हॉट गर्ल X स्टोरी में मैं अपने मायके गयी तो अपनी सहेली के घर गयी. वहां सहेली के ससुर के अलावा कोई नहीं था. उन्होंने मुझे अंदर आने को कहा.
फ्रेंड्स, आप सभी लोगों का मैं अपनी नई सेक्स कहानी में स्वागत करती हूं.
आपके मेल से पता चला कि आप सभी को
स्वामी जी के साथ मेरी बस में चुदाई
वाली कहानी आपको पसंद आई थी.
यह हॉट गर्ल X स्टोरी उसी कहानी से आगे की है.
जैसे ही में गांव में पहुंची, मेरे घर में मेरे अचानक आने की खुशी छा गई थी.
मेरे घर वालों को मेरा सरप्राइज बहुत ही पसंद आया था.
जिस वक्त मैं घर पहुंची थी, तब शाम हो चुकी थी.
मैं भी बस में हुई चुदाई और हिचकोले लेती बस की यात्रा के कारण बुरी तरह से थक गई थी.
मैं नहाई और खाना आदि खाकर घर वालों के साथ बातें की.
मेरी मम्मी बहुत ही खुश थीं.
हम लोग इधर-उधर की बातें करके रात को सो गए.
अगले दिन में सुबह उठकर नाश्ता करके अपनी एक सहेली से मिलने के लिए उसके घर गई.
मैं उसे भी सरप्राइज देना चाहती थी.
मेरी सहेली ने मेरे गांव वाले एक लड़के साथ ही शादी की थी तो वह अब अपनी ससुराल में रहने लगी थी.
जैसे ही मैं उसके घर गई तो पता चला कि मेरी सहेली अपने पति और सास के साथ किसी की शादी में शामिल होने के लिए बाहर गांव गई है.
उस समय उसके ससुर ही अकेले घर में थे.
उन्होंने मुझसे अन्दर आने का कहा.
मैंने उन्हें बाद में आने का बोल दिया.
यह सुनकर मेरी सहेली के ससुर जी मुझसे नाराजगी जताने लगे.
वे बोले- तुम इतने दिनों के बाद आई हो और तुम्हारी सहेली नहीं है, तो तुम इधर से जा रही हो. तुम्हारी सहेली को कैसा लगेगा कि मैंने तुम्हारा स्वागत सत्कार ही नहीं किया. वह मुझसे बहुत कुछ बोलेगी!
मैं उनके मुँह से यह सब सुनकर उनके घर में आ गई.
सहेली के ससुर जी का नाम भीम सिंह था.
इधर मैं आपको अंकल जी के बारे में बता देती हूँ.
उनका रंग एकदम गोरा है.
वे करीब साठ साल के गठीले बदन वाले खासे मर्द हैं.
उनकी हाइट करीब 6 फीट की होगी.
चेहरे पर एक झुर्री भी नहीं थी और पहलवान जैसे हट्टे-कट्टे सांड जैसे मर्द लग रहे थे.
उनका चौड़ा सीना और भरे हुए चेहरे पर मोटी मोटी मूँछें थीं, जिससे उनका रौबीला व्यक्तित्व अलग ही झलक रहा था.
उनकी काफी सारी खेती थी तो शायद वे गांव की औरतों की लेते रहते होंगे.
ऐसा मेरी पारखी नजरों ने समझ लिया था.
मैंने कहा- अरे अंकल जी, कोई बात नहीं है. मैं अभी यहीं रुकी हूँ. दो दिन के बाद वापस आऊंगी तो उसे मना लूंगी.
लेकिन उन्होंने मुझसे पुनः अन्दर आने के लिए कहा.
मैं लगातार मना कर रही थी.
फिर उन्होंने मुझसे कहा- ठीक है, तुम बाद में आ जाना. लेकिन फिलहाल क्या तुम मेरा एक काम कर दोगी?
मैंने कहा- हां हां अंकल जी बताइए न!
वे बोले- तुम एक काम करो, मुझे एक बढ़िया सी चाय बना कर पिला सकती हो, मुझे बहुत अच्छा लगेगा.
जब मेरी सहेली के ससुर जी ने मुझसे चाय बनाने के लिए कहा, तो मुझे इसमें भला क्या आपत्ति हो सकती थी.
