प्यासी चाची की चुत में भतीजे का लंड

Views: 2 Category: First Time Sex By grawal84 Published: August 29, 2026 📖 10 min read
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चाची की चूत का मजा मिला मुझे. उनसे मेरी दोस्ती थी, हम खेत में ट्युबवेल पर एक साथ नहाते थे तो चाची मेरे कच्छे में मेरे लंड को देखती थी.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राहुल (बदला हुआ) है और मेरी उम्र 21 वर्ष है.

आप सभी का मेरी देसी चाची सेक्स कहानी में स्वागत है.
यह सेक्स कहानी आज से चार साल पहले की है और यह मेरे जीवन की पहली चुदाई थी जिसमें मुझे चाची की चूत का मजा मिला.

उसके बाद मैंने बहुत लड़कियों को चोदा है, जिनकी कहानी मैं बाद में कभी बताऊंगा.

आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपनी चाची के बारे में बता देता हूँ.
उनका नाम कविता है. चाची की उम्र 31 वर्ष है और उनका फ़िगर 36-32-38 का है.
वे दिखने में बहुत सेक्सी हैं और मुझे तो वे विद्या बालन जैसी गदराई हुई माल लगती हैं.

मैं हर समय उनके साथ रहने का मौका ढूँढता रहता था और उन्हें चोदना चाहता था.
गर्मियों के दिनों में खेत में जाकर मैं अक्सर ट्यूबवेल के नीचे नहाया करता था.

खेतों में नहाते वक्त कभी कभी चाची भी साथ होती थीं और मेरी उनसे अच्छी बनती थी इसलिए वे भी मेरे साथ में नहाने लगती थीं.

ऐसे ही एक दिन चाची मेरे साथ नहा रही थीं.
नहाते समय वे कपड़े पहनी हुई थीं.
पानी से भीग जाने के कारण चाची के कपड़े उनके शरीर पर चिपक गए थे.

चाची ने उस दिन पीली साड़ी ब्लाउज पेटीकोट पहना हुआ था.
भीगने से उन्होंने अन्दर जो काली रंग की ब्रा पैंटी पहनी थी, वह एकदम साफ़ दिखाई देने लगी.

चाची की मोटी गांड और चूचे देख कर मैं पागल सा हो गया.
नहाते नहाते मैं जानबूझ कर पानी के अन्दर जाकर चाची की गांड पर हाथ मार दे रहा था.

चाची खिलखिला कर मस्ती करने लगी थीं और मेर ऊपर पानी फेंकने लगी थीं.
तो मुझे समझ में आ गया था कि आज चाची मूड में हैं.

इस सबके कारण मेरा 7 इंच का लंड खड़ा हो गया था.

उस वक्त मैंने सिर्फ जांघिया पहना हुआ था, तो वह भी भीग कर मेरे लंड से चिपक गया था.
अब मेरा खड़ा लंड ऊपर से ही तना हुआ साफ नजर आने लगा था और लंड ने जांघिया में खास उभार बना दिया था.

चाची की भी नजर मेरे लंड पर चली गई.
वे मेरे कड़क लंड को देख कर मुस्कुरा दीं और छिपी नजरों से मेरे लौड़े को निहारने लगी थीं.

मैं समझ गया था कि चाची को मेरा लंड पसंद आ गया है.
तब भी मैं अनजान बना रह कर चाची के साथ अठखेलियां करता रहा.

चाची को भी अब मेरे साथ मस्ती करने में मजा आने लगा था और यह भी कोशिश कर रही थीं कि वे मेरे लंड को पकड़ कर उसकी सख्ती का अहसास कर सकें.
फिर थोड़ी देर बाद चाची पानी से बाहर चली गईं.
मैं उन्हें जाते हुए देख रहा था.

वे अपनी गांड हिला हिला कर चल रही थीं और शायद मुझे उत्तेजित कर रही थीं.
मेरा मन तो कर रहा था कि अभी यहीं चाची को पकड़ कर चोद दूँ.

