सेक्स की भूख- 3

Views: 143 Category: Hindi Sex Story By enjoysunny6969 Published: May 20, 2026 📖 19 min read
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सेक्स रिसोर्ट Xxx स्टोरी में एक पत्नी ने अपने पति को अपनी सहेली के साथ चूत चुदाई का मजा लेने मालदीव्स भेजा. सहेली सेक्सी थी तो पति ने बीवी की सहेली को खूब चोदा.

कहानी के दूसरे भाग
पत्नी ने सहेली को पति के साथ हनीमून पर भेजा
में आपने पढ़ा कि बीवी ने ही अपनी सहेली को पति के साथ सेक्स के लिए विदेश के टूर पर भेजा. वे दोनों आकर एक कॉटेज में रुक गए.

अब आगे सेक्स रिसोर्ट Xxx स्टोरी:

आज वो सब होना था जिसके लिए संजीव और रोजी दोनों ही तड़प रहे थे.
दोनों की परिस्थितियां भिन्न थीं.

पर सारे नाट्यक्रम के पीछे एक ही नाम था वो नूतन का.
अपनी बला टालने और अपने पति पर नकेल लगाने के उद्देश्य से बनायी परिस्थियां बिल्कुल उसी के हिसाब से चल रही थीं.
एक औरत जो अपने पति की जिस्मानी मांग पूरा न कर पाने से अपनी पसंद की दूसरी औरत को इस बात के लिए राजी कर लेती है कि वह उसके पति की जिस्मानी जरूरत पूरी कर दे.

आज के बदलते परिवेश में हिन्दुस्तानी औरत का ये एक नया चेहरा था जहाँ पति परस्त्री गमन को तैयार नहीं था.
उसे गर्म मादक जिस्म परोस कर मजबूर किया गया की वो परस्त्री गमन करे और वो भी उसकी की पत्नी द्वारा जिसका अपने ही पति के साथ सेक्स में रुझान नहीं था और ये भी नहीं चाहती थी कि उसका पति अपनी जिस्म की आग ठंडी करने के लिए वेश्यागमन करे.

पर अब जब संजीव रोजी का साथ एन्जॉय कर रहा था, उसने ये तय किया था की फिलहाल अभी नूतन को कुछ न पता चले कि उन दोनों के बीच क्या चल रहा है.

खैर, बेड पर रोजी मुस्कुराते हुए लेट गयी और मचलने लगी.
उसकी आँखों की शरारत और उँगलियों के इशारे संजीव को बुला रहे थे.

उसका टॉवेल खुल कर एक ओर जा पड़ा था.
बेड पर पूर्णतया नग्न एक मत्स्य कन्या मचल रही थी.

संजीव ने टॉवेल उतार फेंका और सीधे रोजी पर टूट पडा.
दोनों एसे लिपट गए जैसे बरसों के बिछड़े हों.

संजीव उसके मम्मे चूमता चूसता अपने हाथ से उसकी चूत की फांकों को मसल रहा था.
रोजी की चूत पहले ही पानी बहाती हुई चिकनी हुई पड़ी थी.

रोजी ने संजीव के सर के पीछे दोनों हाथ लगाकर उसे अपनी और खींच, उसके होंठों को अपने होंठों से भिड़ा रखा था.

संजीव उससे अलग हुआ तो रोजी ने उसे नीचे की ओर धकेला और टांगों को चौड़ाते हुए अपनी उँगलियों से अपनी चूत की फांकों को चौड़ा दिया.
रेड नेल पेंट से सजे उसके लम्बे नाख़ून की उंगलियाँ उसकी गुफा के मुंह को पूरा खोल रही थीं.
खुला आमंत्रण था संजीव को इसे चूसने के लिए.

अब दोनों सेक्स के पुराने खिलाड़ी थे.
दोनों ही जानते थे कि एक मर्द और औरत को एक दूसरे से क्या चाहिए.

संजीव नीचे हुआ और उसकी पंखुड़ियों को चौड़ाते हुए अपनी जीभ अंदर कर दी और गहराई तक उतारने लगा.
रोजी कस्मसाने लगी और उसका जिस्म अकड़ने लगा.

वो आहें निकालती हुई बोली- तुम भी पलट जाओ, मुझे भी अपने राजा को चूसना है.
रोजी अब आप से तुम पर आ गयी थी.

