दोस्त के पापा की रांड बनकर गांड मरवाई

Views: 0 Category: Gay Sex Stories By rahulkr15102444 Published: September 16, 2026 📖 14 min read
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न्यू गे बॉय सेक्स स्टोरी में मैं लड़कियों जैसा लड़का हूँ. मैं अपने दोस्त के पापा से मिला तो मेरी गांड में कुछ होने लगा. मैं अंकल से मिलने को बेचैन हो गया.

नमस्ते दोस्तो, मैं राहुल कुमार, कानपुर यूपी से हूँ.
मैं हमेशा से इस साइट का दीवाना रहा हूँ.
मैं रोज़ रात को सोने से पहले सेक्स स्टोरी पढ़ता हूँ और मुझे सेक्स कहानी को पढ़ते हुए लंड हिलाने में बहुत मज़ा आता है.

मैं आज आपको अपनी लाइफ़ की रियल न्यू गे बॉय सेक्स स्टोरी बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने अपने बेस्ट फ्रेंड के पापा से गांड चुदवाई, जो कि मेरे मकान मालिक भी थे.

मेरी उम्र 21 साल की है और मैं एक दुबला-पतला बिल्कुल गोरा लड़का हूँ, मेरी बॉडी एकदम लड़कियों जैसी है.
मेरे दोस्त भी बोलते हैं कि यार तुम जिम जॉइन करके कुछ बॉडी-शॉडी बना लो, नहीं तो शादी बाद बीबी देगी नहीं तुझे!

मैं भी इस तरह की बात को हंस कर टाल देता था.
मेरे जिस्म पर लड़कियों की तरह ही एक भी बाल नहीं था, सिर्फ़ हल्की-हल्की मूँछें आनी शुरू हुई थीं.

मैं एक गरीब घर का लड़का हूँ और मेरी मॉम के जाने के बाद मेरे पापा का अफ़ेयर एक पड़ोस की औरत से चलने लगा था.
कानपुर में मेरी फ़ैमिली में मेरे और मेरे पापा के अलावा और कोई नहीं है.

ये गे सेक्स कहानी आज से एक साल पहले की है, जब मैं 12वीं पास करने के बाद दिल्ली जॉब करने आया था.
इधर मैंने एक सस्ता सा कमरा किराए पर ले लिया और जॉब सर्च करने लगा.

जल्दी ही मुझे एक कॉल सेंटर में जॉब मिल गया.
उधर मेरी सैलरी कुछ ख़ास नहीं थी लेकिन दिल्ली जैसी जगह में बिना रोजगार के कैसे रह सकता था.
मैं उस जगह पर काम करना शुरू कर दिया और जल्दी ही मेरा वहां पर एक लड़का बहुत अच्छा दोस्त बन गया.

उसका नाम निखिल था.
वह मुझसे 4-5 साल बड़ा था, लेकिन नेचर का बहुत अच्छा था.

निखिल एक अमीर बाप का बेटा था और टाइम पास करने के लिए जॉब करने आता था.
वह काम पर उतना ध्यान नहीं देता था, उसको तो सिर्फ़ कार से ऑफ़िस आना और लड़कियों पर लाइन मारने में ही मजा आता था.

मैं अपनी सैलरी और गरीबी से परेशान रहता था.

एक दिन निखिल ने मुझसे पूछा- क्या हुआ, तुम परेशान क्यों रहते हो?

मैंने उसको सब बात बताई, तो उसने कहा- दिल्ली-एनसीआर में मेरे पापा के 4 हाउस हैं, जो उन्होंने रेंट पर दे रखे हैं. तुम उनमें से किसी एक घर में रह लेना. मैं पापा से कह दूंगा तो वे थोड़ा रेंट कम कर देंगे.
यह सुनकर मैं ख़ुश हो गया.

फिर अगले ही दिन मैंने अपने उस कमरे से अपना सारा सामान शिफ़्ट कर दिया.

कुछ दिन ऐसे ही बीते.

