माय फर्स्ट नाईट सेक्स स्टोरी में शादी के बाद मैं सुहागसेज पर बैठी डर रही थी कि कहीं मेरी फटी चूत का पता मेरे पति को ना चल जाये. तो हुआ क्या असल में?
फ्रेंड्स, मैं मिलन चौधरी आपको वृति चौधरी के सहयोग से अपनी सुहागरात की सेक्स कहानी सुना रही थी.
कहानी के पहले भाग
फटी चूत पति को कैसे पेश करूं?
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि मैं अपने पति महेंद्र चौधरी के साथ एक झोपड़े में चारपाई पर थी और अपनी पहले से फटी हुई चुत को लेकर चिंतित थी कि कहीं मेरे पति को मेरी सील टूटी चुत की जानकारी न हो जाए.
अब आगे माय फर्स्ट नाईट सेक्स स्टोरी:
हालांकि मैंने शादी से कुछ दिन पहले अपने ब्वॉयफ्रेंड गोविंद से बात की थी, तो एक बार तो उसको भी समझ में नहीं आया कि क्या करें.
फिर वह बोला था- मैं कुछ करता हूं.
गोविंद ने शादी से कुछ दिन पहले मुझे फोन पर सब कुछ बता दिया था.
उसने पूरा प्लान बता दिया था.
वैसे भी काफी समय बाद चुदाई होती है, तब तक चूत भी थोड़ी सी टाइट हो जाती है.
उसी समय मुझे गोविंद की बताई बात याद आई तो अब मुझे अपनी मुश्किल थोड़ी सी आसान लगने लगी थी.
उस समय रात के 2 बजे रहे थे और मैं चारपाई के एक कोने पर बैठी हुई थी.
मेरे पति मुझसे बातें कर रहे थे.
मैं उनके साथ ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे मैं छुई-मुई का पौधा हूं.
अगर कोई मुझे छू लेगा तो मैं एकदम से अपनी पत्तियां बंद कर लूंगी.
जबकि मेरी चूत तो पहले ही लंड खा चुकी थी.
मगर थोड़ा सा नाटक तो करना पड़ता ही है ताकि पति को ये दिखा सकूं कि मैंने अपने बदन पर किसी मर्द की छाया तक नहीं पड़ने दी है.
मेरे पति तो जवान लड़के जैसे हैं और उनको तो मुझसे सेक्स का परमिट मिला हुआ था.
वे धीरे धीरे मेरे जिस्म से खेलने लगे थे और चारपाई पर मेरे पास एकदम से सट कर बैठ गए थे.
उनका एक हाथ मेरे जिस्म के साथ खेलने लगा था.
पहले तो दो मिनट तक मैंने कुछ भी नहीं किया.
फिर जब उन्होंने देखा कि मेरी तरफ से कोई शुरूआत हो ही नहीं रही है, तो वे हल्का सा खांसने लगे.
मैं फिर भी दुबक कर बैठी रही.
मैं एकदम भीगी बिल्ली बनी हुई थी.
वैसे तो लंड को चूत में लेने में मुझे कोई परेशानी नहीं थी लेकिन यहां पर बात पति के लंड को चुत से चकमा देने की जुगत सैट करना थी.
इसलिए यह सब नाटक करना जरूरी था.
जब मैं बिल्कुल नहीं हिली तो वे मेरे पास आ गए.
उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा.
मैंने कुछ नहीं कहा.
फिर वे मुझे चारपाई पर पीछे को आने के लिए कहने लगे.
मैं फिर भी शर्माती रही.
अब मेरे कोमल बदन को छूने के बाद उनके लंड में तूफान तो उठ ही गया था इसलिए वे मुझे अपनी गोद में उठाने लगे.
मैंने चेहरा नीचे ही रखा.
फिर उन्होंने मुझे किनारे से उठा कर पीछे को बैठा दिया.
वे खुद नीचे खड़े होकर अपने कपड़े निकालने लगे.
पहले उन्होंने अपना साफा निकाला और फिर पैंट का हुक खोल कर उसे उतार दिया, उसके बाद शर्ट के बटन खोलने लगे.
