मेरी अन्तर्वासना कम ही नहीं होती

Views: 61 Category: Jawan Ladki By daven0880 Published: March 27, 2026

अन्तर्वासना Xxx स्टोरी में मैं अपने घर में अपने बॉयफ्रेंड से चूत और गांड चुदाई का मजा जम कर ले रही थी क्योंकि मेरे घर में कोई नहीं था. हम दोनों पूरा समय नंगे रहते और चुदाई करते.

नमस्कार दोस्तो, मैं नेहा है, उम्र 34 साल, शादीशुदा महिला हूँ.

आज मैं आप सभी के साथ मेरी सेक्स कहानी का एक और भाग शेयर कर रही हूँ.
उम्मीद है आप सभी को मेरी कहानी का पिछला भाग
सूने घर में बीएफ के संग धकापेल चुदाई
पसंद आया होगा और बीएफ संग सेक्स कहानी का ये भाग भी पसंद आएगा.

अब मैं आपको आगे की अन्तर्वासना Xxx स्टोरी बताती हूँ.

वैभव और मैं बहुत चुदाई करने के बाद एक-दूसरे की बांहों में नंगे ही सो गए थे.

रात के करीब दो बजे वैभव बाथरूम जाने के लिए जगा था.
मैं थकी हुई गहरी नींद में सो रही थी.

वह बाथरूम से बाहर आकर मेरे मुँह के पास अपना लंड लाकर बैठ गया और मेरे होंठों पर अपने लंड को घुमाने लगा.

उसने मुझे जगाया और मेरे कुछ बोलने से पहले उसने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया.

मेरे मुँह में अपना लंड डालकर वह मेरे मुँह को चोदने लगा.
उसका लंड मेरे गले तक जाने लगा था.

थोड़ी ही देर में उसका लंड मेरी चुदाई करने के लिए तैयार हो गया.

मेरे मुँह को थोड़ी देर चोदने के बाद उसने मुझे पेट के बल लेटा दिया और वह मेरी जांघों पर बैठ गया.
उसने मेरे कूल्हों को खोल दिया और मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया.

वह आधी रात को मेरी गांड मारने लगा.
उसका लंड मेरी गांड में आगे-पीछे होते हुए अन्दर आ-जा रहा था.

वह भी मेरे ऊपर बैठकर मस्ती से मेरी गांड मार रहा था और अपना आधे से ज्यादा लंड मेरी गांड में डालकर वह मेरे कूल्हों को जोर-जोर से दबाने लगा.

मैंने उसकी तरफ देखा.
तो वह मेरे कूल्हों पर थप-थप थप्पड़ मारते हुए मेरी गांड मारने लगा.

मैंने कहा- बड़ा मजा आ रहा है तुम्हें मेरी ढोलक बजाने में?
वह हंस कर बोला- क्या मस्त गांड है तुम्हारी … इतना मजा तो तुम्हारी बहन की गांड मारने में भी नहीं आता है!

यह कह कर वह जोर-जोर से अपना पूरा लंड मेरी गांड में डालते हुए मेरी गांड मारने लगा.

उसके दोनों हाथ कभी मेरी ढोलक बजाते तो कभी मेरी चूचियों को मसलने लगते.

थोड़ी देर गांड मारकर उसने अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाला.

मैंने सीधा लेटने की कोशिश की, लेकिन उसने मुझे सीधा लेटने नहीं दिया.

अब उसने मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और फिर से मेरी चुदाई करना शुरू कर दिया.
मेरी चूत चोदते हुए वह मेरे मम्मों को पकड़ कर दबाने लगा और मसलने लगा.

उस वक्त वह जोश में आ गया था और जोर-जोर से चोद रहा था.
मेरी टांगों को एक साथ में करके वह मेरी चूत को दबा कर उसमें अपना लंड डाल रहा था.

उसने मुझे बीस मिनट तक उल्टा लेटाकर बहुत चोदा.

फिर उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मुझे चूसने के लिए कहा.

मैं उसके ऊपर सिक्स नाइन की पोजीशन में होकर उसका लंड चूसने लगी.
वह मेरी चूत में अपनी उंगली डालकर भी हिलाने लगा और अपनी उंगली तेजी से मेरी चूत में हिलाने लगा.
उसने जल्दी ही मेरी चूत से पानी निकाल दिया.

मैं उसका पूरा लंड मुँह में लेकर चूस रही थी.