उसके बाद निखिल का बर्थडे आया तो बहुत बड़ी पार्टी रखी गई.
निखिल ने मुझे भी इनवाइट किया था.

दिल्ली के बहुत सारे लीडर्स आदि उस पार्टी में आए थे क्योंकि उसके पापा पॉलिटिशियन थे.

उसके पापा ने शायद इतनी बड़ी पार्टी इसी लिए रखी थी ताकि उनके मिलने वाले सारे लोग आकर पार्टी में शिरकत करें.
मुझे निखिल की उस पार्टी में बहुत शर्म आ रही थी क्योंकि मुझे छोड़कर सबने बहुत अच्छे और फ़ैंसी कपड़े पहने थे.

कुछ देर बाद निखिल ने मुझे अपने पापा से मिलवाया.
मैंने अंकल को देखा तो वे काफी हैंडसम लग रहे थे.
वे सफेद कुर्ता और पजामा पहने हुए थे.

मैंने उनको देखते ही उनके पैर छू लिए.
निखिल के पापा ने कहा- अरे बेटा, क्या कर रहे हो ये?

यह कहते हुए उन्होंने मुझे उठा कर अपने गले से लगा लिया.
मुझे उनके ऐसा करने से पता नहीं क्यों बहुत अच्छा लगा और मेरे जिस्म में भी कुछ-कुछ होने लगा.

उनकी हाइट लगभग 6 फ़ीट थी और उनकी उम्र 55-56 की रही होगी.

फिर अंकल चले गए और मैंने निखिल से उसकी मॉम के बारे में पूछा.
तो उसने बताया कि उसकी मॉम की 2 साल पहले ही डेथ हो चुकी है.
उसकी फ़ैमिली में अब सिर्फ़ निखिल और उसके पापा ही थे और निखिल की एक बड़ी सिस्टर थी, जिसकी शादी हो चुकी थी और वह अपने हसबैंड के साथ यूएस में रहती थी.

पार्टी शुरू हुई, सब लोग एन्जॉय कर रहे थे.
निखिल भी अपने बाकी दोस्तों के साथ डांस करने लगा.

उसने मुझे अपने पास बुलाया.
लेकिन मैंने मना कर दिया क्योंकि मुझे डांस करना नहीं आता था.

मैं बार-बार निखिल के पापा अंकल को ही देखे जा रहा था क्योंकि उन्होंने मेरे साथ गरीब समझ कर भी कोई भेदभाव नहीं किया था.
फिर जब से उन्होंने मुझे हग किया था, तब से वे मुझे और अच्छे लगने लगे थे.

कुछ घंटों बाद पार्टी ओवर होने लगी और लोग कम होते चले गए तो मैं भी निखिल को बोलने गया कि मैं अब चलता हूँ, तो उसने हां कह दिया.

फिर मैं अपने रूम पे आ गया और रात में सोने की कोशिश करने लगा.
लेकिन मुझे अंकल की याद आने लगी.

उस वक्त मेरा हाथ अपने-आप ही मेरी गांड पर चला जाता और अंकल के बारे में सोचकर मैं अपनी गांड सहलाने लगता.

फिर मैंने एक बार फिर से अंकल से मिलने का सोचा, क्योंकि मेरा ध्यान अंकल से हट ही नहीं रहा था.

कुछ दिन ऐसे ही बीत गए और ऑफ़िस में मैंने निखिल के फ़ोन से उसके पापा का नंबर ले लिया, उसको बिना बताए और अपने फ़ोन में सेव कर लिया.
मैं शाम को अपने घर आया और सोच रहा था कि कैसे शुरू करूँगा और क्या बोलूँगा अंकल को … यह सब सोच कर मेरा दिल भी ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.

फिर मैंने हिम्मत जुटाई और अंकल को व्हाट्सऐप पर ‘हाय’ लिख कर भेज दिया.
अंकल की कोई प्रोफ़ाइल फ़ोटो नहीं दिख रही थी, शायद उन्होंने सैटिंग लगा रखी थी.

