गर्म लड़की की चूत चुदाई कहानी में मेरे पास एक लड़की काम मांगने आई. मैंने उसके बदन का मुआयना करते हुए उसे काम पर रख लिया. वो भी मेरी नजर को देख चुकी थी.
दोस्तो, मैं कामेंद्र दिल्ली से आप सभी पाठकों का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मेरी सेक्स कहानी
कामवाली की कमसिन बेटी की चुदाई
को पसंद किया.
गुलाबो की बेटी को चोदने के बाद मैं दूसरे घर में रहने लगा.
उस समय मैं अपने लिए एक नई चूत ढूंढ रहा था.
उस समय शैली (गुलाबो की सहेली, जिसको मैंने ‘पराई औरत को चोदकर मां बनाया.’ नामक सेक्स कहानी में मां बना दिया था) मेरे घर पर आकर मेरे लिए खाना बनाने वाली मेड की बात कर रही थी.
अब आगे गर्म लड़की की चूत चुदाई कहानी:
उसी दिन शैली के सामने एक कामवाली काम मांगने के लिए आई.
उसका रंग एकदम दूध सा गोरा था और 32-30-34 के मादक कटाव वाला शरीर था.
उसकी लंबाई सामान्य थी.
वह जैसे ही आई, मेरी नज़र उसके चेहरे पर पड़ी और अगले ही पल मेरी कामुक नजर उसके स्तनों पर टिक गई.
उसके रसभरे स्तनों को आंखों से चोदते हुए मैं नीचे देखने लगा.
मेरी नजरें उसकी चूत को खोज रही थीं.
उस वक्त उसने साड़ी पहन रखी थी.
मैंने महसूस किया कि उसकी आंखें भी कुछ ढूंढ रही थीं.
उस समय मेरी पुरानी जुगाड़ शैली की नज़र मेरे ऊपर थी.
वह यह देख रही थी कि कैसे मैं उस कामवाली के शरीर का मुआयना कर रहा था.
मैंने उससे कहा- ठीक है, कल से आ जाना काम पर!
उसके जाते ही शैली हंस दी और बोली- लो मिल गई जुगाड़!
मैंने शैली को पकड़ा तो वह बोली- आज नहीं, आज मेरी चुत पान चबा रही है.
मैं समझ गया कि वह माहवारी से है. मैंने उसे जाने दिया.
जो लड़की काम मांगने आई थी, वह अगले दिन सुबह 5 बजे आ गई.
मैं तब सिर्फ़ अंडर वियर में सो रहा था.
उसने घंटी बजाई तो मैं तीसरी मंज़िल से सिर्फ अंडरवियर में ही नीचे दरवाजा खोलने आया.
मेरा लंड अंडरवियर से बाहर निकल कर खड़ा हुआ था.
उसने दरवाज़े की झिरी से मुझे इस हालत में देखा, तब उसकी नज़र मुझ पर और मेरे लंड पर जा पड़ी कि कैसे मैं नींद में चलता हुआ आ रहा हूं और मेरे शरीर पर सिर्फ अंडरवियर था, जिसमें मेरा खड़ा हुआ लंड बाहर निकल आया था.
लंड को देखते ही उसकी आंखों में चमक आ गई और वह अपनी जीभ निकाल कर अपने होंठों पर फिराने लगी थी.
मैंने दरवाजा खोला तो उसकी नज़र मेरे लंड पर ही थी.
मैं दरवाजा खोल कर वापस अपने बिस्तर पर आकर सो गया.
मुझे पता था कि मेरा लंड चड्डी से बाहर निकल आया था लेकिन मैं उसे लंड दिखा कर सैट करना चाहता था.
यदि वह लंड देख कर भड़क जाती तो मैं उसके ऊपर हाथ नहीं डालने वाला था.
उसने झाड़ू लगाने के लिए मुझे मेरे लंड पर हाथ रखकर जगाया.
मेरी नींद खुली तो देखा कि मेरा लंड बाहर निकल आया है.
मैंने उससे माफ़ी मांगी और कहा कि इसके बारे में किसी को कुछ मत बताना.
वह बोली- गलती हो जाती है, कोई बात नहीं. आपने जानबूझ कर थोड़े ही ऐसा किया.
तब मैंने अपना लंड अन्दर किया.
एक दिन मैं पेशाब कर रहा था.
उस वक्त दरवाजा खुला हुआ था, इतने में ही वह कब घर में आ गई, मुझे पता नहीं चला.
