फ्री सेक्स इन मीटिंग स्टोरी में संचालक के साथ सेक्स का पूरा मजा लेने के बाद मैं अपने प्रशंसकों के बीच थी. वे भी मेरे साथ चुदाई का मजा लेना चाहते थे.
फ्रेंड्स, मैं सुहानी आपको अपनी सेक्स कहानी में अन्तर्वासना साइट के गौरव जी से चुदने के बाद की कहानी सुना रही थी.
कहानी के तीसरे भाग
संचालक के बड़े लंड का मजा लिया
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि गौरव जी मेरा गैंग बैंग होते देखना चाहते थे तो मैं भी एक साथ अनेक मर्दों से चुदने के लिए रेडी हो गई थी.
अब आगे फ्री सेक्स इन मीटिंग स्टोरी:
मुझे चोदने की चाहत में काफी लोग आ गए थे.
उनमें से कुछ लोगों ने अपने कपड़े उतार दिये थे और धीरे धीरे सब ही अर्धनग्न हालत में आ गए थे.
उधर गौरव जी स्टेज पर साइड में कुर्सी डाल कर बैठे इस लाइव ब्लू फिल्म का मजा ले रहे थे.
मैंने कहा- रुको सब रुको … एक मिनट रुको प्लीज!
सब रुक कर मुझे देखने लगे.
मैंने कहा- ठीक है, सबके सब नंगे हो जाओ अभी, मुझे सबसे चुदवाना है, चलो सब अपने अपने कपड़े उतारो!
बस इतना कहते ही सबने खुशी में हल्ला मचाया और अपने कपड़े उतार कर एक लाइन में खड़े हो गए.
मैं सबके पास जा जा कर उनके लंड को हाथ से सहलाती गयी.
एक ने मेरे गाल सहलाते हुए कहा- सुहानी जी, आप भी तो नंगी हो जाइए अब!
मैंने कहा- हम्म … बिल्कुल यार!
ये कह कर मैं गौरव के पास आ गयी.
मैंने कहा- गौरव जी, आप ही मुझे मर्दों की इस भीड़ के सामने बिल्कुल नंगी कर दीजिये प्लीज … आज मेरी जी भर के चुदाई होनी है.
गौरव भी मुस्कुराए और उन्होंने मेरी गुलाबी ड्रेस की चैन पीछे से खोल दी, फिर कंधे से उसके फीते साइड में सरका दिए.
वह ड्रेस मेरे पैरों में आ गिरी, मैं अपने कपड़े उतरवाती हुई उन लोगों को देख रही थी जो अभी कुछ ही देर में मेरी जबरदस्त चुदाई करने वाले थे.
फिर मैं अपने पैरों में पड़ी हुई ड्रेस से बाहर निकली और गौरव की तरफ कमर करके कहा- इस सब को भी उतारिए.
गौरव जी ने मेरी ब्रा का हुक खोला, तो वह भी मेरे शरीर से सरकते हुए नीचे गिर गयी और मेरे बूब्स सबके सामने उजागर हो गए.
वे सब लोग मुझे बड़े गौर से देख रहे थे.
वे मेरे चूतड़ों को सहलाते हुए हल्के हल्के से भींच रहे थे और आखिरकार मेरी पैंटी भी नीचे सरका कर गिरा दी गई और अब मैं उस स्टेज पर उन सब लोगों के आगे पूरी नंगी हो चुकी थी.
फिर मैं पीछे मुड़ी और गौरव जी को देख कर मुस्कुराई और उनके लंड को छूकर कहा- आशीर्वाद दीजिये गौरव जी कि मैं इन सबको खुश कर पाऊं.
मैं उन सब आदमियों के पास एक कुर्सी ले जाकर बीच में बैठ गयी.
मैंने कहा- चलो आओ सब, अपना अपना लंड लेकर!
बस फिर क्या था, एक एक करके सब अपना लंड लेकर आने लगे और मैं वहीं स्टेज पर एक एक मिनट करके सबका लंड चूसने लगी.
