गरम आंटी चुदाई कहानी में मेरी पड़ोसन आंटी मस्त माल थी, वे हमारे घर आती थी. एक बार मैं उन्हें बाइक पर कहीं छोड़ने गया. उनके हाथ मेरे साथ शरारत कर रहे थे.
फ्रेंड्स, मेरा नाम मयूर है और मैं मुंबई का रहने वाला हूँ.
मैं 28 साल का हूँ. मेरा रंग गोरा है और मैं 5 फुट 7 इंच लंबा हूँ.
मैं अभी जॉब कर रहा हूँ.
ये एक सच्ची गरम आंटी चुदाई कहानी है जो कि मेरी और मेरी पड़ोस वाली आंटी के बीच हुई एक सेक्स घटना पर आधारित है.
आंटी का नाम सोनल (बदला हुआ) था.
वे 42 साल की थीं … पर लगती सिर्फ 30-32 साल की थीं.
आंटी के बूब्स और गांड का तो कहना ही क्या था.
किसी की भी नजर सबसे पहले उनके दूध और चूतड़ों पर ही टिक कर रह जाती थी.
बाद में जब वह आंटी का कामुक चेहरा देखता तो उसके लंड में तनाव न आए, ऐसा होना नामुमकिन सा था.
आंटी का फिगर 38-32-40 का था.
उनके फिगर के ऊपर से आपको अंदाज़ा आ गया होगा कि उनके बूब्स और गांड काफी बड़े थे.
जब भी आंटी मोहल्ले से गुजरती थीं तो उनको देखकर कई लड़के और बूढ़े भी अपना लंड दबा लेते थे.
ये मेरा सौभाग्य ही था कि सोनल आंटी हमारी पड़ोसन थीं.
पड़ोस में रहने की वजह से उनका हमारे घर में रोज आना-जाना लगा रहता था.
वे अपने घर गृहस्थी की चीजें लेने के लिए हमारे घर आती रहती थीं.
मैं भी कई बार उनके घर जाता रहता था.
इसी वजह से आंटी हमारे घर में सबसे काफी घुल-मिल गई थीं.
उनके पति एक बड़ी मार्केटिंग कंपनी में मार्केटिंग डिपार्टमेंट में काम करते थे इसलिए कई बार उन्हें दूसरे स्टेट और कंट्री में भी जाना पड़ता था.
अपने इसी काम की वजह से अंकल सोनल आंटी के साथ ज़्यादा समय नहीं बिता पाते थे.
आंटी का एक बेटा भी है, जो अभी स्कूल में पढ़ता है और वह अपनी मम्मी के साथ घर पर रहता था.
एक बार सोनल आंटी को अपने किसी रिश्तेदार के यहां जाना था और उनके पति आउट ऑफ स्टेशन थे.
आंटी ने मेरी मां को बोला.
उस दिन मेरी ऑफिस से छुट्टी थी, इसलिए मां ने मुझे साथ ले जाने को बोला.
आंटी ने अपने लड़के की देख रेख कर जिम्मा मेरी मम्मी को सौंपा और वे मेरे साथ चलने के लिए रेडी होने लगीं.
कुछ ही देर बाद मैं आंटी को अपनी बाइक पर बिठाकर उनके रिश्तेदार के घर की तरफ निकल पड़ा.
उनके रिश्तेदार का घर मेरे घर से 40 मिनट की दूरी पर था.
जैसे ही आंटी घर से रेडी होकर निकलीं तो मैं आंटी को देखता ही रह गया.
उस दिन वे रेड कलर की साड़ी और ब्लैक ब्लाउज पहनी हुई थीं.
सच में वे इस तरह से सजी-धजी थीं कि मेरा मन उन पर डोल गया.
वे एक कयामत जैसी माल लग रही थीं.
आंटी मुझे देखती हुई मुस्कराईं और बोलीं- क्या हुआ?
मैंने सर झुका लिया और कहा- कुछ नहीं, मैं बस आपको देख कर एकदम से चौंक गया था.
वे हंसने लगीं और मेरी बाइक पर एक साइड अपनी टांगें लटका कर बैठ गईं.
मैंने गाड़ी आगे बढ़ा दी.
शुरुआत में मैं धीरे-धीरे बाइक चला रहा था ताकि कोई एक्सीडेंट न हो और हम लोग सुरक्षित पहुंच जाएं.
