यंग देसी गर्ल कहानी में मेरी सेटिंग भाभी की ननद का किसी लड़के से टांका भिड़ गया. भाभी ने मुझे उस लड़के के बारे में पता करने को कहा.
फ्रेंड्स, मैं आयुष बिंदल आपको अपनी सेक्स कहानी में रचना भाभी और उसकी ननद मीनाक्षी की एक साथ चुदाई की कहानी सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
सेटिंग भाभी की ननद का फ्रॉड आशिक
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि हम तीनों यानि रचना मीनाक्षी और मैं मिल कर मीनाक्षी के ब्वॉयफ्रेंड को चैक करने के लिए जाल बिछा कर उस पर काम कर रहे थे.
अब आगे यंग देसी गर्ल कहानी:
रचना अपने मादक हुस्न का जलवा बिखेरती हुई आगे बढ़ी और राहुल के सामने से अपनी गांड मटकाती हुई उसके बाजू वाली बेंच पर जाकर बैठ गई.
राहुल ने भी उसे अच्छे से जी भर के ताड़ा.
रचना अपने फोन पर कुछ-कुछ करने लग गई.
पांच मिनट के बाद राहुल अपनी जगह से उठा और टहलते हुए रचना के पास आ गया.
वह उधर बैठ गया और रचना से बातें करने लगा.
धीरे-धीरे वे दोनों हंस-हंस कर बातें करने लगे.
कुछ पल बाद राहुल उठ कर रचना के बाजू में बैठ गया.
इतने में मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया, जो टेलिकॉम कंपनी में काम करता है.
मैंने उससे राहुल का नंबर दिया और बातचीत रिकॉर्ड करने को कहा ताकि उसकी मंशा जाहिर हो सके.
इधर राहुल ने बात करते हुए रचना का हाथ पकड़ लिया, ये देखकर मीनाक्षी और मैं दोनों थोड़ा गुस्से से भर गए.
फिर थोड़ी देर बाद मीनाक्षी ने राहुल को कॉल करके कहा कि वह पांच मिनट में पहुंच जाएगी.
तो राहुल ने थोड़ा साइड में जाकर कहा- तुम मत आओ, मेरे घर में कोई हॉस्पिटल में एडमिट हो गया है … इसलिए मैं वहां से निकल गया हूँ.
यह कह कर राहुल ने कॉल काट दिया.
राहुल की तरफ से ये सब सुन कर मीनाक्षी रोने लगी और राहुल को गालियां देने लगी.
मैंने उसे चुप कराया और कहा- अभी तो बहुत कुछ पता चलना बाकी है.
ये सुनकर मीनाक्षी मेरे गले लगकर रोने लगी.
मैं उसकी पीठ को सहला कर चुप करने की कोशिश करने लगा.
उस वक्त उसके दूध मेरी छाती में दबे जा रहे थे … हालांकि अभी तक हम दोनों के मन में कोई गलत ख्याल नहीं आया था.
इधर राहुल और रचना को भी बात करते काफी देर हो गई थी.
तब रचना वहां से उठने लगी.
हम दोनों ने देखा कि राहुल ने अपना मोबाइल निकाल कर रचना से उसका नंबर लिया.
अलविदा कहने के लिए उसे गले लगाने की कोशिश करने लगा.
पर रचना गले न लगकर सिर्फ हाथ मिलाकर वापस उसी रेस्टोरेंट की तरफ बढ़ चली.
राहुल दूसरी तरफ से अपने रास्ते चला गया.
उनके जाने के बाद हम भी झाड़ियों से बाहर निकले.
तभी अचानक मीनाक्षी ने मुझे कसकर गले लगा लिया और बोली- मुझे माफ कर दो, मैं ही उस राहुल के प्यार में पागल हो गई थी. मैं कुछ भी सोचना बंद कर दिया था. अगर तुम दोनों न होते तो आज वह मेरे साथ कुछ भी करके मुझे बदनाम या परेशान करता.
ये कहकर वह रोने लगी.
इधर मेरा लंड कड़क हो गया था.
रचना की मटकती गांड को देखकर लंड पहले ही खड़ा होने लगा था और ऊपर से मीनाक्षी के स्तन छाती में दबने की वजह से तो वह फुफकारने लगा था.
मैंने मीनाक्षी को कमर से पकड़ा और जोर से आगोश में भरकर कहा- जो होता है, अच्छे के लिए होता है. अगर राहुल तुम्हारी जिंदगी में नहीं आया होता तो तुम मुझे ऐसे गले थोड़े लगा रही होती!
ये सुनकर वह हंस पड़ी और उसने मुझे अपनी गिरफ्त से आजाद कर दिया.
