हॉट आंटी चुदाई स्टोरी में मेरे पड़ोस की आंटी ने मुझे अपने जिस्म के जाल में फंसा कर चुदाई के लिए तैयार कर लिया था. मैं भी आंटी को छोड़कर मजा लेना चाह रहा था.
दोस्तो, मैं साहिल आज अपनी पड़ोसन आंटी को लेकर लिखी गई सेक्स कहानी के आगे का भाग लिख रहा हूं.
आपने पिछले भाग
पड़ोसन आंटी की वासना
में पढ़ लिया था कि आंटी मेरे साथ चुदने के लिए गर्म हो गई थीं और अपनी चुत चुसवा कर एक बार झड़ चुकी थीं.
अब आगे हॉट आंटी चुदाई स्टोरी:
कुछ देर नंगे पड़े रहने के बाद आंटी की चूत में फिर से चुलबुली मचने लगी.
मैंने आंटी के स्तनों पर हाथ रखा तो आंटी ने मेरे हाथ को हटाया और वे मेरे ऊपर आकर बैठ गईं.
मेरा लंड आंटी के चूतड़ों के बीच में फंस गया था.
मैं अपने दोनों हाथों से आंटी के स्तनों को मसलने लगा.
अब तक आंटी पुनः गर्म होने लगी थीं.
उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे सारे शरीर को मसलना शुरू कर दिया.
फिर वे झुक कर मुझे किस करने लगीं और अपने मम्मे मेरे सीने से रगड़ने लगीं.
वे मेरे गले पर, सीने पर और जिधर उनको समझ आ रहा था, वे चूमती जा रही थीं.
कुछ ही देर में आंटी ने मेरे पूरे शरीर को चूम चूम कर मुझे जोश से भर दिया और मेरा लंड भी एकदम तन कर खड़ा हो चुका था.
अब आंटी ने अपने हाथ से लंड को मसलना शुरू कर दिया और उसके सुपारे की चमड़ी को भी हाथ से पीछे करती हुई मुट्ठी मारने लगीं.
फिर आंटी ने लंड को चूसना चालू कर दिया लेकिन मेरी काली लंबी झांटें आंटी के मुँह में फंस रही थीं.
मैंने अपनी झांटों को 4 महीने से क्लीन शेव नहीं किया था तो वे काफी बड़ी बड़ी हो गई थीं.
आंटी अपनी मदभरी आवाज में बोलीं- चल आज तुझे जैसा बचपन में नहलाती थी, चल वैसे ही नहलाती हूँ. तेरी झांटों को भी साफ कर दूँगी!
आंटी ने मुझे उठाया और मेरे लंड को पकड़े हुए बाथरूम में ले गई.
अन्दर आकर आंटी ने शॉवर चालू किया और मेरे शरीर पर अपना हाथ फेरना चालू कर दिया.
मैं भी आंटी के स्तनों को मसलने लगा और उनके शरीर पर भी हाथ फेरने लगा.
कुछ देर बाद आंटी ने मेरे शरीर पर शैम्पू लगाया और लंड पर भी लगा दिया.
वे मेरे लंड की त्वचा को आगे पीछे करते हुए उसकी मुट्ठी सी मारने लगी थीं.
उन्होंने मेरी पूरी बॉडी को अच्छी तरह से साफ कर दिया.
मैंने भी आंटी की पूरी बॉडी पर शैम्पू लगा कर और हाथ फेर फेर कर साफ किया और शॉवर चालू करके हम दोनों एक-दूसरे की बॉडी को रगड़ कर साफ करने लगे.
मैंने आंटी के शैम्पू की शीशी को उठाया, जिससे वे अपनी चूत को साफ़ करती थी.
उसे मैंने अपने हाथ में लिया और उनकी चूत को घिसने लगा.
आंटी के ऊपर मदहोशी छाने लगी… वे आह आह करने लगीं.
मैंने अगले ही पल आंटी की चूत में उंगली घुसेड़ दी और चूत के अन्दर तक साबुन लगाने लगा.
इससे आंटी को हल्की हल्की जलन सी होने लगी.
वे मना करने लगीं तो मैं अपने हाथ की एक उंगली को स्लोली स्लोली उनकी चूत के अन्दर तक डाल कर मजा लेने लगा.
आंटी को अब अच्छा लगने लगा था तो उन्होंने भी अपनी एक टांग ऊपर उठा दी और वे मेरा पूरा साथ देने लगीं.
फिर मैंने एक रबर की पाइप को नल से लगाया और उसके दूसरे मुँह को चुत में लगा दिया.
फिर कम तेज धार के साथ नल की टोंटी को खोलते हुए उनकी चूत में डालने लगा.
आंटी को मजा आने लगा और इस तरह से मैंने उनकी चूत को एकदम साफ कर दिया.
अब तक मेरा लंड हल्का ढीला हो गया था.