लेकिन इतनी जल्दी संभव नहीं था.

उनके जाने के बाद मैंने पानी में रह कर ही दो बार मुठ मारी और बाहर आ गया.
अब हर समय मेरे मन में उन्हें चोदने के ख्याल चलते रहते थे और रात को उन्हें याद करके मुठ मरकर सोता था.

फिर एक दिन जब मैं और चाचा खेत में गए हुए थे.
उस दिन चाची घर पर ही थीं.

कुछ देर बाद चाचा ने कुछ सामान लाने के लिए मुझे वापस घर भेज दिया.

जब मैं चाचा के घर गया तो उनके बच्चे स्कूल जा चुके थे.
घर में सिर्फ चाची ही थीं.

मैंने अन्दर जाकर देखा तो चाची कहीं दिख नहीं रही थीं.

जब मैं कमरे की तरफ़ गया तो अन्दर से कामुक आवाजें आ रही थीं और कमरे का दरवाजा खुला था.
मैंने धीरे से दरवाजा खोला तो अन्दर का नजारा देख कर मैं हैरान रह गया.

चाची अन्दर बेड पर पूरी नंगी लेटी हुई थीं और वे अपनी टांगों को पूरा खोल कर अपनी चूत में उंगली कर रही थीं.
उस वक्त वे इतनी मस्ती में थीं कि उन्हें पता ही नहीं चला कि मैं उन्हें देख रहा हूँ.

मैंने चुपके से उनकी वीडियो बना ली.
फिर मैंने जानबूझ कर थोड़ा पीछे हटकर उन्हें आवाज़ लगाई तो वे अचानक से उठकर कपड़े पहन कर बाहर आ गईं.

वे मुझे देख कर बोलीं- राहुल तुम तो खेत में गए हुए थे? इतनी जल्दी कैसे आ गए?
उस समय मेरा लंड खड़ा था और लंड का उभार साफ़ नज़र आ रहा था.

मैंने हंसकर कहा- चाचा ने कुछ सामान लेने भेजा था लेकिन आप तो कुछ और काम में ही व्यस्त थीं!
यह सुनकर चाची शर्मा गईं, वे समझ चुकी थीं कि मैंने सब देख लिया है.

वे कुछ नहीं बोलीं और सामान निकालने लगीं.
मैं सामान लेकर वापस चला गया.

अब मैंने उन्हें चोदने का पूरा प्लान बना लिया था.
अगले दिन जब चाचा खेत चले गए तो मैं उनके घर आ गया.

चाची उस समय नहा रही थीं तो मैं टीवी पर फ़िल्म देखने लगा.

थोड़ी देर में चाची आईं और मुझे देख कर बोलीं- अरे तू कब आया?
मैंने कहा- देर हो गई.

वे बोलीं- चाय पियोगे?
मैंने हां कह दी.

वे किचन में गईं और दो कप चाय ले आईं.
वे मेरे साथ बैठकर चाय पीने लगीं और हम दोनों बातें करने लगे.

बातें करते करते मैंने उनसे पूछ ही लिया- आप कल क्या कर रही थीं?
वे कुछ नहीं बोलीं और उदास होकर बैठ गईं.

मेरे बार बार पूछने पर चाची बोलीं- तुम ही बताओ मैं क्या करूँ, तुम्हारे चाचा तो कुछ करते ही नहीं हैं … मैं अपनी प्यास कैसे बुझाऊं? जब घर पर कोई नहीं होता तो मैं अपने आप को शांत कर लेती हूँ.
मौके फायदा उठाते हुए मैंने कहा- चाची, यदि मैं आपके किसी काम आ सकता हूँ तो प्लीज बता देना.

चाची ने वासना भरी नजरों से मुझे देखा और धीरे से बोलीं- हां तुझसे तो मुझे काफी उम्मीद है.
मैंने अपने लंड को रगड़ते हुए उन्हें लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा- मेरा छोटू हमेशा आपकी सेवा करने के लिए रेडी है कविता चाची.