मैं नजरें नीचे किए हुई उनके कच्छे को देख रही थी.
कच्छे में उनका लंड तना हुआ दिख रहा था.
मैं नीचे नजर किए हुई चुपके से उनके लंड को तुनकी मारता हुआ देख रही थी.
अभी तक तो मैंने गोविंद का बदन और लंड ही देखा था.
आज एक नया जवान लड़का सामने नंगा हो रहा था तो यह सब देख कर मेरी चूत में खुजली होने लगी थी.
ऊपर से उनका लंड कच्छे में ऐसे तना हुआ था, जैसे कोई मोटा सा केला हो.
मोटे लवड़े को देख कर मेरी चूत में पानी आने लगा था लेकिन मैं अपनी तरफ से कुछ भी करना नहीं चाह रही थी.
अभी तो बस ये सोच रही थी कि इनको किसी तरह अपनी चुदी हुई चूत से दूर रखना है.
जब वे मेरे पास आए तो मैं पीछे खिसक गई.
वे और पास आए तो मैं और पीछे खिसक गई.
वे चारपाई पर चढ़ गए तो मैं नीचे उतर गई और एक तरफ जाकर खड़ी हो गई.
पतिदेव हैरान थे … मगर वे जवान मर्द थे इसलिए इतनी जल्दी हार मानने वाले नहीं थे.
वैसे यह उनकी पहली ही किसी लड़की के साथ चुदाई हो रही थी, यह आप आगे कहानी में जानेंगे.
वे खड़े हुए लंड के साथ ही मेरी तरफ लपके और मुझे बांहों में भरने लगे.
मैंने सोचा कि अगर जुबान नहीं खोली, तो ये अपने मूसल लंड से मेरी चूत खोल कर रख देंगे और फिर सारे राज आज ही खुल जाएंगे.
मैंने कहा- मुझे आप से कुछ कहना है!
वे बोले- तो कहो न … इस तरह से दूर-दूर क्यों जा रही हो?
मैंने कहा- मैं आज बहुत थकी हुई हूं. कल करेंगे … अभी आज के दिन ये सब रहने दीजिये.
पर वे नहीं माने.
उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया.
मैंने फिर से कहा- दो-तीन दिन के बाद कर लीजिएगा न!
वे बोले- मुझसे रुका नहीं जा रहा है. अब किस बात का डर है?
इतना कहकर उन्होंने मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया.
वैसे चुदना तो मैं पहले से ही चाह रही थी लेकिन उनके मजबूत हाथों ने जब मेरी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना और मसलना शुरू कर दिया, तो मेरे अन्दर भी सेक्स की इच्छा तेज होने लगी.
वैसे हमारे यहां शादी का जोड़ा ससुराल वाले ही लेकर आते हैं, पर वे मेरा ब्लाउज बहुत ही छोटा लेकर आ गए थे, जिसमें मेरे बूब्स आ ही नहीं रहे थे.
उनको मेरे बड़े और रसभरे बूब्स बहुत पसंद आए थे और वे मेरे मम्मों को बहुत मस्ती से मसल रहे थे.
कुछ देर दूध मसलने के बाद वे मुझे गर्दन पर चूमने लगे.
अभी तक तो सब कुछ प्यार से हो रहा था.
उनका मोटा लंड मुझे मेरी गांड पर छू रहा था.
मैंने अपनी गांड पर उनका मोटा लंड महसूस किया तो मेरी चूत तक उसकी गर्मी पहुंचने लगी.
अब तक मेरे पति का जोश भी बढ़ने लगा था.
उन्होंने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और मुझे चारपाई पर फिर से ले गए.
पहले मेरी ओढ़नी उतारी और फिर कमीज.
मेरी ब्रा जैसे ही उनको दिखाई दी उन्होंने मेरे कबूतरों को अपनी उंगलियों में दबोच लिया और मुझे बेड पर लेकर गिर गए.
वे अपने फौलादी हाथों से मेरे चूचों को मसलते हुए मेरे होंठों को काटने लगे.
