Meri Premika Aur Meri Adhuri Mohabbat - 2
इनकम्पलीट सेक्स की कहानी में मैं एक लड़की को सच्चा प्यार करता था. उसके साथ एक बार फोन सेक्स हुआ तो सच में सेक्स की तमन्ना भी जागी. लेकिन हुआ क्या?
कहानी का पहला भाग: प्रेमिका संग फोन सेक्स का मजा
अब आगे इनकम्पलीट सेक्स की कहानी:
फिर एक दिन… सुबह करीब 8 बजे मुझे स्वाति का मैसेज आया।
उसे कॉलेज जाना था और फिर शॉपिंग भी।
उसने मुझसे पूछा, “चलोगे क्या?”
मैं तो तैयार ही रहता था कि कब वो बुलाए और मैं उसके पास जा पाऊं।
मैंने फटाफट अपने दोस्त को कॉल किया, उसको सारी बातें समझाईं, फिर उससे एक दिन के लिए उसकी स्विफ्ट कार मांग ली और स्वाति को मैसेज कर दिया कि, “ब्लैक स्विफ्ट है, उसी में वेट करूंगा।”
फिर मैं रेडी होकर गांव के बाहर खेतों की तरफ, जहां उस शाम को उसे किस किया था, वहीं पर उसका वेट करने लगा.
ये जगह हमारा पिकअप पॉइंट था।
थोड़ी देर में वो स्किन-टाइट लाइट ब्लू जींस, व्हाइट शर्ट और स्पोर्ट्स शू में पूरा ‘माल’ बनकर आती हुई दिखाई दी।
मैं तो उसके नशे में खोने लगा।
वो नजदीक आई, मैंने बिना देर किए कार का अगला डोर खोल दिया।
वो पहले ठिठकी, फिर इधर-उधर देखकर चुपचाप कार में बैठ गई।
उसकी परफ्यूम और हल्के मेकअप ने, कसम से, मेरी वासना को बढ़ा दिया।
हमारी पहली किसिंग और कई रातों के फोन सेक्स फोरप्ले के बाद आज पहली बार हम मिल रहे थे।
मैंने उसका फेवरेट ‘डेयरी मिल्क सिल्क’ दिया, वो बिना कुछ बोले उसे खाने लगी।
मैंने ये कार जान-बूझकर मांगी थी क्योंकि इसके कांच पर ब्लैक फिल्म चढ़ी थी।
मैंने कांच ऊपर कर दी और एसी बढ़ा दी।
मैं, “कैसी हो?”
स्वाति, “अच्छी…”
मैं, “एक बात कहूं? माल लग रही हो!”
स्वाति, “भक्क बंदर!”
मैंने बिना कुछ बोले उसका हाथ पकड़ा और अपनी गोद में रख लिया।
कार धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी।
फिर मैंने उसके हाथ को चूम लिया, वो मुझे देखकर बस स्माइल कर रही थी।
मेरी हिम्मत बढ़ने लगी।
मैंने उसकी उंगलियों को मुंह में लेकर चूस लिया और उन्हें हल्के-हल्के जीभ से कुरेदने लगा.
स्वाति सीट पर पीछे को लुढ़की हुई थी, उसकी आँखें बंद थीं और मुंह हल्का सा खुला… मानो वो मुंह से सांस लेने की कोशिश कर रही हो.
करीब दो मिनट बाद उसे झटका सा लगा और उसने अपना हाथ खींच लिया।
मैं, “आई लव यू बाबू!”
स्वाति, “आई लव यू टू बेबी!”
मैं, “कोई खास काम है कॉलेज में?”
स्वाति, “नहीं, बस ऐसे ही!”
वो रोज कॉलेज नहीं जाती थी, महीने में एक-दो बार ही जाती थी, छोटे शहरों में ऐसा आम बात है.
मैं, “तो मत जाओ! मेरे पास आ जाओ, मैं प्यार कर लूं!”
