घर के नौकर के बड़े लंड से चुद गई मैं

Views: 116 Category: Naukar-Naukarani By divyavaryani700 Published: April 11, 2026

Xxx सर्वेंट सेक्स कहानी में मेरे जन्मदिन पर मेरे पति दारू पीकर सो गए, मुझे लंड की जरूरत थी. अंधेरे में मेरी चूची पर एक हाथ आया तो मुझे लगा कि अब मेरे पति मुझे चोदेंगे.

मेरी पिछली कहानी
पति ने सड़क किनारे कार में गांड मारी
में आपने पढ़ा कि मेरे पति ने मेरे जन्मदिन पर मुझे शॉपिंग कराई और सड़क किनारे कार खड़ी करके मुझे चोदा, मेरी गांड भी मारी. लेकिन मेरी संतुष्टि नहीं हुई.

अब आगे Xxx सर्वेंट सेक्स कहानी:

और फिर मैं भी अपने कमरे में सोने चली गई।

मैं अपने कमरे में आकर कपड़े उतार ब्रा-पेंटी में राज के बगल में लेट गई।

मैं राज को उठाने लगी क्योंकि पीने के बाद मुझे सेक्स करने का बहुत दिल करता है।
पर बहुत कोशिश के बाद भी राज नहीं उठे।

तो मैं खुद ही लेटकर पेंटी में हाथ घुसाकर अपनी चूत को सहलाने लगी।

तभी अचानक लाइट्स चली गईं और पूरे घर में अंधेरा हो गया।
मैं आराम से लेटी हुई चूत को सहला रही थी।
मेरी आँखें बंद थीं।

करीब 5 मिनट बाद मेरे चूचों पर किसी के हाथ आए और वो उन्हें दबाने लगा।
मुझे लगा शायद राज उठ गए।

मैं बोली, “ओह राज बेबी! उठ गए तुम? आअह्हह… दबाओ बेबी… और जोर से दबाओ!”

उसने पीछे से मेरी ब्रा का हुक खोला और चूचियों को बाहर निकालकर दबाने लगा।
मैं भी उसके हाथों से गरम होने लगी।
चूचे दबाते हुए उसने मेरे होठों पर अपने होठों को रखा।

मैं उसके बाल सहलाती हुई उसे चूमने लगी, “उम्मम्म… उम्मम्… उम्मम्म… आह्हह्ह… येस्स राज बेबी!”
थोड़ी देर बाद उसने मेरे होठों को छोड़ा और मेरी चूचियों को पकड़कर दबाते हुए चूसने लगा।

मैं उसके बालों को सहलाने लगी, “आआह्हह्ह… येस्सस्स्स… येस्स राज बेबी! मुझे नहीं पता था तुम नशे में इतना मस्त चूसते हो! आआह्ह… चूसो जान… और चूसो!”
उसने 15 मिनट तक लगातार मेरी चूचियों को चूसा।

और फिर मेरे बदन को चाटता हुआ नीचे आया।
मेरी पेंटी पर हाथ घुमाता हुआ मेरी जांघों को चाटने लगा।
धीरे-धीरे वो मेरी चूत के करीब आने लगा।

उसने मेरी जांघों को चाटते हुए मेरी पेंटी खींचकर उतार फेंकी और सीधा मेरी चूत पर मुँह लगाकर चाटने लगा।

मैंने जोर से उसका सिर पकड़कर अंदर दबाया और बोली, “आआह्हह्… राज! आज पहली बार तुम मेरी चूत चाट रहे हो! मुझे नहीं पता था नशे में तुम चूत भी चाट लोगे!”
वो मेरी चूत में जीभ घुसाकर पागलों की तरह चाटने लगा।

और मैं पागलों की तरह उसका सिर अंदर दबाती हुई सिसकियाँ भरने लगी, “उम्मम्म… सीसस सी… आआह्ह… आअह… आआह्ह… आआह्ह्… येस्स… येस्स… येस्स राज बेबी! लिक माई पुसी! लिक ईट हार्डर बेबी! तुम इतनी मस्त चूत चाटते हो फिर क्यों इतने नखरे करते हो रोज बेबी! आआह्ह… मेरी चुत्त्त्त जान! अगर ऐसे ही चाटते रहे तो पक्का मैं झड़ जाऊँगी! राज यूफफ… आआअह्ह राज!”

