Xxx पोलिटिकल सेक्स कहानी में एक अमीर जवान भाभी ने प्रसिद्धि पाने के लिए एक छुटभैये नेता से दोस्ती बनी और लोकल चुनाव में टिकेट पाने के लिए उससे चुद गई.
दोस्तो, मैं हॉट दिव्या आपको एक महत्वाकांक्षी युवा भाभी की नेता बनने की चुल्ल के चलते उसकी चुदाई की कहानी सुना रही थी.
कहानी के पहले भाग
शोहरत की लालसा में सेक्स बना सहारा
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि साहिल ने रत्ना को पूरी तरह से अपनी ग्रिप में ले लिया था.
अब आगे Xxx पोलिटिकल सेक्स कहानी:
रत्ना भी अब साहिल के ऊपर खूब पैसे खर्च करने लगी थी.
वह अपनी कार में साहिल के साथ सभी कार्यक्रमों में शामिल होने लगी.
अब रत्ना पर राजनीतिक नशा पूरी तरह चढ़ गया था.
इस दौरान साहिल उसे बड़े-बड़े राजनीतिक सपने दिखाने लगा.
साहिल का असली मकसद सिर्फ रत्ना का जिस्म ही नहीं, बल्कि उसके पैसे भी निकालना था.
पैसे तो वह निकाल ही रहा था.
बड़े-बड़े नेताओं से मिलवाकर वह रत्ना को खुश रखे हुए था.
ऐसे में राज्य में नगर निकाय के चुनाव की घोषणा हो गई.
साहिल ने रत्ना से कहा- क्यों ना आप चुनाव में खड़ी हो जाओ?
रत्ना को सुनकर बहुत अच्छा लगा.
उसे लगा कि अब वह नेता बनकर वीआईपी लाइफ का मजा ले सकेगी, जिसकी उसे बहुत चाहत थी.
उसे लगा कि साहिल के होते ये आसानी से मुमकिन हो जाएगा.
रत्ना ने कहा- ये तो ठीक है … लेकिन पार्टी मुझे इतनी जल्दी टिकट कैसे देगी?
साहिल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- मैडम, मैं हूँ ना आप विश्वास करती हो ना?
रत्ना- जी वह तो बहुत करती हूँ साहिल जी, आपने तो मुझे इतना सहयोग किया है!
साहिल- तो फिर आप तैयारी करो दिल्ली निकलने की. हम कल ही निकलते हैं.
रत्ना- ठीक है, मैं प्लेन की टिकट निकाल लेती हूँ.
दोनों रात को ही दिल्ली निकल गए.
अब रत्ना साहिल के साथ पूरी तरह आज़ाद थी.
उसके पति को भी साहिल ठीक-ठाक लगता था इसलिए कोई समस्या नहीं थी.
दिल्ली पहुंचकर दोनों पार्टी के प्रभारी से मिले.
साहिल ने पहले ही कह दिया था- पैसे का काम हो जाएगा, बस आप बोलना … टिकट के लिए, आप जो बोलेंगे वही हो जाएगा. रत्ना जी आपकी हर तरह से सेवा करने के लिए रेडी हैं.
रत्ना ने यह सुना तो वह समझ गई कि शायद उसे टिकट लेने के लिए इसके लौड़े के नीचे से निकलना होगा.
वह खुद भी मूड बना चुकी थी कि अब उसकी चुत का भोसड़ा बने, चाहे गांड का गड्ढा बने … टिकट तो वह लेकर रहेगी.
प्रभारी ने भी उसी तरह से रत्ना से बात की … उसने बात करते समय रत्ना के हाथ को अपने हाथ में लेकर इशारे से सहलाया भी!
तो रत्ना ने भी हंस कर हामी भर दी- आप टिकट तो दिलवाइए सर … मैं तन मन धन से आपके लिए काम करूंगी.
साहिल ने भी हां में हां मिलाते हुए रत्ना की वकालत की.
अब रत्ना पूरी तरह साहिल के जाल में थी.
