प्यासी मदमस्त पड़ोसन की चुदाई

Views: 2 Category: Padosi By pk95295@gmail.com Published: August 27, 2026

न्यूड भाभी Xxx कहानी में मेरे किराये के घर में ऊपर एक परिवार रहता था. उस घर की भाभी मुझ पर डोरे डाल कर सेक्स का मजा लेना चाह रही थी. मैं भी उसे चोदना चाहता था.

फ्रेंड्स, आपको मेरी पहली सेक्स कहानी
पड़ोसन अपने ससुर से चुदकर माँ बनी
काफ़ी पसंद आयी.
आपके मेल मिले, जिसके लिए आप सभी का आभार.

आज मैं आप सबके सामने 2013 की एक मस्त न्यूड भाभी Xxx कहानी लेकर आया हूं.

उस समय मेरी शादी को 6 महीने ही हुए थे.
मुझे अपनी जॉब के चलते अपने परिवार से अलग रहना पड़ रहा था.

मेरी बीवी भी जॉब करती थी इसलिए हम दोनों ही साथ में अपने घर से अलग शहर में रहने लगे थे.

मैं रोज सुबह 7 बजे के करीब घर से निकल जाता था.
मेरी बीवी दस बजे अपने काम पर जाती और वह 7 बजे घर आती थी.

मैं दोपहर में एक बजे तक आ जाता था.

उस मकान में हमसे पहले दो परिवार और रहते थे.
नीचे वाले तल पर एक अग्रवाल परिवार रहता था.
उस परिवार में मियां बीवी और तीन बच्चे रहते थे.
इस कहानी में इनसे कोई मतलब नहीं है

पहली मंजिल पर हम दोनों रहने लगे थे.
मेरे ऊपर की मंजिल पर एक सोनी परिवार रहता था.

इसी परिवार में रहने वाली मां बेटी दोनों से मेरे शारीरिक संबंध बन गए थे.
हालांकि आज इधर मैं उस लड़की की चर्चा नहीं करूंगा, बल्कि उसकी माँ के साथ किस तरह से मेरे सेक्स संबंध बन गए, उसको लिख रहा हूँ.
तब भी लड़की के बारे में थोड़ा लिख रहा हूँ.

लड़की की उम्र 22 साल की थी, लेकिन उसका शरीर एकदम दुबला पतला सा था.
उसके जिस्म में कुछ भी गदराया हुआ नहीं था.
उसके स्तन भी अभी उभर नहीं पाए थे.
बस वह गोरी बहुत थी.

उसकी मां 40-42 साल की रही होगी.
वह भी एकदम दूध सी गोरी थी.
उसका शरीर 36-34-38 का मस्त भरा हुआ था.
उसे देख कर ही मेरे लंड में हरकत होने लगती थी.
उसका नाम मैंने गुलाबो रख लिया था.

गुलाबो किसी स्कूल में पढ़ाने जाती थी.

उसका एक लड़का भी था जो 18 साल का हो गया था.
वह स्कूल में पढ़ता था.
वह ग्यारह बजे जाता था और शाम को वापस आता था.

मां सुबह अपने स्कूल के लिए निकल जाती थी और एक या दो बजे तक वापस आ जाती थी.

एक दिन छुट्टी का दिन था.
मेरे साले की बेटी आई हुई थी.

मेरी बीवी, मैं और उसके भाई की लड़की बैठे हुए थे.
मैं घर में सिर्फ अंतर्वस्त्र में रहता था.

मज़ाक में मेरी बीवी ने मेरा जांघिया नीचे कर दिया जिससे मेरा लंड बाहर निकल आया और उस वक्त की कामुक बातों के चलते मेरा लंड तनाव में था तो वह बाहर निकल कर नाग की तरह फनफनाने लगा.

उसी समय ऊपर वाली गुलाबो कहीं जा रही थी.
उसने जैसे ही मेरा काला लंबा मोटा खड़ा लंड देखा, जो चारों तरफ से झांटों से घिरा हुआ था.

लंड देख कर गुलाबो की आंखों में चमक आ गई.
वह एक पल को ठिठकी और अपने होंठों पर जीभ फेरने लगी.
साथ ही वह अपने होंठों को दांतों में दबा कर काटने लगी.

ऐसी ही चमक मेरी बीवी की भतीजी की आंखों में थी.
उसने भी यही किया.

वह तो खुल कर बोलने भी लगी- अब इससे बुआ को चोद दो फूफा जी.
मेरी बीवी हंसने लगी.

