सहेली के ससुर के लंड से चुदाई- 2

Views: 314 Category: Hindi Sex Story By preetimisal111 Published: May 07, 2026 📖 10 min read
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देसी चूत हॉट कहानी में मैं मेरी सहेली के घर गयी तो उसके ससुर ने मुझे चुदाई के लिए गर्म करके मुझे नंगी कर लिया और अपना मोटा लंड मेरी चूत में पेल दिया.

फ्रेंड्स, मैं प्रीति आपको अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग का मजा देने के लिए हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
सहेली के ससुर ने मुझे दबोच लिया
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि अंकल मेरे दूध पकड़ कर मुझे चोदने के लिए लंड को चुत पर घिस रहे थे.

अब आगे देसी चूत हॉट कहानी:

अंकल ने कुछ देर बाद मेरे दूध छोड़ दिए और नितंबों को पकड़ कर मुझे उठा कर ऊपर नीचे करने लगे.

मैं जैसे जैसे अंकल के लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी तो मेरी जांघें अंकल की जांघों से टकरा रही थीं और पट पट की मधुर आवाज आ रही थी.

अंकल के लौड़े की चोट मेरी चुत की गहराई में लगने लगी थी तो मेरे कंठ से मादक आवाज निकल कर कमरे में गूंजने लगी थी.

मैं उनके लौड़े पर ऊपर नीचे हो रही थी और अंकल का लंड उसी लय में मेरी चुत में अन्दर बाहर हो रहा था.

मैं कुछ ज्यादा ही मस्त होने लगी थी और अंकल जी को किस करती हुई उनके लंड को अन्दर तक लेकर बाहर निकाल रही थी.

कुछ देर यूं ही चोदने के बाद अंकल जी ने अब मुझे अपने नीचे लेटा लिया और वे मेरे ऊपर आ गए.

उन्होंने मेरे दोनों पैरों को हवा में उठाकर ऊपर करके पकड़ लिए.
फिर उन्होंने अपने लंड को चूत के छेद में जोर से झटका देते हुए अन्दर तक पेल दिया.

जैसे ही उन्होंने लंड को जोरदार तरीके से अन्दर घुसेड़ा, तो मैं ऊ… मां मर गई …’ कहती हुई चीख पड़ी.

अंकल जी- क्या हुआ मेरी रांड, क्यों चीख रही है. आह आज तो मेरी तमन्ना पूरी हो गई … तेरे जैसी रंडी लड़की को चोद कर … आज तो मुझे स्वर्ग का आनन्द मिल गया है. ऊपर वाले के घर में देर है, लेकिन अंधेर नहीं है.
मैं कराहती हुई बोली- अंकल जी फालतू की बातों में ध्यान मत दो यार … आप बस मेरी चुदाई करो … जोर जोर से चोदो!

अंकल जी ने मेरी दोनों टांगें नीचे कर दीं और मेरे ऊपर चढ़ गए.
मेरा बदन उनके बदन के नीचे दब गया था.

उन्होंने मेरी कमर को पकड़ा और किस करते हुए मेरी जोरदार चुदाई करने लगे.
मैं उनकी पीठ को सहला रही थी.
उनके इस तरह से चोदने ने न जाने कैसे मेरे पैर हवा में ऊपर नीचे हो रहे थे.

मैं- अंकल जी और जोर से चोदो न … आह क्या ताकत है आप के अन्दर … किसका दूध पिया है आपने आह … मां कसम मैं तो आपके लौड़े की दीवानी हो गई.
अंकल- मैं तो यही चाहता था कि तुम मेरी दीवानी बन जाओ. मेरी लंड की रानी बन जाओ.

अब अंकल ने मेरी कमर को छोड़ दिया और अपने दोनों हाथ मेरे स्तनों के ऊपर रख कर चोदने लगे.
वे चुत चोदने के साथ साथ मेरे दोनों मम्मों को पूरी ताकत से मसल रहे थे.

