सरपंच ने मेरी कुंवारी गांड फाड़ दी

Views: 2 Category: Gay Sex Stories By nopsingh.laxx Published: September 28, 2026 📖 10 min read
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गांड फाड़ कहानी में बस स्टैंड के टोयलेट में मैंने दो आदमी को एक दूसरे का लंड पकड़ते देखा तो मुझे अच्छा लगा. मैंने भी कुछ ऐसा करके देखने की सोची.

दोस्तो, मैं राजेश चौधरी सीकर राजस्थान से हूँ.
यह मेरी raatkibaat पर पहली सेक्स कहानी है, इससे पहले मैं raatkibaat पर बहुत सारी कहानी पढ़ चुका हूँ.

यह गांड फाड़ कहानी 2016 की सर्दियों की है जब मैं जयपुर एग्जाम देने गया हुआ था.

एग्जाम देने के बाद मैं वापिस सिंधी कैंप बस स्टैंड पर आ गया और पेशाब करने बाथरूम में गया.

वहां दो आदमी एक दूसरे का लंड पकड़ रहे थे.
मैं उनको देखकर चौंक गया क्योंकि इससे पहले मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा था.

हालांकि यह सब देख कर मुझे अच्छा लगा तो मैं सोचने लगा कि क्या मैं भी इसी टाइप का हूँ!

मुझे कॉलेज टाईम से परिपक्व और बूढ़े आदमियों से बात करना अच्छा लगता था.
राजस्थान में लगभग सभी मूँछों को रखना पसंद करते हैं और मुझे उनकी मर्दानगी भरी शक्लो-सूरत व हट्टा-कट्टा जिस्म अन्दर तक मस्त कर देता था.

ये लोग भी कुछ उसी तरह से दिख रहे थे तो मुझे मजा आने लगा था.

मैं उन दोनों आदमियों को तिरछी आंखों से बाथरूम में रुक रुक कर देखने लगा.
एक ने मेरी इस हरकत को ताड़ लिया और उसने मुझे इशारा किया कि आ जा, लंड पकड़ ले!

उसके इस इशारे से मैं घबरा गया और बाथरूम से बाहर आ गया.

फिर मैंने वहीं रूकने का फैसला किया.

बाथरूम के बाहर और भी लोग खड़े थे.
शायद ज्यादातर इसी काम के लिए खड़े थे.

मैं उन सभी को ताड़ रहा था.
वह सभी लोग एक एक करके बाथरूम के अन्दर बाहर जा रहे थे.

उस समय रात के दस बजे का समय रहा होगा, तभी वहां एक आदमी आया.
उसने कम्बल ओढ़ रखा था और कुर्ता पजामा पहने हुए था.
खासा मर्द लग रहा था और बड़ी बड़ी उमेठी हुई मूँछें रखे हुए था.
उसकी हाइट काफी ज्यादा थी लगभग 6 फीट की रही होगी.

मेरी हाइट भी 6 फीट ही है.
इसी लिए उसकी नजर बरबस ही मुझ पर पड़ गई थी.

वह बाथरूम में घुसा तो मैं उसके पीछे पीछे चला गया.
वह खड़ा होकर पेशाब कर रहा था.
उसके बगल में जाकर मैं भी खड़ा हो गया.

मैंने अपना लंड निकाला और धार मारने लगा.
वह मेरे लंड को देख रहा था.
मैं भी उसके लंड को देखने लगा था.

उसका लंड मेरे लंड से बड़ा था तो वह हंस दिया.
मैं थोड़ा सा नर्वस होकर बाथरूम से बाहर आ गया.

वह भी मेरे पीछे पीछे आ गया.
हम दोनों एक दूसरे को घूर घूर कर देखने लगे.

मेरी नजर जैसे ही उससे मिलती, तो वह अपने लंड पर हाथ फेरने लगता.

काफी देर तक ऐसा ही चलता रहा. इसके बाद वह मेरे पास आया.
उसने कहा- कहां जाओगे?
तो मैंने कहा- सीकर जाऊंगा.
फिर वह बोला- मैं झुंझनू जाऊंगा.

अब हम दोनों बात करने लगे.

