भाई के दोस्त ने मुझे रगड़ कर पेला

Views: 47 Category: Gay Sex Stories By kayanehsash Published: April 15, 2026

ऐस्स फ़क स्टोरी में मैं गांडू नहीं था, मेरी गर्लफ्रेंड को मैं खूब चोदता था. लेकिन मेरे बड़े भाई के एक दोस्त से मेरी भी खासी दोस्ती थी. मैं अक्सर उनके साथ रहता था.

फ्रेंड्स, मेरा नाम अनुज है. मेरी उम्र 24 साल है. गोरा-सा रंग, क्यूट-सा चेहरा और क्लीन शेव रहता हूँ.

मेरे दो बड़े भाई हैं … अरुण और अमन.
दोनों मुझसे 4 साल बड़े हैं.
मेरे दोनों बड़े भाई जुड़वां हैं, लेकिन उनके चेहरे एक जैसे नहीं हैं.
दोनों भाइयों के पास इंडिविजुअल बाइक है, बस मेरे पास नहीं है.

मेरे पापा गवर्नमेंट जॉब में हैं.
फैमिली बैकग्राउंड अच्छा है.

उन दोनों के साथ मैं ज्यादा फ्रेंडली तो नहीं हूँ लेकिन साथ में खेलना और जिम जाना कभी-कभी होता था.

मैं अपने भाई के दोस्त संकेत भैया के साथ जिम जाया करता था क्योंकि हम दोनों का जिम जाने का समय लगभग एक जैसा ही था इसलिए उनके साथ मेरी जुगलबंदी बन गई थी.

संकेत भैया बहुत हैंडसम पर्सनैलिटी के इंसान हैं.
वह काफी गोरे हैं.

लाइट बीयर्ड लुक्स में खुद का एक अलग छाप छोड़ जाता था.
जिम जाकर चौड़ा सीना दिखता तो सब देखते रह जाते … और मस्कुलर बॉडी के साथ उसका एक अलग रोब था.

वह अपने सीने से बाल साफ करके चिकनी छाती जब दिखाता था तो … वाह क्या लुक दिखता था संकेत भाई का, मेरा तो समझो जी मचल उठता था.

मेरा ही क्यों और भी सब लड़के उसको देख कर अह अह करते थे.

उस पर कई लड़कियां मरती थीं लेकिन उसे हमेशा से एक सिंपल लड़की चाहिए थी.

यह ऐस्स फ़क स्टोरी इन्हीं संकेत भाई के साथ की है.

संकेत भाई का घर मेरे घर से बस कुछ ही दूरी पर था.
हम दोनों साथ में क्रिकेट भी खेलते थे.
उसके साथ मेरी अच्छी बॉन्डिंग थी.

मैं भी उसके घर में बहुत अधिक समय व्यतीत करता था.
मेरे दोनों भाइयों से ज्यादा अच्छा रिश्ता ही गया था मेरा … उसके साथ.

संकेत एक डॉक्टर है.
इसी शहर के एक अच्छे हॉस्पिटल में पोस्टिंग थी उसकी.

एक साल पहले उसकी शादी मेरे ही स्कूल की फ्रेंड आस्था से हुई है तो मेरा उनके पूरे परिवार से अच्छा-खासा कनेक्शन बन गया है.

संकेत भाई की शादी से पहले मैं अपना अधिकतम समय उसके घर पर रहता था और रात को भी रुक जाता था.

भाई और मैं साथ में मूवीज और वीडियो गेम्स खेला करते थे.
फिर देर हो जाती तो मैं उसके साथ ही रुक जाता था.

मेरी जीएफ का नाम सुमन है.

हम दोनों पिछले 3 साल से रिलेशनशिप में हैं.
हम दोनों के बीच सब कुछ अच्छा चल रहा था … और हम दोनों के बीच फिजिकल रिश्ता भी बन चुका था.
हम दोनों एक-दूसरे को सैटिस्फाई कर लेते थे.

संकेत भाई की शादी को एक साल हो गया था.
वह मुझसे सब कुछ शेयर कर देता था कि कैसे वह आस्था को खुश करता है.

सब कुछ खुल कर बोल देता था मुझसे.
मैं भी कभी-कभी पूछ लिया करता था.

आस्था को हाई स्कूल टीचर की गवर्नमेंट जॉब मिल रही थी.
आस्था वह जॉब करना चाहती थी.

संकेत ने बहुत समझाया कि उसे जॉब करने की कोई जरूरत नहीं है.
लेकिन आस्था अपनी पढ़ाई को व्यर्थ नहीं देना चाहती थी.