मेरा ‘हाय’ का मैसेज अंकल को डिलीवर्ड हो चुका था लेकिन अंकल ने अभी सीन नहीं किया था.
फिर मैं बार-बार अंकल की तरफ से मैसेज आने का वेट करने लगा.

काफ़ी टाइम हो गया.

क़रीब 2 घंटे बाद अंकल का मैसेज आया ‘येस, हू’ज़ दिस?’

मैं- अंकल, मैं राहुल … निखिल का दोस्त.
अंकल- अरे राहुल बेटा, हाउ आर यू?

मैं- आई एम फ़ाइन अंकल, आप कैसे हैं?
अंकल- मैं भी ठीक हूँ, एकदम चिल.

मैं- अंकल जी, थैंक्यू उस दिन मुझे आपने अपने बेटे जैसा रिस्पेक्ट दिया पार्टी में.

अंकल- नो थैंक्यू, तुम तो मेरे बेटे जैसे ही हो, माय डियर!
मैं- थैंक्यू अगेन.

अंकल- हैड डिनर?
मैं- येस अंकल जी.

मैं फिर से बोला- अंकल, आप बहुत अच्छे हो और आप बहुत ही ज़्यादा हैंडसम हो!

उसके बाद पता नहीं क्यों अंकल ने वह मैसेज नहीं देखा.
मेरा दिल ज़ोर से धक-धक कर रहा था.

अंकल ने अगले दिन लिखा- ओह बेटा, रियली? तुम भी बहुत हैंडसम हो और तुम एकदम लड़कियों जैसे लगते हो!
मैं- थैंक्यू अंकल.

अंकल ने एक लव की इमोजी भेज दी.

मैं- ओह अंकल, ये मेरे लिए?
अंकल- येस माय डियर.

मैं- थैंक्स अगेन अंकल जी, आप मुझे बहुत अच्छे लगे.
अंकल- तुम भी अच्छे हो डियर.

उसके बाद मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या लिखूँ, लेकिन मेरे मन में अंकल के लिए फ़ीलिंग आ चुकी थी और मैं सोच भी रहा था कि ऐसा भी होता है क्या? मैं थोड़े ना एक लड़की हूँ जो मैं अंकल के बारे में बार-बार सोच रहा हूँ, पर ना चाहते हुए भी मेरा मन अंकल की तरफ़ से हटा नहीं.

कुछ दिन ऐसे ही बीत गए, न तो मैंने अंकल को मैसेज किया और न अंकल ने मुझे.

फिर एक दिन निखिल ने मुझे बोला कि मैं उत्तराखंड में रानीखेत जा रहा हूँ, एक रिलेटिव की शादी में.
उसने मुझे भी चलने को कहा.
तो मैंने सॉरी बोलकर मना कर दिया क्योंकि वहां जाता तो मेरे पास अच्छे शादी में पहनने के लिए कपड़े नहीं थे.

रात में मैंने अंकल को हिम्मत करके मैसेज किया- अंकल, कैसे हैं आप?
अंकल थोड़ी देर बाद- ठीक हूँ बेटा, बस ड्रिंक कर रहा हूँ.

मैं- अकेले?
अंकल- येस माय डियर!

मैं- अंकल, निखिल तो चला गया, फिर आप अकेले कैसे रहोगे? बोर हो जाओगे न!
अंकल- हम्म.

मैंने सोचा यही सही मौका है अंकल के क़रीब जाने का … क्योंकि जिस दिन से पार्टी में अंकल ने मुझे हग किया था, मैं उस दिन से गांड चुदाई की स्टोरी और सेक्स वीडियो देखने लगा था, तो मेरा अंकल से चुदाने का बहुत मन करने लगा था. इसलिए मैंने ये सही मौका समझा और …

मैं- कोई बात नहीं अंकल, आपने मुझे अपना बेटा माना है. अगर आप चाहो तो मैं आ सकता हूँ.

