सेक्स अपोर्चुनिटी विद मेंटर स्टोरी में मैं सेक्स कहनी लेखक समागम में गई तो वहाँ मुझे बेस्ट लेखिका का गौरव मिला. मेरा मन था कि मैं पुरस्कार देने वाले संचालक के साथ सेक्स का मजा लूं.
दोस्तो, मैं आपकी अपनी चहेती सुहानी चौधरी एक बार पुनः अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
सेक्स कहानी लिखने वालों का सम्मेलन
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि गौरव जी ने साइट के लेखकों का एक सम्मेलन बुलाया था जिसमें मुझे विनर घोषित कर दिया था.
मैंने सबको धन्यवाद दिया और सबके मन की बात करते हुए मैंने खुला सेक्स करने की बात भी कह दी थी.
अब आगे सेक्स अपोर्चुनिटी विद मेंटर स्टोरी:
उसके बाद हम सब खाने पीने में लग गए.
खाना खाते हुए मैं भी काफी लेखकों से मिली और उनके काम की तारीफ की.
उन्होंने भी मेरे काम की तारीफ की.
ऐसा लग रहा था कि सब मेरे जैसे ही हैं.
कुछ लोग अभी जवान हुए थे, कुछ नौकरी पेशे वाले लोग थे, कोई लड़की स्कूल टीचर, कोई मेरी तरह ऑफिस में काम करने वाली, कोई गृहणी, तो कोई 45-50 साल की औरत.
पर सब को एक ही चीज़ जोड़ती थी और वह थी साईट की कहानियां.
कुछ देर बाद मैंने देखा कि एक टेबल पर गौरव जी अकेले बैठे एक फ़ाइल में कुछ काम कर रहे थे और थोड़े व्यस्त लग रहे थे.
मेरी इच्छा हुई कि मैं उन्हें निजी रूप से धन्यवाद बोलूं … तो मैंने ड्रिंक के दो ग्लास लिए और उनके पास आ गयी.
मैंने प्यार से पूछा- सब लोग आपकी पार्टी में मजे कर रहे हैं और आप यहां व्यस्त है गौरव जी!
उन्होंने ऊपर देखा और मुस्कुराते हुए बोले-आप कैसी हो सुहानी मैडम.
हम दोनों मुस्कुराने लगे.
मैंने उन्हें ड्रिंक देते हुए कहा- लीजिये काम करते करते थक गए होंगे, थोड़ा आराम कर लीजिये.
उन्होंने ड्रिंक ली और हम दोनों अब उस टेबल पर अकेले बैठे थे.
फिर मैंने पूछा- आप अकेले आए हैं, अपने बीवी बच्चों को साथ नहीं लाए?
उन्होंने हंसते हुए कहा- नहीं, बीवी को लाता तो आपके साथ ये जाम पीने का मौका नहीं मिलता सुहानी जी.
मुझे उनका ये फ्लर्ट करना बहुत पसंद आ रहा था.
फिर अगले ही पल वे बोले- नहीं, दरअसल मैं लंदन में रहता हूँ और इस साइट बिजनेस के बारे में मेरी फैमिली को कुछ नहीं पता है.
मैंने कहा- अच्छी बात है फिर तो!
उन्होंने बात बदलते हुए पूछा- आप बताइये कैसी हैं आप और आपकी सहेली तन्वी कैसी है!
मुझे उम्मीद नहीं थी कि वे मेरे बारे में इतना जानते हैं … और यहां तक कि तन्वी को भी जानते हैं.
मैंने कहा- मैं बहुत अच्छी हूँ और अवार्ड मिलने के बाद तो और भी अच्छी हो गयी हूँ.
गौरवजी बोले- आप अकेली आईं, अपनी सहेली को भी ले आतीं!
मैंने कहा- कौन …. तन्वी? उसे ये नहीं पता था ना कि कैसा फ़ंक्शन है, उसे लगा कोई बोरिंग सा शेरो-शायरी जैसा फ़ंक्शन होगा. अगर पता होता कि ऐसा फ़ंक्शन है तो वह जरूर आती और शायद वहां स्टेज पर खड़ी होकर सेक्स भी कर रही होती.
फिर गौरवजी बोले- हम्म … कोई बात नहीं, उसकी कमी आप पूरी कर देना और ये काम उसके बदले आप कर लेना.
