पड़ोसन भाभी और मेरी वासना की शुरुआत

Views: 47 Category: Padosi By vr0746 Published: May 19, 2026

गुजराती भाभी सेक्स कहानी में मेरे पड़ोस में एक नया जोड़ा आया. एक दिन भाभी नहाकर बालकोनी में कपड़े फैला रही थी. मैं उनके सेक्सी बदन को देखने लगा.

नमस्ते, मेरा नाम अजय है। मैं गुजरात से हूँ।

आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ।
यह गुजराती भाभी सेक्स कहानी आज से लगभग 6 साल पहले की है।

मेरे पड़ोस में एक कपल किराये पर रहने आया था।
उनका ट्रांसफर वडोदरा के पास हुआ था।

पति का नाम विजय और भाभी का नाम स्वाति था।
उनके कोई बच्चे नहीं थे।

भाभी का फिगर 32-28-34 का था, जो बहुत ही आकर्षक था।

उनके पति विजय थोड़े मोटे थे और अपनी जॉब के कारण ज्यादातर समय घर से बाहर ही रहते थे।

मैं उस समय कॉलेज जाता था और समय से घर आ जाता था।

मेरे मन में कभी कोई गलत विचार नहीं आया था.
पर एक दिन भाभी नहाकर कपड़े सुखा रही थीं।

उन्होंने काली साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज पहना था— क्या कयामत लग रही थीं! ऊपर से गीले बाल खुले छोड़ रखे थे, जो बहुत सेक्सी लग रहे थे।

मैं उन्हें देखता ही रह गया।
तभी उनकी नज़र मुझ पर पड़ी और मैंने तुरंत अपना मुँह फेर लिया।

बहुत दिनों बाद एक दिन भाभी ने खुद मुझे आवाज़ लगाई, “अजय! अजय!”
मैं थोड़ा डर गया।

पास गया तो वह बोलीं, “मुझे कुछ काम है, क्या तुम मार्केट से कुछ सामान ला दोगे?”

मैंने ‘हाँ’ कर दी और उनका सामान ले आया।

भाभी अक्सर नहाकर छत पर कपड़े सुखाती थीं।
उनमें उनके ब्रा और पैंटी हमेशा साथ में होते थे—काफी पारदर्शी और सेक्सी।
मुझे जब भी मौका मिलता, मैं उन्हें पकड़कर सूंघ लेता और अपने लंड से घिसता था।

यहाँ तक कि एक पैंटी तो मैंने अपने पास बॉक्स में छिपाकर रख ली थी।
मुझे उनके अंतःवस्त्र बहुत अच्छे लगते थे।

शायद भाभी भी मेरे नज़दीक आना चाहती थीं।

एक दिन दोपहर को घर में कोई नहीं था.
तो स्वाति भाभी ने आवाज़ दी, “अजय, इधर आना!”

मैं गया तो बोलीं, “मेरा एक काम है, क्या तुम मेरे साथ मार्केट चल सकते हो?”
मैंने ‘हाँ’ कहा और हम दोनों मार्केट गए।

भाभी एक ‘ब्रा-पैंटी और नाइटी’ की शॉप में गईं।

मैं बाहर खड़ा था तो वह बोलीं, “अंदर आ जाओ ना, पसंद करने में मेरी मदद करो!”
मैंने झिझकते हुए पूछा, “मैं?”
तो भाभी मुस्कुराकर बोलीं, “और कौन?”

भाभी ने कई ब्रा-पैंटी निकालीं।
मैंने उनमें से एक जालीदार पारदर्शी मरून (Maroon) रंग की सेट पसंद की।

भाभी बोलीं, “साइज सही आ जाएगी ना?”
मैंने कहा, “नहीं आई तो मैं बदलवा दूंगा!”

हमने एक पारदर्शी गुलाबी नाइटी भी ली।
फिर हम दोनों वापस घर आ गए।

तभी भाभी ने मुझसे पूछा, “शॉप में तुम्हें क्या हो गया था?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं भाभी।”

तो वह बोलीं, “क्या कुछ नहीं? तुम थोड़े एक्साइटेड हो गए थे ना!”
भाभी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगीं।

वह बोलीं, “ओह! तो अंडरगारमेंट्स देख के?”
मैंने कहा, “हाँ!”

तब भाभी ने पूछा, “तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?”
मैंने कहा, “आज तक मौका ही नहीं मिला कि किसी को गर्लफ्रेंड बना सकूँ, और आप जैसी कोई स्मार्ट, सुंदर और अमेजिंग लड़की मिली ही नहीं!”
भाभी ने शर्माते हुए कहा, “ओह!”