मैंने अपने पैरों को उनकी कमर के ऊपर ऐसे बांध लिए थे कि उनका लंड मेरी चुत के एकदम अंतिम छोर तक जा रहा था.
मैं भी पूरी मस्ती से नीचे से गांड उठा कर उनका साथ दे रही थी.

कुछ देर बाद मैं झड़ गई तो उन्होंने मुझे वापस अपने ऊपर ले लिया.

मैं उनके लौड़े पर उछलने लगे, वे नीचे से कमर उठा कर मेरी चुदाई करने लगे.

अब मैंने कहा- अंकल घोड़ी की सवारी नहीं करोगे क्या?

वे समझ गए और उन्होंने मुझे घोड़ी जैसा बना लिया.
मैं घुटनों के ऊपर चौपाया बन कर खड़ी थी.

अंकल मेरे पीछे आ गए.
उन्होंने मेरी कमर को पकड़ा और मेरी चुत को चोदना चालू कर दिया.

मैं तड़पने लगी थी लेकिन उन्होंने मेरी चूत चोदना बंद नहीं किया.
कुछ देर बाद उन्होंने अपना लंड मेरी चुत से खींचा तो मुझे राहत मिली.

अब उन्होंने मेरे नितंबों को जोर से पकड़ कर अलग अलग दिशा में करते हुए मेरी चुत व गांड को खोल दिया.
मैं कुछ समझ पाती कि अंकल ने अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया और उसे जोर जोर से चाटने लगे.

उनके चुत चाटने से मुझे लज्जत मिलने लगी और मैं गांड हिलाती हुई उनसे चुत चुसवाने लगी.

कुछ देर बाद अंकल ने वापस मुझे घोड़ी बनाया और चूत के छेद में लंड सैट करके अन्दर डाल दिया.
अंकल ने एक ही झटके में लंड पेला था, तो मैं उनके झटके को सह न सकी और पेट के बल नीचे गिर गई.

अंकल ने मुझे वापस खींच कर उठाया और इस बार मेरी कमर को पकड़ कर लंड को जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगे.
वे मेरे नितंबों पर जोरदार तरीके से थप्पड़ मारने लगे और थप्पड़ मारते समय वे मेरे नितंबों को जोर से पकड़ कर नोच रहे थे, उससे मेरी चीख निकलने लगती थी.

अंकल जी को इस तरह से करने में मजा आ रहा था.
मेरी चीख निकलते ही वे और जोर से अपने लंड को चुत की जड़ तक पेल कर मुझे चोदने लगते थे.

इस तरह से अंकल अपने लौड़े को मेरी चुत में अन्दर बाहर करते रहे.

करीब दस मिनट तक चुत को रगड़ने के बाद अंकल जी ने लंड को बाहर निकाला और मुझे पकड़ कर घुमाया.

मैं अपना मुँह उनके लौड़े के सामने लाई, तो उन्होंने मेरे मुँह के सामने मेरी चुत के पानी से सना हुआ लंड कर दिया.
वे लौड़े को चूसने के लिए बोले- चूस रंडी!

मैं अंकल के लंड के टोपे पर जीभ फिराने लगी, तो वे आह आह करने लगे.
अब मैं उनके लंड को अन्दर तक लेकर चूसने लगी.

अंकल जी- आह मेरी रंडी … चूस बहन की लवड़ी साली … जोर जोर से चूस कुतिया.
अंकल ने मुझे गाली देते हुए लंड को अन्दर तक ठूँसा और मेरे बालों को पकड़ कर मेरा मुँह चोदने लगे.

मैंने अंकल जी की कमर को पकड़ लिया और लौड़े को मस्ती से अन्दर तक लेकर चूसने लगी.
एक सांड जैसे मर्द का मोटा लंड मुझे बेहद लजीज लग रहा था.

अंकल भी मेरी चूचियों को मसलते हुए मेरे मुँह की मैया चोदने लगे थे.

कुछ देर बाद अंकल बेड पर बैठ गए और मैं नीचे आकर उनका लंड चूसने लगी.

