फर्स्ट नाईट आफ्टर मैरिज स्टोरी में मैं अपने यार से बहुत चुदी थी. अब शादी के बाद सुहागरात का डर मुझे सता रहा था कि पति को मेरी शादी से पहले की चुदाई का पता चल गया तो?
दोस्तो, मैं वृत्ति चौधरी आप सबको नमस्कार करती हूं और उम्मीद भी करती हूं कि आप सब अच्छे से मस्त चुदाई का मजा ले रहे होंगे.
यह फर्स्ट नाईट आफ्टर मैरिज स्टोरी मुझे किसी लेखक ने भेजी है जिनका नाम गोविंद चौधरी है.
मैं इसे अपने अनुसार लिख कर आपके साथ शेयर कर रही हूं.
जैसा कि आपने मेरी पिछली कहानी
पशु चराते मिली पड़ोसन कुंवारी लड़की की सीलपैक चूत
को पढ़ कर मजा लिया था.
उसमें गोविंद ने बताया था कि कैसे उन्होंने पशु चराते हुए पड़ोस की लड़की की सील पैक चूत को चोदकर चुत का उद्घाटन किया था और उस लड़की को मात्र 18 साल की उम्र में ही पकी हुई माल बना दिया था.
उसके बाद अगले 3 साल तक यानि शादी तक उसके जिस्म को चोद चोद कर अच्छे से भर कर गदराया हुआ कर दिया था.
गोविंद ने उस लड़की को घर में, खेत में यानि हर जगह जब भी मौका मिलता था … तब उसकी चुदाई कर देता था. उसे घोड़ी बनाकर चुत पेलना सबसे अच्छा और सुकून देने वाला पल लगता है.
हालांकि उस कहानी में लिखने में थोड़ी सी भूल हो गई थी जो कि मेरे द्वारा ही एडिट करते समय हुई थी, उसके लिए मैं आप सब से माफी चाहती हूं.
कहानी के अंत में यह लिखा गया था कि उस दिन बारिश बहुत ज्यादा हो रही थी और गोविंद ने मिलन की चूत के साथ साथ मोटी सी गांड भी मारी थी, जिससे उन दोनों को काफी मजा आया था.
हालांकि उस दिन गांड की चुदाई नहीं हुई थी, कुछ समय बाद की थी.
ये शब्द उस कहानी में लिखते समय डिलीट हो गए थे.
लिखने में अनुभव की कमी के कारण कभी कभी ऐसा ही जाता है.
आप में से काफी कमेंट भी आए थे कि पहले ही दिन चूत और गांड दोनों ही कैसे दे दी थी.
एक दो बाड़मेर की लड़कियों के भी मेल मेरे पास आए थे, जिन्होंने कहानी को काफी पसंद करते हुए लिखा था.
वैसे उस कहानी में मेल आईडी मेरी थी, तो मेल मुझे ही गोविंद समझ कर लिखा गया था कि गोविंद जी आपने तो खेत में ही मिलन को घोड़ी बना दी थी. घर में घोड़ी बनाकर चोदना बहुत अच्छा है.
दोस्तो, गोविंद ने अपनी मेल आईडी देने से मना कर दिया था इस कारण मुझे अपनी देनी पड़ी थी.
खैर … छोड़ो इस तरह की छोटी छोटी बात होती रहती है.
आप सब अब इस सेक्स कहानी के अगले भाग यानि कि मिलन चौधरी की सुहाग रात की कहानी का आनन्द मिलन के द्वारा ही सुनें.
इसमें राजस्थान की सुहागरात के रीति रिवाज के बारे में बहुत ही मजेदार शैली पढ़ने को मिलेगी.
हालांकि वैसे तो इस कहानी को लिखने में काफी सावधानी रखी गई है, फिर भी अगर कोई त्रुटि रह जाती है तो उसके लिए माफ करना.
यह एक मानवीय भूल है और किसी के भी साथ हो सकती है.
आगे की फर्स्ट नाईट आफ्टर मैरिज स्टोरी आप मिलन चौधरी की कलम से सुनें :
दोस्तो, मैं मिलन चौधरी.
वैसे मेरा परिचय गोविंद चौधरी ने पिछली कहानी में दे दिया था लेकिन मैं आपको अपना परिचय एक बार फिर से दे देती हूं.
वर्तमान समय में मैं 23 साल की हो गई हूँ.
फिगर के साइज की अगर बात करें, तो मैं बचपन से ही मोटी हूं और मेरा कद भी ज्यादा लंबा नहीं है.