मैंने पूछा- आप क्या काम करते हो?
वह बोला- मैं सरपंच हूँ.

उसकी उम्र करीब 55 साल की रही होगी मगर वह शरीर से बहुत फिट था.
उसने अपनी आंखों पर नजर का चश्मा लगाया हुआ था जो उसके ऊपर काफ़ी फब रहा था.

फिर सरपंच जी ने कहा- इतनी रात को कहां सीकर जाओगे, मेरे साथ रूक जाओ. मैंने यहां पास में ही एक होटल में रूम ले रखा है.
ऐसा कह कर वह अपना लंड पकड़ कर सहलाने लगा और मुझे पजामे के ऊपर से ही लौड़े की झलक दिखाने लगा.

मैंने भी उसके लौड़े को देख कर हां बोल दिया.

अब उसने पूछा- क्या तुम शौक रखते हो?
मैंने कहा- मुझे इस बारे में अभी कुछ नहीं मालूम है!

ये बात सुनकर वह हंसने लगा और मेरा हाथ पकड़ कर होटल की ओर जाने लगा.
मैं भी उसके साथ खिंचा चला गया.

हम दोनों होटल पहुंचे और कमरे में आ गए.
मैं बेड पर बैठ गया.

सरपंच ने जेब से सिगरेट की डिब्बी निकाली और बोला- सिगरेट पिओगे?

मैंने हां बोला तो उसने दो सिगरेट एक साथ अपने होंठों में दबा कर सुलगा लीं.
फिर एक मेरी तरफ बढ़ा कर वह मेरे पास को बैठ गया और मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगा.

वह दिखने में काफ़ी सुंदर था और मैं भी दिखने में फिट था.
मेरा रंग ही थोड़ा सांवला था.

सरपंच की मूछें भी काफ़ी शानदार थीं.

उसने मेरी जांघ पर हाथ फेरते हुए पूछा- पहले कभी किया है?
मैंने ना में सिर हिला दिया.

फिर वह बोला- कोई दिक्कत नहीं है, डरो मत … आराम से बैठो!
ऐसा कहकर उसने सीधे मेरा मुँह पकड़ कर मेरे होंठ अपने होंठों में भींच लिए.

मैं थोड़ा डरने लगा और कांपने लगा.

वह मुँह हटा कर बोला- किस अच्छा लगा क्या?
मैंने कहा- हां!

तो उसने सिगरेट का एक कश भरा और सारा का सारा धुआँ मेरे मुँह में निकालने के लिए मेरे होंठ चूसने लगा.
उसी दरमियान वह अपने मुँह में भरा धुंआ मेरे मुँह में छोड़ने लगा.

करीब दस मिनट तक वह मेरे होंठ, गर्दन, गाल चूसता रहा.
हम दोनों खड़े खड़े एक दूसरे को चूस रहे थे.

इसी बीच उसका लंड खड़ा हो चुका था और मेरे लंड से टकरा रहा था.

सरपंच ने मेरी टी-शर्ट उतार कर साइड में फेंक दी और मेरी छाती के निप्पल को चूसने लगा.

फ़िर मैंने भी उसका कुर्ता उतार दिया और उसकी छाती को देखने लगा.
चौड़ी छाती सफेद बालों से भरी पड़ी थी.

उसके बाल बनियान के बाहर से निकल रहे थे.
मैं उसकी बनियान उतार कर उसकी छाती में मुँह फेरने लगा.

कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर बिठाया और मेरे सामने खड़ा हो गया.

उसका पजामा तम्बू की तरह तना हुआ था.
वह बोला- मेरा नाड़ा खोलो!

मैंने उसका नाड़ा खोला तो पजामा नीचे गिर गया.
फिर उसने जैसे ही अपनी चड्डी नीचे सरकाई, वैसे ही उसका लंड मेरे मुँह पर आकर लगा.

मैं अचानक से मुँह में लंड की चमाट लगने से डर गया.
फिर ध्यान से देखा तो गांड फट गई. उसका लंड 8 इंच लम्बा और 3 इंच तक मोटा था.