फिर मैंने उसके आंसू पौंछे, जो गालों से होते हुए गले तक जा रहे थे.
आज पहली बार मैंने मीनाक्षी को गौर से देखा क्योंकि अभी तक तो मेरा ध्यान सिर्फ रचना तक था.
मीनाक्षी भी काफी सुंदर थी, पर उसका रंग रचना से थोड़ा सांवला था.
स्तन भी थोड़े छोटे थे शायद 32 इंच के आस-पास रहे होंगे … पर नैन-नक्श तीखे थे.
जब हम दोनों अलग हुए तो वह बोली- तुम भी राहुल जैसे हो क्या?
मैं उसकी बात समझा नहीं तो वह बोली- तुम्हारा नीचे वाला जब देखो, तब किसी भी लड़की के लिए खड़ा हो जाता है?
मैंने भी कह दिया- हो तो तुम भी रचना की ननद … इसी लिए तो ये अपनी जगह की खुशबू पहचान जाता है.
हम दोनों हंस पड़े और कैफे की तरफ चल पड़े.
वहां पहुंचे तो रचना भी कपड़े बदल कर आ चुकी थी.
फिर मैंने कहा- कुछ खा लेते हैं.
तो मीनाक्षी ने यह कह कर मना कर दिया कि उसका मूड खराब है.
राहुल की असलियत देखकर वह दुखी थी.
तो मैंने तुरंत कहा कि चलो फिर घर ही चलते हैं.
अब हम तीनों तुरंत घर की तरफ निकल पड़े.
बाइक पर रचना और मीनाक्षी ने दोनों तरफ पैर करके आसन जमा लिया था.
रचना बीच में बैठी हुई थी और मुझसे पूरी चिपकी हुई थी.
मीनाक्षी ने भी ये सब देखा मगर वह कुछ नहीं बोली.
घर पहुंच कर वह दोनों अन्दर जाने लगीं तो रचना ने मुझे भी अन्दर बुला लिया.
हम तीनों मीनाक्षी के कमरे में बैठे हुए थे और वह रोए जा रही थी.
तभी मेरे उस दोस्त ने राहुल की वॉइस रेकॉर्डिंग भेजी.
उसमें वह किसी से कह रहा था- आज पार्क में एक जबरदस्त आइटम मिली है यार, अगर साली सैट हो गई तो उसकी वीडियो के 4-5 लाख तो मिल ही जाएंगे.
उसने अपने दोस्त से और भी बहुत कुछ इस तरह की बातें की थीं जिससे हम सभी को पता चल गई कि यह वीडियो बनाता है.
मुझे यह बात एकदम से समझ में आई कि राहुल लड़कियां फंसाकर उनकी ब्लू फिल्म बनाता है.
मैंने उन दोनों से यह बात कही कि इसकी बातों से लग रहा है कि ये लड़का ब्लूफिल्म बना कर बेचता है.
मेरी बात सुनकर वे दोनों चौंक गई थीं.
रचना ने उसे फर्जी नंबर दिया था इसलिए ये डर नहीं था कि वह रचना को परेशान करेगा.
अब मीनाक्षी को सब साफ-साफ समझ आ चुका था कि राहुल कैसा है और उसकी नियत क्या थी.
उसने हम दोनों से माफी मांगी.
हमने भी उसे पिछली सब बातें भूल जाने को कहा.
फिर हमने खाना खाया और मैं अपने कमरे में आ गया.
रात को लगभग साढ़े आठ बजे मीनाक्षी मुझे खाना खाने के लिए ऊपर बुलाने आई.
उस वक्त मैंने सिर्फ बरमूडा पहना हुआ था … बनियान या शर्ट नहीं पहनी हुई थी.
मैं पढ़ाई कर रहा था.
कमरे का दरवाजा खुला था.
तो मीनाक्षी सीधा अन्दर घुस आई और बोली- खाना बन गया है, चलकर खा लो.
मैं नीचे जाने के लिए खड़ा हुआ, तो वह बोली- काफी अच्छी बॉडी बना रखी है शायद इसलिए भाभी फंस गई तुमसे!
मैंने कहा- चाहो तो तुम भी फंस जाओ.
वह बोली- अब नहीं, अब सब कुछ अच्छे से देखकर फंसूँगी!
उस वक्त तो मैं इस बात का मतलब समझ नहीं पाया सो कह दिया कि हां ठीक है, तुम देख कर फंस जाना!
वह हंस दी.
हम दोनों नीचे खाने के लिए उतर गए.
नीचे जाकर पता चला कि राधा जी और अशोक जी खाना खाकर अपने कमरे में चले गए हैं.
हम तीनों ने खाना खाया.