मैंने उसके लंड को चूस-चूसकर खड़ा कर दिया और फिर उसने मुझे अपने लंड पर बैठने को कहा.
मेरी चूत से पानी निकल चुका था, तो मैं उसके लंड पर अपनी गांड रखकर बैठ गई.
उसका लंड धीरे-धीरे मेरी गांड में घुस गया और मैंने उसके लंड पर उछलना शुरू कर दिया.

उसने मेरे कूल्हों को पकड़ कर मुझे अपने लंड पर उछलने में थोड़ी मदद की.
मैं उसके लंड पर उछल रही थी तो मेरे बूब्स भी ऊपर-नीचे होते हुए उछल रहे थे.

उसने मेरे दूध पकड़ने की चेष्टा की, तो मैंने मस्ती की और अंगड़ाई लेकर अपने दूध उसकी पकड़ से दूर कर लिए.
वह हंस दिया.

थोड़ी देर बाद मैं उसके लंड को अपनी गांड में लिए हुए उसके ऊपर झुक गई और उसे ललचाने लगी.

वह मेरे बूब्स को पकड़ कर दबाने लगा.
मैंने आह की तो वह मेरे बूब्स के निप्पलों को मींजने लगा.

मैं मस्त होकर उसके लंड को गांड में लेकर आगे-पीछे हो रही थी.

वह भी मेरे उछलते हुए बूब्स के साथ खेलने लगा था और दोनों बूब्स को बॉल की तरह उछाल उछाल कर मस्ती करने लगा.
मैं भी मजे से ऊपर-नीचे, आगे-पीछे हो रही थी.

थोड़ी देर उछल-कूद के बाद मैं थक गई और उसके लंड पर से नीचे उतर गई, नीचे उतर कर मैं उसके बगल में लेट गई.
उसका लंड थोड़ा नर्म हो गया था.

उसने मुझे अपने कंधे पर सिर रखकर अपने बगल में लेटा दिया.
मैं उसको किस करने लगी और हमने थोड़ा रोमांस किया.
थोड़ी देर बाद उसके बगल में लेटे हुए ही मैंने अपने एक हाथ में उसका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी.

साथ ही मैं अपने दूसरे हाथ को अपनी चूत पर रखकर मसलने लगी.
उसका लंड धीरे-धीरे कड़क हो गया था और मेरी चूत भी गर्म हो चुकी थी.
मैं उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.

मैंने उसके लंड पर थूक लगाया और उसे दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी मुठ मारने लगी.

उसने कहा- क्या ऐसे ही माल निकाल देगी?
मैंने कहा- नहीं, अभी तो मेरी चुत गर्म हुई है!
उसने कहा- तो फिर आ जा, यहां लेट जा बहन की लवड़ी … अभी सारी गर्मी निकाल देता हूँ!

मैं उसके सामने सीधी लेट गई.
उसने मेरी जांघों को पकड़कर मेरे पैर चौड़े किए और मेरी चूत पर थूक लगाकर अपना हाथ घुमाया.
अब उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और एक जोर का धक्का लगाकर अपना आधा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया.

फिर उसने मेरे पैरों को थोड़ा ऊपर उठा दिया और मेरी चूत में वह अपना लंड डालकर मुझे चोदने लगा.
मेरी जांघों को पकड़ कर मेरी चूत में जोर-जोर से अपना लंड आगे-पीछे कर रहा था.

उसने मेरी टांगों को उठाकर जबरदस्त चुदाई की और जब मेरी चुत का पानी निकलने को हुआ तो उसने लंड मेरी चूत से बाहर निकाल कर मुझे देखा.
मैंने अपनी चुत से पानी छोड़ दिया.

उसने कहा- बस इतनी जल्दी गर्मी निकल गई?

मैं हाँफ रही थी.
वह मेरे मुँह के पास अपना लंड ले आया और उसने भी लंड की मुठ मारी और मेरे मुँह में अपना वीर्य छोड़ दिया.

उसके वीर्य से मेरा मुँह पूरी तरह भर गया था. हालांकि उसका वीर्य मेरी आंखों पर, नाक पर और होंठों पर भी लग गया था.
मैंने अपने हाथों को अपने मुँह पर घुमाया और उसका वीर्य अपने मुँह के अन्दर ले लेती हुई पी गई.

मेरे हाथ उसके वीर्य से चिकने हो गए थे, तो मैंने अपने हाथों को भी चाट लिया और सारा वीर्य पी गई.
वह भी मेरे साथ लेट गया और थोड़ी किस करने के बाद हम दोनों बातें करते हुए सो गए.

