ऑफिस असिस्टेंट की कुंवारी चुत चोदी

Views: 4 Category: Office Sex By kuldeepc94 Published: September 13, 2026 📖 15 min read
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वर्जिन गर्ल हार्ड फक कहानी में मेरे ऑफिस में नई लड़की मेरे नीचे आई. वह बहुत सुंदर थी, मैं उसे देखता रह गया. वो भी मेरी वासना भरी नजर पहचान गयी.

दोस्तो, मैं कुलदीप चौहान नोएडा से हूँ.
मेरी उम्र इस वक्त 30 साल है और मैं देखने में ठीक ठाक हूँ.

ये वर्जिन गर्ल हार्ड फक कहानी आज से 6 महीने पहले की है.
मैं उस वक्त इलेक्ट्रिकल मैकेनिकल डिवीजन में था.

एक दिन मेरे डिवीजन में एक लड़की की जॉइनिंग हुई.
वह डिवीजन में आयी तो मैंने उसे देख कर सोचा कि इतनी सुंदर लड़की मेरे डिवीजन में क्या कर रही है?

मैंने उससे पूछा- आपका क्या नाम है?
वह पहले तो नर्वस हो गयी और उसने अपना नाम संध्या बताया.

फिर मैंने उसे अपना नाम बताया और पूछा कि नयी जॉइनिंग है क्या इस डिवीजन में?
वह बोली- हां.

मैंने उससे पूछा- डिज़ाइन के सेक्शन में या असेंब्ली सेक्शन में?
वह बोली- डिज़ाइन सेक्शन में!

मैं खुश हो गया कि चलो पट्ठी मेरे सेक्शन में ही आई है और अब इतने दिनों के सूखा के बाद कम से कम कोई मस्त माल तो आया!

मैं अपने सेक्शन का सबसे सीनियर बंदा था तो हर हाल में वह मेरे साथ ही काम करने वाली थी और उसकी रिपोर्टिंग भी मुझे ही होगी.

तभी मेरा बॉस आ गया.
वह आते ही बोला- गुड मॉर्निंग!
मैंने भी रिप्लाइ किया.

फिर उसने मुझसे कहा- आप लोगों की जान पहचान हो गयी या मैं कराऊं?
मैंने बोला- सर, इनसे मेरी पहचान तो हो गयी है, लेकिन अभी ये मेरे बारे में नहीं जानती हैं.

मेरा बॉस बोला- संध्या यह मिस्टर कुलदीप हैं और आज से तुम इनके अंडर में काम करोगी यानि तुम्हारी रिपोर्टिंग इनको ही होगी. ये बहुत ही अच्छे इंसान हैं.
फिर वह मुझसे बोला- कुलदीप, तुम संध्या को सारा काम समझा दो और हेल्प भी करना … अभी यह नयी है!

यह सब कह कर बॉस चला गया.

मैंने संध्या को प्यार से देखा और मन ही मन में सोचा कि सच में बड़ी ही मस्त माल है, क्या गोरे गोरे गाल, छोटी मगर मस्त चूची, भरा हुआ बदन, भारी भारी जांघें.
उसने टाइट जीन्स पहन रखी थी, जिससे उसके चूतड़ बड़े मस्त लग रहे थे.

मैं तो बस उसे देखता ही रह गया.

वह अचानक से बोली- सर क्या हुआ?
मैं एकदम से चौंक गया और बोला- कुछ नहीं.

फिर वह बोली- कोई तो बात है!
मैं बोला- नहीं कुछ नहीं.

पर उसकी अदा से पता चल रहा था कि वह समझ गयी है कि मेरी निगाहें उसके बदन का जायजा ले रही हैं.

संध्या ने स्माइल किया और बोली- चलो सर, मुझे काम बता दो.

मैंने उसे काम बताया.
वह काम करने लगी.

सारे दिन जब भी उसे कोई प्रॉब्लम होती, तो वह मेरे पास आकर पूछ लेती.
मैं बता देता.