आंटी मुझे हाथ के इशारे से बता रही थीं कि हम लोगों को इस तरफ से जाना चाहिए तो जल्दी पहुंच जाएंगे.
हालांकि मुझे रास्ता मालूम था लेकिन तब भी आंटी अपने हाथ को आगे करतीं, तो उनका हाथ मुझसे स्पर्श होता और मुझे एक मस्त सी अनुभूति होने लगती.
मैं भी उनके कहे अनुसार बाइक चला रहा था.
उस समय एक बार कुछ ऐसा हुआ कि मैंने गलत टर्न ले लिया. आंटी, अपने हाथ से दूसरी ओर जाने का रास्ता दिखा रही थीं.
जब मैंने गलत दिशा में बाइक मोड़ी तो आंटी बोलीं- अरे अरे गलत जगह मोड़ दी तुमने … इस तरफ नहीं इस तरफ जाना है.
उसी वक्त मैंने ब्रेक मारा, जिससे आंटी आगे की तरफ आ गईं और उनके बड़े बड़े बूब्स मेरी पीठ पर लग गए.
उनके बड़े बूब्स को मैंने उनके कसे हुए ब्लाउज में कई बार देखे थे, पर आज जब वे मेरी पीठ से टच हुए तो मुझे अचानक से एक करंट सा लगा और मेरे पूरे जिस्म में हलचल हो गई.
अब मुझे मजा आ गया था तो मैंने जानबूझ कर ब्रेक लगाना शुरू कर दिए और पूरे रास्ते में 3 बार ऐसा हुआ कि उनके दूध मेरी पीठ पर टकरा गए.
कुछ देर के बाद हम दोनों उनके रिश्तेदार के घर पहुंच गए.
वहां कोई पूजा थी तो आंटी को उधर देर तक उधर रुकना पड़ गया था.
फिर जब उधर का काम खत्म हुआ तब तक शाम हो गई थी.
अब हम लोग वहां से निकले.
आते समय रात हो गई थी तो सड़क पर अंधेरा हो गया था.
अंधेरे में बाइक को चलाते समय मैंने जानबूझ कर कई बार ब्रेक लगाए और आंटी के बूब्स के टच का मजा ले रहा था.
शायद आंटी को भी कुछ कुछ अहसास हो गया था मगर उन्होंने कुछ कहा नहीं.
ऐसे ही हम दोनों घर पहुंच गए.
उसके दो दिन बाद आंटी ने सीधे मुझसे कहा कि मयूर तुम्हारा बाजार तरफ जाना हो, तो प्लीज मुझे भी ले चलना.
मुझे तो खुद आंटी की चूचियों का मजा लेने का मन करने लगा था, तो मैंने उन्हें देख कर तुरंत हां कह दिया कि ठीक है, आज शाम को ऑफिस से जल्दी आ जाऊंगा. मुझे भी कुछ खरीददारी करनी है, तो आप भी साथ में चली चलना.
उन्होंने ओके कह दिया.
शाम को हम दोनों ने बाजार जाने के बहाने से फिर से रगड़ सुख लिया.
अब ये कई बार होने लगा था.
आंटी को बाहर जाना होता तो वे मुझे बुला लिया करती थीं.
मैं भी उनके साथ चला जाता था और उनके मादक जिस्म के स्पर्श का मजा ले लेता था.
इस बात को आंटी ने शायद बहुत अच्छी तरह से नोटिस कर ली थी और वे खुद भी मेरा संसर्ग चाहने लगी थीं.
अंकल की गैर मौजूदगी में उनके पास शायद कोई और विकल्प भी नहीं था.
उनके बेटे की बोर्ड की परीक्षाएं नजदीक आ गई थीं और वह पढ़ने में अच्छा नहीं था.
इसके लिए आंटी ने मुझसे कहा कि तुमको जॉब से जब भी टाइम मिला करे, तो उस फ्री टाइम और छुट्टी में तुम मेरे बेटे की पढ़ाई में हेल्प कर दिया करो.
मैंने ओके कह दिया क्योंकि मेरे लंड को अब आंटी की चुत मिलती दिखने लगी थी.
अब मैं ऑफिस से आकर उनके घर में रोजाना ही जाने लगा.