वे मेरे लंड को देखती हुई बोलीं- तो देर किस बात की है?
मैंने आगे बढ़ कर चाची के होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

चाची ने कोई विरोध नहीं किया और हम दोनों बेताबी से किस करने लगे.
थोड़ी देर बाद वे पीछे को हट कर बोलीं- यह सब ग़लत है राहुल, किसी को पता चलेगा तो मैं बदनाम हो जाऊंगी!

मैंने कहा- न आप किसी से कुछ कहने वाली हो और न मैं किसी से कुछ कहूँगा, पक्का वादा है!
यह कह कर मैंने फिर से उनके होंठ चूमने शुरू कर दिए और इस बार वे भी मेरा साथ देने लगीं.

अब मैं उनके बूब्स दबाने लगा, जिससे वे भी उत्तेजित हो गईं और उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए.
अब वे मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थीं.

उन्हें यूं देख कर मैं पागल हो गया और मैंने उनकी ब्रा पैंटी भी उतार दी.
चाची सम्पूर्ण रूप से नंगी हो गई थीं. मैं पागलों की तरह उन्हें चूमने लगा, जिससे वे भी उत्तेजित हो गईं.

चाची बोलने लगीं- अब नहीं रुका जाता, जल्दी से मेरी प्यास बुझा दो.
मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया और अपने कपड़े उतार दिए.

मैं कभी उनके बूब्स चूसता तो कभी चूत चाटता.
चाची पागल हुई जा रही थीं और कामुक आवाजें निकाल रही थीं.

‘उंह … आँह … चाटो मेरी चूत खा जाओ इसे आँह…!’
वे अपने हाथों से मेरे सर को पकड़ कर चूत में घुसा रही थीं.

मैं भी किसी भूखे कुत्ते की तरह अपनी चाची की चुत की पुत्तियों को अपने मुँह में दबा दबा कर खींचता हुआ चूस रहा था.

चाची की मादक आहें निकल रही थीं और मेरे बालों को पकड़ कर नीचे से अपनी गांड उठाती हुई अपनी चुत को मेरे मुँह से रगड़वा रही थीं.

मस्ती का आलम छाया हुआ था.

थोड़ी ही देर में चाची जोर जोर से चिल्लाने लगीं- आह .. उन्ह… खा जा आह!

यह कहते हुए चाची ने मेरे सर को पैरों में दबा लिया और उसी वक्त उनकी चूत से पानी निकल आया था, जिसे मैं चाटता चला गया.
कुछ ही पल बाद चाची ने मुझे धक्का देकर बेड पर गिरा दिया और मुझे वासना से देखने लगीं.

मेरे मुँह में चाची की चुत का रस लगा हुआ था और मैं बेहद ही नशीला सा लग रहा था.
उन्होंने मेरा मुँह अपने मुँह से चाटना शुरू कर दिया और खुद अपनी ही चुत के रस को चाट कर मेरे मुँह को साफ करने लगीं.

मैं चाची के मम्मों को अपने हाथों से भर कर मींज रहा था.
मेरा लंड नब्बे डिग्री पर खड़ा होकर चाची के पेट से लग रहा था.

उन्होंने लंड को हाथ से पकड़ा और मुझे देखती हुई लौड़े को सहलाने लगीं.

मैंने उन्हें अपनी आंखों से इशारा किया कि लंड को चूस लो, तो चाची ने पोजीशन बनाई और मेरे लौड़े को अपने मुँह में भर कर चूसने लगीं.
मैं तो जैसे स्वर्ग में विचरण करने लगा था.

कुछ ही देर में चाची मेरे लंड को अपने गले गले तक ले रही थीं और टट्टों को हाथ से सहला रही थीं.
मैं भी अपने एक हाथ से उनके एक दूध को मसल रहा था और दूसरे हाथ से चाची के सर को लंड पर दबाए जा रहा था.