मेरी हाइट लगभग 5 फीट ही है और बूब्स अब काफी बड़े हो चुके हैं … लगभग 36 के हो चुके हैं. स्कूल टाइम में मेरे दूध 32 साइज़ के थे.
मैं उस समय ब्रा आदि नहीं पहनती थी, इस कारण मुझे अपनी चूचियों का सही सही नाप तो पता नहीं है क्योंकि हमारे इलाके में समीज़ ही पहनते हैं.
ब्रा पहनती तो उसका नंबर बता सकती थी.
फिर भी अनुमानत: 32 के ही थे.
समीज में मेरे बूब्स लटकते रहते थे.
खो खो आदि खेलते समय दोनों ही बूब्स खूब उछलते थे और घर में भी साफ सफाई करते समय, जब झुकती थी तो बूब्स एकदम से लटक जाते थे.
मैं बहुत ही सीधी और साधारण लड़की हूं.
उस समय भी मुझे चुदाई आदि का कोई ज्ञान नहीं था और न ही लंड की साइज आदि का पता था क्योंकि कभी लंड देखा ही नहीं था.
मेरी कमर शुरू से ही काफी मोटी थी यानि 18 की उम्र में ही में मेरी हम उम्र की लड़कियों से 1.5 गुणा ज्यादा मोटी थी.
मेरा कद छोटा होने के कारण मैं कुछ ज्यादा मोटी भी दिखती थी.
गांड उस समय भी काफी बड़ी थी जो कि खान-पान और आनुवांशिकता के कारण थी.
मेरी बड़ी गांड है और बड़े बूब्स पर हर कोई लड़का फिदा था.
लड़कों की पहली नजर सीधे ही या तो बूब्स पर जाती है या फिर बड़ी सी गांड पर जाती है.
मेरा वजन लगभग 60 किलो है.
लड़कों के अनुपात में मैं अपनी हाइट की बात करूं तो मैं गोविंद के कंधे के बराबर ही पहुंचती थी.
मेरे काले और घने लंबे बाल कमर तक आते हैं.
मुझे खुद कहानी लिखने का कोई अनुभव नहीं है इसलिए अंतर्वासना की लेखिका वृत्ति चौधरी ने कहानी लिखने में मेरी काफी मदद की है.
उनका धन्यवाद.
कहानी शुरू करने से पहले में आपको बताना चाहूंगी कि मेरी और गोविंद की अंतिम बार चुदाई कोरोना के समय लॉक डाउन में हुई थी.
उसके बाद मेरी शादी हो गई थी.
शादी हो जाने के बाद मेरी गोविंद से कम ही बात होती थी.
कभी कभी ही व्हाट्सैप पर मैसेज से बात होती थी.
मैं अपने मोबाईल को और खास तौर से व्हाट्सैप को लॉक ही करके रखती हूं क्योंकि हमारे बीच अधिकतर चैट चुदाई की बातों को लेकर ही होती है.
वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार का कोई खलल नहीं पड़े, इस कारण चैट को लॉक रखना जरूरी था.
एक दिन अचानक ही सुबह मेरे व्हाट्सैप पर एक स्क्रीन शॉट आया हुआ था जो कि गोविंद का था.
उन्होंने बताया कि मैंने अपनी चुदाई की कहानी एक वेब साइट पर भेजी थी जो कि पब्लिश हो गई है.
गोविंद ने मुझे लिंक भेजी थी तो मैंने उस कहानी को खोल कर पढ़ी.
उस कहानी पर आए हुए सबके कमेंट भी मैंने पढ़े.
उसमें दो चार लोगों के अलावा सबने कहानी की सराहना की थी.
हालांकि यह बात मुझसे पहले ही एक बार गोविंद ने कही थी कि वे अपनी कहानी को किसी वेब साइट पर भेजेंगे.
तब मैंने भी सहमति देते हुए कह दिया था कि हां भेज देना, कोई दिक्कत नहीं है.
गोविंद ने उस कहानी में यह भी बताया कि वे मिलन की सुहागरात में हुई चुदाई की कहानी को भी लिख कर सबको बताऊंगा.
इस कहानी के पब्लिश होने के बाद गोविंद ने एक दिन मुझसे कहा- मिलन तुम अपनी कलम से लिखो ताकि लोगों को कहानी पढ़ने में मजा आ जाए.
मैंने मना कर दिया था कि मैं शादीशुदा जीवन में किसी भी प्रकार की इस तरह की गतिविधि को जारी रखना नहीं चाहती हूं. क्योंकि मेरे फोन को मेरे पति किसी भी समय चैक कर सकते हैं.
