लव एंड सेक्स कहानी में मैं शुरू से अपने गाँव की एक लड़की को पसंद करता था. एक दिन उसने पहल करके अपने प्यार का इज़हार कर दिया. मैंने एकदम हाँ कर दी.
दोस्तो, मेरा नाम रवि है।
इस समय मेरी उम्र 30 साल है।
देखने में मैं बहुत हैंडसम और अच्छे दिल का आदमी हूं।
मेरे गांव में सभी लोग मुझे बहुत मानते हैं क्योंकि मैं गांव वालों का बहुत ख्याल रखता हूं।
क्योंकि गांव वाले कोई भी काम कहते थे तो मैं मना नहीं करता था।
लव एंड सेक्स कहानी 2011 की है जब मैं इंजीनियरिंग कर रहा था और सेकंड ईयर में था।
दशहरे पर मैं अपने गांव गया हुआ था जहां मेरा दिल और मेरी जान रहती थी।
नाम था उसका मोनिका।
वो देखने में बहुत खूबसूरत थी। उसका फिगर 36-28-36 था।
मैं बचपन से ही उसे चाहता था।
उस समय वो बीए कर रही थी और मैं इंजीनियरिंग।
मैंने इंजीनियरिंग से पहले बीएससी किया हुआ था।
दशहरे पर मैं जब घर गया तो पता लगा कि वो इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स कर रही है।
फिर मैंने भी उसको 3-4 उसके पापा के मोबाइल पर इंग्लिश में थॉट्स भेज दिए।
जब उसने पढ़ा तो मुझे फोन किया।
मैंने कहा, “इंग्लिश में सुविचार हैं, तुम्हारे काम आएंगे इसलिए भेजा हूं!”
वो कुछ नहीं बोली।
मैं उसको मैसेज करता रहा और वो भी मुझे रिप्लाई करती गई।
दशहरा खत्म हुआ और मैं 2 दिन बाद फिर अपने कॉलेज आ गया।
फिर एक दिन उसने मैसेज किया कि “मैं आपको बहुत पसंद करती हूं।”
और मैंने भी तुरंत रिप्लाई कर दिया कि “मैं तो तुमको बचपन से पसंद करता हूं।”
फिर धीरे-धीरे हम लोगों में खूब बातें होने लगी क्योंकि दोनों तरफ से प्यार का इजहार हो चुका था।
फिर हम लोग रात को 1 बजे तक बातें करते रहते थे।
अब मेरे मन में ये था कि कब दीपावली पड़े और मैं फिर अपने गांव जाऊं और उससे फेस टू फेस बात करूं।
फिर दीपावली आई।
मैं खुशी-खुशी घर गया।
दीपावली पर कुछ ठंड थी तो हम लोग शाल ओढ़ते थे क्योंकि अभी ठंड की शुरुआत थी।
एक दिन शाम को वो गांव से दूर एक बगीचे में गई जहां उसके दादा-दादी रहते थे।
बगीचे के चारों तरफ सिर्फ खेत थे।
इसलिए उस बगीचे को लोग कुटी कहते थे।
उसके दादा-दादी आग सेक रहे थे और वो जा कर उनके पास बैठ गई।
मैं भी शाम के समय अपना खेत देखने जाता था।
फिर मैंने भी सोचा कि क्यों न कुटी से होता चला आऊं और बूढ़े बाबा-दादी से मिलता चला आऊं।
लेकिन मुझे मालूम नहीं था कि मोनिका वहां है।
जब मैं वहां पहुंचा तो देखा मोनिका वहीं बैठी अपने दादा-दादी से बातें कर रही थी।
तो मैं बहुत खुश हुआ और वो मुझे देख कर शर्मा रही थी।
मैंने दादा-दादी के पैर छुए और मैं भी बातें करने लगा।
उन लोगों ने पूछा, “बाबू कब आए हो? पढ़ाई तो ठीक चल रही है न?”