संकेत के घर में बस उसकी मम्मी थीं तो फैमिली को संभालने के लिए आस्था को घर संभालना था.
लेकिन आस्था ज़िद पर अड़ी थी.

आस्था के पेरेंट्स ने भी घर आकर संकेत को समझाया, फिर बेमन से संकेत आस्था की जॉब के लिए राजी हुआ.

फाइनल ये हुआ कि आस्था की जॉब प्लेस में संकेत की मम्मी और आस्था साथ में रहेंगी.
वह स्कूल ज्यादा दूर नहीं था, बस 50 किमी की दूरी पर था.

संकेत उदास होकर मुझे बताने लगा.
‘अनुज, तेरी दोस्त बहुत ज़िद्दी है यार अब मैं कैसे रहूँगा उसके बिना? मेरा जीना मुश्किल हो जाएगा यार!’

मैंने उसे समझाया- ज्यादा दूर तो है नहीं हफ्ते में दो या तीन दिन वहां हो आया करो … सब ठीक हो जाएगा.
संकेत बोला- यार, मुझे सेक्स डेली चाहिए होता है. मैं उसके साथ वीक में मिनिमम 5 बार फिजिकल होता था. मैं कैसे रहूँगा यार? बहुत प्यार करता हूँ तेरी दोस्त से. उसके बिना एक रात काटना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा.

मैंने संकेत भाई को दिलासा देकर समझाया.

ऐसे ही कुछ दिन बाद आस्था का जॉइनिंग की डेट आ गई.
आस्था और आंटी को लेकर मैं और संकेत भाई गए थे.

वहां सब सैट करके मैं दूसरे दिन वापस आ गया था.
संकेत वहां से एक हफ्ते बाद सब कुछ सैट करके आने वाला था.

संकेत ने अपने घर की चाबी मुझे दी थी, ताकि मैं वहां रात को उनके घर में रुकूँ.

मैं भी रिटर्न आकर उनके ही घर में रात को रुकता था. मेरे लिए भी अच्छा हो गया था.
इस बहाने मैं भी सुमन से रात के देर तक बात करता था.

सुमन बहुत सुंदर थी.
उसके साथ जब-जब फिजिकल हुआ, मुझे बहुत आनन्द मिला.

वह बहुत मस्त थी और सेक्स में हर तरह से सहयोग करती थी.
हम दोनों एक-दूसरे से इतना प्यार करते थे कि एक-दूसरे के लिए समर्पित हो गए थे.

शुरू शुरू में सुमन की चूचियां बहुत ज्यादा बड़ी नहीं थीं. मेरे हाथ में आसानी से आ जाती थीं.
हां उसकी चूचियां कुछ ज्यादा ही टाइट थीं … मतलब स्पंजी तो थीं, लेकिन लूज नहीं थीं.

उसकी रसभरी चूचियां मेरे हाथ के साथ-साथ मुँह को बहुत मजा देती थीं.
उसकी मीडियम साइज की चूचियों को मैं अपने मुँह में भर कर खींच खींच कर मस्ती करता था तो वह भी नशीली आंखों से मुझे अपने दूध चुसवा कर आ आह करती थी.

तीन साल में मैंने उसकी चूचियों को थोड़ा बड़ा तो कर ही दिया था.
उसको भी कोई परहेज नहीं था मेरे साथ सेक्स करने में.
उसे भरोसा था मुझ पर.

जब वह हम एक-दूसरे को किस करते थे, तो खुद को भूल जाते थे.

उसको मेरे लंड को हिलाने में बहुत मजा आता था.
मेरे रिक्वेस्ट करने से वह मेरा लंड भी चूसना सीख गई थी.

ये सब मैंने उसकी आदत बनवा दी थी अब वह मेरे लौड़े को जरूर चूसती थी.
ज्यादातर समय तो बिना सेक्स के वह सिर्फ लंड चूस कर ही मुझे मजा दे देती थी.

एक दिन शाम को संकेत के घर में मैं सुमन को लाया और उसके साथ फुल एंजॉय किया था.
उस दिन रात को संकेत भाई आने वाला था तो फिर कब मौका मिलेगा कि नहीं … ये सोचकर मैं सुमन को उस शाम को ले आया था.

उस दिन सुमन को मैंने कन्विंस करके एनल सेक्स किया था.
उसने पहले मना किया था लेकिन मैंने समझाया तो वह राजी हो गई थी.

