पड़ोसन आंटी ने मुझे फंसाकर चूत मरवा ली

Views: 1 Category: Padosi By rahuldevjk2 Published: August 25, 2026

मेच्योर आंटी सेक्स कहानी में पड़ोस में अंकल आंटी रहते थे. अंकल अक्सर बाहर रहते थे. आंटी का हमारे घर आना जाना था. वे अक्सर मुझे अपने घर सोने के लिए बुला लेती थी.

दोस्तो, मेरा नाम राहुल है.
इस समय मेरी उम्र 25 साल है और मेरी लंबाई 6 फीट की है.

मैं अन्तर्वासना पर बहुत समय से सेक्स कहानियां पढ़ता आ रहा हूँ, इसमें मुझे बहुत मजा आता है.
पर आज मैं आपके सामने अपनी सेक्स कहानी लेकर आया हूँ.

यह मेच्योर आंटी सेक्स कहानी तब की है, जब मैं 12 वीं कक्षा में पास हुआ था.

हमारे घर से 2 घर के बाद एक आंटी और अंकल रहने आए थे.
बाद में उन्होंने वह मकान खरीद लिया था.
अंकल महीने में 4 या 5 दिन ही घर में रहते थे क्योंकि किसी कंपनी में काम करते थे.

आंटी मेरी मम्मी की फ्रेंड थीं.
जब अंकल अपने काम से घर से कहीं बाहर चले जाते थे तो आंटी मुझे अपने घर सोने के लिए बुला लेती थी क्योंकि उन्हें अकेले में डर लगता था तो वे मेरी मम्मी से कह कर मुझे अपने घर सोने आने के लिए कह देती थीं.

एक दिन आंटी के घर उनकी बहन की लड़की आई थी.
मैं उसे देखकर उसका दीवाना हो गया और मन ही मन उससे प्यार करने लगा.

थोड़े दिन बाद वह चली गई तो मैंने आंटी को सारी बात बताई.
आंटी ने मुझे बहुत डाँटा और कहने लगीं- तुम भी बाकी लड़कों की तरह हो!

मैं उनकी फटकार से डर गया और अपने घर चला आया.

अगले दिन मैं अपने घर पर ही रहा, आंटी के घर नहीं गया.
आंटी हमारे घर आईं और उन्होंने मम्मी से पूछा- राहुल कहां है?
मम्मी ने कहा- छत पर है.

आंटी ने आवाज लगाई- राहुल मेरी बात सुन!
मैंने कहा- मैं काम कर रहा हूँ अभी नहीं आ सकता हूँ!

मैं मन में ही बुदबुदाया कि आंटी आज से मैं आपको नहीं जानता और आपके साथ हमारा रिश्ता भी क्या है?

तभी आंटी ने जोर देते हुए कहा- मुझे तेरे साथ जरूरी काम है, तुम अपना काम खत्म करके मेरे घर पर जरूर आ जाना.

मैंने सोचा कि ऐसा क्या काम आ गया है, चलो जाकर देखता हूँ.
मैं आंटी के घर गया तो आंटी मेरे करीब आईं और उस वक्त जो उन्होंने बोला, उसे सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना न रहा.

उन्होंने उस लड़की से मेरी बात करवा दी थी.
उसकी बातों से मुझे पता चला कि वह भी मुझे प्यार करती है.
फिर क्या था, मैंने आंटी से ज़ोर देते हुए कहा- आप उसे अपने घर बुलाओ न!
आंटी मान गईं.

अगले दिन वह आ गई और हमारी प्यार भरी बातें शुरू हो गईं.
उसका नाम ऋतु था.

अब मैं उसके पास ज्यादा बैठने लगा था.
जब भी ऋतु के पास जाता तो आंटी को जलन होती और वह उसे अपने पास बुला लेतीं या खुद हमारे पास बैठ जातीं.
एक दिन आंटी नहा रही थीं, तो मुझे मौका मिला और मैं उसे किस करने लगा.