मैं वैभव की तरफ पीठ करके सोई हुई थी और वह मुझे पीछे से चिपक कर सो रहा था.

सुबह के करीब छह बजे वैभव का लंड फिर से खड़ा हो गया था और उसका लंड मेरी गांड को छू रहा था.
मुझे लगा कि वैभव जग गया है.
मेरी भी नींद खुल गई थी और मैंने पलटकर देखा तो वैभव गहरी नींद में सो रहा था.

गहरी नींद में भी वैभव का लंड खड़ा हो गया था और मेरी गांड को छू रहा था.
मुझे वैभव को जगाना ठीक नहीं लगा, लेकिन उसके खड़े लंड को देखकर मुझे चुदने का मन हो रहा था.
मैं उसके लंड के साथ खेलना शुरू कर देती तो उसकी नींद बिगड़ सकती थी.

मैंने उसके लंड को पकड़ कर धीरे से अपनी गांड पर सैट किया और धीरे-धीरे उसके लंड पर अपनी गांड को दबाने लगी.
उसका लंड थोड़ा सा मेरी गांड में घुस गया.

फिर मैंने उसके हाथ को पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया और उसके एक पैर का घुटना मैंने अपनी कमर पर रख दिया.

थोड़ी देर बाद उसका लंड नर्म हो गया और मेरी गांड से बाहर निकल गया.

उसी वक्त मम्मी का फोन आया कि वे दो बजे तक घर आ जाएंगी.
मैं फोन कट करके उठी और चाय बनाने चली गई.

मैं चाय बना रही थी और तभी वैभव ने मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया.

वह मुझसे लिपट कर मेरे कान के नीचे किस करने लगा.
तो मैंने उसे फोन के बारे में बताया.
वह ‘हूँ..’ कह कर मुझे चूमने में लगा रहा.

मैंने उसको दूर करने की कोशिश की, लेकिन उसने मुझे अपनी तरफ घुमाकर अपनी बांहों में भर लिया, अपनी बांहों में भरकर वह मुझे चूमने लगा.
मैं भी उसको किस करने लगी.

मुझे किस करते हुए वह अपने हाथों से मेरे कूल्हों को पकड़ कर दबाने लगा.
थोड़ी देर बाद उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया. मैं अपनी बांहें उसके गले में डालकर उसको किस कर रही थी.

मुझे अपनी गोद में उठाकर वह मुझे बेड पर ले गया और मुझे बेड पर लेटाकर किस करना शुरू किया.
फिर वह मेरे बूब्स को चूसने लगा.

मेरे बूब्स चूसते हुए वह मेरी चूत को मसलने लगा.
मेरी चूत से पानी निकलने लगा.
उसने मेरे पैरों को फैला दिए और वह मेरे पैरों के बीच में अपने घुटनों पर बैठ गया.

फिर उसने मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मुझे धीरे-धीरे चोदना शुरू कर दिया.
पहले उसने मेरी टांगों को थोड़ा ऊपर उठाकर मेरी चूत में अपना लौड़ा अन्दर-बाहर करना शुरू किया और जैसे ही चुत रसीली हुई, उसने धकापेल चुदाई चालू कर दी.

थोड़ी देर बाद उसने मेरी टांगों को अपने कंधों पर रखा और मुझे वासना से देखते हुए मेरी चूत का भोसड़ा बनाना शुरू कर दिया. उस वक्त वह चुत की जड़ तक अपना पूरा लंड डाल कर मुझे रौंद रहा था.
मेरी गांड उसके हाथों से खिंचती हुई आगे पीछे हो रही थी और मेरी चूचियों दरिया के ज्वार भाटा की तरह हिलोरें ले रही थीं.

मैं एक तरह से रगड़ी जा रही थी.

उसका पूरा लंड मेरी चूत में अन्दर तक जा कर बाहर तक आता हुआ जोर जोर से चल रहा था.

कुछ देर तक उसने किसी इंजन के पिस्टन की चुत की बोरिंग की और वह तेज तेज सांस भरते हुए मुझे गाली देने लगा.
‘आह साली रांड … बहन की लवड़ी कितना मजा देती है तू!’

मैं कुछ कह ही नहीं पा रही थी मेरी हालत एकदम से खराब हो गई थी.

