.
मैंने कहा- ज्यादा तेज मत चलाओ, ब्रेक लगाओ!
इस पर उन्होंने एकदम से ब्रेक लगा दी.
मैंने इस बार पहले ही अपने हाथ आंटी के बूब्स पर रख दिए थे.
ब्रेक लगते ही, मैंने उनके दूध मसल दिए.
उनके मुँह से हल्की सी ‘अह्हह …’ तो निकली, पर वे कुछ नहीं बोलीं.
ऐसे दो तीन बार हुआ.
फिर वे बोलीं- मैं स्कूटी चलाना नहीं सीख सकती!
मैंने कहा- अरे इतना अच्छा तो चला रही हो आप … बार बार कोशिश करेंगी तो जल्दी ही सीख जाएंगी!
वे बोलीं- क्या वाकयी मैं अच्छा चला रही हूँ?
मैंने कहा- हां आंटी पहली बार के हिसाब से आप बहुत अच्छा चला रही हैं.
अब हम दोनों फिर से स्कूटी चलाने की प्रेक्टिस करने लगे और मैं पहले जैसा ही करता हुआ उनके मम्मों को दबा कर मजा ले लेता.
अब तो मेरा हाथ आंटी के बूब्स पर ही रखा रहता, मुझे लग रहा था कि उनके दूध कुछ सख्त हो गए हैं.
जैसे ही आंटी ब्रेक लगातीं मैं उनके दूध मसल देता.
सच में बड़ा मज़ा आ रहा था.
मेरा लंड खड़ा होकर आंटी की गांड से लग रहा था.
मैं उनकी गांड में लंड घुसेड़ने तक की कोशिश करने लगा था.
जब भी वे ब्रेक लगातीं, तो वे अपनी गांड उठा देतीं और मैं लंड को गांड की दरार से रगड़ देता.
वे लंड की सख्ती को महसूस कर रही थीं लेकिन कुछ कह ही नहीं रही थी.
वे एकदम नार्मल बिहेव कर रही थीं.
मैंने अपने दोनों हाथ उनके दोनों बूब्स पर रख दिए थे और अब तो मैं जरा सा झटका लगने पर ही उनके दूध सहलाते हुए मसल दे रहा था.
आंटी भी हल्की आवाज में मोअन करने लगी थीं ‘अह्हह राज ये क्या कर रहे हो?’
मैंने उनकी बात को अनसुना करते हुए गर्दन पर किस कर दिया और उनके कान को अपने होंठों से दबा कर बाईट करने लगा था.
वे बोलीं- आह राज, तुम मुझे हॉट कर रहे हो!
जैसे ही आंटी ने यह कहा तो मैंने उनकी गर्दन को चूम कर कहा- आई लव यू!
वे हैरान रह गईं और उन्होंने स्कूटी रोक कर कहा- तुम्हें मुझमें क्या अच्छा लग रहा है? मेरी तो ऐज भी 42 की है.
मैंने आंटी के बूब्स जोर से प्रेस कर दिए और कहा- आपका सब कुछ मस्त है!
वे अहह आह उईईइ करके कराह उठीं और बोलीं- फिर भी बताओ न!
मैंने कहा- मुझे आपके बूब्स बहुत पसंद है.
यह कहते हुए मैंने आंटी की गांड दबा दी.
वे गांड पर मेरे हाथ का अहसास करती हुई बोलीं- अब इधर क्यों?
मैंने वापस गांड सहला कर कहा- आपकी गांड बहुत भरी हुई है. मुझे आप बहुत सेक्सी लगती हो!
अब आंटी ने कहा- हम्म … तुम मानोगे नहीं … चलो, अन्दर चलते हैं.
हम दोनों उनके रूम में आ गए और आंटी ने रूम अन्दर से लॉक कर दिया.
मैंने उन्हें जोर से पकड़ लिया और हम दोनों किस करने लगे. मैं उनके होंठों से होंठ लगा कर स्मूच करने लगा.
वे भी मस्त हो गईं और हम दोनों अगले कुछ मिनट तक सिर्फ किस ही करते रहे.
हम दोनों की जीभें एक दूसरे के मुँह का रस पीने लगी थीं.
