Xxx लंड सेक्स कहानी में मेरी सहेली के ससुर ने मुझे अपने बड़े मोटे लंड से चोदा तो मुझे मजा ही आ गया. मैं बार बार उस लंड से चुदना चाह रही थी.
दोस्तो, मैं प्रीति आपको अपनी सहेली के ससुर से चुदाई की सेक्स कहानी सुना रही थी.
कहानी के दूसरे भाग
सहेली के ससुर का लंड मेरी चूत में
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मैं अपने जिस्म पर अंकल के प्यार के निशान देख कर मुस्कुरा रही थी.
अब आगे Xxx लंड सेक्स कहानी:
अगले दिन सुबह में जब उनके घर गई तो देखा कि अंकल मेरी राह ही देख रहे थे.
अन्दर जाते ही अंकल ने मुझे अपनी गोदी में बिठा लिया और मुझे चूमते हुए बोले- क्या तुम मुझसे शादी करोगी, मुझे पता है कि तुम्हारी शादी हो गई है और हमारी इस शादी को कोई नहीं मानेगा लेकिन यह शादी सिर्फ मेरी आखिरी इच्छा समझकर कर लो. जब भी तुम मायके आओगी, तब तुम मेरी पत्नी बनकर मेरे साथ सेक्स करना. मुझे बहुत अच्छा लगेगा.
उनकी इस ख्वाहिश को जान कर मैं कुछ भी बोलने की हालत में नहीं थी.
मुझे समझ में नहीं आ रहा था लेकिन कल की चुदाई के बारे में सोच कर मैंने तय कर लिया कि मैं उन्हें हां ही बोलूँगी.
मैंने उनके गले में बांहें डाल दीं और उनके होंठों को चूम कर हां कह दी.
अंकल जी को तो मानो स्वर्ग जैसा आनन्द मिल गया था.
उन्होंने मुझे गले से लगा कर कस लिया.
कुछ पल बाद अंकल जी मुझसे अपने कमरे में लेकर गए.
उधर उन्होंने मेरे लिए कल ही शादी का जोड़ा खरीद लिया था.
मैं लाल जोड़े को देख कर शर्मा गई.
उन्होंने मुझे तैयार होने के लिए कह दिया.
उन्होंने बड़े ही प्यार से मेरे बालों में सजाने के लिए एक मोगरा के फूलों का गजरा रखा था.
अंकल ने उसे जूड़े में लगा कर ही बाहर आने के लिए कहा तो मैंने हामी भर दी.
वे बाहर जाने लगे, फिर अचानक से पलटे और बोले- अपने पति के नाम का मंगलसूत्र निकाल कर आना.
मैं मुस्कुरा दी.
उस वक्त न जाने क्यों मुझे अपने पति अब्दुल और अंकल के लौड़े एक साथ याद आने लगे थे.
अब्दुल का लंड अंकल के लौड़े के सामने कुछ नहीं था.
मैं अंकल के साथ अपनी दूसरी शादी के लिए संवरने लगी.
इस शादी में हम दो ही लोग आमंत्रित थे.
अब मैंने कपड़ों को देखा.
अंकल जी मेरे लिए लाल कलर की नेटेड ब्रा पैंटी लाए थे और उसी के साथ में लाल कलर की सुंदर सी साड़ी, मैचिंग का पेटीकोट ब्लाउज आदि सब लेकर आए थे.
मैं तैयार होकर बाहर आ गई.
मैंने मेरे सर के ऊपर पल्लू ले लिया था और अपना पूरा चेहरा ढक लिया था.
जैसे ही मैं रूम से बाहर निकली, मुझे अंकल जी और एक आदमी की आवाज सुनाई दी.
मैं घबरा गई कि ये दूसरा आदमी कौन है?
तभी अंकल जी को मेरे आने का अहसास हो गया.
वे मेरे पास आ गए.
उन्होंने मुझे बता दिया कि उन्होंने शादी के लिए स्वामी जी को बुलाया है, शादी है तो कन्यादान भी होना चाहिए इसीलिए मैंने अपने एक खास दोस्त और उसकी बीवी को बुलाया है.