उस वक्त ऑफिस खत्म होने का समय होने को था, वह मेरे पास में ही बैठी थी और मैं उसे ही ताड़ रहा था.

कभी कभी वह तिरछी नज़र से मुझे देख लेती थी कि मेरी निगाह कहां है.
मगर मैं उसे देखता ही जा रहा था.

फिर कुछ देर बाद छुट्टी हो गयी और वह अपने घर चली गयी.
मगर मैं अब भी उसके बारे में सोच रहा था कि साली की मस्त जवानी बड़ी रसीली है.
यदि लौंडिया पट जाए तो मैं उसके मस्त चूचों का दूध कस कस कर पियूंगा और उसकी कुंवारी चूत की कस कर बैंड बजा दूँगा.

ऐसा सोचते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैं बाथरूम में जाकर मुठ मारने लगा और अपना पानी गिरा कर अपने कपड़े सही करके बाहर आ गया.

चूंकि वह जा चुकी थी, तो मैं भी अपने घर चला आया.
अगले 10-12 दिन ऐसा ही चलता रहा.
मगर इस बीच में वह मुझसे काफ़ी घुलमिल गयी थी.

मुझे उसके बारे में काफी कुछ पता चल गया था कि वह ग़ाज़ियाबाद की रहने वाली है और यहां उसके चाचा का घर है … मगर वह एक गर्ल्स हॉस्टल में रहती है क्योंकि उसको बंदिश पसंद नहीं है.
वह अपनी लाइफ अपने स्टाइल से जीना चाहती है. वह अपनी मर्ज़ी की मालिक है.
हॉस्टल में उस पर कोई बंदिश नहीं थी. जब चाहो आओ और ज़ाओ, नो प्रॉब्लेम.
पर कोई भी मर्द नहीं आ सकता है वहां, यह एक बंदिश थी.

अब ऐसे ही एक महीना पूरा हो गया.

हम दोनों गुड फ्रेंड्स की तरह आपस में एक दूसरे को अपने मन की बात बताने लगे थे.
मेरा हाथ कभी उसे छू जाता था, तब भी वह कुछ नहीं कहती.

एक दिन काम बताते बताते मेरा पैर उसकी जांघ से छू गया.
आह क्या मुलायम जांघ थी उसकी.

मेरा तो एकदम से खड़ा हो गया.
मेरा मन उसको चोदने के लिए बेचैन हो गया था … मगर मैंने खुद पर कंट्रोल किया.

मैंने सोचा कि इसको धीरे धीरे गर्म करता हूँ.

दो चार दिन और निकल जाएं, फिर एक दिन इसको अपने घर पर इन्वाइट करूंगा डिनर के लिए … और उस दिन साली सैट हो गई तो इसकी चूत की चुदाई का आनन्द उठाऊंगा. हो सकता है कि इसकी चुत कुंवारी हो.

इसके बाद मैं काम के बहाने कभी उसके पैर को नीचे से टच करता, तो कभी उसकी चूची को बाजू से.
वह कुछ नहीं बोलती.

इससे मेरी हिम्मत बढ़ती गयी.

एक दिन शनिवार को मैंने काम करते करते अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया.
वह एकदम से घबरा गयी और मेरा हाथ हटा कर वहां से बाहर चली गयी.

मैं डर गया कि लगता है उसे बुरा लग गया है और अब वह मुझसे कभी बात नहीं करेगी.
मैं उदास हो गया.

थोड़ी देर बाद वह वापस आयी और अपनी सीट पर बैठ गयी.
वह मुझसे कुछ नहीं बोली.

मुझसे ये सहा नहीं जा रहा था और मैं उसे खोना नहीं चाहता था.
अंततः मैंने उससे ‘सॉरी’ बोला और कहा कि मेरा हाथ ग़लती से लग गया था.

वह कुछ नहीं बोली.

मैंने उससे फिर से रिक्वेस्ट की, तो वह मान गयी और उसने कहा- एक शर्त पर माफ़ करूंगी!
मैंने पूछा- क्या शर्त?

