सेक्स बिफोर मैरिज में एक अमीर परन्तु देसी लड़के की परवरिश थोड़े खुले माहौल में हुई तो उसे भी सेक्स का शौक हो गया. उसने घर में एक रात एक पार्टी में आई एक लड़की को चोद दिया.
दोस्तो, आपको मेरी कहानियों में रस आ रहा है, इसका आभास आपकी मेल से होता है.
मेरे पाठकों की संख्या बढ़ती जा रही है और वो अपने जीवन के अनुभव मुझसे शेयर करते हैं, तो कहानियों में नवीनता बनी रहती है.
मेरे पास हर तरह की मेल आती हैं. कुछ तो बड़े अव्यवहारिक और छिछोरेपन से भरी होती हैं.
कुछ पाठक स्पष्ट पर संभली शालीन भाषा में बात करते हैं.
ऐसे पाठकों से बात करने में आनंद भी आता है.
मेरे पाठकों का एक अभिजात्य ग्रुप भी है.
सभी पढ़े लिखे, सभ्य और जीवंत.
मेरे पाठकों में एक हैं सुनील मलिक हैं.
यह सेक्स बिफोर मैरिज कहानी इन्हीं की है.
बेहद शालीन, सभ्य, हंसमुख और आकर्षक व्यक्तित्व. ऑक्सफ़ोर्ड से पढ़े हुए हैं.
वहीं मालती ज़ी से मोहब्बत हुई और झटपट शादी कर ली.
पढ़ने में तेज और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी और सेक्स के मंजे हुए खिलाड़ी.
उन्होंने पढ़ाई के साथ कामसूत्र की किताबों का भी गहन अध्ययन किया था.
शायद इसीलिए वो सेक्स और सेक्स के प्रति मानव स्वभाव को बारीकी से समझते थे.
जमींदार खानदान से ताल्लुक था तो बिगड़े हुए तो बचपन से थे.
सुनील ने बचपन से ही अपने माता पिता की अंतरंगता और रंगीनियत देखी थी तो उनके लिए ये सब सामान्य था.
अपने शैशव काल में वो अपने आधुनिक सोच वाले माता-पिता के साथ ही नहाते थे.
मां ने कई बार उनके पिता को समझाया कि अब सुनील बड़ा हो गया है, पर वो तो शायद सुनील की लुल्ली को छोटा देखकर अपनी पत्नी की बात हंस कर टाल देते.
रात में भी सुनील अलग बेड पर सुलाए जाते पर वो अकसर देखते कि उनके मां बाप कुश्ती वाला खेल खेलते हैं.
एक बार जब सुनील ने बाप की देखा देखी मां की चूत में उंगली कर दी तब से उनका मां बाप के साथ नहाना बंद हो गया.
बाद में उनका कमरा भी अलग हो गया.
सुनील के पिताजी को अपनी पत्नी का कपड़े पहनना पसंद नहीं था.
कमरे में तो जब कभी सुनील को उनके रूम में अचानक जाना पड़ता तो मां कोई गाउन या शाल ओढ़े मिलतीं जिसमें से उनके मांसल मम्मे तो झांकते नजर आते.
जब सुनील धीरे धीरे हाईस्कूल में आये तो उनके साथ के हरामी लड़कों ने लुल्ली हिलाना सिखा दिया.
सुनील सुंदर और स्मार्ट थे तो उनकी लड़कियां दोस्त बनती चली गयीं.
ज्यादा बड़े परिवार के बच्चों के जहन में मां बाप का सेक्स का खुलापन भरा होता है तो सुनील को चूमाचाटी का मौक़ा मिलता रहा.
एक बार तो घर पर उनके पेरेंट्स की कोई वाइल्ड पार्टी थी.
उनके पिता के एक दोस्त के साथ उनकी पत्नी और उनकी सुनील की हमउम्र लड़की भी पार्टी में आये.
पार्टी में शराब और शवाब का जोर था तो सुनील ने उस लड़की सुप्रिया का हाथ पकड़ा और दोनों सुनील के कमरे में आ गये.
जो कुछ उधर हाल में हो रहा था तो उसे दोहराते हुए सुनील ने सुप्रिया को चूम लिया जिसका सुप्रिया ने बड़ी गर्मजोशी से जवाब दिया.