स्वाति, “पास ही तो हूँ! अब और कैसे प्यार किया जाता है? पास हूँ, बात कर रहे हो। हिम्मत तो देखो, बिना पूछे मेरे हाथ पर किस कर लिए और तो और जैसे बच्चे उंगलियां चूसते हैं, वैसे ही चूसने लगे हो!”
मैं, “बच्चे दूदू भी पीते हैं, वही जो कॉल पर तुम पिलाती हो अपने बाबू को रात में!”
स्वाति, “धत्त! तुम ही बिगाड़ते हो मुझे, गंदी बातें सिखाते हो! तुम पगला गए हो बच्चू!”
मैं, “पगलाया तो तभी से था जब से तुमसे प्यार हुआ, लेकिन जब उस शाम को तुम्हारे होंठों को पिया, तब से पागलपन आसमान में है मेरा! दिल करता है हर टाइम तुम मेरी बाहों में रहो और मैं तुम्हें चूमता रहूँ!”
स्वाति, “मैंने उस दिन रोका तो नहीं था, फिर क्या!”
इतना सुनते ही मैंने कार को झाड़ियों में उतार दिया और काफी दूर सुनसान जगह ले आया।
यहां काफी घनी और ऊंची झाड़ियां थीं।
फिर उतरकर चारों तरफ नजरें दौड़ाईं, सेफ प्लेस लगा।
होने को तो यहां चुदाई भी हो सकती थी लेकिन मैं चाहता था कि वो खुद कुबूल करे कि उसे चुदना है, इसलिए मैंने मन में सोच लिया था कि आज बस उकसाना है।
फिर मैं पीछे वाली सीट पर ले आया उसे।
वो कुछ बोल नहीं रही थी, बस मेरी बात मान रही थी।
कार में बैठ गई स्वाति, मैं भी बैठ गया।
एसी की ठंडक और दो प्रेमियों के मिलन की गर्मी का अजीब सा कॉम्बिनेशन बना था माहौल में।
उसने अपनी चॉकलेट की एक बाइट ली और मेरी तरफ देखने लगी… और बोली:
स्वाति, “खाओगे?”
मैं, “क्या, तुम्हें?”
वो बस मुस्कुराई।
मैंने बिना देर किए उसे बाहों में भर लिया और जोर से हग कर लिया।
वो कांप रही थी।
हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा, हमारे सारे शब्द खो गए थे, हम मौन हो चुके थे।
उसने अपना मुंह खोला, उसके अंदर सिल्क का एक टुकड़ा था।
मैंने बिना देर किए उसके होंठों को अपने होंठों से जकड़ लिया और मैं उसके होंठों को चूसने लगा।
स्वाति बराबर मेरा साथ दे रही थी।
मैं उसके होंठों को पीने लगा; चॉकलेट का स्वाद और अपनी जीएफ के होंठ… आह! बता नहीं सकता क्या मजेदार चीज मिली थी!
मेरा एक हाथ उसकी जांघ पर और दूसरा उसकी पीठ पर था।
उसने अपनी दोनों बाहों में मुझे जकड़ रखा था।
उसकी आँखें बंद थीं, वो इस चुम्मे में डूब रही थी।
मैंने उसके होंठों पर अपनी जीभ फिराई, उसने मुंह खोल दिया।
फिर हल्के से अपनी जीभ स्वाति के मुंह में घुसा दी और फिर हम दोनों की जीभ एक-दूसरे को चोदने में लग गईं।
जैसे-जैसे हमारी किसिंग का टाइम बढ़ रहा था, वैसे-वैसे वो पागलों की तरह मेरी पीठ पर नाखून चुभा रही थी।
मैंने बिना देर किए उसे खुद से अलग किया.
वो मुझसे नजरें नहीं मिला पा रही थी।
मैंने बिना कुछ बोले उसकी टीशर्ट को उतारना चाही।
वो हल्का सा रोक रही थी, फिर उसने मुझे देखा और बिना कुछ बोले हाथ ऊपर उठाकर टीशर्ट उतारने की अनुमति दे दी।
मैंने पहली बार उसे सिर्फ ब्रा में देखा।
वो लजाने लगी.