मैंने अपनी बीवी को उसकी भतीजी के सामने ही गोदी में उठाया और कमरे में चला गया.

यह सब देख कर गुलाबो भी हंस दी और वह ऊपर अपने घर चली गई.
उस समय मेरी उम्र 25 साल की थी.
जवान जिस्म देख कर किस प्यासी लड़की का जी नहीं ललचाएगा.

गुलाबो के साथ यही हुआ, अब वह किसी ना किसी बहाने से मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करने लगी थी.

एक दिन वह अपनी मंजिल के जाल पर खड़ी थी.
उस समय उसने मैक्सी के अलावा कुछ भी नहीं पहना था जिस वजह से उसकी चूत, स्तन सब साफ दिख रहे थे.

ये सब काम वह जानबूझ कर कर रही थी.
उसकी चूत के इर्द गिर्द उगी हुई झांटें भी मुझे साफ दिख रही थीं क्योंकि उस समय वह बिल्कुल मेरे ऊपर खड़ी थी और अपनी मैक्सी को घुटनों तक उठा कर चूत दिखाने की कोशिश कर रही थी.

मैं उसकी चूत देख कर गर्म हो गया और अपने लौड़े को सहलाने लगा.
तभी मेरी बीवी सामने आ गई तो मैं गुलाबो की चूत को याद करता हुआ उसे अपनी गोदी में उठा कर कमरे में ले गया और उसे नंगी करके चोद दिया.

ऐसे ही एक दिन और हुआ.
उस दिन गुलाबो बड़ी सुबह नहा रही थी.
उस समय सब सो रहे थे.

सुबह की पौ नहीं फटी थी तो अंधेरे में वह बिंदास नहा रही थी और मैं सब कुछ देख रहा था.

उसने पहले स्नानकक्ष का दरवाजा आधा बंद कर रखा था, जिससे वह नंगी दिख रही थी.
इसके बाद उसने नहा कर जब बाहर कदम रखा, तो एकदम निर्वस्त्र ही बाहर निकल आई.

आह … उसका गोरा मखमली भीगा शरीर देख कर मेरी आंखें चुँधिया गईं.
उसके पैरों में पायल बज रही थी.

उसने उसी समय ऊपर देखा तो मैं उसे वासना से देख रहा था.
उसने मुझे अपने नंगे शरीर को घूरते हुए देख लिया था लेकिन तब भी उसने अपने जिस्म को ढकने का प्रयास नहीं किया.

अब तो उसे समझ आ गया था कि मैं भी उसके जिस्म को ताड़ता हूँ तो वह रोजाना उसी समय जानबूझ कर नंगी होकर नहाने लगी थी.

उस समय सब सो रहे होते थे, तो किसी के उठने का कोई सीन ही नहीं था.
अब तो वह अपने बाथरूम का दरवाजा पूरा खोल कर नहाने लगी थी.

मैं एक दिन सुबह जल्दी उठकर उसके नहाने आने का इंतजार करने लगा.
वह कमरे से बाहर आई तो उसकी पायल की छन छन से मुझे पता लग गया कि अब वह नहाने जा रही है.

मैंने देखा तो मेरा मुँह खुला का खुला ही रह गया.
वह कमरे के अन्दर से ही पूरी नंगी होकर आई थी.

वह सीधे बाथरूम में गई और दरवाजा खुला छोड़ कर शॉवर के नीचे खड़ी होकर अपना शरीर भिगोने लगी.

उसके नहाने से आवाज गूंजने लगी.
उसकी चूड़ी की खन खन, पायल की छन छन और पानी के गिरने की आवाज के साथ साथ उसके गुनगुनाने की आवाज भी आने लगी थी.

मैं उसको पूरी नंगी होकर नहाते हुए देख रहा हूँ, ये उसे पता था.
अब वह पीढ़े पर बैठ गई और झांटें साफ़ करने लगी.

उसके बाद वह अपनी चूत में उंगली की मदद से तेल लगाने लगी और उंगली अन्दर बाहर करने लगी.
फिर उसने एक नकली लंड लिया और उसे अपनी चूत में अन्दर बाहर करने लगी.

उसकी आंखें मस्ती से बंद हो गई थीं और वह मेरा नाम लेकर बोल रही थी ‘आह चिराग … आजा मेरे सांड और अपने लंड से मेरी चूत को फाड़ दो!’