वह मुझे पेशाब करते हुए देख रही थी और मेरे लंड पर उसकी पूरी नज़र थी.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वह बोली- कपड़े धोने हैं, मशीन नहीं चल रही. आप देख लो.
मैंने कहा- ठीक है देखता हूं.
मैंने अपने अंडरवियर में मुठ मार कर चड्डी को मशीन के ऊपर रख दिया और तौलिया लपेट कर बाहर आ गया.
वह मशीन देख रही थी.
मैं उसके पीछे खड़ा हो गया.
मेरा लंड उसकी गांड में घुसा जा रहा था.
उसको शायद मज़ा आ रहा था, पर वह नाटक करने लगी.
वह बोली- साहब, थोड़ा दूर हो जाओ.
मेरा लंड उसने तौलिए में खड़ा हुआ देख लिया था.
मैं नीचे चला गया, तभी ऊपर से चिल्लाने की आवाज़ आई.
मैं ऊपर देखने गया तो देखा कि वह बेहोश होकर गिर गई थी … उसे शायद मशीन से करंट लग गया था.
मैं उसके तलवे अपने हाथों से रगड़ने लगा.
ऐसा करने से उसकी साड़ी उसकी जांघों से ऊपर हो गई, जिससे उसकी चूत दिखाई देने लगी.
अब तक वह सही हो गई थी और मुझसे अपने तलवे रगड़वाती हुई बोली- जरा ऊपर भी करो, बड़ी झनझनी सी हो रही है.
मैं ऊपर उसकी जांघों तक उसे सहलाता हुआ आ गया और वह आंख बंद करके अपनी मुट्ठियों को भींच रही थी.
उसी वक्त मैंने उसकी पैंटी उतार कर निकाल दी और जीभ से उसकी चूत चाटने लगा.
उसको शायद मज़ा आ रहा था तो उसने किसी रंडी की तरह अपनी दोनों टांगें पूरी फैला दीं.
थोड़ी ही देर में उसकी चूत का पानी मेरे मुँह में भर गया और में उस नमकीन रस को पूरा पी गया.
अब उसकी ब्रा में से स्तन निकाल कर उसका दूध पीने लगा. वह भी मस्ती से मुझे अपना दूध पिलाने लगी.
मैंने उसके दोनों दूध खूब चूसे और उसे नंगी कर दिया.
थोड़ी देर में मैं भी नंगा हो गया और उसे अपना लंड चुसाने लगा.
वह भी मेरे लौड़े को पकड़ कर मस्ती से चूस रही थी.
मैं उसके मुँह को चोदने लगा था.
मस्ती से नौकरानी का मुँह चोदते चोदते ही मैं उसके मुँह में झड़ने लगा और मैंने उसके मुँह को अपने वीर्य से भर दिया.
वह भी पक्की छिनाल थी … साली पूरा माल पी गई.
उसने काफी देर तक मेरे लवड़े को चूसा तो लंड पुनः अकड़ गया.
अब मैंने वापस से पोज बनाया और चोदने से पहले एक बार फिर से उसकी चूत को चाटा.
उसकी चुत एकदम कसी हुई थी तो मैंने पहले अपनी एक उंगली चुत में डाली और उसके बाद मैंने दो फिर तीन उंगलियां डालकर चुत का मुँह खोल दिया.
वह लंड लंड कहने लगी थी तो मैंने अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया और उसे धकापेल चोदने लगा.
वह काफी चुदासी थी तो गपागप लंड लेने लगी थी.
काफी देर तक उसको चोदने के बाद मैंने अपने लौड़े का सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया.
गर्म लड़की की चूत चुदाई करके मैं अपने कपड़े पहन कर नीचे चला आया.
उसके बाद वह भी अपने कपड़े पहन कर नीचे आ गई और अपने घर चली गई.
एक दिन मैं उसको बोल गया कि घर का काम करने के बाद अगर सोना हो तो अन्दर से बंद मत करना, मैं बाहर से ताला बंद करके जा रहा हूं.
वह बोली- ठीक है.
मेरे घर में कैमरे लगे हुए थे.
उन कैमरों में से मैं उसको देख रहा था.
उसने काम खत्म किया और नहाने के लिए अपने कपड़े उतारने लगी.
उसे नहीं पता था कि मैं कैमरे से उसको देख रहा हूं.
उसने साड़ी उतार कर फ़ेंक दी, फिर पेटीकोट ब्लाउज ब्रा और पैंटी भी उतार कर फ़ेंक दी.