कुछ मिनट तक तो मैं लंड ही चूसती रही थी.
आखिरी मर्द का लंड चूस कर मैं गौरव जी के पास घुटनों के बल चल कर गयी और ऊपर देख कर कहा- गौरव जी, अपनी सुहानी को लंड नहीं चुसाओगे?
गौरव जी ने कहा- तुम्हारे लिए कुछ भी सुहानी डार्लिंग!
उन्होंने अपनी पैंट खोल दी और मैंने घुटनों के बल खड़ी होकर उनका लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
मेरे प्यारे गौरव का लंड मैंने तकरीबन 5 मिनट तक गप-गप करके चूसा.
उस वक्त वहां स्टेज पर 15-16 लंड मेरी चूत की चुदाई करने को तैयार थे.
फिर मैं सबके बीच आकर खड़ी हो गयी और कहा- तो तैयार हो मेरे दोस्तो, मेरे दीवानो, अपनी सुहानी की चुदाई करने को?
सब एक साथ बोले- हां कब से.
मैंने कहा- चलो फिर चुदाई शुरू करते हैं. सब सबसे पहले मेरी चूत में गौरव जी का लंड जाएगा, फिर किसी और का.
एक बोला- जल्दी आइए गौरव जी, इसकी चूत का उदघाटन कीजिए.
गौरव जी बोले- वैसे तो मैं उदघाटन कर चुका हूँ, पर एक बार फिर से कर देता!
गौरव मेरे पास आ गए.
मैं वहां स्टेज पर रखी मेज़ पर घोड़ी बन गयी और सामने मुँह कर लिया.
गौरव जी मेरे पीछे आए और अपना लंड मेरी चूत पर टिका कर बोले- देखो सुहानी, तुम्हारी चुदाई तुम्हारे चाहने वालो के सामने कैसे होती है!
यह कहते हुए उन्होंने एक ही झटके में फच्छ कर के मेरी चूत में पूरा लंड अन्दर डाल दिया.
मेरी ज़ोर की चीख निकली, ‘स्सी … आहह … गौरव जी!’
फिर गौरव जी ने मेरे कंधों पर हाथ रख कर मुझे वहीं स्टेज पर कुतिया बना कर चोदना शुरू कर दिया.
मैं अपनी आंखें बंद करे सबके सामने अपने पीछे से लंड लिए खुल कर ‘आहह … आहह स्सी …स्सी …’ करती हुई चुदवा रही थी.
कुछ देर को वहां मौजूद सब लोग चुदाई रोक कर मेरी चुदाई देखने लगे और फिर से अपनी अपनी चुदाई में लग गए.
गौरव ने मुझे स्टेज पर 5 मिनट तक दबा कर चोदा और अपना लंड निकाल कर कहा- ये लो दोस्तो … अब आप सब अपनी सुहानी को जी भर के चोदिए मगर प्यार से, इतनी प्यारी लड़की को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए!
एक बोला- थोड़ी तकलीफ तो होगी गौरव जी, पर हम ख्याल रखेंगे.
एक अंकल टाइप आदमी आगे आया और मेरे कूल्हों को पकड़ कर लंड चूत पर रखा और बस एक झटके में पूरा अन्दर घुसा दिया.
ज़ोर की पट्ट की आवाज आई और मेरी आहह … निकल गयी.
मैं कुतिया बनी रही और मेरी ज़ोर से स्सी … स्सी … आहह … आहह … स्सी … निकल रही थी.
इसी तरह एक एक कर सब मुझे पीछे से आकर चोदने लगे और बाकी लोग अपना लंड हाथ से सहला रहे थे.
मैंने कहा- एक-दो लंड तो मैं चुदवाते हुए चूस ही सकती हूँ दोस्तों … आ जाओ!
यह सुनकर तो दो-दो कर के सब मुझे लंड चुसाने भी लगे थे और पीछे से चोद भी रहे थे.
तकरीबन पंद्रह बीस मिनट तो मैं ऐसे ही बारी बारी सब से चुदवाती रही.