मुझे समझ में आ गया कि आज इसके घर में शायद कोई नहीं है, इसी लिए ये इतनी चुदासी होकर मस्ती कर रही है.

मैंने सोचा कि मैं ऊपर से आवाज लगा कर उससे कह दूँ कि मैं आ रहा हूँ.
पर मेरे घर में तो मेरी बीवी थी.
यदि वह जाग जाती तो गड़बड़ हो सकती थी.

इस तरह से अब गुलाबो हर दिन मुझे उसके नंगे जिस्म के दर्शन कराने लगी थी.

एक दिन की बात है, वह रोजाना की तरह नंगी नहा रही थी और मैं भी रोज की तरह उसे नंगी नहाते हुए देख रहा था.
उसे देख कर मैं अपना काला फनफनाता हुआ लंड बाहर निकाल कर मुठ मारने लगा.

ये देखते ही उसने अपने एक हाथ से अपने दूध और दूसरे हाथ से अपनी चूत ढकनी चाही, जिसमें वह असमर्थ थी.
उसने नंगी खड़ी होकर अपना स्नानकक्ष का दरवाजा बंद कर दिया.
मुझे हैरानी हुई कि ऐसा क्यों किया इसने?

फिर जैसे ही मैं उधर से जा रहा था, तभी मैंने देखा कि उसका लड़का नींद से जाग गया लग रहा था.
अब मुझे समझ में आया कि गुलाबो ने अपने लड़के की वजह से अपने दूध व चूत को ढकने का काम किया था.

मतलब उसे मेरी वजह से कोई दिक्कत नहीं थी.
हालांकि उसने मेरी आंखों से आंखें मिलाई थीं तो यह दिखाने का प्रयास किया था कि उसने मेरी वजह से अपनी नंगी देह को छुपाने का काम किया था.

अब उससे आंख मिलाने का मेरा साहस नहीं हो रहा था.
उसके हाथ मेरी यह कमज़ोरी लग गई थी.

एक दिन की बात है.
मैं अपने काम पर चला गया था.

मैं रोज की तरह मकान की एक चाभी अपने साथ ले जाता था पर उस दिन ले जाना भूल गया.

तभी मेरी बीवी का फोन आया कि चाभी ऊपर वाली भाभी से ले लेना.
मैंने पूछा- क्यों?

तब वह बोली कि आप चाभी ले जाना भूल गए थे.
मुझे याद आया तो मैंने ओके कह दिया.

मैं गुलाबो के घर जाकर चाभी मांगने गया.
उस समय वह नहाने के बाद अन्दर कमरे में जा रही थी.
वह जाल पर पूरी नंगी चल रही थी और मेरे आवाज लगाने से वह हड़बड़ा कर गिर गई और उठ नहीं पाई.

तभी उसका लड़का बाहर आया और अपनी मां से बोला कि आपको शर्म नहीं आती, आप इतनी बड़ी होकर बाहर नंगी निकलती हो.
तभी उसने देखा कि सामने का दरवाजा खुला हुआ था, जहां से सब उसे नंगी देख रहे थे.

उसी वक्त मेरी बीवी भी आ गई.
वह उस दिन अपनी कोई फाइल भूल गई थी तो वह लेने आई थी.
मैंने अपनी बीवी को देखा तो मैं जरा अलग हो गया.

मेरी बीवी उसके घर में अन्दर जाकर उसको उसके लड़के के साथ उठाने लगी और उसे उसके कमरे में ले गई.
फिर मेरी बीवी अपने काम पर चली गई.

उस दिन बात आई गई हो गई.

अगले दिन मैं काम से घर पहुंचा और देखा कि उसके घर का दरवाजा खुला था.

मैं अपनी मंजिल से ऊपर वाली मंजिल गया तो देखा कि उसके अंतर्वस्त्र कमरे के बाहर इधर उधर पड़े हैं.
उसने मुझे देख कर कहा- अन्दर आ जाओ.

मैंने उसे ध्यान से देखा तो उसने अपने अंग पर एक कपड़ा भी नहीं पहना था, सिर्फ एक चादर से अपने आप को ढक रखा था.

उसने वासना से कहा- आ जाओ. मेरी ले लो.
मैंने कहा- नहीं, ये ठीक नहीं है.

‘अच्छा अपने कपड़े तो उतार लो!’ यह कह कर उसने चादर हटा कर मुझे अपनी जवानी दिखाई.
अब मैंने अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिए.