संजीव उठा और 69 हो गया.
रोजी ने उसका लंड लपक लिया और सुपारे की खाल को पीछे करते हुए लपर-लपर चूसना शुरू कर दिया.

उसने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया और कभी मुंह के अंदर कभी हथेलियों के बीच में लंड को मसलने लगी.
संजीव ने भी ढेर सारा थूक रोजी की चूत पर लगाया, जिसमें से कुछ तो उसकी गांड पर बहने लगा.

संजीव ने अपनी थूक से भीगी उंगलियाँ गुलाबी पंखुड़ियों के बीच खूब रगड़ी और फिर एक उंगली को थूक से सराबोर करते हुए रोजी की गांड के छेद के अंदर करने की कोशिश करने लगा.
रोजी चिहुंकी- पीछे नहीं, लगेगी और फिर सारा टूर खराब हो जाएगा.
बात जायज थी.

रोजी की चूत मचल रही थी संजीव के लंड के लिए.
रोजी ने कसमसाते हुए कह ही दिया- अंदर आ जाओ अब.

संजीव उठा और रोजी की टांगों को खोलते हुए अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया और आगे झुका उसे चूमने के लिए.
बाक़ी का काम लंड ने अपने आप कर लिया.

वो आराम से रोजी की चूत में दरक गया.
रोजी की चूत पूरी खुली हुई थी.
उसके पति ने उसकी जमकर चुदाई की थी और उससे अलग होकर रोजी ने भी खीरे गाजर या फिर वाइब्रेटर से अपनी चूत सिकुड़ने नहीं दी थी.

पर नया लंड तो नया ही होता है.
संजीव ने जब अंदर जाते लंड को एक धक्का दिया तो रोजी की आह निकल गयी.
वो संजीव से कस के लिपट गयी.
उसके लम्बे नाख़ून संजीव की पीठ में गड़ गए थे.

अब संजीव ने बिना वक्त खराब किये धक्के देने शुरू कर दिये.
कोई लगने वाली बात तो थी नहीं, कुछ एसा तो था नहीं की चूत फट जायेगी.
वो तो पहले से ही फटी हुई थी.

रोजी भी संजीव का पूरा साथ दे रही थी.
चूत से फच फच की अवाज आ रही थीं और माहोल में रोजी की आहें गूँज रही थीं.

रोजी ने संजीव से ऊपर आने को कहा और फिर संजीव के ढीला होते ही वो संजीव को नीचे करके ऊपर चढ़ गयी और लगी उछलने.
उसके मम्मे और बाल दोनों हवा में लहरा रहे थे.

रोजी ने अपने हाथ संजीव की छाती पर टिका रखे थे.
थोड़ी देर की मशक्कत के बाद दोनों का ही होने को आ गया था.

संजीव ऊपर आना चाहता था.
उसने जल्दी से रोजी को नीचे पलटा पर इससे पहले कि वो अपना लंड दुबारा चूत में पूरा घुसा पाता, उसके लंड का फवारा छूट गया और सारा माल रोजी के पेट, मम्मों और चूत की दरार पर गिर गया.
संजीव थक कर वहीँ लेट गया.

रोजी ने पास रखे टॉवेल से अपने को और संजीव के लंड को साफ़ किया.
वाशरूम से आकर उसने एक सिगरेट सुलगाई और संजीव के चेहरे पर धुंए का गुबार छोड़ कर मुस्कुराते हुए संजीव को सिगरेट पकड़ा दी.

दोनों बगल-बगल लेटे सिगरेट के धुएं के लच्छे छोड़ते रहे.
सफर की थकान तो थी ही, रोजी संजीव से चिपट कर होंठ से होंठ भिड़ा कर लेट गयी.

देर शाम दोनों की आँख खुलीं. भूख लगी थी.
दोनों कपड़े पहन कर बाहर रेस्टोरेंट में गये.

रोज़ी ने एक शोर्ट मिडी पहनी थी और संजीव शॉर्ट्स और टी शर्ट में.

रोजी संजीव की बाहों में लिपट कर चल रही थी.

वहां का रोमांटिक माहोल हर किसी को बेईमान कर रहा था.
सब जोड़े एक-दूसरे में मस्त थे.
किसी को किसी से मतलब नहीं.
कहीं कोई पेड़ के नीचे चिपटा चूमा चाटी कर रहा था, कोई बीच पर नीचे रेत में ही लिपटा पडा था.