ज्यादा कुछ तो नहीं मालूम था पर हाँ सुनील ने सुप्रिया का टॉप उतार दिया और मम्मे चूस लिए.
सुप्रिया को अपनी चूत में चीटियाँ चलती महसूस हुईं तो उसने अपना हाथ नीचे किया.
सुनील ने उसकी मदद करनी चाही तो इस मदद-मदद में दोनों के कपड़े उतर गए.
मां बाप की कुश्ती तो दोनों ने ही देखी थी पर पूरा नक़्शे का ज्ञान उन्हें नहीं था.
सुनील ने सुप्रिया को बेड पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ कर चूमा चाटी करते करते उनकी लुल्ली तन गयी थी.
और जब वो जब चूत से टकराने लगी तो सुनील खलास हो गए.
बड़ी शर्म आई दोनों को.
फटाफट वाशरूम जाकर अपने को साफ़ किया और कपड़े पहन कर वापिस हाल में आ गये.
ये सुनील के जीवन का पहला सेक्स था.
अब उन्हें इसकी ज्यादा जानकारी लेने की इच्छा हुई तो मां बाप के बेड रूम में झांकना और मां को नहाते समय झांकना उनका शगल हो गया.
एक दो बार पकड़े गए पर मासूम सा चेहरा बना कर शक की ग्राउंड पर पिटने से बच गये.
पर इंटर तक आते आते सुनील अपनी कामवालियों के मम्मे सहलाने लग गये.
इंटर के बाद उनके मां बाप ने उन्हें विदेश उनके मामा के पास भेज दिया आगे की पढ़ाई के लिए.
कॉलेज दर कॉलेज उनकी जवानी और सेक्स के प्रति रुझान बढ़ता गया.
पर पढ़ाई में कोई समझौता न होने से किसी को उनसे कोई शिकायत नहीं होती.
कॉलेज में लड़कियां उनके पास ऐसे मंडराती जैसे तितलियाँ और वो उन का जम कर रस चूसते.
अब 24 साल के सुनील और उनकी दोस्ती हुई 23 की मालती से.
निगाहें मिलीं तो मुलाकातें बढ़ीं.
मुलाकातें बढ़ीं तो नजदीकियां बढ़ीं.
अब तो जब भी मालती के पेरेंट्स किसी पार्टी में जाते, सुनील मालती के पास पहुँच जाते और चूमाचाटी से शुरू होती उनकी कहानी कपड़े उतरने तक पहुँच जाती.
हाँ, मालती ने कभी सेक्स नहीं किया.
उसकी सोच थी कि चूत की सील तो मेरा मंगेतर ही खोलेगा.
पर सब्र का बाँध तो टूटना ही था.
सुनील और मालती ने अपने पेरेंट्स को कह दिया कि वो एक दूसरे को पसंद करते हैं और समय आने पर शादी करेंगे.
सुनील का जॉब लग गया था, पैकेज अच्छा था.
दोनों परिवार भारतीय थे तो सबकी राय ये बनी कि जब इनकी मर्जी हो तो इनकी शादी कर दी जाए.
अब तो सुनील और मालती को कोई रोकने टोकने वाला नहीं था.
सुनील अकेला फ्लैट में रहता था.
मालती अक्सर उससे मिलने आती और देर रात तक रहती.
एक बार एक दूसरे में मन ऐसा रमा की होश ही नहीं रहा.
सुनील का जन्मदिन था.
मालती केक लेकर आई थी और साथ में शेम्पेन भी.
सुनील ने मन बनाया था की वो आज मालती को प्रोपोज करेगा तो उसने एक रिंग ले ली थी.
मालती गजब ढाने वाली सेक्सी ड्रेस पहन कर आई थी.
डांस के बाद केक कटा और फिर शेम्पेन… दोनों बहुत नजदीक आ गये एक दूसरे के.
थरथराते होंठ अब एक दूसरे से अलग नहीं हो रहे थे.
सुनील का बम्बू तन गया और उसने मालती के बेकलेस ड्रेस पर हाथ फिराते हुए उसके हिप्स को अपनी ओर खींचा.
मालती लिपट गयी थी सुनील से.
सुनील ने उसकी ड्रेस की डोरियां ऊपर से नीची कीं ताकि उसके मांसल मम्मों को कुछ आराम मिले.
