हॉट गर्ल X कहानी में मैंने कमरा किराए पर लिया तो पास रहने वालों से दोस्ती हो गयी. एक लड़के ने मुझे बताया कि उसने पड़ोस वाली दीदी को नंगी चूत में उंगली करते देखा.
हाय, मैं कबीर हूँ. मेरी ये हॉट गर्ल X कहानी तब की है … जब मैं नया-नया जॉब करने लगा था.
मैं जॉब के सिलसिले में पहली बार नासिक गया था, उधर मेरी जॉब पक्की हो गई थी तो मैं उधर ही एक बिल्डिंग में एक फ्लैट रेंट पर लेकर रहने लगा.
मेरा रेंट ऑफिस से चुकाया जाता था तो मैं अकेला ही वहां रहने लगा था.
खाने के लिए उधर एक टिफिन सर्विस वाले से बात कर ली थी.
मैं जहां रहता था, वह एरिया थोड़ा लोकल था और सिटी से बाहर की साइड था.
वहां से मेरा ऑफिस पास में ही था.
जिस बिल्डिंग में मैं रहता था, वह पुराने टाइप की बिल्डिंग थी और चार माले की बिल्डिंग थी.
मैं चौथे माले पर ही रहता था. मेरे फ्लोर पर तीन और फ्लैट थे.
उसमें एक में उत्तर भारत की फैमिली रहती थी, जिसमें हसबैंड, वाइफ और एक उनका लड़का था.
लड़के का नाम कमल था.
दूसरी फैमिली साउथ इंडिया की थी.
उसमें बस एक अंकल और आंटी रहते थे.
उनके बच्चे किसी दूसरी सिटी में जॉब करते थे.
अंकल-आंटी बड़ी उम्र के थे.
तीसरी फैमिली थी, उसमें एक अंकल-आंटी और उनके दो बच्चे थे.
एक बेटी थी, जिसका नाम शीतल था और एक बेटा अर्जुन उर्फ राजू रहता था.
शीतल तब कॉलेज में थी.
शीतल दिखने में गोरी थी लेकिन पतली थी.
उसकी गांड और बूब्स ठीक से निकले हुए नहीं थे.
शीतल का भाई राजू और कमल दोनों एक साथ में पढ़ते थे.
पहले-पहले तो मुझे वहां सैट होने में टाइम लगा, फिर सबके साथ अच्छा रिलेशन हो गया.
कमल की मम्मी के कहने पर अब मैं उनके घर खाना लग गया था.
कमल और राजू कभी-कभी मेरे फ्लैट में आकर खेलते या पढ़ाई करते.
शीतल ज्यादातर खुले कपड़े पहनती थी, जिसमें वह काफी सेक्सी लगती थी.
एक दिन शीतल अपने घर में पौंछा लगा रही थी.
मैं उनके घर के आगे खड़ा था तो उनका दरवाजा खुला था.
उस समय शीतल झुकी हुई थी तो उसके ढीली सी टी-शर्ट में से उसके बूब्स दिख रहे थे.
बहुत छोटे-छोटे चीकू जैसे दूध थे उसके … नींबू से थोड़े बड़े थे, लेकिन बहुत गोरे दूध थे.
मुझे उसके पिंक कलर के निप्पल की झलक भी मिल गई थी.
जब वह खड़ी हुई तो मैंने देखा कि उसने लैगिंग्स पहनी थी, जो उसकी टांगों पर बहुत ही फिट थी और जरा ज्यादा ही पारदर्शी थी.
शीतल ने शायद अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी इसलिए उसकी चूत की छेद वाली लाइन साफ दिख रही थी.
उसकी चूत का उभार भी जरा सा ही दिख रहा था.
शीतल ने मुझे खुद को वासना से देखते हुए देख लिया तो वह शर्मा गई और नीचे बैठकर पौंछा लगाने लगी.
शीतल को मैंने कभी गलत नजरों से नहीं देखा था और ना ही वह ऐसी हॉट थी कि उस पर किसी मर्द की नजर पड़े.
मुझे बड़े गांड और बूब्स वाली माल जैसी लड़कियां ज्यादा पसंद थीं.
जबकि शीतल उसके विपरीत थी.