आंटी ने देख लिया और उसे दूसरे दिन वे उसे उसके घर छोड़ आईं.
मैं उदास हो गया.

उसी दिन अंकल को बाहर जाना था.
आंटी ने मुझे अपने घर बुलाया और बोलीं- तू आज घर पर सोने आ जाना.
मैंने कहा- ठीक है.

उस दिन पड़ोस में शादी थी.
शादी में खाना खाकर जब मैं आंटी के घर गया तो आंटी ने पैंट-टीशर्ट पहनी थी.

मैं उन्हें देख कर दंग रह गया.
आंटी ने इस तरह के कपड़े पहली बार पहने थे.

अंकल के घर में न होने के कारण आज वे कुछ मूड में लग रही थीं और इस ड्रेस पर उनका फिगर क्या मस्त नज़र आ रहा था.

आंटी की टी-शर्ट में से उनके तने हुए दूध साफ़ और मोटे दिख रहे थे.
मैं उन्हें देख कर मुस्कुराया और अपने लिए तय बिस्तर पर जाकर लेट गया और आंटी की फिगर को याद करने लगा.

इससे पहले मैंने आंटी की फिगर इतनी मस्त कभी नहीं देखी थी.
बल्कि यूं कहूँ कि मैंने कभी उन्हें इस नजर से देखा ही नहीं था.
उनकी चूचियों का साइज़ लगभग 36 इंच का रहा होगा क्योंकि उनके दोनों दूध उनकी टी-शर्ट में से एकदम सीधे और खड़े दिखाई दे रहे थे.

मैं आंख मूँद कर उनकी चूचियों को ही याद कर रहा था.
तभी आंटी ने आवाज़ लगाई.

मैंने उठकर देखा.

आंटी कहने लगीं- राहुल, मेरे सर में दर्द हो रहा है. तुम जरा अन्दर स्टोर में से सिर दर्द की दवाई रखी होगी, उसे ले आओ प्लीज!
मैं स्टोर में गया पर मुझे दवा नहीं मिली.

मैंने वापस आकर कहा- आंटी दवा तो नहीं मिली.
तो आंटी ने कहा- ठीक है … रहने दे.

मैं अपनी जगह पर जाकर लेट गया.

कुछ देर बाद आंटी खुद उठ कर स्टोर में गईं लेकिन उन्हें भी दवा नहीं मिली.
मैं देख रहा था कि आंटी सर दर्द से परेशान हैं.

मैं उनके पास गया और मैंने कहा- अगर ज़्यादा दर्द हो रहा है आंटी, तो मैं सिर दबा देता हूँ.
आंटी ने कहा- ठीक है … दर्द तो बहुत ज्यादा हो रहा है!

मैं उनका सिर दबाने लगा.
कुछ पल बाद मैंने पूछा- आंटी कैसा लग रहा है?

आंटी ने कहा- आराम मिल रहा है. ऐसा लग रहा है कि सर की मालिश की सख्त जरूरत है.

फिर मैंने सरसों के तेल से आंटी के सिर में चम्पी करना शुरू कर दी.
इससे आंटी को आराम मिल रहा था.

वे अपनी आंखें बंद करके चंपी का मजा लेने लगी थीं.
इतने में मेरी नज़र आंटी के बूब्स पर पड़ी तो देखा कि आंटी ने ब्रा नहीं पहनी थी.

मेरा मन किया कि अभी हाथ आगे बढ़ा कर इनके दूध पकड़ लूँ, फिर डर के मारे मैंने इस विचार को त्याग दिया.
अब मन तो भटकने ही लगा था तो मैं आंटी की पैंट की तरफ देखने लगा.

उधर देखा तो पाया कि आंटी की पैंट की ज़िप खुली हुई थी.