जहां कुछ समय पहले तक मैं यहां पर किसी को नहीं जानती थी और अब सबके सामने स्टेज पर पूरी नंगी होकर चुदवा रही थी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.
उनमें से 4-5 चार नई उम्र के लड़के तो ज्यादा देर टिक नहीं पाये और जल्दी जल्दी ही चूत में झड गए.
फिर बचे सब अंकल.
उनके चोदने के ढंग से ही पता चल रहा था कि वे सब इस खेल के पुराने खिलाड़ी है.
आठ दस अधेड़ उम्र के लोग मेरी चुत की चुदाई का मजा ले रहे थे और स्टेज पर मेरी चुत की चुदाई का कार्यक्रम ज़ोर शोर से चल रहा था.
उधर स्टेज से नीचे भी लगभग सभी लोग किसी न किसी के साथ चुदाई में लगे थे.
इतनी चुदाई कर करके मुझे चोदने वाले वह अंकल लोग थक कर हांफ रहे थे और चुदाई रोक कर बैठे थे.
मैं भी उन नंगे मर्दों के बीच में नंगी बैठी थी और हम सब बाकी लोगों की चुदाई देख रहे थे.
थोड़ी देर बाद एक अंकल बोले- सच में सुहानी डार्लिंग, तुम अपनी कहानियों की तरह बहुत सेक्सी हो!
मैंने कहा- आपका बहुत धन्यवाद अंकल जी.
अंकल बोले- बेटा, एक बात बोलूँ, बुरा तो नहीं मानोगी?
मैंने कहा- बोलिए अंकल.
अंकल बोले- तुम इतनी खूबसूरत हो और सेक्स के टाइम पर और ज्यादा सेक्सी लग रही हो. अगर तुम बुरा ना मानो तो क्या मैं थोड़ी गाली-गलौच वाली भाषा का इस्तेमाल कर सकता हूँ?
मैंने मुस्कुरा कर कहा- हां क्यों नहीं अंकल, इससे तो और मजा ही आएगा, गाली दो जलील करो, कुछ भी करो बस मजा आना चाहिए!
अंकल ने धीमे से कहा- रंडी बनोगी मेरी?
फिर मैंने कहा- अरे इतनी स्लो क्यों बोल रहे हो चचा … चलो मैं ही आपकी झिझक तोड़ देती हूँ!
मैं खड़ी हुई और उनके पास जाकर बोली- क्यों बे बुड्ढे थक गया क्या … भोसड़ी के लौड़े में दम नहीं रहा क्या चोदने का? लंड में दम बचा है या खत्म हो गया है?
अब अंकल थोड़े से मुस्कुराए और बोले- साली कुतिया, बहन की लौड़ी, रंडी दम तो इतना है कि जवानों का लंड भूल जाएगी बहन की लौड़ी.
मैंने भी उन्हें और उकसाते हुए कहा- तो देख क्या रहा है गांडू बुड्ढे … यहां क्या माँ चुदाने आया है मादरचोद … चल चोद मुझे … तुम सब थके थकाए बुड्ढों में से जिसकी गांड में दम है तो चोद चोद कर मेरी चूत का भोसड़ा बना दो, वरना नामर्द समझो खुद को और लंड कटा लो अपना!
उधर गौरव जी भी इस बदलते सीन से हैरान थे और आनन्द ले रहे थे.
फिर तो देखते ही देखते सीन और गाली गलौच वाले माहौल से भर गया.
गौरव भी आंखें फाड़ कर देख रहे थे.
फिर तो एक एक करके सारे बुड्ढे खड़े हो गए.
सभी ने मिल कर मुझे घेर लिया और दबोच लिया.
एक ने मेरे एक दूध को भींचा और बोला- साली दो टके की रांड, अभी तेरी मैया चोदते हैं!
उसने मुझे नीचे धकेला और स्टेज पर गिरा दिया.
मैं स्टेज पर पेट के बल लेट गयी.
चचा मेरे ऊपर आ कर झुक गया और उसने अपना पूरा लंड पीछे से ही मेरी गांड को रगड़ते हुए चुत के अन्दर पेल दिया.
