ननद भाभी की एक साथ चुदाई- 1

Views: 62 Category: Jawan Ladki By nehash01012003 Published: May 15, 2026

देसी सेक्स की कहानी में मैं एक जवान भाभी को चोदता था. एक बार हमने उसकी ननद को किसी लड़के के साथ देखा. वो लड़का हमें ठीक नहीं लगा.

नमस्कार दोस्तो, मैं आयुष बिंदल एक बार फिर से आपके सामने अपनी एक और सेक्स कहानी के साथ हाजिर हूँ.

पिछली कहानी
किरायदार बनकर भाभी को यौन तृप्ति दी
में आपने पढ़ा था कि कैसे रचना ने मेरे लौड़े से अपनी चुत की प्यास बुझाई और मुझे भी चूत के लिए कहीं भटकने की जरूरत नहीं पड़ी.

अब आगे देसी सेक्स की कहानी:

मुझे वहां रहते करीब छह महीने हो चुके थे.
जब भी मौका मिलता, रचना अपनी प्यास बुझाने मेरे पास आ जाया करती.
हमारा रिश्ता खुशी-खुशी चल रहा था.

एक बार रचना का पति आदर्श किसी काम से चार दिन के लिए बाहर गया हुआ था.
तभी राधा जी (रचना की सास) ने कहा- बेटा, शाम को कुछ मेहमान आने वाले हैं और घर में कुछ-कुछ सामान खत्म हो गया है. तुम रचना के साथ जाकर बाजार से सामान ले आओ.

इससे पहले भी राधा जी मुझसे कई बार बाजार से सामान मंगवा चुकी थीं पर वे रचना के साथ मुझे पहली बार खरीददारी के लिए भेज रही थीं.

मैंने भी हां कह दी और उनकी मदद करने के लिए कॉलेज से छुट्टी मार दी.

फिर ग्यारह बजे के आस-पास मैं और रचना, आदर्श की बाइक से मार्केट के लिए निकल पड़े.

घर से निकलते वक्त रचना ने सूट पहना था.
वह बाइक पर काफी पीछे होकर बैठी.
उसने हम दोनों के बीच झोला (जिसमें सामान लाना था) रख लिया और सहारे के लिए बाइक के पीछे के सपोर्ट को पकड़ लिया.

ये देखकर मुझे गुस्सा तो बहुत आया, पर राधा जी के सामने क्या बोलता.

खैर, हम कॉलोनी से बाहर निकले … तब रचना ने मुझे किनारे रुकने को कहा.
उसने फटाफट दुपट्टे से अच्छे तरीके से अपने मुँह को बांध लिया ताकि कोई उसे पहचान न सके.

फिर उसने झोला को सामने बाइक के हैंडल में टांग दिया.
अब वह अपने दोनों पैर अलग-अलग साइड में करके और अपने दूध मेरी पीठ से चिपका कर बैठ गई.

उसके दोनों हाथ मेरी जांघों पर लहरा रहे थे.
उसकी इस बैठक से मुझे मजा आने लगा था. मेरा लंड तो वहीं पर मचलने लगा था.

रास्ते भर उसके दूध मेरी पीठ में धँसे जा रहे थे.
जब कोई रोड में गड्ढा आता तो मस्त रगड़ भी मिलती थी.

जैसे-तैसे हम सुपर मार्केट पहुंचे.
वहां पार्किंग में बाइक लगाकर जैसे ही रचना नीचे उतरी, उसे मेरे पैंट में उभार नजर आया.

वह खिलखिलाकर हंस पड़ी और ऊपर से ही मेरे लंड पर चपत लगाकर बोली- इतने महीने हो गए … और ना जाने कितनी ही बार चुदाई हो चुकी है, फिर भी जब देखो ये खड़ा ही रहता है!
मैंने उसका हाथ पकड़ कर कहा- ये है ही ऐसी चीज कि खड़ा होता रहे तो अच्छा है वरना तुम्हारा ध्यान कौन रखेगा?

वह हंस पड़ी.
हम मार्केट के अन्दर चल पड़े.

वह मेरी बांहें ऐसे थामकर चल रही थी, जैसे मैं ही उसका पति हूँ.