फिर उसने मेरी चूत चाटना बंद कर दिया और मुँह हटाकर खड़ा हो गया।
2 मिनट तक कुछ नहीं हुआ।

तभी अचानक उसने मेरे होठों पर अपना लंड फिराया।
मैंने अंधेरे में उसका लंड पकड़ा।
और जैसे ही लंड पकड़ा, मैं दंग रह गई।
भक्क! इतना बड़ा और इतना मोटा लंड! ये राज नहीं हो सकता!

कमरे में पूरा अंधेरा था।
मैंने एक हाथ में लंड पकड़े दूसरे हाथ को अपने साइड में लेकर बिस्तर पर टच करने लगी।
और मेरा हाथ जाकर राज की बॉडी पर टच हुआ।

और उसके बाद मैं दंग रह गई – राज तो सो रहा है! फिर ये कौन हो सकता है?

मैं थोड़ा घबरा गई कि अगर राज गलती से उठा तो वो ये सब देख लेगा।
पर मैं बहुत गरम हो चुकी थी।
मैं सब कुछ भूलकर उसके लंड को पकड़कर चाटने लगी।
और वो मेरा सिर पकड़कर मेरे बालों को सहलाने लगा।

मुझे उसका लंड बहुत पसंद आ गया था।
मैंने लंड मुँह में भरा और चूसने लगी।

मेरी बहुत कोशिश के बाद भी उसका पूरा लंड मेरे मुँह में नहीं जा पा रहा था।
मैं आधा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी।
और वो मेरे सिर को पकड़कर धक्के देने लगा।

थोड़ी देर बाद उसने एक जोरदार धक्का दिया जिससे उसका पूरा लंड मेरे मुँह में जा घुसा।
और मैं छटपटाने लगी।
मैं लंड मुँह से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी पर उसने मेरा सिर दबाए रखा।

उसके आगे मेरी हिम्मत फेल हो गई।
वो फिर धक्के देना शुरू किया और तेज-तेज मेरा मुँह चोदने लगा।
उसका लंड इतना बड़ा था कि मुझे गले से नीचे तक महसूस हो रहा था।

और मेरे मुँह से ‘ऊऊ ओओ ओ… ऊऊओ… ऊओ… गुऊऊओ ओओ… गुऊ ओओ… गुऊओओ… ऊऊ… ऊऊ… ऊऊआ… ऊओओ… ऊओओ’ की तेज आवाजें पूरे कमरे में गूंजने लगीं।
अब मुझे भी उसका लंड चूसने में मजा आ रहा था और मैं उसका पूरा साथ देने लगी।

10 मिनट तक मैंने उसका लंड मस्ती में खूब चूसा।
और फिर उसने लंड निकाला।

मैं बोली, “अब रहा नहीं जा रहा! प्लीज मुझे चोदो!”
उसने मुझे मेरी टाँगें खींचकर नीचे किया और मेरी टांगों के बीच आकर टाँगें फैला दीं और अपना लंड मेरी चूत पर सेट कर दिया।

मैंने अपनी टाँगों को उसकी कमर पर रख दिया।
वो अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा।

मैं सिसकियाँ भरने लगी, “आह्हह्ह… फक्कक! और मत तड़पाओ प्लीज! चोदो मुझे!”
उसने बेड के दोनों तरफ अपने हाथ रखे और एक जोर का धक्का मारा और उसका आधा लंड मेरी चूत में जा घुसा।

मैंने आह भरी, “आआह्ह… आआ ह्हह… ओह्ह गौड्ड! मर गयीईई ईईईई! सीस स सी सी… म्म्म्मम्म… आआह्… बहुत मोटा लंड है तुम्हारा! प्लीज आराम से चोदो!”
वो धीरे-धीरे धक्के देने लगा।
मैं दर्द से कराहने लगी।

थोड़ी देर बाद मैं भी गांड हिला-हिलाकर उसका साथ देने लगी।

तभी उसने एक और धक्का मारा और पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।
मैं चिल्लाई, “आआ ह्हह्ह्ह… आआ… उह्हहह्ह… आआ… माआआ मेरीई ईईईईई चुत्त्त्त! आह्ह… बहुत दर्द हो रहा है! आआ ह्हह्ह!”