अगर मैं यह नहीं करती तो शायद वे मेरी सहेली से बोल देते और हो सकता था कि मेरी सहेली इस बात का बुरा मान जाती.
मैं समझ गई कि उन्हें मेरे साथ कुछ पल बिताने का मन है.
मैंने कुछ सोच कर हां कर दी.
अब मैं उनके किचन में गई.
वहां पर उन्होंने मुझे चाय बनाने का सारा सामान बताया और बर्तन दे दिया.
वे उधर ही खड़े होकर मेरे साथ बात करने लगे.
हम लोग एक ही गांव के थे, इस कारण वे जल्दी ही मेरे बारे में जान गए.
मेरे परिवार के बारे में गांव के सब लोग जानते थे तो मुझे लगा कि अंकल जी को पता चल गया होगा कि मैं किस परिवार से हूँ.
जबकि बाद में कुछ और ही पता चला था, उसे मैं आगे लिखूँगी.
अब अंकल मुझसे मेरी ससुराल के बारे में पूछताछ करने लगे.
हम दोनों चाय उबलते समय तक बातें करते रहे थे.
कुछ पल बाद उन्होंने मुझसे पतिदेव के बारे में पूछा और उनके काम के बारे में पूछने लगे.
मैं काफी बिंदास मिजाज की हूँ तो मैं भी अंकल की तरफ तिरछी नजरों से देख रही थी.
अंकल को मेरी नजरें समझ में आ गई थीं तो वे भी अब मुझसे कभी-कभी डबल मीनिंग वाली बातें करने लगे थे.
मैं उन्हें शर्माती हुई जवाब दे रही थी.
फिर जब चाय बन गई तो मैंने उन्हें कप में डाल कर उनके हाथ में दे दी और अपना कप भी ले लिया.
अब हम दोनों बाहर वाले कमरे में आकर बैठ गए और बातें करने लगे.
उस दिन मैंने लाल कलर की कमीज़ और ब्लैक कलर की लेगिंग्स पहनी हुई थी.
मेरी कुर्ती कुछ गहरे गले वाली थी तो मेरे मम्मों का काफी बड़ा हिस्सा नुमाया हो रहा था और अंकल जी के लौड़े को गर्म कर रहा था.
अंकल ने लुंगी और बनियान पहनी हुई थी.
वे मेरे मम्मों को ही निहार रहे थे और अपनी लुंगी में फनफनाते हुए अपने लवड़े को शांत करने की कोशिश कर रहे थे.
मैं ठहरी पुरानी छिनाल, तो सब समझ रही थी कि अंकल जी का अजगर मेरे बिल में घुसने का रास्ता खोज रहा है.
मैंने अपनी तरफ से कोई सिग्नल नहीं दिया और चाय पीती रही.
चाय खत्म करने के बाद मैं उनके हाथ से कप ले रही थी, तब हमारा हाथ एक दूसरे से छू गया.
मैं किचन में जाकर चाय बनाने का बर्तन व चाय के कप धोने लगी.
तब तक अंकल जी मेरे पीछे आकर खड़े हो गए.
मेरी हाइट 5 फीट की है और अंकल 6 फिट के सांड जैसे थे.
वे मेरे काफी नजदीक आ गए थे.
मैं उनकी छाती तक आ रही थी.
जैसे ही मैं बर्तन का काम खत्म करने के बाद मुड़ी, उन्होंने अपना एक हाथ मेरे कंधे के ऊपर रख दिया.
मैं घबराने का ड्रामा करने लगी थी.
हालांकि मुझे तो पहले ही समझ में आ गया था कि आज अंकल के साथ कबड्डी की गुंजाइश है.
मैं तुरंत मुड़ गई.
उन्होंने मुझे अपने गले से लगा दिया.
मैंने उन्हें कुछ नहीं बोला.
उन्होंने भी मुझे अपनी आंखों से ही परख लिया था कि लौंडिया आराम से दे देगी.
मैं- छोड़िए ना प्लीज, आप यह क्या कर रहे हो अंकल … मैं आपकी बेटी जैसी हूँ!