मैंने वैसलीन लगा कर उसकी गांड को उंगलियों से ढीली की और लंड पेल कर खूब देर तक गांड चुदाई का मजा लेने की तैयारी की.

पहले कुछ वक्त तक हम दोनों ने सामान्य चुत लंड वाला सेक्स किया और उसके बाद जब मैंने उसके साथ एनल किया, तो कुछ देर दर्द हुआ.
उसके बाद सुमन खुद एंजॉय करने लगी.

मेरा लंड ज्यादा मोटा नहीं है शायद इसलिए थोड़ा दर्द सहन करने के बाद वह गांड चुदाई का मजा लेने लगी थी.

दो बार चोदने के बाद मैं सुमन को उसके घर छोड़ने गया और लौट कर वापस आने के बाद मैं संकेत के बेडरूम में कपड़े उतार कर नंगा ही सो गया.

दो घंटे बाद सुमन का कॉल आया.
उसने कहा कि उसे एनल में भी बहुत मजा आया.

अब हम दोनों वीडियो चैट में न्यूड होकर चैट करने लगे.
चैट करते-करते मैं ऐसे ही सो गया.

रात को घड़ी में कितने बज गए थे, मुझे पता ही नहीं था.

मुझे यह भी पता नहीं था कि मैं जाग रहा हूँ या सपने में देख रहा हूँ.
उस वक्त मेरे शरीर में कुछ अच्छी-सी सिहरन फील हो रही थी.

कोई मेरी गांड को सहला रहा था … हल्का मसाज करने जैसा लगा.
मुझे कुछ पता नहीं चला क्योंकि मैं सुमन की चुदाई के बाद इतना ज्यादा थका हुआ था कि आंख खोलने को मन भी नहीं हुआ.
लेकिन कुछ तो अच्छा-सा फील हो रहा था.

फिर इस तरह का अहसास हुआ कि मेरी ऊपर उठी हुई गांड को कोई दबा रहा था और फिर मेरी गांड के दोनों साइड करके कोई अपना दबाव दे रहा था.
मैं दो बार डिस्चार्ज हो चुका था, सो मन नहीं कर रहा था कि देखूँ ये सच है या मेरा सपना.
लगा जो भी हो रहा है, अच्छा लग रहा है.
सो ज्यादा कुछ सोचे बिना होने दिया और एंजॉय करने लगा.

थके हुए जिस्म पर कोई हाथ लगा कर दबाए तो कुछ ज्यादा ही अच्छा लगता है.

फिर अहसास हुआ कि मेरी गांड के छेद में कुछ सॉफ्ट-सॉफ्ट फील हो रहा है.

मुझे अच्छा लग रहा था.
मैं खुद भी अपनी गांड के छेद को ढीला करने लगा.

सच बता रहा हूँ कि मुझे सपना जैसा लग रहा था.
फिर गीला सा लगा तो अहसास हुआ कि कोई मेरे अस होल को अपनी जीभ से चाट रहा था.

फिर मेरी गांड के दोनों हिस्सों को अपने हाथ से अलग करके मेरे ऐस्स होल को ज्यादा-ज्यादा चूसते-चूसते खाने सा लगा.

मैंने चरम सुख महसूस करते हुए अपनी गांड को ऊपर थोड़ा उठा दिया.
मेरी गांड ऊपर उठाते ही वह जो भी था, मेरी गांड के दोनों उभरे हुए हिस्सों को हाथ से दबाने लगा.

ये सब मुझे और उत्तेजित कर रहा था.

फिर वह मेरी गांड को जोर-जोर से दबाने लगा.
मेरे थकान भरे शरीर को ये अच्छा लग रहा था.

उसके बाद मेरी पीठ को चूमते हुए मेरी गर्दन तक चूमते-चाटने का अहसास दिया.
फिर किसी का शरीर का अहसास मेरे शरीर पर हुआ. उसके शरीर की गर्मी के साथ मेरी गर्दन को जीभ और होंठों से चूसना चूमना और हल्के से उस अंग पर लव बाइट हुआ तो मुझे अहसास हुआ कि ये कोई सपना नहीं है. सच में कोई कर रहा है.

पर जो भी हो रहा था, अच्छा तो लग ही रहा था मुझे.

मैं कन्फ्यूज्ड था कि पीछे मुड़कर देखूँ या नहीं. लग रहा था कि सुमन वापस या गई है.

उसका नाम याद आने से मेरे जिस्म में एकदम से उत्तेजना भर गई थी.
अब मैं बेसुध हो गया था.