इस पर गोविंद ने कहा- अरे कोई नहीं चैक कर पाएगा कि किसकी कहानी है. तुम एक बार में यदि न लिख सको, तो दो तीन दिन में थोड़ा थोड़ा सा समय निकाल कर आराम से लिख सकती हो.
फिर उन्होंने मुझे लेखिका वृत्ति चौधरी की मेल आईडी दी.
मैं गोविंद से बात करने के बाद कहानी लिखने का सोचने लगी.
अब बिना देर करते हुए सीधे ही मैं आपको अपनी सुहागरात की कहानी बताती हूं.
आप जानते ही हैं कि मैं और गोविंद एक दूसरे को बचपन से ही जानते हैं और हमारा एक दूसरे के घर आना-जाना लगा रहता था.
हम दोनों पशु चराते हुए भी साथ में ही रहते थे क्योंकि हमारे खेत आसपास थे.
उधर ही हम दोनों अपने पशु चराते थे और साथ में ही खेलते कूदते थे.
मैं उस समय जवान हो चुकी थी और सेक्स के लिए तड़पने लगी थी.
मेरी ज्यादातर सहेलियां स्कूल टाइम में ही चुदाई करवा चुकी थीं.
हमारे इधर ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलेज आदि जाने का मौका ही नहीं मिलता है.
स्कूल के बाद घर में रहकर काम सीखो वाली प्रथा है और उसके बाद शादी कर दी जाती है.
ठीक यही स्थिति मेरी भी थी.
मुझे चुदाई का कोई भी मौका नहीं मिल रहा था क्योंकि गांवों में रहने वाले लोग जानते हैं कि यहां किस तरह का माहौल है.
कहीं भी बाहर आ-जा नहीं सकते हैं सिवाय पड़ोसी के घर … या परिवार के अन्य घरों में.
ज्यादातर तो जिस पड़ोस के घर में बड़ा लड़का रहता है, वहां भी जाने नहीं देते हैं.
इसके अलावा लड़की की कोई सहेली है, तो वह वहां जा सकती है.
गोविंद की बहन कपड़े सिलाई का काम करती थी तो इस कारण हमारा और बाकी सब का उनके घर आना जाना लगा रहता था.
मेरे घर में हम 2 बहनें हैं और 2 भाई हैं. सबसे बड़ी बहन की शादी हो चुकी है और मेरी अभी तक नहीं हुई है.
मैं सबसे छोटी हूँ और मेरे ऊपर मेरे दो भाई थे.
इस कारण पशु चराने हम दोनों ही जाते थे.
जब भी मैं गोविंद के घर जाती थी, तो गोविंद मेरे बूब्स और पिछवाड़ा देखता रहता था.
यह मैंने कई बार नोटिस किया था और मुझे भी इस सब में मजा आता था.
इसी लिए मैं उससे कभी भी कुछ नहीं कहती थी.
शुरू शुरू में एक दूसरे को देखते रहने के अलावा कुछ भी नहीं कर पाए थे क्योंकि घर में बाकी लोग भी रहते थे.
काफी समय बाद जाकर हमें चुदाई का मौका मिला था, जिसमें मुझे काफी ज्यादा मजा आया था.
यही सेक्स कहानी गोविंद ने पटल पर प्रकाशित होने भेज दी थी, जिसे आप सबने पढ़ कर मजा लिया था.
उस समय पशु चराते हुए ज्यादातर समय मैं उसके आस-पास ही रहती थी और वह मेरे बूब्स आदि देखता था.
तब मैं मुस्करा देती थी.
शुरू शुरू में मौका मिलने पर बूब्स मसलना और गांड पर मारना यह सब ही हुआ था, लेकिन हम दोनों इस सबसे आगे बढ़ना तय कर चुके थे.
फिर आखिरकार वह दिन भी आ गया था, जिस दिन मेरी प्यासी चूत में गोविंद का 3 इंच मोटा और लंबा लंड घुस गया था.
एक बार तो उसके लंड ने मेरी चूत में घुसते ही मेरे अन्दर चुदाई को लेकर दहशत जगा दी थी.
लेकिन जब गोविंद ने अपनी चुदाई के भूत को जब मेरी चुत में निकाल दिया था, तो चुत भी लंड की शैदाई हो गई थी.
शुरू शुरू में तो उसके लंड ने अन्दर आते ही मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया था और मुझे असहनीय दर्द हुआ था.