और उसकी मस्त पहाड़ों जैसी उन्मुक्त चूचियों को कैद में रखना अब संसार का सबसे बड़ा पाप लगा मुझे!
मैंने बिना देर किए उसकी ब्रा की हुक खोल दी।
उसने अपने हाथों से अपनी चूचियों को ढक लिया।
मैंने अपनी शर्ट और बनियान भी उतार दी, फिर उसके हाथों को पकड़कर अपनी छाती पर रख दिया।
अब मेरे सामने मेरे सपनों की रानी ऊपर से एकदम नंगी बैठी थी!
उसकी आँखें लाल हुई पड़ी थीं।
उसकी सांसों के सहारे उसकी छाती के दोनों गेंद ऊपर-नीचे हो रहे थे।
उसके होंठ कांपने लगे थे।
वो सहमी, शरमाई, सकुचाई हुई मेरी बाहों में समा गई।
उसकी आंखों में चाहत झलक रही थी।
पहली बार दो मस्त जवान उरोजों की छुवन हुई मेरे सीने को, मैं कांप गया.
मैंने बिना देर किए उसे सीट पर लेटा दिया और दोनों पैरों को खोलकर बीच में मैं आ गया और स्वाति के ऊपर लेट गया।
ऐसा लगा था जैसे वो मुझे अपने भीतर खींच लेना चाहती हो।
मैंने पहली बार उसे ऐसे देखा तो कुछ देर के लिए मैं भावशून्य हो गया था, तभी मेरे कानों में एक आवाज आई, “बेबी, आई लव यू सो मच! प्लीज कम टू मी.”
मैं कुछ समझ पाता, उसके पहले ही उसने मेरी गर्दन पर चाटना शुरू कर दिया.
उफ्फ! ऐसा लगा ये एसी किसी काम की नहीं है।
मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ा और जोर से भींच लिया।
उसकी हल्की चीख निकल आई.
पर मैं रुका नहीं और एक निप्पल को मुंह में भर कर पीने लगा।
स्वाति जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी।
वो मेरे कान और गले को चूसने, चाटने और काटने लगी।
मैंने लगभग 10 मिनट उसकी चूची निचोड़ी।
वो कमर उठाने लगी, जैसे लंड को चूत में लपकना चाहती हो।
मुझे ये मौका सही लगा और मैं चूची पीना छोड़कर उसके पेट को चाटने लगा।
वो ‘उफ्फ आह’ उह’ जैसी आवाजें निकालने लगी।
वो मेरा सर सहला रही थी।
मैंने अपनी जीभ स्वाति की गहरी नाभि में डाल दी।
उसका जो रिएक्शन हुआ, वो देखकर तो लगा जैसे ये नाभि नहीं उसकी चूत हो! वो थरथराने लगी।
मैं उसकी नाभि किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा, फिर मैंने धीरे से उसकी जींस की बटन खोल दी, और फिर जिप भी खोल दी।
स्वाति ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैं कुछ नहीं बोला और नाभि से नीचे चाटने लगा, हल्के दांतों से काटने लगा।
उसने मेरा हाथ छोड़ दिया।
मैंने तुरंत उसकी पैंटी और जींस एक साथ नीचे खींच ली।
स्वाति ने भी कमर उठाकर मेरा साथ दिया।
चूत एकदम साफ थी, उस पर एक भी बाल नहीं था— बोले तो एकदम चिकनी, चमकदार, क्लीन शेव्ड! छोटी सी, कसी हुई कमसिन चूत मेरे सामने थी।
उसकी चूत काम-रस से भीग गई थी, ऐसा लगा जैसे उसका माल निकल गया हो चुम्मा-चाटी में ही।
मैंने उसकी ब्रा से उसकी चूत को पौंछना चाहा।
जैसे ही चूत को टच किया, पिच्च से उसके चूत से माल निकलकर मेरे ऊपर आ गया!