इतने में आंटी ने आंखें खोलीं और उन्होंने मुझसे कहा- तुम उधर बैठ न रहो, इधर मेरे बाजू में मेरे साथ ही लेट जाओ और अपने हाथ से हल्के हल्के से सिर भी दबाते रहना.
मैंने कहा- ठीक है आंटी.

मैं सोचने लगा कि अब क्या करूँ.
तब भी मैं उनके बाजू में लेट गया और आंटी ने करवट ले ली, तो उनकी गांड मेरे लंड के आगे आ गई.

अब मैं न तो आंटी के दूध देख पा रहा था और न ही उनकी खुली हुई जिप को देखने का कोई अवसर मिल रहा था.
बस उनकी उठी हुई गांड ही लौड़े सामने थी सो उससे अपने लंड को रगड़ने में भी मेरी फट रही थी.

यूं ही हम दोनों कुछ देर बाद सो गए.
अगले दिन मैं अपने घर चला गया.

दूसरी रात हुई तो आंटी ने मुझे फोन करके आने के लिए कह दिया.
मैं फिर से उनके पास सोने आ गया.

मैं आंटी से ऋतु के बारे में पूछता रहा.
आंटी ने उस दिन मुझसे फिर से कहा- उसे छोड़ो, तुम मेरे पास आकर सो जाओ और मेरा सिर दबा दो.
मैंने कहा- ठीक है.

थोड़ी देर में आंटी सो गईं और मैं भी सोने लगा.
तभी आंटी का हाथ मेरे सीने पर पड़ गया.

मैं उनके हाथ की चूड़ियां गिनने लगा.
गिनते और देखते हुए मुझे नींद आ गई.

जब आधी रात हुई तो आंटी ने मुझे उठाकर कहा- पहले तुम क्या कर रहे थे?
मैंने कहा- चूड़ियां गिन रहा था आंटी!
तो आंटी कहने लगीं- मुझे सब पता है.
यह कह कर वे मेरे सीने में हाथ फेरने लगीं.

मैं हैरान हो गया कि ये हो क्या रहा है.
फिर मैं समझ गया कि आंटी रोज अपने बाजू में लेट जाने के लिए क्यों कहती थी और वे मुझसे क्या चाहती हैं.

मैंने मना नहीं किया और आंटी अपना हाथ मेरे सीने पर फेरती रहीं.
थोड़ी देर में वे गर्म हो गईं और मुझे अपनी ओर खींचने लगीं.
मैं भी चुपचाप रहा.

फिर मैंने भी आपा खो दिया और आंटी के रसीले होंठों को चूमने लगा.
पहली बार मैंने किसी लड़की को चूमा था.

अब तक मैंने एक ही बार ब्लू फिल्म देखी थी, उस समय मुझे उसकी याद ही आ गई और मैं आंटी के होंठों को बेताबी से चूमता रहा.
उस फिल्म की तरह मैंने कम से कम दस मिनट तक आंटी के होंठ चूमे और चूसे … वे भी मेरे साथ मस्ती में लगी रहीं.

उसके बाद मैंने उनके बाल खोल दिए.
अब आंटी मेरी हरकतों का मस्ती से मज़ा ले रही थीं.

मैंने जब उनके गले पर चूमा लिया तो आंटी की सिसकारी निकल गई और उन्होंने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया.
वे मेरी शर्ट खोलने लगीं.

मैंने भी आंटी की तरह अपने हाथ उनकी टी-शर्ट पर आ गया और मैंने नीचे से उनकी टी-शर्ट को ऊपर उठाते हुए गले से बाहर निकाल दी.

मेरे सामने आंटी ब्रा में थीं.
क्या बोलूँ यार … बड़े ही मस्त रसीले मम्मों का जोड़ा ब्रा में कैद था और वे दोनों कबूतर ब्रा से निकल कर भागने को कसमसा रहे थे.

मैं उनके गले पर किस करने लगा और होंठों को धीरे धीरे नीचे लाता गया.
ब्रा के कप के ऊपर से आंटी के एक दूध को होंठ से टच किया तो निप्पल एकदम कड़क जामुन जैसा हो गया था.