फिर वह बोलीं, “अजय, मेरे सिर में थोड़ा दर्द हो रहा है, क्या डॉक्टर को बुला सकते हो?”
मैंने पूछा, “ज़्यादा है क्या?”
वह बोलीं, “नहीं, थोड़ा ही है। शायद मार्केट की धूप की वजह से।”

मैंने कहा, “भाभी, इसके लिए डॉक्टर की क्या ज़रूरत है? मैं आपकी थोड़ी मालिश कर देता हूँ।”

भाभी बोलीं, “थैंक यू अजय! वैसे भी इतनी धूप में कौन आएगा। अच्छा एक काम कर, तू बेडरूम में चल, वहाँ दवाई भी है।”

बेडरूम में पहुँचते-पहुंचते मेरा लंड अपना काम कर चुका था और खड़ा हो गया था।
मैंने उसे छुपाने की कोशिश की.
पर भाभी ने नोटिस कर लिया था।

मैंने उन्हें बेड पर लेटने को कहा और उनके सिर की मालिश शुरू कर दी।

मैंने अपने हाथों का जादू चलाना शुरू किया और वह मदहोश होने लगीं।

उन्होंने मुझसे पूछा, “अभी तुम्हारी उम्र गर्लफ्रेंड बनाने की है, कब बनाओगे?”
मैंने कहा, “जब आपकी जैसी कोई मिलेगी तब!”
वह हँसकर बोलीं, “मेरे जैसी तो नहीं मिलेगी, मैं इस दुनिया में एक ही हूँ!”

मैंने कहा, “भाभी, क्या मैं आपकी पूरी मालिश कर दूँ?”
वह पहले तो हिचकिचाईं, फिर बोलीं, “किसी को पता चल गया तो?”

मैंने कहा, “दिन में कौन आएगा भाभी? आपका सारा दर्द दूर हो जाएगा।”
वह बोलीं, “ठीक है, पर यह बात सिर्फ हम दोनों के बीच ही रहेगी, ओके?”

मैंने कहा, “हाँ भाभी, क्या आपको मुझ पर भरोसा नहीं है?”
वह बोलीं, “भरोसा नहीं होता तो तुम्हें बुलाती क्या?”

मैंने कहा, “ठीक है, मैं सरसों के तेल से मालिश कर देता हूँ। आप अपने कपड़े निकाल दें, नहीं तो खराब हो जाएंगे।”

वह बोलीं, “कपड़े मैं तेरे सामने नहीं निकाल सकती, करना है तो ऐसे ही कर!”

मैंने मन में सोचा— अभी तुम्हें तैयार कर दूंगा!
मैंने उनकी नाइटी ऊपर की और तेल से मालिश करने लगा।

उन्हें मज़ा आने लगा और वह धीरे-धीरे ‘आह… आह…’ करने लगीं।

मैंने उनकी जांघों तक नाइटी उठा ली और कान में कहा, “स्वाति भाभी, निकाल दो ना, खराब हो जाएगी!”

वह मान गईं और मैंने ही उनकी नाइटी निकाल दी।
वह सिर्फ उसी ब्रा और पैंटी में थीं जो हम मार्केट से लाए थे।

मालिश करते-करते मैंने उनके बूब्स प्रेस कर दिए।
वह कांप उठीं!

मैंने सॉरी बोला तो वह बोलीं, “तुझे मुझे देख के कैसा लग रहा है?”
मैंने कहा, “आप बहुत ही सेक्सी और सुंदर हो!”

मैंने आगे कहा, “भाभी, आप ही मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओ ना!”
वह बोलीं, “एक शर्त पर, कि यह बात हम दोनों के बीच राज रहेगी।”

मैंने तुरंत हाँ कर दी।
फिर मैंने धीरे से उनकी ब्रा के हुक खोल दिए।
उनके 32 साइज के बूब्स आज़ाद हो गए।

मैं उन्हें ज़ोर-ज़ोर से दबाने और चूसने लगा।
वह सिसकारियां लेने लगीं।

तभी मैंने अपना लोअर उतार दिया और मेरा लंड मेरी अंडरवियर के ऊपर से ही उनकी चुत को टच करने लगा।