अंकल जी मुझे लंड चूसते देख कर बहुत उत्तेजित हो गए थे.
वे मुझे गाली देते हुए बोले- साली गोटे भी चूस न!

मैं लौड़े को मुँह से निकाल कर उनके गोटे चूसने लगी, तो कभी लंड को चाटने लगी.
कमाल की बात यह थी कि अंकल के लौड़े पर झांट बराबर भी असर नहीं पड़ रहा था, उनका लंड झड़ने को राजी ही नहीं था.

जब मैं लौड़े का रस न निकाल सकी तो अंकल जी ने मुझे पुनः बेड के किनारे लेटा दिया और मेरे पैरों को हवा में उठा कर पकड़ लिया.

वे पलंग के किनारे खड़े होकर मेरी चूत में लंड को पेल कर चुदाई करने लगे.

कोई पांच मिनट तक पुन: चुत चोदने के बाद अंकल ने मुझे फिर से खड़ी कर दिया.
मैं हैरान थी कि यह सांड क्या अमर बूटी खा कर चुदाई कर रहा है!

अंकल जी मुझे किस करने लगे और मेरी चूचियों को मसलने लगे.
मैं खुद अपने हाथ से अपने दूध उनके मुँह में देने के लिए आगे करने लगी.

अंकल मेरे एक निप्पल को होंठों में दबा कर चूसने लगे.
कभी वे मेरे निप्पल को खींचने लगते थे, तो कभी उसे दांतों में दबा कर मींजने लगते थे.
नीचे अंकल का लंड हवा में झटका मार रहा था.

मैंने अंकल के गले में दोनों हाथ डालकर एकदम से छलांग लगाई और उनकी कमर के इर्द गिर्द अपनी टांगें लपेट लीं.
इस तरह से मैं अंकल की गोदी में लटक गई थी और उन्हें चूमने लगी थी.

अंकल ने मेरी गांड के नीचे से दोनों हाथ लगे और मुझे अपने लौड़े पर टांग लिया.

मैं भी लंड के सुपारे को अपनी चुत की फांक में घुसवाने के लिए कमर मटकाने लगी.
अंकल ने एक दो बार मुझे उठाया और अपने लंड को अच्छी तरह से चुत में सैट कर दिया.

अब उन्होंने एक जर्क लगाया और मेरी चुत में सुपारा ठूंस दिया.

मेरी चुत अंकल के लौड़े की मोटाई के लिए फैल चुकी थी, तो उसे इस बार लंड लीलने में कोई खास दर्द नहीं हुआ.

अब अंकल मुझे उठा उठा कर अपने लंड पर ऊपर नीचे करने लगे.
वे मुझे हवा में उठा कर छोड़ देते थे, तो उनका लंड मेरी चुत में सरसराता हुआ घुसता चला जाता था.

मुझे इस तरह से लौड़े पर झूला झूलने में मस्त मजा आ रहा था.

मैंने अंकल को चूमा तो वे बोले- मजा आ रहा है न!
मैंने कहा- अरे यार अंकल तुमने तो मेरी चुत की मां चोद दी, उसे भोसड़ी बना दी और क्रांति लिख दी.

अंकल ने हंस कर मेरे नितंबों को जोर से मसला और चुम्मी लेते हुए ठोकरें देना चालू कर दीं.
कोई पांच मिनट तक अंकल जी ने मुझे अपने लौड़े पर झूला झुलाया और अपने हर एक धक्के में मेरी चुत की जड़ तक लंड को पेल पेल कर मुझे थका दिया.

उनके झटकों से मेरे दूध ऊपर नीचे हो रहे थे और अंकल के सीने से रगड़ खा रहे थे.
कुछ देर यूं ही हवा में झूला झुला कर चोदने के बाद अंकल ने अपने लंड को मेरी चूत के अन्दर ही पेले हुए बेड पर लिटा दिया और वापस मेरे ऊपर चढ़ कर चुत चोदनी चालू कर दी.

