खेल के बहाने भैया से चुदी दीदी- 2

Views: 101 Category: Brother-Sister By susmitasenwar Published: August 27, 2026 📖 11 min read
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कजिन सेक्स स्टोरी में मेरी सैक्सी दीदी अपने पति के लंड से बच्चा नहीं दे पायी तो घर की महिलाओं ने उसे किसी और मर्द से चुद कर बच्चा पैदा करने को कहा.

फ्रेंड्स, मैं सुष्मिता चौधरी एक बार पुनः अपनी सेक्स कहानी का अगला भाग लेकर उपस्थित हुई हूँ.
कहानी के पहले भाग
चालू दीदी पति से प्रेग्नैंट नहीं हो पाई
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि दीदी को जीजू के साथ चुदवा कर औलाद का सुख नहीं मिल रहा था और वे अपनी ससुराल वालों के ताने सुन सुन कर पक गई थीं.

अब आगे कजिन सेक्स स्टोरी:

आर्यन भैया और चंद्रा दीदी आपस में इतने क्लोज कभी नहीं थे कि दीदी अपने मन की बात भैया से कह सकें.

इस बात को लेकर घर में महिलाएं भी बातें करती थीं कि लड़का छोटा है, उसके वीर्य से शायद ही कोई लाभ हो सके.
दीदी के कोई भी देवर या जेठ भी नहीं था, जिससे दीदी चुदाई करवा कर गाभिन हो सकें.

वैसे उस समय हम दोनों ही भाई बहन जवान तो हो चुके थे लेकिन अभी भी बच्चों की तरह ही रहते थे.
जैसे साथ में स्नान करना और साथ में ही खेलना … और एक दूसरे के गुप्तांग देखना आदि सब कुछ करते थे.

हमारी नजर में यह सब एक खेल था.

सच बात तो यह है कि भैया से दीदी ने चुदाई करवाई थी, उसके काफी बाद में मुझे पता चला था कि चुदाई करने से ही बच्चा होता है.
जबकि मैं समझती थी कि शादी के बाद बच्चा अपने आप हो जाता है. शादी में जो मंत्र आदि बोलते हैं शायद उसी से हो जाता है.

ऐसा मैं इसलिए सोचती थी क्योंकि बचपन में एक बार मैंने अपनी मम्मी से भी पूछा था, तब उन्होंने यही जबाव दिया था.
उनकी उस बात को मैंने उस समय सच मान लिया था.

जब तक मुझे वास्तविकता का अहसास नहीं हुआ था, तब तक मैं यही चूतियाई बात को सच मानती रही थी.

हालांकि दीदी जानती थीं कि हम दोनों ही इस तरह के खेल खेलते हैं.
उन्होंने हमें ऐसे खेलते देखा था तो उन्हें पता था कि भैया का लंड भी चुदाई के काबिल तो हो चुका है.

फिर पता नहीं उसे किसने सलाह दे दी थी कि भैया के लौड़े से ही चुद जाए.

वैसे भी उस समय हम दोनों ही भाई बहन साथ में ही रहते थे और हमारे मन में कभी भी ऐसा ख्याल नहीं आता था क्योंकि उस समय पोर्न मूवी आदि का प्रचलन बहुत ही कम था और भाई बहन का रिश्ता बहुत ही पवित्र माना जाता था.
आज के दौर में कजिन ब्रो और सिस्टर में चुदाई होना आम बात है.
जबकि उस जमाने में ऐसा कुछ भी नहीं था और न ही सही समझते थे.

हालांकि अगर raatkibaat की पुरानी कहानियां देखी जाएं तो उस वक्त भी भाई बहन में चुदाई होती थी.
फिर दीदी ने एक बार मुझसे कहा- तुम लोग जो खेल खेलते हो, वह खेल मुझको भी खेलना है.

उस समय हम आंखों पर कपड़े बांध कर नंगे भी हो जाते थे और साथ में भी नहाते थे.
लेकिन भैया बहुत ही पीछे थे क्योंकि आपको पता ही है लड़कियां इस मामले में थोड़ी सी जल्दी परिपक्व होती हैं.

