पति ने सड़क किनारे कार में गांड मारी

Views: 48 Category: Ladkiyo Ki Gaand Chudai By kavyavidrohi Published: April 09, 2026

Xxx कार फक स्टोरी में मेरे जन्मदिन पर मेरे पति मुझे शाम को शौपिंग कराने ले गए, वापिसी में उन्होंने सुनसान सड़क पर कार रोक ली और मुझे किस करने लगे.

प्यारे मित्रो, कैसे हैं आप सब?
मैं आशा करती हूँ आप सब अच्छे होंगे।
मेरी पिछली कहानी
पति से चुदाई का पूरा सुख नहीं मिलता
में अपने पढ़ा कि मेरे पति का लंड छोटा है तो वे मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते. उन्होंने मुझे एक डिलडो और एक वाइब्रेटर दे रखा है अपनी संतुष्टि के लिए.
मैंने अपनी सास को घरेलू नौकर से चुदती देखा तो नौकर का बड़ा लंड मुझे पसंद आ गया. मैं भी उस लंड से चुदना चाह रही थी.

अब आगे Xxx कार फक स्टोरी:

मेरा फोन बजा तो मेरी आँख खुली।
देखा तो राज का कॉल था।
मैंने कॉल उठाई, “हेलो… हाँ राज बोलो!”
राज बोले, “अरे सो रही हो क्या?”
मैं बोली, “हाँ यार, आँख लग गई थी।”

राज बोले, “अरे क्या यार दिव्या! आज जन्मदिन है तुम्हारा! चलो उठो, फ्रेश हो और रेडी हो जाओ!”
मैं बोली, “रेडी क्यों?”
राज बोले, “मैं आ रहा हूँ। हम बाहर शॉपिंग करने चलेंगे!”

मैं बहुत खुश हो गई।

राज ने बोला, “जल्दी रेडी हो, 15 मिनट में आ रहा हूँ। मैं नीचे आकर कॉल करूँगा।”

मैं झट से बिस्तर से उठी, नहाने घुस गई।
जल्दी-जल्दी नहाकर मैंने कपड़े पहने – एक लेगिंग्स और सूट।
फिर थोड़ा मेकअप किया।

इतने में राज की कॉल आ गई, “मैं आ गया हूँ, जल्दी नीचे आओ!”

मैंने जल्दी से बैग लिया और भागकर नीचे गई।

राज कार लेकर खड़े थे।
मैं जाकर कार में बैठी।

हम दोनों निकल गए शॉपिंग मॉल के लिए।

हम मॉल पहुँचे।
सबसे पहले मैंने अपने लिए कुछ नई ब्रा-पेंटी के सेट लिए।
फिर कुछ ड्रेसेस लीं और हील्स की दो जोड़ी।
फिर मैं और राज सारी शॉपिंग खत्म करके रेस्टोरेंट गए।
कुछ खाया, काफी पी।

टाइम देखा तो शाम के 7:30 बज चुके थे।
तो हम घर के लिए वापस निकल पड़े।

अचानक रास्ते में राज ने साइड में कार रोकी।
मैंने पूछा तो उन्होंने कुछ नहीं कहा।
और मेरे करीब आकर मेरे होठों को चूसने लगे।

मैं बोली, “राज! क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा!”
राज बोले, “यहाँ कौन देखेगा बेबी? तुम टेंशन मत लो। और तुम ही तो कहती हो तुम्हें ऐसे बाहर रोमांस करना पसंद है!”
मैं बोली, “हाँ, पसंद तो है!”

फिर मैं भी राज का साथ देने लगी।
राज मेरे चूचों को सूट के ऊपर से दबाते हुए मुझे चूमने लगे।

मैंने भी राज की जिप खोली और पैंट में हाथ डालकर उनका लंड हिलाने लगी।

“उम्मम्म… उम्म… म्मम्म… राज!”