कुल मिलाकर सेक्स तो कोई कर नहीं रहा था, पर सभी बस एक कदम पीछे ही थे.

रास्ते में वाशरूम पड़ा तो संजीव उधर चला.
गेट अंदर से बंद था. संजीव ने दो बार नॉक किया तो अंदर से एक जोड़ा मुस्कुराते हुए अपने कपड़े संभालता हुआ बाहर आया और उसे सॉरी कहकर चलता बना.

मतलब लोगों ने वाशरूम को भी नहीं छोड़ा था.
वेस्ट बिन का ढक्कन खुला हुआ था और उसमें सबसे ऊपर एक वीर्य से भरा कंडोम पडा था.

संजीव अब समझा कि गेट लॉक क्यों था.

वहां से फारिग होकर संजीव और रोजी दोनों रेस्टोरेंट में पहुंचे.
डिनर लेकर निकलते निकलते उन्हें 10 बज गये.

इतनी रात को भी रिसोर्ट पूरा जीवंत था.
हर ओर कसमसाहट और आहें हवा में गूँज रहीं थीं.

संजीव और रोजी सिगरेट के धुएं के लच्छे उड़ाते हाथ में हाथ डाले रिसोर्ट तक पहुंचे.
अंदर पहुँचते ही रोजी ने तो अपने कपड़े उतार फेंके और संजीव को बुलाते हुए बाहर पूल में उतर गयी.

खुले आसमान के नीचे समुद्र के इतने निकट पूल में नंगे होकर तैरना एक सुखद रोमांच था.
बराबर वाली कोटेज का कपल भी शायद पूल में थी.
चूमाचाटी और आह उह की आवाज आ रही थीं.

इधर उधर का कुछ दिखाई देने की गुंजाइश नहीं थी.
और बाहर तो काफी अन्धेरा भी था.

संजीव भी पूल में उतर आया.
उसके हाथ में दो बियर केन थीं.
एक उसने रोजी को पकड़ाई और पूल की सीढ़ियों पर बैठ गया.

रोजी ने नीचे से ही पानी के छींटें मारे उस पर और फिर तैरते हुए पास आई और उसका लंड चूसने लगी.

अब संजीव भी पानी में उतर गया और रोजी के मम्मे पकड़ लिए.
जब माहौल ज्यादा गरमा गया तो संजीव ने वहीं पूल में रोजी को घोड़ी बनाया और अपना लंड पेल दिया पीछे से उसकी चूत में.

पानी में होने से चुदाई सही नहीं हो पा रही थी.
रोजी की आहें बराबर वाली कोटेज से आतीं कसमसाहट और आहों के साथ संगत कर रही थी.
रोजी बेचैन हो उठी और संजीव को खींचते हुए बोली- चलो बेड पर चलते हैं.

बेड पर सेक्स का जो तूफ़ान उठा वो दोनों के पसीने निकलने के बाद ही शांत हुआ.
संजीव को रोजी ने थका दिया.

वो सही में सेक्स की भूखी थी और उसे सेक्स करने की सही कला आती थी.
वो जानती थी कि मर्द को कैसे चरम सुख दिया जाए.

रोजी के नाखूनों की लम्बी धारियां संजीव की पीठ पर बनी हुई थीं और संजीव के चूमने और काटने के निशान रोजी की गर्दन के चारों और.

बाद में एक दूसरे की बाहों में लिपटे रोजी ने पूछा- तुमने नूतन मैडम से बात करने को क्यों मना किया?
संजीव मुस्कुरा कर बोला- उसने तुम्हें सिर्फ मेरी सेक्स की आग बुझाने को भेजा था. जो पत्नी होने के नाते उसका फर्ज़ था. उसने तुम्हें वेश्या समझा. तुम्हारी सेक्स अपील ने मुझे अपना कायल बना दिया. भले ही हमारा साथ केवल सेक्स के लिए प्लान किया हो नूतन ने, पर मैं खुद नहीं जानता की इस ट्रिप के बाद तुम मेरे लिए क्या होगी. इसलिए ये तय करने तक मैं नहीं चाहता कि नूतन को हमारी भावनाओं की जानकारी हो.