मैं एकदम से चौंक गयी और पीछे स्टेज को देखने लगी.
फिर मैं गौरव जी को देख कर एक पल को चुप हो गई.
अब हम दोनों इस मज़ाक पर हंसने लगे.
हंसते हंसते मैंने स्टेज को देख कर कहा- वैसे आइडिया बुरा नहीं है, मजा आएगा!
यह कह कर मैंने गौरव जी को आंख मार दी.
हम दोनों और हंसने लगे.
इधर पार्टी के बाकी लोग भी आपस में अपनी अपनी टेबल पर बैठे गप्पें मार रहे थे, शराब पी रहे थे, अब तक सब लोग आपस में घुल मिल चुके थे और आपस में सहज हो चुके थे.
कुछ लोगों पर शराब का सुरूर चढ़ रहा था और लोग आपस में चिपका चिपकी और चुंबन वगैरह भी करने लगे थे.
मैं उठी और गौरव जी को दिखाती हुई बोली- देखो गौरव जी, आपकी पार्टी में क्या सब होने लग रहा है!
गौरव बोले- करने दो, आपने ही तो सबको भड़काया है.
मैंने कहा- क्या मैं आपकी पार्टी को मजेदार बनाने के लिए इसमे एक और चीज़ जोड़ सकती हूँ?
उन्होंने कहा- बिल्कुल, जो आप चाहो!
मैं पलट कर स्टेज पर वापस आ गयी.
मैंने माइक हाथ में लेते हुए कहा- तो दोस्तो, आप सब पार्टी एंजॉय कर रहे हो ना!
लोगों ने कहा- हां बहुत मजा आ रहा है.
मैंने कहा- और मजे करने हो तो अपनी पसंद के लड़के या लड़की से जरूर पूछना, यहां कोई रोकटोक नहीं है, सिर्फ मजे करो, बिना किसी फिक्र के … आज की ये रात शायद दुबारा फिर कभी नहीं आएगी.
सबने ज़ोर का शोर मचाया और एंजॉय करने लगे. मैं वापस स्टेज से उतर कर गौरव जी के पास ही आ गयी.
गौरव जी ने कहा- लगता है मेरी साफ सुथरी पार्टी में कुछ धमाकेदार करवा कर रहोगी!
मैंने कहा- बिल्कुल गौरव जी, ऐसी पार्टी रोज़-रोज़ थोड़े ही होती हैं.
वे मुस्कुराने लगे.
मैं खड़ी हो गयी और कहा- मुझे खाने के बाद थोड़ा टहलने की आदत है.
गौरव जी बोले- चलो मैं भी चलता हूँ टहलने!
हम लोग वहीं बगीचे में चहलकदमी करते हुए टहलने लगे.
इस बीच हम थोड़ा बहुत इधर उधर की और एक दूसरे के बारे में बात कर रहे थे.
कहीं न कहीं मुझे भी इस उम्रदराज आदमी का साथ पसंद आ रहा था.
फिर मैंने कहा- तो आगे क्या प्लान है पार्टी में, अभी क्या क्या बाकी है होना?
गौरव जी ने कहा- पीछे मुड़ो और देखो पार्टी तो लगता है कि पूरी रात चलेगी … वह देखो!
मैंने पीछे देखा तो एक लड़का और लड़की अर्धनग्न हालत में बेहताशा एक दूसरे को चूम रहे थे और सेक्स की तैयारी कर रहे थे.
मैं गौरव जी की तरफ घूमी और आश्चर्य से कहा- ओ तेरी … ये लोग तो सच में आपस में ही लग गए!
गौरव जी बोले- तो और क्या … मेरी सबसे बेस्ट लेखिका ने इतना प्रोत्साहन दिया है तो असर तो दिखेगा ही कुछ!
हम दोनों हंसने लगे.
उस समय हम दोनों हाथों में हाथ डाले टहल रहे थे और बातें कर रहे थे.
मैंने टहलते हुए ही कहा- क्या मैं आपके कंधे पर सिर रख सकती हूँ?
गौरव जी ने कहा- हां क्यों नहीं!
मैंने गौरव जी की बाजू को साइड से पकड़ कर उनके कंधे पर सिर लगा लिया और हम धीरे धीरे टहलने लगे.
रास्ते में 3-4 जोड़े और आपस में चिपका-चिपकी करते हुए दिखे.
