बाप बेटी चुदाई कहानी में मैं नहा धोकर सिर्फ स्कर्ट पहन कर नंगी चूत लेकर मम्मी के पास गयी और उनको बतया कि अब पापा से चूत चुदवाने की तैयारी है.
कहानी का पिछला भाग
सगी माँ के साथ चुदाई की बातें
अब आगे बाप बेटी चुदाई कहानी:
अगले दिन सुबह छह बजे अलार्म से नींद खुली।
नींद ज्यादा कंप्लीट नहीं हुई थी तो सिर भारी सा लग रहा था।
इसलिए मैं नीचे जाने के बजाय बाथरूम में फ्रेश होने और नहाने के लिए घुस गयी।
मैंने सोचा कि इससे थोड़ा ताजगी आ जाएगी फिर पापा के साथ ज्यादा मजा आएगा।
नहाधोकर मैंने सिर्फ टी-शर्ट और स्कर्ट पहन लिया लेकिन अंदर ब्रा और पैंटी नहीं पहना।
टाइम देखा तो करीब साढ़े छह बज रहे थे।
फिर मैं धीरे से बिना स्लीपर पहने दरवाजा खोलकर बाहर निकली और फिर नीचे जाने के बजाय दबे पांव पहले सोनू के रूम की तरफ गयी।
धीरे से उसके रूम का दरवाजा खोल कर देखा तो वो एसी चलाकर कंफर्टर ओढ़े हुए गहरी नींद में सो रहा था।
मैंने वापस धीरे से उसका दरवाजा बंद किया और नीचे आ गयी।
हॉल में पहुंची तो देखा कि मम्मी किचन में थीं और पापा के लिए नाश्ता और ऑफिस के लिए लंच बना रही थीं।
मैं किचन में चली गयी।
जैसे ही मम्मी ने मुझे देखा उनकी हंसी छूट गयी और वो बोलीं- वाह… नहा धोकर आयी है पापा को सरप्राइज देने के लिए।
मैं मुस्कुराकर स्कर्ट ऊपर कर नंगी चूत दिखाते हुए बोली- पूरी तैयारी से आयी हूं… अंदर कुछ नहीं पहना है।
मम्मी मुस्कुराकर बोलीं- पागल… कहीं सोनू उठ गया तो?
मैं धीरे से हंसकर बोली- अरे इसीलिए तो टीशर्ट और स्कर्ट पहना है नहीं तो मैं वो भी नहीं पहनती और नंगी आती नीचे।
इस पर मम्मी हंसने लगीं।
मैंने पूछा- कहां हैं पापा?
मम्मी बोलीं- बाथरूम में घुसे हैं नहाने के लिए… देख, हो सकता है निकल आए हों।
मैं बोली- ठीक है… मैं जा रही हूं… तुम आओगी।
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं- तू शुरू कर अपना काम मैं बीच में अचानक पहुंचूँगी तभी तो मजा आएगा।
इस पर मैंने उनके गाल खींचते हुए कहा- अरे वाह… तुम भी मजे लेने के मूड में हो।
फिर मैं धीरे से कमरे की तरफ गयी और पर्दे से हल्का सा अंदर झांककर देखा तो कमरा खाली था.
पापा अभी बाथरूम से निकले नहीं थे।
मैं कमरे में आ गयी और सीधा जाकर बेड पर गयी और बाथरूम की तरफ मुंह करके लेट गयी और पापा के निकलने का इंतजार करने लगी।
बाथरूम से निकलते ही पापा की नज़र मेरे ऊपर पड़ती इसीलिए मैं सामने बेड पर जाकर लेटी थी।
कुछ देर बाद ही बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आनी बंद हो गयी।
मैं समझ गयी कि पापा नहा चुके हैं और बाहर आने वाले हैं.
तभी पापा तौलिया लपेटे बाथरूम से निकले।
जैसे ही उनकी नज़र मेरे ऊपर पड़ी वो चौंक गये और खुश होकर हंसते हुए बोले- अरे तुम सुबह-सुबह यहां क्या कर रही हो?