दीदी की भैया से चुदने की प्लानिंग की बात मुझे काफी बाद में पता चली थी और पता चलने के बाद घर में महिलाओं की बातें याद आने लगी थी कि वे इस तरह की बातें इसलिए कर रही थीं.
इसके पहले तक तो मुझे यह भी पता नहीं था कि जीजू के वीर्य में कमजोरी थी.

अब दीदी आर्यन भैया से ही चुदाई करवाना चाहती थीं, इसी कारण से उन्होंने हम दोनों से ही नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी थीं.
जो दीदी पहले हम दोनों से लड़ती रहती थीं, अब वे हमसे प्यार से बोलने लगी थीं.

मैं और आर्यन भैया दोनों ही इस बात से अनजान थे कि दीदी का अचानक से ही इतना व्यवहार परिवर्तन कैसे हुआ है?
दीदी ने यह भी कहा था कि उन्हें भी हम दोनों के खेल में शामिल होना है, तो हम दोनों ने ही उनको खेल में शामिल करने का निश्चय कर लिया था.

दरअसल हमें भी उसकी काफी जरूरत थी क्योंकि हम खेल ही ऐसा खेलते थे.
इस बात की खबर अभी तक घर वालों को कुछ भी नहीं थी.

वे लोग बस यही प्लान बना रहे थे कि आर्यन के जवान होते ही उसको ही दीदी के पास भेजना है ताकि दीदी को संतान सुख की प्राप्ति हो जाए.

इस तरह की फुसफुसाहट मैंने भी सुनी थी, मगर वह सब चुदाई हो जाने के बाद सुनी थी.

उस वक्त तक न ही मुझे और न ही आर्यन भैया को कुछ पता था कि दीदी का क्या प्लान है.
लेकिन दीदी का व्यवहार अब हमें बहुत ही अच्छा लग रहा था तो हम दोनों भी खुश थे.

अब दीदी हमारे साथ ही क्रिकेट खेलने लगी थीं.
वे सतौलिया (एक राजस्थानी खेल) भी खेलने लगी थीं और लुका-छिपी का खेल भी खेलने लगी थीं.

हम लोग बारिश में मिट्टी के घर बनाकर भी खेलने लगे थे.

दीदी को हम दोनों अपने घर का घोड़ा बनाकर भी कई बार उनके ऊपर चढ़ते थे.
दीदी बहुत ही मोटी थीं, तो वे हमें आसानी से अपने ऊपर चढ़ा कर सवारी करवा लेती थीं.

लेकिन हमें यह नहीं पता था कि वे दरअसल घोड़ा नहीं, घोड़ी बननी चाहती थीं.
अभी तक दीदी चुदाई वाली बात शुरू नहीं कर पाई थीं.

एक रात मैं दीदी के पास सो रही थी, तब उन्होंने मुझसे पूछा था- तुम दोनों क्या क्या खेल खेलते हो?
तब मैंने बताया था- हम लोग घोड़ा घोड़ी वाला खेल भी खेलते हैं.

बस यह सुनकर दीदी की आंखों में अजीब सी चमक आ गई थी.
उन्होंने कहा था कि मैं तुम्हें एक नया खेल सिखाती हूं. तुम लोग इस तरह से खेला करो.

दीदी ने मुझसे कहा- भैया को मेरे रूम में लेकर आ जाओ तो मैं खेल को सिखा दूँगी.
हालांकि उन्होंने मुझसे यह भी कहा- तुम ऐसा मत करना क्योंकि तुम अभी छोटी हो.

फिर जब भैया आया और उसने मना कर दिया तो मामला जरा गड़बड़ा गया था.
वह अकेला दीदी के कमरे में जाने से डर रहा था.