मैंने पहले अपनी शर्ट उतार कर एक तरफ रख दी फिर पैंट उतार दी.
वह इठला कर बोली कि बनियान भी उतार दो.

मैंने उतार दी.
अब मैं सिर्फ़ जांघिया में था.

उसने कहा- मुझे पेशाब लगी है.
मैं बोला कि अब कैसे जाओगी.
‘तुम मुझे सहारा देकर ले चलोगे!’

जैसे ही मैंने उसे हाथ पकड़ कर उठाया उसने अपने बदन के ऊपर जो चादर ओढ़ रखी थी, वह नीचे ज़मीन पर गिर गई.
वह मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी.
उसके बड़े बड़े स्तन, उन पर काले रंग के चूचुक एकदम तने हुए थे. नीचे नजर गई तो चूत पर घनी झांटें थीं.

मेरे सामने उसकी पूर्ण गोरी चमकती काया निर्वस्त्र दिख रही थी.
उसने कहा- ऐसे क्या देख रहे हो, आज तक कोई नंगी औरत नहीं देखी क्या?

मैंने कहा- देखी तो बहुत बार है.
वह बोली- हां, मैंने ही अपने नंगे जिस्म के दर्शन कई बार कराए जानबूझ कर! अब मुझे ले चलो पेशाब करवाने.

मैंने उसे सहारा दिया, तो मेरा हाथ कभी उसके स्तन पर, तो कभी कूल्हे पर लग जाता.
कभी मैं जानबूझ कर अपना हाथ उसकी चूत के पास तक पहुंचा देता.

वह मेरी तरफ देख कर पेशाब करने लगी उसकी पेशाब की बूंदों से उसकी झांटें गीली हो गई थीं.

उसका ध्यान मेरे लंड के पास था.
वह बोली- आज तक किसी औरत को पेशाब करते नहीं देखा क्या? चलो मुझे अब गोद में उठा कर ले चलो.

मैं उसको गोद में उठा कर ले जाने लगा उसको नंगी देख कर मेरा उसे चोदने का मन कर रहा था.
मैंने उसे पलंग पर लेटा दिया.

वो बोली- कोने में सरसों का तेल रखा है, मेरे बदन की मालिश कर दो. मेरे शरीर में दर्द हो रहा है.

मैंने तेल उठाया और उसके पैरों से मालिश करने की शुरुआत कर दी.

वह अपने एक पैर से मेरे लंड को खड़ा करने लगी.
मैं चुपचाप उसके बदन को सहलाता रहा और फिर उसे पलट कर उसकी गांड में तेल लगाने लगा.
फिर पीठ, कमर, कंधे की मालिश करने लगा.

उसके कंधे की मालिश करते समय मैं उसके आगे था.
उस वजह से उसका मुँह मेरे लंड पर लगने लगा, जो अभी जांघिया में था और खड़ा हो गया था.

उसने देर न करते हुए मेरा जांघिया अपने हाथ से नीचे कर दिया और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.
मैं उसके मुँह को चोदने लगा और कुछ ही देर में मैंने उसके मुँह में ही अपना वीर्य छोड़ दिया.

वह सारा वीर्य पी गई और बोली- आज तक किसी ने भी इस तरह अपना स्वादिष्ट वीर्य मुँह चोदते हुए नहीं पिलाया था.
मैं भी उसकी चूत के पास मुँह लगा कर उसकी चूत को जीभ से चोदने लगा.

मैं अपनी जीभ को चूत के काफी अन्दर तक डाल कर उसे चोदने लगा था.
वह भी वासना से तप्त होकर मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत के अन्दर घुसाने लगी.

वह गाली देती हुई बोली- आह साले … और चाट मेरी चूत को! आह.
कुछ देर बाद उसने अपना स्वादिष्ट चूत रस मेरे मुँह में भर दिया.

मुझे उसका रस बहुत अच्छा लगा.
अब मैं उसके दूध पीने लगा.

उसके रसभरे उरोजों को पकड़ कर मैं अपने एक हाथ से एक दूध निचोड़ने लगा और दूसरे दूध को अपने मुँह में दबा कर चूसने लगा.
कभी मैं उसके चूचुक को अपने दातों से काट देता, तो वह आह कर उठती.