लंड घुस जाने से मेरी चूत को बड़ा सुकून मिला और मैं अपनी टांगें फैला कर उसे गाली देने लगी ‘आह मादरचोद भड़वे आह पूरा पेल दिया ठरकी ने आह!’
मेरा गाली देना था कि उसने तो ज़ोर ज़ोर से पट्ट पट्ट चुदाई चालू कर दी.
वह चचा भी ज़ोर से हम्म … हम्म … हम्म करते हुए मुझे चोद रहा था.
और मैं भी मस्त होकर उसे उकसाती हुई बोल रही थी ‘आहह … आहह … आहह … साले बुड्ढे क्या मस्त चोदता है … बहन का लौड़ा पूरा रंडीबाज़ है साला!’
वह मेरे दूध को पकड़ कर बोला- आह तेरे जैसी खूबसूरत हुस्न और जिस्म की मालकिन लड़कियां ही तो हम बुड्ढों को रंडीबाज़ बना देती हैं. ये ले बहन की लौड़ी!
वह ज़ोर ज़ोर से चुदाई करता रहा.
जब 3-4 मिनट तक लगातार चोद चोद कर वह हांफने लगा तो मैंने दूसरे बुड्ढे से कहा- ओए दूसरे चचा भोसड़ी वाले … ये तो थक गया, तू चोदेगा क्या … आ ना भोसड़ी के!
उसने तुरंत तैश में आकर चोदते हुए बुड्ढे को हटाया और बोला- हट् मादरचोद … इस रंडी को तो मैं सबक सिखाऊंगा!
वह उसे हटा कर खुद मेरे ऊपर चढ़ गया और लंड पेल कर अपनी पूरी ताकत से मुझे चोदने लगा.
इसका लंड सख्त था तो मुझे अन्दर तक बहुत मजा आ रहा था.
मेरी अब उम्महह … उमह्ह … स्सी … स्सी … आहह … अहह … की आवाजें आ रही थीं.
उस बूढ़े की जांघें मेरे चूतड़ों से टकराने से पट्ट-पट्ट की आवाजें आ रही थीं.
मेरी चूत पानी से लबालब भरी हुई थी और चूत और लंड के घर्षण से बहुत मजा आ रहा था.
फिर एक अंकल बोले- बेटा जी, जरा इधर आकर मेरे लौड़े पर भी बैठो न … और अब डबल चुदाई का मजा लो.
मैं तुरंत चोदते हुए अंकल को छोड़ कर उस चचा के लंड को कमर की तरफ से गांड के अन्दर लेकर स्सी … स्सी … करती हुई बैठ गयी.
मैंने गांड में लंड लिया ही था कि सामने से एक और अंकल ने आकर मेरी चूत में अपना मूसल पेल दिया.
बस अब मेरी डबल पेनिट्रेशन वाली सैंडविच चुदाई चालू हो गई थी.
ऐसे ही चुदती हुई मैं सामने दूसरों की चुदाई का नज़ारा देख रही थी और आहह … आहह स्सी …स्सी … कर रही थी.
अब बारी बारी से ऐसे ही मेरी डबल चुदाई चलती रही. दो दो करके सभी अंकल लोगों ने मेरी चूत और गांड की अच्छे से चुदाई की और बहुत मजा दिया.
पर अभी तक झड़ा कोई नहीं था.
फिर मैंने कहा- रुको सालो रुको, थोड़ा आराम तो कर लेने दो.
एक बोला- क्यों साली रंडी दिख गयी औकात!
मैंने कहा- गलती हो गयी अंकल, सच में थोड़ी देर रुक जाओ.
फिर सब थोड़ी देर के लिए अलग हुए और सब सुस्ताने लगे.
नीचे स्टेज पर भी लोगों का चुदाई कार्यक्रम धीरे धीरे समाप्त होने लगा था.
मैंने देखा गौरव जी टहलते हुए अपनी पार्टी का जायजा ले रहे थे.
मेरी उनसे नजरें मिलीं तो उन्होंने पूछा- सुहानी जी मजा आ रहा है ना!