वह और जोर-जोर से मेरी गर्दन पर चुंबन और हल्के हल्के से काट रहा था.

मैं खुद को कंट्रोल करना चाहता था … तो मैंने थोड़ा-सा जोर लगाकर खुद को पलटा.
सामने देखा कि मुझे संकेत भाई ने अपनी बांहों में ले लिया था.

उसकी चौड़ी छाती का स्पर्श मुझे मस्त अहसास दे रहा था.
ऐसा लगा ही नहीं कि सुमन की जगह कोई और है तो हट जाऊं!

मैंने अपने मुँह से ‘संकेत भैया’ बोलकर आवाज निकाली.
फिर भी उसने मेरी आवाज को न सुनकर मेरे निप्पल को मुँह में भर लिया और मजे से चूसने लगा.

अब मुझे कुछ गलत सा लगा तो मैं धीमे से बोला- भैया, छोड़ो …

संकेत ने बिना कुछ बोले मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से लॉक किया और मेरे बॉडी के ऊपर आकर अपना भार मेरे ऊपर रख कर दबा लिया.
अब उसने अपना मुँह मेरे निप्पल पर लगाया और मस्ती से चूसने लगा.

मैं बोला- संकेत भैया, छोड़ो मुझे!

लेकिन उसने कुछ भी नहीं सुना और मुझे अपने वजन व हाथों से लॉक करके अपना मन की करता गया.

जब मैंने दोबारा फिर से बोलने की कोशिश की, तो वह इस बार मेरे होंठों में अपने होंठ लॉक करके मुझे किस करने लगा.
कभी मेरा ऊपर का होंठ तो कभी निचला होंठ चूसता गया.

उसके किस करने में मुझे एक अलग-सा अहसास हुआ.

सुमन के किए हुए चुंबन से ये अलग था.
मैं जिस तरह से उसे हैवी स्मूच करता था, संकेत वैसा ही मुझे कर रहा था.

वह किस पर किस करता गया और स्मूच पर स्मूच देता गया.

अब मैंने उसका विरोध करना छोड़ दिया और मैं भी उसके किस को रिस्पॉन्स देने लगा.
मैंने भी उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

यह देख कर उसने मेरे हाथों को अनलॉक कर दिया और अपने हाथों से मेरे हाथों को अपनी पीठ पर रखवाया.
मैं किस करते हुए उसकी पीठ को सहलाने लगा, तो कभी मजबूती से पकड़ने लगा.

उसकी जिम बॉडी की गर्मी मुझे उत्तेजित करने लगी और सेक्स का मूड बनवाने लगी.

वह मेरे बालों को भींच रहा था और मेरे होंठों को चूसता जा रहा था.
मुझे पता नहीं क्यों ये सब ऐसा नहीं लग रहा था कि मैं एक लड़के के साथ ये सब कर रहा हूँ.

मुझे बस सेक्स दिख रहा था.

अब उसका लंड भी मुझे चुभने लगा था. ऐसा लग भी रहा था कि बहुत बड़ा होगा, क्योंकि उसके लंड की चुभन भी काफी सख्त सी थी.
मैं मादक सिसकारियां ले रहा था.

उसने मेरे हाथ को अपने लंड पर रखवाया और हिलाने को इशारा किया.

ओ माइ गॉड … उसका लंड तो काफी बड़ा था … मोटा और लंबा, समझो मेरे लंड से डबल रहा होगा … ऐसा फील हो रहा था.
बिना देखे ही मालूम हो रहा था कि बहुत ज्यादा बड़ा हथियार है.

मैं मस्त होकर उसके लौड़े को हिलाता गया. उसका लंड मेरी मुट्ठी में मुश्किल से आ रहा था.

अब वह किस करना बंद करके मेरे जिस्म के अलग अलग अंगों को चूसने चूमने लगा और बाइट पर बाइट देता गया.
मुझे मजा और दर्द का एक मिश्रित आनन्द का रसभरा अनुभव मिल रहा था.

उसने बोला- लंड चूसो प्लीज!
मैं आंख बंद करके बोला ‘नहीं.’

उसने मेरे गालों को पकड़ लिया और मेरे होंठों को चूसने लगा.
मैं उसके साथ आंख बंद करके सब करता जा रहा था.

फिर वह मेरे हाथों से अपना लंड छुड़वा कर ऊपर आ गया और अपना लंड मेरे होंठों में लगा दिया.