वो मेरे ऊपर लेट गया और मेरे चूचे दबाता हुआ धक्के देने लगा।
मैं उससे लिपटकर उसकी पीठ सहलाती हुई सिसकियाँ लेने लगी, “आआह्हह… आआह्हह्ह… चोदो… चोदो… चोदो! आअह्ह… बहुत मजा आ रहा है! चोदते रहो!”

उसने मेरी बात सुनकर धक्के तेज कर दिए।
मैं भी गांड हिला-हिलाकर उसका साथ देने लगी।

तभी लाइट्स आईं और कमरे में उजाला हो गया।
मैंने उसे देखा और मैं दंग रह गई।
मुझे ये तो पता था कि वो राज नहीं है, पर ये नहीं पता था कि वो आखिर है कौन।

जैसे ही उजाला हुआ मैंने उसे देखा – रमेश!
मैं बोली, “रमेश! तू?!”
मेरी आवाज सुन वो डर गया, उसके धक्के रुक गए।

मैं बोली, “ये तू क्या कर रहा है रमेश? मैं तेरी मालकिन हूँ!”
वो बोला, “मुझे माफ कर दो मालकिन! आज आपको उन कपड़ों में देख मुझसे रहा नहीं गया। राज सर भी आज नशे में हैं तो मुझे ये मौका सही लगा। मुझे माफ कर दो प्लीज! किसी से कुछ कहना मत, वरना मेरी नौकरी चली जाएगी दिव्या मालकिन!”
इतना कहकर वो पीछे होने लगा।

मैंने उसे पकड़ लिया और बोली, “रुको मत रमेश! करते रहो! बहुत मजा आ रहा है! चोदो मुझे रमेश!”
मेरी बात सुनते ही वो खुश हो गया और धक्के लगाने लगा।

मैंने उसे पकड़ा और उसके होठों को चूमते हुए उसका साथ देने लगी, “आआह्हह… रमेश… आह्ह… चोदो रमेश! चोदो अपनी मालकिन को! बहुत मस्त लंड है तुम्हारा रमेश! आज तक नहीं ली मैं ऐसा लंड! बुझा दो मेरी प्यास रमेश! आअह्हह… आआह… आआह्ह!”

रमेश ने मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और तेजी से मुझे चोदने लगा, “आआह्ह… मालकिन! बहुत मस्त चूत है आपकी! आआह्ह… मजा आ गया मालकिन! मजा आ गया! आअह्ह!”

थोड़ी देर बाद हमने पोजीशन बदल दी।
मैं राज के बगल में, राज की तरफ चेहरा करके घोड़ी बन गई और रमेश ने मेरे पीछे बेड के करीब खड़े होकर मेरी चूत में लंड पेल दिया और मेरी कमर पकड़कर तेजी से धक्के देने लगा।

मेरा पूरा बदन उसके धक्कों से हिलने लगा, “आअह्ह… रमेश मेरी जान! चोदो मेरी चूत! और तेज चोदो! आआ ह्हह्ह… आआहह्ह!”
रमेश भी पूरे जोश में आकर मेरी चूत को चोद रहा था, “आह्ह… मालकिन! मजा आ गया मालकिन!”

10 मिनट बाद रमेश रुक गया।
मैं बोली, “चलो नीचे लेटकर आराम से करते हैं।”

मैंने जल्दी से जमीन पर एक गद्दा डाला और फिर एक चादर।
और लेट गई।

मैं गद्दे पर और बोली, “बताओ अब कौन सी पोजीशन में चोदना चाहोगे रमेश?”
वो बोला, “लेट जाओ मालकिन।”

मैं सीधी लेट गई।
रमेश मेरे ऊपर आ गया और उसने मेरी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं।

टाँगें कंधों पर रखकर रमेश जैसे ही लेटा, मेरी दोनों टाँगें हवा में उठीं और मेरे चेहरे के करीब आ गईं।
रमेश ने लंड मेरी चूत पर सेट किया और एक ही धक्के में अंदर डालकर तेजी से मुझे चोदने लगा।

मैं गद्दे को पकड़कर कराहने लगी, “आह्ह… रमेश! ऐसे तो बहुत अंदर तक जा रहा है रमेश! आआह्ह ह्ह… तुम बहुत मस्त चोदते हो रमेश! चोदो मुझे रमेश! और तेज चोदो! ऐसे ही चोदते रहो! अह्ह्… अअह्ह… येस्स… येस्सस्… येस्स… येस्स बेबी! फककक्कक मीई ईईईईई! फक्क मीई ईईई! फककक्कक मीई ईईईईई हार्डर बेबी!”