आंटी का घर वन बी एच के का था.
उनके बेटे को मैं हॉल में पढ़ाने बैठ जाता था और आंटी हॉल से लगे कमरे में बेड पर बैठ कर अपना मोबाइल चलाती रहती थीं.
मुझे कई बार आंटी के हस्बैंड भी मिलते और वे अपने लड़के को पढ़ाने के लिए मुझे थैंक्यू भी बोलते थे.
एक बार किसी मार्केटिंग ट्रिप के चलते उन्हें 15 दिन आउट ऑफ कंट्री जाना था.
अंकल मुझसे बोलकर गए कि मैं उनके बच्चे को अच्छे से पढ़ाऊं और आंटी की हेल्प कर दूँ .. अगर उन्हें किसी चीज की जरूरत पड़े तो देख लेना.
मैंने ओके कह दिया.
दो दिन के बाद संडे आया तो उस दिन दोपहर को मैं आंटी के बेटे को पढ़ा रहा था.
तभी मेरे दिमाग में कुछ खुराफात आई.
मैं आंटी के बेटे को होमवर्क देकर पानी पीने किचन में चला गया.
उधर से मैंने देखा कि आंटी का रूम का दरवाजा खुला था और वे अपनी नाइटी पहन कर सो रही थीं.
उनकी पीठ मुझे साफ दिखाई दे रही थी.
उसी वक्त आंटी ने करवट ली और उनकी नाइटी उनकी जांघ तक ऊपर उठ गई थी.
मैं तो उनकी सफेद संगमरमर सी चिकनी जांघ को देख कर एकदम मदहोश हो गया और उन्हें काम भाव से देखता रहा.
उन्होंने अपनी एक टांग घुटने से उठाई हुई थी.
मैंने नीचे बैठकर देखा तो आंटी की जांघ में अन्दर तक का मस्त नजारा दिख रहा था.
यह सीन देख कर मेरा लंड एकदम से टाइट हो गया.
मैंने वॉशरूम में जाकर मुठ मार ली.
ऐसे ही 1-2 दिन और चला.
शायद मेरी किस्मत भी मेरा साथ दे रही थी.
हुआ यूं कि हॉल का एसी खराब हो गया और मैं और उनका बेटा आंटी वाले कमरे में पढ़ने के लिए आ गए थे.
आंटी बेखबर लेटी हुई थीं. मैं आंटी के बेटे को काम देकर उनकी नंगी जांघों को देख रहा था.
आंटी ने भी मुझे एक-दो बार ऐसा करते हुए देख भी लिया था.
ऐसे ही एक दिन मैं उनके बेटे को पढ़ाने गया तो उनका बेटा घर पर नहीं था.
मैं आंटी के कमरे में चला गया.
आंटी मस्त गहरी नींद में टांग पसारे हुए सो रही थीं.
उनकी नाइटी भी घुटनों तक आ गई थी. आज मुझे अच्छा मौका मिला था.
मैं आंटी के पास जाकर बैठ गया और देखने लगा.
धीरे-धीरे मैं उनके नंगे पैर को टच करता रहा और धीरे-धीरे उनकी नाइटी ऊपर करके जांघों को छूने लगा.
उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी.
जब मुझसे रहा नहीं गया, तो मैं उनसे चिपक कर लेट गया.
आंटी की पीठ से मैं अपनी छाती को चिपका कर लेटा हुआ था.
जब आंटी की तरफ से कोई विरोध नहीं हुआ तो मैंने अपना लंड उनकी गांड से टच करवाना शुरू कर दिया था.
गांड की गर्मी से मेरा लंड कड़क होने लगा और मैंने धीरे से आंटी की गांड की दरार में घुसेड़ना शुरू कर दिया था.
अब मुझे मजा आ रहा था और आंटी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी.
मैंने अपना एक पैर आंटी के चूतड़ पर चढ़ा दिया और मस्ती से उनकी गांड की खाई में लौड़े को अन्दर तक घुसेड़ने की कोशिश करने लगा.
साथ ही मैंने उनकी नाइटी को अपने हाथ से उठा कर उनकी पैंटी तक कर दी थी.
इतने पर आंटी कुछ नहीं रिएक्ट कर रही थीं तो मैं समझ गया था कि आंटी को रस मिल रहा है.
