नेक्स्टडोर भाभी फक स्टोरी में मैं पढ़ाई पूरी करके घर आया तो पड़ोस में एक नई भाभी को देखा. मस्त भाभी हमरे घर आती थी. एक दिन मैं अकेला था तो भाभी मुझसे बातें करने लगी.
दोस्तो, मैं प्रशांत ठाकुर नियमित इस वेबसाइट से कहानियाँ पढ़ता हूँ।
तो आज मैंने भी सोचा क्यों ना मैं भी अपनी एक सच्ची घटना आप सभी से साझा करूँ!
मैं आपको अपने बारे में बता दूँ, मैं ग़ाज़ियाबाद जिले के पास एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ।
वैसे तो मैं बचपन से अपने मामा के घर रहता था!
12th की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैं अपने गाँव आ गया।
एक बात और दोस्तो, मुझे सबसे ज़्यादा भाभी में मज़ा आता है!
तो चलिए, अब ज़्यादा समय खराब ना करते हुए सीधा नेक्स्टडोर भाभी फक स्टोरी पर आते हैं!
जब मैं अपने मामा जी के घर से अपने घर आया, तब कुछ दिन बाद मैंने मेरे घर एक भाभी को देखा।
उनका नाम पूनम है, जो मुझे पूछने पर मेरी मम्मी ने बताया!
क्या गजब माल है, मैंने आज तक इतनी सेक्सी औरत नहीं देखी थी!
उनका अक्सर घर आना-जाना लगा रहता था।
धीरे-धीरे हमने बातें करना शुरू किया और हमारे बीच हँसी-मज़ाक भी होना शुरू हो गया।
एक दिन भाभी आईं और मम्मी को आवाज़ देने लगीं.
पर मम्मी एक पड़ोसी के घर गई थीं।
जब मैंने उनको यह बताया तो भाभी बोलीं, “आप तो हो!”
मैंने मुस्कुराकर हाँ में सर हिला दिया!
फिर हमारी बातें स्टार्ट हुईं।
अचानक से भाभी ने पूछा, “आपकी कोई GF है?”
पहले तो मैं एक दम उनको देखता रहा कि भाभी ने ये क्या पूछ लिया!
पर फिर मैंने ना में सर हिला दिया।
तो वो बोलने लगीं, “आप झूठ बोल रहे हो!”
मैंने तुरंत उनसे बोला, “कोई आप जैसी नहीं मिली, वरना बना लेता मैं भी GF!”
तभी मम्मी आ गईं और भाभी मेरे पास से जाने लगीं।
मन तो कर रहा था अभी हाथ पकड़ कर रोक लूँ, पर मम्मी थीं!
फिर भाभी मम्मी से बात करके चली गईं।
पर जब तक वो मेरे घर पर थीं, मैं उनको ही ताड़ रहा था और मन ही मन में सोच रहा था— एक बार भाभी चोदने को मिल जाए!
और भाभी भी ये बात समझ रही थीं कि मैं उनको देखे जा रहा हूँ।
दोस्तों, भाभी फिर से 2-3 दिन बाद घर आईं और उनके आते ही मैंने उनको आँख मारी और वो मुस्कुरा दीं!
बस फिर क्या था, मानो मुझे तो भाभी ने ग्रीन सिग्नल दे दिया हो!
फिर अक्सर मैं उनके घर के चक्कर लगाने लगा।
अगर मुझे कुछ काम होता, तो भी मैं उनके घर के सामने से ही होकर निकलता!
एक दिन शाम के समय भाभी को किसी रसोई के सामान की ज़रूरत पड़ी.
तो वो उसको लेने हमारे घर आईं और मुझसे बोलीं, “आजकल हमारी गली के बहुत चक्कर लगा रहे हो!”
सच बोलूं तो मैं पहले थोड़ा डर गया, पर फिर हिम्मत करके मैंने बोला, “आपको देखने आता हूँ!”
और दोस्तो, इस बार भी भाभी पहले की तरह मुस्कुरा कर चली गईं!
फिर कुछ दिन तक भाभी ना तो घर आईं और ना ही अपने घर दिखीं।
सच कहूँ दोस्तों, मेरा मन भी नहीं लग रहा था!