मैंने अपनी आंख खोलकर उसे पीछे करने की कोशिश की.
मैंने कहा- नो सकिंग … प्लीज.

फिर जब मैंने उसका बड़ा-सा लंड देखा, तो मैं हैरान रह गया.
बाप रे … ये लंड तो किसी ब्लू फिल्म के जैसा मोटा और मस्त लवड़ा था.

ऑसम रियली अमेजिंग ..

एकदम गोरा लंड और गुलाबी सुपारे वाला कम से कम आठ इंच लंबा और 4 इंच की मोटाई वाला यह लंड सच में अद्भुत था.

मैंने सक करने को बिना देखे ही मना कर दिया था जबकि इसे तो मेरे मुँह में होना ही चाहिए था.
तो मैं उसके लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगा.

अब मैं आंखें खोल कर उसके लंड की सुंदरता को देखे ही जा रहा था.

उसने जब फिर से बिना कुछ कहे अपने लंड को मेरे मुँह के करीब किया और थोड़ा दाब देते हुए इशारे से चूसने को बोला.

तो इस बार मैं मना नहीं कर पाया.

उसने मेरे होंठों को अपने लंड के सुपारे से ही खुलवा दिया और वह लंड को मुँह में अन्दर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा.
मैंने उसे रोककर खुद से अपने हिसाब से लौड़े को अपने मुँह में लेने की कोशिश की.

बहुत बड़ा था, सो अन्दर लेने में मुश्किल हुआ.

मैं पहले उसके टोपे को चूसने लगा, जीभ से चाटने लगा.
मस्त नमकीन रस का स्वाद मिला तो मैं कामुक होता चला गया.

फिर मैं धीरे-धीरे उसके लंड को मुँह के अन्दर लेकर चूसने लगा.
मैं बस आधा लंड ही मुँह में अन्दर-बाहर कर रहा था.

ऐसे कुछ मिनट के बाद वह खुद से हल्का झटका दे-देकर अपना लंड मेरे मुँह में काफी अन्दर तक डालने लगा.
कभी-कभी तो उसका लंड गले के अन्दर तक घुस रहा था तो मैं बैचेन होकर ‘उम्म … उम्म … ’ की आवाज करने लगता था.

ऐसे काफी देर तक मुख चोदन होने के बाद मैं थक गया था.
मैंने उसे झटके से बाहर निकाल दिया.

संकेत समझ गया और तुरंत मेरे होंठों को चूसने लगा.
ये मुझे अच्छा लगा, तो मैं भी उसे स्मूच और किस करने लगा.

फिर वह किसिंग छोड़कर मेरी छाती और पेट को चाटने लगा.
मैं उसके बालों को सहलाता जा रहा था.

अब वह नीचे मेरी नाभि को प्यार से अपना सलाइवा देकर चाटने लगा.

फिर उसने मुझे एक ही बार में पलट दिया और पेट के बल सुला दिया.
उसका लंड एकदम कड़क था तो देर न करते हुए उसने मेरी गांड के दोनों हिस्सों को अलग करके वहां अपना मुँह रख दिया.

वह मेरे अस होल को चाट-चाटकर खाने लगा.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

इतना अच्छा लग रहा था कि मैं ‘आह … आह्ह … ’ की सिसकारियां भरने लगा और मैं खुद अपनी गांड ऊपर उठाने लगा.
वह मेरी पूरी गांड पर बाइट देने लगा.

फिर उसने अपने मुँह से बहुत सारा थूक मेरी गांड में टपका दिया और अपना लंड मेरे अस होल पर टिका दिया.
मैं समझ गया कि वह क्या करना चाह रहा है.

मैं डर कर बोला- संकेत भैया, प्लीज ये रहने दो ना!
लेकिन उसने मेरी बात को नहीं सुना और अपने लंड का प्रेशर बढ़ाता गया.

उसका दबाव धीरे-धीरे बढ़ता गया और लंड अन्दर जाने लगा.
थूक की वजह से थोड़ा दर्द कम हो रहा था शायद … लेकिन मेरा हाल तब बुरा होता गया, जब मुझे लगा कि उसका दस इंच का लंड मेरे अन्दर घुस रहा है.

वह तो धीरे-धीरे ही घुसा रहा था, लेकिन था तो वह 8 इंच का … तो कब तक मेरी नन्हीं सी गांड उसके मूसल को सह पाती.
मैं चिल्लाने लगा- प्लीज रहने दो प्लीज निकाल दो ना भैया!