अब वह थक गया था तो मेरी दोनों टांगों को अपनी बांहों में जकड़ कर बड़े आराम आराम से अपनी गांड को आगे पीछे करता हुआ मेरी चूत में अपना लंड हिला रहा था.
उसका लंड धीरे-धीरे मेरी चूत में घिस रहा था और मुझे पूरी संतुष्टि मिल रही थी.

उस वक्त मुझे उसके लंड से चुदने में पूरा मजा आ रहा था.
मैं मजे से लेटी हुई उसकी नशीली आँखों में देखती हुई लंड से चुदने का मजा ले रही थी.

थोड़ी देर बाद उसने मेरी चूत से अपना लंड बाहर निकाला और उसका इशारा पाते ही मैंने उठ कर झपटते हुए उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
वह भी खड़ा होकर मेरे मुँह में लौड़े को अन्दर बाहर करने लगा.
उसका एक हाथ मेरे सर पर था और वह मेरे बालों को पकड़ कर अपने लंड को मेरे मुँह में गले के अंतिम छोर तक पेलने में मशगूल हो गया था.

मैं भी रंडी की तरह अपने दोनों हाथ अपने घुटनों पर रख कर उकड़ू बैठी हुई थी और उसके पूरे लंड को मुँह में लेकर चूसने में लगी थी.

कुछ ही देर में उसका लंड एकदम से कड़क हो गया था और मैंने भी उसके लंड को चूस-चूसकर चिकना कर दिया था.

अब वह लेट गया तो मैं उसके लंड पर अपनी चूत रखकर बैठ गई. लंड अन्दर लेकर मैं उसके सीने के ऊपर लेट गई और उसे चूमने लगी.
उसने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और वह नीचे से गांड को उछाल उछाल कर मेरी चूत में अपना लंड डालकर मुझे चोदने लगा.

मैं उसके ऊपर लेटी हुई थी और वह मुझे दबोचे हुए था. मैं एक तरह से अपनी चुत को लौड़े में फंसा कर उसके पूरे लंड को चुत में रगड़वाती हुई अपने बदन को उसके बदन पर घिस रही थी.
तन से तन की रगड़ बड़ा मजा दे रही थी. मेरे दोनों दूध उसके सीने से पिस रहे थे और उसके सीने की सख्ती मुझे एक अलग सा अहसास दे रही थी.

साथ में उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल रखी थी तो गर्म लार का स्वाद एक अलग ही लेबल की उत्तेजना दे रहा था. मेरी आंखें बंद थीं और वह मेरे दोनों चूतड़ों को अपने हाथ से मसलता हुआ मुझे रगड़ता हुआ चोद रहा था.
उस वक्त चुदाई में तेजी नहीं थी लेकिन इतनी गर्म चुदाई हो रही थी कि क्या ही कहूँ.

एकदम संभोग में समाधि जैसी लग गई थी.

कुछ ही देर में हम दोनों की आग बढ़ गई तो वह नीचे से तेजी से गांड को उठा उठा मेरी चूत में अपने लंड के जोर-जोर वाले शॉट्स मारते हुए मुझे चोदने लगा था. उसने अपनी टांगों से मुझे दबोच लिया था.
मेरे मुँह से ‘आह्ह् … आह्ह् …’ की आवाजें निकल रही थीं और मैं उसकी जीभ को चूस कर रस पीने में लगी थी.

कुछ ही देर बाद उसने मेरी चूत में अपने शॉट्स मारने बंद कर दिए और मुझे ढीला छोड़ दिया.

मैं समझ गई और उसके लौड़े के ऊपर चुत फंसाए हुई ही बैठ गई.
अब मैं अपनी चूत को उसके लंड पर आगे-पीछे करने लगी. उसका पूरा लंड मेरी चूत में अन्दर चल ही रहा था.

तभी उसकी उत्तेजना फिर से बढ़ने लगी और उसने मेरे चूतड़ पकड़ कर मुझे अपने लंड पर ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया.
उसके लंड पर उछलने में मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.
वह बीच-बीच में मेरे बूब्स को पकड़कर दबा दिया करता था.

उससे चुदवाते हुए मुझे आधा घंटा से ज्यादा हो गया था और मेरी चूत से दूसरी बार पानी निकलने लगा था.

थोड़ी देर बाद उसने मुझे फिर से बेड पर लेटा दिया और मेरी चूत में वापस अपना लंड डालकर चोदने लगा.

इस बार वह मुझे चोदते हुए मेरे ऊपर पूरा लेट गया और मेरे होंठों पर किस करने लगा.
उसका पूरा लंड मेरी चूत में अन्दर घुस कर खलबली मचा रहा था.
वह धीरे-धीरे लंबे-लंबे शॉट्स मेरी चूत में मार रहा था.