यह बात सोचते ही मैं उनके ऊपर चढ़ने लगा.
अचानक से वे नींद से जाग गईं और एक बार को हिलीं तो पर उन्होंने कुछ कहा नहीं.
मतलब साफ था कि अब वे भी मेरे लौड़े की सख्ती से मजा भी ले रही थीं.
फिर थोड़ा-थोड़ा करके मैंने उनके दोनों पैरों पर से नाइटी को हटाया और उनकी पैंटी के ऊपर तक खींच दिया.
अब मैं अपना हाथ उनकी टांगों के बीच में डालकर चुत और गांड के जोड़ को अपने हाथ से सहलाने लगा.
आंटी की जांघें एकदम नर्म रेशम जैसी थीं.
उनकी चिकनी जांघों पर हाथ फेरते हुए मैं धीरे-धीरे चूत पर पहुंच गया.
आंटी चूत कुछ नम हो गई थी.
उससे साफ समझ आ रहा था कि चुत लंड लंड करने लगी है.
मैं आंटी की चुत पर हाथ फेरने लगा और अपनी एक उंगली से चड्डी के ऊपर से ही चुत की फांक में घुसेड़ने का प्रयास करने लगा.
फिर मैंने अपना दूसरा हाथ उनके मुलायम बूब्स पर रख दिया और धीरे-धीरे उनके एक दूध को सहलाने और दबाने लगा.
आंटी भी इस सबसे उत्तेजित होने लगी थीं और उनकी मदभरी सिसकारियां निकलने लगी थीं ‘उम्म … उम्म … आहम्म …’
वे अब जाग चुकी थीं और मेरी हरकतों का मजा ले रही थीं.
कुछ ही देर के बाद उन्होंने करवट बदल ली और अब वे मेरी ओर मुँह करके सो गईं.
मैंने कुछ पल रुकने के बाद उन्हें लिप किस किया.
पर पहले उन्होंने कोई भी रेस्पॉन्स नहीं दिया.
जब मैंने दोबारा से आंटी को लंबा किस किया तो वे जरा सा हिलीं लेकिन कुछ किया नहीं.
फिर मैंने जबरन उनके मुँह में अपना लगा कर जीभ को अन्दर पेलने का प्रयास किया तो उनका भी रेस्पॉन्स मिलने लगा.
अब आंटी भी मेरे होंठों को गर्मजोशी से चूसने लगीं.
कोई 5 मिनट तक किस करने के बाद मैंने आंटी की नाइटी को ओपन कर दिया.
उन्होंने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी.
मैं उनके एक दूध को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.
वे भी जोश में आकर कहने लगीं- और ज़ोर से चूसो मेरे दूध को मयूर … आह मैं कई बार तुमसे अपने चूचों को चुसवाना चाहती थी … आह आज सारा दूध पी जाओ इन दोनों का!
आंटी के बूब्स चूसते हुए मैंने अपना एक हाथ उनकी पैंटी में डाल दिया और उनकी चूत के ऊपर हाथ फेरने लगा.
चुत को मसलने से आंटी कुछ ज़्यादा ही तड़प उठीं.
उन्होंने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से दबा दिया और पकड़ कर सहलाने लगीं.
फिर उन्होंने मेरे पैंट को खोल कर अंडरवियर निकाल दी और लंड को सहलाने लगीं.
मैं भी उनके होंठों को किस करता, कभी उनके बड़े-बड़े बूब्स को चूसता.
आंटी के बूब्स इतने बड़े थे कि मैं अपने एक हाथ से उनके दूध को पूरा पकड़ भी नहीं पा रहा था.
मैं एक हाथ से एक बूब को चूसता और दूसरे हाथ से दूसरे बूब को दबा देता.
वे भी काफी उत्तेजित हो गई थीं.
उन्होंने अपने मुँह में लंड ले लिया और चूसने लगीं.
कुछ 5 मिनट चूसने के बाद मेरा लंड स्टील की रॉड की तरह कड़क हो गया.
फिर भी आंटी अपने मुँह से पूरे लौड़े को मस्ती से चूसे जा रही थीं.
करीब 10 मिनट के बाद मैंने अपना पूरा माल उनके मुँह में छोड़ दिया.
आंटी ने भी पूरा रस पी लिया और वे फिर से मेरे लंड को चूसने लगीं.