उसने अपने मुंह को हथेली से ढक लिया।
एकदम गाढ़ा, क्रीमी माल मेरे पेट पर था।
मैंने ब्रा से चूत पौंछ ली, और अपनी भी जींस उतार दी।
अब कार की पिछली सीट पर मेरी माल नंगी पड़ी थी और उसके ऊपर मैं भी बिल्कुल नंगा पड़ा था।
मैं चुप था, कोई हरकत नहीं क्योंकि मैं चाहता था कि वो जब आंख खोले, मुझे अपने पास नंगा देखे।
कुछ सेकंड मेरी कोई हरकत नहीं होने पर उसने आंख खोली और पहली बार मुझे नंगा देखा.
वो बस हल्के से मुस्कुराई।
उसे लेटाकर मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और मैं उसकी चूत के पास बैठ गया।
मैंने उसकी चूची पर किस किया और सीधे उसकी प्यारी सी क्लीन शेव्ड चूत पर जीभ फिरा दी।
उसने हल्के से “आह…” बोला…
मैंने जगह ठीक से एडजस्ट की ताकि चूत चाटने में आसानी रहे और चूत को अपनी दो उंगलियों से फैलाया।
ऐसा लगा जैसे चूत में कोई गुलाब की पंखुड़ियां बिखेर गया हो!
वीर्य से गीले इस गुलाब को देखकर मुझसे रहा नहीं गया, मैंने तुरंत उस गुलाब को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा, उसकी कुंवारी चूत चाटने लगा।
स्वाति की वो लड़खड़ाती आवाज में मेरा नाम लेना आज भी मेरे कानों में गूंजती है।
जब पहली बार उसकी चूत को एक मर्द की छुअन मिली.
उफ्फ वो आवाज…
स्वाति, “अभि… इश्श! ये क्या कर दिया यार… तुम तो जादूगर हो! आज जैसा एहसास तो कभी मिला ही नहीं था… मेरी जान, अब बस रुकना मत, जो कर रहे हो करते जाओ!”
कुछ ऐसी ही बातें, जो कि उस समय कोई मतलब की नहीं थीं; मतलब था तो बस उस रंगीनी के मजे का!
मैंने उसकी क्लिटोरिस को दांतों में दबाया तो ऐसा लगा मानो वो लड़की हवा में उड़ने लगी हो।
आज पोर्न और अन्तर्वासना का अनुभव काम आने वाला था।
मैंने चूत के छेद पर जीभ लगाई और उसे चाटने लगा, वो मचलने लगी।
कार में गर्मी बढ़ने लगी।
‘उफ्फ’, ‘आह’, ‘आउच’, ‘प्लीज बेबी’ जैसी आवाज़ें गूंजने लगीं।
मैं उसकी गांड के छेद को भी जीभ से कुरेदने लगा।
अब तो उसने अपने पैरों में मुझे ऐसा जकड़ा कि मैं सांस भी ठीक से नहीं ले पा रहा था।
उसके हाथ मेरे सर को चूत के अंदर धकेलने में लगे थे।
मैं कभी बुर चाटता तो कभी गांड।
करीब 6-7 मिनट की चूत चुसाई का इनाम मिला; स्वाति की सांसें और आहें खूब तेज हो गईं और फिर मेरे फेस पर मेरी जान की चूत ने थूक दिया!
मैं रुक गया, वो जोर-जोर से हांफने लगी।
दो मिनट बाद वो शांत हुई।
उसने मुझे देखा; मेरी ठोड़ी उसकी चूत के रस से चमक रही थी, वो अजीब से नशे में लग रही थी।
मैंने फिर से उंगली से उसकी चूत से माल उठाया और उसे दिखाकर चाट गया, वो हल्की सी आह भरी और मुझे एकटक देख रही थी।
मैं फिर से उसकी चूत पर गया।
अचानक से उसकी टांगें फैलाकर जो वीर्य उसकी गांड तक चला गया था, उसे गांड के छेद से चाटते हुए चूत को चाट-चाटकर पीने लगा।
वो फिर से मचलने लगी, मैं चूत का सारा माल पीने लगा।
इतने में ही करीब 1 मिनट में ही उसने फिर से माल निकाल दिया, मैं सारा माल पी गया।
अब मेरा लंड फटने लगा था, करीब एक घंटे से बेचारा खामोश था।
वो टाइट होकर अपने फुल साइज में आ गया था।
मैं स्वाति के ऊपर लेट गया।
मेरे चेहरे पर अभी भी उसकी चूत की मलाई लगी हुई थी, वह हंसने लगी।
स्वाति, “छी! कितने गंदे हो, यह सब क्या चेहरे पर लगा रखा है? साफ करो इसे! मुझे तो शर्म आ रही तुमसे, क्या कर रहे हो ये सब? कभी सोचे भी नहीं थे ये सब!”
