पीजी वाले अंकल ने मेरी गांड मार ली

Views: 4 Category: Gay Sex Stories By newy7650 Published: April 29, 2026

अंकल गे कहानी में मैं PG में रह कर पढ़ाई कर रहा था. एक शाम PG के मालिक मोबाइल में गे वीडियो देख रहे थे. उन्होंने मुझे गे सेक्स के बारे में बताया.
आज मैं आपको अपने जीवन के पहले समलैंगिक संबंध की सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ.
आप प्लीज अपने कमेंट करके जरूर बताएं कि मेरी गे सेक्स कहानी आपको कैसी लगी.

यह एक सच्ची कहानी है.

मेरा नाम पीयूष जैन है. मेरी उम्र 25 वर्ष है.

मैं अजमेर, राजस्थान का रहने वाला हूँ; अच्छी कद-काठी का और दिखने में भी अच्छा नौजवान हूँ.

यह कहानी आज से लगभग 4 साल पहले की है जब मैं 21 साल का था.
उस समय मुझे समलैंगिक संबंध के बारे में कुछ भी पता नहीं था.

बारहवीं के बाद मेरा चयन जयपुर के महाराजा कॉलेज में हो गया.
मैं अजमेर से जयपुर शिफ्ट हो गया और वहां एक पीजी में रहने लगा.
सब कुछ अच्छा चल रहा था.

एक दिन रात को कुछ काम से बाहर गया, उस मोबाइल में रात के एक बजे का समय हो रहा था.
हमारे पीजी के मालिक नरेंद्र जी बैठे-बैठे फोन में कुछ देख रहे थे.

जैसे ही उन्होंने मुझे देखा, वे हड़बड़ा गए और उनका फोन हाथ से नीचे गिर गया.

वे घबरा गए क्योंकि वह अपने फोन में दो लड़कों की सेक्स वीडियो देख रहे थे.

फोन जमीन पर पड़ा था और उसमें दो लड़के दिख रहे थे.
अंकल जी ने झट से फोन उठा लिया और उसे ऑफ कर दिया.

थोड़ी देर बाद उनकी घबराहट कम हुई और वे मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगे.

मैंने उनसे पूछा- अंकल, आप क्या देख रहे थे?
तो वे हंसने लगे और बोले- अरे बुद्धू तुझे इतना भी नहीं पता? दो लड़के भी एक साथ इतने मजे ले सकते हैं, जितने लड़का-लड़की साथ में नहीं ले सकते!

मुझे कुछ समझ नहीं आया.
मुझे दो लड़कों के सेक्स करने का तो पता ही नहीं था.

अंकल आर्मी से रिटायर थे.
वे 45 साल की उम्र में भी जवान लौंडे जैसे दिखते थे.
उनका बदन एकदम कड़ियल था, रंग गोरा, हट्टे-कट्टे मर्द थे.

मुझे उनके मुँह से ‘दो लड़के भी एक साथ इतने मजे ले सकते हैं.’ वाली बात सुनकर एकदम से कुछ सिहरन सी हुई.

साथ ही अंकल के शरीर को देखकर पता नहीं मुझे क्या होने लगा.
मेरे शरीर में एक अजीब सी झनझनाहट-सी होने लगी.

इतनी देर में उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- पीयूष तुम जब से आए हो, मुझे रात को नींद नहीं आती … बस तुम्हारा चेहरा ही आंखों में घूमता रहता है. मुझे तुम्हारी लेने का मन करता है, बहुत दिन हो गए किसी लड़के के साथ किए हुए … क्या तुम मेरी तमन्ना पूरी करोगे?

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ.
पर मुझे उनका इस तरह से हाथ पकड़ना बहुत अच्छा लग रहा था.

मैं भी उनकी आंखों में देखने लगा.

तभी उन्होंने झट से मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे होंठों पर एक गहरा चुम्बन दे दिया.
उनके गर्म होंठ जैसे ही मेरे होंठों पर लगे, शरीर में करंट-सा दौड़ गया.

फिर उन्होंने कहा- आज तुम मेरे साथ सो जाओ.
मैं मना नहीं कर पाया … मुझे भी उनके मर्दाने शरीर से अलग होने का मन नहीं कर रहा था.

उन्होंने मेरे कान में फिर से फुसफुसाया- देने को रेडी हो न!
मैंने हां में गर्दन हिलाते हुए कहा- ठीक है अंकल.

अब वे मुझे अपने कमरे में ले गए और मेरे होंठों पर फिर से किस करने लगे.
मैं भी उनका साथ देने लगा.

उनकी गर्म-गर्म सिसकारियां और मादक आवाज मेरे कानों में गूंज रही थी.
वे धीरे-धीरे मेरे कपड़े उतारने लगे और मैं उनका पूरा सहयोग दे रहा था.

अंकल मेरे बूब्स दबाने लगे.
मैं सिसकारियां भरने लगा.

मुझे ऐसा मादक अहसास पहले कभी नहीं हुआ था.

फिर अंकल ने अपनी शर्ट को भी उतार दिया.
करीब दस मिनट तक हम एक-दूसरे के बूब्स चाटते रहे.
मैं तो मानो अलग ही दुनिया में चला गया था.

फिर अंकल ने मेरी पैंट उतारी और चड्डी के ऊपर से ही मुझे निहारने लगे.
अंकल बोले- पीयूष, तू तो क्या मलाई चीज है यार, आज मैं तुझे नहीं छोड़ूँगा!

मैं उस समय इतने मादक अहसास में था कि मैंने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप बिस्तर पर लेटा रहा.
अंकल ने मेरी चड्डी भी खोल दी और मेरी कमसिन गोरी गांड को निहारने लगे.