मैं उठकर बैठते हुए बोली- आपका इंतजार कर रही थी। जब से आयी हूं आपसे ज्यादा बात ही नहीं हो पा रही थी तो सुबह सुबह मन हुआ आपसे बात करने का तो चली आयी।
यह कहते हुए मैं खिसक कर बेड के किनारे आ गयी और नीचे पैर लटका कर बैठ गयी।
पापा भी सामने आकर खड़े होते हुए बोले- वाह… अचानक कैसे सुबह सुबह पापा से बात करने का मन करने लगा।
मैं मुस्कुराते हुए अपना एक हाथ तौलिये के अंदर डालकर उनका लण्ड पकड़ कर धीरे से आंख मारते हुए बोली- मम्मी किचन में आपका लंच तैयार कर रही हैं… तब तक कुछ मजा दे दूं आपको!
पापा हल्का सा हड़बड़ा गये और मुस्कुराते हुए बोले- मम्मी आ गयीं तो?
मैं मुस्कुराकर लण्ड को हल्का हल्का सहलाते हुए बोली- कोई नहीं आने वाला… सोनू 10 बजे से पहले उठने वाला नहीं… बस एक मम्मी का डर है लेकिन वो अभी मम्मी किचन में बिजी हैं।
पापा को शक हो गया कि मामला कुछ और है वो हंसकर बोले- मुझे कोई दिक्कत नहीं लेकिन मम्मी आ गयीं तो तुम्ही समझाना उन्हें।
यह कहकर पापा तौलिये को खोलकर बेड पर रख दिया अब पापा पूरे नंगे मेरे सामने खड़े। इतनी देर में मेरे सहलाने से उनका लण्ड खड़ा हो गया था।
मैंने लण्ड की स्किन को पूरा पीछे खींच दिया और झुककर सुपाड़े को जीभ से ऐसे चाटा जैसे सॉफ्टी आइसक्रीम को चाटा जाता है।
शादी से पहले पापा के लण्ड इतना चूसा था कि उसकी महक मेरे दिमाग में बसी हुई थी और इतने दिनों बाद जब फिर से पापा के लण्ड की मादक खुशबू जैसे ही मेरी नाक में घुसी… उत्तेजना में मेरे बदन में झुरझुरी सी दौड़ गयी।
फिर मैं लण्ड को पूरा मुंह में लेकर चूसने लगी।
पापा एक हाथ से मेरे सिर पर रखकर कमर हिलाते हुए लण्ड चुसवाने लगे।
उनके मुंह से ‘आ आआ आह हह… बेटाआ आआआ’ की हल्की हल्की सिसकारी निकलने लगी थी।
कुछ देर बाद पापा हल्का सा झुक कर अपना एक हाथ मेरी टीशर्ट में डालकर चूची दबाते हुए लण्ड चुसवाने लगे।
अभी लण्ड चूसते हुए दो मिनट हुए होंगे कि मम्मी कमरे में आ गयीं और हम दोनों को देखते ही नखरा कर मुस्कुराते हुए बोलीं- अच्छा तो मेरी नाक के नीचे कब से चल रहा है ये बाप-बेटी का खेल?
मैं लण्ड को मुंह से निकाल कर सीधी बैठ गयी और हंसने लगी।
इतनी देर में पापा समझ गये कि मैंने और मम्मी ने मिलकर ही इसकी खिचड़ी पकायी है।
पापा हंसते हुए बोले- अच्छा… मतलब तुम दोनों ने पहले ही खिचड़ी पका ली थी।
मैं हंसकर बोली- और जो आप नाटक कर रहे थे इतने सालों से कि मम्मी को कुछ नहीं पता हमारे बारे में वो?
पापा हंसकर बोले- मेरी गलती नहीं है. तुम्हारी मम्मी ने ही मुझे मना किया था बताने को नहीं तो मैं कब का बता चुका होता और आराम से मजे करता।
मम्मी हंसकर पापा से बोलीं- अब ऑफिस जाने की जल्दी नहीं है क्या जो मजे से बात कर रहे हैं. बाकी दिन तो तूफान बने रहते हैं कि जल्दी चाय लाओ जल्दी नाश्ता लाओ. और आज अभी तक कपड़े नहीं पहने।
पापा हंसकर बोले- तुम बस नाश्ता और चाय लगाओ. मैं बस दस मिनट में आ रहा.