दो मिनट के अन्दर ही उन्होंने मुझे गर्म कर दिया और मैंने सारी लाज शर्म का नाटक छोड़ कर उनका साथ देना शुरू कर दिया.
फिर वे मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों को चूमने लगे, पहले चूमा और फिर जोर से मसल दिया.
फिर उन्होंने मेरी ब्रा को खोल दिया.
मेरे चूचे नंगे हो गए.
उनके मजबूत हाथों की पकड़ से पहले ही मेरे चूचे लाल हो चुके थे.
मेरे पति काफी मेरे नंगे दूध देख कर गर्माने लगे थे.
फिर वे झिझक छोड़ कर मेरे चूचों को अपने मुँह में लेकर पीने लगे और मेरे अन्दर चुदास भरने लगी.
उन्होंने मेरा लहंगा उठा दिया और हाथ अन्दर डाल दिया.
मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी गीली चूत को मसलने लगे.
मैंने उनको अपनी बांहों में भर लिया और प्यार करने लगी.
उनके होंठों के रस को पीने लगी तो वे मेरे होंठों को काटने लगे तो कभी गर्दन पर काटने लगे और चूसने लगे.
फिर उन्होंने लहंगा खोला और पैंटी पर झपट पड़े.
मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को चाटने लगे.
मुझे डर लग रहा था कि कहीं भेद न खुल जाए कि मैं पहले से ही चुदी हुई हूं.
लेकिन साथ ही मजा भी बहुत आ रहा था तो बस चुत पर उनके हाथ और मुँह को चलने दिया.
उसके बाद उन्होंने मेरी पैंटी को उतार दिया और मेरी चूत को मसलने ही लगे.
तभी मैंने चूत को अपने हाथों से ढक लिया और लाइट बंद करने को कहा तो उन्होंने लाइट बंद कर दी.
उन्होंने सोचा कि मुझको शर्म आ रही है, पर यहां मामला कुछ और ही था.
चुत की चूमा-चाटी होने के बाद वे चुदाई के लिए जैसे ही तैयार होने लगे, तभी अचानक से उनका लंड झड़ गया और एकदम से छोटा हो गया.
ऐसा कुछ कुछ लड़कों में होता है.
आप में से भी किसी को पहली चुदाई में हुआ होगा और किसी को चुदाई करते समय बार बार पेशाब आने लगती है.
जैसे ही लंड चूत में जाता हैं तो उनको ऐसा लगता है कि पेशाब आने वाली है और पेशाब जरूर आती है.
अब उनका लंड मेरे जिस्म के साथ टच हो रहा था. लंड काफी नर्म हो गया था.
इधर मेरा मन भी अब जोर मारने लगा था और लग रहा था कि उनके लंड को पकड़ लूं और चूस कर खड़ा कर दूँ.
लेकिन दुल्हन वाली शर्म अभी भी मुझे आगे बढ़ने से रोक रही थी.
वैसे भी अभी नहीं तो कुछ देर के बाद लंड तो मुझे मिलने ही वाला था.
इसलिए मैंने खुद को रोक रखा था.
मैं सोच रही थी कि जब मेरे पति के अन्दर ही इतना सेक्स भरा हुआ है कि वे खुद ही मेरी सारी इच्छाएं पूरी करने वाले हैं तो जल्दी क्या है!
कुछ देर बाद मेरे इंतजार के पल भी खत्म होने वाले थे.
उधर संकोच के कारण उनका लंड सख्त नहीं हो पा रहा था.
दोस्तो, मैं आपको अपनी एकदम सच्ची सेक्स कहानी बता रही हूं, इसमें तिल मात्र भी झूठ नहीं है.
फिर उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ा और अपने मोटे लंड पर मेरे हाथ को रखवा दिया.
उन्हें लगा कि क्या पता मेरे हाथ के स्पर्श से लंड सख्त हो जाए, पर ऐसा नहीं हुआ.
जब मैंने उनके लंड को छुआ तो मजा आ गया.
वह गोविंद के लंड से काफी मोटा था.
मैंने नजर उठा कर देखा तो मेरे पति का लौड़ा गोविंद के लंड से काफी लम्बा भी था.