फिर मैंने आंटी की सलवार कुर्ती उतार दी.
वे पिंक ब्रा और पैंटी में थीं और एकदम एटम बम लग रही थीं.
मैंने आंटी के बूब्स को चाटने लगा और ब्रा उतार दी.
मैं एक दूध को चूसने लगा और एक हाथ से उनकी चूत को दबाने लगा.
वे मोअन करने लगीं- अहहाह ओहो उम्म्म्म …
मैं उनको किस करते हुए नीचे को बैठने लगा.
मैं चूमते हुए आंटी की नाभि पर आ गया.
वे चुदास से गर्म होने लगीं.
मैंने आंटी की पैंटी खींच कर फाड़ दी और देखा तो उनकी पिंक एकदम चूत थी.
चुत पर झांटें एक डिजायन में सैट की हुई थीं.
मुझे उनकी डिजायन में कटी झांटों वाली चुत बहुत मस्त लग रही थी.
मैं आंटी की चुत को पागलों की तरह चाटने लगा.
वे अपनी टांगों को फैला कर अपनी चुत को मेरे मुँह से चटवा रही थीं और कमर को आगे पीछे करती हुई मेरे सर को चुत पर दबाए जा रही थीं ‘अह अह .. चाट लो मेरी चुत को अहहाह अह हाह.’
कुछ देर बाद मैंने अपने कपड़े उतार दिए और उनके सामने नंगा होकर लंड हिलाने लगा.
आंटी मेरा लंड हाथ में लेकर हिलाने लगीं और कहने लगीं- तेरे अंकल का लंड तो सुंडी सा है और ठीक से खड़ा भी नहीं होता.
वे मेरे लौड़े को ब्लोजॉब देने लगीं.
मुझे आंटी से लंड चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था.
कुछ देर बाद हम दोनों बिस्तर पर आ गए और 69 का मजा लेने लगे.
आंटी कहने लगीं- अब चोद दो!
मैं उन्हें तडपाने लगा और उनकी चूत को लिक करने लगा.
वे तड़प रही थीं और लगातार कहने लगी थीं कि इसमें अपना लंड डाल दो जल्दी से.
मैंने सीधे होकर चुदाई की पोजीशन बनाई और अपना लंड आंटी की चूत पर रख कर धक्का दे मारा.
मेरे लंड का टोपा बहुत मोटा है, जो आंटी की चूत में मुश्किल से गया था.
वे चिल्लाने लगीं- अहहाह फाड़ दी मेरी चूत.. धीरे चोद साले!
मैंने एक और धक्का दे मारा, मेरा आधा लंड अन्दर चला गया.
मैंने आंटी को किस करने लगा.
कुछ देर बाद वे नार्मल हो गईं.
अब मैं उनके बूब्स को सक करने लगा और एक और धक्का मार दिया.
इस बार मेरा पूरा लंड चुत के अन्दर चला गया था.
वे ‘अह आहाहा मर गयी’ करने लगीं.
कुछ देर के बाद मैं तेज तेज शॉट्स लगाने लगा और वे भी नीचे से अपनी गांड उठाने लगीं.
आंटी की चुत से रस निकलने लगा था तो पूरे रूम में पच पच पच की आवाजें होने लगीं.
वे कुछ मिनट बाद भलभला कर झड़ गईं और उनकी चुत का गर्म माल मुझे अपने लंड पर महसूस हुआ.
मैं अब और भी जोर जोर से घस्से मारने लगा.
कुछ ही देर में वे दो बार झड़ चुकी थी.
अब मैंने कहा- मेरा माल छूटने वाला है!
उन्होंने कहा- अन्दर ही छोड़ देना.
मैंने अपनी स्पीड और तेज करते हुए उनको चोदने लगा.
वे अहह ऊहोहोह करने लगीं.
मैंने माल उनकी चूत में छोड़ दिया.
आंटी की पूरी चूत मेरे लंड के गर्म माल से भर गयी थी.
मैं थक कर उनके ऊपर ही लेट गया था.
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और देखा तो आंटी की चूत में से मेरे लौड़े के माल की बूंदें टपक रही थीं.