तो मैंने भी जवाब दिया, “हां दादी! पढ़ाई तो बढ़िया चल रही है। कल शाम को आया हूं और दीपावली बिता कर अगले दिन चला जाऊंगा।”
जब मैं बातें कर रहा था तो मैं बिल्कुल मोनिका के बगल में बैठा हुआ था।
और मेरे सामने बुजुर्ग दादा-दादी बैठे हुए थे।
मोनिका ने शाल ओढ़ रखी थी और मैं भी।
आग धीरे-धीरे सिमटती चली जा रही थी लेकिन अपने शरीर में आग जलना शुरू कर दी थी।
मैंने उसको इशारा करके और नजदीक होने को कहा लेकिन वो नहीं हुई।
फिर मैं ही खिसक कर थोड़ा पास हो गया।
और अपने शाल से हाथ निकाल कर उसके शाल के अंदर डालने लगा।
उस समय सूर्य अस्त हो चुका था और अंधेरा हो रहा था।
जब मैं हाथ डाल रहा था तो वो मेरा हाथ बाहर कर रही थी।
लेकिन मैं नहीं माना और धीरे से उसके कान के पास जा कर बोला, “जो हो रहा है होने दो। अगर ज्यादा हिलोगी तो दादा-दादी को शक हो जाएगा कि कुछ गड़बड़ है!”
फिर वो शांत हो गई।
और मैं अपना हाथ उसके पीठ और गर्दन पर रख कर सहला रहा था।
धीरे-धीरे उसे भी अब अच्छा लग रहा था।
फिर मैंने धीरे से अपना हाथ पीठ से हटा कर आगे की तरफ लाना चाहा।
लेकिन वो लाने नहीं दे रही थी।
मैं उसके मम्मों को छूना और मसलना चाहता था।
लेकिन वो नहीं करने दे रही थी।
बस साइड से उसके मम्मों को मैं सहला पा रहा था।
उनको सहलाते-सहलाते ही मैं पूरा गरम हो चुका था।
लेकिन उसने मेरा हाथ आगे नहीं जाने दिया।
लेकिन मैं भी कहां मानने वाला था।
मैंने अपने मन में एक उपाय सोचा कि चाहे जैसे भी आज तो इसके मम्मों को मसल के रहूंगा।
फिर मैंने हाथ हटाया और अपने मोबाइल में टाइम देख कर मोबाइल वहीं छोड़ कर जाने लगा।
मैं थोड़ी ही दूर गया था जहां वो लोग मुझे न देख सकें।
फिर मैं रुक गया वहीं।
और तभी मोनिका ने सोचा कि शायद वो चले गए होंगे।
फिर वो भी अपने दादा-दादी से बोली, “दादी मैं घर जा रही हूं।”
और जैसे ही खड़ी हुई मेरी मोबाइल उसे दिखी और वो दादी को बताई।
दादी बोली, “जा रहे हो तो लेते जाओ, बाबू को दे देना।”
वो जल्दी-जल्दी आने लगी ताकि वो मुझे मोबाइल दे सके।
वो जैसे ही थोड़ा आगे आई मुझे देख कर डर गई कि ये तो अभी यहीं हैं।
और बोली, “ये लीजिए आप अपनी मोबाइल भूल गए थे।”
तो मैं भी झूठ बोला, “थोड़ी दूर जाने के बाद मुझे भी याद आया कि मोबाइल तो वहीं भूल गया हूं।”
और जैसे ही उसने मुझे मोबाइल दिया मैंने मोबाइल जेब में रख कर उसको पकड़ लिया।
वो लगी मना करने की, “मत पकड़िए दादा-दादी यहीं हैं वो लोग आ जाएंगे।”
लेकिन मैं कहां मानने वाला था!
भूखे शेर की तरह टूट पड़ा और उसको खूब चूमा और उसके मम्मों को खूब मसला।
लेकिन उस दिन उसने कहा, “आप ठीक नहीं कर रहे हैं!” और चली गई।
और मैं भी उस दिन बस उतना ही करके रह गया।
मोनिका के जाने के बाद मैं वहां कुछ देर खड़ा रहा।
उसके नरम, बड़े मम्मों को छूने का एहसास अभी भी मेरे हाथों में था।
लिंग पूरी तरह खड़ा होकर तन गया था।
मन में बस यही चल रहा था कि कब उसे पूरी तरह अपना बना पाऊं।
अगले दिन सुबह मैंने उसे मैसेज किया।
उसने थोड़ी देर बाद जवाब दिया।
बातें फिर से शुरू हो गईं।
शाम को जब मैं उसके घर के पास से गुजरा तो उसने इशारे से मुझे बुलाया।
हम दोनों खेतों की तरफ चले गए जहां दूर-दूर तक कोई नहीं था।
सिर्फ सरसों के खेत और एक पुराना पेड़ था।
मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया और जोर से चूम लिया।
उसके होंठ गर्म थे।
मैंने उसके ब्लाउज के अंदर हाथ डाल कर उसके मम्मों को जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया।
मोनिका सांसें तेज कर रही थी।
“अह्ह… रवि… धीरे से…!” वो फुसफुसाई।
मैंने उसके कान में कहा, “मोनिका, आज मैं तुम्हें पूरी तरह चाहता हूं। तुम मेरी हो!”