अब तक तो मेरा भी सेक्स का मूड बनने लगा था.
गौरव जी बोले- लगता है कि सब मूड में आ चुके हैं!
मैंने कहा- हां लगता तो यही है, आप भी आ गए हो क्या?
गौरव जी मुस्कुराते हुए बोले- अगर आ गया होऊं तो?
मैंने कहा- फिर आप की भी रात रंगीन हो जाएगी और क्या!
गौरव जी बोले- और तुम्हारा क्या?
मैंने कहां- मैं भी अपनी रात काली थोड़े ही करूंगी, फिर मैं भी अपनी मस्ती भरी इस रात को रंगीन करूंगी.
गौरव जी बोले- कैसे?
मैंने कहा- चलो मेरे साथ.
मैं स्टेज पर पहुंची और माइक लेकर कहा- दोस्तो रात जवान हो रही है, आप सब भी अपनी जवानी का फायदा उठाएं, मैं आप सब मेहमानों से आग्रह करना चाहूंगी कि किसी को साथ लेकर सेक्स प्रक्रिया शुरू करें और दूसरों को भी प्रेरणा दें … और शरमाये नहीं … आज की रात तो पूरी तरह बेशर्म होने की है!
लोग हंसने लगे और आपस में साथी ढूंढने लगे.
इधर गौरव भी स्टेज पर मेरे साथ आ चुके थे.
गौरव जी बोले- तुम सच में बहुत खूबसूरत और सेक्सी हो सुहानी … देखो मेरी पार्टी को सेक्स पार्टी बना ही दिया.
मैंने कहा- आप किस बात का इंतज़ार कर रहे हो गौरव जी … आपको किसने रोका है?
गौरव बोले- मेरी पार्टी है, पूरे पैसे दिए है जगह के … मुझे कौन रोकेगा.
मैंने कहा- हम्म … तो अमीर हो आप.
गौरवजी बोले- बिल्कुल सुहानी जी, दिल का तो मैं बहुत अमीर हूँ.
हम दोनों लोग ऐसे ही बात कर रहे थे और काफी लोग आपस में सेक्स क्रिया की शुरुआत कर रहे थे.
ऐसा सेक्सी माहौल देख कर मेरा भी मन हो रहा था और गौरव जी भी उत्तेजित हो रहे थे.
पर काफी देर तक हमारे बीच कुछ शुरू नहीं हुआ.
कभी कभी तो मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं कोई सपना देख रही हूँ.
पर फिर अहसास होता कि नहीं ये हकीकत है. अगर इंसान चाहे तो जो मर्ज़ी वह कर सकता है.
मैंने मन ही मन सोचा कि चल बेटा सुहानी शुरू कर, सोच मत … सबकी सेक्स की आग भड़का कर तू क्यों ऐसे ही खड़ी है?
मैं इसी उड़ेधबुन में थी और उधर गौरव जी सब तरफ देख रहे थे.
ऐसा तो नहीं था कि मुझे उनसे एकदम से प्यार हो गया था … पर बहुत जबरदस्त शारीरिक आकर्षण हो रहा था.
लग रहा था जैसे अभी हम एक दूसरे में समा जाएं.
गौरव जी कुछ बोल रहे थे पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि मैं उनके होंठ हिलते हुए देख तो रही थी, पर समझ नहीं रही थी कि वे क्या बोल रहे थे.
फिर अचानक मैंने उनके कोट से पकड़ कर उनको अपनी तरफ खींचा और उनके होंठों को अपने होंठों से ज़ोर से सील कर दिया.
गौरव जी मेरी इस हरकत से एकदम सकते में आ गए और अचंभे से देख रहे थे.
फिर मेरे नर्म गुलाबी होंठों को चूमते हुए ही उनकी भी आंखें बंद हो गईं.
हम दोनों को कुछ नहीं सुनाई पड़ रहा था. हम दोनों बस एक गहरे चुंबन में डूबे हुए थे.
कुछ देर बाद ज़ोर की ताली और शोरगुल से हम दोनों का ध्यान टूटा.
मैंने देखा कि सारी भीड़ अर्धनग्न हालत में थी और हमें चुंबन में रत देखती हुई ज़ोर ज़ोर से ताली बजा रही थी.
हम दोनों को शर्मिंदगी सी महसूस हुई.