लौड़े का आकार इतना बड़ा था कि उसने चूत के मुँह को पूरी तरह से बंद कर दिया था.
ऐसा समझिए मानो कॉर्क ने बोतल का मुँह बंद कर दिया हो.
उस समय तो मुझे ऐसा लगा था कि अब जिंदगी में कभी भी चुदाई नहीं करवाऊंगी. इतना ज्यादा दर्द हुआ था.
थोड़ा गोविंद ने भी जल्दबाजी में सेक्स किया था, इस कारण मुझे बहुत ज्यादा दर्द हुआ था.
चूंकि खेत में किसी के भी आने का भी डर था और गोविंद ऐसा मौका हाथ से जाने भी नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने पशुवत चुदाई की थी.
खैर … चुत चुद कर फट गई थी और मुझे अच्छा लगा था.
गोविंद से मेरी चुदाई होने के बाद मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. उस दिन तो बारिश ने मुझे एक्सपोज होने से बचा लिया था, नहीं तो पता नहीं क्या होता.
बारिश ने मुझे ज्यादा चुदाई से भी बचाया था, नहीं तो गोविंद न जाने कितने राउंड और चुदाई करता.
चुदाई के बाद घर आई तो फिसल कर गिर गई थी का बहाना बनाया और बच गई.
मगर मुझको बुखार चढ़ गया था, जो अगले तीन दिन तक नहीं उतरा था. इसका एक फायदा यह भी हुआ था कि अपनी फटी हुई चुत को आराम देने का वक्त भी मिल गया था.
मेरी चूत में भी सूजन आ गई थी, जिसकी दस दिन तक गर्म पानी से सिकाई की थी तब चुत सामान्य हो पाई थी.
दूसरी बार चुदाई 15 दिन बाद हुई थी.
उस वक्त तक मैं सब दर्द भूल चुकी थी, बल्कि मेरी चुत में लंड के लिए चींटियां भी रेंगने लगी थीं.
मैं उसके साथ पशु चराने चली गई और खूब चुदी.
फिर अगले 3 साल तक गोविंद ने मुझे जमकर चोदा था और मेरी चूत और गांड के दोनों ही छेद काफी बड़े कर दिए थे.
फिर मेरी शादी हो गई थी.
शादी के बाद भी मुझे गोविंद के जैसा ही पति का भी बड़ा और मोटा लंड मिला था, इस कारण अब किसी और की मुझे जरूरत भी नहीं है.
शादी के बाद गोविंद से चुदाई बंद ही हो गई है.
मैं एक बात बताना भूल गई थी कि मेरी पहली चुदाई के बाद काफी समय बाद गोविंद ने मेरी मोटी और टाइट गांड मारी थी और उस समय एक जबरदस्त घटना हुई थी, जिसको मैं शॉर्ट में बताना चाहती हूं.
गोविंद ने एक बार खेत में मुझे घोड़ी बनाकर जबरदस्ती ही गांड मारने की कोशिश की थी.
उस समय हमारे पास तेल नहीं था तो सिर्फ थूक के दम पर ही गांड मारने की कोशिश में उसके लंड की ऊपर की चमड़ी जो कि मूत्र छिद्र से पास से जुड़ी हुई होती है, वह फट गई थी और खून निकलने लगा था.
उस दिन ही पहली बार मुझे पता चला था कि लड़कों के भी लंड के ऊपर की चमड़ी फटती है और उसमें से खून निकलता है.
उस कारण से अगले 15 दिन तक गोविंद को अत्यधिक दर्द रहा था.
इस कारण हम दोनों चुदाई नहीं कर पाए थे.
कोरोना के समय ही मेरी शादी तय कर दी थी.
वैसे मैं शादी की तारीख नहीं बताना चाहती हूं लेकिन आप सबको राजस्थानी शादी के रीति रिवाज के बारे में पता नहीं है इस कारण इस कहानी में आप सब कुछ जान पाओगे.
सबसे पहले बारात आती है और फिर चंवरी पर बिठाया जाता है.
वहां पर हाथ पकड़ कर एक दूसरे को अग्नि के समक्ष 7 फेरे लेने होते हैं.
उस समय उन्होंने मेरा और मैंने उनका हाथ जोड़ से बीच-बीच में थोड़ा सा दबाया भी था.
लॉक डाउन के कारण ज्यादा लोग नहीं थे और बारात भी छोटी सी ही थी.
फेरे लगभग रात को 9 बजे तक हो गए थे.
उसके बाद वे सब वापस अपने डेरे में चले गए.
