ट्रांसजेंडर सेक्स कहानी में शादी तक भी मैंने चूत नहीं देखी थी. शादी के मैं बीवी को चोदने को उतावला था. सुहागरात को बीवी ने चूत को हाथ भी नहीं लगाने दिया.
दोस्तो, मेरा नाम सोहन है।
मेरे घर पर मेरी छोटी बहन दीया, उसकी उम्र 18 साल, और पापा-मम्मी रहते थे।
ये ट्रांसजेंडर सेक्स कहानी उन दिनों की है जब मैं लगभग 25 साल का जवान लौंडा हो गया था और लंड भी लगभग 6 इंच का मोटा और टाइट खड़ा हो जाता।
लेकिन मैंने आज तक किसी लड़की को नहीं चोदा था।
बस अपनी शादी का इंतजार था और सपने थे कि कैसे बीवी को चूत चोदी जाए।
मेरे लिए रिश्ते आने लगे थे और एक लड़की जिसका नाम प्रिया था, उसे देखने हम उनके घर गए हुए थे।
जब मैंने पहली बार उसे देखा तो देखता ही रह गया।
काफी हट्टी-कट्टी बनी हुई औरत दिखती थी जैसे कि काफी जवानी की ऊर्जा भरी हो उसमें।
उसके दूध बहुत लंबे आगे को निकले हुए थे, बस चूसने का मन करने लगा।
मैंने तो मन में ही हाँ कर दी कि इसी को बीवी बनाऊँगा।
लेकिन उसने मेरी ओर केवल एक-दो बार ही देखा और वो तो बस मेरी छोटी बहन को ही अपनी कातिल नजरों से निहार रही थी।
पापा ने कहा, “हमारा लड़का अभी इंजीनियर की पढ़ाई पूरी करके शहर में अच्छी सी नौकरी करता है बेटी, तुम्हें कुछ पूछना है?”
तब प्रिया ने कहा, “आपकी लड़की क्या करती है?”
हम सब हैरान थे उसके सवाल से पर पापा ने कहा, “इसने अपनी स्कूल पूरी कर ली है और अब इंजीनियरिंग का कोर्स करने शहर जाएगी।”
दीया ने कहा, “भाभी आपको कोई परेशानी न हो इसलिए मैं किसी होस्टल में रह लूँगी। आप भैया के साथ मजे से रहना!”
और हँसने लगी।
लेकिन प्रिया बोली, “यदि तुम हमारे साथ रहोगी तो ही मैं ये रिश्ता हाँ कहूँगी!”
हम सभी हँसने लगे और वो भी।
मुझे लगा कि कितनी मिलनसार है मेरी प्रिया लेकिन सच्चाई कुछ और ही निकली जो शादी के बाद मुझे पता चली जिसने मेरे होश उड़ा दिए।
खैर हम रिश्ता पक्का करके आ गए।
हम सब बहुत खुश थे।
कुछ महीनों में हमारी शादी भी हो गई।
हमारी सुहागरात पर जब मैं उसके करीब गया तो उसने मुझे कहा, “यहाँ कुछ मत करिए। हम शहर जाके आपके अपार्टमेंट में पहली नाइट बिताएँगे।”
मैंने भी दुखी मन से हाँ कर दी।
लेकिन सोते समय मैंने उसके दूध को हल्का सा छुआ तो उसने मना नहीं किया।
मैं उसकी चूत पर हाथ ले जाने लगा तब उसने मेरा हाथ हटा दिया और बोली, “ये सब बाद में।”
फिर हम सो गए।
सुबह उठा तो देखा कि प्रिया केवल दीया से ही चिपकी हुई है।
मेरे लिए कुछ टाइम ही नहीं उसके पास।
खैर कुछ दिनों बाद मैं प्रिया और दीया को अपने साथ शहर ले आया।
वहाँ मेरे फ्लैट में 2 कमरे थे जिसमें से एक मैंने अपनी छोटी बहन दीया को रहने को कहा।
शहर में जाकर मैंने अपने लंड पर खूब तेल मालिश की और रात होने का इंतजार करता रहा।
जब प्रिया आई तो मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा।
उसने भी मुझे चूमा।
मैंने उसके बड़े-बड़े दूध दबाए।
उसने उफ़ करके मुझे प्यार से देखा।
फिर मैं उसके चूत पर हाथ ले गया तो वही हुआ कि उसने मेरा हाथ फिर से हटा दिया। मैंने कहा, “क्या हुआ?”