कुछ देर बाद वह मेरे सर पर हाथ फिराती हुई अपने दूध चुसवाती हुई बोली- आह … आज तक किसी ने भी इस तरह से मेरे मम्मों का दुग्ध पान नहीं किया था. आह आज तुम मेरा सारा दूध पी जाओ.
मैं बोला- हां साली आज तो तेरे दोनों दूध काट कर खा जाऊंगा.
वह बोली- जो भी करना है मन भर कर कर लो, बस अब और मत सताओ मुझे. पहले एक बार तुम अपना लंड जल्दी से मेरी चूत में पेल कर मुझे चोद दो.

मैंने भी देरी ना करते हुए उसकी चूत द्वार पर अपना शिश्न मुंड रखा और एक ही बार में उसकी चूत में लंड का प्रवेश करवा दिया.
क्योंकि उसकी चूत रस से गीली थी इसलिए लंड एक ही शॉट में अन्दर घुसता चला गया था.

न्यूड भाभी Xxx का मज़ा लेने लगी थी.
वह बोली- आज तक किसी ने मुझे सही से चुदाई का मज़ा नहीं दिया है. आज तुम मुझे भरपूर चोद दो और मेरी चूत को फाड़ दो.

काफी देर तक उसकी चूत में लंड को आगे पीछे करने के बाद मैंने अचानक से रफ्तार पकड़ ली और जब तक वह कुछ समझ पाती, मैंने अपना लंड चूत से बाहर खींच कर सारा वीर्य उसकी चूचियों और पेट पर निकाल दिया.
उसने भी गहरी सांस लेकर एक मुस्कान भरी और उठ कर बड़े प्यार से मेरा लंड अपने मुँह से चूस कर साफ़ कर दिया.

फिर वह मेरे लौड़े को वापस खड़ा करके मेरे ऊपर आ गई और मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर दोनों टांगों को दोनों फैला कर खड़े लंड पर बैठ गई.
मैं उसकी चूत के दाने के रगड़ने लगा था तो वह मस्ती से मेरे लौड़े पर उछल उछल कर लंड को अन्दर बाहर लेने लगी.

काफी देर बाद वह पुनः स्खलित हो गई.
मगर मैं अभी नहीं झड़ा था तो मैंने उससे कहा- लंड अभी झड़ा नहीं है.

वह मुस्कुराने लगी तो मैंने उसकी गांड पर हाथ फेर दिया.
वह डर गई और बोली- नहीं, इसे छोड़ दो.

मैंने अपने मन में उसकी गांड मारने की पूरी तैयारी कर ली थी.
इसलिए मैं नहीं माना और मैंने उससे कहा- अब तुम कुतिया बन जाओ!
वह बोली- प्लीज उधर मत करना. आगे ही पेलना.

मैंने कुछ नहीं कहा.
बस जैसे ही वह घोड़ी बनी मैंने पोज सैट करके करके एक ही झटके में अपना काला लंबा मोटा खड़ा लंड उसकी गांड में घुसेड़ दिया और उसे चोदने लगा.

गांड में लंड लेते ही उसकी चीख निकल गई.
वह पहले तो दर्द से कराहती थी.

मगर बाद में उसे मजा आने लगा तो वह अपनी कमर को आगे पीछे करती हुई कहने लगी- आह बड़ा मजा आ रहा है … फाड़ दो मेरी गांड!

कुछ देर बाद मुझे भी उसके दूध मसलते हुए उसकी गांड चोदने में मज़ा आने लगा.

मैंने पूछा- मजा आ रहा है न!
वह बोली- हां … और जोर जोर से चोदो!

कुछ देर बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसके मम्मों के ऊपर छोड़ दिया.
उसने लंड पकड़ कर मुँह में ले लिया.

दोस्तो, मुझे अभी तक इस बात का अहसास नहीं हुआ था कि ये सब करते हुए मुझे कोई देख रहा था.

जब हम दोनों शांत हुए तो मैंने एक आहट सुनी और ध्यान दिया तो पाया कि उसकी लड़की छुप कर अपनी आंखों से एक उन्मत्त पुरुष और कामपिपासु स्त्री का सम्भोग देख रही थी.

यदि आप जानना चाहते हैं कि आगे क्या हुआ, तो प्लीज मुझे मेल करके जरूर बताएं.
मैं कोशिश करूंगा कि अगली सेक्स कहानी में आपको डिटेल में बताऊं.

तब तक के लिए मजा लेते और देते रहिए … मुझे न्यूड भाभी Xxx कहानी पर अपने विचार मेल में लिखना न भूलें.
धन्यवाद.
pk95295@gmail.com

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