रमेश ने अचानक मेरी चूत से लंड निकाला और मेरी गांड पर रगड़ने लगा।
मैंने उसे देखा और बोली, “ये क्या कर रहा है रमेश?!”मैं उसे रोकती उससे पहले उसने जोरदार धक्का दिया और पूरा लंड एक बारी में मेरी गांड में पेल दिया।
मैं चिल्लाई, “उउउ ऊऊउऊ ऊउईई ईईईई! माआआ अआआ! मरररर गईई ईईईईईई! आई आई आई आई आइ! आआह्हह्ह… साले बहनचोद! निकाल इसे! आह्ह… मेरीई ईईई गांड! आह्ह… साले माँ के लोड़े! बहुत दर्द हो रहा है! निकाल इसे!”पर रमेश ने मेरी एक नहीं सुनी।

वो गद्दे के दोनों तरफ हाथ टिकाए तेजी से उछल-उछलकर मेरी गांड चोदने लगा, “आह्ह… आह्ह… आह्ह… साली रंडी छीनाल मालकिन! आज मत रोक रंडी! बहुत तड़पा हूँ इस गांड को चोदने के लिए! आज मिली है! आज बिना चोदे नहीं छोड़ सकता!”
फट्ट… फट्टट्… फट्टट! की तेज आवाजें पूरे कमरे में गूंजने लगीं।

थोड़ी देर बाद मुझे भी मजा आने लगा और मैं गांड उठाकर रमेश का साथ देने लगी, “आआह्ह… चोद साले! चोद मुझे! दिखा कितना दम है तेरे अंदर बहनचोद साले!”

रमेश मेरी बात सुनकर बुरी तरह से धक्के देना शुरू कर दिया।
और मैं दर्द का मजा लेती हुई गांड उठाने लगी, “आआहह्ह… रमेश! चोद रमेश! मुझे नहीं पता था किसी गैर आदमी से चुदाने में इतना मजा आता है! वरना मैं कब का तेरे जैसे किसी का लंड ले ली होती! कोई नहीं, अब से तू मेरी प्यास बुझाएगा हमेशा रमेश!”

रमेश धक्के देता गया, “आआह्हह… हाँ मालकिन! अब से रोज आपकी सेवा में हाजिर रहूँगा!”

तभी मैं बोली, “अच्छा एक बात बता, झूठ मत कहना।”
वो बोला, “हाँ बोलो ना मालकिन।”

मैं बोली, “तूने सासू माँ को कैसे फँसाया? मैंने आज देखा तू कैसे उन्हें पेल रहा था।”
वो बोला, “अरे वो… उसने एक बार रात में मुझे लंड हिलाते देख लिया था। और उस टाइम मैं आपकी पेंटी सूंघकर हिला रहा था।”
मैं बोली, “ओह अच्छा! तो तू चुराता है पेंटी मेरी?!”
वो बोला, “हाँ।”

मैं बोली, “फिर आगे?”
वो बोला, “उसने मुझे देख लिया और बोली कि मैं कल तेरे साहब को सब बता दूँगी।
मैं डर गया और उनसे माफी माँगने लगा।”
मैं बोली, “आआह्हह्ह… फिर?”
रमेश ने बताया- वे बोली कि एक शर्त पर। मैं बोला कि कैसी शर्त? तो वो बोली कि तुझे मेरी चूत की प्यास बुझानी होगी अपनी लंड से।”

मैं बोली, “अच्छा! सासू माँ की चूत में अभी तक आग भरी है?!”
वो बोला, “बहुत ज्यादा।”

मैं बोली, “फिर तो?”
वो बोला, “फिर क्या! मैंने पकड़ लिया और चोद दिया साली को नंगी करके!”
मैं बोली, “आआह्हह्ह… रमेश! कितना कमीना है रे तू! अपनी दोनों मालकिन को चोद दिया तू!”