उसने शहर से बाहर वाले मार्केट चलने को कहा था … ऊपर से उसकी नई शादी हुई थी, इसलिए किसी के पहचाने जाने का खतरा बिल्कुल नहीं था.

वहां तकरीबन डेढ़ घंटे तक हमने शॉपिंग की.
कॉन्डम के चार नए फ्लेवर लेकर बिलिंग करवाई.

रचना ने उसका बिल अलग बनवाया ताकि कोई देख न ले.

उधर से बाहर निकलते ही मैंने कॉन्डम वाले बिल को तुरंत फाड़कर फेंक दिया.

अब तक काफी देर हो गई थी और घर भी दूर था.

तब भी हम दोनों ने पहले कुछ खाने का सोचा और पास ही एक रेस्टोरेंट में कुछ खाने के लिए चले गए.

वह रेस्टोरेंट कपल के बैठने के हिसाब से बनाया हुआ था जिसमें अलग-अलग केबिन बने हुए थे और रोशनी भी काफी मंद थी.
इसी सुविधा के कारण वहां ज्यादातर कपल ही आते थे … वह भी खाने कम और चुम्मा-चाटी करने ज्यादा.

हमने भी एक केबिन लिया और उसकी तरफ चल पड़े.
पर अचानक रचना ने मीनाक्षी को वहां देखा.
वह उधर एक लड़के के साथ आई हुई थी और अपने कपड़े ठीक करती हुई एक केबिन से बाहर निकल रही थी.

उसके चेहरे को देखकर लग रहा था कि वे दोनों काफी देर से अन्दर थे और काफी मजे करके बाहर निकले थे.
हालांकि उसने हम दोनों को नहीं देखा.

हम अपने केबिन की तरफ चल पड़े.
वहां से हमने देखा कि बिलिंग काउंटर पर वह लड़का मीनाक्षी के स्कर्ट के अन्दर से हाथ डालकर मसल रहा था.
फिर वे लोग चले गए.

रचना थोड़ी दुखी होकर रुआंसी सी दिखने लगी.
मैंने उसे जैसे-तैसे चुप कराया.

फिर उसने कहा- मैं मीनाक्षी को काफी शरीफ समझती थी, हम दोनों काफी अच्छी दोस्त भी बन गई थीं.
मैंने कहा- कोई बात नहीं, घर जाकर आराम से और प्यार से उससे बात करना … अगर वह करना चाहे तो!

इतने में हमारा नाश्ता आ गया.
हम नाश्ता करते हुए उसी की बात करने लगे.

मैंने कहा- जैसे तुम्हारी जरूरत थी तो तुम मेरे पास आईं, वैसे ही उसको भी जरूरत होगी और वह है भी तो हमारे बराबर की … तो सबको जवानी का जोश रहता ही है यार!
इस पर रचना ने कहा- वह तो मैं समझती हूँ, पर डर ये है कि वह लड़का सही है या नहीं … और कहीं मीनाक्षी बहकावे में आकर उस लड़के के साथ कोई वीडियो ना बना ले, जिससे बाद में वह उसे परेशान करना शुरू कर दे!
मैंने कहा- हां ये बात भी उससे पूछना और आराम से समझाना.

फिर हमने नाश्ता खत्म किया और घर आ गए.

मीनाक्षी भी अपने स्कूल के टाइम के हिसाब से पांच बजे घर आई.
शाम को उनके यहां मेहमान आए, तो सब उनके साथ बिजी रहे.

क्योंकि आदर्श बाहर था, इसलिए रचना ने मीनाक्षी को अपने पास सोने के लिए बुला लिया … ताकि आराम से सुबह की बात कर सके.

ये बात रचना ने मुझे मैसेज करके बता दी थी ताकि मैं रात में उसका वेट न करूँ और सो जाऊं.
वरना आज हमारा चुदाई का प्लान बना हुआ था.

खैर … अगली सुबह रचना ने मुझे और मीनाक्षी दोनों को अपने-अपने स्कूल-कॉलेज जाने के लिए मना कर दिया.

बाकी घर के काम निपटाते-निपटाते उसे ग्यारह बज गए.