तो उसने कहा, “तबीयत ठीक नहीं। आज कुछ मत करो प्लीज!”
तो मैं फिर से दुखी होकर सो गया।
ऐसा कुछ दिन और चला।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था।
मैंने आज तक चूत को देखा तक नहीं था और मैं उत्सुक था कि वो दिन कब आएगा।
खैर एक दिन मैं ऑफिस से जल्दी घर पर आ गया।
मेरे पास फ्लैट की चाबी थी तो बेल प्रेस नहीं की।
जब मैं अंदर आया तो एक अजीब सा सीन देखा।
मेरे बहन के रूम का डोर खुला हुआ था और दीया नंगी बिस्तर पर सीधी लेटी हुई थी।
उसके कपड़े बाजू में पड़े थे।
मेरी बहन दुबली-पतली सी ही थी और उसके छोटे-छोटे चूचे ऊपर को खड़े थे।
उसके स्वीट से लाल-लाल निप्पल देखकर मेरे लंड में हल्की सी हलचल होने लगी।
उसकी टाँगें खुली हुई थीं पर चूत नजर नहीं आ रही थी, काली-काली झाँटे दिख रही थीं।
मुझे अहसास हुआ कि उसके सामने कोई खड़ा है पर दिख नहीं रहा था।
अचानक से मेरी बीवी के कपड़े भी उसके बगल में गिरने लगे तब मुझे शक हुआ कि ये दोनों लेस्बियन सेक्स तो नहीं कर रहे।
खैर मुझे उत्सुकता हुई देखने की।
थोड़ी ही देर में मुझे मेरी बीवी अपनी बहन के ऊपर झुकती हुई दिखाई पड़ी।
वो भी पूरी नंगी थी।
पर पीछे से मैंने उसके बड़े-बड़े दूध को अपनी बहन के छोटे दूध पर झुकते हुए देखा।
मन किया कि जाकर उसे पी लूँ।
मेरी बीवी की गांड बहुत गोरी थी जो हल्के-हल्के हिल रही थी.
और दीया की चीखें निकलने लगीं, “भाभी धीरे-धीरे! दर्द हो रहा है!”
प्रिया मेरी बहन के चेहरे को सहलाने लगी, उससे चूमने लगी और कहने लगी, “बस हो गया।”
लेकिन दीया तो अपने चेहरे को दाएँ-बाएँ ऐसे घुमा रही थी जैसे कोई लंड घुसा दिया हो उसकी चूत में।
मैंने सोचा कि मेरी बीवी की चूत की रगड़ इतना मजा दे रही है मेरी बहन को तो मुझे कितने मजे आएँगे!
और मैंने अपना लंड निकाल कर उसे सहलाना शुरू कर दिया।
मेरा 6 इंच लंड तन गया।
मन किया कि मेरी प्रिया की मोटी गांड पर पीछे से चढ़ जाऊँ और उसे अपनी मर्दानगी बता दूँ अभी।
खैर प्रिया की गांड तो तेजी से ऊपर-नीचे होने लगी और दीया ने चीख मचा दी और प्रिया को धक्का देकर बाजू में लिटा दिया और बोली, “भाभी आपका मुझसे सहन नहीं होता!”
मैं तो हैरान था देखकर!
दीया सही कह रही थी।
कैसे सहन होगा जब मैंने प्रिया का खड़ा लंड देखा!
गोरा लेकिन लगभग 8 इंच का तना हुआ।
मेरा लंड भी फीका था उसके सामने।
हाय मेरी किस्मत! मेरी बीवी एक मर्द है, हिजड़ा है ट्रांसजेंडर!