डेरा मतलब घर से बाहर बने टैंट में, जहां बारात रुकती है.
फिर खाना खाया जाता है.
आधी रात को हमारे यहां सालियां जाकर जीजा जी को सुहागरात के लिए बुलाकर लेकर आती हैं.
उस समय हमारे दो कमरे के घर के बाजू में हमारे दो झोपड़े भी थे.
हम लोग काफी साधारण किसान परिवार से आते हैं, इसी वजह से घर में ज्यादा जगह नहीं थी.
घर के कमरों में मेहमान वगैरह आदि रुके हुए थे तो इस कारण हम दोनों को बाहर एक झोपड़े में ही सुहागरात मनानी पड़ी थी.
दोस्तो, मैं इधर आपको अपने पति का परिचय दे देती हूँ.
उनका नाम महेंद्र चौधरी है.
वर्तमान में उनकी उम्र 23 साल है और वे मेरी ही उम्र के हैं.
शादी के समय उनकी उम्र भी 21 साल थी और मेरी उम्र भी 21 साल ही थी.
फिर आधी रात को मेरी एक चचेरी बहन और मेरी सगी बड़ी बहन, एक मामा की लड़की मिल कर मेरे पति को उस जगह लेकर आईं, जहां सुहागरात मनाई जानी थी.
वहां पर दूल्हे को पहले खाना खिलाया जाता है और थोड़ी बहुत मस्ती की जाती है.
उधर पानी से भरा हुआ एक जग रखा जाता है ताकि रात को प्यास लगने पर पानी पी सकें.
उस समय तक मैं उस सुहागरात वाले झोपड़े में नहीं थी.
मेरे पति को वहां छोड़कर मेरी बहनें मेरे पास आईं.
मेरी सगी बहन ने कहा कि अब चलो!
मैं उस समय लाल सुर्ख जोड़े में थी.
मेरी बड़ी बहन और मेरी चचेरी बहन ने मुझे साथ लिया और सुहागरात वाली जगह लेकर गईं.
वे लोग थोड़े बहुत रीति रिवाज करके मुझे वहीं मेरे पति के पास चुदने के लिए छोड़कर कर बाहर आ गईं.
उन सभी के जाते ही मेरे पति खड़े हुए और उन्होंने उस झोपड़े का दरवाजा बंद कर दिया.
अन्दर से चिटकनी के नाम पर एक बांस लगा दिया और वे मेरे पास आ गए.
उन्होंने मुँह से बोलने की रस्म शुरू की लेकिन मुझको मेरी बहनों ने पहले ही मना किया था कि जब तक मुँह बुलाई का सगुन नहीं दे, तब तक मत बोलना और रात को जब वे चुदाई करने को बोलें तो करवा लेना.
वैसे मेरी चचेरी बहन को तो पता था कि मैं पहले ही गोविंद से चुदाई करवा चुकी थी लेकिन मेरी सगी बहन को यह सब पता नहीं था.
मेरे पति ने सबसे पहले मेरा घूंघट उठाया लेकिन मैंने उन्हें घूँघट ऊपर नहीं उठाने दिया.
थोड़ी देर बाद मुँह बुलाने या मुँह दिखाने की रस्म होने के बाद उन्होंने घूंघट उठाया और मेरे गालों पर किस किया.
उस समय मैं थोड़ी सी नर्वस थी.
फिर उन्होंने मुझे चारपाई पर बिठा दिया और वे भी मेरे पास में बैठ गए.
काफी देर तक इधर-उधर की बातें हुईं.
उन्होंने मेरा नाम पूछा और कितने तक पढ़ाई की है, क्या करती हो आदि सब कुछ पूछा.
मैं धीरे-धीरे सब कुछ जवाब देती रही.
लेकिन मुझे थोड़ी सी चिंता सताने लगी कि अपने पति को चुत की सील के बारे में पता न चले, यह कैसे रोक पाऊंगी. कहीं उन्हें पता चल गया तो क्या होगा?
लड़का किसी से भी सेक्स कर ले, फिर भी उसका पता नहीं चलता मगर लड़की एक बार चुदाई करवा ले तो उसका पता चल जाता है.
मेरे सामने भी अब यही समस्या थी.
दोस्तो, अपनी फटी हुई चुत को सुहागरात में पति के लंड के सामने किस तरह से मैंने बचाया और अपनी सुहागरात मनाई. यह सब अगले भाग में लिखूँगी.
फर्स्ट नाईट आफ्टर मैरिज स्टोरी पर आप मुझे अपने मेल व कमेंट्स भेज सकते हैं.
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