मालती को अंदाज़ था कि अब आगे क्या क्या होगा.
सेक्स बिफोर मैरिज से बचने के लिए उसने मिमियाते हुए सुनील से कहा- बेबी, शादी तक रुको.
पर सुनील आज मानने को तैयार नहीं था.
उसने उसके मम्मों को आज़ाद किया और चूचुक चूमते हुए कहा- जानू, आज हम एक होकर ही रहेंगे. क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करतीं.
मालती क्या बोलती… उसकी चूत तो बगावत कर ही चुकी थी.
सुनील नीचे घुटनों पर बैठा और जेब से अंगूठी निकाल कर मालती को दिखाते हुए पूछा- तुम मेरी जान बनोगी?
मालती लिपट गयी सुनील से.
सुनील ने उसे ताबड़तोड़ चूमते हुए उसकी उंगली में अंगूठी पहना दी.
फिर टेबल पर जाकर एक नयी शेम्पेन खोली और उससे अपने को और मालती को सराबोर कर दिया.
दोनों के कपड़े शेम्पेन और केक से खराब हो गये थे.
सुनील ने मालती को गोदी में उठाया और वाशरूम में लाकर खड़ा कर दिया.
कपड़े तो दोनों के वैसे भी शेम्पेन और केक से खराब हो गये थे.
अब तो दोनों को एक दूसरे में समाने की जल्दी थी.
सुनील ने अपने और मालती के कपड़े उतार फेंके और दोनों बाथ टब में घुस गये.
मालती को ये देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि बाथटब की तैयारी सुनील ने पहले से कर रखी थी.
सुनील नीचे लेटा और मालती उसके ऊपर.
दोनों आज सातवें आसमान पर थे.
आज उनकी सेक्स लाइफ की शुरुआत होनी थी.
सुनील ने पैर से शावर चालू कर दिया.
ऊपर से पानी का झरना बह चला.
नीचे दो जवान गर्म जिस्म एक दूसरे में समाने को मचल रहे थे.
मालती ने सुनील को बेड पर चलने को कहा.
दोनों ने अपना बदन सुखाया और एक दूसरे से लिपटे बेड पर आ गये.
सुनील ने रेड वाइन के दो जाम बनाये.
एक दूसरे को चूमते हुए दोनों एक दूसरे के आगोश में थे.
एक दूसरे को अपने हाथों से जाम पिलाते हुए दोनों बेड पर चादर के अंदर समा गये.
सुनील तो मालती के मम्मों का दीवाना था और मालती को सुनील का लंड का क्रेज था.
मम्मों की चुसाई के बाद सुनील ने मालती से टांगें चौड़ाने को कहा.
शायद मालती को अंदाज़ था कि आज की रात सेक्स होगा तो वो तैयारी से आई थी.
उसकी रेशमी चूत बिलकुल मखमली थी.
रोयें का भी नाम तक नहीं.
सुनील ने जीभ से उसकी गुफा के आस पास के इलाके को चाटते हुए फांकों के अंदर जीभ घुसाई तो मालती सिहर गयी.
वो कब से इस पल का इंतज़ार कर रही थी.
उसने कसमसाते हुए अपनी उँगलियों से फांकों को और चौड़ा लिया.
अब सुनील की जीभ अंदर गहराई तक उतर कर उसके दाने को चाटने लगी.
मालती की आहें निकल रही थीं.
सेक्स इतना आनन्द देता है, उसे कल्पना भी नहीं थीं.
उसने मूवीज में 69 होते देखा था तो उसने सुनील से बेझिझक कह दिया- मुझे भी तुम्हारा चूसना है.
सुनील उल्टा हो गया.
उसका लंड तना हुआ तो था ही… मालती ने उसे पकड़ा, मसला और फिर मुंह से ढेर सारा थूक उस पर लगाते हुए मसलते हुए अपने होंठों के बीच कर लिया.
उसे डर लग रहा था कि इतना मोटा मूसल उसके मुंह में कैसे जाएगा.
सुनील की जीभ से चाटने से उसकी चूत में चीटियाँ रेंग रही थीं.
उससे ध्यान हटाते हुए मालती ने सुनील के लंड को मुंह में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.
अब वो भी लंड को लपर लपर चूस रही थी.
अब सुनील और मालती दोनों ही बेचैन थे लंड और चूत के मिलन के लिए.