भीमसिंह- बेटी ना बोल, मैं कब से तुझे अपनी रंडी बनाने की सोच रहा हूं. तू नहीं जानती है कि जब तू कॉलेज जाती थी, तभी से मैं तुझे देख रहा हूँ और तभी से मैं तेरी चूत में अपना लंड डालने की फिराक में था.
मैं उनकी खुली खुली बात सुनकर अवाक रह गई.
पाठको, इधर यह बात भी साफ हो गई थी कि वे मुझे काफी पहले से जानते थे.
तभी वे आगे बोले- पर तू साली रंडी, मुझे मुड़ कर भी नहीं देखती थी … तेरे पिताजी से मैं अपने बेटे के लिए हाथ मांगने के लिए जाने ही वाला था कि तभी तेरी शादी का कार्ड तेरे पिताजी ने मुझे दे दिया था. उसी दिन मैंने सोच लिया था कि तेरी खास सहेली को ही अपने घर में लाकर अपने बेटे की बहू बना लूंगा ताकि जब तू आएगी तो उससे जरूर मिलेगी और मैं तेरी ले लूँगा. इतने दिनों तुझे पाने के लिए मेरी तपस्या आज पूरी हो गई.
यह कह कर उन्होंने मेरे लंबे घने बाल अपने हाथ से पकड़े और मेरे सर को ऊपर करके अपनी नशीली आंखों से देखने लगे.
अब उन्होंने मुझे किस करना चालू कर दिया, मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा दिए और बहुत जोर से मेरे मुँह को किस करने लगे.
मैं बकरी सी मिमिया रही थी मगर मुझे मजा आ रहा था.
तभी उन्होंने अपनी मोटी जीभ मेरे मुँह में डालने की कोशिश की.
मैंने इतनी जल्दी उनके सामने खुलने की बात तय नहीं की थी तो मैं अभी भी नखरे कर रही थी.
उन्होंने मुझे अपनी गोदी में उठा लिया और किसी मेमने के जैसे दबोच कर अपने कमरे में ले गए.
कमरे में लाकर अंकल ने मुझे बेड पर लेटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए.
उन्होंने मेरे मुँह को हाथ से पकड़ा और मुझे किस करने लगे.
मैं अभी भी उनसे अलग होने की कोशिश कर रही थी और उन्हें चुम्मी नहीं लेने दे रही थी.
कुछ पल बाद अंकल जी थोड़ा बाजू में हो गए.
भीम सिंह- मुझे मना मत कर.
यही कहते हुए उन्होंने अपनी लुंगी को खोल कर अलग फेंक दिया और उसके बाद बनियान व कच्छा भी निकाल दिया.
उनका लंड हवा में फनफनाने लगा था.
मैं उन्हें और उनके मोटे लंबे लंड को देख कर मस्त हुई जा रही थी.
अंकल 60 साल के होते हुए भी एकदम सांड जैसे मर्द लग रहे थे.
उनका बदन उनकी उम्र के हिसाब से नहीं लग रहा था, वे किसी नौजवान को मात दे सकते थे.
उनकी छाती चौड़ी और पेट सपाट था.
अब वे मुझे अपनी बांहों में दबोच कर मेरे ऊपर लद से गए और मुझे किस करने लगे.
इस बार मैं उनका साथ देने लगी.
वे मेरे मुँह में अपनी जीभ डालने लगे, तो इस बार मैंने अपना मुँह खोल दिया और अगले ही पल उनकी जीभ मेरे मुँह के अन्दर आकर मेरी जीभ से टकराने लगी थी.
हमारे अंग एक दूसरे से रगड़ कर मस्ती दे रहे थे.
अंकल मेरी जीभ को अच्छे से चूस रहे थे.
मैंने उन्हें गले से पकड़ा हुआ था.
तभी उन्होंने मेरी कमीज को नीचे से पकड़ कर ऊपर उठाया और अपना मुँह अलग करके मेरे सर से कुर्ती को निकाल दिया.
साथ ही उन्होंने मेरी लैंगिंग्स को भी नीचे सरका दिया.
अब मैं ब्लैक कलर की ब्रा पैंटी में अंकल के सामने आ गई थी.
मुझे इस तरह से देखकर उन्होंने मेरे ब्रा को खींचा और मम्मों को ब्रा से बाहर निकाल दिया.
अब वे जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाने और मसलने लगे.