मैं, “चुप! एकदम चुप! मेरा चेहरा साफ करो!”
स्वाति ने मेरी बनियान उठाई मेरा चेहरा पौंछने को।
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे वैसे ही किस करने लगा।
पहले तो उसे थोड़ा अजीब लगा, फिर वो धीरे-धीरे मान गई और हम फिर से एक-दूसरे को किस करने लगे।
करीब 5 मिनट किसिंग से वो फिर से गर्म होने लगी, उसकी गर्म सांसें उसकी कहानी बताने लगीं। मैंने उसे खुद से अलग किया।
मैं, “अब मेरी बारी!”
स्वाति, “मैं कुछ नहीं करूंगी, मुझे नहीं आता!”
मैं, “बस किस करो ऊपर से नीचे तक!”
तब स्वाति ने मेरे माथे पर किस किया।
उसके नर्म होंठों के छूने से मेरा रोम-रोम जाग उठा।
फिर उसने मेरी आंखों पर किस किया, फिर मेरे गालों पर और फिर शर्माते हुए मेरे होंठों से अपने रसीले होंठ चिपका दिए।
मैं उसके रसीले होंठों के जाम को पीने लगा, वह भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी।
कभी मैं उसके होंठों और जीभ को चूसता, कभी वह मेरे होंठों और जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।
मेरा लौड़ा हवस की आग में जलने लगा था, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था।
दिल कर रहा था कि आज अपनी जान को पटक के चोद ही दूँ, पर पहली बार में ही ऐसा करना कहीं से भी ठीक नहीं लग रहा था मुझे।
इसलिए मुझे इंतजार था तो उसके ‘हां’ का।
अगर आज मेरी जान ने मुझे हां कहा तो आज इसी कार में मैं उसकी चूत से चटनी निकालूंगा लंड डाल के!
किसिंग के साथ ही वह मेरे ऊपर लेट गई।
उसकी चूत मेरे पेट पर थी और मेरा लंड उसकी गांड पर ठोकर दे रहा था।
स्वाति की चूत से रस निकलकर मेरे पेट में चिपक रहा था, एक अजीब सी गर्मी मेरे शरीर को जला रही थी।
मैंने अपने हाथों से उसकी गांड को पकड़ रखा था और उसे ज़ोर से मसल रहा था।
उसके चूतड़ों का उभार और मुलायमियत मुझे उसकी चूची की याद दिला रही थी।
जैसे मैं उसकी चूची को मसल रहा था, वैसे उसकी गांड को मसलने लगा।
वह भी अपनी कमर चला रही थी और मेरे पेट के ऊपर अपनी चूत रगड़ रही थी।
मुझे पता चल गया था कि अगर मैं आज इसे चोदूँ तो ये मना नहीं करेगी, लेकिन मैं आज उसे चोदूंगा नहीं, यह मैंने सोच लिया था।
करीब सात-आठ मिनट तक हमने एक-दूसरे के ऊपर लेटकर स्मूच किसिंग की।
इस बीच मैं उसकी गांड को फैलाता रहा और गांड को दबाता रहा।
उसे भी मेरे लंड की ठोकर अपनी गांड पर अच्छी लग रही थी, वह अपनी गांड को मेरे लंड पर पुश कर रही थी।
फिर मैंने उसको बोला- और नीचे करो!