फिर भी उस दिन शीतल का वह मादक नजारा देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था.
मैं ऑफिस जाने के लिए रेडी हो रहा था, तो वापस फ्लैट में आ गया और लंड हिला कर पानी निकाल कर वापस बाहर आया.
बाहर आया था तो शीतल मिली.
मुझे वापस आया देखा तो उसने पूछा- क्या हुआ? कुछ भूल गए थे क्या?
मैंने कहा- हां निकाल लिया … सामान … अब ऑफिस जा रहा हूँ.
शायद वह मेर फिसली जुबान का अर्थ समझ गई थी, तो हल्के से मुस्कुरा दी.
मैं जल्दी से कमल के घर गया और उधर भाभी जी से टिफिन लेकर ऑफिस चला गया.
अब अक्सर मैं शीतल के बूब्स को देखता.
सुबह के टाइम लैगिंग्स में से उसकी चूत या गांड की दरार देखने को मिल जाती तो नजर गड़ा कर जरूर देख लेता.
मुझे पता चल गया था कि शीतल रात को चड्डी के बिना सोती है, इसी लिए तो वह सुबह बिना चड्डी के दिखती है.
एक दिन राजू आया और उसने कहा- भैया, दीदी का फोन खराब हो गया है, तो देख लो प्लीज!
मैंने देखा तो उसका फोन वायरस की वजह से हैंग हो रहा था.
मैंने अपने लैपटॉप में फोन कनेक्ट करके वायरस हटा दिया.
मुझे उसके मोबाईल को देख कर पता चला कि वो पोर्न साइट देखती है, इसलिए उसके फोन में वायरस आ गया था.
यह सब जानकार मुझे यह भी पता चल गया कि शीतल जितनी शरीफ दिखती थी, उतनी थी नहीं!
मुझे भी किसी लड़की के साथ सेक्स करके बहुत टाइम हो गया था.
अब मुझे सेक्स करने का बहुत मन कर रहा था.
लेकिन कुछ सैटिंग नहीं जम पा रही थी.
मुझे लंड का प्रयोग किये एक साल बीत गया था.
फिर मैं न्यू ईयर पर घर गया, तो वहां अपनी पुरानी सैटिंग के साथ सेक्स करके मेरे लौड़े को शांति मिली.
जब मैं वापस आया तो देखा कि शीतल के मम्मी-पापा और राजू उनके गांव गए हुए हैं.
शीतल के एग्जाम थे, तो वह नहीं गई थी.
एक दिन मैं टिफिन लेने कमल के घर गया तो उनके घर कोई नहीं दिख रहा था.
मैं अन्दर गया तो बाथरूम से कुछ आवाज आ रही थी.
मैंने वहां चुपके से देखा तो कमल लंड हिला रहा था … और मजे की बात ये थी कि वह साला शीतल का नाम लेकर अपना लंड हिला रहा था.
मैंने झांक कर देखा तो उसका लंड पतला था लेकिन लंबा था.
मैंने उससे बोला- क्या कर रहे हो?
मेरी आवाज सुनकर वह एकदम से डर गया और फटाफट से अपने लंड को अपने शॉर्ट में डालने लगा.
साथ ही वह मुझसे ‘सॉरी सॉरी’ बोलने लगा.
मैंने उसे कहा- ये सब क्या कर रहे हो?
अब वह रोने लगा और कहने लगा- सॉरी भैया, पापा को मत कहना, फिर नहीं करूँगा!
मैंने सोचा कि मैं भी तो ऐसा ही था.
मैंने उससे कहा- ओके मम्मी कहां हैं तुम्हारी और टिफिन कहां है मेरा?
तो वह बोला- मम्मी, पापा के साथ एक रिलेटिव को देखने गई हैं. आपका टिफिन बाहर रखा है, मैं देता हूँ.
उसने डरते-डरते मुझे टिफिन दिया.
फिर वह वापस पापा को बताने से मना करने लगा.
मैंने कहा- नहीं बताऊंगा … आगे से ध्यान रखा करो, दरवाजा खुला था. ऐसे में कोई और आ जाता तो?
वह बोला- सॉरी भैया … आगे से ऐसे नहीं करूँगा.