यह दृश्य मुझे उत्तेजित करने लगा था.
मैंने अपना लंड आंटी के मुँह में डाल दिया और धक्के देने लगा.
वे लौड़े को चूसने लगीं और फिर से मेरा लंड वापस कड़क हो गया.
आंटी बोलीं- ये तो और बड़ा हो गया है!
मैंने हंस कर आंटी से कहा- चलो इस बार पीछे से चोदता हूँ आप घोड़ी बनो!
मैंने उनके दोनों चूतड़ों को फैला कर गांड को खोला और उनके पिंक ब्राउन गांड को चाटने लगा.
आंटी की गांड पर एक भी बाल नहीं था.
गांड चटने से वे आह आह अहहाह आह करने लगीं.
आंटी की गांड का छेद बहुत टाइट था.
मैंने उस छेद में उंगली डाल दी और आगे पीछे करने लगा.
आंटी ने कहा- प्लीज मेरी गांड मत मारना. मैंने कभी भी नहीं मरवाई है. इसमें बहुत दर्द होता है.
मैंने कहा- अरे यार आंटी दर्द में ही तो मजा आता है. जब आपने अभी तक गांड मरवाई नहीं है तो कैसे मालूम है कि दर्द होगा!
वे बोलीं- मैंने पढ़ा है!
मैं मान नहीं रहा था.
तो वे बोलीं- ओके यदि गांड में पेलना ही चाहते हो तो कुछ चिकनाई लगा लेना.
मैंने खूब सारा तेल उनकी गांड पर लगाया और अपने लंड पर भी.
आंटी की गांड तेल से किसी पोर्न स्टार के जैसी चमकदार लग रही थी.
मुझसे भी रहा नहीं गया और मैंने अपना लंड उनके गांड के होल पर रख कर धक्का दे मारा.
मेरा टोपा उनकी गांड में घुस गया.
वे चिल्लाने लगीं- अहह ओहो मर गईई … प्लीज बाहर निकालो इसे … हह अहहाह उईई मांआ!
मैंने आंटी की बात नहीं सुनी और एक और जोर का धक्का लगा कर अपना आधा लंड अन्दर घुसेड़ दिया.
आंटी चिल्लाती रहीं.
मुझे भी अपने लंड में दर्द महसूस होने लगा.
मैंने दर्द की परवाह ना करते हुए एक और धक्का लगाया.
इस बार मेरा पूरा लंड आंटी की गांड के अन्दर चला गया था.
कुछ देर बाद जब वे सामान्य हुईं, तो मैं शॉट्स मारने लगा.
अब उन्हें भी गांड मरवाने में मज़ा आने लगा.
वे खुद अपनी भारी-भरकम गांड को पीछे को करती हुई हिलाने लगीं और मस्ती भरी आवाजें निकालने लगीं- आह अहह यस फक मी … आह फाड़ दी मेरी गांड .. आह किल मी … आहा!
मैंने कोई बीस मिनट तक आंटी की गांड मारी और अपना सारा माल उनकी गांड में छोड़ दिया.
उस दिन मैंने एक और बार उनकी गांड बजाई और उसी समय उनकी चूत भी चोदी.
अब मेरा लंड भी थोड़ा सूज गया था और उनकी गांड भी सूज कर लाल हो गयी थी.
मैंने पूछा- मजा आया?
उन्होंने कहा- हां राज … ऐसा मजा मुझे आज तक नहीं आया. तू असली मर्द है.
हम दोनों किस करने लगे.
मैंने फिर अपने कपड़े पहने और घर चले आया.
अब हम दोनों हर हफ्ते में एक या दो दिन चुदाई करने लगे हैं.
अब तो आंटी की गांड और भी बड़ी हो चुकी है.
जिस दिन मैं उनकी गांड चोदता हूँ, तो उस दिन उनसे ठीक से चला भी नहीं जाता … लेकिन उन्हें मेरे साथ चुदाई में बड़ा मज़ा भी आता है.
तो दोस्तो, आपको कैसी लगी मेरी और मेरी हॉट आंटी सेक्स कहानी!
प्लीज अपने मेल व कमेंट जरूर लिखिएगा.
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