फिर एक दिन जब कॉलेज से मैं घर आया, तो देखा भाभी हमारे घर आई हुई थीं।
उनको देखते ही मैं मुस्कुराया और वो भी मुस्कुराईं!
फिर मेरी मम्मी ने मुझसे बोला कि जिस दिन तेरी छुट्टी होगी, उस दिन भाभी को शॉपिंग करा लाना करवाचौथ की।
मैंने उनको हाँ बोला और अपने रूम में चला गया।
थोड़ी देर बाद भाभी भी मेरे रूम में आईं और बोलीं, “कैसे हो देवर जी!”
मैं कुछ नहीं बोला।
वो बोलीं, “गुस्सा हो क्या?”
मैंने बोला, “कहाँ थी इतने दिनों से?”
तब वो हँसी और बोलीं, “शाम को घर आना, तब बात करूँगी!”
मैंने हाँ बोला और फिर वो चली गईं।
उस शाम का मैंने बड़ी बेसब्री से इंतज़ार किया!
और फिर शाम होने पर मैं उनके घर गया।
तब उन्होंने बताया कि वो अपने मायके गई थीं, वहाँ माता रानी का जागरण था।
फिर वो बोलीं, “आप मिस कर रहे थे क्या मुझे?”
मैं कुछ नहीं बोला, बस उनको देखता रहा।
फिर उन्होंने पूछा, “आप उस दिन बोल रहे थे कोई मेरी जैसी नहीं मिली, तो मेरे जैसी क्यों चाहिए आपको?”
मैं बोला, “आपके जैसी नहीं मिली, और अगर आप ही मिल जाओ तो क्या हर्ज है!”
भाभी बोलीं, “मुझमें ऐसा क्या खास है?”
मैंने बोला, “आप ही खास हो!”
और तुरंत उनका हाथ पकड़ कर उनको अपनी तरफ किया और एक किस (kiss) कर दी!
उन्होंने मुझे पीछे किया और वहाँ से चली गईं।
दोस्तो, मुझे भी अजीब लगा और खुद पर गुस्सा भी आया, और फिर मैं भी उनके घर से आ गया।
फिर जब अगले दिन वो आईं, मैंने उनसे नज़रें भी नहीं मिलाईं।
और वो मुझसे इशारों में पूछ रही थीं, “क्या हुआ?”
मैंने ना में सर हिलाया और अपने रूम में चला गया।
और फिर वो दिन आया जब मैं भाभी को शॉपिंग कराने ले गया।
पर मैं बिल्कुल चुप, बिना बात किए बाइक चला रहा था।
पर जब ब्रेकर आते, तो भाभी की चूची मेरी कमर में लगती जो मेरा लंड खड़ा कर रही थी!
फिर भाभी बोलीं, “मुँह से कुछ नहीं बोल रहे हो और ब्रेकर पर सब कुछ हिलाकर रख दे रहे हो!”
और बोलीं, “ऐसे चुप मत रहो, कुछ तो बोलो!”
दोस्तो, मैंने बाइक चलाते हुए ही बोल दिया, “भाभी, मैं आपको पसंद करने लगा हूँ! आप मुझे अच्छी लगती हो! आपको प्यार करना चाहता हूँ!”
फिर क्या दोस्तो, फिर तो भाभी ही चुप हो गईं!
पूरे रास्ते किसी ने कोई बात नहीं की।
फिर जब हम घर आ गए, तब भाभी ने मुझे रुकने को कहा और जो शॉपिंग में कपड़े लिए थे, उनको ट्राई करके मुझे दिखाने लगीं।
क्या ज़हर लग रही थीं!
लास्ट में एक ब्रा और पैंटी थी, वो भी ट्राई करके दिखाने लगीं और बोलीं, “बताओ, कैसे हैं?”
मैंने कहा, “कोई अप्सरा लग रही हो!”
और वो ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगीं!
फिर वो बोलीं, “बस देवर जी, आज के लिए इतना ही!”
पर मैं कहाँ मानने वाला था!