अगले ही पल मैं मुस्कुरा कर नीचे देखने लगी.
फिर मैंने सामने देखते हुए कहा मैंने कहा- अरे यार आप सब अपने अपने काम पर ध्यान दो न .. और हमें अपने काम पर ध्यान देने दो.
सब लोग हंस दिए और अपने अपने साथी के साथ संभोग में लग गए.
गौरव जी बोले- हम्म … क्या इरादा है मैडम, यहीं करना है क्या सबके सामने?
मैंने कहा- जैसे आप कहो गौरव जी.
उन्होंने कहा- चलो फिर अन्दर कमरे में चल कर करते है, यहां सब डिस्टर्ब करते रहेंगे.
इतना कह कर उन्होंने अपना हाथ मेरी ओर बढ़ाया.
तो मैंने झट से उनका हाथ पकड़ लिया और उनके साथ चली गयी.
उस फार्म हाउस में सजावट के लिए एक मानव निर्मित छोटी सी झील बनी थी, जिस पर एक छोटे से टापू पर एक कांच का कमरा बना था. वह कमरा सफ़ेद रोशनी से रोशन था, साथ ही सफ़ेद आलीशान सोफ़े लगे थे, नर्म बिस्तर था, मतलब एक मस्त रात बिताने का पूरा बंदोबस्त था.
हम दोनों उसी कांच के कमरे में आ गए.
कमरा बड़ा आलीशान था और अन्दर से बाहर का और बाहर से अन्दर का सब देख जा सकता था. हम दोनों कमरे में थे और मैं टहलते हुए जायजा ले रहे थे.
फिर मैं एक कांच के पास आकर ऐसे बाहर का नज़ारा देखने लगी, पूरा बगीचा सफ़ेद रोशनी से रोशन था, जिसमें काफी जोड़े आपस में सेक्स क्रिया में मशरूफ़ थे.
गौरवजी पीछे से आए और मुझे पीछे से ही प्यार से जकड़ लिया.
मेरे कंधे पर अपना मुँह रख कर बोले- क्या देख रही हो डियर?
मैंने कहा- देख रही हूँ कि सब लोग कितने बेफिक्र होकर सेक्स का आनन्द ले रहे हैं, शायद आज सुबह किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि उनकी रात इस तरह से रंगीन होगी.
गौरव जी ने मेरी कमर से पेट तक हाथ लेकर आए और आगे से पीछे को दबोच कर धीरे-धीरे मेरे कान गर्दन, कंधे को चूमने लगे.
मुझे भी उनके जिस्म की गर्मी से बहुत आनन्द मिल रहा था और मैं भी मदहोश हो रही थी. मेरी भी आंखें अब बंद हो गई थीं और उनके होंठों के मेरे जिस्म पर स्पर्श से अन्दर वासना की लहरें उफान मार रही थीं.
मैं इसी तरह झूमती हुई कहे जा रही थी- आह … स्सी … गौरवजी आप बहुत हैंडसम हैं, मैं सच में आपकी अदा की कायल हो गयी हूँ आहह!
गौरव जी ने कहा- अरे सुहानी बेबी, कायल तो हम हैं आपकी खूबसूरती के … आपके इस खूबसूरत जिस्म के, भगवान ने सारी कलाकारी इस जिस्म में ही लगा दी है शायद … तुम इतनी सुंदर लग रही हो कि बस खा जाने का मन कर रहा है. ऐसा लग रहा है कि आज मैं फिर से जवान हो गया हूँ.
मैंने कहा- आपकी उम्र भले ही मेरे से काफी ज्यादा हो, पर आप आज कल के जवान लड़कों को फ़ेल करने का दम रखते हो … उफ़्फ़ आपकी अदा, आपका अंदाज, कम से कम आज के लिए तो मुझे आपसे बेइंतेहा मोहब्बत हो गयी है.
गौरवजी बोले- और तुम इतनी खूबसूरत, प्यारी और सेक्सी लग रही हो कि मुझे तो क्या, यहां सब लोगों को तुमसे मोहब्बत हो गयी होगी और तुम्हारे इस खूबसूरत तराशे हुए जिस्म से भी!
मैंने भी कहा- सबको अपना जिस्म भोगने का मौका बाद में दूँगी, अभी तो फिलहाल ये जिस्म आपको समर्पित है!