रचना टेबल के बीच में बैठी थी.
उसके दाहिने तरफ मीनाक्षी और दूसरी तरफ मैं बैठा था.
उस वक्त उन दोनों ने गाउन पहना था तथा ब्रा न पहनने की वजह से दोनों के निप्पलों का उभार साफ साफ दिख रहा था.
मैं टी-शर्ट और बरमूडा पहनकर आया था.
खाना शुरू करते ही रचना ने अपने एक हाथ से मेरी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया.
ये टेबल के नीचे हो रहा था इसलिए मीनाक्षी हमें देख नहीं पा रही थी.
रचना ने धीरे-धीरे हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को अपनी गिरफ्त में ले लिया था और मेरा लंड फुफकारने लगा था.
हम दोनों मीनाक्षी के सामने कुछ कर नहीं सकते थे इसलिए जल्दी से हमने खाना खत्म किया.
रचना ने इशारे से मुझे चुपके से अपने कमरे में जाने को कहा.
खाना खत्म करके जैसे ही मीनाक्षी और रचना अन्दर बर्तन रखने गईं.
मैं भागकर रचना के कमरे में घुसकर छुप गया और रचना का इंतजार करने लगा.
बाहर से मुझे आवाज सुनाई दे रही थी.
मीनाक्षी ने मेरे बारे में पूछा.
तो रचना बोली- वह खाकर ऊपर अपने कमरे में चला गया होगा और मेरा भी सिर दुख रहा है, इसलिए मैं भी सोने जा रही हूँ!
तब मीनाक्षी बोली- ठीक है आप जाओ, मैं थोड़ी देर टीवी देखकर सोने जाऊंगी.
ये कहकर रचना आने वाली चुदाई का सोचकर जल्दी से कमरे में घुस गई.
पर इसी हड़बड़ाहट में दरवाजा बंद करना भूल गई.
अन्दर आकर वह जल्दी से मेरे सीने से लग गई और हमारे होंठ आपस में चिपक गए.
हमें चुदाई किए हुए सात-आठ दिन हो चुके थे इसलिए दोनों के अन्दर हवस की आग दहक रही थी.
कुछ ही देर में हम दोनों के कपड़े नीचे फर्श पर पड़े हुए थे.
हम एक-दूसरे के बदन को हर जगह से चूस रहे थे.
हम दोनों अपनी वासना में इतना खो गए थे कि ये भी ध्यान नहीं था कि हमारी सिसकारियां बाहर तक सुनाई दे रही होंगी.
इतने में रचना ने मुझे बेड पर लिटाया और वह 69 की अवस्था में आ गई.
मैं उसकी नर्म और गुलाबी चूत के अन्दर तक जीभ डालकर निचोड़ रहा था और वह मेरे मोटे और लंबे लंड को अपने गले तक फंसाकर उसका मजा लूट रही थी.
इतने में रचना की नजर दरवाजे पर पड़ी.
उसने देखा कि मीनाक्षी अपने गाउन को ऊपर उठाकर एक हाथ से अपने नंगे स्तन मसल रही है और दूसरे हाथ से अपनी चूत को मसल रही थी.
उसकी आंखों में वासना के डोरे साफ-साफ दिख रहे थे और हमारी चुदाई देखकर उसकी आंखें तक लाल हो चुकी थीं.
उसे देखकर रचना ने लंड चूसना बंद कर दिया था.
पर मैं नीचे था इसलिए मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया.
मैं मजा लेते हुए रचना की चूत को चाटता रहा.
फिर जैसे ही रचना और मीनाक्षी की नजरें मिलीं.
मीनाक्षी ने कहा- भाभी ये क्या है?
रचना घबराकर बोली- मीनू, तुझे तो पता ही है मेरे और आयुष के रिश्ते के बारे में … आज कई दिन बाद मौका मिला, तो मन को रोक ही न सकी. इसलिए ये सब होने लगा.
उन दोनों की आवाज को सुनकर मैं भी चौंक गया.
रचना भी मेरे ऊपर से हट गई.
मीनाक्षी बोली- अरे मुझे वह सब पता है भाभी, मैं वह नहीं बोल रही … मैं तो ये पूछ रही हूँ कि ये क्या है?
उसने अपनी उंगली मेरे लंड की तरफ कर दी.
रचना आंख दबा कर बोली- यही तो मर्द का लंड होता है!
मीनाक्षी बोली- इतना लंबा और बड़ा भी होता है क्या? मैंने राहुल का देखा था वह तो एकदम पतला और छोटा सा था. मुझे लगा ब्लू फिल्मों में सब झूठ दिखाते होंगे!
रचना बोली- तूने राहुल का कब देखा?