फिर मैंने उसे ‘ओके’ बोला और टिफिन लेकर ऑफिस के लिए निकल गया.
पूरे दिन मैं सोचता रहा कि ये शीतल का नाम लेकर क्यों हिला रहा था?
रात को मैंने उसको अपने पास बुलाया.
वह अभी भी डर रहा था.
मैंने उससे कहा- डोंट वरी डरो मत, इस उम्र में ऐसा होता है. मैं किसी को नहीं कहूँगा इस बारे में!
कमल ने ‘थैंक यू’ कहा.
अब उसके चेहरे पर थोड़ी शांति थी.
मैंने उससे कहा- लेकिन मेरे एक सवाल का सही जवाब दोगे तो ही नहीं कहूँगा!
वह वापस थोड़ा डर गया.
उसने पूछा- क्या भैया?
मैंने कहा- तुम ऐसा रोज करते हो?
उसने कहा- नहीं, कभी-कभी ही करता हूँ.
मैं- ओके आज तुम जब ये कर रहे थे, तब शीतल का नाम लेकर क्यों कर रहे थे?
कमल चुप रहा.
फिर मैंने वापस सख्ती से पूछा तो बोला- शीतल दीदी के घर वाले गांव गए थे तो शीतल दीदी अकेली हैं. इसलिए उन्होंने मुझे उनके घर पर सोने को कहा था.
‘तो?’
कमल- तो रात को जब मैं उनके घर सोने गया तो … हम दोनों एक ही कमरे में सोए थे. शीतल दीदी रात को मोबाइल में कुछ देख रही थी. फिर अपने पैरों के बीच वाली जगह पर हाथ रख कर धीरे-धीरे सहला रही थी. फिर मैंने सोने की एक्टिंग की. जब उसे लगा कि मैं सो गया हूँ, तो वह वहां से उठ कर बाहर हॉल में आ गई.
मैंने हम्म कहते हुए पूछा- फिर?
कमल- मैं चुपके से बाहर आया तो देखा कि शीतल दीदी सोफे पर बैठी है. उसके एक हाथ में मोबाइल है और दूसरे हाथ को वह अपने पैरों के बीच में रगड़ रही थी. फिर कुछ देर बाद उसने अपनी लैगिंग्स निकाल दी … और अपने हाथ की उंगलियां उसमें डालने लगी.
मैं- किसमें डालने लगी? नाम लेकर बता …
कमल- वह अपनी चूत में उंगली डालने लगी, बहुत देर तक ऐसे ही करती रही. फिर उसके वहां से पानी निकलने लगा. तब उसने फोन रखा और वहीं सोफे पर लेट गई. उसे लगा कि किसी ने नहीं देखा, लेकिन मैंने सब देख लिया था. इसलिए सुबह वह सब याद करके हिला रहा था.
मैं- ओह इसीलिए उसका नाम ले रहा था!
कमल- हां भैया.
मैं- एक बात बता, क्या उसकी चूत पर बाल थे और कैसी थी?
कमल- नहीं, बाल बिल्कुल नहीं थे. गोरी-गोरी थी. मस्त फ़ूली सी लग रही थी.
मैं- और कुछ देखा क्या?
कमल- नहीं … और कुछ नहीं देखा.
मैंने देखा कि उसका खड़ा हो गया है.
उसके शॉर्ट में से उभर कर दिख रहा था.
मैंने उससे कहा- तेरा खड़ा हो गया है, क्या हिलाने को मन कर रहा है?
वह बेचारा शर्माने लगा.
मैंने बोला- मन कर रहा है तो जाओ बाथरूम में और हिला लो!
लेकिन उसने मना कर दिया.
फिर मुझे एक आइडिया आया.
मैंने उससे पूछा- आज भी उनके घर सोने जाने वाले हो क्या?
उसने कहा- हां.
मेरे पास 2 मोबाइल थे, तो मैंने उसे एक मोबाइल दिया और उसमें वीडियो लेते टाइम फ्लैशलाइट बंद कर दी.
उसे फोन देकर मैं बोला- आज अगर शीतल दीदी कल जैसा करे तो इससे वीडियो बना लेना.
उसने कहा- उसे पता चल गया तो?
मैंने कहा- चुपके से लेना, उसे पता न चले … ऐसे.
