हॉट मौसी X कहानी में मैं गर्लफ्रेंड के भाई की शादी में गया तो वहां गर्लफ्रेंड की मौसी पर मेरी नजर टिक गयी. वो अब भरपूर वासना से भारी दिख रही थी.
नमस्ते दोस्तो, मैं आपका पुराना साथी धीरज आज पुनः अपनी एक नई सेक्स कहानी लेकर हाजिर हुआ हूँ.
पिछली बार मैंने जो कहानी
बचपन की दोस्त से मुलाक़ात और चुदाई
लिखी थी, उसका लिंक मैंने इस कहानी में दे दिया है. उस सेक्स कहानी में आपने जाना था कि कैसे मैंने अपनी बचपन की सहेली कल्याणी की चुदाई की थी.
इस बार मैंने कल्याणी की मौसी को कैसे पटाकर चोदा, उसी के बारे में बताने जा रहा हूँ.
तो आइए हॉट मौसी X कहानी की शुरुआत करते हैं.
यह बात उन दिनों की है, जब कल्याणी के छोटे भाई मयूर की शादी होने वाली थी.
अब जब कि मेरे परिवार की कल्याणी के परिवार से अच्छी पहचान थी, तो उसने हम सब लोगों को आमंत्रित किया था.
मेरे घर वाले सीधा शादी में आने वाले थे, इसलिए संगीत और हल्दी के कार्यक्रम के लिए मैं अकेला ही आ गया था.
मैं दोपहर को ही कल्याणी के भाई के यहां पहुंच गया.
वहां मुझे मेरे कुछ पुराने मित्र भी दिखे.
मैं उनसे बातचीत करने में लगा, तभी मेरे पास कल्याणी की कॉल आई.
मैंने सोचा कि कल्याणी तो अभी इधर ही थी, फिर मुझे फोन क्यों कर रही है.
मैंने इधर-उधर देखा तो वह एक साइड में खड़ी थी और उधर से ही मुझे कॉल कर रही थी.
मैंने उसे देखा, तो उसने पास आने का इशारा किया.
मैं उसके पास गया तो बाजू में उसका पति भी था.
मैंने उसके पति से उसकी तबीयत के बारे में पूछा.
उसने सब ठीक होने का बताया.
उसके पति की तबियत के बारे में मैंने अपनी पिछली कहानी में लिखा था, आप चाहें तो पिछला भाग पढ़ सकते हैं … मैंने लिंक दिया है.
मुझे कल्याणी की आंखों में प्यास दिखाई दी तो मैं समझ गया कि यह क्या चाहती है और उसी के लिए इसने मुझे फोन भी किया था.
कल्याणी के घर में शादी के कारण काफी लोग आए हुए थे तो मुझे उसके साथ कुछ हरकत करने का मौका नहीं मिल रहा था.
फिर मेरी नजर एक औरत पर पड़ी.
पहले तो मुझे वह कोई अनजान लगी, फिर ठीक से देखा तो वह कल्याणी की मौसी अलका थी.
कल्याणी की मौसी अलका को देखकर मैं दंग रह गया.
मौसी अपने पुराने लुक से कहीं ज्यादा हॉट और सेक्सी लग रही थीं.
उनके उठे हुए स्तन और उठी हुई गांड की गोलाई मुझे मदहोश करने लगी.
हालांकि अलका मौसी की उम्र 40-42 के आस पास की रही होगी लेकिन उस समय वह मुझे 30-32 से ज्यादा की नहीं लग रही थी.
अब जब कि मैं उन्हें जानता था, इसलिए उनसे बात करने पहुंच गया.
बातचीत मैंने शुरू ही की कि उन्होंने मुझे देख कर कहा- तू धीरज है न?
मैंने भी हां कहा- हां … और आप अलका मौसी न!
‘हां मैं अलका … कितना बड़ा हो गया तू … शादी हुई कि नहीं तेरी?’
मैंने ना कहते हुए उनसे कहा- लड़की देखना शुरू कर दिया है.
वे हम्म कह कर चुप हो गईं.
फिर मैंने मौसी को छेड़ते हुए कहा- आप तो दिन-ब-दिन जवान होती जा रही हो.
इस पर उन्होंने मजाक में मेरे गाल पर हाथ लगाते हुए कहा- पागल, मेरा लड़का 19 साल का हो गया है और ग्रेजुएशन कर रहा है … अब कहां मैं जवान लगूँगी?
मैंने उनसे फिर से कहा- सच में मौसी आप किसी 30-32 साल की लड़की की उम्र की लग रही हैं.
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- ठीक है, ऐसा कहने के लिए तेरा शुक्रिया.
मुझे उनके लिए अपने मन में वासना जाग गई थी और मैं उन्हें इतना नजदीक पाकर चोदने के सपने देखने लगा था.
इधर संगीत की सब रस्में चल रही थीं, तभी मैंने देखा कि अलका मौसी किसी को ढूँढ रही थीं.
मैं भी उनसे बात करने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहता था.
मैं उनके पास जाकर पूछा- क्या हुआ?