तभी राज ने मेरे सूट को उठाकर मेरे चूचे ब्रा से बाहर निकाले और उन्हें चूसने लगे।
मैं उनका सिर अंदर दबाने लगी।
“आआह्ह… उम्मम्म… सीसी… आहह्ह… राज! मैं पागल हो जाऊँगी! आआह्हह्ह… चूसो राज… और तेजी से चूसो! ओह्ह राज बेबी!”

राज ने 5 मिनट तक मेरे चूचे चूसे।
फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल लिया।

मैं समझ गई।
मैं झट से लंड पर झुकी और उसे मुँह में भरकर चूसने लगी।

राज ने मेरे सिर को पकड़कर अंदर-बाहर करने लगे।
मैं मस्ती में सीट पर बैठी उनका लंड चूसती गई।
“ऊऊओ ओओ… ऊऊओ ओ… ऊऊओओ ओओ… उम्मम्म… उम्मम्म… स्लंप्प… स्लंप्प… स्लंप्प… स्लंप्प!”

5–7 मिनट अच्छे से लंड चूसने के बाद राज ने मुझे उठाया, अपनी सीट पीछे ले जाकर लेट गए।

मुझसे भी रहा नहीं गया।
मैंने अपनी लेगिंग्स घुटनों तक उतारी और सीधा राज की गोद में बैठ गई।
मैंने उनका लंड पकड़कर चूत पर सेट किया और नीचे बैठने लगी।

धीरे-धीरे लंड चूत की गुफा में समाने लगा।
“उम्मम्म… सीसीसी सीसी… आआह्ह… राज बेबी! सच में ऐसे रोड के साइड में कार लगाकर सेक्स करने का एक अलग मजा है!”

मैंने पूरा लंड चूत में लिया और उस पर उछलने लगी।
राज मेरे चूचे मसलने लगे।

“आआह्ह्ह… आह्ह… आआह्ह… राज बेबी! येस्सस्स बेबी! बहुत मजा आ रहा है! राज चोदो मुझे… चोदो मुझे! और तेज! राज और तेज! फाड़ दो मेरी चूत राज! उम्म्म… अअह्ह… येस्स… येस्सस्… येस्स!”

राज भी मेरे चूचे जोर से दबाते हुए आहें भरने लगे, “ओह्ह… आआह्ह… येस्स दिव्या मेरी जान! उछलो जान… और तेज उछलो! ले लो मेरा पूरा लंड अपनी चूत में! आआह्ह… दिव्या कितनी गर्मी है तेरी चूत में! आअह्ह… येस्स… साली रंडी छिनाल! उछलती रह मेरे लोड़े पर कुतिया! साली बहन की लोड़ी! तेरी माँ को चोदूँ रंडी!”

मैं भी जोश में होश खो बैठी और राज को गालियाँ देने लगी। “आआह्ह… आह्ह… हाँ साले बोसड़ी के! पहले मेरी चूत की प्यास तो बुझा! फिर मेरी माँ को चोदियो रंडी के बच्चे! तेरी माँ का भोसड़ा! साले चोद मुझे कुत्ते!”

राज ने अपने हाथ मेरे चूतड़ों पर रखे और मुझे अपने ऊपर लेटाकर तेजी से नीचे से धक्के देने लगे।

फट्टट्… फट्ट्ट… फटट्ट… फट… पट्टट… पट्टट… पटट्!

थोड़ी देर बाद मैंने उसे रुकने को कहा।
तो राज ने धक्के देना बंद कर दिया।

मैं बोली, “चल राज, गांड मार मेरी!”
राज बोले, “ठीक है रंडी, चल पीछे की सीट पर!”