मम्मी हंसकर कमरे से बाहर निकलते हुए बोलीं- हाँ… इतने दिनों बाद बेटी मिली है तो मौका कहां छोड़ने वाले आप!
मैं और पापा हंसने लगे।
मम्मी कमरे से बाहर निकल गयीं।
इसके बाद पापा जमीन मेरे सामने नीचे बैठ गये और मेरी टीशर्ट ऊपर करके दूध पीने लगे।
पापा बोले- इतने दिनों बाद आज तुम्हारा दूध पीने को मिल रहा है।
मैं उनका एक हाथ पकड़कर स्कर्ट के नीचे अपनी नंगी चूत पर रखते हुए हंसकर बोली- दूध ही पीएंगे या मलाई भी चाटेंगे।
पापा चौंकते हुए बोले- पैंटी नहीं पहनी है क्या?
मैं मुस्कुराकर बोली- इतने दिनों बाद अपने पापा से मिल रही हूं तो ब्रा और पैंटी की क्या ज़रूरत?
इसके बाद पापा मेरे पैरों को उठाने लगे।
मैं हाथों की दोनों कुहनियों का टेक लेकर पीछे हो गयी और पैरों को उठाकर बेड पर रख लिया।
जिससे मेरी नंगी चूत पापा के मुंह के ठीक सामने थी।
पापा ने झुककर पहले मेरी चूत पर किस किया, उसके बाद जीभ निकालकर चाटने लगे।
मेरे मुंह से ‘आ आआआ आह हहह आह’ की हल्की-हल्की सिसकारियां निकलने लगीं।
इतनी देर में मम्मी फिर कमरे में आ गयीं और दरवाजे के पास खड़ी होकर हमें देखने लगीं।
वो भी बाप-बेटी के वासना के खेल को देखने का मौका छोड़ना नहीं चाह रही थीं।
मम्मी के सामने पापा से चूत चटवाने का अलग ही मज़ा आ रहा था।
मेरे मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं.
वहीं पापा बिना मम्मी की तरफ ध्यान दिये मजे से मेरी चूत ऐसे चाटे जा रहे थे जैसे बहुत दिनों के प्यासे हों।
अपनी बेटी की चूत को अपने हसबैंड को चाटते हुए देखकर मम्मी की आंखों में उमड़ रही वासना साफ पता चलने लगी थी।
कुछ देर चूत चाटने के बाद पापा खड़े हो गये।
खड़े होने के बाद उन्होंने मेरे दोनों पैरों को हाथे से पकड़ अगल-बगल पूरा फैला दिया और फिर हल्का सा झुककर अपने लण्ड को सीधा मेरी चूत के मुहाने पर रख दिया।
मेरी चूत उनके चाटने से पूरी तरह गीली हो चुकी थी, बस पापा के एक झटके की देर थी।
और फिर पापा ने पहले अपने लण्ड को पकड़कर चूत से हल्का-हल्का रगड़ा फिर चूत की दोनों पंखुड़ियों के बीच सुपाड़े को रखकर कमर को एक तेज झटका दिया जिससे पापा का लण्ड पूरा मेरी गीली चूत में घुसता चला गया।
मेरे मुंह से ‘आआ आआआ आआहह’ की एक तेज सिसकारी निकली।
उसके बाद अपने दोनों को हाथों को बेड पर टिकाकर पापा कमर को धक्का देते हुए मेरी चुदाई करने लगे।
मैंने भी अपने पैरों को मोड़कर पापा की कमर के दोनों ओर लपेट दिया और आँख बंद कर सिसकारी लेते हुए चूत चुदवाने लगी।
अब पापा को ऑफिस जाने की जल्दी थी या इतने दिनों बाद अपनी बेटी को चोदने की खुशी… कह नहीं सकती लेकिन वो तेजी से कमर हिलाते हुए मेरी चुदाई कर रहे थे।
उनके मुंह से भी हल्की हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।
मैंने बीच में एक बार आंख खोलकर देखा तो मम्मी खड़ी होकर हमें देख रही थीं।
जैसे ही हमारी निगाह मिली मैं हल्का सा मुस्कुरा दी और फिर आंख बंद कर चुदवाने लगी।
करीब 3 मिनट में ही पापा ने अचानक से अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी।
मैं भी इतने दिनों बाद पापा के साथ चुदाई का मजा ले रही थी वो भी मम्मी के सामने!