वापस आने के बाद साहिल ने रत्ना से कहा- टिकट तो मिल जाएगा, आप निश्चिंत रहें!
अगली रात किसी कार्यक्रम से दोनों को शहर से बाहर जाना हुआ.
साहिल रत्ना को लाने उसके घर या गया.
अपनी कार में बैठे रह कर ही उसने रत्ना को फोन करके बुलाया.
वह तुरंत आ गई.
उन दोनों का सफर लंबा था इसलिए रत्ना ने साड़ी नहीं पहनी थी.
उस दिन रत्ना ने एक शॉर्ट और लूज टॉप पहना हुआ था क्योंकि साहिल से उसे अब कोई परहेज नहीं था.
जैसे ही वह कार के करीब आई, साहिल की आंखें फटी रह गईं.
वह कामुक नजरों से रत्ना को ऊपर से नीचे तक निहारने लगा.
गाड़ी में बैठते ही रत्ना हंसकर बोली- क्या हुआ साहिल जी … किधर खो गए?
साहिल- कुछ नहीं … आपको पहली बार बिना साड़ी के देखा ना … तो एकदम से दंग सा रह गया.
गजब लग रही हो आप!
रत्ना ने हंसते हुए कहा- अच्छा बिना साड़ी के?
साहिल- अरे मेरा मतलब इन कपड़ों में!
रत्ना- इस तरह की ड्रेस तो मैं नॉर्मली पहनती ही हूँ साहिल जी, मुझे शॉर्ट ड्रेस ही अच्छी लगती हैं. लेकिन आपने हमें साड़ी में बांध दिया है तो क्या करें?
दोनों हंसने लगे.
फिर साहिल ने थोड़ा रिस्क लेते हुए मजाकिया अंदाज़ में कहा- रत्ना जी, अगर आपको शॉर्ट ड्रेस अच्छी लगती हैं तो हमने जो आपको साड़ी पहनाई है … वह किसी दिन निकाल भी देंगे!
रत्ना- साहिल जी, आपके कार्यकर्ता हैं हम … आप जैसे चाहें इस्तेमाल करें!
उन दोनों का रास्ता लंबा था और मौसम खुशनुमा.
साहिल को रत्ना की महक और उसके गोरे-गोरे मादक पैर बेचैन कर रहे थे.
रत्ना भी काफी समय से व्यस्त होने की वजह से सेक्स से दूर थी.
वर्ना उसे मॉडलिंग के दौरान जब मौका मिलता, तो उसकी चूत किसी न किसी मजबूत लौड़े से बज ही जाती थी.
आज रत्ना भी रिलैक्स महसूस कर रही थी.
उन दोनों की बातें भी अब राजनीति से हटकर होने लगी थीं.
साहिल- आप चुनाव जीत गईं तो हम कार्यकर्ताओं को भूल जाएंगी?
रत्ना- साहिल जी, मैं आपको कभी नहीं भूल सकती. आपने बिना किसी स्वार्थ के मेरा इतना साथ दिया है. मैंने आपको क्या दिया? कुछ भी नहीं … तो आपको मैं कैसे भुला सकती … शायद कभी नहीं भुला सकती.
साहिल- स्वार्थ है ना … बिना स्वार्थ का कोई नहीं!
रत्ना- क्या स्वार्थ है साहिल जी? बोलें तो सही!
साहिल- छोड़िए … किसी और दिन.
रत्ना- आपको मेरी कसम बोलिए ना?
साहिल- रत्ना जी, कसम ना डालिए प्लीज.
रत्ना- तो बोलिए ना फिर?
साहिल धीमी आवाज़ में- कुछ नहीं … बस आपको हग करने का मन था.
रत्ना- क्या … हग??
रत्ना के लिए ये कोई बड़ी या नई बात नहीं थी.
वह सिर्फ राजनीति के लिए सभ्य बनी हुई थी.
रत्ना- तो उसमें क्या? अभी कर देते हैं हग!
साहिल को इसकी उम्मीद नहीं थी कि रत्ना इतनी आसानी से मान जाएगी.