मैं कार के अंदर ही पीछे चली गई और उल्टी होकर लेट गई।
राज पीछे आए और मेरी गांड पर थप्पड़ लगाए।

सटाक्क… सटाक्क्क… सटाक!
मेरी गांड थप्पड़ से हिल गई।

फिर राज ने मेरी टाँगें फैलाकर छेद पर थूक लगाया और अपना लंड अच्छे से थूक से गीला करके मेरे छेद पर रगड़ने लगे।
मैं मचलने लगी, “आअह्ह्… बहनचोद साले! डाल ना अब!”

राज ने मेरी कमर पर अपने हाथ रखे जिससे मेरी कमर अंदर को दब गई और मेरे चूतड़ और अच्छे से ऊपर को उठ गए।
राज ने एक जोरदार धक्का मारा और एक बारी में उनका पूरा लंड मेरी गांड में चला गया।

सच कहूँ दोस्तो, जो दर्द एक औरत को गांड में लंड लेने से होता है वो मुझे बिल्कुल भी नहीं हुआ।
पर यह बात मैं राज को नहीं बता सकती थी।
इसलिए लंड लेते ही मैं जानबूझकर आहें भरी, “आह्ह… आआह… बेहनचोद! पूरा डाल दिया साले! आह्हह… राज बहुत दर्द हो रहा है! आअह… राज प्लीज निकालो इसे!”

राज को लगा मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
पर उसे क्या पता, मुझे लंड का पता भी नहीं चला।
राज तेजी से मेरी गांड को चोदने लगा।
फट्ट… फट… फट्ट… फट्ट… फट्… फट्टट्! Xxx कार फक की तेज आवाजें पूरी कार में गूंजने लगीं।

मुश्किल से 3–4 मिनट ही राज ने मेरी गांड चोदी होगी, “आह्ह… दिव्या… आआह… बेबी… आआह्ह… मेरा हो गया! आआह्ह ह्हह!”
करता हुआ मेरी गांड में झड़ गया।
मैं भी कुछ बोली नहीं।

थोड़ी देर बाद हम उठे और कपड़े पहने।
टाइम देखा तो 8:45 हो गए थे।

हम खुद को ठीक करके घर के लिए निकल पड़े।
10–15 मिनट बाद हम घर पहुँचे।

जैसे ही मैं घर में घुसी तो घर में अंधेरा पड़ा था।
मैं बोली, “अरे ये इतना अंधेरा क्यों है? कहाँ गए सब?”

तभी लाइट्स जलीं।
देखा तो हॉल पूरा डेकोरेटेड था।

और सामने मेरी सास, मेरा ससुर, मेरी दोनों बेटियाँ और हमारा नौकर खड़ा था।
सब एक साथ चिल्लाये
“Happy Birthday!”

मैं देखकर खुश हो गई।
मैंने सबको थैंक यू कहा।

फिर मैं अंदर आई, अपना सामान रखा।

राज बोले, “बेबी, तुम चेंज कर आओ।”
मैं बोली, “ठीक है।”

मैं रूम में आई और अपने कपड़े उतारकर एक वन-पीस ड्रेस पहन ली।

उस ड्रेस में मेरे चूचे काफी बाहर को आ रहे थे और गांड भी एकदम कसी हुई हो गई थी।

मैंने ब्राउन शेड लिपस्टिक लगाई, थोड़ा मेकअप किया और फिर सबके पास हॉल में चली गई।

हमारे पड़ोसी भी तब तक आ चुके थे।
सबने मुझे देखकर विश किया।
मैंने सबको थैंक यू बोला।

फिर मैं राज के पास गई और बोली, “ये सब तुमने किया?”
उन्होंने कहा, “तो मेरी बीवी का जन्मदिन है, इतना तो करना बनता है ना!”
मैंने राज को हग करके थैंक यू कहा।

फिर पार्टी शुरू हो गई।
सब एंजॉय करने लगे।

सब साथ में बैठकर ड्रिंक करने लगे और बातें करने लगे।

कुछ समय बाद राज बोले, “चलो पहले केक कट कर लेते हैं।”
हमारे पड़ोसी बोले, “हाँ, हमें भी निकालना है।”
मैं बोली, “अरे ऐसे कैसे? खाना तो खा के जाइए!”
वो बोले,“अरे नहीं, घर पर सब इंतजार कर रहे हैं।”