मैं भी उनके बूब्स दबा रहा था.
कुछ ही 5 मिनट में ही मेरा लंड फिर से टाइट हो गया.
फिर मैंने आंटी की नाइटी को ऊपर करके निकाल दिया.
वे अब पूरी नंगी हो चुकी थीं.
मैंने उनकी चूत के ऊपर लंड को रगड़ना शुरू कर दिया.
आंटी भी लंड की गर्मी तड़प रही थीं.
फिर मैंने भी देर न करते हुए एक ज़ोर का धक्का लगाया और आधा लंड आंटी की पानी छोड़ती चूत में दनदनाता हुआ घुस गया.
अचानक हुए इस हमले की वजह से आंटी की चीख निकल गई … पर मैंने जल्दी से अपने हाथ से उनके मुँह को दबाया और उनको पेलता रहा.
कुछ ही देर में लंड ने आंटी को खुश करना शुरू कर दिया था और अब वे भी अपनी मादक आवाजें निकाल रही थीं.
‘उम्म्म … आआह … उउह्ह … चोद दे मेरी जान आह कब से मेरे साथ मस्ती कर रहा है … आह बड़ी लज्जत मिल रही है तेरे लंड से चुदने में आह!’
आंटी की कामुक आवाजें निकल रही थीं.
अब जबकि आंटी मस्ती से लौड़े का मजा लेने लगी थीं तो मैं भी उनकी चुत में धीरे-धीरे से झटके दे रहा था.
आंटी अपनी टांगों को पूरी तरह से फैला कर मुझे चोदने में आसानी कर रही थीं और मैं भी उनके दोनों दूध पकड़ कर उनकी चुत पर डिप्स जैसी लगाने लगा था.
कभी कभी मैं आंटी के एक दूध को अपने मुँह में भर कर खींच कर चूसता तो उससे उन्हें और ज्यादा मजा आ रहा था.
मैंने पूछा- कब से नहीं चुदी हो आंटी आप?
वे हंसने लगीं और उन्होंने कहा- काफी टाइम से!
मैं समझ गया कि आंटी की चूत चुदाई अब होती ही नहीं है इसलिए उनको मेरे लंड की सख्त जरूरत महसूस होने लगी थी.
आज आंटी बड़े मजे से चुदवा रही थीं.
वे बोलीं- मयूर मेरी गांड के नीचे मुझे एक तकिया रखने दे.
मैंने बिना लंड चुत से निकाले उनकी गांड के नीचे तकिया रखने की कोशिश की तो उन्होंने अपनी गांड को ऊपर कर लिया और तकिया रखवा कर वापस लंड से चुदने का मजा लेने लगी थीं.
मैं आंटी को बीस मिनट तक धकापेल चोदता रहा और वे एक बार झड़ गईं तब बोलीं- आह अब और कितनी देर तक करेगा?
मैंने कहा- बस कुछ देर और झेलो आंटी … मैं आने ही वाला हूँ. बस आप तो यह बताओ कि माल अन्दर निकालूँ या बाहर छोड़ूँ?
आंटी बोलीं- अन्दर भी छोड़ेगा तब भी कुछ नहीं होने वाला है. मेरा ऑपरेशन हो चुका है.
मैंने बिंदास चुत चुदाई करना शुरू कर दी और आठ दस लंबे लंबे शॉट मारकर मैं आंटी की चुत में ही झड़ गया.
अब आंटी की चुत से रस बहने लगा था, तो मेरा लंड सटासट अन्दर-बाहर हो रहा था.
उनकी रसीली चुत में कड़क लंड चलने की वजह से कमरे में फच-फच की मस्त आवाजें आने लगी थीं.
उनकी चुत से निकलने वाली आवाजें कमरे के माहौल को और ज्यादा सेक्सी बना रही थीं.
करीब 15 मिनट तक मैं आंटी को मिशनरी पोजीशन में चोदता रहा और उनकी चुत में ही मैंने अपना पूरा माल छोड़ दिया.
मैं अब तक तीन बार झड़ चुका था. दो बार आंटी की चुत में और एक बार उनके मुँह में.
मैं काफी थक गया था.
इस बार जब मैं झड़ा था तो उनके ऊपर ही निढाल हो कर सो गया.
