मॅाम डैड Xxx कहानी में मैं मम्मी पापा के कमरे में सो रहा था. बीच में मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि पापा मम्मी को जगा रहे थे. मैं समझ गया कि ये दोनों अब चुदाई करेंगे.
रात के करीब 11:00 बज रहे थे।
पूरे कमरे में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था, सिर्फ जीरो वाट के बल्ब की मद्धम रोशनी दीवार पर पड़ रही थी।
हम सब गहरी नींद में थे कि अचानक बेड से कुछ सरसराहट की आवाज आई।
मेरी आँखें खुलीं तो देखा कि पापा मम्मी की तरफ झुके हुए थे।
मॅाम डैड Xxx कहानी बनने का समय आ गया था.
वे मम्मी के कान के पास जाकर बेहद धीमी और फुसफुसाती आवाज में कह रहे थे, “सुनो, जाग रही हो क्या!”
मम्मी ने नींद में डूबी हुई आवाज में जवाब दिया, “उहूँ… क्या है, सोने दीजिए ना!”
लेकिन पापा मानने वाले नहीं थे; उन्होंने मम्मी को थोड़ा और पास खींचते हुए कहा, “अरे, बच्चे सो रहे हैं, बस थोड़ी देर!”
इसके बाद पापा बिना कोई आवाज किए, बिल्कुल दबे पाँव बेड से नीचे उतरे।
उन्होंने अलमारी का दरवाजा बहुत धीरे से खोला ताकि उसकी चरमराहट से किसी की नींद न खुले।
वहाँ से कंडोम का पैकेट निकालकर वे वापस बेड पर आ गए।
बेड पर लेटते ही उन्होंने सबसे पहले गर्दन घुमाकर मेरी और मेरी छोटी बहन की तरफ देखा।
मैंने तुरंत अपनी आँखें बंद कर लीं और गहरी साँसें लेते हुए सोने का नाटक करने लगा।
जब पापा को यकीन हो गया कि हम दोनों सो चुके हैं, तो कमरे की गर्मी और उत्तेजना अचानक बढ़ गई।
पापा ने बिना देर किए अपना पजामा ढीला किया और उसे पैरों से सरका दिया।
उसके बाद उन्होंने अपना लाल अंडरवियर और ऊपर के सारे कपड़े उतारकर खुद को पूरी तरह नग्न कर लिया।
मम्मी भी अब पूरी तरह तैयार थीं।
उन्होंने अपनी नाइटी ऊपर की और अपना अंडरवियर पैर के रास्ते बाहर निकाल दिया।
मद्धम रोशनी में मम्मी का गोरा बदन और पापा का सांवला-काला शरीर एक-दूसरे के बेहद करीब आ चुका था।
मम्मी ने धीरे से अपने दोनों पैर फैला दिए, जिससे दोनों के बीच की दूरी खत्म हो गई।
पापा ने फुर्ती से कंडोम निकाला, उसे पहना और फिर सीधे मम्मी के ऊपर आ गए।
इसके बाद जो शुरू हुआ, उसने कमरे का तापमान और बढ़ा दिया।
पापा ने अपने काले और मोटे लंड को मम्मी की जांघों के बीच सेट किया और एक धीमे दबाव के साथ उसे मम्मी की चुत के अंदर उतार दिया।
लंड के अंदर जाते ही मम्मी के मुंह से एक दबी हुई आह निकली।
पापा ने शुरुआत बहुत ही धीमी और सधे हुए झटकों से की।
उनका पिछवाड़ा धीरे-धीरे ऊपर-नीचे और अंदर-बाहर हो रहा था।
यह सब देखना मेरे लिए जितना रोमांचक था, उतना ही डरावना भी।
डर और मजे के मिले-जुले अहसास से मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज हो गई थी कि उसकी ‘धक-धक’ मुझे खुद अपने कानों में साफ सुनाई दे रही थी।
मम्मी अपनी आँखें बंद किए, पापा की पीठ पर हाथ रखे इस सुख को पूरी तरह महसूस कर रही थीं।
पापा लगातार बिना रुके, बेहद शांत और धीमी गति से अपनी लय बनाए हुए थे।
लगभग 5 मिनट का समय बीत चुका था।
लगातार होते घर्षण की वजह से मम्मी का शरीर पूरी तरह ढीला पड़ने लगा।
अचानक मम्मी ने एक गहरी सांस ली और अपनी चुत से पानी छोड़ दिया।
वह उनका चरम क्षण था।
मम्मी के पानी छोड़ते ही खेल का रोमांच दोगुना हो गया।
अब अंदरूनी हिस्से में गीलापन बहुत ज्यादा बढ़ चुका था, जिसके कारण हर झटके के साथ कमरे में ‘फच-फच’ की साफ आवाजें गूंजने लगीं।
जैसे-जैसे पापा अंदर-बाहर कर रहे थे, वह गीली आवाज और तेज होती जा रही थी।
सन्नाटे में वह आवाज मेरे कानों तक सीधे आ रही थी।
मम्मी का काम तो हो चुका था लेकिन पापा अभी भी अपने चरम पर नहीं पहुंचे थे।
अब पापा ने अपनी गति को बदलने का फैसला किया।
मम्मी के संतुष्ट होने के बाद पापा ने अपनी स्पीड अचानक से बढ़ा दी।
अब उनके झटके तेज और गहरे हो चुके थे।
तेज रफ्तार की वजह से पापा की सांसें बुरी तरह फूलने लगी थीं और उनके हांकने की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
पापा ने पूरी ताकत समेटकर बहुत तेज-तेज चोदना शुरू किया।
मॅाम डैड Xxx से उनका पूरा शरीर पसीने से तर हो चुका था।
कुछ ही सेकंड्स के अंधाधुंध झटकों के बाद, पापा एक जोरदार झटके के साथ मम्मी के ऊपर ही टिक गए।
उन्होंने अपना सारा पानी कंडोम के अंदर ही छोड़ दिया।
कुछ मिनटों तक पापा उसी अवस्था में मम्मी के ऊपर लेटे रहे, अपनी सांसों को काबू करते रहे।
फिर उन्होंने धीरे से अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला, बेड के किनारे होकर कंडोम उतारा और उसे ठिकाने लगाया।
इसके बाद दोनों ने चुपचाप अपने-अपने कपड़े वापस पहने।
कमरे में एक बार फिर वही पुराना सन्नाटा और शांति छा गई, और दोनों आराम से सो गए।
मैं अपने खड़े होते लंड को सहला रहा था.
कैसी लगी मेरी आँखों देखी मॅाम डैड Xxx कहानी?
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