फिर वह मीनाक्षी को लेकर ऊपर मेरे कमरे में आई.
हम बैठकर कल के विषय में बातें करने लगे.

तब रचना ने रात की बात बताई कि उस लड़के का नाम राहुल है.
उसने सब कुछ साफ साफ बताया कि उन दोनों की जान पहचान फेसबुक के द्वारा दो महीने पहले हुई थी और अब तक ये लोग उस कैफे में पांच छह बार जा चुके हैं.

एक बार उन्होंने होटल बुक करने की कोशिश भी की थी पर वहां कोई मीनाक्षी का जानने वाला आदमी दिख गया था इसलिए उसने मना कर दिया था.

यह सब बात करने के बाद रचना ने मीनाक्षी को डांटते हुए कहा- घूमना-फिरना अलग बात है, पर इतनी भी क्या जल्दी थी कि तुम उसके साथ होटल तक जाने को तैयार हो गई थीं? आजकल न्यूज़ नहीं देखती हो क्या? कैसे एमएमएस बना लेते हैं लड़के … और बाद में पूरे परिवार का जीना मुश्किल कर देते हैं. मैं तुम्हारी भाभी ही नहीं हूँ मीनाक्षी … बल्कि सहेली भी हूँ. कम से कम मुझे तो बता देना चाहिए था. अगर कोई और देख लेता तो घर में हंगामा खड़ा हो जाता!

मैंने रचना को थोड़ा शांत रहने के लिए उसकी जांघ पर हाथ रखकर और दूसरे हाथ से उसकी पीठ सहलाते हुए प्यार से बात करने को कहा.
ये मीनाक्षी ने भी देखा, पर वह कुछ बोली नहीं.

रचना ने आगे बोला- तुम स्कूल से गोल मारकर उस कैफे में जा रही हो, वह तो अच्छा हुआ कि हमने देखा वरना घर में महाभारत हो जाती!
ये सुनकर मीनाक्षी सवालिया अंदाज में बोली- भाभी, आप आयुष के साथ वहां क्यों गई थीं? वह कैफे तो केवल कपल के लिए है न!

अब इस सवाल से मैं और रचना दोनों सकपका गए और एक-दूसरे का मुँह देखने लगे.

फिर वह बोली- सुपर मार्केट तो घर के पास भी है, फिर आप दोनों इतनी दूर क्यों गए थे? और सब तो छोड़िए … भाभी आप ये सब बातें आयुष के सामने क्यों कर रही हैं? साथ ही इसने आपकी जांघ पर हाथ रखा और आपकी पीठ को भी सहलाया, तब भी आप कुछ नहीं बोलीं!

ये बातें सुनकर हम दोनों को ही सांप सूँघ गया.

वह इतने पर ही नहीं रुकी और आगे बोली- आप जब आयुष को खाना परोसती हो, तब भी बहुत खुश होकर देती हो … और आंखों-आंखों में बात भी करती हो. पहले आप अपना बताइए कि चक्कर क्या है?
ये सुनकर हम दोनों के चेहरे पसीने से भीग गए.

मैंने मीनाक्षी को समझाते हुए कहा- तुम जैसा सोच रही हो, वैसा कुछ नहीं है. हमारे बीच सिर्फ दोस्ती का रिश्ता है.

पर मीनाक्षी को हम पर पूरा शक हो गया था तो उसने तुरंत रचना का हाथ अपने सिर पर रखा.
वह बोली- भाभी, आप अगर मुझे जरा भी अपना मानती हो तो सच-सच बताओ वरना मेरा मरा मुँह देखोगी!

ये सुनकर रचना ने अपनी नजर नीची कर ली.
कुछ देर की खामोशी के बाद रचना बोली- मैंने तुम्हें हमेशा अपनी छोटी बहन जैसा माना है, पर तुम ये बात किसी को नहीं बताओगी, पहले ये वादा करो!

मीनाक्षी ने वादा किया.

तब रचना बोली- तुम्हारे भैया सेक्स में इंटरेस्ट नहीं लेते और साथ ही उनका वह बहुत छोटा और पतला भी है.
मीनाक्षी ने खुल कर कहने को कहते हुए कह दिया- उसे लंड कहते हैं और आप लंड ही कहो.