हम दोनों काफी थक गए थे तो दोनों ही गहरी नींद में सो गए थे.
करीब एक घंटे बाद आंटी के मोबाइल की घंटी बजने से हमारी नींद टूटी.
आंटी ने फ़ोन देखा तो वह एक स्पाम कॉल थी.
अब हम दोनों एक दूसरे को प्यार से देखने लगे.
जल्दी ही हमारे बीच वापस चूमाचाटी होने लगी.
आंटी बोलीं- एक बार और करते हैं?
मैंने कहा- हां हो जाए.
इस बार आंटी बोलीं- अब मैं सवारी करूंगी.
मैंने समझ लिया कि वे लौड़े पर कूदेंगी.
मैं उनके नीचे लेट गया और आंटी मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे लंड पर बैठ गईं.
मेरे लंड में उनकी चुत घुसने लगी.
आंटी धीरे-धीरे मेरे कड़क लंड पर ऊपर-नीचे होने लगीं और उनके बड़े-बड़े बूब्स भी हवा में लहराने लगे.
मैं भी उनके दोनों मम्मों को पकड़ कर मस्ती से भींच रहा था और दबा रहा था.
कभी मैं आंटी के एक दूध को अपने मुँह में लेकर निप्पल को काट लेता तो आंटी के मुँह से सिसकारियां निकल जा रही थीं.
मैंने उन्हें उसी पोजीशन में करीब 20 मिनट तक चोदा और उसके बाद आंटी थक कर मेरे सीने पर ही ढह गईं.
मैं अभी झड़ा नहीं था तो मैंने आंटी को डॉगी स्टाइल में चोदने की तैयारी की.
मैंने अपने लंड के सुपारे को उनकी चुत में सैट कर लिया.
फिर मैंने आंटी की बड़ी सी गांड को पीछे से पकड़ा और एक ही झटके में पूरा लवड़ा अन्दर डाल दिया.
आंटी कि आह निकली और मैं अच्छे से धक्के देकर उनको चोदने लगा.
आंटी भी कुछ धक्कों के बाद अपनी गांड को आगे-पीछे करती हुई मस्ती से चुदवाने लगी थीं.
आधा घंटा की धकापेल चुदाई के बाद मैंने आंटी की पीठ के ऊपर अपना माल छोड़ दिया.
गरम आंटी चुदाई करने के बाद मैं और आंटी वापस वहीं सो गए.
शाम को हम दोनों ने एक साथ में ही बाथरूम में जाकर नहाया.
आंटी ने मेरे लौड़े को मस्ती से साफ किया और चूसा.
मैंने भी उनकी चुत में उंगली करके चुत को अन्दर तक साफ किया.
उसके बाद पहली बार मैंने आंटी की चुत को चूसा.
बाद में हम दोनों ने एक-दूसरे को अच्छे से नहलाया.
मैंने अगले दिन के लिए पूछा, तो आंटी बोलीं- हां मेरा बेटा तो अपने मामा के घर गया है और वह 3 दिन बाद ही आएगा.
मैंने यह सुना तो अगले तीन दिन के लिए ऑफिस से छुट्टी ले ली.
बाद में मैं अपने घर में आंटी को हेल्प करने के बहाने से उनके घर आ जाता और उनको चोद लेता था.
तीन दिन के बाद जब उनका बेटा वापस आ गया था.
उसके आने के बाद भी मैंने आंटी की फुद्दी मारनी नहीं छोड़ी.
सुबह वह स्कूल चला जाता तो मैं लंच टाइम में आकर आंटी को चोद लेता था.
अगली सेक्स कहानी में मैं आपको ये बताना चाहता हूँ कि मैंने आंटी के बेटे के घर में होते हुए भी आंटी की चुदाई कैसे की और फर्स्ट टाइम उनकी गांड कैसे मारी.
अभी तो आंटी का बेटा अपनी डिग्री की पढ़ाई के लिए पंचगिनी गया है और वह वेकेशन पर ही वापस आता है.
मैं अभी भी आंटी की चूत चुदाई रोज करता हूँ.
आंटी भी शाम में किसी ना किसी बहाने से मुझे बुला लेती हैं और चुदवाती हैं.
इस बात को पूरे 4 साल हो गए हैं, फिर भी आंटी मुझसे अभी भी मजे से चुदवाती हैं.
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