चाची ने अचानक से लंड को मुँह से निकाला और जीभ से सुपारे को चाटती हुई मेरी तरफ देखने लगीं.
मैंने कहा- मजा आया?

वे हंस कर बोलीं- तेरा लंड तो बहुत बड़ा है … लेकिन अब मुझसे रुका नहीं जाता. प्लीज जल्दी से मेरी प्यास बुझा दो.
मैंने उन्हें लेटा दिया और पोज बना कर उनके ऊपर चढ़ गया.

मैं उनकी चूत पर लंड रगड़ने लगा, जिससे वे पागल होती जा रही थीं.
चाची मदहोशी में बोल रही थीं- अब जल्दी से डाल दो न … क्यों तड़पा रहे हो.
चाची काफ़ी समय से लंड की भूखी थीं और मुझे उन्हें तड़पाने में मज़ा आ रहा था

जब मैंने चाची की चुत में लंड नहीं पेला तो उन्होंने मेरे मुँह पर एक थप्पड़ मारा और गाली देकर बोलीं- जल्दी अन्दर डाल मादरचोद!
मैंने गुस्से में आकर लंड के सुपारे को धक्का दे दिया और एक ही झटके में अपने लंड को चाची की प्यासी चुत में काफी अन्दर तक घुसेड़ दिया.

चाची एकदम से चिल्ला दीं- आह … आराम से डाल न!
अब मैंने उनकी बात को अनसुना किया और अपने लंड को पूरा बाहर निकाल कर फिर से ज़ोरदार धक्का मार दिया.

इस बार मैंने अपना पूरा सात इंच का मोटा लंड चाची की चूत में घुसेड़ दिया था.
चाची एकदम से मचल उठीं और मैंने झटके देने शुरू कर दिए.

कुछ ही झटकों में चाची को लज्जत मिलने लगी और वे तो मानो जन्नत में पहुँच चुकी थीं.
उन्होंने इससे पहले 7 इंच का लंड नहीं लिया था इसलिए चुत की जड़ तक लंड की ठोकरों से चाची की चुत भोसड़ा बनने लगी थी.

उस समय घर में कोई और ना होने के कारण वे भी खुलकर आवाजें निकाल रही थीं.
‘आह … चोदो मुझे … और ज़ोर से … ऊंह…!

करीब 20 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद तो चाची पागलों की तरह चिल्लाने लगी थीं.

उनके स्खलन का समय नजदीक आ गया था तो उनके कंठ से और भी जोरदार आवाज निकलने लगी थी ‘उँह … ऊंह … चोदो और ज़ोर से चोदो … आह फाड़ दो, आज से मैं तुम्हारी रखैल हूँ!’

मैं उनके मुँह से निकलती गालियों और कामुक बातों को सुनकर और ज्यादा उत्तेजित होता गया और मेरे लंड ने चाची की चुत में मानो सुनामी ला दी थी.

कुछ समय बाद चाची निढाल होकर मुझसे चिपक कर कांपने लगीं.

उनकी चुत झड़ गई थी और चूत से गर्म गर्म लावा बहने लगा था जो मेरे लवड़े को साफ साफ महसूस हो रहा था.

चाची की गर्मी से मेरे लंड से भी न रहा गया और मैं भी उनकी चुत के अन्दर ही झड़ गया.
चाची मुझे चूमने लगीं और उन्होंने मुझे अपने सीने से लगा लिया.

मैं भी चाची के बड़े बड़े मम्मों से अपनी छाती चिपकाए हुए तरावट ले रहा था.

उसके बाद तो यह चाची की चूत का मजा लेने का सिलसिला चलता ही रहा.
जब भी हम दोनों को मौका मिलता, हम दोनों खुल कर चुदाई कर लेते.

इसी बीच मैंने चाची की गांड भी मारी.

दोस्तो, आपको मेरी यह देसी चाची की चूत का मजा कहानी कैसी लगी, जरूर बताएं.
grawal84@yahoo.com

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