वह बोली- कल छुट्टी है, यदि आज तुम मुझे अपने घर पर डिनर के लिए इन्वाइट करो तो …

मैं मन ही मन उछल गया कि यार यह तो अपनी प्लानिंग का पार्ट था, चलो कोई बात नहीं मेरे काम ईज़ी हो गया, अब तो ये खुद चल रही है!

मैंने कहा- प्लीज़ चलो आज हम एक साथ डिनर करेंगे, यदि क़हो तो होटल में खाने चलते हैं!
वह बोली- नहीं मुझे होटल का खाना अच्छा नहीं लगता है. मैं बना लूँगी.

मैंने कहा- ठीक है, मगर मेरी एक रिक्वेस्ट है कि मेरा आज बियर पीने का मन कर रहा है, यदि तुम बोलो तो घर लेकर चलें!
वह बोली- मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

मैंने छह छोटी बोतलें ले लीं और शाम को करीब 8:30 पर घर आ गए.
वह घर में खाना बनाने लगी.
मैंने फ्रिज में बियर की बोतलें रख दीं.

खाना तैयार होने के बाद वह वापस कमरे में आ गयी.
मैंने उससे कहा- डिनर पर मैंने इन्वाइट किया है और तुम ही काम कर रही हो!

वह बोली- कोई बात नहीं, फ्रेंडशिप में चलता है.
मैं बोला- ओके!

फिर मैंने फ्रिज से एक बियर निकाली और पीने लगा.

वह बोली- ये बात ठीक नहीं है, ऑफर तो करना चाहिए!
मैंने कहा- रियली वेरी सॉरी!

यह कह कर मैंने एक बियर की बोतल निकाल कर उसकी ओर ऐसे ही बढ़ा दी कि इसको पीना तो है नहीं. अभी वापस कर देगी, साली बड़ी बनती है.
एक बार राज़ी हो जाए तो साली को इतना चोदूंगा कि सब नखरे भूल जाएगी.

पर कमाल तो तब हुआ, जब उसने मेरे हाथ से बियर ले ली और पीने लगी.

उसने मुझे देखा और एक कंटीली स्माइल पास कर दी.
फिर हम दोनों ने 3-3 बोतलें बियर पी लीं.

उसे खासा नशा चढ़ गया.
वह मेरी तरफ सेक्सी निगाह से देख रही थी.

मैं हैरान रह गया कि इसे क्या हो गया, ये साली चुदासी निगाह से क्यों देख रही है मुझे!

फिर मैंने सोचा कि एक बार और ट्राइ करते है.
अभी ये नशे में है. शायद मान जाए और अपनी चूत का रस पी लेने दे.

यदि नहीं मानी तो भी आज मैं इसे चोद ही दूंगा … एक बार चूत में लंड जाएगा तो फिर इसे मज़ा आने लगेगा.

उस दिन संध्या ने स्कर्ट और टॉप पहना था, उसकी टॉप एकदम चुस्त और गहरे गले वाला था तो उसकी चूचियां उभर कर बाहर दिख रही थीं.

पता नहीं क्या हुआ कि अचानक से उसका स्कर्ट जांघ तक उठ गया था, या उसने जानबूझ कर ऐसा किया था या फिर नशे में उसके हाथ से अनजाने में ही ऐसा हो गया था.

जो भी हुआ हो, मगर यह सीन देख कर मेरा लंड तन गया था.
मेरा मन कर रहा था कि इस साली को अभी ज़बरदस्ती पटक कर चोद दूँ. मगर मैं आज उसे राज़ी राज़ी चोदना चाहता था.

मैंने अपने हाथ को उसकी जांघ पर रख दिया.
वह कुछ नहीं बोली.

मैंने अपने हाथ फिराना शुरू कर दिया.
फिर अपने हाथ को मैं और ऊपर ले गया.

वह अब भी कुछ नहीं बोली, वह मस्त होकर बियर पीने में लगी थी.