मैंने आंटी के नीचे बैठ कर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
आंटी भी मजे से अपनी चूत चटवा रही थी और मेरे बाल पकड़ कर मुझे अपनी चुत पर रगड़ती हुई कामुक सिसकारियां ले रही थीं.
उनकी मदभरी आवाज सुनकर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था.
आंटी ने अपनी एक टांग को फैला कर ऊपर को उठा रखा था.
मैंने भी उनकी चुदास को समझा और चुत के अन्दर जीभ अन्दर डाल कर तेजी से चूत को चाटने लगा.
आंटी से रहा नहीं जा रहा था तो वे तेज तेज आहें और कराहें भरती हुई मेरे सर को अपनी चुत पर रगड़ने लगी थीं.
उन्हें अत्याधिक गर्म देख कर मैंने चुत से मुँह हटाया और खड़ा हो गया.
वे कुछ समझ पातीं, तब तक मैंने अपने लंड को अचानक से उनकी चुत में पेल दिया.
आंटी दर्द के कारण हल्की सी तड़फ उठीं और उनकी चीख निकल गई.
मैंने आंटी को धीरे धीरे चोदना शुरू किया और चोदते चोदते आंटी के दूध मसलता और चूसता रहा.
आंटी को भी इस तरह से खड़ी अवस्था में चुदने से मजा आ रहा था.
उन्होंने मेरे कंधे का सहारा लेकर अपनी टांग को और ज्यादा फैला दिया.
मैंने भी तेज तेज शॉट मारे और मैं झड़ गया.
वे हंस कर मेरे सीने से लिपट गईं और मैंने शॉवर चालू कर दिया.
हम दोनों अपने गर्म जिस्म को ठंडे पानी से ठंडा करने लगे और नहा लिया.
कुछ देर बाद मैंने उन्हें देखा तो वे बोलीं- चित लेट जाओ, बाल साफ करने आए थे न!
मैं हंसते हुए फर्श पर लेट गया.
उन्होंने ने मेरी झांट के बालों को साफ कर दिया और अच्छे से मेरे लंड को पानी से धोकर कहा- अब खड़े हो जाओ!
मैं खड़ा हुआ तो आंटी ने मेरे सारे शरीर तौलिया से पौंछा और मेरे सारे शरीर पर तेल लगाया.
वे बिल्कुल उसी तरह से कर रही थीं, जैसे बचपन में मेरे साथ किया करती थीं.
मेरे शरीर को तेल से मसाज देने के बाद आंटी ने मेरे लंड पर भी तेल लगाया और अच्छे से उसकी मालिश की, फिर सुपारे की चमड़ी को पीछे करते हुए टॉप को खोल दिया.
मेरा गुलाबी टोपा मस्त लग रहा था.
उन्होंने उसे चूमा और मेरे लंड को चूस चूस कर वापस खड़ा कर दिया.
मैंने कहा- ये तो खड़ा कर दिया आपने!
वे बोलीं- तो!
मैंने कहा- अब इसको बिठाओ आप!
वे बोलीं- चलो बिस्तर पर चलते हैं.
मैंने आंटी को पलंग पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया.
मैंने अपने लंड को पहले उनके मुँह में डाल दिया.
वे मजे से लंड चूसने लगीं और अब उन्हें झांट के बाल दिक्कत नहीं कर रहे थे.
लंड चूसने के बाद मैंने 69 में आकर उनकी चूत में मुँह लगा लिया और उनकी चूत में जीभ को अन्दर तक डालकर आंटी की चुत की मालिश करने लगा.
आंटी भी ‘उफ … आह …’ की आवाज निकाल कर मेरा जोश बढ़ा रही थीं.
आंटी ने भी मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और हम दोनों 69 की पोजीशन में एक दूसरे को सुख देने लगे.
कुछ देर बाद आंटी बोलीं- अब सीधे होकर मेरी चुदाई करो!
मैंने उठ कर आंटी को सीधा लिटाया और उनकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख कर उनकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया ताकि उनकी चूत थोड़ी ऊपर को आ जाए.
फिर मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर रख कर रगड़ना चालू कर दिया.
आंटी की चूत मेरे मुँह की लार से एकदम गीली हो गई थी.
वे खुद लंड लेने को बेताब हो रही थीं और अपनी चूत को लंड को तरफ ढकेल रही थीं.
‘उह … आह …’ की आवाज के साथ वे मुझे गाली देने लगी थीं- अब कितना तड़पाओगे … जल्दी से अपना लंड डाल भी दे कमीने!
मैंने भी लोहा गर्म जान कर अपना लौड़ा उनकी चूत पर सैट किया और एक झटके में अपना पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया.
आंटी दर्द से कराह उठीं और मुझे गाली देने लगीं- साले हरामी एकदम से पेल देता है कुत्ते दर्द होता है आह!
मैं रुक गया और कुछ देर चूत में डाल कर रखने के बाद मैंने लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया.
आंटी को भी अब मजा आने लगा था और वे भी मेरा साथ दे रही थीं.