रत्ना- अभी पहुंचते ही हग करती हूँ आपको. आप तो हमारे प्रिय मित्र हैं … आपका हक है मित्रता में गले मिलना तो बनता है!
साहिल का आत्मविश्वास बढ़ गया.
उसे हग से आगे का रास्ता भी आसान नजर आने लगा.
कुछ समय में जिस जगह जाना था, वे दोनों वहां पहुंच गए.
वहां होटल रूम अलग-अलग बुक किए हुए थे जिसमें उन्हें और भी लोग रहने वाले थे.
तभी रत्ना बोली- इन लोगों के साथ तो मुझे नींद नहीं आएगी … ये महिलाएं काफी चीप लग रही हैं!
साहिल ने झट से दिमाग लगाया और बोला- तो रत्ना जी, हम किसी और होटल में रुक जाते हैं!
रत्ना को कोई समस्या नहीं थी.
वे दोनों बाजू वाले होटल में आ गए.
वहां साहिल ने दो कमरों के लिए कहा.
तो रत्ना बोल पड़ी- दो कमरे किसलिए? अपने लिए तो एक ही कमरा काफी है!
साहिल- मैं भी हूँ तो …
रत्ना- तो कोई प्रॉब्लम नहीं है … हम दोनों अजस्ट कर लेंगे.
साहिल को मंजिल करीब दिख रही थी.
अब दोनों रूम में आ गए.
रत्ना अपने पैर फैलाकर बेड पर कूदकर लेट गई.
साहिल सोफे पर बैठा उसे निहारता रहा.
कुछ देर बाद रत्ना उठकर बैठी और साहिल से बोली- क्यों? क्या हुआ? क्यों दूर बैठे हो? हग नहीं करना?
साहिल को तो जैसे झटका लग गया.
सामने से खुद निमंत्रण मिल गया, तो वह हड़बड़ा गया.
रत्ना खुद चलकर साहिल के करीब आ गई तो साहिल उठ कर खड़ा हो गया.
रत्ना ने अपने शरीर की ओर इशारा करते हुए कहा- करो भी अब तो!
साहिल ने झटके से रत्ना को अपनी बांहों में ले लिया तो रत्ना ने भी उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया.
साहिल को रत्ना के नर्म दूध अपने सीने पर महसूस हो रहे थे.
तभी साहिल के हाथ रत्ना की गांड को दबाने लगे.
रत्ना- साहिल जी, बात तो सिर्फ हग की हुई थी ना … वहां तो नहीं जाना था आप तो आगे बढ़ गए … अब रुकना होगा आपको!
मगर अब साहिल कहां मानने वाला था.
उस वक्त तो वह रत्ना से अलग हुआ और बोला- रत्ना जी, आप मेरे लिए क्या कर सकती हैं?
रत्ना चूत-चुदासी घोड़ी थी, टाइम पास उसे पसंद नहीं था.
वह तपाक से खुल कर बोल पड़ी- आज आपकी रंडी बनकर चुद सकती हूँ … यही चाहते हो ना आप?
फिर क्या था साहिल ने रत्ना को खींचकर उसके टॉप और शॉर्ट्स को निकाल फेंका.
उसकी चूत और दूध पूरे नंगे हो गए. साहिल पागलों की तरह दूध चूसने लगा, पूरे जिस्म को चूमने लगा.
अपने दांतों से रत्ना के निप्पल काटने लगा.
इस सबसे रत्ना की चूत में आग लग गई.
रत्ना- साहिल … आआआ … चूसो ना जोर से मसल डालो इन्हें कब से चोदना चाहता था ये बुल्ला तेरा … मुझे मेरी चूत रंडी इसके इंतज़ार में मरी जा रही थी आह फाड़ दो आज मेरी चुत आह.
साहिल- हां रंडी … मुझे पता है तू कितनी बड़ी छिनाल है, कितने बुल्ले तेरी चूत में गए हैं.
साहिल भी अब नंगा हो गया.
उसका जिस्म बहुत आकर्षक लग रहा था.