रोजी उसे कस के चूमती हुई लिपट गयी और फुसफुसाते हुए बोली- तुमने भी मेरी जिस्मानी जरूरत को पूरा किया है. वरना इस आग में जलते जलते मैं कहीं भटक ही न जाती. अब मैं तुमसे जिस्मानी नहीं बल्कि दिली प्यार करने लगी हूँ. मैं तुमसे वादा करती हूँ कि आगे से मैं नूतन मैडम के कहने पर नहीं बल्कि यदि तुम चाहोगे तो तुम्हारे कहने पर मिलूंगी. और इसे कोई नहीं जानेगा, नूतन मैडम भी नहीं. हमारी दोस्ती जिस्मानी जरूरतों को आपसी सहमती से पूरा करेगी न कि नूतन मैडम की शर्तों पर. मैडम ने जो कुछ प्लान किया है उसकी कीमत वो मुझसे वसूल रही हैं.

संजीव ने जानना चाहा कैसे तो रोजी ने मुस्कुराते हुए कहा- इस समय नहीं, कभी बाद में बताऊंगी. अभी तो तुम मेरी आग बुझाओ.
कहते कहते रोजी फिर एक बार संजीव के ऊपर चढ़ बैठी और उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत में कर लिया और लगी उछलने.

सुबह दोनों की आँख देर से खुली तो इसे ही ढीले ढाले कपड़े पहन कर दोनों बाहर रिसोर्ट में घूमने लगे.
बाहर एक बड़ा पूल भी था. उसमें दो–चार जोड़े तैर रहे थे.

रोजी ने संजीव का हाथ खींचा और कहा- चलो पूल में उतरते हैं. वहीं स्टोर से स्विमिंग कोसटुम लेकर पूल में उतर गए दोनों.

रोजी ने तो एक छोटी से टू पीस बिकनी पहने थी.
उसके मांसल मम्मे बाहर आने को बेताब थे इसमें.
और लड़कियां भी ऐसे ही कपड़े पहने थीं.
सबका जिस्म 90 प्रतिशत खुला और 10 प्रतिशत ढका था.
पर किसी को किसी की परवाह नहीं थी.

संजीव ने तैरते हुए बार बार रोजी के पेट पर और मम्मों पर हाथ लगाया तो रोजी उसे देख कर मुस्कुरा दी और बोली- मान जाओ या फिर चलो कमरे में.
संजीव मुस्कुराता हुए रोजी का हाथ पकड़कर पूल से बाहर आया और दोनों टॉवेल लपेट कर कॉटेज में चले गए.

कॉटेज में जाते ही दोनों लिपटकर शावर लेने लगे.
शावर लेते समय रोजी ने संजीव का लंड नीचे बैठकर चूसा तो संजीव ने भी उसके मम्मे खूब मसले.

अब भूख लग आई थी तो दोनों कपड़े बदलकर रेस्टोरेंट चले ब्रेकफास्ट लेने के लिए.
ब्रेअफास्ट के बाद रेत में लेटने का मन था तो संजीव ने तो सिर्फ बरमुडा पहना और रोजी ने ब्रा पैंटी सेट और ऊपर से एक ढीला सा काफ्तान डाल लिया.

उनके बगल वाली कॉटेज में जो कपल था, वो भी मुस्कुराता हुआ अपनी कॉटेज से निकला उनके साथ साथ रेस्तौरेंट की ओर चला.

आदमी गुजराती ही था और लगभग इन्हीं की उम्र के से थे.
पर रहते दुबई में थे.

रेस्टोरेंट में दोनों जोड़े साथ साथ बैठे.
उनका नाम और हरीश और नफीसा था.

नफीसा हरीश की दोस्त थी और सिंगापुर से आई थी.
बेहद सेक्सी थी नफीसा और हरीश कुछ ज्यादा ही खुला हुआ था उससे.

नफीसा ने एक शोर्ट ड्रेस पहने थी पर उसके तने हुए मम्मे और उसमें से झांकते निपल गजब ढा रहे थे.

ब्रेकफास्ट से निबट कर संजीव और रोजी तो बीच की तरफ चले गए.
वहां बहुत से जोड़े हल्की धूप में रेत पर पड़े थे.
कपड़े सभी के नाममात्र को थे.