पर दिखती तो हुस्न की परी महिला जैसी।
मेरा तो लंड बैठ गया और चेहरा भी उड़ गया।
प्रिया ने कहा, “ठीक है तू मुझसे अभी चुदाने को राजी नहीं तो फिर चूस कर ठंडी कर दे मेरी बरसों की आग!”
और प्रिया के चेहरे को खींचकर अपने लंड के पास ले गई पर दीया ने चूसने से इंकार कर दिया और बोली, “भाभी 5 या 6 इंच का लंड होता तो मैं सहन कर लेती पर आपको नहीं सह सकती! मुझे माफ कीजिए। आपने जबर की तो मैं ये सब भैया को बता दूँगी!”
प्रिया थोड़ी नाराज सी हुई और जल्दी से अपने कपड़े पहन कर बाहर आने लगी।
मैं भी जल्दी से अपने रूम पर आकर बैठ गया और जैसे ही प्रिया आई मुझे रूम में देखा तो चौंक गई और बोली, “आप कब आए?”
मैंने कोई उत्तर नहीं दिया।
मैं तो दुखी था कि अब मुझे जीवन में कभी चूत नहीं मिलेगी।
वो बाथरूम की ओर गई और मैं भी झट से उठा और उसके पीछे-पीछे आ गया।
वो बोली, “आप क्यों आए हैं? मुझे सु-सु करने जाना है।”
मैंने कहा, “मुझे भी सु-सु करनी है। आज साथ में करेंगे।”
उसने कहा, “आपके साथ में कैसे कर सकती हूँ?”
तो मैंने अपनी पैंट से लंड बाहर निकाला और कहा, “ऐसे पकड़कर!”
वो चौंकी पर साथ में मेरे लंड को घूर कर देखने लगी और बोली, “आपका लंड तो काफी बड़ा है!”
मैंने कहा, “नहीं तुम्हारे से थोड़ा छोटा है।”
वो चौंकी और बोली, “क्या मतलब है तुम्हारा?”
तब मैंने अपना हाथ उसके लंड पर रखा कि यही मतलब।
वो माफी माँगने लगी, “इसमें मेरी कोई गलती नहीं।”
पर मैं रोने लगा और झुक कर घुटनों के बल बैठ गया।
मेरा चेहरा ठीक उसके लंड के सामने झुक गया और उसके लंड में हल्के-हल्के झटके आने लगे।
मैंने कहा, “इसे खोलकर दिखाओ!”
तब उसने मना किया पर आखिर में खोलकर मेरे सामने खड़ी हो गई।
उसका लंड वाकई काफी बड़ा था पर मैं तो उसे देख कर रो रहा था।
उसने अपने हाथ मेरे सर पर प्यार से रखे और मैं उसके लंड के काफी करीब आ गया।
अचानक से उसका लंड सीधा खड़ा हो गया और मुझे कुछ समझ ही नहीं आया कि मैं उसके लंड को मुँह में लेने लगा।
उसने कहा, “क्या कर रहे हो? मुझे सु-सु लगी है!”
और उसने अपने को पीछे को और किया।
उसका लंड फिर से ढीला पड़ने लगा।
मैंने कहा, “अब कहने को बचा क्या है?”
प्रिया ने कहा, “क्या कहना चाहते हो? खुलकर बोलिए।”
मैंने कहा, “आज अपने पति पर मूतो!”
उसने कहा, “आप पागल हैं क्या?”
लेकिन मैंने उसके लंड को हाथ में लिया और कहा, “मूतो वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा!”
वो थोड़ी डरी और उसकी फुर्र की आवाज के साथ मूत की धार निकल पड़ी।
मुझे थोड़ी राहत सी मिली उसकी गरम मूत की धार चेहरे और छाती से टकराई तो उसने भी एक राहत की साँस ली और बोली, “आप भी सु-सु करने आए थे न फिर कर लीजिए।”
मैंने कहा, “मैं तेरी गांड पर ही मूतूंगा!”