उसका मजबूत बुल्ला हिचकोले खा रहा था.
रत्ना उसे देखकर खुद को रोक ही न सकी और झट से घुटनों के बाल बैठ कर लपक कर लौड़े को अपने होंठों से चूमने लगी.
उसने साहिल के लंड को होंठों में दबा दबा कर और जीभ से चूस-चूस कर उसे पूरा गीला कर दिया.
अब लंड की क्षमता खत्म होने पर थी.
साहिल ने तुरंत रत्ना को उठा कर बिस्तर पर पटका और उसके पैर अपने कंधों पर डालकर लंड चूत की दीवारों को चीरता हुआ डाल दिया.
रत्ना ‘आह मर गई’ कहती हुई कराही.
साहिल ने पूरा लवड़ा चुत की जड़ में ठोक दिया और प्यार से लंड अन्दर-बाहर करने लगा.
वह बीच-बीच में अपनी चुदाई की रफ्तार तेज़ कर देता.
रत्ना को नई उम्र के जवान लौंडे के लौड़े से चुदवाने में काफी आनन्द मिल रहा था.
कुछ ही देर में चुदाई ताबड़तोड़ होने लगी और करीब बीस मिनट तक हचक कर पेलम पाली करने के बाद वे दोनों अपने पीक पर आ गए थे.
दोनों चुदाई में मदहोश हो चुके थे.
रत्ना चिल्लाने लगी थी.
इतना स्टैमिना साहिल का था, उसे अंदाज़ा भी नहीं था.
अब साहिल का पानी निकलने को था.
उसने लंड चुत से खींचा और लौड़े का पूरा पानी रत्ना के मुँह पर निकाल दिया.
रत्ना ने उसके वीर्य को अपने मुँह में स्वीकार कर लिया.
अब दोनों निढाल होकर एक-दूसरे की बांहों में पड़े रहे और किस करते रहे.
इसके बाद सुबह कार्यक्रम स्थल पर नहीं गए.
ये दोनों अपना चुदाई का कार्यक्रम कमरे में ही बार बार चलाते रहे.
पूरा दिन नंगे ही रूम में पड़े रहे और चुदाई करते रहे.
कभी रत्ना घोड़ी बन कर चुदवाती तो कभी वह साहिल के लौड़े की सवारी गांठती.
साहिल भी रत्ना के दोनों दूध चूस चूस कर उन्हें और बड़े करने की कोशिश में लगा हुआ था.
रत्ना को भी उसके साथ चुत चुदाई करवाने में बड़ा मजा आ रहा था.
उसने एक से एक मर्दों के लंड खाए थे लेकिन साहिल का लंड उसे जबरदस्त सुख दे रहा था.
साहिल से बार बार चुत चुदवा कर रत्ना की प्यास भी पूरी बुझ चुकी थी.
उसकी चूत की हालत साहिल ने खराब कर दी थी.
उसी रात को दोनों अपनी कार में फिर वापस अपने घर के लिए निकल गए जहां रत्ना पूरी कार में नंगी ही बैठकर आई.
घर आते ही रत्ना ने साहिल को अन्दर खींच लिया और उसके कमरे में आकर वापस चुदाई का खेल चालू हो गया.
साहिल को समझ में आ गया था कि रत्ना नाम की रंडी उसके कैरियर को आगे ले जाने के लिए काफी मस्त माल है.
उसने रत्ना को प्रभारी से चुदवा कर उसको टिकट दिलाने की बात पक्की करवा दी.
अब रत्ना चुनाव के लिए तैयारी करने लगी.
साहिल को तो रत्ना को हर वक्त चोदने का भूत चढ़ा था.
अब साहिल कहीं भी एकांत में रत्ना के दूध या गांड दबा देता, कार में आकर उसे अपना लंड चुसवा देता था.
रत्ना भी हर वक्त गर्म रहने लगी थी और उसे भी मजबूत लंड मिल चुका था, जिससे वह मनचाहा चुदवा सकती थी … और चुदवा भी रही थी.
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आपकी हॉट दिव्या
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