मैं उनकी इस योजना से काफी प्रभावित हो गई.
मैंने घूँघट से ही उन्हें उनकी इस तैयारी के लिए इजाजत दे दी.
मेरी अब दूसरी शादी होने वाली थी.
मेरी शादी पूरी रीति-रिवाज के साथ अंकल जी से हो गई.
उस वक्त किसी ने मेरा घूंघट उठाया.
जैसे ही मैंने ऊपर देखा, तो यह वही स्वामी जी था, जिसने मेरी शादी जी करवाई थी.
इसी कथित स्वामी जी ने मुझे दो ही दिन पहले ही चलती बस में मेरी चुदाई की थी.
उसने मुझे देख कर कुछ नहीं कहा, बस होंठ गोल करके मुझे चुंबन देने का इशारा किया.
मैं कुछ नहीं बोली.
फिर मेरी नजर उन अंकल आंटी पर गई, जिन्होंने मेरा कन्यादान किया था.
वे और कोई नहीं, हमारे गांव के सरपंच और उनकी बीवी थी.
पूरी शादी होने के बाद सरपंच की बीवी ने मुझे उठाया और सुहागरात वाले कमरे में ले गई.
वे मुझे उधर बिठा कर बाहर आ गईं.
कुछ समय के बाद अंकल जी अन्दर आए और उन्होंने कमरे की कुंडी लगा कर मेरे पास आकर मेरा घूंघट उठाया.
मैं मुस्कुरा दी.
हम दोनों किस करने लगे.
हमारा यह किस बहुत ही शानदार प्यार भरा आनंदित करने वाला था.
मैंने अब्दुल से भी सुहागरात मनाने के समय पर इतना रोमांटिक किस नहीं किया था.
मेरे इस नवविवाहित जीवन के लिए यह एक उत्साहित करने वाला पल था.
अंकल जी ने एक एक करके मेरे ब्लाउज पेटीकोट और साड़ी को निकाल दिया.
मैं अब सिर्फ ब्रा पैंटी में रह गई थी. मेरे गले में एक खूबसूरत सा नया मंगलसूत्र लटक रहा था, जो मेरे मम्मों की दूधिया घाटी में सजा हुआ था.
मैंने भी अंकल जी के कपड़े उतार दिए और उनका लंड हाथ में पकड़ कर उसे चूसने लगी.
अंकल जी चित लेट गए और मैं उनके लंड को मुँह में अन्दर तक लेने लगी.
अंकल ने कुछ देर लंड को चुसवाया और उसके बाद उन्होंने मेरी ब्रा पैंटी को निकाल कर मेरे तन से अलग कर दिया.
मैं पूरी नंगी थी और अंकल जी के कड़क चिकने लौड़े के ऊपर बैठ गई.
अंकल जी ने मेरे चूतड़ों को पकड़ा और अपने लौड़े पर बिठा कर दबा दिया.
मैं मीठी सी आह भर कर अंकल जी के लौड़े से चुदवाने लगी.
वे भी मुझे पकड़ कर अपने लौड़े पर ऊपर नीचे कर रहे थे.
कुछ देर बाद अंकल ने मेरे चूतड़ों से हाथ हटाया और मेरे बालों को पकड़ कर मेरे को नीचे झुका लिया.
मेरी चूचियां अंकल जी के मुँह के नजदीक आ गई थीं, जिन्हें वे मस्ती से चूसने लगे थे और अपने लौड़े को बड़ी तेज रफ्तार से चुत में अन्दर बाहर करने लगे थे.
अब मैं उनके ऊपर गिर गई थी और उन्हें किस कर रही थी.
मेरे दूध अंकल जी के सीने से पिस रहे थे.
कुछ देर बाद मैं उनके लंड से उतरी और लंड को देखने लगी.
अंकल जी का लंड मेरी चूत के पानी से लिपड़ा हुआ था.