मैंने उनको एक ज़ोरदार लिप-लॉक किस की और फिर अपने घर आ गया।
और फिर वो रात आ ही गई जिसका मुझे इंतज़ार था दोस्तो!
यानी नेक्स्टडोर भाभी फक स्टोरी बनाने का वक्त आ गया था.
हुआ कुछ यूँ, एक रात भाभी घर आईं और मम्मी से बोलीं, “चाची! आज बच्चे और वो (वो मतलब उनके पति) अपनी बुआ के यहाँ गए हैं, तो क्या प्रशांत मेरे घर सो जाएँगे?”
तो मम्मी बोलीं, “ये भी कोई पूछने वाली बात है, सो जाएगा!”
मेरी तो मानो जैसे चाँदी हो गई हो!
मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ और भाभी के साथ उनके घर जाने लगा।
रात होने की वजह से गली में अंधेरा था, तो मैं भाभी का हाथ पकड़ कर चल रहा था।
फिर भाभी ने दोनों के अलग-अलग बिस्तर लगाए और हम बात करने लगे.
पर भाभी बात करते-करते सो गईं।
मुझे नींद नहीं आ रही थी.
और आती भी कैसे— जब कोई माल आपके पास लेटा हो और आप बिना कुछ किए कैसे रह सकते हो!
करीब आधे घंटे बाद भाभी की आँख खुली और बोलीं, “नींद नहीं आ रही क्या देवर जी!”
मैं बोला, “जब बगल में कोई अप्सरा हो, तो कोई कैसे सो सकता है!”
तो भाभी बोलीं, “और कुछ करने का मन है क्या!”
बस दोस्तो, भाभी जी ने मुझे पूरा सिग्नल दे दिया!
फिर क्या था, मैं कूद कर भाभी की खाट पर चला गया और उनको पागलों की तरह किस करने लगा।
तो भाभी हँसी और बोलीं, “आराम से देवर जी! मैं भाग नहीं रही, पूरी रात है, आराम से करो!”
मैंने बल्ब जलाया, भाभी को निहारा, फिर उनको किस करने लगा; फिर उनकी गर्दन को किस किया।
फिर उन्होंने मेरे कपड़े और मैंने उनके कपड़े उतारे!
उन्होंने मेरा लंड अपने हाथ में लिया और उसको मसलने लगीं।
हमारी साँसें तेज़ हो रही थीं!
फिर मैंने बारी-बारी से उनकी चूची को पिया।
वो जोश में बोल रही थीं, “और प्यार करो देवर जी!”
दोस्तो, सेक्स करते समय मैं पागल हो जाता हूँ, मुझे कुछ पता नहीं रहता मैं क्या कर रहा हूँ, क्योंकि अब जो मैं आपको बताऊंगा शायद कुछ को वो गंदा लगे और कुछ को नहीं।
चूची पीने के बाद मैंने उनकी नाक में जीभ डाली और 5 मिनट तक उनकी नाक में मैंने जीभ घुमाई!
फिर मैंने उनको लंड चूसने को कहा।
पहले तो वो थोड़ा आना-कानी करने लगीं, पर मेरे ज़्यादा ज़ोर डालने पर वो मान गईं और लॉलीपॉप की तरह लंड चूसा।
मैं उनके मुँह में ही झड़ गया!
करीब फिर 15 मिनट तक मैंने उनकी चूत चाटी और गांड के छेद में भी जीभ डाली।
तब तक मेरा लंड फिर से तैयार हो गया और फिर उनको घोड़ी बनाकर करीब 25 मिनट तक चुदाई चली!
उसके बाद दोनों एक साथ झड़े और नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर सो गए।
करीब सुबह 5 बजे आँख खुली तो एक राउंड गांड का लिया और फिर फ्रेश होकर मैं अपने घर आ गया!
दोस्तों, ये थी मेरी सच्ची कहानी। आपको कैसी लगी, ज़रूर बताइएगा!
और अगर इस नेक्स्टडोर भाभी फक स्टोरी को लिखते वक्त कोई भूल हो गई हो तो कृपया माफ़ कर दीजिएगा, क्योंकि ये मेरा यहाँ पर लिखने का पहला अनुभव है।
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