मैंने उसे तरीका समझाया तो उसने ‘ओके’ कहा.
फिर वह बिना मोबाईल लिए जाने लगा.
मैंने टोका.
तो उसने कहा कि जब दीदी के घर जाऊंगा, तब आपसे फोन लेकर चला जाऊंगा.
अब वह चला गया.
रात को जब वह फोन लेने आया तो मैंने मना कर दिया- नहीं रहने दे, ऐसे किसी का वीडियो बनाना अच्छी बात नहीं है.
वह चुप रहा.
मैंने उससे कहा- बस वह आज भी क्या करती है, यह बताना!
दूसरे दिन उसने बताया कि आज भी कल के जैसा ही किया था.
मैं समझ गया था कि शीतल को सेक्स करने की बहुत तड़प है, लेकिन ऐसा क्यों है पता नहीं!
मैं अब सोचने लगा कि शीतल को अपने नीचे लाया जा सकता है, लेकिन कैसे लाऊं ये समझ में नहीं आ रहा था.
अब तक मुझे ऐसा कोई संकेत नहीं मिला था, जिससे यह लगे कि शीतल मुझे कभी इस नजर से देखती हो.
इसी बीच एक दिन शीतल कहीं जा रही थी, वह एकदम फर्स्ट क्लास तैयार होकर निकली थी.
मैं बाइक पर बैठा मोबाईल पर एक नंबर लगाने की कोशिश कर रहा था.
वह संडे का दिन था, छुट्टी का दिन था तो मैं ऑफिस के दोस्त के घर जाने के लिए निकला था.
जाने से पहले मैं उसको फोन से बताना चाह रहा था मगर उसका फोन लगातार व्यस्त आ रहा था.
मैंने शीतल को जाते देखा तो उससे पूछा- कहीं जा रही हो क्या?
शीतल- हां फ्रेंड के साथ मूवी देखने जा रही हूँ.
मैंने पूछा- कौन सी?
उसने मूवी का नाम बताया.
तो मैंने कहा- चलो, छोड़ देता हूँ.
मैंने उसे अपने पीछे बिठाया.
उसने पैंट और टॉप पहना था.
वह मेरे पीछे दोनों बाजू टांगें डालकर बैठ गई.
रास्ते में उसने पूछा- आप कहां जा रहे हो?
तो मैंने कहा- मैं भी मूवी देखने के लिए ही जा रहा था, लेकिन फ्रेंड को काम आ गया तो कैंसल कर दिया.
उसने कहा- तो आप भी चलो हमारे साथ!
मैं तो यही चाहता था.
मैंने उससे कहा- तुम्हारी फ्रेंड को बुरा नहीं लगेगा?
शीतल- नहीं, वह भी कभी अपने BF को साथ लेके आती है.
मैं- लेकिन मैं तो तुम्हारा BF नहीं हूँ.
शीतल- तो क्या हुआ आप मेरे पड़ोसी तो हो और दोस्त जैसे हो. मैं उसे बोल दूँगी कि मैंने ही कहा था.
मैं- ओके तो ठीक है. लेकिन टिकट्स के पैसे मैं दूँगा!
शीतल- ठीक है.
फिर हम दोनों थिएटर पहुंचे.
उसकी फ्रेंड आई.
उसकी फ्रेंड बिल्कुल उसके विपरीत थी. मैंने देखा उसकी फ्रेंड एकदम मस्त माल थी.
उसके बड़े बड़े बूब्स थे और बड़ी सी गांड थी.
वह जींस और टी-शर्ट में हॉट लग रही थी.
शीतल ने उससे मिलाया- ये मेरी फ्रेंड है, अनु.
अनु ने पूछा कि मैं कौन हूँ तो शीतल ने बोला- ये मेरा BF है.
मैं कुछ नहीं बोला, बस उसकी तरफ देखता रहा.
दोस्तो, पड़ोसन शीतल ने मुझे अपना ब्वॉयफ्रेंड बताया था तो मैं असमंजस में था कि इसके साथ किस तरह का व्यवहार किया जाए.
हॉट गर्ल X कहानी के अगले भाग में मैं इसी को आगे लिखूँगा.
आप अपने मेल जरूर भेजें.
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