रेत समुद्र की लहरों से भीग रही थी तो गर्म नहीं थी.
अलबत्ता उस पर लेटे जोड़े बार बार लहरों से भीग रहे थे.

रोजी ने काफ्तान उतार दिया था.
उसका सेक्सी फिगर धूप में चमक रहा था.

संजीव का मूड बन गया था.
वो रोजी से कॉटेज में चलने को कहने लगा.

तभी वहां हरीश और नफीसा आ गये.
नफीसा ने आँखों पर काला चश्मा लगा रहा था.

उसका सेक्सी जिस्म देख संजीव के मुंह में भी पानी आ गया.
उसने तो मुंह पर कह भी दिया- तुम बहुत सेक्सी लग रही हो.

हरीश ने मुस्कुराते हुए उन्हें बियर पीने का ऑफर दिया तो चारों हरीश के कॉटेज की ओर चल दिए.

कॉटेज में कहीं नफीसा की ब्रा पड़ी थी, कहीं पैंटी.
कहीं बेड के तकिये पड़े थे कहीं छोटे हैण्ड टॉवेल.
ऐसा लगता था कि उनका भी जबरदस्त सेक्स हुआ था रात को.

नफीसा थी भी लापरवाह और अल्हड़ किस्म की.
उसके कपड़ों पर रेत लग गया था तो वो सबसे पहले वो कपड़े बदलकर केवल एक गाउन डाल कर आ गयी.
गाउन से उसके भारी मांसल मम्मे झाँक रहे थे.

बातों बातों में हरीश ने बताया कि वो और नफीसा साल में दो बार तो बाहर घूमने जाते हैं. हरीश को हर महीने सिंगापुर जाना होता है. जब भी वो सिंगापूर जाता है, नफीसा उसके साथ होटल में ही रात गुजारती है. दोनों को सेक्स का भरपूर शौक है. दोनों ही शादीशुदा हैं, पर उनके पार्टनर्स उनकी जिस्मानी जरूरतें पूरा नहीं कर पाते, तो वो आपस में ही अपनी जिस्मानी जरूरतें पूरा करते हैं.

नफीसा बात करते करते हरीश की गोदी में बैठ गयी और दोनों चूमाचाटी में लग गये.
उसका तना हुआ लंड उसके बरमुडा के बाहर से ही तम्बू सा बना दिख रहा था.

संजीव ने देखा की रोजी की निगाहें बार बार उसके तने हुए लंड पर जा रही हैं.
उसको लगा कि अगर वो लोग ज्यादा यहाँ रुके तो दोनों जोड़ों का सेक्स शुरू हो जाएगा और हो सकता है कि अदला बदली भी हो जाए.

वो रोजी के सामने अपनी इमेज खराब नहीं करना चाहता था तो उन दोनों ने मुस्कुराते हुए हरीश और नफीसा से विदा मांगी.
पर नफीसा बियर की केन निकाल लायी और बोली- मालदीव्स में आकर जिन्दगी को भरपूर जी लो. यहाँ कोई किसी को नहीं जानता और फिर जिन्दगी में शायद ही हम लोग दोबारा कभी मिलें. तो बस एन्जॉय करो.

कहते कहते वो संजीव के पास आकर बैठ गयी.
हरीश ने रोजी से कहा- अगर तुम्हें ऐतराज न हो तो तुम मेरे पास आ जाओ.

रोजी ने संजीव की और देखा.
संजीव तो नफीसा के मम्मे घूर रहा था.

रोजी ने भी हरीश के तने हुए लंड तो देखते हुए मुस्कुराते हुए अपनी और बढ़े हरीश के हाथ को थामा और उसके पास जाकर बैठ गयी.
हरीश ने बिना देर किये उसे चूम लिया.

रोजी ने मुस्कुराते हुए कहा- बस इससे ज्यादा और कुछ नहीं.
हरीश और नफीसा हंस दिए.

नफीसा उठी और संजीव की गोदी में बैठ गयी और रोजी से बोली- बस इससे ज्यादा और कुछ नहीं. आई प्रोमिस!
कहते हुए उसने अपने होंठ संजीव के होंठों से भिड़ा दिए.

अब तो हरीश के कहने पर रोजी भी उसकी गोद में बैठ गयी.