मुझे लगा कि उसको अच्छा लग रहा है तो मैंने अपने दूसरे हाथ को उसकी एक चूची पर रख दिया.
आह क्या मस्त मुलायम मस्त चूची थी उसकी.

मैंने बियर के हल्के न.शे में उसकी चूची को ज़ोर से दबा दिया, तो वह कराह कर बोली- अहह … क्या कर रहे हो यार, थोड़ा धीरे से करो न!
इतना सुनते ही मैं समझ गया कि लड़की चालू है और अभी तक ऐसे ही बन रही थी.

बस मैं अब उसकी चूची को धीरे धीरे दबाने लगा.
कसम से उसकी चीकू जैसी छोटी लेकिन सख्त चूचियों को मसलने में मुझे मज़ा आने लगा था.

उधर वह अपने मुँह से लगातार ‘अहह … गुड और प्यार से सहलाओ!’ बोलती जा रही थी.
मैंने थोड़ी देर बाद ही उसके दूध को और जरा सख्त हाथ से दबाना शुरू कर दिया, उसे मज़ा आने लगा और वह मस्ती से मुझे देखने लगी.

वह सिर्फ वासना से मुझे देख रही थी और कह कुछ नहीं रही थी.
मैं समझ गया कि इसको चुदने का मज़ा लेने का मन हो गया तो ये आज जम कर चुदवाएगी.

मैंने आगे बढ़ कर उसको पीछे से अपनी बांहों में ले लिया और उसकी दोनों चूचियों को मस्ती से मींजने लगा.
वह मेरे लंड पर अपना पिछवाड़ा रगड़ने लगी.

मैंने तुरंत उसकी शर्ट ऊपर उठाते हुए उतार दी.

शर्ट उतारते ही उसकी दोनों चूचियां नंगी हो गईं.
मैंने उसे घुमा कर अपनी तरफ किया तो पाया कि सच में उसकी चूचियां छोटी छोटी सी ही थीं लेकिन ऐसी उठी हुई थीं कि उन्हें देख कर बिना मुठ मारे ही लंड अपना पानी छोड़ दे.

मैं पागल सा हो गया.

मैंने अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाया और उसकी दोनों चूचियों को कस कर पकड़ लिया.
मैं उसके निप्पल मींजते हुए दूध खींचने लगा और दबाने लगा.

उसके मुँह से ज़ोर ज़ोर से आवाज निकल रही थी, शायद उसे दर्द हुआ था.
लेकिन उसने मुझे मना नहीं किया.

अब मैंने अपना मुँह उसकी एक चूची पर रख दिया और चूसने लगा.
वह एकदम से गनगना उठी और मेरे सर को पकड़ कर अपनी मुसम्मियों पर दबाने लगी.

कुछ ही देर में मैंने उसके दोनों दूध ज़ोर ज़ोर से चूस चूस कर एकदम लाल कर दीं और निप्पल हार्ड कर दिए.

चूचियों की चुसाई करने के साथ ही मेरा दूसरा हाथ उसकी चूत पर पहुंच गया और मैंने उसकी चुत को जींस के ऊपर से ही टटोल कर देखा तो मुझे हल्की सी नमी सी महसूस हुई.
मैंने झट से उसकी चैन खोल दी.

उसने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी.

बस फिर क्या था … मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली तो वह बहुत टाइट थी.
मैं तो खुश हो गया कि आज तो कुंवारी चूत मिल गयी राजा … अब प्यार से चोदो इसको.

एक बार इसको मजा दे दिया तो हर रात ये खुद ही चुदने चली आएगी.

बस फिर क्या था … मेरे मुँह में उसकी एक चूची फंसी थी, जिसका रस मैं चूस रहा था और एक हाथ उसकी दूसरी चूची को मसल रहा था, दूसरा हाथ चूत से खेल रहा था.
वह मचल रही थी और अपने मुँह से सेक्सी आवाज निकाल रही थी.