अंकल के हाथों में काफी दम था, वे सच में बहुत जोर जोर से मेरे मम्मों को दबा रहे थे.
मुझे दर्द होने लगा था.
फिर उन्होंने मुझे पलट कर घुमाया और पेट के बल लिटा दिया.
वे मेरी पीठ को किस करते हुए ब्रा के हुक को खोलने लगे.
एक पल बाद मेरी ब्रा मम्मों से अलग हो गई.
अंकल ने ब्रा के बाद मेरे दोनों नितंबों को जोर से दबाना चालू कर दिया और मेरी चड्डी की इलास्टिक में हाथ डाल कर उसे नीचे को कर दिया.
इसके बाद उन्होंने मुझे उठा कर पलंग की पट्टी पर टिकाया और मेरी टांगों में फंसी मेरी लैंगिंग्स व चड्डी को एक साथ निकाल दिया.
मैंने उनकी कमर में अपनी टांगें फंसा कर उनसे चिपक गई और उनके होंठों को किस करने लगी.
इस बार वे मेरे स्तनों को दबा रहे थे और मैं उन्हें किस करती जा रही थी.
मैं मुँह से अलग होकर उनकी छाती को चूमने लगी और उनकी छाती की घुंडियों को होंठों से पकड़ कर चूसने लगी.
वे आह आह करते हुए मुझे अपने सीने में दबाने लगे.
कुछ देर बाद मैं अंकल के सीने को किस करती हुई उनके लंड पर आ गई और लौड़े को हाथ में पकड़ लिया.
अंकल के लंड के आजू-बाजू में काफी बाल थे. मैं नीचे हुई और पोज बना कर उनके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.
अंकल के मुँह से आवाज आने लगी- आ … ऊह …
मैं दो मिनट तक अंकल के लंड को चूसती रही, फिर वापस से ऊपर होकर उन्हें होंठों पर किस करने लगी.
अंकल उठ कर बैठ गए.
वे मेरे स्तनों को बारी बारी से अपने मुँह में भर कर चुसकने लगे थे.
वे मेरे एक निप्पल को अपने दांतों में पकड़ कर काटने लगे और आहिस्ता आहिस्ता से खींचने लगे.
मुझे बेहद मस्ती चढ़ रही थी.
मैं बेड के ऊपर बैठ गई.
वे नीचे आ गए और मेरी टांगों को हवा में उठा कर पकड़ लिया.
इससे मेरी चुत अंकल के सामने आ गई थी.
वे मेरी चूत को चाटने लगे, साथ ही अपने एक हाथ से मेरे स्तन को दबाने लगे.
अंकल जी अपने मुँह से मेरी चूत के ऊपर बालों को भी सहलाते रहे थे.
मेरी चुत अब तक भभक चुकी थी और लंड लंड करने लगी थी.
अंकल अब बेड पर लेट गए और मुझे अपने ऊपर 69 में ले लिया.
मेरी चूत उनके मुँह के ऊपर थी, वे मेरी चूत को चूसने लगे और कभी-कभी एक उंगली मेरी चूत में डाल कर अन्दर बाहर करते जा रहे थे.
मैंने उनका लंड हाथ में ले कर मुठियाया और उसे मुँह में अन्दर डाल लिया.
मैं अंकल के लौड़े मुँह में भर कर ऊपर नीचे करती हुई चूसने लगी.
हम दोनों बहुत ही उत्तेजित हो गए थे.
कुछ देर बाद मैं सीधी होकर उनके लौड़े के ऊपर अपनी सैट करके आ गई.
मैंने चूत के छेद में उनके लंड का सुपारा लगाते हुए कमर को झटका दे दिया.
उनका लंड मेरी चुत के अन्दर घुस गया था.
अंकल का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था तो अन्दर लेते ही मेरे मुँह से मीठी सिसकारियां निकलने लगीं.
अंकल ने मेरे दूध पकड़ लिए थे और वे मेरे चूचों को हॉर्न की तरह दबाते हुए गांड उठा कर लौड़े को चुत में रगड़ रहे थे.
दोस्तो, आपकी प्यारी सी प्रीति अगले भाग में आपको अंकल के लौड़े से चुदने की मस्त सेक्स कहानी सुनाने को बेचैन है.
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