तो उन्होंने कहा- मैं अपने बेटे अंकुश को ढूँढ रही हूँ. मुझे अपने घर से कुछ सामान और कपड़े लाना है.
मैंने बिना मौका गंवाए उनसे कहा- अगर आप चाहें तो मैं आपको छोड़ आऊं?
इस पर उनका जवाब था- अरे तो जल्दी चलो न … अगर मुझे पहले पता होता तो तुझे ही बोल कर ले जाती!
मैंने पूछा- और भी कुछ काम है क्या?
उन्होंने कहा- नहीं और कोई काम नहीं है … वैसे तुम किस काम की पूछ रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं, मैंने तो बस यूं ही पूछ लिया.
वे हम्म करके रह गईं.
फिर मैंने अपनी क्रेटा कार निकाली और उनके साथ उनके घर निकल गया.
मैं उन्हें अपनी गाड़ी में लेकर उनके घर पर पहुंचा.
घर जाते ही उन्होंने मुझे पानी दिया और चाय के लिए पूछा.
मैंने हां बोल दिया क्योंकि मैं कुछ पल और उनके घर निकलना चाहता था.
अलका मौसी हम दोनों के लिए चाय बनाने में लग गईं.
तभी मैंने हॉल से ही आवाज देकर पूछा- बाथरूम कहां है?
मौसी ने कहा- बेडरूम की साइड में है.
मैं बाथरूम गया और देखा कि अलका मौसी के कुछ कपड़े वहां रखे हुए थे.
मैंने एक-एक कर कपड़े बाजू किए और जिसे मैं ढूँढ रहा था, वह सामान मुझे मिल गया.
वहां उनकी पैंटी पड़ी थी जो कि भीग चुकी थी.
मैंने उसे उठाकर सूँघना शुरू किया ही था कि अलका मौसी ने मुझे आवाज दी- चाय बन गई है जल्दी करो, हमें वापस भी जाना है.
मैं बाहर आया और चाय पीने लगा.
वे भी अपनी चाय का प्याला लेकर कमरे में चली गईं.
उधर जाकर अलका मौसी ने चाय खत्म की और वे अपने कपड़े बदलने लगीं.
ड्राइंगरूम से उठकर मैं कप रखने के बहाने से किचन की ओर जाने लगा और उधर ही मौसी के बेडरूम की खिड़की थी तो मैं उसी खिड़की की तरफ आ गया.
मैं खिड़की में से झांक कर देखने लगा कि कुछ दिखता है या नहीं.
लेकिन बहुत देर तक कुछ नहीं दिखा.
मैं अन्दर आया, तब तक अलका मौसी भी रूम के बाहर आ गई थीं.
पता नहीं उन्होंने मुझे एक गुस्से वाली नजर से देखा और चलने को कहा.
गाड़ी में बैठने के बाद मैंने उनसे पूछा- क्या हुआ? आप चुप क्यों हो?
उस वक्त तो मौसी ने कुछ नहीं कहा.
मैं गाड़ी चलाता रहा और जल्द ही शादी वाली जगह पर आ गया.
गाड़ी पार्किंग में लगाते वक्त मेरे बहुत जोर देने पर उन्होंने कहा- तू खिड़की से क्या देख रहा था?
मेरे पास इस सवाल का जवाब नहीं था.
मैं चुप रहा और उनसे माफी मांगने लगा.
मैंने उनसे पूछा- आपको कैसे पता कि मैं आपको देख रहा हूँ?
तो उन्होंने मुझे घूरा और कहने लगीं- मेरी खिड़की में ट्रांसपेरेंट शीशा लगा है. उसमें बाहर से अन्दर का कुछ नहीं दिखता … पर अन्दर से बाहर का सब कुछ दिखता है.
तब मैंने उनसे मिन्नतें कीं और कहा- इस बात को यहीं खत्म कीजिए, मैं दोबारा ऐसी गलती नहीं करूँगा.
इस पर उनका जो जवाब मिला उससे मैं थोड़ा असहज हो गया.
अलका मौसी बोलीं- हम्म … तुमने सोचा होगा कि ऐसा मौका भी तो दोबारा नहीं मिलेगा … है न!
मैं उनकी तरफ देखने लगा कि वे यह किस भाव से कह रही हैं, तो पाया कि वे मेरी तरफ देखती हुई हल्की सी स्माइल कर रही थीं.
बस फिर क्या था, मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.
मैंने उनके हाथ को अपने हाथ से पकड़ा.
तो उन्होंने अपना हाथ अलग करते हुए मुझसे कहा- रात में मैं कुछ करती हूँ ताकि हम दोनों अकेले में वक़्त निकाल सकें.
मैंने भी हां में जवाब दिया और उनसे कहा- थैंक्स मौसी!
वे बोलीं- अब मैं तेरे लिए सिर्फ अलका हूँ!
मैंने समझ लिया कि अब ये मेरे लिए अलका रांड बन गई है.
मैंने हंस कर कहा- ओके अलका डार्लिंग!
वे हंस दीं.