वह मज़ा लेने लगीं और बोलीं, “आज मालिश का सही मज़ा आया! मेरे पति के पास तो मुझे किस करने का भी टाइम नहीं है। और तू जो छत पर मेरी ब्रा-पैंटी देखता था और एक चुराई थी, वह मुझे पता था! इसीलिए तुझे रिझाने के लिए मैंने मार्केट का प्लान बनाया था।”

मैंने उनकी पैंटी निकाल दी और उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए।
हम दोनों पूरी तरह नंगे हो गए।

हम एक-दूसरे को चूसने लगे—कभी होंठों पर, कभी गर्दन पर।
हम पागलों की तरह फोरप्ले करने लगे।

मैंने किस करते हुए कहा, “आज आपको मन भरकर चोदूंगा स्वाति!”
वह बोलीं, “मैं भी तुमसे पूरा दिन चुदना चाहती हूँ!”

मैंने उनकी जांघों और चुत के आसपास चूमना और चाटना शुरू किया।
वह मदहोश होकर चिल्लाने लगीं, “आई लव यू अजय! प्लीज फक मी हार्ड!”

मैंने उनकी चुत को जीभ से चाटना शुरू किया।
वह छटपटाने लगीं।

वह बोलीं, “आज तक मेरे पति ने कभी मेरी चुत नहीं चाटी, तुमने तो पूरा रस पी लिया! मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।”
फिर वह बोलीं, “अब मेरे लंड के रस की बारी है!”

वह मेरा लंड चूसने लगीं।
उन्हें तरीका नहीं पता था तो मैंने मोबाइल में एक पोर्न मूवी चला दी।
वह देख-देखकर चूसने लगीं।

फिर हमने ’69’ पोजीशन में एक-दूसरे को आनंद दिया।

आधे घंटे के फोरप्ले के बाद वह बोलीं, “बस अब डाल दो अपना लंड!”
मैंने अपने 6 इंच के लंड को उनकी चुत पर रगड़ना शुरू किया।

फिर बिना देरी किए एक ज़ोरदार झटका मारा!
लंड पूरा अंदर चला गया।
भाभी चिल्ला उठीं.
तो मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए ताकि आवाज़ बाहर न जाए।

मैं ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारने लगा।
कुछ ही देर में मैं उनके अंदर ही झड़ गया और वह भी दो बार डिस्चार्ज हुईं।

थोड़ी देर रिलैक्स करने के बाद हमने चुदाई का दूसरा राउंड शुरू किया।
इस बार हमने ‘डॉग़ी स्टाइल’ ट्राई किया।

मैंने पीछे से उनके कूल्हों को पकड़ा और लंड उनकी चुत में सेट किया।
लंड सपाक से अंदर घुस गया! मैं शॉट मारता रहा और अपना सारा वीर्य उनकी चुत में गिरा दिया।

हम थककर एक-दूसरे के ऊपर ही सो गए।

शाम के 4 बजे जब नींद खुली, तो वह बोलीं, “अरे, बहुत लेट हो गया!”
मैंने कहा, “अभी तो कार्यक्रम शुरू हुआ है!”

वह बिना कपड़ों के ही किचन में चाय बनाने गईं।
मैं उनके पीछे गया और उन्हें किचन प्लेटफार्म पर ही पकड़ लिया।

मैंने उनका एक पैर प्लेटफार्म पर रखा और पीछे से अपना लंड उनकी चुत में डाल दिया।

वह चाय भी बना रही थीं और मैं पीछे से धक्के मार रहा था।
हमने किचन में ही एक और राउंड पूरा किया और फिर एक ही कप में चाय पी।

अंतिम राउंड हमने बेड पर किया, जहाँ वह मेरे ऊपर आकर बैठ गईं और कूद-कूदकर चुदने लगीं।

सारा कमरा हमारी सिसकारियों और सेक्सी बातों से गूँज रहा था।
शाम के 6 बज गए थे और हम दोनों पूरी तरह संतुष्ट थे।

गुजराती भाभी सेक्स करके बहुत खुश थीं।
उन्होंने कहा, “ऐसी चोदाई आज तक किसी ने नहीं की थी! हमेशा मुझे ऐसे ही प्यार करना।”

मैंने उन्हें प्यार से कपड़े पहनाए और एक लंबा ‘लिप-किस’ किया।
फिर मैं चुपके से अपने घर आ गया।

उसके बाद हमारा बिंदास चुदाई का खेल काफी लंबा चला.

मेरी गुजराती भाभी सेक्स कहानी पर अपने विचार मुझे बताएं.
vr0746@gmail.com

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