अंकल- ओह रियली? तुम सच में मेरे साथ रहोगे जब तक निखिल ना आ जाए?
मैं- येस अंकल जी, क्यों नहीं मैं आपकी ख़ूब सेवा करूँगा, आपके पैर की मालिश भी!

अंकल- अरे-अरे, नहीं ऐसी बात नहीं करते बेटा!
‘अरे क्यों नहीं अंकल?’

अंकल ने बात बदली और लिखा- तुम मेरे कौन से वाले फ्लैट में हो?
मैं- द्वारका वाले में.
अंकल- वेट … सेंडिंग ड्राइवर टू पिक यू.

इतना सुनते ही मेरा दिल ज़ोर से धक-धक करने लगा … और एक अजीब सी मस्ती दिमाग पर छाने लगी.

मैं- ओके, थैंक्यू.

मैं फिर धीरे से बोला- आप ख़ुद आ जाओ ना प्लीज़?
अंकल- ओके, डन.

मेरा दिल धक-धक किए जा रहा था.

क़रीब 45 मिनट के बाद बिल्डिंग के नीचे कार रुकने की आवाज़ आई.
मैं बाहर देखा तो अंकल कार से बाहर आ रहे थे.

मैंने झट से रूम लॉक किया और नीचे चला गया.
अंकल लोअर में थे और ऊपर एक टी-शर्ट.
मैंने अंकल के पैर छू लिए.

उस वक्त मुझे ऐसी फीलिंग आई मानो एक पत्नी अपने पति के सुहागरात में पैर छूती है.
अंकल- तुम गाड़ी में बैठो, मैं आता हूँ.

अंकल अन्दर चले गए और उस आदमी से मिले जो बिल्डिंग को मैनेज करता था.
फिर थोड़ी देर बाद वे कार में आए और हम दोनों निकल पड़े.

रास्ते में बस हमारी नॉर्मल बात ही हुई.
वे पूछते रहे कि कहां से हो, घर में कौन-कौन है कानपुर में, यही सब.

हम दोनों अंकल के महल पहुंच गए.
अंकल ने मुझे अपने बेडरूम दिखाया और वे मुझसे कमरे में जाने को बोले.

उन्होंने नौकर को गेट क्लोज़ करके डॉग को खाना देकर सोने को बोल दिया और सीधा रूम में आ गए.

अंकल आते ही मुझे हग कर लिया.
मुझे लगा उन्होंने ये नॉर्मल हग किया है.

लेकिन वे मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर मुझे किस करने लगे.
मुझे अजीब लगा, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा.

आख़िर मैं भी तो यही चाहता था, लेकिन मेरा दिल धक-धक कर रहा था.

अंकल- आई लव यू जिस दिन तुमने मुझे मैसेज किया है, मैं तुम्हारे लिए पागल हूँ. मैं जानता हूँ तुम भी मुझे चाहते हो!
मैं- अंकल, मुझे आप बहुत अच्छे लगते हो, लेकिन क्या ये सब करना ठीक रहेगा?

अंकल- सब ठीक रहेगा, मैं तुमसे प्यार करता हूँ. वैसे भी मेरी वाइफ़ के मरने के बाद से मैं अकेला हूँ. तुम मेरी वाइफ़ बन जाओ, तुम्हें किसी चीज़ की कमी नहीं होगी.
मैं- आई लव यू डार्लिंग!

अब मैं भी मज़े लेना चाहता था तो अंकल को मना नहीं कर पाया.

फिर उन्होंने बोला- हां तो तुम क्या कह रही थी जान!
जैसे ही उन्होंने मुझे लड़की समझ कर संबोधित किया, मेरी गांड में एक अजीब सी खुजली पैदा हो गई.

मैं- हनी, मैं आपकी बॉडी की मालिश कर दूँ?
अंकल- नहीं जान तुम मेरी बीबी हो, अब तुम मालिश नहीं, प्यार करो!