मैं उनके दूध पर अधिक देर नहीं रुका और चूमते हुए आंटी की नाभि पर आ गया.

इधर मैंने अपनी रफ्तार को ब्रेक दिया और नाभि के गड्डे में जीभ डालकर चूमना शुरू कर दिया.
किसी भी महिला की नाभि बड़ी संवेदनशील होती है तो आंटी मेरी जीभ के खुरदुरे अहसास से कुछ ज्यादा ही गर्म हो गईं और ऊंह-आह करने लगीं.

अब तक मेरा लंड भी फुल टाइट हो गया और उस वक्त तो लौड़े की हालत लोहे की रॉड की तरह हो गई थी.
फिर मैं आंटी की ब्रा खोलने लगा, पर खुल नहीं रही थी.

आंटी ने खुद ही धीरे से अपने हाथ को पीछे ले जाकर हुक खोल दिया.
अब आंटी के मस्त भरे हुए बूब्स मेरी आंखों के सामने थे.
उनके दोनों दूध एकदम भरे हुए थे और जरा भी नहीं लटके थे.

मैंने कहा- अंकल बूब्स नहीं पकड़ते हैं क्या आंटी?
वे हंस कर कहने लगीं- औरत की सही लुक बूब्स से ही होती है, मैं इसलिए उन्हें कभी भी पकड़ने नहीं देती हूँ.

मैंने कहा- और मैं आंटी?
तो वे मुस्कुराकर बोलीं- तू तो मेरी जान है आई लव यू मेरी जान राहुल!

मैंने आंटी के एक दूध को पकड़ कर मसला तो पाया कि उनके दूध बूब्स एकदम पत्थर जैसे सख्त हैं.
मेरे हाथ लगाने से उनके दूध के निप्पल भी खड़े हो गए थे.

मैंने एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और दूसरे बूब्स को अपनी हथेली से दबाते हुए सहलाने लगा.

आंटी मदभरी सिसकारियां निकालने लगीं.
मुझे उनके निप्पल को खींचते हुए चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था.

इतने में आंटी ने मेरी पैंट में हाथ घुसा दिया और कहने लगीं- इतना बड़ा है तुम्हारा … क्या इस पर वजन लटका कसरत करते हो?
मैं हंस दिया.

मेरा लंड सात इंच का है.

आंटी मेरे लौड़े को पकड़ कर सहलाती हुई बोलने लगीं- मुझे इसे देखना है!
मैंने शर्माते हुए कहा- ठीक है … देख लो!

आंटी ने मेरी पैंट खोल दी.

पैंट खोलने के बाद मेरा लंड बाहर निकल कर खड़ा हो गया.
मेरे अजगर जैसे लंड को लहराता देखकर आंटी बोलीं- आह कितना बड़ा लंड है … तुम्हारे अंकल का तो छोटा सा है और मोटा भी नहीं है!

यह कह कर आंटी ने लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया.
वे बोलीं- मैं इसे मुँह में घुसा कर प्यार करना चाहती हूँ!

मैंने मना नहीं किया.

आंटी ने जैसे ही मेरे लंड को अपने मुँह में लिया, आह … मेरी मस्त सिसकारी निकल गई.
क्या बताऊं दोस्तो, मैं एकदम गर्म हो गया था और मेरे दिमाग में सेक्स एकदम से चढ़ सा गया था.

आंटी ने लौड़े की हालत खराब करना शुरू कर दी.
उन्होंने पूरे लंड को अपने गले तक लेकर चूसना चालू कर दिया और वे मेरे टट्टे सहलाती हुई मज़ा ले रही थीं.

मैंने भी आंटी का सिर पकड़ कर लंड उनके मुँह में अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.