फिर हम दोनों शादी में अन्दर चले गए.
अब मैं रात होने का इंतज़ार करने लगा.
काफी देर तक मैं अकेला बैठा रहा था.
तभी अलका मौसी का लड़का अंकुश मेरे पास आया और बोला- घर की चाभी मां आपकी गाड़ी में भूल गई हैं. मुझे घर जाना है, क्या आप मेरे साथ चलोगे?
मेरे मन में चोर जग गया और तुरंत मैं उसे गाड़ी में लेकर घर ले आया.
वह अपने काम में लग गया और इधर मैं अपने काम में लगने का बहाना बनाते हुए बाथरूम की ओर जाने लगा.
बाथरूम में घुसते ही मेरे हाथ निराशा से भर गए.
अलका मौसी की ब्रा-पैंटी वहां नहीं थी.
शायद उन्होंने अपनी ब्रा पैंटी को वहां से उठा लिया था.
अब मैंने अंकुश से कहा- बाकी रस्म तो रात में है, क्यों न हम कुछ देर यहीं आराम कर लें?
इस पर उसने भी हां बोल दिया और कमरे में जाकर लेट गया.
वह पहले से ही मुझे बहुत ज्यादा थका हुआ लग रहा था, तो जल्दी सो गया.
मैंने इस बात का फायदा उठाया और अलका मौसी की ब्रा-पैंटी ढूँढने लगा.
अलका मौसी के बेडरूम में जाते ही मैंने कपड़ों की अलमारी खोली. उधर मौसी की दो ब्रा मेरे सामने थीं. उनमें एक लाल रंग की थी.
मैंने उसे उठा लिया और गाड़ी की डिक्की में छुपा दिया.
फिर मैं आराम करने लगा.
कुछ देर आराम करने के बाद हम दोनों तैयार होकर शादी वाली जगह की ओर आ गए.
मैंने देखा कि सब लोग तैयार होकर शादी की रस्मों में शामिल हो रहे थे.
मेरी नजर सिर्फ अलका मौसी को ही ढूँढ रही थी.
कुछ पल बाद मैंने देखा कि अलका मौसी पीली घाघरा-चोली में क्या कयामत लग रही थीं.
उनके उठे हुए चूचे और मटकती हुई गांड ने मुझे एकदम मदहोश कर दिया था.
मुझे ऐसा लग रहा था कि मौसी को अभी के अभी उठाकर ले जाऊं और नंगी करके चोद दूँ, लेकिन डर रहा था कि सुबह वाली बात से मौसी अभी तक कहीं नाराज न हों.
मौसी को सैट करने लिए मैंने हिम्मत जुटाई और उनके पास जाना चाहा.
मौसी के करीब जाते ही मैंने उनसे कहा- आप सच में कयामत लग रही हो.
मौसी ने मुझे देखा और इठला कर कहा- तुम भी.
उनका ये जवाब सुनकर मैं समझ गया कि अब मेरा रास्ता खुल गया है. बस इनसे बात करके चोदना ही बाकी है.
मेरे मन की मुराद पूरी होने वाली थी.
मैं अब उनके अकेले होने का इंतज़ार करने लगा. रात में सब खाना खाने के बाद सोने के लिए जाने लगे.
उसी वक़्त अलका मौसी मेरे पास आईं.
उनके साथ में उनके पति और बेटा भी थे.
उन्होंने मुझसे पूछा- सोने का क्या प्लान है? यहीं सोने वाले हो या हमारे साथ घर चलोगे?
इस पर मैंने कहा- यहीं सो जाता हूँ.
लेकिन अलका मौसी के पति ने मेरी एक न सुनी और मुझे अपने साथ चलने को मना लिया.
पहले सब लोग गाड़ी में बैठ गए और बस चलने को थे कि तभी अलका मौसी की एक बहन आई और उसने मौसी से कुछ साथ सामान ले जाने को कहा.
अलका मौसी गाड़ी से उतरीं और सामान लेने चली गईं.
वह सामान कुछ ज्यादा था इसलिए मैंने ड्राइवर सीट पर बैठे बैठे ही डिक्की खोल दी.
अलका मौसी डिक्की में सामान रखकर फिर से अन्दर चली गईं.
दूसरी बार सामान लाने के बाद मुझे समझ में आया कि गाड़ी में सामान रखने के बाद तो अब अलका मौसी के लिए बैठने की जगह नहीं रहने वाली है.
तभी उनके पति ने कहा- तू एक काम कर, हमें छोड़ कर वापस आ जाना और अगली बार में अलका को ले आना!
मैंने भी वही बात सही समझी और उन दोनों को घर छोड़कर वापस आ गया.
दोस्तो, अपनी सहेली कल्याणी की मौसी अलका को किस तरह से रात को उनके घर की छत पर ले जाकर चोदा और अगले दिन पुनः चोद कर लंड को शांत किया, यह सब मैं आपको इस सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूँगा.
आपको मेरी हॉट मौसी X कहानी में कितना मजा आया है, प्लीज मेल लिख कर जरूर बताएं.
आपका धीरज
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