माहौल कुछ ज्यादा ही गर्म हो गया था.
संजीव और रोजी इससे आगे बढ़ना भी नहीं चाहते थे तो हरीश के रोकने पर भी दोनों मुस्कुराते हुए उनसे विदा ले ही आये और अपने कॉटेज में आ गये.

कॉटेज में आते ही रोजी खूब हंसी नफीसा की बात करते करते.
पर उसने संजीव को चूमते हुए थैंक्स कहा कि वो उसे वहां से निकाल लाया. उसे भी अच्छा नहीं लग रहा था कि नफीसा के मांसल मम्मे संजीव घूरे.
संजीव भी मुस्कुराते हुए बोला- और जो तुम हरीश के लंड पर सीधे बैठ गयी थीं, वो?

रोजी हंस पड़ी- तो तुमने देख लिया. सच ऐसा लग रहा था कि वो अंदर ही घुस जाएगा.

अब ऐसे ही कब 4-5 दिन निकल गए, पता ही नहीं चला.
संजीव और रोजी ने दिन रात सेक्स किया.

हरीश ने तो एक बार खुलकर संजीव से पार्टनर्स बदल कर सेक्स करने का ऑफर भी दिया.
पर संजीव ने मुस्कुराते हुए मना कर दिया.

संजीव और रोजी को एक दूसरे का साथ अच्छा लग रहा था.

रोजी ने एक रात सेक्स के दौरान संजीव से कहा- अगर नूतन मैडम ने उसे काम से हटा दिया तो मैं कहाँ जाऊंगी.
संजीव हंस कर बोला- जितना तुम वहां कमाती हो, उतने की नौकरी मैं तुम्हें शोरूम पर दे दूंगा.

इसके बाद तो रोजी ने उसे सेक्स का चरम सुख दिया जिसे शायद संजीव तो भूलने वाला नहीं था.
सही भी है कि अगर स्त्री को बेचिंत कर दिया जाए और वो अपने पसंदीदा मर्द के साथ हो तो वो कामरस की देवी हो जाती है.

जाने से एक रात पहले नूतन का फिर फोन संजीव के मोबाइल पर आया- रोजी से बात कराओ.

संजीव ने रोजी की ओर देखा तो रोजी ने बेहिचक कह दिया- लाओ फोन दो.

नूतन ने रोजी से पूछा- तुम्हारा फोन क्यों बंद है?
तो रोज़ी बोली- इसका चार्जेर खराब हो गया. और सर भी अपना फोन बंद ही रख रहे थे इसलिए बात नहीं कर सकी.

नूतन ने इशारे से पूछा कि क्या रहा.
रोजी बोली- आपका काम हो गया है, बाकी मिलने पर बताउंगी.

संजीव ने उससे पूछा- ऐसा क्यों कहा?
तो रोजी बोली- अब मैं तुमसे सेक्स करुँगी तो सिर्फ तब, जब तुम बुलाओगे. न कि नूतन मैडम के कहने पर. उनसे साफ़ कह दूँगी कि मैं कोई कॉल गर्ल नहीं.
संजीव ने उसे गले लगा लिया.

उस रात रोजी ने बेड पर संजीव की हर इच्छा पूरी की.
संजीव की इच्छा थी कि सेक्स के बाद रोजी उसका लंड चाट कर साफ़ करे और उसे दोबारा खड़ा करे.

संजीव को बहुत आश्चर्य हुआ जब रोजी ने चरमोत्कर्ष पर आते ही संजीव का लंड अपनी चूत से निकाल लिया और अपने मुंह के पास ले जाकर हिलाने लगी.
सारा वीर्य उसके मुंह और मम्मों पर गिर गया.

रोजी ने होंठों पर गिरे वीर्य को मलाई की तरह चाट लिया और फिर लंड को मुंह में लेकर चाट चाट कर उसे साफ़ कर दिया.
ऐसा तो संजीव ने कभी सोचा भी नहीं था.

संजीव ने रोजी के उकसाने पर आज उसके मम्मे खूब मसले.
साफ़ दिख रहा था कि मम्मे आज गुलाबी हो गये हैं.

सेक्स करते करते देर रात जब उनके ट्रिप के सेक्स का आखिरी पल था.
रोजी ने संजीव को पीछे आने को कहा.