अंकल ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए और मैंने अंकल के.

क्या मस्त बॉडी थी अंकल की … एकदम मस्त चौड़ी छाती, एकदम गोरे और 6 फ़ीट लंबे मर्द.
वे भी मेरी लड़कियों जैसी बॉडी देखकर पागल हो गए.

अंकल- क्या तुम्हारी गांड कुँवारी है?
मैं- यस हनी!

अंकल- आई लव यू.
‘आई लव यू टू बेबी!’

अंकल ने मुझे अपनी बांहों में ले लिया और बेड पर लिटा लिया.
अंकल की बॉडी की स्मेल से मैं और पागल हो रहा था.
मैं सोच रहा था कि कितने मस्त मर्द हैं अंकल जी!

कुछ देर तक अंकल मेरी बॉडी को किस करते रहे, मेरे बूब्स मसलते रहे.
फिर उन्होंने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरी गांड की तरफ़ चले गए.

अंकल गांड को देखते ही बोले- आह क्या मस्त गांड है तुम्हारी … ऐसी चिकनी गोरी गांड तो लड़कियों की भी नहीं होती है!

मैं- अब ये आपकी है हनी.
अंकल- अब रहा नहीं जा रहा … क्या मैं अब ले लूँ इसे?
मैं- येस प्लीज़.

अंकल उठे और कोई ऑयल लाकर आए और मेरी गांड की छेद में लगाने लगे.
उन्होंने अपने लंड पर भी तेल लगा लिया.

फिर लंड को गांड के छेद पर सैट करके पुश किया लेकिन उनका लंड गांड में नहीं गया.

शायद अंकल का लंड मोटा और लंबा था इसलिए ऐसा हुआ … और मेरी भी सीलपैक थी.

अंकल- थोड़ी सी और टांगें फैला लो!
मैंने वैसे ही पेट के बल लेटे हुए ही टांगों को फैला लिया.

अंकल ने फिर से ट्राई किया तो अंकल का लंड अन्दर चला गया और मुझे दर्द हुआ, तो मैं कराहने लगा.
इतने में अंकल ने एक और धक्का मारा और इस बार उनका पूरा लंड चला गया.

मुझे बहुत दर्द हुआ, लेकिन अंकल की वजह से मैंने बर्दाश्त कर लिया.

अंकल- क्या मस्त गांड है तेरी यार, सच में … मजा आ गया!

मैं- जान, बहुत दर्द हो रहा.
अंकल- थोड़ी देर बर्दाश्त करो, फिर मज़ा आएगा.

अंकल वैसे ही रुके रहे और मेरी बॉडी पर किस करते रहे.
जब मेरा दर्द कम हुआ तो मैं अपनी गांड हिलाने लगा.
अब उन्होंने भी लौड़े को अन्दर बाहर करना आरंभ कर दिया.

मुझे थोड़ी देर दर्द हुआ और फिर सच में मज़ा आने लगा.

अभी भी दर्द हो रहा था, लेकिन वह दर्द अब अच्छा लगने लगा था.

अंकल- अब कैसे लग रहा, मेरी जान?
मैं- अब अच्छा लग रहा है हनी … लेकिन कमर में दर्द हो रहा है!

अंकल- वेट.
अंकल अब अपनी गांड हिलाने की स्पीड तेज़ कर दी और मुझे तेज़-तेज़ चोदने लगे.

अंकल उठे और मुझे पलट दिया. मेरे पैर को ओपन कर दिया और ऊपर करके फैला दिया, फिर मेरे ऊपर आकर लंड अन्दर डालकर मुझे चोदने लगे.

इस बार लंड जल्दी चला गया और मुझे भी अच्छा लगने लगा.
अंकल मुझे ऊपर से चोद रहे थे अपनी गांड हिला-हिलाकर और आह आह कर रहे थे.

अंकल- तुम मस्त माल हो तेरी गांड के आगे सब कुछ फ़ेल है.
मैं- आप बहुत अच्छे हो जान!
मैं उनकी छाती को सहलाते हुए बोला.