तो मेरी कामुकता भी चरम पर थी और मेरी चूत का पानी भी करीब-करीब छूटने ही वाला था।
मैं भी नीचे कमर को तेजी से हिलाते हुए पापा के हर धक्के पर ताल मिलाने लगी।
तभी पापा ने कमर को एक तेज झटका दिया और उनका शरीर अकड़ गया.
पापा ने ‘आआ आआ हहहह’ की सिसकारी के साथ लण्ड का गरम-गरम गाढ़ा वीर्य मेरी चूत में निकाल दिया.
और फिर 5-10 सेकेण्ड रुक कर तीन-चार और झटके देते हुए लण्ड का पूरा पानी मेरी चूत में निकालने लगे।
इधर मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया.
मैंने अपने पैरों को पापा के कमर से कसकर लपेट दिया और उन्हें दोनों जांघों के बीच जकड़े हुए कांप रही थी।
तभी पापा हांफते हुए मेरे ऊपर लुढ़क गये.
मैंने उन्हें दोनों हाथों में और पैरों से कसकर अपने बदन से चिपका लिया और आंखें बंद किये अपनी चूत में पापा के लण्ड के गरम-गरम पानी का महसूस कर रही थी।
मेरे और पापा दोनों की सांसें तेज चल रही थीं।
करीब 20 सेकेण्ड तक हम दोनों इसी तरह चिपके रहे.
तभी बाप बेटी चुदाई देखकर मम्मी कमेंट में बोलीं- अरे छोड़ेंगे भी उसे… या सारा हसरत अभी ही पूरी करेंगे।
मैंने आंख खोल कर मम्मी की तरफ देखा।
तो वो हम दोनों को देख रही थीं।
पापा धीरे से मेरे ऊपर से उठे और टॉवेल से पहले अपना लण्ड साफ किये और फिर मुझे पकड़ा दिया।
मैं अभी उसी तरह लेटी थी मेरी पापा का वीर्य और मेरी चूत का मिक्स पानी रिसकर बेड शीट पर जा रहा था।
मैं टॉवेल को चूत पर लगाकर खड़ी हुई और साफ करने लगी।
मम्मी किचन में पापा का नाश्ता निकालने चली गयीं।
उधर पापा जल्दी से कपड़े पहन कर ऑफिस के लिए तैयार होने लगे।
मैंने भी चूत साफ करने के बाद टीशर्ट और स्कर्ट पहना और कमरे से निकल कर सीधा किचन में मम्मी के पास आ गयी।
खैर इस तरह उस दिन के बाद से होली के दिन तक सोनू से छिपकर सुबह पापा के साथ और पापा ऑफिस जाने के बाद सोनू और मम्मी के बीच खुलकर चुदाई होने लगी।
सोनू और मम्मी के साथ मैं भी अक्सर उसमें शामिल रहती।
मम्मी को ज्योति और सोनू के बारे में पता था इसलिए अब ज्योति के आने पर वो और सोनू ऊपर आराम से बिना किसी डर के मजे करते थे और मैं नीचे मम्मी के साथ।
सच कहूं तो घर में सुबह-सुबह भाई से छिपकर पापा के साथ और पापा के ऑफिस जाने के बाद मम्मी और भाई के साथ इस तरह का सेक्स एडवेंचर खेल में मजा आ रहा था।
इस तरह कब होली आ गयी पता ही नहीं चला।
कहानी आगे भी लिखूँगी.
आज की बाप बेटी चुदाई कहानी कैसी लगी?
sexygarimaa@gmail.com