संजीव ने ढेर सारी क्रीम उसकी पीछे और अपने लंड पर लगाई और पेल दिया रोजी की गांड की गहराई में.

रोजी की आहें निकल गयी पर उसने संजीव को बाहर नहीं निकलने दिया.
उसे बहुत दर्द हुआ.
पर यह उनका आखिरी सेक्स था इस ट्रिप का और वो संजीव की कोई हसरत अधूरी नहीं छोड़ना चाहती थी.

इंडिया आने के बाद रोजी एक दिन बाद ऑफिस गयी.

उसे नूतन ने अपने चैम्बर में बुलकर सब कुछ जानना चाहा तो रोजी ने कहा- मैडम सर तो सिर्फ आपको चाहते हैं. हमने सेक्स किया जरूर पर वो मुझसे सेक्स आपको सोच कर करते रहे. पर अब मैं आगे उनके साथ सेक्स नहीं करुँगी.
नूतन ने पूछा- क्यों?
तो रोजी बोली- वो मुझे वेश्या समझकर सेक्स कर रहे थे. अब मैं कोई वेश्या तो हूँ नहीं. वो तो आपने कहा तो मैं चली गयी. सर तो सेक्स के माहिर हैं. थका ही दिया उन्होंने मुझे. इतना मेरे बस का नहीं था.

नूतन रात को घर आकर संजीव से खूब लड़ी- तुम्हारी हर समय सेक्स की आदत से रोजी भी दुखी है. तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता.
संजीव मुस्कुराते हुए बोला- तभी तो वो हर रात खुशामद करके मुझसे सेक्स करती. सच में वो बहुत हॉट है. उसका जिस्म तो आग का गोला है. सच कहूं तो वो काम की देवी है.

सुनकर नूतन तुनक कर अपने रूम में चली गयी.

वो बहुत झुंझला रही थी. उसने रोजी को फोन किया कि वो आज उसके फ्लैट पर आ रही है.
तो रोजी बोली- मैडम, मैं बहुत थकी हूँ. पूरा बदन दुःख रहा है. आज रहने दीजिये.

नूतन फ्रेश हुई और कपड़े बदलकर अपने रूम में बेड पर जा लेटी.
पर उसकी आँखों में नींद नहीं बल्कि दिल में जलन थी.
न तो संजीव आज उससे सेक्स मांग रहा था न रोजी उसे भाव दे रही थी.

सच तो यह था कि पिछले 6-7 दिनों से नूतन खुद सेक्स के लिए तड़प रही थी ये सोच सोच के कि वहां तो संजीव और रोजी मजे कर रहे होंगे.

वो दबे पाँव उठी और संजीव के बेड पर जा पहुंची.
संजीव जग रहा था.
नूतन उससे चिपट गयी.

संजीव ने ताना मारा- तुम क्यों आ गयीं, फिर मैं तुम्हें हाथ लगाऊंगा तो तुम्हें बुरा लगेगा. कम से कम रोजी हाथ लगाने को क्या, कुछ भी करने को मना नहीं करती थी.
नूतन बोली- आज हम अच्छे से सेक्स करेंगे और तुम कहोगे तो मैं रोजी को भी बुला लूंगी. तुम मेरे सामने ही उसके साथ सेक्स करना. बल्कि हम तीनों एक साथ सेक्स करेंगे.

संजीव ने उसे टटोलना चाहा- तुम्हारी जरूरत क्या है. मैं और रोजी अकेले में ही सेक्स करेंगे.
इस पर नूतन बच्चों की तरह मचलती हुई बोली- नहीं, मेरे सामने ही करना. मैं चाहती हूँ कि अब तुम सेक्स के लिए और कहीं न जाओ.

संजीव बोला- मैं तो अब तक भी कहीं नहीं गया. अब भी तुम्ही ने भेजा. तुम अच्छे से करो तो फिर और किसी की जरूरत ही क्यों है?
नूतन ने अपनी नाईटी उतार फेंकी और चिपट गयी संजीव से.
वह बोली- अब तुम्हें किसी के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मैं मिटाउंगी तुम्हारी सेक्स की भूख!

तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी कहानी?
सेक्स रिसोर्ट Xxx स्टोरी पर अपने विचार लिखिएगा मुझे मेरी मेल आईडी “enjoysunny6969@gmail.com पर.

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