अंकल अब मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोद रहे थे.
मैं अपने दोनों हाथों से टांग ऊपर किए हुए अंकल की गांड सहला रहा था.

अंकल- ओह जान अब मैं तेरी रोज़ लूँगा … बोलो, दोगी ना तुम?
मैं- मैं भी आपको रोज़ देना चाहता हूँ, लेकिन निखिल के आने के बाद?

अंकल- अरे मेरे दो फ़ार्महाउस है, वहां ले जाकर तुझे चोदूँगा और बहुत प्यार करूँगा.
मैं- आई लव यू हनी.

मैं अंकल की छाती पे किस करता और अंकल गांड सहलाता.

मैं दो बार अपने लंड से पानी छोड़ चुका था लेकिन अंकल मुझे चोदे जा रहे थे.
इतने में कुछ देर बाद अंकल ने स्पीड तेज़ की और अपना सारा पानी मेरे बाहर निकाल दिया और टिशू पेपर से साफ़ कर लिए.

मैं- आपने पानी अन्दर क्यों नहीं छोड़ा?
अंकल- तुम्हें अच्छा लगता?
मैं- हां.
अंकल- ओके, नेक्स्ट राउंड में.

मैं- अभी और लोगे आप?
अंकल- हां आज पूरी रात लूँगा.

मैं शरमाते हुए अंकल की सीने से लग गया.

कुछ देर बाद अंकल ने पूछा- तुम रेंट पे करते हो क्या उस रूम का?
मैं- येस.

अंकल- अब देने की ज़रूरत नहीं. मैं बोल दूँगा, वह तुमसे रेंट नहीं लेगा.
मैं- नहीं, रहने दो. किसी को शक हो जाएगा.

अंकल- मैं तुम्हें पैसे भेज दूँगा, वहीं तुम रेंट पे कर देना. वैसे किसी को शक नहीं होगा … और किसी चीज़ की ज़रूरत होगी तो बताना.

मैं- थैंक्यू. निखिल के आने के बाद हमारा मिलना कम हो जाएगा.
अंकल- नहीं फ़ार्महाउस पर ले जाऊंगा तुम्हें … और तुम चाहो तो फ़ार्महाउस पर हमेशा के लिए रह सकते हो.

मैं- नहीं, रूम ठीक है. नहीं तो निखिल को शक हो जाएगा.

फिर अंकल मुझे किस करते हुए मेरी गांड चाटने लगे और गांड की छेद पर अपनी जीभ लगाकर चाटने लगे.
मुझे मज़ा आने लगा. मैंने भी अंकल का लंड मुँह में लेकर चूसा.

उसके बाद अंकल ने मुझे दो बार और चोदा. उस रात अंकल ने मेरी गांड लगभग हर पोज़िशन में चोदी.
जब तक निखिल नहीं आया, मैं अंकल से उनके घर पर चुदता रहा.

निखिल के आने के बाद अंकल मुझे अपने फ़ार्महाउस ले जाते और ख़ूब प्यार से मेरी चुदाई करते.
अंकल भी मेरे दीवाने हो चुके थे और बहुत प्यार करते थे मुझे.
वे मुझे पैसे भी बहुत देते… लेकिन मैं पैसे लेने से मना कर देता था क्योंकि मुझे सिर्फ़ प्यार चाहिए था.

अभी भी मैं और अंकल बहुत चुदाई करते हैं और निखिल को आज तक पता नहीं चला.

प्यार में अंकल मुझे घुमाने भी लेकर जाते हैं … कभी मनाली, कश्मीर. वे 2 बार तो मुझे आउट ऑफ़ इंडिया भी ले गए हैं.
मैं अंकल से बहुत प्यार करता हूँ.

दोस्तो, आपको मेरी यह न्यू गे बॉय सेक्स स्टोरी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
rahulkr15102444@gmail.com

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