मैंने कहा- यहां सब को मजे ही आ रहे हैं गौरव जी, पर आप ऐसे ही अकेले अकेले क्यों घूम रहे हो? आइए ना, एक आखिरी बार और हो जाए, कौन जाने दुबारा हम सब कभी मिलेंगे या नहीं ज़िंदगी में!
गौरव जी ने कहा- हां बात तो सही है. अभी लो.
बस गौरव जी भी स्टेज पर चढ़ गए और पुनः नंगे हो गए.
मैंने घुटनों के बल खड़े होकर उनके लंड मुँह में लिया और गप्प गप्प करके चूसने लगी.
अगले 2 मिनट में गौरव जी का लंड पूरा खड़ा था.
फिर मैंने कहा- लीजिये गौरव जी, आपका लंड तैयार है मेरी चुदाई के लिए … पेलो!
गौरव ने कहा- ओके चलो घूम कर लेट जाओ पेट के बल!
मैं स्टेज पर सामने भीड़ की तरफ मुँह करके लेट गई.
गौरव जी मेरी गांड की तरफ से आए और मेरी गांड में लंड घुसाने लगे.
मेरी स्सी … स्सी … आहह … आहह … निकलने लगी.
चूंकि गौरव जी का लंड थोड़ा ज्यादा बड़ा था और मुझको हल्का सा दर्द हुआ तो झटका सा लगा और स्सी … निकल गई.
फिर तो गौरव जी अपना पूरा हथियार मेरी गांड के अन्दर सरका दिया और पट्ट पट्ट ऊपर नीचे होते हुए मेरी गांड मारने लगे.
मुझे भी मजा आने लगा और मैं भी आहह …अहह … आहह … स्सी … स्सी … करने लगी.
गौरव जी के झटकों से मेरे पूरे शरीर थर-थर कांपता हुआ आगे पीछे हिल रहा था और मेरी आंखें खुली हुई थीं.
मेरे होंठ स्सी … स्सी … स्सी … भी कर रहे थे और आनन्द की मुस्कान भी थी.
गौरव जी मुझे ऐसे ही लगभग 7-8 मिनट चोदते रहे और फिर रुक कर उन्होंने घोड़ी बना दिया.
मेरी गांड पर दो चाटें मारे पट्ट पट्ट तो मैंने आहह … आहह … की.
उन्होंने कहा- आह ये लो सुहानी जी!
फिर पूरी ताकत से गौरव जी ने मेरी चूत में लंड पेल दिया और पूरी ताकत से लगातार चोदते चले गए.
उधर वह अंकल लोग सामने से आकर मुझे अपना लंड चुसाने लगे.
फिर बारी-बारी से अपने अपने लंड मुँह में देने लगे थे.
मेरी चूत को इतने लंड मिले तो मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाई और फच्च-फच्च् करके फुहारे मारती हुई झड़ गई.
मेरे मुँह से बस ‘आहह … आह और तेज़ चोदो… आह …’ की आवाज निकल रही थी.
चुदाई की आवाज भी चप्प चप्प में बदल गयी थी.
एक एक करके सामने चुदाई कर रहे बाकी के लोग भी झड़ने लगे और अगले 10 मिनट में अपने लंड का वीर्य चूत में खाली करना शुरू कर दिया.
कुछ लोग अपनी साथिन की चुत में न झड़ कर लंड हिलाते हुए सामने से आए और मेरे चेहरे की तरफ अपने लौड़े हिलाते हुए अपने वीर्य की पिचकारी मारने लगे.
मैंने भी मुँह खोल रखा था और उनका वीर्य मुँह में ले रही थी.
आखिरी में गौरव जी ने भी पूरी ताकत से चोदते हुए मेरी चूत में अपना वीर्य भर दिया और निढाल होकर मेरी कमर पर धराशायी हो गए.
मैं भी आगे को लेट गई.
बाकी के अंकल लोग भी बगल में धराशायी होकर पड़े थे.