मैं सोच रही थी कि सच में मेरी चूत की तो किस्मत ही खुल गई है.
मेरा सपना था कि मुझे ऐसे ही लंड वाला पति मिले.
उन्होंने अपने लंड पर मेरा हाथ रखवा कर मेरे हाथ को उस पर दबाने लगे.
अब तो मेरा खुद ही मन करने लगा था कि उनके लंड को अपने हाथ में लेकर अच्छी तरह से उसको प्यार करूं.
तभी उन्होंने अपना कच्छा निकाल दिया और गर्म लंड मेरे हाथ में दे दिया.
अभी भी मैं नाटक करती रही तो उन्होंने मेरे हाथ को अपने हाथ से पकड़ कर अपने लंड पर चलवाना शुरू किया और अपने लंड की मुठ मरवाने लगे.
दो मिनट तक मुझसे मुठ मरवाने के बाद वे मुझे रगड़ने के लिए पोजीशन लेने लगे.
मेरी चूत अब लंड लेने के लिए तड़प उठी थी.
अब मैंने लाज शर्म को झाड़ू मारा और लग गई उनके बदन को चूसने में.
उन्होंने मेरी टांगों को फैला दिया और मेरी चूत की फांकों को खोल कर अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया.
फिर अचानक से पूरा जोर लगा कर धक्का मारा तो लंड ज्यादा सख्त नहीं होने के कारण अन्दर नहीं गया.
वैसे भी चारपाई काफी ढीली होती है, जिससे चूत का छिद्र काफी नीचे रह जाता है.
इस पोजीशन में चुदाई चारपाई पर हो ही नहीं सकती थी लेकिन मैंने कुछ भी नहीं बोला.
मैं बस थोड़ा बहुत नाटक करती रही.
उन्होंने काफी कोशिश की लेकिन लंड चूत में नहीं गया.
तब उन्होंने मेरी टांगें उठाईं और लंड डालने लगे लेकिन मैंने दर्द का बहाना बना कर मना कर दिया.
फिर उन्होंने आधी उठी हुई टांगों के साथ चूत पर लंड रखा.
शायद थोड़ा सा अन्दर चला गया था.
मैंने जानबूझ कर चीख निकाली.
लेकिन उन्होंने मेरे मुँह पर अपनी बड़ी सी हथेली रखते हुए उसको ढक दिया.
लेकिन तभी चुत की मां चुद गई.
मेरे पति का वीर्य मेरी चूत पर ही निकल गया.
अब पति का लंड खड़ा ही नहीं हो रहा था.
शर्म के कारण वे कुछ नहीं बोले.
उन्होंने अपने कपड़े पहन लिए तो मैंने भी कपड़े पहन लिए.
सुबह 5 बजे वे वहां से निकल कर अपनी बारात के पास चले गए.
हालांकि वे काफी निराश थे कि वे सही से मेरी चुदाई नहीं कर पाए थे.
मगर में काफी खुश थी कि माय फर्स्ट नाईट सेक्स भी हो गया और सील का भी नहीं पता चल पाया था.
मैंने लंड के अन्दर आने का थोड़ा बहुत नाटक कर लिया था, जिससे उन्हें समझ आया था कि उनके लंड ने ही मेरी सील तोड़ दी है.
वह तो लंड ने पानी टपका दिया तो चुदाई सही से नहीं हो पाई.
शायद उन्होंने सोचा होगा कि कल अपने घर में चुदाई कर लूंगा और आज सील तो टूट ही गई है.
सुबह पति के जाने के बाद मेरी बहनें मुझे लेने के लिए आईं और पूरा हाल पूछा.
मैंने सब कुछ बता दिया था. इसमें आधा झूठ और आधा सच था.
दूसरे दिन मैं अपने पति के घर चली गई थी.
उधर पहुँच कर रात में उन्होंने मेरी चूत में लंड डालने में कामयाबी हासिल कर ली थी.
सबसे पहले मेरी टांगें उठाकर मेरी गांड के पास चुत खुलवा ली थी, फिर अपनी गांड मेरी गांड के पास चुत से लंड सटाकर बैठे बैठे बड़ी मुश्किल से मेरी चूत में लंड डाला था.