उसकी आवाजों को सुन कर मेरा जोश और बढ़ रहा था.
मैं और ज़ोर ज़ोर से चूची चूसने लगा.

तो वह बोली- हाय राजा … क्या दूध निकाल कर ही दम लोगे!
मैंने कहा- हां मेरी रानी आज तुम्हारी चूची से दूध तो मैं पीकर ही रहूँगा, चाहे इसके लिए कितनी भी देर तक तुम्हारी चूची क्यों ना चूसनी पड़े! एक बार दूध का स्वाद चखने के बाद आज तुम्हारी चूत का स्वाद भी लूँगा, अभी तो पूरी रात पड़ी है!

वह कामुक भाव से बोली- मेरे राजा, आज तो लगता है तुम मुझे चोद चोद कर मेरी फाड़ दोगे … जब मूड बना ही लिया है तो फिर जल्दी से मेरी चूत क्यों नहीं फाड़ते हो … डालो ना अपना लंड मेरी चूत में और चोद दो मुझे … मैं सेक्स के लिए तड़प रही हूँ!
मैंने कहा- ओके तेरे दूध का रस तो मैं तेरी चूत का रस पीने के बाद में पियूंगा, अभी पहले एक बार तेरी चूत की आग ठंडी कर देता हूँ!

वह बोली- हां मेरे राजा, बड़ी भभक रही है मेरी चुत!
मैं बोला- तुम्हारी चूत बहुत कसी हुई है, लगता है कभी किसी ने तुम्हें चोदा नहीं है!

वह बोली- तुम पहले आदमी हो जो मेरी चूत को चोदोगे. प्लीज़ ज़रा प्यार से करना, वरना बहुत दर्द होगा!
मैंने कहा- थोड़ा सा तो सहना ही होगा, लेकिन एक बार झेलने के बाद तुमको बहुत मज़ा आएगा.

मैंने उसकी जींस उतार दी, अब वह मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी.

सच में क्या ही हसीन नज़ारा था, क्या बॉडी थी, क्या चूत थी.

मैंने झट से अपने कपड़े उतार दिए. मेरा लंड देखते ही वह मचल उठी और उसने अपने हाथ से मेरे लौड़े को पकड़ लिया.
वह लंड को मसल कर बोली- इससे ही चुदते हैं ना … बड़ा प्यारा है ये लंड … प्लीज़ इसको मेरी चूत में डाल दो अभी.

मैंने कहा- जरा रूको मेरी बन्नो … मैं तेल लेकर आता हूँ.
फिर मैं तेल की बोतल ले आया.

थोड़ा सा तेल निकाल कर मैंने अपने लंड पर मल लिया और उसको बेड पर लेटा दिया.
फिर उसकी टांगों को खोल कर थोड़ा सा तेल उसकी चूत पर लगाया.

अब मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाया तो वह उछल पड़ी.

वह बोली- प्यार से डालना वरना बहुत दर्द होगा.
मैंने कहा- प्यार से ही करूंगा!

मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया तो मेरे लंड का सुपारा और करीब एक इंच लंड भी चूत के अन्दर चला गया.
उसको थोड़ा सा दर्द हुआ, मगर वह चिल्लाई नहीं.

मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया तो इस बार लंड करीब 3 इंच अन्दर घुस गया.
अब उसको दर्द हुआ और उसके मुँह से चीख निकल गयी.

मैंने तुरंत ही अपना मुँह उसके मुँह पर रख लिया और उसके होंठ चूसने लगा.

कुछ देर में उसका दर्द कम हो गया.

फिर मैंने अपने होंठों से उसके होंठों को चिपका कर बंद कर दिया ताकि जब मैं फुल पावर से शॉट मारूं तो इसकी आवाज बाहर न निकल सके.
इसके बाद मैंने अपने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर एक जबरदस्त धक्का मारा.

उसकी चूत में मेरा लंड मुँह घुसेड़ता हुआ काफी अन्दर तक चला गया.