शायद उस रात मैं 15 से 20 लोगों से चुदी होऊंगी. सच में मुझे फ्री सेक्स इन मीटिंग करके बहुत मजा आया.
मैं उम्महह … उमम्ह… करती हुई हांफ रही थी और गौरव भी लंबी लंबी सांसें भरते हुए हांफ रहे थे.
थोड़ी देर बाद मैं उठी और बाथरूम में जाकर पेशाब करने के तरीके से बैठ कर सर्र सर्र करती हुई उन सबका वीर्य अपनी चूत से बाहर एक मग में निकालने लगी.
यकीन मानो दोस्तो, मैंने अपनी चूत से लगभग आधे से ज्यादा मग सफ़ेद गाढ़ा वीर्य नीचे निकाला होगा.
फिर मैं भी उन सबके बीच जाकर लेट गयी और हम सब हांफते हुए पड़े रहे और ऐसे ही सो गए.
सुबह 7 बजे ही आंख खुली.
धूप निकल आई थी और वहां 80-90 आदमी औरत नंगे पड़े हुए थे, ज़्यादातर लोग जाग चुके थे.
मेरे शरीर पर भी वीर्य की बूंदें चिपक चुकी थीं.
मेरा मेकअप सब अस्त व्यस्त हो चुका था, बाल बिखर गए थे, काजल फैल गया था, शरीर पर जगह-जगह हल्के हल्के घाव से बन गए थे.
चुत भी लाल हो चुकी थी और सूज कर फूली हुई थी.
मेरी गांड पर भी हथेलियों के थप्पड़ के निशान थे और छिलने से थोड़ी बहुत चीस भी हो रही थी, पर मैं इस चुदाई से बहुत खुश थी.
मैंने गौरव को होंठों पर किस करते हुए कहा- थैंक्यू इस शानदार रात के लिए.
उन्होंने भी कहा- तुम्हें भी थैंक्यू सुहानी … इतना मजा कभी नहीं आया.
मैं उठ कर स्टेज पर आ गई और मैंने माइक में कहा- थैंक्यू दोस्तो, आप सबका इस कमाल की रात के लिए. आशा करती हूँ कि आप सभी ने मजे लिए होंगे.
सबने एक सुर में कहा- धन्यवाद सुहानी जी और गौरव जी आप सबका.
फिर गौरव उठे और उन्होंने भी कहा- मेरे प्यारे दोस्तो, इस पार्टी को रंगीन बनाने के आप सब का बहुत आभार … अब जाइए और नहा धो कर तैयार हो जाइए. अभी 9 बजे तक चाय नाश्ते का प्रबंध हो जाएगा.
फिर सब नहाए धोये और मैं भी अच्छे से तैयार हो गयी.
चाय नाश्ता हुआ और सब अपना सामान आदि लेकर धीरे धीरे निकलने लगे.
मुझे गौरव जी कार तक छोड़ने आए और मैंने आखिरी बार उनके होंठों को किस किया और थैंक्यू कहा.
उन्होंने कहा- ऐसे ही कहानी लिखती रहना डियर.
मैंने कहा- बिल्कुल गौरव जी!
मैं बाय बोल कर गाड़ी में बैठ गयी और अपने रूम पर वापस चली गयी.
ये मेरी ज़िंदगी शायद सबसे शानदार रात रही थी जो मैं कभी नहीं भूलूँगी.
मैंने आकर ये सब तन्वी को भी बताई तो उसने कहा- क्या यार इतना बड़ा मौका हाथ से निकल गया!
मैंने भी कहा- मैंने तो पूछा था, तेरे ही नखरे थे. वह बस अफसोस करके रह गयी.
पर मैंने तो पूरे मजे लिए थे.
तो दोस्तो कैसी लगी आप सबको ये फ्री सेक्स इन मीटिंग स्टोरी, जरूर बताइएगा.
अपनी लाइफ को एंजॉय करते रहिए.
जल्द ही मिलते है नयी सेक्स कहानी में.
आपकी प्यारी सुहानी चौधरी
suhani.kumari.cutie@gmail.com