उसकी इस बात से मैं चौंक गया कि साली यह हमको लंड बोलना सिखा रही है जबकि हम लोग इसकी क्लास ले रहे थे.

रचना- हां ठीक है. सुनो पहली रात से ही तुम्हारे भैया मुझे सिर्फ गर्म करके छोड़ देते थे. जब हम लोग शादी से वापस आए थे, तब अगले दिन गलती से मैंने आयुष का ल…लंड देख लिया था, वह बहुत बड़ा और मोटा था. तब मुझे अपनी प्यास बुझती नजर आई इसलिए हमारे बीच संबंध बन गए.

ये सारी बात रचना ने मीनाक्षी का हाथ पकड़ कर एक सांस में बोल दी.

फिर रचना पुनः बोली- तुम तो मेरे बराबर की हो. जानती ही हो, अन्दर जब आग लगती है तो कैसा लगता है … और अपनी उंगली या फिर किसी नकली चीज से मजा नहीं मिल पाता!

ये सुनकर मीनाक्षी, जो अभी तक गुस्से से लाल-पीली हो रही थी … एकदम से रचना के गले लग गई.
वह बोली- भाभी यही तो मेरा भी हाल है इसलिए मैंने राहुल को अपना बॉयफ्रेंड बनाया है. कम से कम आप तो मेरी जरूरत को समझो!

तब रचना बोली- पगली, मैं इस बात से दुखी नहीं हूँ कि तूने किसी को बॉयफ्रेंड बनाया है. बस ये अच्छे से पक्का करना चाहती हूँ कि वह आजकल के लड़कों की तरह तुझे फंसाकर तेरी जिंदगी ना बर्बाद करे!
मीनाक्षी बोली- नहीं भाभी वह ऐसा नहीं है. वह मुझसे सच्चा प्यार करता है.

रचना बोली- ठीक है एक बार उसका टेस्ट लेते हैं. अगर पास हो गया तो अच्छी बात है, वरना वादा कर कि तू उसे भूल जाएगी.
मीनाक्षी को उस लड़के पर पूरा यकीन था, तो उसने तुरंत हां कर दी.

फिर मैंने कहा- तेरे राहुल से, रचना कोई अंजान लड़की बनकर मिलेगी. फिर देखते हैं कि वह रचना को पटाने की कोशिश करता है कि नहीं!

इस बात पर सब मान गए.

तब मीनाक्षी ने राहुल को फोन करके एक घंटे बाद पार्क में मिलने बुलाया.

वे दोनों तैयार होने नीचे चली गईं और मुझे भी फटाफट नीचे आने को बोलीं.
क्योंकि रचना के सास-ससुर का दोपहर में सोने का नियम था इसलिए उनको कोई परेशानी नहीं हुई.

जब मैं नीचे आया तो वे दोनों नॉर्मल सूट पहनी हुई थीं.
रचना के हाथ में एक कैरी बैग था, जिसमें कुछ कपड़े थे.

फिर हम तीनों आदर्श की बाइक से उस पार्क की तरफ निकल पड़े.
रचना बीच में बैठी थी और मीनाक्षी पीछे.

क्योंकि अब मीनाक्षी को हमारे बारे में सब पता चल गया था तो ऐसे बैठने से किसी को कोई परेशानी नहीं थी.

रचना के दूध अब भी मेरी पीठ से रगड़ खा रहे थे.
पर अभी मामला दूसरा था इसलिए हम दोनों ने उस पर ज्यादा गौर नहीं किया.

पार्क पहुंच कर वे दोनों पास के एक रेस्टोरेंट में घुस गईं और मुझे वहीं रुककर राहुल के आने का वेट करने को बोला.

मीनाक्षी ने घर पर ही हम दोनों को राहुल की फोटो दिखा दी थी, तो मैं उसे देखने लगा.

कुछ मिनट के बाद राहुल मुझे आता हुआ दिखाई दिया. सामने से देखने पर वह भी काफी सुंदर था और कपड़े भी अच्छे पहने हुए थे.

फिर वह अन्दर जाकर एक खाली बेंच पर बैठ गया.
वह दोपहर का वक्त था, इसलिए वहां भीड़ कम थी और पांच सात कपल ही थे.