वो नंगी हूर मेरे गले पर किस करने लगी, मेरी छाती पर किस करके चाटने लगी.
फिर अचानक उसने मेरे निप्पल पर दांत काट लिया… उफ्फ!
मेरे बॉडी में करंट दौड़ने लगा!
क्या नजारा था, क्या मौसम था कार के अंदर! पूरा हनीमून का नजारा बन गया था, चुदाई कभी भी हो सकती थी।
मैंने उसको नीचे भेजा, वह मेरे पेट पर किस करने लगी।
फिर मैंने उसकी तरफ देखा और उसका हाथ उठाकर अपने लौड़े पर रख दिया।
उसने पहली बार मेरा लौड़ा पकड़ा था, वह थोड़ा शर्मा रही थी।
मैंने उसके हाथ को अपने हाथ से पकड़ लिया और लंड की मुट्ठी मरवाने लगा।
फिर मैंने उसे लंड चूसने को कहा, वो मना करने लगी।
मैंने थोड़ा रिक्वेस्ट किया, उसने मेरी ओर देखा और लंड के सुपाड़े पर चूम लिया।
हाय… उसके एक बार चूमने भर से मेरे लंड का प्रीकम निकल आया!
उसने उस बूंद को अपनी उंगली से लंड पर ही मसल दिया, मेरी आह निकल गई!
फिर मैंने उसे इशारे से लंड चूसने को कहा।
उसने अपना मुंह खोला और सुपाड़े को मुंह में भर लिया।
आँखें बंद किए हुए वो उसे हल्के-हल्के लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
मेरी तो जान निकलने लगी थी! उसके मुंह की गर्मी से ऐसा लगा जैसे लौड़ा किसी भट्टी में फंसा हो।
मैंने उसका सर पकड़ा और नीचे दबा दिया।
अचानक हुए हमले को वो संभाल नहीं पाई और पूरा लंड उसके मुंह में घुस गया, ‘गूँ-गूँ’ की आवाज आने लगी।
थूक से भीगा लंड सटासट मैं स्वाति के मुंह में चलाने लगा।
करीब 10 मिनट मैंने उसके मुंह को चोदा।
उसकी आंखों में आंसू आ गए थे, शायद उसका मुंह दुखने लगा था।
मैंने अपना लंड उसके रसीले होंठों की कैद से निकाल लिया।
फिर मैंने उसे अपने मुंह पर बिठाया और एक बार फिर से उसकी चूत और गांड को चाटने लगा।
इस बार मैंने एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी.
वो कांप गई और ‘आह आह … आह उफ्फ उफ्फ … हाय मां हाय मां बाबू’ जैसी आवाजें निकालने लगी।
मैं एक उंगली से उसकी बुर चोद रहा था और बुर चाट भी रहा था।
करीब 5 मिनट में ही वो मेरे मुंह में ही एक मीठी चीख के साथ झड़ने लगी, मैं अभी भी चूत चाटता रहा.
अब वो हांफने लगी और मेरे मुंह से उठकर मेरी गोद में लेट गई।
2 मिनट रुकने के बाद मैं फिर से काम पर लग गया और लंड को उसके मुंह में दे दिया, उसने लंड को चाटकर गीला कर दिया।
फिर मैंने उसकी टांगें फैलाईं और लंड को चूत पर रख दिया.