मैंने अंकल की तरफ देखा तो उन्होंने चुत रस से सने लंड को चूसने का इशारा किया.
मैंने अंकल जी के लौड़े को मुँह में ले लिया और उस पर लगी अपनी चुत की मलाई को चाट किया.
अब अंकल ने मुझे डॉगी स्टाइल में किया और पीछे से मेरी चुत में लंड डाल दिया.
वे काफी जोर जोर से लंड पेल रहे थे और उनके झटके बहुत ही गहराई में जाकर लग रहे थे.
मेरे मुँह से ‘आह आह ऊह.’ की आवाज निकल रही थी.
मेरी मादक सीत्कारों से उन्हें भी जोश आ रहा था, उससे वे और तेजी से झटका मारने लगे थे.
फिर उन्होंने मुझे बेड पर चित लेटा दिया और मेरे ऊपर आने लगे.
मैंने अपने दोनों पैर हवा में उठा दिए, तो उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत में डाल दिया.
अपने लौड़े को मेरी चुत में पेल कर वे मुझ पर छा गए और मुझे किस करने लगे.
अंकल मुझे किस करते हुए मेरी चूत में लंड अन्दर बाहर करने लगे.
सब मिला कर लगभग आधा घंटा तक अंकल ने मेरी चुत को भोसड़ा बनाने के अंदाज में चोदा और फिर मेरी चूत के अन्दर ही अपना वीर्य छोड़ दिया.
उस दिन अंकल ने शाम तक मुझे दो बार चोदा.
फिर जब मैं घर से निकलने वाली थी, तभी एकदम से तेज बारिश आने लगी.
मैंने अब रात को भी वहीं अंकल के पास रहने का फैसला कर लिया.
मैंने उनके लिए खाना बनाया.
मैं जब खाना बना रही थी, तब मैं बिना कुछ पहने हुई खाना बना रही थी.
अंकल जी खाना बनाते वक्त मुझे किस कर रहे थे और मेरे मम्मों को मसल रहे थे.
फिर उन्होंने शराब की बोतल निकाली और गिलास में डाल कर मेरे स्तनों पर डाल कर दूध को मुँह में दबा कर शराब पीने लगे.
बाहर बारिश ने जोर पकड़ लिया था, तो मौसम बड़ा ही आशिकाना हो गया था.
मैंने भी अंकल के साथ दारू का मजा लिया और पीने के बाद हम दोनों बिना कपड़ों के खाना खाने लगे.
एक ही थाली में खाना परोस कर मैं उनकी गोद में बैठ गई थी.
अंकल जी मुझे खाना खिला रहे थे और मैं किसी बच्चे के जैसे खाना खा रही थी.
बीच-बीच में वे दारू पीते थे और मुझे भी पिला दे रहे थे.
खाना खत्म होने के बाद मैं बर्तन उठा कर किचन में गई तो वे मेरे पीछे पीछे ही आने लगे थे.
मैंने अपना काम खत्म किया, तो अंकल ने मुझको अपनी गोद में उठा लिया.
काफी ज़्यादा शराब पी लेने के कारण उन्हें चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी.
मैंने उन्हें समझाया कि मैं पैदल ही चली जाऊंगी.
मुझे डर लग रहा था कि कहीं न/शे की झौंक में अंकल मुझे गिरा न दें.
मगर मेरी बात को ना सुनते हुए उन्होंने मुझे गोद में उठाए रखा और मुझे चूमते हुए ऊपर वाले कमरे में लेकर आ गए.
कमरे के बाहर एक खुली छत थी, जोकि अंकल जी के आंगन की तरफ वाली थी.
उधर बारिश का पानी झमाझम गिर रहा था.
अंकल जी की खुमारी बता रही थी कि उन्हें बारिश में चुदाई के मजे लेने हैं.
मैं भी उनके साथ दे रही थी.
उन्होंने छत की रेलिंग पकड़वा कर मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना मूसल लंड मेरी चूत में पेल दिया.
ऊपर से बारिश की मस्ती और नीचे चूत में लंड की मस्ती … मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होकर चुदवा रही थी.