मैंने भी उन्हें जोर से पकड़ लिया.
उनका जोश बढ़ने लगा.
वे मुझे किस करने लगे और जोर जोर से लंड को चुत में अन्दर बाहर करने लगे.

अब शायद उनका स्खलन करीब आ गया था.
मैं भी ‘हां हां आ आह और जोर से चोदो अंकल जी आह और जोर से … मैं आ रही हूं.’ कहती जा रही थी.

अंकल ने भी किसी जंगली भैंसे के जैसे मेरी चुत में जोर जोर से लंड को पेलना शुरू कर दिया था.

अंकल का लंड किसी पिस्टन के जैसे फुल स्पीड से मेरी चुत को रौंद रहा था.

वे मेरे गले को किस करते हुए मुझे काटने लगे थे और उसी वक्त उनके लंड से पानी निकलने लगा था.

उस वक्त अंकल के कंठ से गुर्राहट के साथ गाली निकल रही थीं- आह बहन की लौड़ी आह ले ले आह मेरे लंड का पानी पी ले कुतिया … आह तेरी मां को चोदूं मादरचोद आह!
उनका लंड मेरी चूत को अपने वीर्य से भर रहा था.

एक मिनट तक अंकल ने मेरे ऊपर ही चढ़े रह कर अपने वीर्य को मेरे अन्दर भरा.
अब वे मुझे किस करने लगे और मैं भी नशीली रांड के जैसी उन्हें चूमने लगी.

हम दोनों की जीभें एक दूसरे से टकरा रही थीं.

कुछ पल बाद अंकल जी मेरे बाजू में लेट गए और उन्होंने मुझे बांहों में ले लिया.

वे मुझे किस कर रहे थे, मेरे स्तनों को दबा रहे थे.

अंकल जी बोले- जी करता है तुझे उम्र भर के लिए अपने पास रख लूं! मेरी तमन्ना तो आज पूरी हो गई, लेकिन तुझे पाने की ख्वाहिश अभी भी अधूरी है.
मैं- अंकल जी, आप मुझे इतना प्यार करते हैं तो आपने मुझे पाने की कोशिश क्यों नहीं की!
अंकल जी- यही तो मेरी बहुत बड़ी भूल थी. जब तुम जवान हुई थी, तो मैं तुम्हारे बाप से कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाया.

कुछ देर हम दोनों एक दूसरे से नंगे लिपट कर प्यार करते रहे.

फिर मैं उठने लगी और बोली- अंकल जी, अब मुझे जाना होगा. मैं आपसे वादा करती हूं कि जब भी मैं मायके आऊंगी, तब मैं आपसे मिलने जरूर आऊंगी. आप जीभर कर मुझे प्यार करना.
अंकल ने मुझे जाने नहीं दिया और उस उसे उन्होंने मुझे दिन में ही तीन बार चोदा.

उन्होंने मुझे हर एक पोजीशन में चोदा था और मेरी एक एक हड्डी चटका दी थी.

उस दिन की चुदाई मेरी अब तक की सभी चुदाइयों में सबसे हसीन चुदाई हुई थी.
मेरे बदन के हर हिस्से पर अंकल जी ने काट काट कर अपने प्यार की निशानियों को बना दिया था.

यदि मैं गांव में न होती तो मेरे पति जरूर मुझसे पूछते कि ये निशान किसने बनाए हैं.

अंकल जी से अगले दिन मिलने आने का वादा करके मैं घर वापस आ गई.

घर आने के बाद मैं स्नान करके जब आईने के सामने आई तो मैंने अपने बदन को देखा.
उसमें एक अलग ही चमक थी. मैं मुस्कुरा दी.

दोस्तो, अंकल के साथ मेरी इस देसी चूत हॉट कहानी में अभी और भी रस बाकी है, जिसे मैं अगले भाग में लिखूँगी.
आप सब अपने विचार जरूर लिखें.
आपकी प्रीति
preetimisal111@gmail.com

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