मैंने उनकी टांगों को फैलाया और थोड़ा और ऊपर उठा कर स्पीड को बढ़ा दिया.
कमरा उनकी सिसकारियों और चट चट की आवाज से भर गया था.
कुछ देर तक चूत चोदने के बाद मैं उनके मम्मों को दबाने लगा और किस करने लगा.
फिर उनको करवट देकर लिटा कर उनके पीछे लेट गया.
मैंने उनकी एक टांग को उठाया और अपने लंड को उनकी चूत में डाल दिया.
वे मस्त हो गईं और मैं उन्हें धकापेल चोदने लगा.
साथ ही मैं अपने एक हाथ से उनके चुचे दबा रहा था.
हॉट आंटी चुदाई करवाती हुई मुझे गाली दे रही थीं- आह साले… इतना जोर से क्यों दबा रहा है आह मर गई!
कुछ देर चुदने के बाद आंटी ने अपनी गांड मरवाने की इच्छा जताई.
मैंने तुरन्त उन्हें घोड़ी बन जाने को कहा.
आंटी भी झट से घोड़ी बन गईं.
मैंने उनकी गांड में जैल लगाया और घोड़े की तरह उनके ऊपर चढ़ गया.
मैंने लंड सैट किया और उनकी गांड मारने लगा.
पहले तो आंटी को थोड़ा दर्द हुआ लेकिन कुछ देर बाद मैंने अपनी स्पीड कुछ ज्यादा ही बढ़ा दी.
आंटी को भी मजा आ रहा था.
कुछ देर गांड मारने के बाद मैंने लंड निकाला और पीछे से ही उनकी चूत में पेल दिया.
मैं उन्हें धकापेल चोदने लगा.
कुछ देर बाद मैंने झटका दे देकर चोदना शुरू किया तो आंटी ‘आह आह’ करती हुई झड़ गईं.
मैं भी कुछ पल के लिए रुक गया.
फिर आंटी को सीधा लिटा कर उनके मुँह में लंड डाल दिया.
वे चूसने लगीं.
मैंने कहा- आंटी, हाथ से मुट्ठी मारो न!
आंटी ने अपने हाथ से मेरे लौड़े की मुठ मारनी शुरू कर दी.
मैं झड़ने वाला था तो आंटी कहने लगीं- मेरे मुँह में डाल दो!
मैंने उनके मुँह में लंड डाला और मुँह में ही झड़ गया.
आंटी ने सारा माल अपने मुँह में भर लिया और पी लिया.
उसके बाद आंटी और में नंगे ही बेड पर लेटे रहे.
थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा था लेकिन दो बार धकापेल चुदाई में आंटी की चुत से खू.न आ रहा था और उन्हें दर्द भी हो रहा था.
मैंने जबरन उनकी चूत में लंड डालना चाहा.
तो उन्होंने मदोहोशी भरी आवाज में कहा- अब क्या मेरी चूत को आज ही फाड़ डालेगा!
मैंने हंस कर कहा- ठीक है, लेकिन मेरा लंड तन कर खड़ा है आंटी … इसके लिए तो कुछ करना पड़ेगा.
आंटी ने कहा- मैं मुठ मार देती हूँ.
पर मैं तो कुछ और ही सोच रहा था.
मैं बेड से नीचे आकर खड़ा हुआ और आंटी से कहा- आप सीधी लेट जाओ, मेरी तरफ सर करके.
उन्होंने खुद ही अपना मुँह खोल दिया और गाली देकर कहने लगीं कि मैं समझ गई कुत्ते कि तू क्या चाहता है, आ जा कमीने अब मेरा मुँह भी चोद ले!
मैंने उनके सर को पकड़ा और लंड उनके मुँह में डाल कर मुख-चोदन करने लगा.
आंटी भी जीभ को लंड पर घुमाए जा रही थीं, जिससे मैं जोश में आकर लंड को ज्यादा अन्दर डाल देता तो आंटी का उबकाई आ जाती.
मैंने कुछ देर तक बाद कहा कि आंटी मुठ ही मार दो!
तो आंटी ने मुझको लिटाया और मेरे लंड को मुँह में भर कर चूसने लगीं और लंड को अपने मुँह की लार से तर कर दिया.
फिर तेजी से मुठ मारती हुई बोली- जब तू छोटा था तो तेरा लंड मेरी छोटी उंगली जितना था और आज बालिश्त भर का हो गया है.
मैं हंस दिया.
आंटी ने लंड चूसने की स्पीड बढ़ा दी और मैं भी झड़ गया.
उस दिन मैं सारी रात आंटी के साथ नंगा ही लेटा रहा और उनकी चुत से लंड को चिपका कर सो गया.
उस दिन के बाद से मैंने आंटी को अब तक न जाने कितनी बार चोद लिया है, कोई गिनती ही नहीं की है.
आपको यह हॉट आंटी चुदाई स्टोरी कैसी लगी, प्लीज अपने कमेंट्स जरूर लिखें.
धन्यवाद.