फिर दीदी ने मुझसे कहा- तुम भैया को लेकर आओ.
मैं बड़ी मुश्किल से आर्यन भैया को मनाकर दीदी के लेकर में ले आई थी.
मैंने उससे कहा था- अरे वे तुम्हारी जीजी हैं, कोई दिक्कत नहीं है. चलो दीदी बोल रही थीं कि खेल में बहुत मजा आने वाला है.

तो मैं और भैया दोनों ही रूम में आ गए थे.

कमरे में आने के बाद दीदी ने कहा कि तुम अपनी आंखों पर कपड़ा बांध लो, यह खेल किसी और को नहीं दिखाया जा सकता है.
यह कह कर दीदी ने एक सफेद रंग का कपड़ा मेरी आंखों पर बांध दिया और मुझे पास में बैठने को बोल दिया था.

फिर दीदी ने भैया की आंखों पर भी कपड़ा बांध दिया था और भैया को कपड़े उतारने को कहा था.
भैया ने कपड़े उतारने से साफ मना कर दिया.

उस समय मुझे मेरी आंख पर बंधे कपड़े में से थोड़ा थोड़ा सा दिख रहा था कि दीदी और भैया क्या कर रहे थे.

फिर दीदी ने कहा कि तुम और सुष्मिता रोजाना ही ऐसा करते हो अगर आज नहीं किया तो मैं मम्मी पापा सबको बता दूंगी.
दीदी की इस बात से भैया डर गए और दीदी ने भैया के सब कपड़े उतार दिए.

मुझे तो मालूम ही था कि भैया का लंड उस समय लगभग 6 इंच का लंबा था.
मुझे लगता था उसका लंड दीदी की चूत के लिए पर्याप्त नहीं है, पर खेल शुरू हो गया.

भैया के नंगे होने के बाद दीदी भी नंगी हो गई थीं.
भैया का लंड संकोच के कारण उठ नहीं पा रहा था.

दीदी ने उसको उठाने की बहुत कोशिश की थी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था.

इस तरह का खेल लगभग 4-5 दिन तक चला था.
रोजाना यही सीन होता था और भैया का लंड लटका रहता था.

भैया अब डरे सहमे से रहते थे और मैं भी कुछ समझ नहीं पा रही थी कि माजरा क्या है!

फिर धीरे धीरे भैया का संकोच दूर हुआ और एक दिन उसका लंड कड़क हो गया.
दीदी ने घोड़ी बन कर भैया को सवारी करने के लिए कह दिया.

उस दिन ऐसे ही खेल खेल में दीदी भैया से चुद गई थीं.

हुआ यूं था कि उस दिन भी आम दिनों की तरह दीदी ने भैया को नंगा किया और खुद भी नग्न हो गई थीं.
फिर दीदी ने भैया को अपनी दोनों टांगों के बीच में लेकर कहा- तुम इस छेद में अपनी लुल्ली डालो, जिससे मक्खन निकलेगा.

भैया उस समय तक समझते नहीं थे, पर लंड कड़क हो गया था तो उसने दीदी की चुत में लंड सैट कर दिया.
फिर भी बड़ी मुश्किल से ही भैया ने दीदी की चूत में लंड डाल पाया था.

पहली बार अनाड़ी लड़का इतना आसानी से किसी भी चूत में लंड नहीं डाल सकता है न!
चूंकि दीदी की चूत काफी चुदी हुई थी, तो इस कारण आसानी से लंड उसकी चूत में घुस गया था.

लंड चुत में पेलने के बाद भैया ने लंड को आगे पीछे करने से मना कर दिया था.
दीदी ने उसे चॉकलेट देकर मनाया था कि अगर तुम ऐसा करोगे तो मैं तुम्हें यह दूंगी.

वह वाली चॉकलेट बहुत बढ़िया किस्म की थी, तो भैया चॉकलेट की लालच में दीदी को चोदने के लिए राजी हो गए थे.

दोस्तो यह सेक्स कहानी बिल्कुल सच है और इसमें थोड़ी सी भी कल्पना नहीं है.

उस दिन दीदी ने टांगें उठाकर ली थीं और भैया को चूत पर कूदने के लिए कहा था.
भैया अपनी लुल्ली को दीदी के पेशाब करने वाली जगह घुसाकर दीदी के ऊपर कूदने लगे थे.