आंटी ने इशारे से कहा कि मुँह के अन्दर रस मत निकाल देना!
मैं कुछ मिनट तक यूं ही लंड पेले लगा रहा और आंटी भी मस्ती से लंड को चूसती रहीं.

उसी दरमियान मैंने उनकी सलवार खोल दी.
उन्होंने पैंटी पहनी थी.

मैंने उसके अन्दर हाथ घुसाया तो उनकी चूत बिल्कुल साफ़ थी.

शायद आंटी आज चुदने की नीयत से ही मेरे साथ लेटी थीं और चुत की झांटों को साफ़ कर लिया था.
जैसे ही मैंने उनकी चूत को छुआ, आंटी मेरे साथ नागिन की तरह लिपट गईं और ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां भरने लगीं.

मैंने सलवार हटा आकर पैंटी को नीचे किया तो उनकी चूत एकदम गोरी थी.
मैंने उसमें अपनी उंगली घुसा दी.

आंटी ज़ोर-ज़ोर से आह-ओह-सी करने लगीं.
मुझे उनकी चुत में उंगली करने में मज़ा आ रहा था.
मैंने दस मिनट तक ऐसा किया.

फिर आंटी ने पानी झाड़ दिया.
मैंने कपड़े से चुत का पानी साफ़ किया और चूत को चूमना शुरू कर दिया.

आंटी एकदम लाल हो गईं और कहने लगीं- और ना तड़पाओ … अब पेल दो अपना लंड!
मैंने कहा- ठीक है.

हम दोनों को मस्ती करते काफी समय हो गया था.
मैंने उनकी टांगें फैलाईं और लंड उनकी चूत पर रखकर पेला, तो वह नीचे फिसल गया.

फिर आंटी ने लंड पकड़ कर चूत में घुसेड़ने में मदद की.
लंड चूत में जैसे ही घुसा, आंटी को मज़ा आ गया.

वे ‘आह मर गई.’ कह कर सिसक दीं.
मैंने एक और जोर का शॉट मार कर अन्दर घुसेड़ दिया.

अब आंटी चिल्ला दीं- उई मां मर गई .. रुक जा मरदूद आह!

मैंने आंटी की चिल्लाचौंट को नजरअंदाज किया और अपने लौड़े को उनकी कसी हुई चुत में अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.
आह बड़ा मज़ा आ रहा था दोस्तो … मैं पहली बार किसी चूत का बाजा बजा रहा था और मेरा प्यासा लंड उस गर्म कढ़ाही में गोते लगा रहा था.

कुछ ही देर बाद आंटी को मजा आने लगा और उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया.
वे अपने पैरों से मुझे जकड़ कर खींच-खींच कर लंड के धक्का लेने लगीं.
मैं समझ गया कि अब आंटी की चुत खौल गई है.

मैंने भी अपना पूरा लंड आंटी की चूत में घुसेड़ दिया और हचक कर आंटी की चुदाई करने लगा.
आंटी ने कहा- आह… बहुत मज़ा आ रहा है राहुल … मस्त चोदता है तू!

मैंने कहा- हां आंटी, मुझे भी आपकी चुत चोदने में बड़ा मजा आ रहा है!
आंटी ने कहा- आंटी नहीं साले … अब जानू बोलो … मुझे अच्छा लगेगा!
मैंने कहा- ठीक है!

आंटी ने कहा- आह जानू, फाड़ दो मेरी चूत को आज … फुल स्पीड से चोद दे मुझे!
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और आंटी आह-सी-उफ़ करने लगीं.

ये सब पंद्रह मिनट तक धकापेल चला और मैंने उनकी चुत में ही अपने लंड का रस झाड़ दिया.

इतने में आंटी बोलीं- क्या हो गया तेरा?
मैंने कहा- हां मेरी जान!
आंटी ने कहा- अरे यार, मेरा अभी नहीं हुआ!