इस बार भी पहली बार होने के कारण वीर्य निकल गया था लेकिन आज दूसरी बार भी उनका लंड उठ गया था और इस बार वे मेरे ऊपर चढ़ कर चुदाई करने लगे थे.
इस बार मेरी चूत पूरी फैल गई थी और मुझे इतना आनन्द आ रहा था कि मैं बता नहीं सकती.
हालांकि अभी तक लंड इतना सख्त नहीं था कि मेरी चीखें निकाल सके, तब भी मैं जानबूझ कर चीखने का ड्रामा करती रही थी.
फिर मैं पांच मिनट में ही झड़ गई.
दोस्तो, एक बात तो तय थी कि अगर मैं पहले से चुदी हुई नहीं होती तो वे शायद ही मेरी चुदाई कर पाते.
शादी के 4 दिन तक मैं उनके घर रही थी और हर रात को ऐसा ही चलता रहा था.
फिर दुबारा 10 दिन बाद मैं वापस ससुराल गई थी और लगभग 15 दिन रुकी थी.
तब धीरे धीरे उनका संकोच दूर हुआ और दूसरी बार 15 दिन बाद मुझे उनके उनके फौलादी जिस्म का तगड़ा मजा मिला था.
उनका लंड वैसा ही मजबूत साबित हुआ था … जैसा गोविंद का था.
बल्कि मैं तो यह भी कहूँगी कि उनसे चुदने के बाद में गोविंद की चुदाई तो मैं भूल ही गई थी.
मुझे सच में मेरे पति ने बहुत मजा दिया.
फिर 15 दिन हर रोज वे मेरी चार बार मेरी चूत चोदते रहे.
अब तो कमरे में फच फच की मस्त आवाजें आती थीं.
दूसरी बार जब मैं गई थी, तब पहले दिन ही मेरी चूत की इतनी ठुकाई की, इतनी ठुकाई की कि अगले दिन सुबह उठी तो मेरे पांव नहीं उठ रहे थे.
मैं जब औरतों के पास पहुंची, तो वे सब भी मेरा मजाक बनाने लगीं.
सुबह मेरी ननद और भाभी ने बताया कि तुम्हारी आवाज तो बाहर तक आ रही थी.
सच में महेंद्र को तो बिल्कुल फ्रेश माल मिला है.
ननद और भाभी ने मेरा चेहरा भी बड़े ध्यान से देखा, जिस पर चूसने और काटने के कई निशान थे.
मुझे भी शर्म आ रही थी लेकिन कर भी क्या सकती थी.
मर्दों को तो सुहागरात में अपने मन और अपने लंड की शांति के लिए जो मन करता है, वह करते हैं.
फिर 15 दिन बाद मैं वापस आई, तब मैंने अपनी चचेरी बहन को बताया कि किस तरह पति को भी पता नहीं चल पाया कि मेरी चूत सील पैक नहीं है.
इसके बाद जब मैं वापस ससुराल गई, तब पति ने मेरी गांड मारने की शुरुआत की थी.
अब पिछले 2 साल से रोजाना ही 2 से 3 राउंड मेरी अपने मोटे मस्त लंड से मेरी चुदाई करते हैं.
कभी कभी मन करने पर पीछे भी पेल देते हैं.
पर पीछे से करवाने में मुझे बहुत दिक्कत होती है.
इस कारण मैं उन्हें गांड चुदाई कम ही करने देती हूं.
मेरे पति को सील पैक चूत तो नहीं मिली थी, पर भरे हुए जिस्म वाली बीवी तो जरूर मिली है.
वे सुहागरात को तो अच्छे से मना नहीं पाए थे लेकिन बाद में मैंने उन्हें खूब मजा दिया था और उन्होंने मुझे भी खूब मजा दिया था.
यह मेरी एकमात्र ही सेक्स कहानी है.
इसके अलावा मेरे जीवन में और कोई भी कहानी नहीं है.
आप सब लोग बताएं कि माय फर्स्ट नाईट सेक्स स्टोरी आपको कैसी लगी है?
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