वह पूरी नंगी होकर नहाने के लिए स्नानकक्ष में घुस गई.
वह साबुन के झाग लगा कर बाथटब में लेट गई और अपने शरीर को मलने लगी.
फिर वह शॉवर के नीचे खड़ी होकर नाचती हुई नहाने लगी.
उसके स्तनों पर से पानी की धार ऐसे होकर निकल रही थी जैसे कोई झरना बह रहा हो.
उसकी चूत पर झांटों का घना जंगल था.
मैं ये सब उसके सामने खड़े होकर देख रहा था उसको यह पता नहीं चला.
उसकी पायल की छन छन की आवाज़ चूड़ियों की खनकने की आवाज़ और पानी के गिरने की आवाज़ मेरे लंड को खड़ा कर चुकी थी.
मैं अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया और स्नानकक्ष में घुस कर उसके स्तन पीने लगा.
जैसे ही मैं उसके स्तन पीने लगा, वह मुस्कुरा कर ड्रामा करती हुई बोली- अरे साब, आप ये क्या कर रहे हो … मुझे छोड़ दो. आपको शर्म नहीं आती क्या … आप एक गरीब अबला पराई औरत की इज्ज़त लूटने में लगे हैं … जिसके पास अपनी इज़्ज़त के अलावा कुछ नहीं है!
मैंने कहा- बहन की लवड़ी छिनाल … तुझे चोदने में कैसी शर्म. तुम मेरे लंड को पकड़ कर मुझे जगा रही थीं और पहले भी तो मैं तुम्हारे साथ सब कुछ कर भी चुका हूं. उस दिन जब तुम बेहोश होने का नाटक करती हुई गिर गई थीं, तब मैंने तुम्हें हचक कर चोदा था!
वह हंस दी और बोली- आप मुझे क्या बता रहे हो साब … मुझे सब पता है क्योंकि मुझे तन का सुख आपने ही दिया है. उस दिन मेरी चूत बहुत प्यासी थी. मैं बेहोश होने का नाटक करके गिर गई थी. आपने मुझे लंड चुसाया था और पूरी मस्ती से मुझे चोदा भी था. उस दिन पहली बार किसी ने मेरी चूत चाटी थी साब … आपने मुझे तन और मन का सुख दोनों दिया है.
मैंने उसे अपना लंड पकड़ाया, तो वह मेरे सुपाड़े को चाट कर लंड चूसने लगी.
बीच में लंड मुंह से निकाल कर वह बोली- आज तक मैंने किसी भी गैर मर्द का इतना काला लंबा और मोटा खड़ा हुआ लंड नहीं देखा!
मैंने पूछा- क्यों तुम्हारे पति का कैसा है?
वह बोली- उसका छोटा और पतला सा लंड है. वह मुझे ढंग से चोद ही नहीं पाता है. इसी वजह से तो मैं किसी और से चुदना चाहती थी. मेरी नज़र पहले ही दिन आपके लंड पर पड़ गई थी, जो अंडरवियर से बाहर निकल आया था.
मैं बोला- तुम क्या सोचती हो कि लंड अचानक निकल आया था … नहीं, उसे मैंने ही जानबूझ कर बाहर निकाला था, जिससे तुम आसानी से देख सको.
वह बोली- हां साब, मुझे भी पता है. जब मैं काम मांगने आई थी तब आप अपनी आंखों से मेरा बदन टटोल रहे थे.
उसके मुँह को चोदने से मेरा सारा वीर्य उसके मुँह में भर गया और वह सारा वीर्य पी गई.
उसने मेरा लंड चाट कर साफ भी कर दिया.
फिर मैंने उसे अपने हाथों से मंगल सूत्र पहनाया और उसकी मांग सिंदूर से भरी.
फिर उसकी चूत को फैलाकर उसकी चूत चाट कर सारा रस पी लिया और उसका दूध पीने लगा.
वह बोली- आज पी जाओ मेरा सारा दूध … और मुझे चोद कर अपने बच्चे की मां बना दो.
मैंने उसकी चूत को फैलाकर एक ही झटके में अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और उसे चोदने लगा.
चोदते हुए मैंने सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और नौ महीने बाद वह मेरे बच्चे की मां बन गई.
अब हम दोनों जब भी मौका मिलता है, वह मुझसे चुदवा लेती है.
आपको मेरी गर्म लड़की की चूत चुदाई कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
pk95295@gmail.com