तो वो हँसकर मान गई और पीछे मुड़कर हल्का झुकी।
उसकी गोरी गांड देखकर गुस्सा कम हो गया और मैंने उठकर अपना लंड उसकी गांड पर टिकाया और पेशाब का फुव्वारा छोड़ दिया।
वो भी पीछे मुड़कर मुस्कुराने लगी और मुझे उससे प्यार सा हो गया और मैं सब भूल गया, उसे प्यार से देखा।
उसकी आँखों में भोलापन था चाहे लंड एक शैतान से कम नहीं था।
मैंने उसे हल्के से चूमा और हम बहुत करीब आकर लिपट गए।
नीचे से हम दोनों के लंड खड़े होकर एक दूजे से टकराने लगे।
मैंने उसके दूध को खोलकर पिया।
वो आह-आह करते बोली, “चलो बिस्तर पर। यहाँ बाथरूम में नहीं।”
मैं उसके साथ बिस्तर पर आया तो उसने कहा, “आपको कैसे पता चला मेरे लंड के बारे में?”
तो मैंने उसे बताया कि जब तुम मेरी दीया को चोदने की कोशिश कर रही थी तब।
उसने कहा, “मैं क्या करूँ? मुझे अपने लंड को शांत करना था इसलिए आपकी बहन को पटाने में लगी रहती थी। आपके लिए टाइम ही नहीं मेरे पास। लेकिन आपकी बहन मेरा लंड ले ही नहीं पाती। थोड़ा जाने पर ही रो देती है।”
मैंने कहा, “तुम मेरे बारे में भी सोचो। मैंने आज तक चूत को देखा तक नहीं और तुम भी ऐसी निकली।”
प्रिया ने कहा, “अगर आप साथ दें तो हम दोनों मिलकर दीया को…”
मैंने कहा, “क्या कह रही हो? वो छोटी है बहुत हम दोनों।”
इतने में प्रिया बोली, “18 साल की जवान है। बस एकबार सील टूट जाए फिर तो आसानी से हम दोनों को मजे देगी वो। लेकिन वो कहती ही कि कोई 5 इंच का लंड हो तो उसे सेक्स में परेशानी नहीं और आपका लगभग 6 इंच है तो…”
मैंने कहा, “मेरा लगे कैसे? मैं उसका भाई हूँ!”
प्रिया ने कहा, “सच कहना कि जब आपने अपनी बहन को नंगी देखा तो आपका खड़ा नहीं हुआ?”
तब मैंने कहा, “हाँ हुआ था लेकिन…”
प्रिया ने कहा, “ये लेकिन मुझ पर छोड़ दो। बाकी मैं सँभाल लूँगी। बस आपकी बहन मुँह में नहीं लेती है।”
मैंने कहा, “वो मैं ले लूँगा तुम्हारा। बस तुम चूत दिला दो मुझे।”
उसने आँख मारी और मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए अपने लंड पर ले गई और मैं भी उसके लंड को चूसने लगा।
इतना बड़ा लंड मेरे मुँह में ठीक से आ नहीं रहा था और इतने में प्रिया तो झटके देने लगी और मेरी साँसें अटक सी गईं।
लगभग 10 मिनट उसमें मुझे चोदा पर उसका लंड शांत ही नहीं होने का नाम ही नहीं ले रहा था।
तब मैंने अपने को छुड़ाया और कहा, “बस!”
लेकिन उसने मुझे फिर से अपने लंड पर दबा दिया और करीब 20 मिनट बाद उसका लावा छूटा और वो आह-आह करती हुई झड़ गई।
मैंने पहली बार किसी से अपनी चुदाई कराई थी लेकिन ये सब मुझे अच्छा लगा।
प्रिया बोली, “राजा आज मैं तुम्हारा लंड भी मस्त से चूसूँगी!”
और मेरा लंड हाथ में लेकर सहलाने लगी।
मुझे तो जन्नत मिल गई थी।
जैसे ही वो मेरे लंड पर झुकी और अपने गरम होंठ लंड को टकराए मैं तो पागल सा गांड उठाकर उछलने लगा और उसने मुँह में लेकर अपनी जुबान से उसे छुआ और आगे-पीछे होकर तेजी से लंड को चोदना शुरू कर दिया। मेरा तो 5 मिनट में ही पारा छूट गया और वो हँस पड़ी।
मैंने पूछा, “क्या हुआ?”