मीनाक्षी बोली- एक बार हम दोनों पिक्चर देखने गए थे, वहां पर उसने दिखाया था. वह तो इसके आधे का आधा भी नहीं है भाभी आप कैसे ले लेती हो इसे अपने अन्दर?
इतना कहते वक्त मीनाक्षी धीरे-धीरे अन्दर आ गई.
वह हम दोनों से चिपक कर खड़ी हो गई.
उसकी नजर मेरे लंड पर ही थी.
फिर वह धीरे से मेरे लंड को छूने लगी.
तभी रचना ने उसे रोका- मीनू तू ये क्या कर रही है?
वह बोली- तो भाभी आप बताओ न … मैं क्या करूँ? जैसे आप शादी के बाद सेक्स को लेकर आग में जल रही थीं, मैं भी वैसे ही जल रही हूँ.
रचना और मैं एक-दूसरे का मुँह देख रहे थे कि इस बात का क्या जवाब दिया जाए.
इतने में मीनाक्षी ने अपना गाउन उतार फेंका और नीचे झुककर मेरे लंड को मसलने लगी.
मुझे और रचना को ये अजीब लगा.
रचना बाहर जाने के लिए अपने कपड़े पहनने लगी.
तब मीनाक्षी तुरंत उठी और रचना से लिपट कर उसके होंठों को अपनी गिरफ्त में ले लिया.
वह अपनी भाभी के होंठों को बेतहाशा चूमने लगी थी.
रचना ने जैसे-तैसे उसे अपने से अलग किया और बोली- तू पागल हो गई है.
मीनाक्षी बोली- आप मुझे छोटी बहन मानती हो, पर मेरा दर्द क्यों नहीं समझ रही हो. जैसे आपको अच्छा सेक्स चाहिए, वैसे ही मुझे भी चाहिए!
रचना बोली- तो उसमें क्या है, तू आराम से कोई अच्छा सा बॉयफ्रेंड बना ले जो तुझे खुश रख सके … उसके साथ करना या फिर शादी के बाद.
मीनाक्षी बोली- शादी के बाद मेरा पति भी भैया के जैसा कमजोर निकला तो? और अगर बॉयफ्रेंड भी बना लूँ तो क्या सबसे पहले उसके कपड़े उतार कर उसका लंड देखूँ कि कितना बड़ा है? और अगर फिर से किसी राहुल जैसे लड़के के चक्कर में फंसकर कोई मेरा वीडियो बना लिया, तब क्या करूँगी?
रचना उसकी बात समझती हुई बोली- ठीक है, फिर तू एक काम कर आयुष के साथ अपनी सेक्स लाइफ एंजॉय कर, मैं बीच में नहीं आऊंगी.
मीनाक्षी बोली- नहीं भाभी, मैं आपकी खुशियां छीनकर खुश नहीं रह पाऊंगी.
रचना बोली- पर ऐसा कैसे होगा? हम दोनों एक ही आदमी के साथ सेक्स कैसे कर सकती हैं?
तब मीनाक्षी बोली- भाभी, ना तो घर वाले मेरी शादी आयुष से करेंगे और ना ही आप जिंदगी भर आयुष के साथ सेक्स रिलेशन में रह पाओगी. कुछ सालों के बाद ये अपनी पढ़ाई करके चला जाएगा तब तक तो हम तीनों मिलकर जिंदगी का मजा ले सकते हैं न … और ये चीज किसी को पता नहीं चलेगी. मैं भी बाहर किसी से फंसने से बच जाऊंगी और आपको भी भैया की कमी नहीं खलेगी!
रचना को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले.
इतने में मीनाक्षी रचना से चिपक गई उसके होंठों को चूमने लगी.
उन दोनों के नंगे स्तन आपस में रगड़ने लगे.
दोनों के अन्दर हवस की आग सुलगने लगी.
अब रचना भी काम वासना के सागर में गोते लगाने लगी थी और उसके हाथ भी मीनाक्षी के नंगे जिस्म पर सरकने लगे थे.
मैं इतनी देर से चूतियों की तरह साइड में खड़े होकर इन दोनों के तमाशे को देख रहा था और सोच रहा था कि कहां फंस गया.
साला इतने महीनों से सेक्स का अच्छा खासा जुगाड़ चल रहा था, अब पता नहीं इन दोनों में से किसी की चुत मिलेगी भी या नहीं!
दोस्तो, मेरी यंग देसी गर्ल कहानी में आपको मजा आ रहा होगा.
प्लीज मुझे जरूर बताएं कि आपको क्या लगता है कि भाभी और ननद किस तरह से मेरे लौड़े से चुदेंगी.
nehash01012003@gmail.com