फिर राज केक ले आए।
मैंने केक कट किया, सबको खिलाया।
सबने मुझे कुछ न कुछ गिफ्ट दिया।
मैंने सबको थैंक यू कहा।

फिर हम सब टेबल पर दारू पीने लगे।
धीरे-धीरे पड़ोसी जाने लगे।

अब सिर्फ हम फैमिली वाले और हमारा नौकर ही बचे थे।

मैं किचन में चिकन लेने गई तो वहाँ रमेश खड़ा था।
मैं बोली,“अरे रमेश, तू अकेला यहाँ क्या कर रहा है?”
वो बोला, “कुछ नहीं छोटी मालकिन, बस ऐसे ही खड़ा हूँ।”

मैं बोली, “तूने पीने को लिया कुछ?”
वो बोला, “अरे नहीं मालकिन, मैं कैसे पी सकता हूँ? काम भी तो है।”

मैं बोली, “अरे काम छोड़ ना! कितना काम करेगा? वैसे भी आज सारा खाना बाहर से ही तो आया है। तू रुक, मैं आती हूँ।”

मैं बाहर गई, टेबल पर चिकन रखा और एक दारू की बॉटल उठाई।
राज बोले, “ये कहाँ ले जा रही हो?”
मैं बोली, “रमेश को देने। वो बेचारा वहाँ किचन में अकेला खड़ा है।”

राज बोले, “क्यों भाई अकेला क्यों खड़ा है? उसे बोलो यहाँ आए, हमारे साथ बैठकर पिए!”

मैंने बॉटल रखी वापस और किचन में जाकर बोली, “रमेश, आ जा बाहर हमारे साथ बैठकर पी!”
वो बोला, “अरे नहीं नहीं मालकिन, आप लोगों के साथ कैसे?”
मैं बोली, “अरे इतना शर्मा क्यों रहा है? चल आजा!”

मैं उसे अपने साथ बाहर ले आई।
वो हमारे साथ बैठ गया।
राज ने सबके पैग बनाए।
सब पीने लगे।
धीरे-धीरे राज को नशा होने लगा।

मैंने अपनी दोनों बेटियों को बोला, “बेटा, खाना खाओ और सोने जाओ।”
मेरी बड़ी बेटी जूही बोली, “अरे क्या मॉम! आज आपका बर्थडे है। आज तो मना मत करो!”

मेरी सास बोलीं, “अरे दिव्या बेटा, पी लेने दो। कुछ नहीं होता।”
मैंने फिर कुछ नहीं कही और हम पीने लगे।

मैंने राज को देखा तो वो बहुत नशे में हो गए थे।

मेरे ससुर बोले, “दिव्या बेटा, तुम राज को रूम में सुला आओ। इसे बहुत नशा हो गया है।”

मैं बोली, “जी पापा जी।”मैंने राज को उठाया।
मैंने रमेश को हेल्प के लिए बुलाया।

मैं और रमेश साथ में राज को रूम में ले गए और उसे बेड पर लेटाकर बाहर आ गए।
वापस हम सबके साथ बैठकर पीने लगे।

मैंने देखा कि रमेश मेरे चूचों को काफी देर से घूर रहा है।
मैंने भी उसे घूरने दिया, कुछ रिएक्ट नहीं किया।

तभी ससुर जी बोले, “बहू, चलो अब खाना खाकर सोने चलते हैं।”
मैं बोली, “जी पापा जी, ठीक है।”

मैंने और रमेश ने सबको खाना दिया।
सब उठकर अपने-अपने कमरे में चले गए।

आपको इस Xxx कार फक स्टोरी में जरूर मजा आया होगा.
अगले भाग का इन्तजार करें.
divyavaryani700@gmail.com

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