सुनील ने पहल करते हुए पोजीशन बदली और सीधा होकर मालती को होंठों पर चूसा और फिर मम्मों को चूसा.
ऐसे में उसका लंड सीधा मालती की चूत पर आ टिका.
अब बारी मालती की थी.
उसने हाथ से लंड को पकड़ा और चूत के मुंहाने पर रगड़ते हुए सुनील से कहा की धीरे धीरे अंदर घुसाना, मुझे दर्द हो तो रोक लेना.
सुनील ने मालती से लंड और अपनी चूत पर थोड़ी क्रीम लगाने को कहा.
फिर सुनील ने लंड को धीरे धीरे चूत के अंदर ठेला.
मालती बहुत घबरा रही थी.
बात भी जायज़ थी.
सुनील का लंड तो मूसल जैसा मोटा था.
पर सुनील ने बहुत आराम से धीरे धीरे अंदर किया.
मालती को दर्द हुआ तो पर आने वाले आनंद की ललक में उसने सुनील को नहीं रोका बल्कि उसे जोर से चूमा तो सुनील ने एक झटके में लंड पूरा अंदर कर दिया.
मालती चीखी- धीरे धीरे.
पर अब क्या हो सकता था.
अब तो सुनील के धक्के शुरू भी गये.
शुरू शुरू में तो मालती को दर्द ज्यादा हुआ पर जल्दी ही उसने सुनील का साथ देना शुरू कर दिया.
सुनील ने आम हिन्दुस्तानी स्टाइल में उसकी टांगें चौड़ाते हुए ऊपर कीं और चुदाई को पूरी स्पीड दे दी.
मालती अब इंग्लिश में उसे चुदाई जोर से करने को उकसा रही थी.
सुनील को अंदाज़ नहीं था की मालती चुदाई के लिए इतनी प्यासी होगी.
उस रात उन्होंने गर्मागर्म चुदाई के दो राउंड लगाए.
जल्दी ही दोनों की शादी हो गयी.
सुनील और मालती को सिर्फ दो ही शौक थे.
एक तो अपने काम पर पूरा ध्यान देना और फिर बाकी समय एक दूसरे में समाते हुए जम कर सेक्स करना.
इनके घमासान सेक्स का परिणाम ये हुआ की मालती पहले साल में ही गर्भ से हो गयी.
सुनील अभी बच्चे को तैयार नहीं था पर मालती किसी हालत में अपने बच्चा गिराना नहीं चाहती थी.
आखिर सुनील को झुकना पडा.
सुनील 26 साल के होने से पहले ही एक सुंदर से बच्चे के बाप बन गये.
मालती ने अब जॉब छोड़ दिया.
वो पूरा समय अपने परिवार को देना चाहती थी.
पैसे की कोई परवाह नहीं थी.
सुनील अपने काम के बाद सारा समय मालती और बेटे आनंद को देते.
मालती तो जान छिड़कती थी उस पर.
पर सुनील और मालती के सेक्स में कोई कमी न होने के बावजूद भी अब आग धीरे धीरे ठंडी पड़ती जा रही थी.
सुनील भी अब थोड़ा समय अपने दोस्तों की टोली को देने लगे.
पिछले 4-5 सालों में जिस सुनील की जिन्दगी में केवल एक लड़की मालती ही थी.
अब उनकी मित्रता अन्य लड़कियों से भी होने लगी.
पाश्चात्य देशों में तो इसे सम्बन्ध बहुत तेजी से पनपते हैं.
न चाहते हुए भी सुनील के भी इस तरह की अंतरंगता कई मित्र परिवारों से हो गयी.
हाँ, सुनील खुद बहुत नफासत पसंद थे तो उनकी इस श्रेणी की महिला या पुरुष मित्र होते अभिजात्य परिवार के ही थे.
मालती इस सबसे बेखबर थी.
अब उसका व्यवहार ठेठ हिन्दुस्तान औरतों जैसा हो रहा था.
वक्त के साथ उनके एक बिटिया भी हो गयी और बच्चों की पढ़ाई और संस्कारों की दुहाई देते हुए मालती सुनील को वापिस भारत ले आई.
अब ही तक की सेक्स बिफोर मैरिज कहानी आपको रोचक लगी होगी.
मुझे बताएं.
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