मैंने अपना लंड उनके मुँह में दे दिया तो उन्होंने उसे चूस कर खड़ा कर दिया.
मैंने उनकी गीली चूत को कपड़े से पौंछ कर साफ किया और वापस से लंड पेल दिया.

इस बार मैंने आंटी की टांगें उठाकर उन्हें चोदना चालू कर दिया.
आंटी ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे होने लगीं.

मस्त चुदाई चलने लगी थी.

कुछ सात आठ मिनट की चुदाई के बाद आंटी ने अपने बदन को अकड़ा दिया और झड़ने लगीं.
मैं नहीं झड़ पाया था.

वे बोलीं- तुम अब नीचे लेट जाओ.
मैंने कहा- ठीक है.

आंटी मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगीं.
वे फुल स्पीड के साथ अपनी गांड को पटक रही थीं.
मैं उनके मम्मों की मम्मी चोदने में लग गया था.

तकरीबन बीस मिनट लगे मुझे और मैंने वापस से लंड का पानी झाड़ दिया.
फिर लंड खड़ा होने क बाद मैंने आंटी को तीसरी बार चोदना शुरू किया.

इस बार मैंने उन्हें औंधी कर दिया और घोड़ी बना कर चोदना चालू किया.

आंटी ने कहा- जानू फाड़ दो मेरी चुत को … बहुत मज़ा आ रहा है!
हम दोनों ने काफी देर तक सेक्स किया और स्खलित होकर हांफने लगे.

तीन बार की चुदाई में हम दोनों ही काफी थक चुके थे.
आंटी ने कहा- तुम्हारे अंकल दो मिनट में एक बार करके सो जाते हैं और उनका लंड भी छोटा सा है, तो मुझे मजा ही नहीं आता है.

एक घंटा आराम करने के बाद हम दोनों ने एक बार फिर से सेक्स करना शुरू कर दिया.
इस बार हम दोनों ने पूरे जोश में किया और अगले आधा घंटा तक एक दूसरे को सुख देते रहे.

अब काफी रात हो गई थी और थकान भी काफी हो गई थी तो हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए.

अब आंटी को मेरे लंड की लत लग गई थी तो हम दोनों ने रोज नए-नए स्टाइल में चुदाई करना शुरू कर दिया था.
हम दोनों ब्लू फिल्म देख-देखकर पूरी-पूरी रात चुदाई का मजा लेने लगे थे और एक साल तक खुल कर सेक्स करते रहे.

एक दिन मैंने आंटी से पूछा- ऋतु किधर है उसे बुलाओ किसी दिन. उसकी भी लेने का मन है!
आंटी ने हंस कर कहा- उसने तो तुझे बस दाना डाला था. असल में तो मैं तुझसे चुदवाना चाहती थी. देख अब मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुझे हर तरह से खुश भी करती हूँ तो तू उसे भूल जा. उसका कोई ब्वॉयफ्रेंड है और वह तुझसे नहीं चुदेगी!

मैं भी आंटी से प्यार करने लगा था, तो उनकी बात मान गया.
अचानक एक दिन आंटी ने बताया कि तेरे अंकल का तबादला हो गया है. इस बार तबादला उनके ही शहर में हुआ है और वे घर बेचने की कह रहे हैं.

मैं उदास हो गया.

आंटी के चले जाने के बाद मुझे अहसास हुआ कि मैं आंटी से सच में प्यार करने लगा था.
मेरा उनके बिना रहना मुश्किल हो गया था, मेरा मन ही नहीं लगता था.

ये थी मेरी पहली सेक्स कहानी, मेच्योर आंटी सेक्स कहानी … जो मुझे आज भी उदास किए हुए है.
कुछ बातें हमें ज़िंदगी भर याद आती हैं, पर ज़िंदगी किसी की गुलाम नहीं होती.

दोस्तो, आपको मेरी मेच्योर आंटी सेक्स कहानी पर क्या कहना है, प्लीज जरूर लिखें.
rahuldevjk2@gmail.com

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