तभी वो बोला, “आआह्हह्ह… हाँ मालकिन! मैं झड़ने वाला हूँ मालकिन!”
मैं बोली, “रुक जा रमेश! मुझे तेरा माल चखना है!”
रमेश ने मेरी गांड से लंड निकाल दिया और घुटनों के बल बैठ गया।

मैंने उठकर घप्प से उसका लंड मुँह में भर लिया और चूसने लगी, “उम्मम्म… उम्मम्म… उम्मम्म… ऊऊ ओऊ ओओ… ऊऊओओ… गुओओओओओ… गुओओओ… ओओ… गुओओ ओओ!”
“आह्ह… आअह्हह…” रमेश सिसकियाँ लेते हुए मेरे मुँह में अपना गाढ़ा रस छोड़ने लगा।
मैं लंड चूसती हुई सारा रस पीने लगी।

मैंने पूरा गटक के उसका लंड चूसकर साफ किया और लेट गई।
Xxx सर्वेंट सेक्स करके रमेश मेरे ऊपर गिर गया और मुझे चूमने लगा।

मैं भी उसकी पीठ सहलाती हुई उसका साथ देने लगी।
फिर रमेश मेरे बगल में लेट गया और मैं उससे लिपटकर लेट गई।

हम दोनों को कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला।

सुबह 5 बजे मेरी आँख खुली।
तो मैंने देखा कि रमेश और मैं एकदम नंगे एक-दूसरे से लिपटकर लेटे हैं।

मैं उठी।
मेरी नजर उसके लंड पर गई।
मेरे मुँह में पानी आ गया।

मैंने लंड हाथ में पकड़कर सहलाया तो रमेश उठ गया।
मैंने उसे देखकर स्माइल दी।
वो बोला, “आओ ना मालकिन! ले लो मुँह में!”

मैंने स्माइल की और लंड मुँह में भरकर चूसने लगी।
रमेश मेरा सिर पकड़कर धक्के देने लगा।
“ऊऊओऊ ओओ… ऊऊओओ… ऊऊओओ… ऊऊओओ… गुओओ ओओओ… गुओओ… गुओ ओ!”

मैंने तेज-तेज 5 मिनट तक उसका लंड चूसा।
रमेश ने मुझे पकड़कर अपने करीब गिरा लिया।

मैं बोली, “ईईशश! अभी नहीं रमेश! अभी बहुत टाइम हो गया! अभी तुम जाओ!”
वो बोला, “बस थोड़ी देर मालकिन!”
मैंने उसे मना किया और बाद में करने का वादा किया।

रमेश ने अपने कपड़े उठाकर जल्दी-जल्दी पहन लिए और कमरे से बाहर निकल गया।

मैंने रूम लॉक किया, जल्दी से जमीन से बिस्तर उठाकर वापस रखा और सब कुछ ठीक करके राज के बगल में लेट गई और सो गई।

सुबह 8 बजे मुझे मेरे चूचों पर हाथ फील हुआ तो मैं उठ गई।
राज के हाथ मेरे चूचियों पर थे।
मैं बोली, “हटो ना! सोने दो!”

वो बोला, “बेबी उठो ना! ऑफिस जाना है मुझे।”
मैं बोली, “ठीक है, तुम जाओ फ्रेश हो।”

राज ने किस की मुझे और फ्रेश होने चला गया।
मैं बिस्तर पर लेटकर रात का सीन याद करने लगी।

सच में दोस्तो, मुझे रमेश से चुदवाने में बहुत मजा आया।
पहली बार मेरी चूत की प्यास पूरी तरह बुझी!

फिर मैं उठकर नाइटी पहनी और नीचे चली गई – नाश्ता बनाने।

तो दोस्तो, ये थी आपकी प्यारी भाभी दिव्या की Xxx सर्वेंट सेक्स कहानी।
आप लोगों को कैसी लगी?
मेल करके जरूर बताना।
अगर इस पर रेस्पॉन्स अच्छा आया तो आप लोगों के लिए आगे की कहानी जल्दी ही ले आऊँगी!
धन्यवाद
divyavaryani700@gmail.com

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