तो वो बोली, “कुछ नहीं। आप अभी कच्चे खिलाड़ी हो।”
मुझे थोड़ा बुरा लगा पर मैंने कुछ नहीं कहा और उसे बाहों में लाकर लिपट गया और हम सो गए।
सुबह को प्रिया ने कहा, “आज ऑफिस की छुट्टी करो।”
मैंने कहा, “क्या?”
तो उसने कहा, “आज हम दोनों आपकी बहन की छुट्टी कर देंगे!”
और हँस दी।
मैं भी मान गया क्योंकि चूत तो मुझे भी मारनी ही अब चाहे मेरी बहन की ही क्यों न हो।
दिन को मेरी बीवी ने मुझे कहा, “10 मिनट में आप दीया के कमरे में आ जाना। मैं डोर खुला ही रखूँगी।”
जैसे ही मैं दीया के रूम में गया तो देखा कि दीया पूरी नंगी लेटी हुई है और मुझे देखकर चौंक गई।
मैंने अपनी बहन की नंगी चूत पर नजर मारी तो देखता ही रह गया।
मेरी बीवी ने कहा, “देखेंगे ही या स्वाद भी लेंगे?”
दीया ने कहा, “भैया, वो मैं … ये सब भाभी ही करती है मेरे साथ। मुझे माफ कीजिए!”
और अपनी चूत को हाथों से ढक दिया।
मैंने दीया के हाथों को हटाया और उसकी चूत पर मुँह रखकर चूसने लगा।
वो आह-आह करती हुई मचलने लगी।
फिर मैं उठा और अपनी पैंट उतार फेंकी।
मेरा लंड बहन के सामने झूम रहा था।
इतने में प्रिया का लंड भी उफान खाने लगा।
दीया तो दो लंड देखकर डर सी गई।
हम दोनों दीया के बगल में नंगे लेट गए और उसके एक-एक छोटे से दूध पीने लगे।
वो भी गरम हो गई और अपने दोनों हाथों से हमारे लंड को कसकर पकड़ लिया।
प्रिया ने पीछे से दीया की एक टाँग ऊपर को उठाई और अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ने लगी।
प्रिया मुझे बोली, “देख क्या रहे हो? चूत सामने है आज आके पेलो!”
दीया ने कहा, “नहीं भाभी प्लीज!”
मैंने भी जोश में आकर अपना लंड आगे से चूत पर सेट कर दिया।
दीया बोली, “भैया नहीं!”
लेकिन मेरा लंड तो घुस ही गया।
दो-चार धक्कों में अंदर-बाहर होता हुए रफ्तार में आ गया।
वो रोने लगी मानों उसकी सील टूट गई हो।
मैं डर कर लंड को बाहर निकाल लिया पर इतने में पीछे से प्रिया ने अपने लंड को उसकी चूत पर सेट करके धक्के दिए जो दीया से बिल्कुल सहन नहीं हो रहे थे।
वो मचलने लगी।
थोड़ी देर में प्रिया ने लंड बाहर किया और दीया के पैरों को और ऊपर को उठाया और मुझे बोली, “क्या हुआ? थक गए क्या आप?”
दीया ने कहा, “भैया प्लीज!”
पर मैं भी पूरे जोश में था और अपने लंड को पेल दिया।
अब तो हम बारी-बारी से उसके चूत पर लंड की मार मारने लगे।
कभी-कभी तो हमारे लंड एक साथ दीया की चूत पर टकराते और वो चिल्ला उठती।
दीया काफी भर झड़ गई और फिर मैं भी उसके अंदर झड़ गया।
लेकिन प्रिया अब भी धक्के पर धक्के दिए जा रही थी।
काफी समय बाद वो भी दीया की चूत में झड़ गई।
मैं तो डर गया क्योंकि दीया बेहोश पड़ी थी।
प्रिया ने कहा, “अभी उठेगी!”