बारिश के बीच बीच में बिजली भी कड़क रही थी.
ऐसा लग रहा था कि मेरी और अंकल जी की शादी में हमें आशीर्वाद देने के लिए खुद जन्नत का दरवेश नीचे आया है.
अंकल जी अपनी मस्ती के सातवें आसमान में थे और मेरे चूत में उनका लंड को भरपूर गोते लगा रहा था.
कुछ देर यूं ही चोदने के बाद अंकल जी ने मुझे जमीन पर लेटा दिया और मेरे पैरों को अपने कंधों पर ले लिया.
अंकल ने न/शे में किसी तरह से मेरी चूत में लंड को सैट किया और एकदम से अन्दर बाहर करने लगे.
मैं भी हल्के न/शे में थी और चुदाई के परम सुख का आनन्द ले रही थी.
मेरी कामुक आवाजों से उत्तेजित होकर अंकल जी मुझे गाली दे रहे थे और फुल स्पीड से चोद रहे थे.
‘साली रंडी मस्त चुदती है कुतिया आह!’
अंकल जी का लंड अब मेरी बच्चेदानी को छू रहा था.
मुझे काफी उत्तेजना हो रही थी. इसी उत्तेजना में मेरे ऊपर दारू चढ़ कर मुझे बहकाने लगी और मेरी चूत में करंट दौड़ने लगा.
मेरे पूरे शरीर का खून मेरी बच्चेदानी की तरफ आ गया लग रहा था, तो मैंने अंकल जी को जोर से पकड़ लिया.
तभी मेरी चूत पानी छोड़ने को होने लगी और मैं जोर जोर से चिल्लाने लगी ‘आह अंकल जी, मैं आ रही हूं आह मुझे और जोर जोर से चोदो!’
अंकल जी पूरी ताकत से मेरी चूत में लंड पेल रहे थे.
साथ ही अंकल जी कह रहे थे- आह ले मेरी रंडी … साली तूने भी रसभरी क्या चूत पाई है आह मजा आ गया तुझे चोदने में!
तभी मैं झड़ने लगी तो वे भी झड़ने लगे और उन्होंने अपने लंड का पानी मेरी चूत में ही टपका दिया.
अंकल जी ने अपने वीर्य को मेरी चूत में लबालब भर दिया था और वे मेरे ऊपर किसी जंगली भैंसे की तरह लेटे हुए थे.
वे मुझे किस कर रहे थे और मेरे दूध मसल रहे थे.
बारिश के मौसम में यह सब बहुत ही शानदार था.
फिर हम दोनों नीचे आए और बाथरूम में फ्रेश होने लगे.
एक साथ हल्के गर्म पानी के टब में बैठ कर सिकाई करने लगे और दोनों ही नंगे बैठे बैठे सो गए.
कुछ देर बाद मेरी नींद टूटी तो मैंने अंकल को जगाया और उनके साथ कमरे में बिस्तर पर चली गई.
हम दोनों काफी थके हुए थे तो सो गए.
सुबह जब मेरी नींद खुली, तब मुझे अहसास हुआ कि अंकल जी का लंड मेरी चुत के अन्दर था.
अंकल जी ने जैसे ही मुझे जागते हुए देखा, तो वे मेरे ऊपर आ गए और उन्होंने मुझे किस करते हुए मेरी चुदाई चालू कर दी.
सुबह सुबह मुझे चोद कर अपना वीर्य मेरी चूत में ही डाल दिया.
हम दोनों ने पुनः एक साथ बाथरूम में जाकर स्नान किया.
मैं अच्छे से तैयार हो गई और अंकल जी का दिया हुआ मंगलसूत्र मेरे गले में चमक रहा था.
पति वाला मंगलसूत्र मैंने अपने पर्स में डाला हुआ था.
मैं अपने घर आ गई.
Xxx लंड सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं और आगे की सेक्स कहानी आपको सुनाऊंगी, जब अंकल ने मेरी सास को भी चोद दिया.
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