मैं पास में बैठी सब देख रही थी.

लंड चुत में चलने लगा था तो दीदी भी जोर जोर से भैया को पकड़ पकड़ कर अपनी तरफ खींच खींच कर लंड को अन्दर बाहर करवा रही थीं.

कुछ ही देर में भैया थक गए थे.
लगभग 15 मिनट बाद उनके लंड से उनके जीवन का पहली बार वीर्य निकल गया था.

लंड से निकले वीर्य को अपनी चुत में लेने के काफी देर तक दीदी ने भैया को ऊपर लेटाए रखा था.

फिर भैया के हटते ही दीदी ने टांगें दीवार के सहारे ऊपर की ओर कर ली थीं ताकि बीज सही से बुव जाए.

उसके काफी देर बाद जब भैया कपड़े पहनने लगे थे तो दीदी ने उसे रोका और दूसरी बार के लिए कहा.

इस बार दीदी भैया को चित लिटा कर उसके लंड के ऊपर चुत सैट करके बैठ गईं और कूदने लगी थीं.

उस दिन का यह खेल दीदी ने तीन दिन तक खेला था क्योंकि शायद उस समय ही दीदी का गर्भ धारण करने का उचित काल था.
तीन दिन बाद दीदी ने हम दोनों से कहा कि यह सब किसी को बताना मत और आपस में भी नहीं खेलना.

बाद में दीदी वापस ससुराल चली गई थीं और कुछ दिनों में हम दोनों भी सब भूल गए थे.

उसके बाद कई बार भैया मुझसे पूछते थे कि दीदी वाला खेल खेलें?
तो मैं मना कर देती थी.
पता नहीं क्या था वह खेल!

मैं भैया से कह देती थी कि यह सब किसी को भी मत बताना, नहीं तो मम्मी और पापा मारेंगे अपन दोनों को!

इस घटना के 9 माह बाद दीदी को भी पुत्र रत्न की प्राप्ति हो गई थी.

बाद में जब मैं कॉलेज में पढ़ने आई थी, तब एक सहेली ने बताया था कि यह सब सेक्स होता है और इस तरह से चुदने से ही बच्चा होता है.
तब जाकर मुझे पता चला था कि दीदी ने भैया के साथ खेल नहीं खेला था बल्कि चुदाई करवाई थी.

उसके बाद दीदी ने कभी भी भैया से चुदाई नहीं करवाई थी लेकिन उसके कुछ समय बाद भी दीदी को पुनः एक और पुत्री हुई थी.
तब मैं सोचने पर मजबूर हो गई थी कि हो सकता है कि दीदी ने भी दूसरी बार मेरी अनुपस्थिति में भैया से फिर से चुदाई करवाई हो.

क्योंकि अब मैं और भैया अलग अलग हो गए थे और बचपन की सब बातें भूल गए थे.

अब दीदी सिर्फ अपने पति से ही चुदाई करवाती हैं. भैया की भी अब शादी हो गई है.
उस दौर में भैया समझते नहीं थे बल्कि दीदी की मजबूरी का फायदा उठाकर वे उसे आसानी से चोद सकते थे, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया था.

यह थी मेरी पहली सेक्स कहानी, जिसको मैं आपको बताना चाहती थी लेकिन बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थी.

आज मैं अपने ऊपर से एक वजन सा हटता हुआ महसूस कर रही हूँ.

यदि आप सभी का प्रोत्साहन मिला तो आगे भी इस तरह की और रोचक कहानियां लिख कर भेजूँगी और आपको इस साइट के माध्यम से पढ़ने को मिलेंगी.
आप सभी को धन्यवाद जो मेरी कजिन सेक्स स्टोरी को इतनी गौर से पढ़ा.

आप सब कजिन सेक्स स्टोरी पर अपने फीडबैक मेरी मेल आईडी पर दे सकते हैं.
susmitasenwar@gmail.com

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