उसने शर्मा कर मेरी छाती से चेहरा छिपा लिया लेकिन विरोध नहीं किया।
मैंने उसे पेड़ के पीछे ले जाकर उसकी शाल उतार दी।
फिर ब्लाउज के हुक खोल दिए।
उसके भारी, गोल मम्मे बाहर आ गए।
दोनों निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे।
मैंने एक मम्मा मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा।
दूसरा मम्मा हाथ से मसलता रहा।
मोनिका अब कराह रही थी, “उफ्फ… रवि… बहुत अच्छा लग रहा है… अह्ह!”
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे किया और पेटीकोट की नाड़ी खोल दी।
साड़ी और पेटीकोट दोनों नीचे सरक गए।
उसकी सफेद पैंटी भीगी हुई दिख रही थी।
मैंने पैंटी भी उतार दी।
मोनिका अब पूरी नंगी खड़ी थी।
उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे और पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
मैंने घुटनों पर बैठकर उसकी जांघों को चूमते हुए चूत को चाटना शुरू कर दिया।
मेरी जीभ उसकी क्लिटोरिस पर घूम रही थी।
मोनिका ने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर से कराहने लगी, “आह… रवि… क्या कर रहे हो… उफ्फ… मैं मर जाऊंगी!”
उसके शरीर में झुर्रियां पड़ रही थीं।
कुछ ही मिनटों में वो पहली बार झड़ गई।
उसके पैर कांप रहे थे।
अब मैं खड़ा हुआ।
पैंट उतारी।
मेरा लिंग पूरी तरह तना हुआ और मोटा होकर बाहर निकला।
मोनिका ने पहली बार उसे देखा और शर्मा गई।
मैंने उसका हाथ पकड़ कर लिंग पर रख दिया।
वो हल्के से सहलाने लगी।
मैंने उसे जमीन पर लिटा दिया।
खेत की नरम मिट्टी पर उसकी पीठ लगी।
मैंने उसकी जांघें फैला दीं और लिंग का सिरा उसकी चूत पर रखा।
धीरे-धीरे दबाव डालते हुए अंदर डालना शुरू किया।
“आह… धीरे… दर्द हो रहा है…” मोनिका बोली।
मैंने उसे चूमते हुए और धीरे-धीरे पूरा लिंग अंदर डाल दिया।
उसकी चूत बहुत टाइट थी।
मैंने कुछ सेकंड रुककर उसे अडजस्ट होने दिया।
फिर धीरे-धीरे पंपिंग शुरू कर दी।
धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई।
अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था।
मोनिका की चीखें निकल रही थीं, “अह्ह… रवि… और जोर से… हां… फाड़ दो मेरी चूत!”
मैंने उसके मम्मों को जोर से दबाते हुए लिंग को तेजी से अंदर-बाहर कर रहा था।
पूरी चूत मेरे लिंग से भर गई थी।
उसकी गर्मी और भीगीपन मुझे पागल कर रहा था।
हम दोनों पसीने से तर थे।
मैंने उसे कुतिया की स्टाइल में खड़ी किया।
पीछे से उसके मम्मों को पकड़कर जोर-जोर से चोदने लगा।
मोनिका अब पूरी तरह मेरे साथ थी।
वो खुद पीछे हिल रही थी, “हां… रवि… मुझे चोदो… मैं तुम्हारी हूं… अह्ह…!”
करीब 15-20 मिनट तक हम दोनों इस तरह चोदते रहे।
आखिर में मैंने जोर से धक्का मारा और उसके अंदर ही झड़ गया।
मोनिका भी दूसरी बार झड़ चुकी थी।
हम दोनों थक कर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।
उसके बाद मैंने उसे साफ किया।
कपड़े ठीक किए।
वो शर्मा रही थी लेकिन बहुत खुश भी लग रही थी।
रात को फोन पर उसने कहा, “आपने आज मुझे पूरी तरह औरत बना दिया… बहुत अच्छा लगा। लेकिन अगली बार ज्यादा सावधानी से मिलना पड़ेगा!”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “जितनी बार चाहोगी, उतनी बार। तुम मेरी जान हो!”
इसके बाद हमारी मुलाकातें और भी ज्यादा खुलकर होने लगीं।
गांव के अलग-अलग छुपे हुए जगहों पर हम फुल चुदाई का मजा लेते रहे।
लव एंड सेक्स कहानी कैसी लगी? मेल और कमेंट्स में बताएं.
mahicomputers8@gmail.com