उसने धीरे-धीरे बहुत सारे लंबे-लंबे शॉट्स मेरी चूत में मारे और उसके लंड से जोर से वीर्य की पिचकारी छूट गई.
उसने मेरी चूत में ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया. मेरी चूत में दो-तीन बार जोर के झटके खाते हुए उसने अपना पूरा वीर्य निकाल दिया.

मेरी चूत में अपना वीर्य छोड़ने के बाद उसने दो-तीन मिनट तक अपना लंड मेरी चूत में हिलाया और उसके बाद मेरी टांगें ऊपर करके अपना वीर्य मेरी चूत में अन्दर तक चला जाने दिया.

थोड़ी देर मैं सीधी लेटी रही.
अब मैंने अपना हाथ अपनी चूत पर फिराया, तो उसका थोड़ा सा वीर्य मेरी चूत से बाहर निकल गया था.
कुछ रस धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था. मेरी चूत उसके वीर्य से चिकनी हो चुकी थी.

वह अपना वीर्य छोड़कर सीधा बाथरूम में नहाने चला गया. मैं आंख बंद करके उसके लंड से निकले वीर्य की गर्मी से खुद को तृप्त करने लगी.

कुछ देर बाद जब वह बाथरूम से नहाकर बाहर निकला, तब भी मैं बेड पर नंगी लेटी हुई थी.
वह अपने कपड़े पहनने लगा.

उसने पहले शर्ट पहनी फिर वह अपनी पैंट पहनने के लिए बेड पर आकर बैठा तो मैंने उसके गले में अपनी बांहें डाल दीं.
उसके गालों पर किस करके मैंने उसे ‘आई लव यू’ कहा.

उसने भी मुझे ‘आई लव यू टू’ कहा और बोला- चलो अब थोड़ी देर में तुम्हारे मम्मी-पापा आते ही होंगे, तो मैं चलता हूँ!

वह अपने कपड़े पहन कर बाहर जाने लगा, तो मैं नंगे बदन ही उठ कर उसके पीछे गई और दरवाजे के पास जाकर मैंने उसे रोक लिया.
वह मुझे देखने लगा, तो मैंने उसकी पैंट की चैन को खोला और उसका लंड बाहर निकाला.
उसका लंड झुका हुआ था.

मैंने उसके लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू किया.
उसने कहा- तुम्हारे मम्मी-पापा के आने का वक्त हो रहा है!

मैंने उसके होंठों पर किस करके उसको चुप कर दिया.

मैं उसके लंड के पास घुटनों पर बैठ गई और उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.
उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा हो गया था. मैं उसके पूरे लंड को पकड़ कर हिलाती हुई मुँह में ले रही थी.
उसके लंड में तनाव आने लगा था.

मैं भी खूब तेज गति से उसके लंड को मुँह में लेकर हिला रही थी.
उसने मेरे बालों में अपना हाथ डाल कर मेरे मुँह को अपने लंड पर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया.

थोड़ी ही देर में उसके लंड से वीर्य निकलने लगा. उसका पूरा वीर्य मैंने मुँह में भर लिया और उसे गटक गई.
वह लंड मुँह से निकाल कर पैंट में डालकर चैन लगाने लगा.

उसके जाने के बाद मैं वापस आई और थोड़ी देर यूं ही नंगे बदन ही बेड पर लेटी रही.
मैं अपनी चूत में उंगली करने लगी. उसका वीर्य अभी भी निकल रहा था तो मैंने कायदे से अपनी चूत से उसका पानी निकाला और चाट कर उठ गई.

अब मैंने बाथरूम में जाकर खुद को सही किया और कपड़े पहन कर मम्मी पापा के आने का इंतजार करने लगी.

मम्मी-पापा के आने के बाद भी मुझे वैभव की बहुत याद आ रही थी.

एक दिन और दो रात तक वैभव ने मेरी खूब चुदाई की थी जो मुझे बहुत मजा दे गई थी.
वैभव से चुदने के बाद मैं उसकी दीवानी हो गई थी और मेरा बार-बार मन करता था कि मैं उससे और ज्यादा चुदवाऊं.

दोस्तो, यह मेरी सच्ची अन्तर्वासना Xxx स्टोरी आपको कैसी लगी, प्लीज मुझे जरूर बताएं.
daven0880@gmail.com

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