वह बोला- चूसो!
मैंने चूसा तो अजीब सा स्वाद लगा पर उसके लंड की खुशबू मुझे बड़ी अच्छी लग रही थी.

अब मैं सिर्फ उसके लंड को सूंघ रहा था.
वह कमरे में लगे फ्रिज से एक आइसक्रीम निकाल कर लाया और अपने लंड पर लगा ली.

फिर वह बोला- अब इसे चाटो और चूसो!
आइसक्रीम लगी होने की वजह से मैं उसके लंबे लंड को चूसने लगा.

उसका लंड मेरे मुँह में आधा ही जा रहा था.
कोई 15 मिनट तक लंड चूसने के बाद सरपंच ने मुझे सीधा लिटा दिया और मेरी टांगों की तरफ आ गया.

उसने मेरी दोनों टांगों को ऊपर उठाकर मेरे ही कंधों से लगा दीं.
इससे मेरी गांड ऊपर उठकर उनके मुँह के सामने आ गईं.

अब वह मेरी गांड चाटने लगा, जिससे मुझे भयंकर गुदगुदी हो रही थी.
मैंने उससे ऐसा करने के लिए मना किया.
तो वह नहीं माना, चूसता चाटता ही रहा.

करीब 5 मिनट तक मेरी गांड का छेद अपनी जीभ से चाटने के बाद उसने मुझे करवट के बल लिटा दिया और मेरे पीछे आकर पोजीशन बना कर लेट गया.

फिर उसने मेरी एक टांग उठाकर ऊपर कर दी और धीरे धीरे अपने लंड को मेरी गांड से रगड़ने लगा.
मुझे खूब मजा आ रहा था.

फिर उसने अचानक से एक जोरदार झटका दिया जिससे उसका टोपा मेरी गांड में घुस गया.
और मुझे इतना दर्द हुआ कि मेरी आंखों से आंसू आ गए.

मेरा पूरा शरीर अकड़ गया और मुँह से दर्द भरी कराह निकलने लगी.
उसने मुँह दबा दिया और लौड़े को गांड के अन्दर ही चलाने लगा.

कुछ देर बाद जब मुझसे सहन नहीं हुआ तो मैं छटपटाया.
वह समझ गया और मुझसे अलग होकर मुझे किस करने लगा.

उसका लंड बाहर हो गया था तो दर्द खत्म हो गया था.

फिर कुछ देर बाद उसने अपने बैग से एक पॉन्ड्स क्रीम की डिब्बी निकाली और मेरी गांड पर लगाने लगा.
काफ़ी मात्रा में क्रीम लगाने के बाद मेरी गांड थोड़ी ढीली होने लगी.

फिर उसने अपने लंड को भी क्रीम से भर लिया और मुझे सीधा लिटाकर मेरी टांग उठाकर मेरे ऊपर छा गया.
उसने अपने 8 इंच के लंड को मेरी गांड पर सैट किया और धीरे धीरे जोर लगाना शुरू किया.

मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था.
तभी सरपंच ने अचानक से झटका दिया और अपना आधा लंड मेरी गांड में घुसेड़ दिया.

मेरी चीख निकलती, उससे पहले उसने अपना हाथ मेरे मुँह पर रख दिया और तुरन्त ही दूसरा झटका दे दिया.
उसका पूरा लंड मेरी गांड में समा गया और मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया, तारे से चमकने लगे.

कुछ मिनट तक सरपंच जी हिले ही नहीं और उसका पूरा लंड मेरी गांड में फूल पिचक रहा था तो उसने अपने लिए अन्दर जगह बना ली थी.

अब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने आंखें खोलीं और लम्बी लम्बी सांस लेने लगा.

सरपंच मुझे देखकर मुस्कराते हुए बोला- अब तुमको मजा आएगा.
यह कह कर सरपंच हल्के हल्के धक्के देने लगा और धीरे धीरे अपनी कमर हिलाने लगा.

गांड में चिकनाई थी तो अब मुझे भी मज़ा आने लगा था.
मैं उसकी छाती पर हाथ फेरने लगा और मैंने अपनी गांड ढीली छोड़ दी.

इससे सरपंच समझ गया कि मेरी गांड का दर्द कम हो गया है.
तो उसने अपने झटकों की स्पीड भी बढ़ा दी.