उसके मुँह से एक ज़ोर की चीख निकलने को हुई, मगर वह मेरे मुँह में दब कर रह गयी.

अब वह मेरे नीचे दबी पड़ी थी और तड़प रही थी. मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.
उसकी चूत से ब्ल.ड निकल रहा था.
मैं समझ गया कि मैंने इसकी सील तोड़ दी है.

थोड़ी देर तक मैंने कुछ नहीं किया और उसके मुँह से अपना मुँह हटा लिया.
वह दर्द के मारे कराह रही थी.

वह बोली- तुम बहुत ही बेरहम हो, कैसे मेरी चूत में इतनी ज़ोर से पेला है कि ब्ल.ड भी निकलने लगा है. प्लीज मेरे ऊपर से हट जाओ और छोड़ दो मुझे!
मैंने कहा- अरे पगली यह तो कुंवारी लड़की की सील टूटने का ब्ल.ड है. इसमें कोई डरने की बात नहीं है. अब करने से तुम्हें मज़ा आएगा. दर्द नहीं होगा!

वह बोली- तुम झूठ बोल रहे हो, मुझे नहीं करवाना.
मैंने कहा- रुक जाओ अभी खुद देख लेना.

मैंने फिर से कुछ धक्के मारे और कहा- अब बताओ, दर्द हुआ?
वह बोली- हुआ तो पर इस बार कम हुआ!

अब मैंने हल्के हल्के धक्के मारने शुरू किए.
उसको मजा आने लगा.
अब वह भी अपनी गांड उठा कर नीचे से जबाव देने लगी.

मैंने उसे ऐसे ही 15 मिनट तक हचक कर चोदा.
उसे चोदने में मेरे लंड को मजा आ रहा था.
और उसके मुँह से भी मस्ती भरी आवाजें निकलने लगी थीं ‘आह चोदो मेरे राजा … चोदो … मजा आ रहा है, डालो और डालो … और अन्दर तक डालो मेरी चूत में अपना लंड … आह चोद चोद कर मेरी चूत को लाल कर दो … आह आज पूरी रात चोदो … अहह … फाड़ डालो मेरी चूत को!’

मैं आंख बंद करके उसकी चुत के चिथड़े उड़ाने में लग गया.

करीब 5 मिनट तक मैंने काफी स्पीड से चुदाई की, उतने में ही वह झड़ गयी.
उसके झड़ने के बाद करीब 10 धक्के मार कर मैं भी निकल गया.

मैं झड़ कर उसके ऊपर ही गिर गया और लंबी लंबी सांसें लेने लगा.

वह भी थक गई.

थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही चिपके लेटे रहे.

कुछ मिनट बाद मैंने उसकी चूचियों को फिर से चूसना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर में वह फिर से चुदने के लिए तैयार हो गई.

मैंने इस बार वर्जिन गर्ल हार्ड फक किया.
करीब 30 मिनट की चुदाई के बाद वह झड़ गई और मैं भी झड़ गया.

उस रात मैंने उसको 4 बार चोदा.

सुबह उससे चला नहीं जा रहा था क्योंकि कुंवारी लड़की की सील टूटी थी और रात में मैंने उसे 4 बार बेरहमी से चोदा था.

वह पूरे दिन सोती रही.
मैंने उसको अपने हाथ से खाना खिलाया और सोने दिया.

रात तक वह ठीक हो गई.
अब वह लड़की से मस्त औरत बन गयी थी.

अगली रात को हम दोनों ने ड्रिंक का मजा लिया और वह फिर से चुदने के लिए तैयार हो गई.
इस बार ना सिर्फ़ मैंने उसकी चुत की भरपूर चुदाई की बल्कि उसकी गांड को भी चोदा.
उसके बारे में आपको बाद में बताऊंगा.

यहां तक की वर्जिन गर्ल हार्ड फक कहानी आपको कैसी लगी … प्लीज अपने कमेन्ट करके मुझे जरूर बताएं.
मेरा ईमेल एड्रेस है
kuldeepc94@gmail.com

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