वो शांत पड़ी रही, कुछ बोली नहीं।
उसकी गुलाबी चूत गीली हुई जा रही थी, कार की सीट पर उसका रस लगा था।
मैंने अपनी एक उंगली फिर से उसकी चूत में डाली, स्वाति रानी कसमसा उठी और मेरा लंड पकड़कर मुठियाने लगी।
मैं उंगली से उसे चोदने लगा, उसकी चूत ने फिर से रस उगलना चालू कर दिया।
‘उह्ह्ह’, ‘आह्ह्ह’, ‘उफ्फ’ की मीठी आवाज मुझे पागल बनाने लगी थी।
मैंने उंगली निकाली और लौड़ा उसकी नन्ही सी चूत के दाने पर रगड़ दिया।
वो कमर उठाकर लंड भीतर घुसवाने की कोशिश करने लगी और साथ ही गर्म सिसकारियां लेने लगी।
उसके चेहरे को देखना मुझे उस समय एक सुखद एहसास दे रहा था।
मैंने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया, फिर स्वाति की चूत पर थूक लगाया और उंगली से थूक चूत के भीतर भी मल रहा था।
इसके बाद लंड का सुपाड़ा चूत के मुहाने को हल्के-हल्के से भीतर दबाते हुए सहलाने लगा, वो लड़की “उह, आह, उफ्फ, डाल दो” जैसी आवाज निकालने लगी।
मैं कभी उसकी चूत में उंगली डाल रहा था तो कभी लंड से चूत को सहलाने लगा।
अब मैं अपना निश्चय भी तोड़ देने का मन बनाने लगा था.
स्वाति, “बाबू, जो दिल करे तुम करो, बस अब रुको नहीं, मैं पागल हो जाऊंगी!”
मैं, “क्या करूं? बोलो ना!”
स्वाति, “डालिए ना मेरी जान!”
मैं, “क्या डालूं?”
स्वाति, “अपना वो…”
मैं, “वो क्या?”
स्वाति, “धत्त गंदे!”
मैं, “एक बार बता दो क्या करूं, क्या डालूं, कहां डालूं?”
स्वाति आँख बंद करके बोली, “ओके ठीक है… बाबू, अपना लंड मेरी बुर में पेल दीजिए ना!”
मैं, “ना बेबी, आज आपकी चुदाई नहीं होगी, लेकिन आपको मज़ा आयेगा, ये वादा है!”
स्वाति, “पर चुदाई क्यों नहीं?”
मैं, “इसके लिए अभी समय है। ये तब होगी जब हम दोनों एक सेफ कमरे में होंगे, क्योंकि वो हमारा सबसे यादगार दिन रहेगा, उसे यादगार मैं बनाऊंगा!”
स्वाति, “ओके जी, जैसी आपकी मर्जी! पर अभी जो आग लगाई है, इसका कुछ तो कीजिए!”
उसके इतने बोलने पर मैंने लंड का सुपाड़ा चूत में हल्के से दबा दिया, स्वाति चिहुंक उठी!
मैंने अब लंड को चूत के छोटे से छेद पर घिसना शुरू किया, स्वाति मचलने लगी।
वो मेरा लंड पकड़कर चूत में दबाने लगी, “कुत्ते, डाल दे ना! क्यों तड़पा रहा है? प्लीज चोद दे मुझे!”
मैं, “रुक जा मेरी रानी, हमारी चुदाई ऐसी होगी कि तू जीवन भर याद करेगी!”
स्वाति लंड पकड़ के खुद से चूत पर घिसने लगी, मैं उसकी चूचियां भभोरने लगा।
5 मिनट बाद मैंने उसको ऊपर बुलाया और खुद नीचे लेट गया।
अब लंड मेरे पेट पर पड़ा था और स्वाति उसके ऊपर बैठी हुई तेजी से कमर चलाने लगी।
वीर्य की गंध और मेरी जानेमन की मादक आवाज़ ने असर दिखाया; करीब 15 मिनट बाद स्वाति की बुर से काम-रस की धार छूट पड़ी और मेरे पेट पर फैल गई!
लंड तो मानो चूत के रस में डुबकी ही लगाए जा रहा था।
मैंने स्वाति को वैसे ही घिस्सा मारते रहने को बोला और 3-4 मिनट बाद ही मेरे लंड ने भी पिचकारी छोड़ दी।
काफी देर तक हम दोनों वैसे ही चिपक कर सोए रहे।
फिर हमने एक-दूसरे को साफ किया, किस किया और कपड़े पहन लिए।
फिर मैंने स्वाति को शॉपिंग कराई और रेस्टोरेंट में खाना खाकर हम घर आ गए।
स्वाति की पूरी चुदाई की कहानी आपके प्यार पर निर्भर करेगी.
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