इसी के साथ साथ उसने मेरे लंड की मुठ मारनी शुरू कर दी थी तो मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था.
अब मैं भी अपनी गांड चलाने लगा.

तभी उसने अपना लंड पूरा बाहर निकाल कर झटके से वापिस अन्दर डाल दिया.
इससे मुझे दर्द हुआ और मेरा शरीर अकड़ गया.

उसने ऐसे 3-4 बार करते हुए मस्त झटके दिए, जिससे मेरे आंसू आ गए.
फिर उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और खड़ा हो गया.

मैंने उसके लंड को देखा तो उसका लंड एकदम तना हुआ था और उसकी नाभि से भी ऊपर जा रहा था.
उसका लंड लाल हो रखा था.

मैंने पूछा- ये लाल कैसे हुआ
वह हंस कर बोला- तुम्हारी गांड से थोड़ा खू.न निकल गया है.
मैं डर गया.

वह बोला- डरो मत यार, पहली बार ऐसा होता है.

फिर वह अपना लंड धोने बाथरूम में चला गया और वापिस आकर अपने लंड को मेरे मुँह के सामने रख दिया.
सरपंच ने कहा- अब चूसो!

मैं उसके लंड को काफी देर तक चूसता रहा.
उसने धीरे धीरे लंड को मेरे गले तक उतार दिया.

इसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरे पीछे आ गया.
उसने वापस से मेरी गांड के छेद में क्रीम लगा दी और लंड के टोपे को गांड के ऊपर रगड़ने लगा.

मुझे मजा आ रहा था.
फिर उसने अपने हाथों से मेरी कमर पकड़ कर लंड को अन्दर दबाया और एक झटके में पूरा लंड मेरी गांड में पेल दिया.

मैं उस अचानक लगे झटके से आगे को जाकर बेड पर गिर गया.
मेरा मुँह रोने जैसा हो गया और मैंने कहा- ऐसे करने से कोई मजा नहीं आता है!

वह बोला- अब आराम से करूंगा!
मैं फिर से घोड़ी बन गया.

अब उसने धीरे धीरे अपना लंड मेरी गांड में डाला और फिर से मुझे जोर जोर से चोदने लगा.
उसकी चुदाई से मेरी गांड की खाल अन्दर बाहर हो रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था कि अभी लेट्रिन निकल आएगी.

कुछ ही देर बाद सरपंच अब इतना तेजी से चोदने लगा था कि कमरे से थप थप की आवाज आने लगी.
दस मिनट बाद सरपंच ने गांड फाड़ स्पीड और तेज कर दी.
अब उसके मुँह से भी आवाज आने लगी.

मुझे ऐसा लग रहा था कि गांड में उसका लंड और बड़ा हो गया है.
फिर तभी सरपंच ने आह आह की मीठी आवाज निकालते हुए 4-5 झटके दिए और अपना वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया.

मुझे अपनी गांड में गर्म गर्म महसूस हुआ और सच पूछो तो काफी अच्छा लगा.
सरपंच लगभग 5 मिनट तक मेरी गांड में लंड पेले हुए मेरे ऊपर ही लदा रहा.

मुझे भी अच्छा लग रहा था.
वह मुझे मेरी गर्दन पर चूमने लगा और प्यार करने लगा.

उस रात सरपंच ने मुझे 3 बार चोदा और हर बार मेरी गांड में ही अपना माल छोड़ा.
मुझे अपनी गांड मरवाने में बहुत मज़ा आया.

उसके बाद मैं सरपंच से बार बार मिला और वह हर बार मेरी 3-4 बार गांड मारता और रात भर चोदता.

तो दोस्तो, इस तरह मैंने पहली बार सरपंच जी से अपनी कुंवारी गांड मरवाई.
आपको ये मेरी पहली गांड फाड़ कहानी कैसी लगी, जरूर बताएं.
आप लोगों के मेल मिले और यदि आपने चाहा तो मैं अपनी अगली गे सेक्स कहानी भी जल्दी ही लेकर आऊंगा.
धन्यवाद.
nopsingh.laxx@gmail.com

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