और अपना गीला लंड उसके नाजुक होंठ पर लगा दिए।
एकदम से दीया उठी रोती-रोती अपने कपड़े पहने और चली गई बाहर।
फिर मुझे पता चला कि वो अपने गाँव वापस चली गई।
डर ये था कि वो घर पर बता न दे लेकिन उसने कुछ नहीं बताया।
समय ऐसे ही बीत गया।
हम पति-पत्नी प्यार तो खूब करते लेकिन घुसाने के लिए दोनों उतावले हुए जा रहे थे।
एक रात मैंने प्रिया से कहा, “तुम बुरा न मानो तो एक बात कहूँ?”
वो बोली, “कहो।”
तो मैंने कहा, “क्या मैं तुम्हारी गांड मार सकता हूँ?”
वो तो मुझे घूर कर देखने लगी।
मैं डर सा गया कि मैंने गलत तो नहीं पूछा और वो हँस कर बोली, “ये बात मुझे क्यों न सूझी?”
तो मैंने कहा, “कौन सी बात?”
प्रिया ने कहा, “मैं भी आपकी गांड मारना चाहती हूँ!”
तब मुझे अजीब लगा।
पर बात तो सही थी।
उसे भी तो घुसाने का मन है।
मैं मान गया पर मैंने कहा, “पहले मैं तुम्हारी मारूँगा।”
उसने कहा, “ठीक है।”
फिर वो घोड़ी बनकर बैठ गई और मैंने अपना लंड उसकी गांड पर जोर लगा कर दबाया।
उसकी चीख निकली, “नहीं नहीं! बहुत तकलीफ हो रही है!”
लेकिन मुझे तो मजा आ रहा था।
उसकी मुलायम गांड पर थप-थप करके मैं झड़ गया।
वो उठी और कहा, “आप घोड़ी बनो अब!”
फिर मैं घोड़ी बना।
उसने अपना जालिम लंड मेरी गांड पर टिकाया और पहला धक्का जिसने मुझे हिला डाला।
मेरी गांड में लंड का टोपा ही घुसा कि मैं उठकर बैठ गया और अपनी बीवी के हाथ जोड़े।
वो बोली, “कुछ नहीं होगा। आप घोड़ी बनो। मुझे भी मजा लेना है!”
मैंने बहुत ना की तब उसने कहा, “ठीक है तेल लगा कर करूँगी तो आपका आसान होगा। देखो मैंने भी सहा न अपनी गांड पर आपके लंड की मार!”
मैं क्या करता?
मानना ही पड़ा।
उसने खूब अपनी उंगली से मेरी गांड में तेल डाला।
थोड़ा मजा आने लगा पर जब उसके लंड को खाने का टाइम आया तो मेरी चीखें निकल गईं।
उसने मेरे मुँह को बंद किया और धीरे-धीरे लंड को आधा अंदर पेल दिया और रुकी।
मुझे थोड़ी राहत सी मिली पर एक जोर का झटका मेरी गांड पर पड़ा और मैं सीधे बिस्तर पर लेट गया.
लेकिन वो भी मेरे ऊपर लेट गई और अपना लंड जमकर मेरी गांड में गड़ाए रखा जैसे कि गांड मारने में पीएचडी की हो उसने।
उसकी रफ्तार इतनी बढ़ गई कि मैं कुछ कह ही नहीं सकता।
बस वो बोलती जाती, “मेरे गांडू पतिदेव ले अब! आह आह!”
और जब वो झड़ी तब दोनों को एक राहत सी मिली और दोनों हँस दिए।
उसने कहा, “आप चिंता न लें। मेरी एक सहेली है। उसे झाँसे में लेंगे किसी दिन एक साथ।”
मैं बहुत खुश था उसे पाकर और वो दिन भी आया जब उसकी सहेली हैरान हो गई दो लंड देखकर और उसके राजी होते ही हम दोनों ने उसकी गांड और चूत में एक साथ आगे-पीछे से लंड पेले।
उसकी सभी सहेलियाँ अब प्रिया से डरती हैं क्योंकि प्रिया किसी प्लेबॉय से कम नहीं है।
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