उसने पास में पहले से रखी तेल की शीशी के मुँह को मेरी गांड और लंड के जोड़ पर लगा कर दबा दिया, तो ढेर सारा तेल चिकनाई दे गया.

वह धक्का देते हुए लंड को पेलने लगा और बोला- बस घुस गया थोड़ा-सा बचा!

तभी उसने मेरे ऊपर अपना दबाव बढ़ाकर एक जोर का झटका दे मारा.

‘आह्ह्ह … आहह.’
एक दर्द भरी कराह मेरे मुँह से निकलने लगी थी.

उस झटके में शायद मेरी गांड फट गई थी.
मैं छटपटा रहा था … पर वह अपना लंड वैसे ही अन्दर घुसेड़ कर रखे हुआ था.

वह मेरे कान को चूमते हुए मेरे बालों को सहलाते हुए मुझे शांत करने लगा.

कुछ मिनट बाद मैं शांत हुआ तो वह मेरे मुँह को थोड़ा घुमाकर मुझे किस करने लगा और अपना लंड हरकत में लाने लगा.

वह लौड़े को हल्के हल्के से गांड में आगे-पीछे कर रहा था.
मुझे अभी भी दर्द हो ही रहा था … लेकिन उसका चूमना इस दर्द के सामने बहुत कम लगने लगा था.

वह अपने लौड़े को आगे-पीछे करता गया.
मुझे अब उतना दर्द नहीं हो रहा था बल्कि यूं कहूँ कि अब मुझे ऐस्स फ़क अच्छा लग रहा था.

लेकिन मैं शांत पड़ा था.
वह जब अपनी स्पीड बढ़ाने लगा तो पता नहीं मेरे जिस्म में एक अलग-सा करंट दौड़ने लगा.

एक नए आनन्द को मैंने महसूस किया.

वह मुझे चोदे जा रहा था और मुझे भी अपनी गांड मरवाने में अच्छा लगने लगा था.
अब तो मैं उसे सपोर्ट करने लगा और अपनी गांड को खुद से हिलाने लगा.

सच में बहुत ज्यादा मजा आ रहा था ‘भैया, फक मी हार्ड!’
पता नहीं कैसे ऐसा वर्ड मेरे मुँह से निकल आया … और वह जोर-जोर से चोदने लगा.

उसका दस इंच का लंड धुआंधार फकिंग कर रहा था और मैं उसके मजे ले रहा था.
वह लगभग 20 मिनट की चुदाई कर चुका था. फिर भी उसमें एनर्जी बहुत थी.

मजा तो मुझे भी आ रहा था, लेकिन अब मैं थकने लगा था, मैंने कहा- संकेत भैया … बस करो अब!
संकेत बोला- ओके!

फिर संकेत ने मेरे ऊपर अपना दबाव बढ़ाया और उसने मुझे हाई स्पीड में चोदना चालू कर दिया.

करीब दो मिनट और लगातार चोदने के बाद उसने अपना अंतिम झटका दिया और मेरी गांड में पूरा लंड अन्दर घुसेड़ कर अपना पानी अन्दर छोड़ दिया.

उसका गर्म-गर्म वीर्य मैं अपने अन्दर महसूस कर रहा था.
वह मेरे कान को बाइट दे रहा था और मेरी गर्दन को चूम रहा था.

एक हाथ से वह मेरे लंड को हिला रहा था.

कुछ देर में मेरा भी डिस्चार्ज हो गया.
और वह मेरे निकले हुए पानी को अपने हाथ में लेकर मेरे लंड और मेरी झांटों में मलने लगा.
मेरा नीचे का हिस्सा पूरा चिपचिपा हो गया था.

वह मेरे पीछे से मुझे बांहों में भरकर सोने लगा.
मैं काफी थक गया था तो मुझे भी बहुत जल्दी नींद आ गई.

सुबह हुई तो मैंने देखा कि मैं संकेत के साथ चिपक कर सोया हूँ, पूरा नंगा.

मुझे रात की सब बातें याद आ गईं.
मैं खुद से गिल्टी फील करने लगा.

फिर मैं अपने कपड़े पहन कर संकेत के नंगे बदन को एक बेडशीट ओढ़ाकर अपने घर निकल आया.

यहां इस कहानी का अंत नहीं है.
ये तो बस एक रात थी, जहां से कहानी शुरू हुई.

ये कन्फ्यूजन से भरे प्यार की ऐस्स फ़क स्टोरी आपको आपकी पसंद पर आगे भी सुनाई जा सकती है.
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