मैं भी उसके पीछे थोड़े दूर पर जाकर पीछे छुपकर बैठ गया.

तभी मेरे पास मीनाक्षी का फोन आया.
उसने पूछा कि मैं कहां हूँ.
तब मैंने उसे बताया कि राहुल आ गया है, कहां बैठा हुआ है और मैं भी कहां छुपकर बैठा हूँ … ये सब बता दिया.

दो मिनट बाद ही मीनाक्षी पीछे के रास्ते से छुपती हुई आई और मेरे पास आकर बैठ गई.
जहां हम लोग बैठे थे, वह एक झाड़ी थी, तो जगह थोड़ी कम थी.

जगह कम होने के कारण मीनाक्षी को मुझसे चिपक कर बैठना पड़ा.
अच्छे से एडजस्ट करने के कारण उसने अपना हाथ मेरी जांघों पर रख दिया.

जब मैंने उससे रचना के बारे में पूछा, तो वह बोली- बस भाभी आती ही होंगी.

तभी राहुल ने मीनाक्षी को फोन करके पूछा- कितनी देर में आओगी?
उसने कहा- मुझे थोड़ा वक्त लगेगा, शायद आधा घंटा लग सकता है, तुम कहीं जाना मत, वहीं पहुंच कर इंतजार करना.

फिर दो मिनट बाद हमें रचना आती हुई दिखाई दी.
उसे देखकर तो मेरा मुँह खुला रह गया.

उसने ब्लू टाइट शॉर्ट्स पहनी थी, जिसमें दो तीन कट्स लगे हुए थे, जिसके कारण उसके अन्दर का भी नजारा दिख रहा था.
यह जींस इतनी ज्यादा टाइट थी कि रचना के चूतड़ों की गोलाइयों का अंदाजा साफ साफ लगाया जा सकता था.

उसने वाइट प्रिंटेड शर्ट पहनी हुई थी, जो उसकी नाभि के ऊपर तक थी … और वह शर्ट रचना के बदन से ऐसे चिपकी हुई थी कि उसके बदन का पूरा नाप आंखों से लिया जा सकता था, ऊपर से उसका रंग भी गोरा था.

काला चश्मा पहनी हुई रचना स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा लग रही थी.
उसे देखकर अगर किसी का लंड खड़ा न हो, तो यकीनन वह नपुंसक ही होगा.

उसे देख कर मेरे लंड भी तनाव में आ गया.

सुबह कॉलेज नहीं जाना था, इस वजह से मैंने लोअर ही पहना हुआ था.
मेरा लंड लोअर के अन्दर से ही पूरा खड़ा हो गया था और कपड़ा हिलने की वजह से मीनाक्षी का ध्यान उधर चला गया.

वह बोली- भाभी को देखकर हमेशा ये खड़ा ही रहता है क्या?
मैंने कहा- तुम्हारी भाभी है ही इतनी सुंदर और अभी तो देखो, इतनी हॉट बनकर आई है, इसे देख कर तो मुर्दे में भी जान आ जाएगी!

ये सुनकर वह मुस्कुरा दी.

दोस्तो, आपको मेरी देसी सेक्स की कहानी कैसी लग रही है, प्लीज जरूर बताएं.
इसके अगले भाग में मैं आगे का किस्सा लिखूँगा.
nehash01012003@gmail.com

You May Also Like

साउथ की हॉट लड़की प्लान बनाकर चुद गई- 1
Views: 150 Category: Jawan Ladki Author: yadavtarak847 Published: March 12, 2026

हॉट तमिल गर्ल X स्टोरी में मैं चेन्नई में किराये पर रहता हूँ. मकान मालिक की जवान बेटी सांवली पर बहुत सेक्सी है. लेकिन मैं ड…

मेरी मासूमियत का अंत और जवानी की शुरुआत-1
Views: 233 Category: Jawan Ladki Author: suhani.kumari.cutie Published: February 25, 2026

कॉलेज में पहुँचने से पहले मैं अनछुई, कुंवारी अक्षतयौवना रही. लेकिन कॉलेज़ हॉस्टल में पहुँचते ही मेरी रूममेट ने मुझे सेक्स क…

Comments