ये कह कर मैं उनसे अलग हुई और उनसे कुछ दूर जाकर मुस्कुराई. फिर मैंने एक एक कर के अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए.
पहले मैंने अपनी वन-पीस ड्रेस की चैन पीछे से खोली और कंधे से डोरियां सरका कर उसे नीचे उतार दिया.
मेरी ड्रेस नीचे पैरों में गिर गयी.
इसके बाद मैं उसे अपने पैरों में ही लपेट कर चलती हुई थोड़ी आगे को आयी और गुलाबी ब्रा पैंटी में उनको अपना बदन दिखाने लगी.
वे मुझे आंखें फाड़ फाड़ कर देख रहे थे.
मैं मुस्कुराई और मैंने अपनी ब्रा पैंटी भी उतार दी.
अगले ही पल मैं पूरी तरह नंगी होकर उनसे बोली- ये लीजिये गौरव जी मेरा ये खूबसूरत जिस्म आपको अर्पण है … जो चाहे कर लीजिए!
गौरव जी एकदम मेरे जिस्म से चिपक गए और मेरे चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर मेरे होंठों को ज़ोर से अपने होंठ रख कर भींच दिया.
बस फिर क्या था … मैं और वे एक मदहोश चुंबन में खो गए.
मैंने भी एक एक करके उनकी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए और अन्दर उनके पेट और छाती पर अपनी सेक्सी हथेलियां फिराने लगी.
हम एक दूसरे के होंठों को जोर ज़ोर से चूसते हुए किस कर रहे थे, अपने हाथ एक दूसरे के जिस्मों पर फिरा रहे थे.
मेरे मुँह से बस उम्महह … उहह … उम्म … की आवाजें निकल रही थी.
फिर मैंने उनकी बेल्ट खोल कर पैंट भी खोल दी और वह नीचे गिर गयी.
उनका लंड अंडरवियर में पूरा खड़ा हो चुका था, मैं उनके पेट से अपना हाथ नीचे अंडरवियर में ले गयी और लंड पर ऊपर नीचे फिराने लगी.
गौरवजी भी अब उत्तेजना में उम्महह … आहह … करने लगे और उन्होंने अपना अंडरवियर खुद ही उतार दिया.
साथ ही बाकी कपड़े भी उतार दिए और आखिरकार हम दोनों पूरी तरह नंगे हो चुके थे.
इस गहरे चुंबन के बाद हम दोनों कुछ पलों के लिए अलग हुए.
हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे और मुस्कुरा भी रहे थे.
मैंने आंखें मटका कर गौरवजी से इशारे से पूछा- अब?
गौरवजी ने नीचे को सिर हिला कर मुस्कुराते हुए इशारा कर दिया.
मैंने कुछ नहीं कहा और मुस्कुरा कर वहीं कालीन पर घुटनों के बल बैठ गयी.
उस समय मेरा मुँह उनके लंड के ठीक सामने था.
उनका लंड सामान्य से कुछ बड़ा था और देख कर ही लग रहा था कि ये ऐसे ही इतना बड़ा नहीं हुआ है, इसे सालों को अनुभव होगा, इसने न जाने कितनी योनियों के द्वार खोले होंगे.
उनका लंड एकदम सख्त और खड़ा होकर ऊपर को देख रहा था.
मैंने एक हाथ से उसको पकड़ा और ऊपर नीचे 2-3 बार हिला कर उसकी सख्ती का जायजा लिया.
फिर मैंने ऊपर देखते हुए गौरव जी को एक स्माइल दी और अपने बंद होंठों पर रख कर धीरे धीरे खोलते हुए अन्दर ले गई.
मैं सेक्स के जोश में अपने मुँह को ऊपर नीचे करती हुई लंड चूसने लगी.
मेरी जीभ लंड के ऊपर-नीचे चलती तो कभी लंड मुँह में अन्दर आकर जीभ से खेलने लगता.
गौरव जी भी उम्महह … उम्महह … उम्महह … करते हुए मेरी मेहनत का आनन्द ले रहे थे.
दोस्तो, अगले भाग में चुदाई से लबरेज सेक्स कहानी का मजा लिखूँगी.
सेक्स अपोर्चुनिटी विद मेंटर स्टोरी कैसी लगी आपको?
आपके मेल मिलते रहने चाहिए … प्लीज लिखो न!
suhani.kumari.cutie@gmail.com