वे मेरी गांड को सहलाते हुए कह रहे थे- आज तो मैं तेरी गांड को चोद कर इसका भोसड़ा बना दूँगा.
मैं गर्म सिसकारियां ले रहा था.

तभी अंकल ने मेरी गुलाबी टाइट गांड पर अपनी जीभ फेरना शुरू कर दी.

अब तो मुझसे सहन ही नहीं हो रहा था.
मैं बिन पानी की मछली की तरह तड़प रहा था.

तभी अंकल ने अपनी पैंट से मोटा लंड निकाला.
अंकल के लंड को देखकर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया और आंखें फैल गईं.

यह पूरा 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लौड़ा था.
मैंने ऐसा मोटा लंड कभी नहीं देखा था.

अंकल ने कहा- चूस ले मेरी रानी, तेरा ही है!
मुझे पहले थोड़ा अजीब लगा लेकिन अंकल के जोर देने पर मैंने उनका लंड अपने मुँह में ले लिया और जीभ से चाटने लगा.

अंकल मस्त होकर गालियां देने लगे- आह मस्त चाट रही है … आह साली पूरा लौड़ा चाट रंडी!

धीरे धीरे करके मैंने अंकल का पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया.

अंकल को चुदास चढ़ गई और वे जोर-जोर से धक्के मारने लगे.
कुछ ही देर में अंकल ने अपना सारा वीर्य मेरे मुँह में छोड़ दिया.

वे आह आह करते हुए बोले- पी जा पूरा रस रंडी … बहुत काम का माल है, सारा पी ले!
मैंने अंकल के लंड को चाट-चाटकर पूरा साफ कर दिया.

थोड़ी देर में अंकल का लंड फिर से खड़ा हो गया.

अब वे बोलने लगे- आज तेरी गांड का उद्घाटन भी कर ही देता हूँ.
मैं ये सब सुनकर हैरान हो गया और अंकल से हाथ जोड़कर कहने लगा- आपका इतना बड़ा लंड मेरी छोटी-सी कमसिन गांड में कैसे आएगा?

यह सुनकर अंकल जोर-जोर से हंसने लगे.
मैं डरने लगा.

तभी वे एक तेल की बोतल ले आए.
उन्होंने थोड़ा तेल अपने मोटे लंड पर लगाया और उसे मुठिया कर मुझसे बोले- हो गया न कड़क!

मैं हंस दिया.

अंकल ने थोड़ा तेल मेरी गांड में लगाया और उंगली से अन्दर तक चुपड़ दिया.

अब वे मेरी गांड में उंगली करने लगे. मुझे दर्द हो रहा था और अच्छा भी लग रहा था.

कुछ ही देर में अंकल ने मेरी गांड के छेद को उंगलियों से खोल दिया और बोले- अब चुदने के लिए तैयार हो जा मेरी चिकनी रंडी!
मैं घोड़ी बन गया.

अंकल ने अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रखकर सुपारे से गांड के छेद को घिसा तो मैं मस्त हो गया और मेरी गांड ढीली हो गई.
बस अंकल ने सुपारे को गांड के छल्ले में फंसाया और एक जोरदार दे धक्का दिया.

उनके लंड का पूरा सुपाड़ा मेरी गांड में चला गया.
मैं दर्द के मारे चिल्लाने लगा- अंकल प्लीज बाहर निकाल दो!

उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी और झटके देने लगे.

मैं दर्द के मारे रोने लगा लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.
वे जोर-जोर से मेरी गांड में अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगे.

इसी बीच अंकल तेल की बोतल से तेल को गांड और लंड के जोड़ में टपकाते भी जा रहे थे, तो लंड को अन्दर आने जाने में सहूलियत होने लगी थी और मेरी गांड का दर्द भी खत्म हो गया था.

धीरे-धीरे मुझे भी मजा आने लगा.
मैं उनका पूरा साथ देने लगा.

उन्होंने अपने पूरे लंड को मेरी गांड में डालकर छेद को फाड़ कर चौड़ा कर दिया था.

अंकल लगभग दस मिनट तक लगातार मेरी गांड को चोदते रहे और वे मेरे लंड की मुठ मारते रहे.
मैं मस्त हो गया था और झड़ गया था.

कुछ देर बाद अंकल जी भी मेरी गांड में ही झड़ गए और मुझसे अलग हो गए.

मुझे भी अपनी गांड चुदवा कर बहुत मजा आया था.
हालांकि गांड परपरा रही थी लेकिन अंकल ने झट से एक मलहम लगा दी थी तो कुछ ही देर में गांड में होने वाली जलन काफी हद तक ठीक हो गई थी.

अंकल ने मुझसे कहा- जानेमन, आज तूने मेरी सालों की इच्छा पूरी कर दी. जब भी तुझे किसी चीज की जरूरत हुआ करे, तो मुझसे बेझिझक कह दिया करो.
मैंने मुस्कुरा कर कहा- अब तो आपके लंड की जरूरत ही पड़ेगी!

अंकल ने मुझे अपनी बांहों में समेट लिया और बोले- चल तो अभी फिर से मजा करते हैं.

वे फिर से मुझसे लंड चुसवाने लगे और हम दोनों ने एक बार और गे सेक्स का मजा लिया.

मैं जब तक कॉलेज में रहा तब तक मैंने और अंकल ने कई बार सेक्स किया.
मैं स्ट्रेट से कब समलैंगिक बन गया, मुझे ही नहीं पता चला.

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी सच्ची गे सेक्स कहानी? उम्मीद है कि आपको पसंद आई होगी.
धन्यवाद.
newy7650@gmail.com

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